Saturday, July 4, 2026 3:38 am

देश में होने वाले हर 10 में से 1 अंग प्रत्यारोपण विदेशी लोगों का होता- रिपोर्ट

नई दिल्ली भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराने वालों को लेकर नई जानकारी सामने आई है। सरकारी डेटा के अनुसार, देश में होने वाले लगभग हर 10 में से 1 अंग प्रत्यारोपण विदेशी लोगों का होता है। नैशनल ऑर्गेन एंड टिश्यू ट्रांस्पालांट ऑर्गेनाइजेशन ने बताया कि साल 2023 में भारत में कुल 18,378 ट्रांस्प्लांट हुए थे। इनमें से 42 लोगों को एक से ज्यादा अंग मिले। यानी कुल मिलाकर 18,336 लोगों ने अंग लिए। इनमें से 1,851 लोग (यानी लगभग 10%) विदेशी थे। विदेशी लोगों के अंग प्रत्यारोपण दिल्ली (1,445), राजस्थान (116), पश्चिम बंगाल (88), उत्तर प्रदेश (76), तेलंगाना (61), महाराष्ट्र (35), कर्नाटक (15), गुजरात (11), तमिलनाडु (3) और मणिपुर (1) में किए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे ज्यादातर मरीज पड़ोसी देशों से आते हैं जहां अंग प्रत्यारोपण की अच्छी सुविधाएं नहीं हैं या अभी शुरूआती दौर में हैं, जैसे बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार। भारत में अंग प्रत्यारोपण कराने वाले ज़्यादातर विदेशी पड़ोसी देशों से आते हैं, लेकिन कुछ विकसित देशों जैसे अमेरिका और ब्रिटेन से भी आते हैं। ये लोग जीवित व्यक्ति से अंग लेना पसंद करते हैं क्योंकि भारत में इस प्रक्रिया की कीमत उनके देशों के मुकाबले दसवें हिस्से से भी कम होती है। लीवर ट्रांस्प्लांट सर्जन और मैक्स सेंटर फॉर लीवर एंड बिलियरी साइंसेज के चेयरमैन डॉक्टर सुभाष गुप्ता ने बताया कि उनके सेंटर में करीब 30 प्रतिशत मरीज विदेशी होते हैं। समझिए पूरी प्रक्रिया अंग प्रत्यारोपण में किसी जीवित या मृत व्यक्ति (दानदाता) से अंग निकालकर उसे जरूरतमंद मरीज (ग्राही) में लगाया जाता है। जो व्यक्ति अंग देता है उसे दानदाता कहते हैं और जो व्यक्ति अंग लेता है उसे ग्राही कहते हैं। एक जीवित व्यक्ति अपनी एक किडनी (क्योंकि एक किडनी शरीर के कामकाज के लिए काफी होती है), पैंक्रियास का एक हिस्सा (क्योंकि आधा पैंक्रियास पैंक्रियास के कामकाज के लिए पर्याप्त होता है) और लीवर का एक हिस्सा (क्योंकि दान किए गए कुछ हिस्से कुछ समय बाद फिर से बन जाते हैं) दान कर सकता है। दूसरी तरफ, एक मृत या ब्रेन डेड व्यक्ति कई अंग और टिश्यू दान कर सकता है, जैसे दिल, फेफड़े, लीवर, किडनी, आंतें और कॉर्निया। मरने के बाद अंग दान मुश्किल अंगदान के क्षेत्र में काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन मोहन फाउंडेशन की पल्लवी कुमार ने कहा कि भारत में मरने के बाद अंग दान दुर्लभ है और ऐसे दाताओं से निकाले गए अंग प्राप्त करने के लिए भारतीयों को वरीयता दी जाती है। उन्होंने कहा कि विदेशियों से जुड़े अधिकांश प्रत्यारोपण जीवित दाता प्रत्यारोपण हैं। NOTTO डेटा भी इसी रुझान को दर्शाता है। इसमें दिखाया गया है कि भारत में 2023 में हुए 1,851 विदेशी प्रत्यारोपणों में से केवल नौ में ही मृतक दाता से अंगदान शामिल था। विदेशियों के लिए भी हैं सख्त नियम विदेशियों के लिए जीवित दाता से अंग प्रत्यारोपण कराने के सख्त नियम हैं। प्रत्यारोपण की इजाजत देने से पहले कई स्तरों पर जांच की जाती है कि डोनर मरीज का खून का रिश्तेदार है या नहीं। यह बात लीवर प्रत्यारोपण सर्जन और मेदांता-द मेडिसिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर ट्रांसप्लांटेशन एंड रीजेनरेटिव मेडिसिन के चेयरमैन डॉक्टर एएस सोइन ने बताई। हाल ही में विदेशी नागरिकों के साथ अंग प्रत्यारोपण में व्यावसायिक लेन-देन की खबरें आई थीं, जिसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे सभी अंग प्राप्तकर्ताओं की एक राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) आईडी बनाएं, चाहे वह जीवित दाता से हो या मृतक दाता से अंग प्रत्यारोपण हो।   recent visitors 86

प्रेगनेंसी में सोडा और कोल्ड ड्रिंक्स सेहत को पहुंचा सकते हैं भारी नुकसान, जानें कारण

प्रेग्नेंसी का समय हर महिला के लिए खास होता है। इस समय महिला को हेल्दी डाइट लेनी चाहिए जिससे उसकी हेल्थ और बच्चे की हेल्थ अच्छी रहे। प्रेगनेंसी में महिलाओं को काफी हॉर्मोनल बदलाव होते रहते हैं, जिसका असर महिला के खाने-पीने की आदत और मूड पर भी पड़ता है। महिला को प्रेगनेंसी के समय कई बार तीखा, मीठा खाने या आइस्क्रीम, चॉकलेट, सोडा जैसी चीजें खाने-पीने का करता है। सोडा शरीर के लिए काफी नुकसानदायक होता है। प्रेगनेंट महिला जब कुछ भी खाती है, तो इसका असर शिशु पर भी पड़ता है। सोडा पीने से शिशु की सेहत को भी नुकसान पहुंचता है। आइए जानते हैं प्रेगनेंसी में सोडा पीने के नुकसान के बारे में। एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि प्रेग्नेंसी के दौरान जो महिलाएं शुगरी ड्रिंक्स का सेवन करती हैं उनके होने वाले बच्चों में कई तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं. peer-reviewed journal Nutrients  में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान अधिक मात्रा में शुगरी ड्रिंक्स का सेवन करती हैं उन महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों पर इसका काफी बुरा असर देखने को मिलता है. यह सर्वे अप्रैल और जून 2022 और 2023 में किया गया. इस सर्वे में 4 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया. सर्वे के दौरान इन सभी गर्भवती महिलाओं को फ्रूट जूस, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसे फ्रिजी ड्रिंक्स, सोडा, जूस और दूध वाली ड्रिंक्स दी गई.  इस सर्वे के अंत में यह देखा गया कि जिन महिलाओं ने अधिक मात्रा में शुगरी ड्रिंक्स का सेवन किया उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज की समस्या से जूझना पड़ा. प्रेग्नेंसी में होने वाली डायबिटीज की समस्या को जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है. जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर बच्चे का वजन सामान्य से ज्यादा हो सकता है जिस कारण डिलीवरी के दौरान कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड सकता है. इसके अलावा जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर बच्चे का समय से पहले जन्म और पीलिया की दिक्कत भी हो सकती है. सर्वे के दौरान जिन महिलाओं ने हफ्ते में 3 बार शुगरी ड्रिंक्स का सेवन किया उनमें जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा 38 फीसदी ज्यादा पाया गया. साथ ही इन महिलाओं में जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का खतरा भी 64 फीसदी ज्यादा पाया गया.  सर्वे में यह भी पाया गया कि प्रेग्नेंसी के दौरान शुगरी ड्रिंक्स का सेवन ज्यादा करने से भ्रूण को खून की पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पाती जिस कारण उसकी ग्रोथ पर इसका काफी बुरा असर पड़ता है. साथ ही,  इसकी वजह से प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है. हफ्ते में चार बार इन शुगरी ड्रिंक्स का सेवन करने से मैक्रोसोमिया का खतरा भी काफी बढ़ जाता है, एक ऐसी स्थिति जिसमें नवजात शिशु औसत से बहुत बड़ा होता है. इस सर्वे के अंत में रिसर्चर्स ने कहा कि प्रेग्नेंसी में बहुत अधिक मात्रा में शुगरी ड्रिंक्स का सेवन करने से जेस्टेशनल डायबिटीज और जेस्टेशनल हाइपरटेंशन की समस्या का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. साथ ही इससे मैक्रोसोमिया की समस्या का भी सामना करना पड़ता है.   रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि महिलाएं अपने खानपान का खास ख्याल रखें और हेल्दी चीजों का ज्यादा से ज्यादा मात्रा में सेवन करें. प्रेगनेंसी में सोडा पीने के नुकसान कैफीन सोडा में कैफीन की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक होती है। सोडा पीने से अनिद्रा की समस्या के साथ ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है। कैफीन का सीधा असर शिशु की सेहत पर भी पड़ता है। ज्यादा कैफीन के सेवन से बच्चे को पैदा होते समय सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है। सोडा पीने से महिला के शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है। वहीं इसके वजह से महिला को पेट खराब भी हो सकता है। चीनी की ज्यादा मात्रा सोडा में चीनी की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है, जो महिला और शिशु दोनों के लिए सही नहीं होती। प्रेगनेंसी में ज्यादा चीनी की मात्रा लेने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है और मिस्कैरिज की संभावना भी बढ़ती है। प्रेगनेंसी में चीनी ज्यादा खाने से शिशु में जन्म के समय भी कई समस्याएं हो सकती हैं। आर्टिफिशियल कलर सोडा को कलर देने के लिए इसमें आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत के लिए काफी हानिकारक होता है। इस आर्टीफिशयल कलर में मीठा होने के साथ फॉस्फोरिक एसिड होता है, जो प्रेगनेंसी के समय लेने से महिला की हड्डियों को कमजोर बना सकता है। नियमित सोडा पीने से शरीर में कैल्शियम प्रभावित होता है, जो बच्चे की हड्डियों को भी कमजोर करता हैं। recent visitors 153

सावन के तीसरे सोमवार पर इस विधि से करें पूजा, मनोवांछित फल की होगी प्राप्ति..

देवों के देव महादेव को सावन का महीना बेहद प्रिय है। इस पूरे महीने में शिव जी और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विवाहित महिलाएं अखंड सुहाग की प्राप्ति के लिए सावन का सोमवार व्रत किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। सावन का तीसरा सोमवार 05 अगस्तको है। अगर आप भी देवों के देव महादेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो सावन सोमवार पर भगवान शिव का राशि अनुसार अभिषेक करें। इससे सुख-शांति की प्राप्ति होती है। सावन के तीसरे सोमवार की डेट और शुभ मुहूर्त सावन का तीसरा सोमवार व्रत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर किया जाएगा। प्रतिपदा तिथि 05 अगस्त को है। पंचांग के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से लेकर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। सोमवार को पूजा करने का शुभ मुहूर्त रात्रि 07 बजकर 15 मिनट से लेकर 08 बजकर 17 मिनट के बीच रहेगा। राशि अनुसार अभिषेक     मेष राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर गंगाजल में शहद और सुगंध मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें।     वृषभ राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर पर कच्चे दूध से महादेव का अभिषेक करें।     मिथुन राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर गंगाजल में बेलपत्र मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें।     कर्क राशि के जातक सावन सोमवार पर शुद्ध दही से भगवान शिव का अभिषेक करें।     सिंह राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर गंगाजल में गुड़ मिलाकर देवों के देव महादेव का अभिषेक करें।     कन्या राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर गंगाजल में भांग के पत्ते मिलाकर शिवजी का अभिषेक करें।     तुला राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर पर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक करें।     वृश्चिक राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर गंगाजल में शहद मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें।     धनु राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर गाय के दूध से देवों के देव महादेव का अभिषेक करें।     मकर राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर गंगाजल में अपराजिता का फूल मिलाकर शिवजी का अभिषेक करें।     कुंभ राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर काले तिल मिश्रित गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करें।     मीन राशि के जातक सावन के तीसरे सोमवार पर गंगाजल में दूर्वा मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें।   recent visitors 116

सावन का तीसरा सोमवार, आज जरूर करें ये उपाय

सावन का तीसरा सोमवार व्रत 5 अगस्त 2024 को रखा जा रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हिंदू धर्म में सावन माह को पूजा पाठ के लिए अधिक शुभ माना गया है। इस दौरान चातुर्मास होने के कारण पूरी सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में होता है। इसलिए इस माह में सभी शुभ मांगलिक कार्यक्रम में भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है।   सावन के तीसरे सोमवार को बेहद खास माना गया है। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से सभी रुके हुए कार्यों को गति मिलती है। वहीं वैवाहिक जीवन खुशहाली के लिए सुहागिनें इस दिन व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के तीसरे सोमवार पर महादेव के 108 नाम जपने पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही मन से डर भय दूर होते हैं। इस दौरान कुछ खास उपाय करने से धन लाभ के योग भी बनते हैं। ऐसे में आइए इन उपायों के बारे में जान लेते हैं। पूजन विधि सावन के तीसरे सोमवार पर सुबह ही स्नान कर लें। इसके बाद पूजा स्थान पर सभी पूजन सामग्रियों को एकत्रित कर लें। इसके बाद शुभ मुहूर्त के अनुसार दूध से शिव जी का अभिषेक करें। घी का दीपक जलाएं। फिर उन्हें चंदन, फूल, बेलपत्र, भांग की पत्तियां, शमी के पत्ते और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीप अर्पित करें। अब शिव चालीसा का पाठ करें। यदि आपका व्रत है, तो सोमवार व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भोलेनाथ की आरती करें। सावन सोमवार पर करें ये तीन उपाय     धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर आप पैसों की तंगी का सामना कर रहे हैं, तो सावन के तीसरे सोमवार पर शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं। माना जाता है कि इससे धन आगमन के स्रोत बनते हैं।     सावन सोमवार पर गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करें। माना जाता है कि इससे कार्यों में सफलता के योग बनते हैं।     इस दौरान बेलपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शिव जी के 108 नाम     ॐ भोलेनाथ नमः     ॐ कैलाश पति नमः     ॐ भूतनाथ नमः     ॐ नंदराज नमः     ॐ नन्दी की सवारी नमः     ॐ ज्योतिलिंग नमः     ॐ महाकाल नमः     ॐ रुद्रनाथ नमः     ॐ भीमशंकर नमः     ॐ नटराज नमः     ॐ प्रलेयन्कार नमः     ॐ चंद्रमोली नमः     ॐ डमरूधारी नमः     ॐ चंद्रधारी नमः     ॐ मलिकार्जुन नमः     ॐ भीमेश्वर नमः     ॐ विषधारी नमः     ॐ बम भोले नमः     ॐ ओंकार स्वामी नमः     ॐ ओंकारेश्वर नमः     ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः     ॐ विश्वनाथ नमः     ॐ अनादिदेव नमः     ॐ उमापति नमः     ॐ गोरापति नमः     ॐ गणपिता नमः     ॐ भोले बाबा नमः     ॐ शिवजी नमः     ॐ शम्भु नमः     ॐ नीलकंठ नमः     ॐ महाकालेश्वर नमः     ॐ त्रिपुरारी नमः     ॐ त्रिलोकनाथ नमः     ॐ त्रिनेत्रधारी नमः     ॐ बर्फानी बाबा नमः     ॐ जगतपिता नमः     ॐ मृत्युन्जन नमः     ॐ नागधारी नमः     ॐ रामेश्वर नमः     ॐ लंकेश्वर नमः     ॐ अमरनाथ नमः     ॐ केदारनाथ नमः     ॐ मंगलेश्वर नमः     ॐ अर्धनारीश्वर नमः     ॐ नागार्जुन नमः     ॐ जटाधारी नमः     ॐ नीलेश्वर नमः     ॐ गलसर्पमाला नमः     ॐ दीनानाथ नमः     ॐ सोमनाथ नमः     ॐ जोगी नमः     ॐ भंडारी बाबा नमः     ॐ बमलेहरी नमः     ॐ गोरीशंकर नमः     ॐ शिवाकांत नमः     ॐ महेश्वराए नमः     ॐ महेश नमः     ॐ ओलोकानाथ नमः     ॐ आदिनाथ नमः     ॐ देवदेवेश्वर नमः     ॐ प्राणनाथ नमः     ॐ शिवम् नमः     ॐ महादानी नमः     ॐ शिवदानी नमः     ॐ संकटहारी नमः     ॐ महेश्वर नमः     ॐ रुंडमालाधारी नमः     ॐ जगपालनकर्ता नमः     ॐ पशुपति नमः     ॐ संगमेश्वर नमः     ॐ दक्षेश्वर नमः     ॐ घ्रेनश्वर नमः     ॐ मणिमहेश नमः     ॐ अनादी नमः     ॐ अमर नमः     ॐ आशुतोष महाराज नमः     ॐ विलवकेश्वर नमः     ॐ अचलेश्वर नमः     ॐ अभयंकर नमः     ॐ पातालेश्वर नमः     ॐ धूधेश्वर नमः     ॐ सर्पधारी नमः     ॐ त्रिलोकिनरेश नमः     ॐ हठ योगी नमः     ॐ विश्लेश्वर नमः     ॐ नागाधिराज नमः     ॐ सर्वेश्वर नमः     ॐ उमाकांत नमः     ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः     ॐ त्रिकालदर्शी नमः     ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः     ॐ महादेव नमः     ॐ गढ़शंकर नमः     ॐ मुक्तेश्वर नमः     ॐ नटेषर नमः     ॐ गिरजापति नमः     ॐ भद्रेश्वर नमः     ॐ त्रिपुनाशक नमः     ॐ निर्जेश्वर नमः     ॐ किरातेश्वर नमः     ॐ जागेश्वर नमः     ॐ अबधूतपति नमः     ॐ भीलपति नमः     ॐ जितनाथ नमः     ॐ वृषेश्वर नमः     ॐ भूतेश्वर नमः     ॐ बैजूनाथ नमः     ॐ नागेश्वर नमः   recent visitors 139