Sunday, July 5, 2026 3:10 am

‘स्वच्छता परमो धर्मः थीम सॉन्ग किया लॉन्च, छत्तीसगढ़-बिलासपुर में डिप्टी सीएम अरुण साव कार्यक्रम में पहुंचे

बिलासपुर. बिलासपुर में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘स्वच्छता परमो धर्मः’ थीम सॉन्ग का वीडियो लॉन्च कर दिया है। दरअसल, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बिलासपुर में ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा के राज्य स्तरीय समापन कार्यक्रम में ‘स्वच्छता परमो धर्मः’ थीम सॉन्ग का वीडियो लॉन्च किया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) द्वारा तैयार कराए गए। इस गाने के माध्यम से लोगों को अपने आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने, जागरुक और प्रेरित किया गया है। गाने में प्रदेश के शहरों और गांवों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए नागरिकों से जन भागीदारी बढ़ाने की अपील की गई है। गाने में प्रदेश के शहरों और गांवों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए नागरिकों से जन भागीदारी बढ़ाने की अपील की गई है। वीडियो सॉन्ग की रिलीज के दौरान विधायक श्री धरम लाल कौशिक, श्री धर्मजीत सिंह और श्री सुशांत शुक्ला, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक श्री कुंदन कुमार और सुडा के सीईओ श्री शशांक पाण्डेय भी मौजूद थे। recent visitors 121

दो दिनों बाद उत्तर और मध्य भागों में बरसेंगे बादल, छत्तीसगढ़ में फिर से होगी बारिश

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर यूटर्न ले लिया है। आगामी दो दिनों में प्रदेश के कई इलाकों में गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती है। इस बीच गर्मी, उमस और तेज धूप से लोगों को राहत मिलेगी। इस बार मानसून उत्तरी और मध्य भागों में मेहरबान रहेगा। इन भागों में गरज चमक के साथ वज्रपात होने की संभावना है। आज शुक्रवार को एक दो जगह पर हल्की से हल्की मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने की संभावना है। इसकी वजह से प्रदेश के कई जगहों पर गरज चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। मानसून सक्रिय होने से बारिश की गतिविधि बढ़ाने की संभावना है। इससे गर्मी और उम्र से लोगों को राहत मिलेगी। आज भी प्रदेश के एक-दो जगह पर हल्की से हल्की मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम एक्सपर्ट का कहना है कि प्रदेश में मानसून ने यूटर्न ले लिया है। इसके वजह से छह अक्टूबर से उत्तर और मध्य भागों में गरज चमक के साथ वज्रपात की गतिविधि बढ़ाने की संभावना है। इस बीच प्रदेश के अधिकांश जगहों पर बारिश होगी। वहीं दूसरी ओर मध्य छत्तीसगढ़ में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। बता दें कि इन दोनों मानसून की सक्रियता कम होने की वजह से प्रदेश में अधिकतम तापमान बढ़ने लगा है। तेज धूप और गर्मी से लोग परेशान हैं। वहीं सर्वाधिक अधिकतम तापमान रायपुर में 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज किया गया है। recent visitors 57

आज कई कार्यक्रमों में होंगे शामिल, छत्तीसगढ़-दंतेवाड़ा और बीजापुर के दौरे पर रहेंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

बीजापुर/दंतेवाड़ा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज चार अक्टूबर को प्रदेश के नक्सल हिंसा प्रभावित दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले के दौरे पर रहेंगे।  वे इन जिलों में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। सीएम साय पुलिस ग्राउंड हेलीपेड रायपुर से हेलीकॉप्टर से रवाना होंगे और जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर में दंतेश्वरी मंदिर में मंदिर दर्शन एवं पूजा-अर्चना करने के बाद विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री अपरान्ह 01:50 बजे दंतेवाड़ा से हेलीकॉप्टर से रवाना होकर 2:10 बजे जिला मुख्यालय बीजापुर पहुंचेंगे। यहां वे 2:15 बजे सेंट्रल लायब्रेरी बीजापुर में युवा संवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद सीएम साय 2:20 बजे वहां मिनी स्टेडियम में नक्सल पीड़ित परिवार के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति आदेश एवं तेन्दूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री अपरान्ह 3:35 बजे पुलिस लाईन बीजापुर में सुरक्षा बलों के साथ चर्चा करने के बाद 3:50 बजे हेलीकॉप्टर से रायपुर के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री शाम 5:5 बजे रायपुर लौटेंगे। recent visitors 64

परेतिन दाई भरती हैं सूनी गोद, छत्तीसगढ़-बालोद के मंदिर में ‘डायन’ को पूजते हैं लोग

बालोद. वैसे तो लोग प्रेत, प्रेतात्मा या फिर डायन नाम से ही डर जाते हैं क्योंकि इसको बुरी शक्ति माना जाता है। मगर झिंका गांव के लोगों की आस्था ऐसी है कि ये डायन (परेतिन माता) को माता मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं। इसका एक छोटा सा मंदिर भी है। सिकोसा से अर्जुन्दा जाने वाले रास्ते पर स्थित मंदिर को परेतिन दाई माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। झिंका सहित पूरे बालोद जिले के लोग परेतिन दाई के नाम से जानते हैं। नवरात्र में यहां विशेष अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है और इस मंदिर में ज्योत भी जलाई गई है, आइए जानते हैं इस मंदिर की कहानी। झींका गांव की सरहद में बने परेतिन दाई मंदिर का प्रमाण उसकी मान्यता आस्था का वो प्रतीक है, जिससे आज इस मंदिर को पूरे प्रदेश में जाना जाता है। ग्रामीण गैंदलाल मिरी ने बताया कि बालोद जिले का यह मंदिर पहले एक पेड़ से जुड़ा हुआ था। माता का प्रमाण आज भी उस पेड़ पर है और उसके सामने शीश झुकाकर ही कोई आगे बढ़ता है। आज भी लोग गुजरते हैं तो शीश नवाकर गुजरते हैं और यहां पर जो कोई भी मनोकामना मांगते हैं, वो पूरी जरूर होता है। विशेष रूप से परेतिन दाई सूनी गोद को भरती हैं। recent visitors 132

SC ने किया नई SIT का गठन, CBI और FSSAI के अधिकारी भी होंगे शामिल

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए शुक्रवार को एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का सवाल है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के पांच सदस्यीय एसआईटी गठित करने का आदेश दिया जिसमें सीबीआई, पुलिस और FSSAI के अधिकारी शामिल होंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तिरुपति लड्डू विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है तो यह अस्वीकार्य है। तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया कि एसआईटी जांच की निगरानी केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाए। 30 सितंबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से यह तय करने में सहायता करने को कहा था कि राज्य द्वारा नियुक्त एसआईटी द्वारा जांच जारी रहनी चाहिए या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की जानी चाहिए। तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के कथित इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के अनुरोध वाली याचिका समेत अन्य दूसरी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम अदालत को राजनीतिक युद्धक्षेत्र के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देंगे। पिछले महीने की शुरुआत में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था कि राज्य में पिछली जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान तिरुपति में लड्डू तैयार करने में पशु चर्बी का उपयोग किया गया था, जिससे एक बड़ा राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के सार्वजनिक बयान पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लैब रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि इस बात का क्या सबूत है कि तिरुपति मंदिर में लड्डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया था। अदालत को राजनीतिक लड़ाई का अखाड़ा नहीं बना सकते कोर्ट ने कहा कि हम अदालत को राजनीतिक लड़ाई के अखाड़े में तब्दील होने की इजाजत नहीं दे सकते. नई SIT में CBI के दो अधिकारी, आंध्र प्रदेश सरकार के दो प्रतिनिधि और FSSAI का एक सदस्य शामिल है. SIT जांच की निगरानी CBI डायरेक्टर करेंगे. इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि तिरुपति बालाजी का प्रसाद बनाने में प्रयोग होने वाले घी में मिलावट के आरोपों की जांच राज्य सरकार की SIT नहीं करेगी. जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि SIT की क्षमता को लेकर उन्हें कोई संदेह नहीं है. हम चाहते हैं कि सेंट्रल पुलिस फोर्स के किसी सीनियर अधिकारी को जांच की निगरानी सौंप दी जाए. मैंने मुद्दे की जांच की. इसमें एक बात स्पष्ट है कि यदि इस आरोप में सच्चाई का कोई अंश है तो यह अस्वीकार्य है. देशभर में भक्त हैं. खाद्य सुरक्षा भी जरूरी है. मुझे एसआईटी के सदस्य जो जांच कर रहे है उन पर कोई आपत्ति नही है. वहीं, इससे पहले आंध्र प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि अगर SIT में किसी अधिकारी को कोर्ट जोड़ना चाहता है तो हमे कोई दिक्कत नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि कल फिर इसको लेकर बयान जारी किया गया. सिब्बल ने मांग की कि कोर्ट इस मामले की जांच का जिम्मा SIT के बजाए किसी स्वतंत्र जाँच एजेंसी को सौप दे. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है. हम नहीं चाहते कि ये सियासी ड्रामा बन जाए. कोर्ट ने सुझाव दिया कि पांच लोगों की SIT बनाई जा सकती है, जिसमें सीबीआई के दो अधिकारी और FSSAI का एक सदस्य शामिल हो. यानी इस मामले की जांच के लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी हो, जिसमें सीबीआई के दो आधिकारी, राज्य सरकार के दो अधिकारी और एक अधिकारी FSSAI से होगा. recent visitors 64

सुक्खू सरकार की ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’, जिस पर हो-हल्ला होने के बाद अब देना पड़ेगा TAX

शिमला हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार अब राज्य में टॉयलेट सीट टैक्स वसूल करने की तैयारी में है। लोगों पर अब उनके घरों में मौजूद टॉयलेट सीट्स की संख्या के आधार पर टैक्स चुकाना होगा। दरअसल, वित्तीय संकट से जूझ रही राज्य सरकार ने हाल ही में इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। सीवरेज और पानी के बिल से जुड़ी सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने घर में बने टॉयलेट की हर एक सीट के लिए 25 रुपये का शुल्क देना होगा। सीवरेज बिल के साथ यह अतिरिक्त शुल्क जल शक्ति विभाग के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि सीवरेज बिल पानी के बिल का 30 प्रतिशत होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, जो लोग अपने सोर्स से पानी का उपयोग करते हैं और केवल सरकारी विभाग से सीवरेज कनेक्शन का उपयोग करते हैं, उन्हें हर महीने प्रति टॉयलेट सीट 25 रुपये का शुल्क देना होगा। विभाग ने इसे लेकर आदेश सभी मंडल अधिकारियों को जारी कर दिए हैं। इससे पहले पहाड़ी राज्य में पानी के बिल जारी नहीं किए जाते थे। बीजेपी सरकार ने घोषणा की थी कि अगर वह सत्ता में आई तो मुफ्त पानी दिया जाएगा। लेकिन हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अब हर कनेक्शन पर 100 रुपये महीने पानी का बिल जारी करने का आदेश दिया है। इसकी शुरुआत अक्टूबर से हो गई है। शहरी क्षेत्रों में रहने वालों को इन नए सरकारी शुल्कों का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आमतौर पर लोग अपने घरों में कई टॉयलेट बनवाते हैं और अब प्रत्येक टॉयलेट सीट पर शुल्क लगाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में कुल 5 नगर निगम, 29 नगर पालिकाएं और 17 नगर पंचायतें हैं, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 10 लाख लोग रहते हैं। सरकार के नए आदेश से राज्य की एक बड़ी आबादी पर असर पड़ने की उम्मीद है। टॉयलेट टैक्स को लेकर बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, 'जहां भी कांग्रेस आई, वहां महंगाई लाई, बर्बादी लाई। अब हिमाचल प्रदेश में, अपने वादों से राज्य को दिवालिया बनाने के बाद, हम देख रहे हैं कि कैसे लोगों पर लगातार टैक्स लगाया जा रहा है। यहां तक ​​कि कांग्रेस पार्टी ने टॉयलेट को भी नहीं बख्शा। कांग्रेस पार्टी बहुत सारे वादे करती है, लेकिन वे कभी उन्हें पूरा नहीं करते। वे बस राज्यों को दिवालिया बनाते हैं और इस तरह के टैक्स लगाते हैं।' कई मीडिया आउटलेट्स ने ऐसी खबरें प्रकाशित की थीं कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार ने पहाड़ी राज्य में टॉयलेट सीट टैक्स लगाने का फैसला किया है. इस नई नीति के तहत हिमाचल प्रदेश के लोगों से उनके घरों में टॉयलेट सीटों की संख्या के आधार पर हर महीने 25 रुपये सीवरेज टैक्स लिया जाएगा. हालांकि, सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इन खबरों का खंडन किया है. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हिमाचल प्रदेश वर्तमान में वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. पिछले महीने राज्य कर्मचारियों का वेतन और पेंशनर्स की पेंशन समय पर नहीं ​जारी किया जा सकता था और इसमें 5 दिन की देरी हुई थी. अगस्त में सीएम सुक्खू ने ऐलान किया था कि वह और राज्य के मुख्य संसदीय सचिव अगले दो महीने तक अपना वेतन और भत्ते नहीं लेंगे.  उन्होंने विधानसभा के अन्य सदस्यों से भी अपील की थी कि वे स्वेच्छा से अपना वेतन और भत्ते छोड़कर इस आर्थिक संकट से निपटने में राज्य की मदद करें. recent visitors 50

रानी दुर्गावती को जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है

भोपाल वीरांगना रानी दुर्गावती महिला शासकों के भारतीय स्वर्णिम इतिहास का एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर है। रानी दुर्गावती ने 16वीं शताब्दी में गोंडवाना राज्य की शासक के रूप में अपने साहस और नेतृत्व के लिए ख्याति प्राप्त की। उनकी जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। रानी ने एक संतुलित, न्यायपूर्ण और विकासात्मक प्रणाली के रूप में शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए गोंडवाना को एक मजबूत और समृद्ध साम्राज्य बनाया। वीरांगना रानी दुर्गावती के शासन में गोंड संस्कृति ने देश की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध किया है। उन्होंने अपनी पारंपरिक प्रथाओं से पर्यावरण के संवर्धन और संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज़ादी के प्रति असीम प्रेम और किसी की अधीनता स्वीकार न करने की जिद और जुनून गोंड समाज की पहचान रही है। रानी दुर्गावती गोंड समुदाय के पराक्रम, भारतीय वीरता और शूरता की साक्षात् प्रतिमूर्ति थीं। मुगल साम्राज्य की अधीनता स्वीकार न करने वाली रियासतों के लिए मुगल काल में सुरक्षित रहना बहुत कठिन माना जाता था, क्योंकि विशाल मुगल सेना के सामने युद्ध भूमि में सामना करना बहुत चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में गोंडवाना साम्राज्य की संरक्षिका के रूप रानी दुर्गावती के कार्य एवं अपूर्व वीरता के साथ राज्य के विकास में किया गया अभूतपूर्व योगदान सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। रानी दुर्गावती के कार्यों और वीरता का गुण-गान आज भी जनजातीय क्षेत्रों में विभिन्न बोलियों और कई भाषाओं में किया जाता है, जो भावी पीढ़ियों के लिये प्रेरणास्पद है। रानी दुर्गावती का संघर्ष मुगलों के खिलाफ था और वे जनजातीय संस्कृति और विरासत की सुरक्षा के प्रति कृत-संकल्पित थीं। उन्होंने मुगलों के खिलाफ एक सशक्त प्रतिरोध का आधार तैयार किया, जिसने देश के दूसरे क्षेत्रों में रहने वाले राजा-महाराजा और अधीनता स्वीकार न करने वाले अनेक समूहों को मुगल सत्ता के खिलाफ लगातार लड़ने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान जबलपुर उनके साम्राज्य का केंद्र था। रानी ने करीब 16 वर्ष तक शासन किया। उन्होंने अपने कार्य-काल में अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ियां तथा धर्मशालाएं बनवाईं। लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए रानी की कीर्ति दूर-दूर तक फ़ैल गई। रानी दुर्गावती के गढ़ मंडला पर मुगल सूबेदार बाजबहादुर की बुरी नजर थी, लेकिन युद्ध में रानी दुर्गावती ने उसकी पूरी सेना का सफाया कर दिया और फिर वह कभी पलटकर नहीं आया। मुगल सेना के कई हमलों को नाकाम करने वाली रानी दुर्गावती का खौफ दिल्ली की मुगल सत्ता को भी प्रभावित करने लगा। रानी दुर्गावती को अपनी रणनीतिक योग्यता, पारम्परिक सैन्य संसाधन और सैन्य शक्ति पर इतना विश्वास था कि वे विशाल मुगल सेना से कभी विचलित नहीं हुईं। रणक्षेत्र में रानी ने मुगलों की अपेक्षा में बेहद छोटी सेना होने के बाद भी असीम वीरता का परिचय दिया। इस कारण मुगल सेना युद्ध मैदान से भाग खड़ी हुई। रानी दुर्गावती ने मुगलों के खिलाफ अपनी भूमि की रक्षा के लिए जिस अद्वितीय साहस का परिचय दिया, वह भारत की मातृशक्ति के पराक्रम, शौर्य और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। रानी दुर्गावती को भारतीय इतिहास की सर्वाधिक प्रसिद्ध महारानियों और बेहतर प्रशासकों में शुमार किया जाता है। उन्होंने जिस कुशलता से राज संभाला, उसकी प्रशस्ति इतिहासकारों ने भी की है। आईन-ए-अकबरी में अबुल फ़ज़ल ने लिखा है कि "दुर्गावती के शासनकाल में गोंडवाना इतना सुव्यवस्थित और समृद्ध था कि प्रजा लगान की अदायगी-स्वर्ण मुद्राओं और हाथियों से करती थी।" रानी दुर्गावती ने गोंडवाना की स्थिरता, विकास तथा कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रभावी न्याय प्रणाली की स्थापना की। उन्होंने स्व-शासन को बढ़ावा देते हुए गांवों को मजबूत किया, जिससे किसान खुशहाल हुए। रानी दुर्गावती ने कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। उन्होंने कृषि सुधारों और सिंचाई योजनाओं को लागू किया, जिससे खाद्य उत्पादन बढ़ा। रानी दुर्गावती ने शिक्षा और संस्कृति के विकास पर अधिक जोर दिया। उन्होंने साहित्य, कला और संगीत को प्रोत्साहित किया, जिससे गोंडवाना की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा मिला। रानी दुर्गावती की नेतृत्व क्षमता, साहस और बलिदान, राजनैतिक समझ, सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने के कार्य, सांस्कृतिक समृद्धि और राज्य में स्थिरता बनाये रखने की कोशिशें अतुलनीय थी। जन-कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता और मातृभूमि की सुरक्षा के संकल्प ने रानी दुर्गावती को एक महान नेतृत्वकर्ता और शासक के रूप में इतिहास में अमर बना दिया। उनका जीवन और न्यायपूर्ण शासन आज भी प्रेरणा का ऊर्जा स्रोत है।   recent visitors 87