त्योहारी सीजन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदी, पिछले वर्ष की तुलना में यह 26 फीसदी अधिक

नई दिल्ली  त्योहारी सीजन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जमकर खरीदी हो रही है। एक हफ्ते में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने 55,000 करोड़ के सामान बेचे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में यह 26 फीसदी अधिक है। ऑनलाइन से सर्वाधिक खरीदी मोबाइल फोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल, इलेक्ट्रॉनिक्स व जनरल मर्चेंडाइज की हो रही है। कुल बिक्री में इनका योगदान तीन चौथाई है। इस साल त्योहारी सीजन में होने वाली बिक्री की करीब 55 फीसदी बिक्री 26 सितंबर के बाद से अब तक हुई है। पिछले साल त्योहारों में ऑनलाइन खरीदी का मूल्य 9.7 अरब डॉलर था। इस बार 23 फीसदी बढ़कर 12 अरब डॉलर हो सकता है। खरीदारों में छोटे कस्बों व शहरों का बड़ा हिस्सा है। कुछ ब्रांडों ने कहा, आपूर्ति से ज्यादा मांग आ रही है। सालाना आधार पर 40 फीसदी तक बढ़ गई मांग फ्लिपकार्ट, मीशो और अमेजन इंडिया की 26 सितंबर से वार्षिक त्योहारी सीजन की बिक्री शुरू है। मीशो ने कहा, सालाना आधार पर बिक्री में 40% की वृद्धि देखी गई। यह उछाल दूसरे स्तर के शहरों की मजबूत मांग से आया है। इसमें लगभग 45% खरीदार चौथे स्तर के शहर और उससे आगे से आए थे। छोटे शहरों पर ज्यादा जोर फ्लिपकार्ट का कहना है कि बड़े शहरों के साथ मेदिनीपुर, हिसार, बेरहामपुर, बांकुरा और अगरतला जैसे दूसरे स्तर के क्षेत्रों में भी ग्राहकों की ओर से मजबूत मांग है। कुछ वर्षों से त्योहारी बिक्री पहले शुरू हो जाती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने जब सेल की शुरुआत की तो बिक्री बहुत तेज थी। आखिरी दिन में धीमी हो गई। दशहरा से दिवाली के बीच फिर बढ़ेगी बिक्री व्यापारियों का मानना है कि बिक्री की एक और लहर आएगी। यह दशहरा से दिवाली के बीच होगी। अमेजन इंडिया का कहना है कि जो 30,000 रुपये से ज्यादा के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान हैं, उनकी बिक्री 30% बढ़ी है। मूलरूप से महंगे स्मार्टफोन ज्यादा बिक रहे हैं। खासकर आईफोन 13, वनप्लस और सैमसंग एस 23 अल्ट्रा है। कुल ऑर्डर का 75 फीसदी ऑर्डर दूसरे और उसके आगे के शहरों से आ रहा है। नवरात्र में इन सामानों की मांग में बढ़ोतरी नवरात्र शुरू होने के साथ घरेलू सजावट इलेक्ट्रॉनिक्स व गेमिंग सहायक उपकरण जैसी अन्य श्रेणियों ने इस अवधि के दौरान वॉल्यूम में 100% से अधिक वृद्धि दर्ज की है। सबसे ज्यादा मांग इनकी रही है। इसलिए खरीदी में आ रही तेजी ऑनलाइन बिक्री में तेजी का बड़ा कारण किस्त पर सामान मिलना है। 50 फीसदी से ज्यादा खरीदार, जो टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, लैपटॉप खरीद रहे हैं वे किस्त पर भुगतान कर रहे हैं। ये महंगे उत्पाद खरीद रहे हैं। दूसरे और तीसरे स्तर के शहर स्मार्टफोन और टीवी बिक्री में 70 फीसदी का योगदान दे रहे हैं।   recent visitors 99

चीन अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने अगले तीन महीने में 27 लाख करोड़ रुपये से जान फूंकेगा

बीजिंग चीन ने भारत समेत दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए फिर से चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चीन ने  325 बिलियन डॉलर (करीब 27 लाख करोड़ रुपये) के विशेष पैकेज की घोषणा की। चीन ने कहा कि वह इस रकम को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए खर्च करेगा। ऐसे में सोमवार को फिर से भारतीय शेयर मार्केट में गिरावट देखने को मिल सकती है। कुछ समय पहले चीन ने विशेष प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी। इसके बाद विदेशी निवेशक भारतीय शेयर मार्केट से पैसा निकालकर चीन की ओर चले गए थे। इससे भारतीय शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट आई थी। पिछले पूरे हफ्ते मार्केट में गिरावट बनी रही। इस गिरावट के कारण निवेशकों के 16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए थे। वहीं इस हफ्ते भी मार्केट में सिर्फ एक दिन ही तेजी देखने को मिली। चीन की इस नई घोषणा से शेयर मार्केट में फिर से गिरावट आ सकती है।   क्या है चीन का नया आर्थिक पैकेज? चीन अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करने पर लगा है। इसी कड़ी में चीन इतनी बड़ी रकम अपनी अर्थव्यवस्था में लगाएगा। इस नए पैकेज से बैंकों को मजबूत करने, प्रॉपर्टी मार्केट को मजबूत करने और वित्तीय संकट से उबरने में मदद मिलेगी। कुछ हफ्ते पहले चीन ने जिस प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी, उसमें ब्याज दरों में कटौती और बैंकों के लिए तरलता शामिल थी। क्या है 3 महीने का ड्रैगन का प्लान?     चीन के वित्त मंत्री लैन फोआन ने कहा कि वे अतिरिक्त राजकोषीय बांडों के उपयोग में तेजी ला रहे हैं। साथ ही और उपयोग के लिए अल्ट्रा लॉन्ग टर्म स्पेशल ट्रेजरी बॉन्ड भी जारी किए जा रहे हैं।     फोआन ने कहा कि अगले तीन महीनों में विभिन्न स्थानों पर इस्तेमाल के लिए स्पेशल बॉन्ड फंड की व्यवस्था की जा सकती है।     बैंकों की पूंजी की भरपाई करने और लोन देने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए विशेष सरकारी बॉन्ड जारी किए जाएंगे।     सरकार पर जो कर्ज है, उसे भी कम किया जाएगा ताकि सरकार बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च कर सके और नौकरियों की रक्षा में मदद कर सके। भारत पर क्या पड़ेगा असर? चीन के इस पैकेज का असर भारत में साफ दिखाई देगा। सोमवार को जब शेयर मार्केट खुलेगी तो इसमें गिरावट दिखाई दे सकती है। वहीं चीन जिस तरह से अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करने में लगा है, इससे निवेशकों में भरोसा पैदा होगा और वह चीन की ओर रुख करेंगे। विदेशी निवेशक भारतीय मार्केट से पैसा निकालकर चीनी मार्केट में निवेश कर सकते हैं। इससे शेयर मार्केट में गिरावट आएगी। recent visitors 53

itel Alpha Pro स्मार्टवॉच: जानें फीचर्स और कीमत

आईटेल ने हाल ही में अपना नया स्मार्टवॉच अल्फा प्रो लॉन्च किया है, जो आकर्षक डिजाइन और दमदार स्पोर्ट्स मॉड्स के साथ ही बाजार में धूम मचा रही है। यह स्मार्टवॉच का लुक और फीचर्स इसे एक प्रीमियम श्रेणी के रूप में स्थापित किया गया है, और इसमें कई विशेष स्पोर्ट्स और हेल्थ-ट्रैकिंग फीचर्स हैं जो इसे प्रशंसकों के लिए आदर्श विकल्प बनाते हैं। आइए इस स्मार्टवॉच की कुछ प्रमुख तस्वीरें इस प्रकार हैं: 1. शानदार डिजाइन आईटेल अल्फा प्रो का डिजाइन शानदार और आधुनिक है। इसमें एक पतली और स्टाइलिश धातु की बॉडी बनाई गई है, जो प्रीमियम फील पेश करती है। इसका एचडी डिस्प्ले बड़ा और चमकीला है, जिससे चित्रों को देखने में हर फीचर और नोटिफिकेशन की सुविधा मिलती है। इसके चारों ओर सबसे पहले बेज़ल इसे और भी अधिक आकर्षक धमाके हैं। इसका डिज़ाइन भी नरम और आरामदायक है, जो लंबे समय तक के संस्करणों में किसी प्रकार की कमी नहीं देता है। 2. स्पोर्ट्स मॉड्स की वैरायटी आईटेल अल्फा प्रो में कई तरह के स्पोर्ट्स मॉड्स शामिल हैं, जो फिटनेस के शौकीन लोगों को अलग-अलग तरह के ट्रैक करने की सुविधा देते हैं। इसमें रनिंग, साइकलिंग, रेस्टॉरेंट, वॉकिंग और योग जैसे मोड शामिल हैं, जो आपकी हर एक्टिविटी को एनालिस्ट से मॉनिटर कर सकते हैं। अगर आप जिम में प्रोजेक्ट कर रहे हैं या फिर एडवेंचर्स का मजा ले रहे हैं तो यह स्मार्टवॉच हर एक्टिविटी के लिए उपयुक्त है। 3. स्वास्थ्य मॉनिटरिंग सुविधाएँ यह स्मार्टवॉच केवल स्पोर्ट्स एक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उन्नत स्वास्थ्य मॉनिटरिंग सुविधाएँ भी शामिल हैं। हृदय गति मॉनिटर, ब्लड ऑक्सीजन (SpO2) मॉनिटर, और नींद की सुविधा जैसे फीचर्स मिलते हैं, जो आपको अपने स्वास्थ्य पर नज़र रखने में मदद करते हैं। यह आपके दिन भर की कनेक्टिविटी को ट्रैक कर आपको फिट और स्टेक लाइफ में सहायता प्रदान करता है। 4. लंबी बैटरी लाइफ आईटेल अल्फा प्रो की बैटरी लाइफ बेहद कम है। इस स्मार्टवॉच पर एक बार पूरी तरह से चार्ज करने में 7-10 दिन तक का समय लग सकता है। साथ ही, यह स्मार्टवॉच क्विक चार्ज हो जाता है, जिससे आपको बार-बार की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। 5. इस स्मार्टवॉच को वॉटर-रेसिस्टेंट डिजाइन किया गया है, जिससे आप इसे पानी के बीच भी पहन सकते हैं। इसकी IP68 रेटिंग होने के कारण यह गंदगी और पानी से सुरक्षित है, जिससे यह कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए एक उत्कृष्ट व्यावसायिक बन जाता है। 6. स्मार्ट नोटिफिकेशन और कॉल फीचर्स आईटेल अल्फा प्रो स्मार्टवॉच में आपको रियल-टाइम नोटिफिकेशन प्राप्त करने की सुविधा भी मिलती है। आप अपनी घड़ी पर कॉल, मैसेज, सोशल मीडिया नोटिफिकेशन देख सकते हैं। इसके साथ ही, इसमें म्यूजिक कंट्रोलर और कैमरा शटर कंट्रोलर जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं, जिससे यह एक संपूर्ण स्मार्ट उपकरण बन जाता है। 7. वेलनेस फीचर्स इस स्मार्टवॉच में ब्रीडिंग गाइड और स्टेप काउंटर जैसे वेलनेस फीचर्स भी हैं, जो आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत को संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं। ये विशेषताएं खासतौर पर लोगों के लिए उपयोगी होती हैं, जो तनाव प्रबंधन और मानसिक शांति बनाए रखना चाहती हैं। 8. कीमत और कीमत आईटेल अल्फा प्रो की कीमत बहुत बड़ी है, खासतौर पर उन सेल्स के लिए जो एक बजट-फ्रेंडली लेकिन फीचर्स से भरपूर स्मार्टवॉच की तलाश में हैं। आईटेल ने इस स्मार्टवॉच को हर वर्ग के ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया है, जिससे यह एक आकर्षक विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है। निष्कर्ष आईटेल अल्फा प्रो स्मार्टवॉच के सभी फीचर्स के लिए बेहतरीन विकल्प हैं, जो एक आकर्षक, स्मार्टवॉच और स्पोर्ट्स मॉड से लैस लैपटॉप की खोज कर रहे हैं। यह स्लिम और स्टाइलिश डिज़ाइन, हेल्थ मॉनिटरिंग फीचर्स और मजबूत बैटरी लाइफ के लिए आदर्श स्टॉक हैं। recent visitors 81

लेटेस्ट लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट अमेरिका, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया का खाना पर्यावरण के लिए प्रतिकूल

 नई दिल्ली      लेटेस्ट लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट की ओर से एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि भारत का खाद्य उपभोग पैटर्न दुनिया के सभी जी 20 देशों में सबसे ज्यादा स्थाई और पर्यावरण के अनुकूल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 2050 तक कई देश भारत की ही तरह खाद्य उत्पादन और उपभोग का समर्थन करते हैं, तो यह पृथ्वी और पृथ्वी के जलवायु के लिए सबसे कम नुकसानदायक होगा. वहीं, इंडोनेशिया और चीन जी 20 अर्थव्यवस्थाओं में दूसरे स्थान पर हैं,  जिनका डाइट पैटर्न पर्यावरण के मुताबिक है. रिपोर्ट में अमेरिका, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के डाइट पैटर्न को सबसे खराब रैंकिंग दी गई है.  इन देशों में अत्यधिक मात्रा में फैटी और शुगरी फूड्स का सेवन जरूरत से ज्यादा बढ़ने के कारण मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए बताया गया है कि तो इन देशों में लगभग ढाई अरब लोग ओवरवेट हैं. वहीं, 890 मिलियन लोग मोटापे के शिकार हैं. इस रिपोर्ट में भारत में मिलेट्स के प्रति लोगों को जिस प्रकार से जागरुक किया जा रहा है, उसका भी जिक्र किया गया. मिलेट्स का सेवन भारत में लंबे समय से किया जाता रहा है. मिलेट्स का सेवन करने के लिए भारत में कई कैंपेन भी चलाए जा रहे हैं जिसमें लोगों को इसके फायदों के बारे में बताया जा रहा है. इन  कैंपेन को भारत में मिलेट्स की खपत बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है. यह सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथ ही जलवायु के लिए भी अच्छे हैं. भारत मिलेट्स का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 41% हिस्सा है . मिलेट्स की खपत को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई पहल की गई हैं, जिनमें राष्ट्रीय मिलेट अभियान, मिलेट मिशन, और ड्राउट मिटिगेशन प्रोजेक्ट शामिल हैं . भारतीय भोजन की बात करें तो यहां पर वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन खाने का मिक्सचर मिलता है. यहां पर नॉर्थ साइड पर दाल और गेहूं की रोटी के साथ ही मीट बेस्ड चीजें खाई जाती हैं. वहीं, अगर साउथ की बात करें तो यहां पर चावल और इससे संबंधित फर्मेंटेड फूड्स का सेवन ज्यादा किया जाता है जैसे इडली, डोसा और सांभर आदि. इसके अलावा यहां बहुत से लोग मछली और मीट का भी सेवन करते हैं. देश के पश्चिमी, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में मौसमी उपलब्ध मछली को चावल के साथ मुख्य भोजन के रूप में खाया जाता है. वहीं लोग यहां मिलेट्स जैसे जौ, बाजरा, रागी, सोरघम, पर्ल मिलेट, बकव्हीट, चौलाई और दलिया या टूटे हुए गेहूं का भी सेवन करते हैं. इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अगर 2050 तक दुनिया के सभी देश भारत की ही तरह डाइट पैटर्न को अपनाते हैं तो इससे जलवायु परिवर्तन में वृद्धि नहीं होगी, जैव विविधता की हानि नहीं होगी, प्राकृतिक संसाधनों में कमी नहीं आएगी और भोजन की सुरक्षा खतरे में नहीं पड़ेगी. रिपोर्ट में मुख्य रूप से इस बात पर फोकस किया गया है कि स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए. प्रोसेस्ड फूड्स का कम से कम सेवन किया जाए, शाकाहारी और वीगन डाइट ली जाए और खाने की बर्बादी कम से कम की जाए. recent visitors 66

देश कैसे तय करते हैं कि युद्ध करना है या नहीं? क्या ये देश शुरू कर चुके हैं तीसरा World War?

नईदिल्ली इन दिनों इजरायल चौथरफा युद्ध लड़ रहा है वहीं रूस और यूक्रेन युद्ध भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में कई लोग तीसरे विश्व युद्ध की संभावना जता रहे हैं, लेकिन इसे लेकर भी कई सवाल उठते हैं कि क्या सच में तीसरा विश्व युद्ध होना इतना आसान है? क्या विश्व युद्ध में कई देश आपस में लड़ते हैं तभी शुरु माना जाता है और विश्व युद्ध होने की परिस्थितियां क्या होती हैं. चलिए इन सवालों के जवाब जान लेते हैं. क्या होते हैं विश्व युद्ध के कारण? विश्व युद्ध कई कारणों से शुरू हो सकते हैं. जैसे राष्ट्रवाद यानी अपने देश के प्रति अत्यधिक लगाव और अन्य देशों के प्रति घृणा. जब राष्ट्रवाद चरम पर पहुंच जाता है तो युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. या फिर एक शक्तिशाली देश दूसरे देशों पर अपना अधिकार जमाना चाहता है, तो इससे युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. इसके अलावा देशों के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा भी युद्ध का कारण बन सकती है. साथ ही धार्मिक मतभेद भी युद्ध का कारण बन सकते हैं और किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता होने पर पड़ोसी देशों में भी अशांति फैल सकती है और युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. क्या विश्व युद्ध में हर देश को भाग लेना होता है? नहीं, हर देश को विश्व युद्ध में भाग लेना जरूरी नहीं होता है. कई बार देश तटस्थ रहने का फैसला करते हैं, लेकिन अगर कोई देश किसी युद्ध में शामिल हो जाता है तो उसके पड़ोसी देशों पर भी युद्ध का असर पड़ सकता है. विश्व युद्ध के होते हैं ये भयानक परिणाम विश्व युद्ध के परिणाम बहुत ही विनाशकारी होते हैं. इसमें लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. युद्ध से देशों की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचता है. साथ ही युद्ध से समाज में अस्थिरता फैल जाती है और युद्ध के बाद देशों के राजनीतिक नक्शे में बदलाव आ सकता है.         अगर नाटो-यूक्रेन हमला करते हैं तो रूस क्या करेगा? तो रूस के पास क्या-क्या विकल्प हैं. – रूस मार्शल लॉ लगाकर अपने टारगेट्स को यूक्रेन तक पहुंचा दे. इसके बाद यूक्रेन के कई शहर गाजा की तरह दिखने लगेंगे. इसके लिए रूस टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन यानी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. – यमन के हूती और अन्य विद्रोही-आतंकी संगठनों को एडवांस हथियार देकर जंग में शामिल करे. इन लड़ाकों के जरिए रूस यूक्रेन और नाटो की सेना पर हमला करे. इससे यूक्रेन और नाटो के बीच Chaos पैदा होगा. – तीसरा रास्ता है रूस के ऊपर घूम रहे दुश्मन के सैटेलाइट्स को मार गिराया जाए. जिसमें अमेरिकी रईस एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट्स भी हैं. – चौथा रास्ता है कि रूस नाटो के बाल्टिक और रोमानिया में मौजूद हथियार डिपो और लॉजिस्टिक्स पर हमला करके उसे बर्बाद कर दे. एक तरीका हो सकता है साइबरअटैक का. जिससे नाटो और यूक्रेन परेशान हो सकते हैं. परमाणु परीक्षण कर सकता है रूस ये भी सुनने में आ रहा है कि रूस इस समय एक परमाणु परीक्षण करने की तैयारी में है. ये परीक्षण उसकी अपनी जमीन पर होगा. लेकिन कहां और कब इसका खुलासा नहीं हुआ है. यह परीक्षण किसी भी समय हो सकता है. यह पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाने का एक तरीका है, ताकि जंग को रोका जा सके. अमेरिका में मौजूद रूस के एंबेसडर ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ये दूसरा विश्व युद्ध नहीं है कि अमेरिकी पनडुब्बियां पानी के अंदर से आकर अचानक हमला कर देंगी. न उसमें छिप पाएंगी. हम हर जगह से नजर रखे हुए हैं. अगर अमेरिका या नाटो ने हमला किया तो हम परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. रूस समंदर के अंदर खोज रहा है इंटरनेट केबल नाटो ने कहा है कि रूस इस समय समंदर के अंदर मौजूद इंटरनेट केबल्स को खोज रहा है. नाटो को लगता है कि रूस इन केबल्स पर हमला करना चाहता है. अगर रूस इन केबल्स को काटता है तो इसका असर पश्चिमी देशों समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.     इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है. ईरान शांत बैठा है लेकिन वह अपने समर्थन वाले आतंकी समूहों से इजरायल पर ताकतवर हमला करवा रहा है.  ईरान और अमेरिका के तनाव ने मध्य पूर्व में शांति को खतरे में डाल दिया है. उत्तर कोरिया की बढ़ती गतिविधियां उत्तर कोरिया लगातार अपनी मिसाइलों की ताकत बढ़ा रहा है. उनके परीक्षण कर रहा है. उसे चीन और रूस का समर्थन हासिल है. वह भी यूक्रेन को हराने में रूस का साथ दे रहा है. साथ ही यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह सीधे तौर पर रूस के साथ खड़ा होगा. रूस के दुश्मन से जंग लड़ने को तैयार है. अक्सर ही तानाशाह किम जोंग उन अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइलों की धमकी देता रहता है. चीन ताइवान पर घुसपैठ की तैयारी में लगा चीन ताइवान से सिर्फ 350 किलोमीटर दूर एक बड़े पैमाने का एंफिबियस ऑपरेशन कर रहा है. मकसद है ताइवान पर घुसपैठ. इसमें चीन की सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान शामिल हैं. फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, हेलिकॉप्टर्स, जंगी जहाज, टैंक्स, बख्तरबंद गाड़ियां और सिविलियन नावें भी शामिल की गई हैं. इस मिलिट्री एक्सरसाइज की वजह से इलाके में तनाव है. recent visitors 135

बोइंग ने अपने 10 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला लिया

न्यूयॉर्क  हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी बोइंग के कर्मचारियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। बताया जा रहा कि कंपनी ने अपने 10 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला लिया है। इसके पीछे का कारण कारोबार में लगातार जारी दबाव और कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ता नुकसान है। इन अधिकारियों को भी निकाला जा सकता है कंपनी के इस फैसले से लगभग 17 हजार कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। बोइंग के इस फैसले से उसके उत्पादन में भी देरी होगी। मुख्य कार्यकारी केली ऑर्टबर्ग ने ईमेल के जरिए कहा, वैश्विक स्तर पर होने वाली इस छंटनी में हर स्तर के कर्मचारी, जिसमें एग्जीक्यूटिव, मैनेजर और कर्मचारी सभी शामिल होंगे। यहां तक कि बोइंग ने अपने हथियार और सैन्य उपकरण बनाने वाले व्यापार में भी घाटे की चेतावनी दी है। साथ ही कंपनी ने अपने नए जहाज 777एक्स की डिलिवरी तारीखों को भी आगे बढ़ा दिया है। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ मशीनिस्ट्स एंड एयरोस्पेस वर्कर्स के बोइंग कर्मचारियों ने अनुबंध प्रस्ताव को भारी बहुमत से अस्वीकार कर 13 सितंबर को काम छोड़ दिया। क्या है मामला? कंपनी फिलहाल करीब 33 हजार कर्मचारियों की हड़ताल से जूझ रही है जो बीते तीन हफ्ते से जारी है। इससे कामकाज पर बुरा असर पड़ा है। इस हड़ताल का असर कंपनी के सबसे ज्यादा बिकने वाले विमानों के उत्पादन पर भी देखने को मिला है। कर्मचारी की यूनियन 14 सितंबर से हड़ताल पर हैं। कंपनी और यूनियन के बीच बातचीत का भी कोई हल नहीं निकला है। स्थिति ये है कि पिछले महीने ही बोईंग नेशनल लेबर रिलेटेड बोर्ड के सामने यूनियन के खिलाफ अर्जी देकर शिकायत की है कि यूनियन हितों की अनदेखी करते हुए अड़ियल रवैया अपना रही है। प्रति शेयर 9.97 डॉलर का नुकसान बोइंग ने कहा कि हड़ताल के कारण तीसरी तिमाही में उसके वाणिज्यिक विमानन परिणामों पर पूर्व कर तीन अरब डॉलर का बोझ पड़ा, जो प्रति शेयर 9.97 डॉलर के अनुमानित नुकसान का एक हिस्सा है। हमारी कंपनी के भविष्य के लिए यह जरूरी: ऑर्टबर्ग ऑर्टबर्ग ने बताया, 'जब हमारा कारोबार चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में हम अपने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण फैसले ले रहे हैं और हमारी कंपनी को फिर से खड़ा करने के लिए हमें जो काम करना चाहिए, उस पर यही विचार है। ये जरूरी कदम हमारे कारोबार में महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलावों के साथ लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए जरूरी हैं।' 777एक्स की डिलीवरी भी आगे बढ़ी हड़ताल के कारण हुए नुकसान पर बोइंग ने कहा कि नए जहाज 777एक्स की डिलीवरी तारीखों को भी आगे बढ़ा दिया है। पहली डिलीवरी 2025 को होनी थी, मगर अब 2026 में की जाएगी। इसकी साथ ही कंपनी ने साल 2027 में 767 मालवाही का उत्पादन बंद करने की भी योजना बनाई है। उसका कहना है कि अपने सभी ऑर्डर को पूरा करने के बाद उत्पादन बंद किया जाएगा।   recent visitors 79

रवि बिश्नोई ने रचा इतिहास, बुमराह-अर्शदीप को पछाड़ बने भारत के नंबर-1 गेंदबाज

नई दिल्ली बांग्लादेश के खिलाफ पहले दो टी20 में बेंच गर्म करने वाले रवि बिश्नोई को आखिरी मुकाबले में जैसे ही मौका मिला इस युवा गेंदबाज ने इतिहास रच दिया। हैदराबाद में खेले गए हाईस्कोरिंग मुकाबले में बिश्नोई ने 4 ओवर के कोटे में 30 रन खर्च कर सर्वाधिक 3 विकेट चटकाए, इस दौरान उन्होंने एक मेडन ओवर भी फेंका। बिश्नोई ने इस दौरान नजमुल हुसैन शान्तो के साथ लिटन दास और राशिद हुसैन का भी शिकार किया। इन तीन विकेटों के दम पर बिश्नोई ने अपने T20I करियर में 50 विकेट भी पूरे किए। इसी के साथ बिश्नोई अब भारत के 50 T20I विकेट लेने वाले सबसे युवा गेंदबाज बन गए हैं। इस लिस्ट में उन्होंने अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाजों को पछाड़ा है। बिश्नोई ने यह कारनामा 24 साल और 37 दिन की उम्र में किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड अर्शदीप सिंह के नाम था जिन्होंने 24 साल और 196 दिन की उम्र में 50 T20I विकेट लिए थे। भारत के लिए सबसे कम उम्र में 50 T20I विकेट 24 साल 37 दिन – रवि बिश्नोई 24 साल 196 दिन – अर्शदीप सिंह 25 साल 80 दिन – जसप्रीत बुमराह 28 साल 237 दिन – कुलदीप यादव 28 साल 295 दिन – हार्दिक पांड्या वहीं रवि बिश्नोई सबसे कम मैचों में 50 विकेट लेने वाले संयुक्त रूप से दूसरे भारतीय बने हैं। बिश्नोई ने अपने 33वें मैच में 50 टी20 विकेट लिए और अर्शदीप की बराबरी की। इस मामले में भारत के चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव टॉप पर हैं। कुलदीप के नाम 30 मैचों में 50 टी20 विकेट लेने का रिकॉर्ड है। recent visitors 176