उन्नत बीजों की कमी पूरा करने के लिए 65 नए बीज केंद्र बनाए जाएंगे- शिवराज

भोपाल कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को भोपाल में प्रेसवार्ता में कहा कि केंद्र सरकार ने गुरुवार को दो बड़े फैसले लिए हैं। भारत  की कुल खाद्य तेल की आवश्यकता  2022-23 में 29.2 मिलियन टन थी, लेकिन हमारे यहां ऑइल सीड से खाद्य तेल का उत्पादन 12.7 बिलियन ही हो पाता है। बाकी की मांग पूरा करने के लिए हमको विदेशों पर या आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। इसको लेकर फैसला किया गया है कि आयात पर निर्भरता खत्म करके हम खाद्य तेलों में कैसे आत्मनिर्भर बने। इसलिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन तिहलन बनाया गया है। शिवराज ने कहा कि 10 हजार 103 करोड़ 38 लाख रुपए की लागत से हमारे यहां अभी जो ऑइल सीड्स हैं उनका उत्पादन काफी कम है और इसलिए सरकार उन्नत बीज किसानों को देगी। आईसीएमआर यह बीज बनाएगा। पहले ब्रीडर सीड्स बनाएंगे। उसे फाउंडेशन सीड फिर सरटीफाइड सीड बनाकर किसानों को फ्री में उपलब्ध कराए जाएंगे। पूरे देश में इसके लिए 600 कलस्टर बनाए जाएंगे। 347 जिले के 21 राज्यों में जहां भी ऑइल सीड्स का उत्पादन होता है उन राज्यों को विशेष रूप से लिया गया है, किसानों को इन कलस्टर में फ्री में बीज, उनको ट्रैनिंग, नई टेक्नोलॉजी कैसे खेती करे जिससे ज्यादा उत्पादन हो और वो जो उत्पादित करेंगे उसकी 100 % खरीदी की जाएगी, ऐसी सुविधाएं इस मिशन के अंतर्गत किसानों को दी जाएगी । बीच भंडारण इकाइयां भी बनाई जाएंगी हर साल 10 लाख हेक्टर पूरे देश में खेती की जाएगी। 7 साल में 70 लाख हेक्टर एरिया इस योजना के अंतर्गत दिया जाएगा, उन्नत बीजों की कमी पूरा करने के लिए 65 नए बीज केंद्र बनाए जाएंगे, 100 हमारे बीज केंद्र बनेंगे, बीजों को सुरक्षित रखने के लिए 50 बीज भंडारण इकाइयां भी बनाई जाएंगी और राज्यों पर हम ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जहाँ केवल एक फसल लेते हैं खरीफ की, इंटरक्रॉपिंग का भी उपयोग करेंगे, अलग-अलग फसलों के बीच में ये बीज, फसलें लगाई जा सकती हैं और पूरी खरीद किसानों से करेंगे, एक ये बड़ा फैसला कल हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार प्याज, दाल और चावल का बफर स्टॉक बना रही है। इनके दाम बढ़ने पर सरकार सस्ते में में उपलब्ध कराएगी।   किसान सम्मान निधि की राशि होगी कल ट्रांसफर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को महाराष्ट्र से किसानों के खाते में किसान सम्मान निधि की राशि ट्रांसफर करेंगे। उन्होंने बताया कि किसान सम्मान निधि के तहत 20 हजार करोड़ रुपए की राशि खातों में डाली जाएगी। कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने दो नई योजनाएं पीएम-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषि उन्नत योजना शुरू की है। उन्होंने बताया कि योजनाओं में एक लाख हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्रदेश सरकारें योजनाओं को अपने अनुसार चुन सकेगी। शिवराज ने कहा कि उनकी सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों को उनकी फसल का ठीक दाम देने के साथ प्राकृतिक खेती पर फोकस कर रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है। यह सूरजमुखी, मूंगफली और सायाबीन पर लागू है। इससे दाम बढ़ने से किसानों को फायदा होगा। सोयाबीन के दाम  500 रुपए बढ़ गए है। रिमोर्ट डिजिटल से फसल नुकसान का आकलन शिवराज ने बताया कि केंद्र ने डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की शुरुआत की है। इसके तहत रिमोर्ट डजिटल से फसल के नुकसान का आकलन किया जाएगा। इस तकनीक से आकड़ों में हेरफेर नहीं हो सकेगी। फसल की बुआई पर डिजिटल फोटो अपडेट होंगे। इसके लिए ड्रोन के साथ पांच बैटरी उपलब्ध कराई जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने जम्मू कश्मीर और हरियाणा चुनाव को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर और हरियाणा में भाजपा सरकार बना रही है। दोनों जगह भाजपा के पक्ष में माहौल बना है।   recent visitors 105

भाजपा सांसद और विधायक ने उठाए सवाल, राजस्थान-उदयपुर के सिटी पैलेस में राष्ट्रपति के दौरे पर विवाद

उदयपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उदयपुर के मेवाड़ राजघराने के राजमहल सिटी पैलेस में दौरे पर विवाद शुरू हो गया है। मेवाड़ राजघराने की ही राजसमंद सांसद महिमा कुमारी और नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह ने राष्ट्रपति के सिटी पैलेस दौरे पर सवाल उठाए हैं।गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को उदयपुर दौरे के दौरान मेवाड़ राजघराने के राजभवन सिटी पैलेस पहुंची थीं और उन्होंने सिटी पैलेस और मेवाड़ के इतिहास की प्रशंसा की थी। इसके बाद मेवाड़ राजघराने के नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह और उनकी धर्मपत्नी राजसमंद सांसद महिमा कुमारी ने सवाल उठाया कि मेवाड़ राजघराने की संपत्ति पर काफी समय से विवाद चल रहा है, ऐसे में भारत के प्रेसिडेंट का वहां दौरा करना कतई उचित नहीं है लक्ष्यराज सिंह के बुलावे पर पहुंची थीं राष्ट्रपति मेवाड़ राजघराने के लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के बुलावे पर राष्ट्रपति सिटी पैलेस पहुंची थीं। बता दें कि लक्ष्यराजसिंह की धर्मपत्नी निवृत्ति कुमारी उड़ीसा राजघराने से संबंध रखती हैं। इसी के चलते राष्ट्रपति सिटी पैलेस के दौरे पर पहुंची थीं, जिसके बाद मेवाड़ राजघराने में ही विरोध के स्वर बुलंद हो गए। दोनों ही भाजपा से विधायक और सांसद हैं ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि राष्ट्रपति के सिटी पैलेस में दौरे का विरोध करने वाले विश्वराज सिंह और महिमा कुमारी मेवाड़ राजघराने के सदस्य होकर राजसमंद और नाथद्वारा से सांसद और विधायक हैं और दोनों ही भाजपा से जनप्रतिनिधि चुने गए हैं, ऐसे में दोनों के द्वारा राष्ट्रपति के दौरे का विरोध करना बड़ा मुद्दा है। recent visitors 125

सामूहिक आत्मदाह करने की दी चेतावनी, छत्तीसगढ़-धमतरी में मानदेय नहीं मिलने पर भड़के सफाई कर्मचारी संघ

धमतरी. छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों में साफ-सफाई व्यवस्था के लिए अंशकालीन सफाई कर्मचारियों की नियुक्त की है। सफाई कर्मियों से सुबह दो घंटे और शाम को दो घंटा काम लिया जाता है, लेकिन धमतरी जिले में कार्यरत स्कूल सफाई कर्मियों को सिर्फ दो घंटे का ही मानदेय दिया गया है। जिसको लेकर स्कूल सफाई कर्मचारी संघ में काफी नाराजगी है। वहीं, जल्द मानदेय नहीं देने पर सामूहिक आत्मदाह करने की चेतावनी शिक्षा विभाग को दी है। स्कूल सफाई कर्मचारियों ने कुरुद बीईओ कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है। दरअसल, धमतरी जिले के शासकीय स्कूलों में करीब 14 सौ सफाई कर्मी कार्यरत है। सफाई कर्मियों ने बताया कि उन्हे वर्ष 2013-14 का मानदेय नहीं मिला है, जिसकी कुल राशि करीब 2.50 करोड़ रुपये है। बताया कि शिक्षा विभाग से कई बार शिकायत के बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। ऐसे में मानदेय के लिए उन्हें दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ रहा है। साथ ही उनका आरोप है कि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल प्रबंधकों पर दबाव डाल कर प्रमाण पत्र मंगाया जा रहा है कि सफाई कर्मचारियों द्वारा अतरिक्त काम नहीं किया गया है। वहीं, कर्मचारियों ने 5 अक्तूबर तक मानदेय नहीं मिलने पर 21 अक्तूबर को ग्राम कंडेल से पदयात्रा निकालकर जिला शिक्षा विभाग कार्यालय के सामने आत्मदाह करने के चेतावनी दी है। recent visitors 67

कार से गांजा तस्करी करते पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार, भेजा जेल

कोंडागांव जिला कोण्डागांव के थाना अनंतपुर पुलिस ने गांजा तस्करी करने वाले आरोपी कृष्णा साहू को गिरफ्तार किया है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि उमरकोट से कोण्डागांव की ओर जा रही लाल रंग की स्वीफ्ट कार (वाहन क्रं. सी.जी. 04 पी.ए. 1630) में अवैध मादक पदार्थ गांजा तस्करी की जा रही है। इस सूचना पर थाना प्रभारी अखिलेश धीवर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अमरावती वैभव पेट्रोल पम्प के सामने मेन रोड SH-26 पर घेराबंदी कर वाहन को रोका और तलाशी ली। तलाशी के दौरान आरोपी कृष्णा साहू उर्फ खाड़ु (उम्र 33 वर्ष), निवासी उमरकोट, उड़ीसा के कब्जे से 0.242 ग्राम गांजा बरामद हुआ, जिसकी कीमत करीब 2,500 रुपए आंकी गई। आरोपी को न्यायिक रिमाण्ड में भेजा गया है और वाहन को जप्त कर लिया गया है। इस पूरे ऑपरेशन में सायबर टीम सहित पुलिस के अन्य जवानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। recent visitors 54

स्कूलों से तीन करोड़ वसूली का बोर्ड ने भेजा फरमान, छत्तीसगढ़-कबीरधाम का टीचर्स एसोसिएशन विरोध में उतरा

कबीरधाम. छग माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीजी बोर्ड ) को दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षा आयोजित करने वाले संस्था के रूप में सभी जानते हैं, लेकिन वर्तमान में यह संस्था अपने एक  फरमान को लेकर खासा चर्चा में है। दरअसल बोर्ड ने विगत एक अक्तूबर को एक पत्र जारी किया है, जिसमें निर्धारित तिथि में ऑनलाइन एंट्री नहीं कर पाने वाले संस्था से पच्चीस हजार जमा करने का निर्देश दिया है। छग टीचर्स एसोसिएशन ने माध्यमिक शिक्षा मंडल के इस तुगलकी फरमान पर कड़ी आपत्ति करते हुए वापस लेने की मांग की है। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने बताया कि कक्षा नवमीं का नामांकन एवं दसवीं व बारहवीं के वार्षिक परीक्षा का आवेदन पत्र ऑनलाइन एंट्री करने के लिए 31 अगस्त तक निर्धारित किया गया था। प्रदेश के कई स्कूलों में एक-दो बच्चों का ऑनलाइन एंट्री छूट गया। इसके लिए बोर्ड ने डीईओ के माध्यम से 25 सितंबर तक उन स्कूलों की सूची मंगाया, जहां ऑनलाइन एंट्री के लिए बच्चे छूट गए हैं। सूची प्राप्त करते ही माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 3 से 6 अक्टूबर कुल चार दिन तक ऑनलाइन एंट्री के लिए पोर्टल खोलने का शुल्क प्रति स्कूल 25000 रुपये देने का फरमान जारी किया है। इस सूची में कबीरधाम जिले के 29 स्कूलों का नाम शामिल है। वहीं, पूरे प्रदेश में 1247 स्कूलों का नाम है। इस प्रकार अब प्रदेश के इन 1247 स्कूलों को प्रति स्कूल 25000 रुपये की दर से कुल तीन करोड़ 11 लाख 75 हजार रुपये विलंब शुल्क जमा करने के लिए कहा गया है। एक ओर प्रदेश सरकार स्कूली शिक्षा को निःशुल्क करने में लगा हुआ है। वहीं, दूसरी ओर बोर्ड करोड़ों की वसूली करने में मशगूल है। recent visitors 57

सांसद और संघर्ष समिति की बैठक में बनी सहमति, राजस्थान-बूंदी में राव सूरजमल हाड़ा की दोबारा बनेगी छतरी

बूंदी. बूंदी के तुलसी गांव में खंडित की गई पूर्व नरेश राव सूरजमल हाड़ा की छतरी अपने स्थान पर ही बनेगी। संघर्ष समिति के अक्षय हाड़ा ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष व कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला के साथ मीटिंग के बाद यह निर्णय हुआ है। छतरी का निर्माण प्रारंभ होगा। छतरी के पुनः निर्माण को लेकर गुरुवार शाम कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कैंप कार्यालय में एक बैठक हुई। जिसमें कलेक्टर कोटा रविंद्र गोस्वामी, कलेक्टर बूंदी अक्षय गोदारा, ओम बिरला के ओएसडी राजीव दत्ता, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की दिल्ली से आई टीम, कोटा विकास प्राधिकरण की टीम, संघर्ष समिति के अध्यक्ष ब्रिगेडियर भूपेश सिंह हाड़ा, उपाध्यक्ष अक्षय हाड़ा और अन्य सदस्य शामिल हुए। अक्षय हाड़ा ने एयरपोर्ट की ड्राइंग और अन्य डिटेल्स से सभी को अवगत कराते हुए कहा कि छतरी प्रस्तावित एयरपोर्ट के रनवे में रुकावट नहीं डाल रही है। यह रनवे से 300 मीटर दूर एप्रेन के पास आ रही है। गौरतलब है कि कोटा के प्रस्तावित ग्रीन एयरफील्ड एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहीत भूमि पर आ रही बूंदी के पूर्व नरेश राव सूरजमल हाड़ा की 600 साल पुरानी छतरी को 20 सितंबर को खंडित कर दिया गया था। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के विरोध जताने के बाद राज्य सरकार ने छतरी (मंदिर) को खंडित करने वाले तीन अधिकारियों को निलंबित भी किया था, लेकिन सर्वसमाज छतरी को उसी स्थान पर बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था। बैठक में छतरी के पुनर्निर्माण के निर्णय के बाद भूमिपूजन किया जाएगा। recent visitors 150

सिंगौरगढ़ किला, दमोह: मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर

भोपाल मध्यप्रदेश के दमोह जिले में स्थित सिंगौरगढ़ किला, रानी दुर्गावती के शासनकाल की महत्वपूर्ण धरोहर है। यह किला केंद्रीय संरक्षित स्मारक है। पहाड़ी पर स्थित यह किला अपनी अद्वितीय स्थापत्य कला और सामरिक महत्व के कारण सदियों से एक महत्वपूर्ण किलेबंदी के रूप में पहचाना गया है। सिंगौरगढ़ किला दमोह के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह किला पहाड़ी की चोटी पर बनाया गया है, जिसे कलचुरी राजवंश द्वारा निर्मित किया गया था। इस किले का महत्व बढ़ाने में कई राजवंशों का योगदान रहा है। समय-समय पर इसमें विभिन्न निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्य किए गए, जिनके अवशेष आज भी इस किले में देखे जा सकते हैं। सिंगौरगढ़ किले का ऐतिहासिक महत्व सिंगौरगढ़ किले का नाम इतिहास में विशेष रूप से रानी दुर्गावती के शासनकाल से जुड़ा हुआ है। इस किले की दीवारें और परकोटे इसे दुश्मनों से सुरक्षित रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित किए गए थे। इसके चारों ओर लगभग 8 किलोमीटर की लंबाई में फैला बाहरी परकोटा है, जो किले की बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करता था। किले के अंदरूनी हिस्से में भी एक परकोटा है, जिसे अन्तत: किलेबंदी के रूप में उपयोग किया जाता था। किले के भीतर रानी महल, विशाल जल कुंड, मंदिरों के अवशेष और अन्य स्थापत्य संरचनाएं हैं, जो इसके गौरवशाली इतिहास की गवाही देती हैं। किले का निर्माण पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किया गया है। इसमें बड़े अनगढ़ पत्थरों का उपयोग किया गया है और दीवारों को मजबूत बनाने के लिए चूना और मिट्टी का उपयोग किया गया है। किले के ऊपर विभिन्न संरचनाएं, जैसे रानी महल और अन्य स्थापत्य धरोहरें, इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। संरक्षण कार्य : अतीत को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास सिंगौरगढ़ किला संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल है। इसके संरक्षण का कार्य 4 चरणों में किया जा रहा है। प्रत्येक चरण में किले के विभिन्न भंग हिस्सों का जीर्णोद्धार कर इनका संरक्षण और पुनर्निर्माण किया जाएगा। इसमें मुख्यतः किले के बाहरी और आंतरिक दीवारों का संरक्षण, सीढ़ियों की मरम्मत, रानी महल की छत की मरम्मत और किले के अन्य संरचनाओं की मरम्मत का कार्य शामिल है। इसके लिए कुल 8.83 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। किले के महत्वपूर्ण हिस्सों की मरम्मत और संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में परियोजना के पहले चरण में 1 करोड़ 4 लाख रूपये के कार्य किये गये। पहले चरण में किले के मुख्य प्रवेश द्वार (हाती गेट) का संरक्षण कार्य पूरा किया गया। इस चरण में हाथी गेट के प्रवेश मार्ग की मरम्मत, रिटेनिंग दीवार का निर्माण, पुराने प्लास्टर को हटाकर नए प्लास्टर का कार्य और गुम्बद की मरम्मत भी शामिल थी। साथ ही किले के परिसर में सैंड स्टोन फ्लोरिंग और लाईम कांक्रीट कार्य भी किया गया। यह कार्य वित्त वर्ष 2023-24 में पूरा हुआ। भविष्य की योजनाएं और चरणबद्ध कार्य अगले चरण में रानी महल, किले की सीढ़ियों और कंगूरों की मरम्मत की जाएगी। बलुआ पत्थर के स्तंभों, पत्थर की बेंचों और अन्य स्थापत्य धरोहरों की भी मरम्मत की जाएगी। इस किले के संरक्षण कार्य का उद्देश्य इसे न केवल ऐतिहासिक रूप से सुरक्षित रखना है, बल्कि इसे पर्यटन के लिहाज से भी विकसित करना है, ताकि इसे मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल किया जा सके। प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहर का संगम सिंगौरगढ़ किला एक ऐतिहासिक स्थल होने के साथ प्राकृतिक सौंदर्य से भी परिपूर्ण है। यह किला सिंग्रामपुर के आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है, जो इसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा संगम बनाता है। किले के आसपास का दृश्य बहुत ही मनोहारी है और यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। पर्यटन और रोजगार के अवसर संरक्षण कार्य से किले को न केवल संरक्षित किया जा रहा है, साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं। किले के संरक्षण के साथ-साथ, इसके आसपास के क्षेत्रों में भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। इससे क्षेत्रीय पर्यटन विकास और आर्थिक उन्नति होगी। सिंगौरगढ़ किले का संरक्षण कार्य एक ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आने वाले वर्षों में यह किला मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जायेगा।   recent visitors 50