Tuesday, July 7, 2026 5:58 am

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एम्बुलेंस सेवा और जाँच सेवा प्रदाय की समीक्षा की

हाई रिस्क प्रेगनेंसी का पूर्व चिन्हांकन कर उचित चिकित्सकीय संस्थान भेजें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल रिस्पांस टाइम कम करने, उचित प्रबंधन और ट्रांसपैरेंसी के लिए आधुनिक तकनीकी का करें उपयोग : उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एम्बुलेंस सेवा और जाँच सेवा प्रदाय की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिये हैं कि हाई रिस्क प्रैग्नेसी का पूर्व चिन्हांकन करें, इससे उचित चिकित्सकीय संस्थान एक बार में भेजा जाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हों और रेफरल लोड भी कम होगा। रिस्पांस टाइम को कम करने, संसाधनों के उचित प्रबंधन और ट्रांसपैरेंसी के लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग करें जिससे एम्बुलेंस सेवा का उचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। चिकित्सकीय जांच सेवाएं सुविधाजनक रूप से नागरिकों को उपलब्ध हों इसके लिये वेट लीज मॉडल और हब एंड स्पोक मॉडल पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएँ उपलब्ध कराने के प्रयास किये गये हैं। सेवाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सशक्त मॉनीटरिंग करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में एम्बुलेंस सेवा, जननी एक्सप्रेस सेवा और डायग्नोस्टिक सेवा प्रदाय की व्यवस्था की समीक्षा की। 6 माह में 16 लाख से अधिक लाभान्वित मिशन संचालक एनएचएम श्रीमती प्रियंका दास ने बताया कि प्रदेश में 1059 जननी एक्सप्रेस, 1002 संजीवनी ज़िनमें से 167 एडवांस लाइफ सपोर्ट और 835 बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस सेवा है। विगत 6 माह में जननी और संजीवनी एम्बुलेंस सेवा द्वारा 16 लाख 20 हज़ार 582 मरीजों/गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गयी है। अप्रैल-24 से सितंबर-24 की अवधि में संजीवनी एक्सप्रेस का लाभ 6 लाख 95 हज़ार 223 मरीजों ने लिया है। वहीं जननी एक्सप्रेस सेवा से 9 लाख 25 हज़ार 359 गर्भवती महिलायें/ माताएँ लाभान्वित हुई हैं। वेट लीज मॉडल से जून-2020 से अब तक 1 करोड़ 15 लाख से अधिक नागरिकों की 4 करोड़ 53 लाख 19 हज़ार 488 जाँच की गयी हैं। प्रतिदिन लगभग 28 हज़ार जाँचें की जाती हैं। इस मॉडल के तहत प्रदेश में 85 जाँच सेवा केंद्र क्रियाशील हैं। जिनमें 134 प्रकार की जाँच की जाती है। संचालक एनएचएम के.के. रावत सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 77

उच्च शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में “भारतीय ज्ञान परंपरा शीर्ष समिति” की बैठक हुई

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंत्रालय में "भारतीय ज्ञान परंपरा शीर्ष समिति" की बैठक हुई। बैठक में विश्वविद्यालय/सम्भागीय कार्यशालाओं की जानकारी और समस्त विश्वविद्यालयों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा को दृष्टिगत रखते हुए शिक्षकों के प्रशिक्षण की समीक्षा की गई। मंत्री परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर समस्त विश्वविद्यालय, महाविद्यालय में "भारतीय ज्ञान परम्परा विविध संदर्भ" को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न अकादमिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिये। बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के लिए पुस्तकों की सूची का अवलोकन एवं अनुमोदन हुआ, साथ ही मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी लेखकों द्वारा पुस्तकों की सूची का विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण पर भी चर्चा की गई। मंत्री परमार ने स्नातक प्रथम वर्ष के पाठयक्रम का रिव्यू करते हुए पाठ्यक्रम निर्माण 20 नवम्बर 2024 तक, चिन्हित लेखकों द्वारा पाण्डुलिपि का निर्माण 31 जनवरी 2025 तक, पाण्डुलिपि का परीक्षण फरवरी 2025 तक तथा पुस्तकों का प्रकाशन मई 2025 तक पूर्ण करने के निर्देश दिये। मंत्री परमार ने कहा कि पाठय पुस्तकों में स्थानीय समुदाय/जनजातीय समुदाय की आस्था, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, प्रकृति के प्रतिश्रद्धा-समन्वय के भाव का समावेश होना चाहिये। सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी करने वाले विद्यार्थियों को पुरूस्कृत किया जाना चाहिए। परमार ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों को अध्ययन केंद्रो का भ्रमण कराया जाये। शिक्षा के लिए समाज को योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। विद्यादान जैसा अभियान चलाकर समाज की सहभागिता प्राप्त की जाना चाहिये। विश्वविद्यालय /सम्भागीय कार्यशालाओं की जानकारी बैठक में आयुक्त उच्च शिक्षा निशांत बरवड़े ने बताया कि 26 विश्वविद्यालयों में विगत 3 माह में स्नातक स्तर के 18 विषयों सहित कुल 26 विषय पर कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। 10 संभागों में विगत 2 माह में 24 विषयों पर एक दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। राजाशंकर शाह विश्वविद्यालय, छिन्दवाड़ा में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। समस्त विश्वविद्यालयों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा को दृष्टिगत रखते हुए शिक्षकों को प्रशिक्षण 5 नवम्बर से 24 दिसम्बर तक दिया जायेगा। इसके अंतर्गत विज्ञान समूह, में वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, बी.एच.एस.सी./बी.एस.सी., गणित विषय सम्मिलित है। सामाजिक विज्ञान समूह में समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, भूगोल है। साहित्य एवं मनोविज्ञान समूह में अंग्रेजी साहित्य, हिन्दी साहित्य, संगीत, संस्कृत साहित्य, मनोविज्ञान, दर्शन हैं। वाणिज्य समूह में अर्थशास्त्र, वाणिज्य समूह शामिल है। बैठक में संबंधित मेजर एवं माइनर विषय में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित किए जाने के परिप्रेक्ष्य में विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान/परिसंवाद, "शिक्षण अधिगम को रूचिकर बनाने" विषय पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन पद्दति की रूपरेखा पर चर्चा की गयी। समस्त विश्वविद्यालय, महाविद्यालय में "भारतीय ज्ञान परम्परा विविध संदर्भ" को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न अकादमिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों आयोजित की जायेंगी। इन गतिविधियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता, भारतीय सांस्कृतिक लोक नृत्य, भारतीय सांस्कृतिक लोकगीत, भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता शामिल है। महाविद्यालय स्तरीय आयोजन समस्त महाविद्यालयों में होगा, यह आयोजन 21 से 26 अक्टूबर के मध्य किया जायेगा। जिला स्तरीय आयोजन संबंधित जिले के अग्रणी महाविद्यालय में 5 से 9 नवंबर के मध्य होगा। संभाग स्तरीय आयोजन संबंधित संभाग के अग्रणी महाविद्यालय में 25 से 29 नवंबर के मध्य होगा तथा राज्य स्तरीय आयोजन भोपाल संभाग के अग्रणी महाविद्यालय में 10 से 14 दिसंबर 2024 के मध्य आयोजित होगा। बैठक में शीर्ष समिति के उपाध्यक्ष एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के सचिव डॉ. अतुल कोठारी, मध्यप्रदेश शुल्क विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र कान्हेरे, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, अशोक कड़ेल, राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय, छिन्दवाड़ा की कुलगुरू डॉ. लीला भलावी, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल के निदेशक डॉ. रमाकांत पांडेय, महर्षि वाल्मिकी संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल, हरियाणा के कुलपति डॉ. रमेश चन्द्र भारद्वाज एवं मध्यप्रदेश भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु डॉ. संजय तिवारी सहित अन्य शिक्षाविद् तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 45

शपथ से पहले कश्मीर में पलट गई बाजी ! सरकार के साथ नहीं कांग्रेस

श्रीनगर  विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत के बाद उमर अब्दुल्ला के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सुबह 11:30 बजे पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ समारोह में शामिल होने के लिए I.N.D.I.A. गठबंधन को निमंत्रण भेजा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी श्रीनगर में मुख्यमंत्री पद के लिए नामित उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इधर शपथ ग्रहण समारोह से पहले जम्मू-कश्मीर के मनोनीत मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की मजार-ए-अनवर पर पुष्पांजलि अर्पित की। जिसमें 10 कैबिनेट मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है. इस आयोजन में कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के कई दिग्गज शामिल होने वाले हैं. लेकिन आयोजन से पहले ही इस समारोह के रंग में भंग पड़ता दिखाई दे रहा है. दरअसल, पहले कहा जा रहा था कि जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के चीफ तारिक हमीद कर्रा भी इस कैबिनेट में शामिल होकर मंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन अब कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि आज उनकी पार्टी का कोई भी विधायक मंत्री पद की शपथ नहीं लेगा और पार्टी बाहर से समर्थन करने पर भी विचार कर रही है. जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस प्रभारी भरत सिंह सोलंकी का कहना है कि फिलहाल नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के बीच बातचीत चल रही है. चर्चा पूरी होने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. बात पूरी न हो पाने के कारण आज कोई भी कांग्रेस विधायक शपथ नहीं लेगा. इस बात को लेकर भी चर्चा चल रही है कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा रहेगी या फिर उसे बाहर से समर्थन करेगी. कांग्रेस के इस बयान से सियासी गलियारों में हलचल शुरू हो गई है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था और माना जा रहा था कि कांग्रेस भी इस सरकार का हिस्सा रहेगी. लेकिन आज शपथ ग्रहण से पहले कांग्रेस के ऐलान ने सभी को चौंका दिया है, क्योंकि कांग्रेस विधायक के शपथ न लेने का सीधा मतलब है कि फिलहाल कैबिनेट शेयरिंग को लेकर बात फाइनल नहीं हो सकी है और कांग्रेस के पास बाहर से समर्थन देने का विकल्प भी है ताकि किसी तरह का दबाव भी न रहे. NC-कांग्रेस गठबंधन को 48 सीटें बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने जीत हासिल की. 90 सीटों में से नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 और कांग्रेस ने 6 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, बीजेपी 29 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही. महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी. ये है जम्मू-कश्मीर का नंबर गेम जम्मू कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों के लिए चुनाव हुए थे और उपराज्यपाल की ओर से पांच विधायकों के मनोनयन को भी जोड़ लें तो सदन की स्ट्रेंथ 95 पहुंचती है. 10 फीसदी वाली कैप भी है, ऐसे में मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या 9.5 यानि अधिकतम 10 ही हो सकती है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के 42 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं और चुनाव पूर्व गठबंधन में शामिल रही कांग्रेस के छह, सीपीएम के एक विधायक हैं. चुनाव पूर्व गठबंधन से ही 49 विधायक हैं और अब पांच निर्दलीय विधायकों ने भी उमर सरकार के समर्थन का ऐलान कर दिया है. आम आदमी पार्टी भी गिव एंड टेक के फॉर्मूले पर समर्थन ऑफर कर चुकी है. recent visitors 71

ऊर्जा मंत्री तोमर ने सीवर लाइन चौक मिलने पर जताई नाराजगी, लोगों से किया आग्रह, कचरा निगम के वाहन में ही डालें

अभियान के तीसरे दिन उपनगर ग्वालियर की विभिन्न बस्तियों में पहुँचे ऊर्जा मंत्री तोमर ऊर्जा मंत्री तोमर ने साफ-सफाई एवं मूलभूत समस्याओं की वस्तुस्थिति जानी ऊर्जा मंत्री तोमर ने सीवर लाइन चौक मिलने पर जताई नाराजगी, लोगों से किया आग्रह, कचरा निगम के वाहन में ही डालें ग्वालियर उपनगर ग्वालियर की बस्तियों की साफ-सफाई एवं मूलभूत समस्याओं के निराकरण के लिये ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तीसरे दिन भी तोमर ने इस क्षेत्र की विभिन्न बस्तियों में पहुँचकर साफ सफाई एवं विद्युत, सीवर व पेयजल आदि समस्याओं की वस्तुस्थिति जानी। उन्होंने मेवाती मोहल्ले में सीवर चौक मिलने पर नाराजगी जताई। साथ ही स्वयं खडे होकर सीवर की सफाई कराई। तोमर ने नगर निगम के अधिकारियों को इस सीवर लाइन को सुचारू करने के निर्देश भी दिए। ऊर्जा मंत्री तोमर ने अभियान के तीसरे दिन शील नगर से यात्रा प्रांरभ की। शील नगर से चंद्रनगर, कोटेश्वर मंदिर, इंद्रा कॉलोनी, सदाशिव नगर, गुरूनानक नगर, मेवाती मोहल्ला, बहोडापुर, किशनबाग, लक्ष्मीपुरम, किशनबाग, गरगज कॉलोनी, 20 सूत्रीय नगर व इस्लामपुरा होते हुए रामाजी का पुरा पहुँचकर यात्रा का समापन किया गया। भ्रमण के दौरान मंत्री तोमर ने इंद्रा कॉलोनी में स्वयं झाडू लगाकर सफाई की और स्थानीय निवासियों से अपने घर के साथ-साथ मोहल्ले की गलियों को साफ-सुथरा रखने में सहयोग देने का आह्वान किया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि दीपावली त्यौहार को ध्यान में रखकर साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था करें और किसी भी बस्ती में अंधेरा न रहे, इसके लिए खराब स्ट्रीट लाइट तत्काल बदली जाएँ। यात्रा के दौरान ऊर्जा मंत्री तोमर ने स्थानीय निवासियों से कहा कि वे अपने घरों का कचरा बाहर न फेंककर नगर निगम के कचरा वाहन में डालें। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कचरा वाहन नियमित रूप से सभी बस्तियों में पहुँचें। तोमर ने भ्रमण के दौरान विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि ट्रांसफार्मर से घास एवं बेलों के हटाने के साथ ही जहां जालियां नहीं लगी हैं वहां जालियां लगाई जाए। भ्रमण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे। recent visitors 40

सरकारी नौकरी का संकेत देती है आपकी हथेली की ये रेखा, शानों-शौकत से कटता है जीवन

हमारी हथेली पर मौजूद हर आड़ी तिरछी रेखा हमारे जीवन और भविष्य के बारे में कोई न कोई जानकारी देती हैं। इन रेखाओं के आधार पर हस्तरेखा विज्ञान की मदद से हम अपने जीवन के बारे में जान सकते हैं। हस्तरेखा शास्त्र में इन रेखाओं के बारे में गहराई से बताया गया है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, हथेली पर उभरे हुए भागों को पर्वत कहा जाता है, जो ग्रहों से संबंधित होते हैं और हमारे व्यक्तित्व, भाग्य और जीवन की घटनाओं को भी प्रभावित करते हैं। कई बार कुछ लोगों के हाथ में ऐसे राजयोग बनते हैं, जो उनको जीवन में कई तरह के लाभ पहुंचाते हैं। ऐसे राजयोग की वजह से व्यक्ति राजा जैसा जीवन व्यतीत करता है। इन्हीं में से एक सिंहासन राजयोग भी होता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, सिंहासन राजयोग कई प्रकार के होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में सिंहासन राजयोग होता है, उनके लिए सरकारी नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कैसे बनता है हाथ में सिंहासन राजयोग जिस व्यक्ति की कुंडली में दशम भाव का स्वामी कुंडली में पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में बैठा हो तो सिंहासन राजयोग बनता है। अगर दसवें भाव का स्वामी दूसरे घर या फिर पंचम और नौवें घर में हो तो भी सिंहासन राजयोग बनने की संभावना रहती है।  इस योग को बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन वह राजा की तरह व्यतीत होता है। सिंहासन राजयोग बनने पर व्यक्ति अपनी मेहनत से जिंदगी में नाम कमाता है। माना जाता है कि ऐसे लोग मेहनत करने से कभी पीछे नहीं हटते है। साथ ही ऐसे लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभाना भी बखूबी आता है। सिंहासन राजयोग के प्रभाव सिंहासन राजयोग वाले लोग अपना ही नहीं बल्कि अपने परिवार के लोगों का भी नाम उंचा करते हैं। ऐसे लोगों को कभी भी आर्थिक परेशानी नहीं होती है। इन लोगों को ज्यादा परिवर्तन पसंद नहीं है। इसके अलावा इन्हें अच्छा सलाहकार भी माना जाता है। recent visitors 107

फ्लाइंग फेस्टिवल में स्पॉट लैंडिंग पैराग्लाइडिंग चैम्पियनशिप में विदेशियाें सहित 50 पायलट लेंगे भाग

शिमला शिमला फ्लाइंग फेस्टिवल और हॉस्पिटैलिटी एक्सपो 2024 के द्वितीय संस्करण का उद्घाटन आज बुधवार काे जुन्गा में स्थित द ग्लाइड इन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल करेंगे। इसका आयोजन पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन शिमला, एमएसएमई मंत्रालय और राज्य का उद्योग विभाग संयुक्त से रूप से करेंगे। एक्सपाे के आयोजक अरुण रावत ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाना है ताकि शिमला और इसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। उन्हाेंने बताया कि फेस्टिवल की एक प्रमुख विशेषता स्पॉट लैंडिंग पैराग्लाइडिंग चैम्पियनशिप होगी, जिसमें भारत और विदेशों से 50 से अधिक पायलट भाग लेंगे। ये पायलट सोलो और टीम श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। इसके विजेताओं को पांच लाख रुपये के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। सोलो श्रेणी का प्रथम पुरस्कार 2.25 लाख रुपये है। उन्हाेंने बताया कि इस फेस्टिवल में 40 से अधिक प्रदर्शकों की एक प्रदर्शनी भी लगेगी, जिसमें लगभग 20 स्टार्टअप्स शामिल होंगे। इसके बाद, स्टार्टअप पर एक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 18 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम की ओर से होमस्टे मालिकों और एडवेंचर व तीर्थयात्रा गाइडों के लिए योग्यता मानकों पर एक सम्मेलन और कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रसिद्ध डब्ल्यूडब्लयूइ रेसलर द ग्रेट खली 18 अक्टूबर को शामिल होंगे, जो युवाओं को एडवेंचर स्पोर्ट्स को वैकल्पिक करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। उसी दिन ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का समापन 19 अक्टूबर को हाेगा, जिसमें मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान और विधायक (भोरंज) सुरेश कुमार उपस्थित रहेंगे।     recent visitors 121

चारधाम यात्रा अब अंतिम चरण में अब तक 40 लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे चारधाम

देहरादून  हरी-भरी वादियां, ऊंचे-ऊंचे पहाड़, सीढ़ीनुमा-घुमावदार सड़कें, हिमालय व हिल स्टेशन समेत देवभूमि का प्राकृतिक सौंदर्य इन दिनों पर्यटकों को खूब लुभा रहा है। मई से शुरू हुई राज्य की चारधाम यात्रा इस वर्ष अब तक तीर्थयात्रियों का आंकड़ा 40 लाख पार कर चुका है। राज्य में अब तक चार लाख 80 हजार 788 वाहन भी चारधाम पहुंच चुके हैं। अभी भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री चारधाम यात्रा पर देवभूमि पहुंच रहे हैं। दरअसल, इस वर्ष की चारधाम यात्रा अब अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में सभी धाम छह माह के लिए बंद हो जाएंगे। ऐसे में हरिद्वार से लेकर उच्च हिमालय तक आस्था पथ गुलजार है। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी की लाइफलाइन है। चारधाम यात्रा से हजारों परिवारों को काफी आस होती है। उत्तराखंड समेत आसपास के राज्यों के अलावा नेपाल के नागरिक भी चारधाम यात्रा के सहारे गुजर-बसर करने देवभूमि आते हैं। इस वर्ष 31 जुलाई की आपदा भी आस्था की डगर पर श्रद्धालुओं के पांव रोक नहीं पाई। इस वर्ष अब तक 40 लाख 92 हजार 360 तीर्थयात्री सुरक्षित धार्मिक यात्रा कर चारों धामों में शीश नवा चुके हैं। इस दौरान सबसे अधिक यात्री केदारनाथधाम में मंगलवार तक 13 लाख 67 हजार 567 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। बद्रीनाथ धाम में 11 लाख 18 हजार 348 व गंगोत्री धाम में सात लाख 53 हजार 397 तो यमुनोत्री धाम में अब तक छह लाख 60 हजार 333 तीर्थयात्रियों ने हाजिरी लगा चुके हैं। साथ ही हेमकुंड साहिब दरबार में एक लाख 83 हजार 722 व गौमुख में अब तक 8993 भक्त मत्था टेक चुके हैं। वहीं, अभी भी तीर्थयात्रियों का केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंचने का सिलसिला जारी है। अकेले केदारनाथ धाम में प्रतिदिन 10 हजार के पार तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं। विश्व फलक पर अतिथि देवो भव: का संदेश देती चारधाम यात्रा शक्ति-भक्ति से लबरेज पुष्कर सिंह धामी की सरकार सुरक्षित धार्मिक यात्रा को लेकर प्रतिबद्ध है। ऐसे में चारधाम यात्रा विश्व फलक पर अतिथि देवो भव: का संदेश दे रही है। यह संभव हो पाया है सरकार और प्रशासन के समन्वय से। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा कराना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है। चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित और मजबूत करने लिए यात्रा प्राधिकरण बनाया जा रहा है। इसके लिए चारधाम यात्रा एवं इससे जुड़े लोगों और स्टेक होल्डर्स के सुझाव लिए जा रहे हैं।       recent visitors 58