शेयर बाजार से चाहतें हैं पैसा कमाना तो इन ट्रेडिंग रणनीतियों है कबीले तारीफ

मुंबई ट्रेडिंग का मतलब सिक्टोरिटीज को खरीदना और बेचना होता है। ट्रेडिंग भी कई प्रकार की होती हैं। एक दिन से लेकर सालों के लंबे अंतराल के लिए भी ट्रेडिंग की जाती है। इसके साथ ही अलग-अलग बाजारों के माहौल और वहां मौजूद जोखिम से जुड़ी विभिन्न ट्रेडिंग रणनीतियां शेयरों में कारोबार करने के समय अपनाई जाती हैं। यहां पर हम कुछ ट्रेडिंग रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं जो बाकी रणनीतियों में से सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। ये रणनीतियां निवेशकों को तर्कसंगत निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) इंट्राडे ट्रेडिंग जिसे डे ट्रेडिंग के रूप में भी जाना जाता है। ये ऐसी ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें निवेशक एक ही दिन में शेयरों को खरीदते और बेचते हैं। वे शेयर बाजार के बंद होने के समय से पहले ट्रेडिंग बंद कर देते हैं। एक ही दिन में वे मुनाफा और घाटा बुक करते हैं। निवेशक इन शेयरों में एक दिन में कुछ सेकंड, घंटे के लिए या इसमें दिन भर में कई बार ट्रेड ले सकते हैं। इसलिए इंट्राडे एक अत्यधिक वोलाटाइल ट्रेडिंग रणनीति मानी जाती और इसके लिए तेजी से निर्णय लेना होता है। पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional Trading) पोजिशनल ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जहां शेयर्स को महीनों या सालों के लंबे समय तक रखा जाता है। ऐसे शेयरों में समय के साथ भाव में बड़ी बढ़त की अपेक्षा के साथ मुनाफा कमाने की उम्मीद की जाती है। निवेशक आमतौर पर फंडामेंटल एनालिसिस के साथ कंपनी का टेक्निकल ग्राउंड देखकर इस शैली को अपनाते हैं। इसलिए इस प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति में आमतौर पर बाजार के रुझान और उतार-चढ़ाव जैसी अल्पकालिक जटिलताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading) स्विंग ट्रेडिंग आमतौर पर एक ऐसी रणनीति है जहां निवेशक शेयरों के भाव में और तेजी की उम्मीद में एक दिन से अधिक समय तक शेयरों को अपने पास रखते हैं। स्विंग ट्रेडर्स आने वाले दिनों में बाजार की गतिविधियों और रुझानों की भविष्यवाणी करने के लिए जाने जाते हैं। इंट्राडे ट्रेडर्स और स्विंग ट्रेडर्स के बीच स्टॉक को अपने पास रखने की समय सीमा में महत्वपूर्ण अंतर होता है। इसलिए कहा जाता है कि ज्यादातर टेक्निकल ट्रेडर्स स्विंग ट्रेडिंग की कैटेगरी में आते हैं। टेक्निकल ट्रे़डिंग (Technical Trading) टेक्निकल ट्रेडिंग में ऐसे निवेशक शामिल हैं जो शेयर बाजार में प्राइस चेंज की भविष्यवाणी करने के लिए अपने तकनीकी विश्लेषण ज्ञान का उपयोग करते हैं। इस ट्रेडिंग शैली में कोई विशेष समय-सीमा नहीं होती है क्योंकि यह एक दिन से लेकर महीनों तक के लिए भी हो सकती है। बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने के लिए अधिकांश ट्रेडर्स अपने टेक्निकल एनालिसिस स्किल्स का उपयोग करते हैं। हालांकि स्टॉक की कीमतों का निर्धारण करते समय सबसे महत्वपूर्ण टेक्निकल एनालिसिस बाजार की परिस्थिति होती है। फंडामेंटल ट्रेडिंग (Fundamental Trading) फंडामेंटल ट्रेडिंग का मतलब स्टॉक में निवेश करना होता है जहां ट्रेडर्स समय के साथ भाव में तेजी की उम्मीद के साथ कंपनी के स्टॉक को खरीदता है। इस तरह की ट्रेडिंग में 'बाय एंड होल्ड' रणनीति में विश्वास किया जाता है। इस प्रकार की ट्रेडिंग आमतौर पर कंपनी के फोकस्ड इंवेंट्स में किया जाता है। इसके लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, नतीजों, ग्रोध और मैनेजमेंट क्वालिटी का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाता है। मिंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये ट्रेडिंग रणनीतियाँ बहुत काम की होती हैं और निवेशक को उस ट्रेडिंग शैली पर निर्णय लेने में मदद करती हैं जिसे वे अपनाना चाहते हैं। प्रत्येक प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति से जुड़े जोखिम और लागत की गहन समझ के साथ ट्रेडर्स चाहें तो रणनीतियों के संयोजन का उपयोग करके भी शेयरों में खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। recent visitors 75

ज्यादातर भारतीय खा रहे हैं तय मात्रा से दोगुना नमक, जानिए इसके नुकसान

हाई सोडियम (नमक) वाली चीजों को सेहत के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक माना जाता रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि नमक वाली चीजों के अधिक सेवन के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है जिसे हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता है। पर इसके नुकसान सिर्फ हृदय रोगों तक ही सीमित नहीं हैं, ये आदत आपमें किडनी की बीमारी, हड्डियों की कमजोरी को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। यानी शरीर को स्वस्थ और फिट रखना है तो आहार में नमक की मात्रा कम करना बहुत जरूरी है। ज्यादा नमक खाने के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और इससे बचाव के लिए सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि हमें कितनी मात्रा में नमक खाना चाहिए? और कितना नमक नुकसानदायक हो सकता है। एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में ज्यादातर लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित मात्रा से दो-तीन गुना अधिक नमक खाते हैं। कहीं आप भी तो बहुत अधिक नमक का सेवन नहीं कर रहे हैं? कितना नमक खाना सेहत के लिए ठीक है? डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी सेहत के लिए वयस्कों को दिनभर में 4-5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। ये मात्रा एक चम्मच नमक के बराबर है।यहां समझना जरूरी है कि नमक के सेवन का मतलब सिर्फ भोजन में डालने वाले नमक से नहीं है। चिप्स, नमकीन, पैक्ड फूड्स, जंक फूड आदि में भी नमक की अधिक मात्रा होती है। इन सभी चीजों को मिलाकर एक दिन में एक टेबलस्पून से अधिक नमक नहीं खाना चाहिए। भारत में नमक की खपत अधिक इसी साल मई में प्रकाशित डब्ल्यूएचओ की  वैश्विक रिपोर्ट में चिंता जताते हुए विशेषज्ञों ने कहा था कि भारतीय लोग तय मात्रा से बहुत अधिक नमक का सेवन करते हैं। रिपोर्ट में भारत को अत्यधिक नमक की खपत वाले शीर्ष 50 देशों में रखा गया है। स्वस्थ शरीर के लिए आदर्श मात्रा प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 5 ग्राम तक है, जबकि ज्यादातर लोग प्रतिदिन 11 ग्राम से अधिक नमक खाते हैं। बढ़ता जा रहा है हाई ब्लड प्रेशर का खतरा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट कहती है, हर चार में से एक व्यक्ति हाइपरटेंशन का शिकार हो सकता है। हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर को हृदय रोगों के लिए प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। डॉक्टर कहते हैं, आहार में नमक की मात्रा कम करके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखा जा सकता है। इस एक आदत में सुधार करके आप हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचे रह सकते हैं। कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं खा रहे हैं ज्यादा नमक? स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बहुत ज्यादा नमक खाने के कारण आपको फौरी तौर पर कुछ लक्षणों का अनुभव हो सकता है, जिसपर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। ज्यादा नमक वाली चीजों के सेवन के कारण आपको पेट फूलने, ब्लड प्रेशर बढ़े रहने, पैरों में सूजन, बहुत अधिक प्यास लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अगर आपको भी इस तरह की दिक्कतों का अनुभव होता है तो नमक या वो चीजें खाना कम कर दें जिनमें नमक की अधिकता हो सकती है। recent visitors 64

Govt Scheme: इधर एग्जाम पास, उधर खाते में आएंगे 100000 रुपए

नई दिल्ली यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को अक्सर आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तेलंगाना सरकार ने एक अहम योजना शुरू की है। दरअसल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा यानी प्रीलिम्स एग्जाम पास करने वालों के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इस योजना का नाम 'राजीव गांधी सिविल्स्स अभय हस्तम योजना' रखा गया है। योजना के तहत यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले राज्य के उम्मीदवारों को मेंस की तैयारी के लिए 1 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। आइए इस योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं। क्या है राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना तेलंगाना सरकार की राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना का मकसद है कि आर्थिक दिक्कतों की वजह से यूपीएससी की तैयारी करने वाले किसी छात्र की तैयारी ना रुके। यह योजना यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को आगे की तैयारी के लिए आर्थिक तौर पर एक मजबूती प्रदान करती है। योजना के तहत, यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवारों को 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। इस राशि के जरिए उम्मीदवार यूपीएससी की मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग, स्टडी मैटेरियल और दूसरे जरुरी संसाधनों से जुड़े खर्चों को कवर कर सकते हैं। योजना के तहत कहां से दिए जाएंगे रुपए? राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना के तहत यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के माध्यम से आर्थिक मदद दी जाएगी। यह मदद उन छात्रों को मिलेगी, जो सिविल्स सेवा परीक्षा के पहले चरण को पास कर लेंगे। छात्रों को दी जाने वाली ये मदद सिंगरेनी कोलियरीज के उस कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत वह कई निर्माण कार्यक्रम चलाता है। गौरतलब है कि सिंगरेनी कोलियरीज भारत सरकार के अधीन एक कोयला खनन कंपनी है और तेलंगाना सरकार के ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आती है। कौन उठा सकता है योजना का लाभ? अगर आप यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके हैं और सामान्य (ईडब्ल्यूएस), पिछड़ा वर्ग, एससी, या एसटी वर्ग से हैं, तो आप राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना का फायदा उठा सकते हैं। इस योजना के तहत आपको आर्थिक मदद मिलेगी। लेकिन ध्यान रहे कि आप तेलंगाना के स्थायी निवासी होने चाहिए और आपके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। योजना का लाभ लेने के लिए, उम्मीदवारों को यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। इसके बाद ही वे इस योजना के तहत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आर्थिक सहायता केवल एक बार ही दी जाएगी, भले ही उम्मीदवार सिविल्स सेवा परीक्षा कई बार दें। अप्लाई करने के लिए चाहिए ये डाक्यूमेंट्स यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण तेलंगाना में निवास का प्रमाण पत्र (आधार कार्ड, वोटिंग कार्ड, या अन्य वैध दस्तावेज) शैक्षणिक प्रमाण पत्र मोबाइल नंबर रकम ट्रांसफर करने के लिए बैंक खाते की डिटेल पासपोर्ट साइज की फोटो कैसे करें आवेदन? राजीव गांधी सिविल्स अभय हस्तम योजना के लिए तेलंगाना सरकार द्वारा बनाई गई आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं वेबसाइट पर 'अप्लाई नाउ' विकल्प पर क्लिक करें इसके बाद स्क्रीन पर एक एप्लिकेशन फॉर्म आएगा फॉर्म में अपना पूरा नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी सहित जरूरी जानकारी भरें सारी जानकारी भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें recent visitors 76

Maharashtra Elections: मैदान में 8,000 उम्मीदवार, किस पार्टी के हिस्से कितनी सीटें?

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में सीट बंटवारे की तस्वीर अब साफ हो गई है, क्योंकि मंगलवार को नामांकन समाप्त हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 148 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है – जो आधा दर्जन प्रमुख राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण चुनाव में 103 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। शिंदे की शिवसेना ने 80 उम्मीदवार उतारे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 80 कैंडिडेट उतारे हैं। दूसरे उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की NCP ने 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 53 सीटों पर अपने कैंडिडेटों को उतारा है। पांच सीटें अन्य महायुति सहयोगियों को दी गईं हैं, जबकि दो खंडों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। MVA में सीट बंटवारे की व्यवस्था विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) में कांग्रेस ने 103 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 89 और NCP (SP) ने 87 उम्मीदवार नामित किए। 6 सीटें अन्य एमवीए सहयोगियों को दी गईं हैं, जबकि तीन विधानसभा क्षेत्रों पर कोई स्पष्टता नहीं थी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस 8,000 उम्मीदवार मैदान में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे के प्रमुख राजनीतिक दलों सहित लगभग 8,000 उम्मीदवारों ने 288 विधानसभा सीटों के लिए अपने नामांकन दाखिल किए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 7,995 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग (EC) के पास 10,905 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। कब होगी नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी की लास्ट डेट? उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 22 अक्टूबर को शुरू हुई और 29 अक्टूबर को समाप्त हो गई। नामांकन पत्रों का सत्यापन और जांच 30 अक्टूबर को होगी और उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि 4 नवंबर (अपराह्न 3 बजे तक) है। recent visitors 70

इंदौर में हवा की सेहत खराब, एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 के पार

इंदौर इंदौर की आबोहवा लगातार खराब होती जा रही है। दिल्ली, मुंबई की तरह इंदौर भी अब वायु प्रदूषण के मामले में लगातार नए रिकार्ड बना रहा है। पिछले एक सप्ताह में इंदौर का एक्यूआई AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 के पार चल रहा है। 26 अक्टूबर को तो यह 235 तक पहुंचा जो बेहतर खतरनाक स्तर है।      क्या हैं कारण इंदौर में वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारण हैं अधूरे प्रोजेक्ट्स, प्रदूषण और पेड़ों की कटाई। इसकी वजह से लगातार वायु प्रदूषण हो रहा है। पिछले पांच साल में इंदौर की वायु गुणवत्ता को लगातार खराब होते देखा गया है। कोविड के समय जहां इंदौर की आबोहवा अपने सबसे बेहतर स्तर पर थी वहीं अब वह अपने सबसे खराब स्तर पर है। गाड़ियों का चलना बंद होने से यह सुधार देखा गया था। अब लगातार बढ़ रही गाड़ियां शहर को प्रदूषण में धकेलती जा रही हैं। मौसम भी कर रहा परेशान इस साल इंदौर में मौसम भी लगातार परेशान कर रहा है। दीपावली तक शहर में बारिश हो रही है और बीच बीच में पड़ रही बेतहाशा गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। इस बार दशहरा और नवरात्रि के कार्यक्रम बारिश की वजह से बिगड़ गए। अब तेज ठंड के मौसम में तेज गर्मी और उमस से लोग परेशान हैं। पिछले एक सप्ताह से तापमान भी 35 डिग्री के आसपास चल रहा है। कैसे होगा सुधार शहर के पर्यावरण को सुधारने के लिए घटती हुई हरियाली को बचाना होगा। पेड़ों की कटाई रोकनी होगी और गाड़ियों का इस्तेमाल कम करना होगा। इसके साथ अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को भी पूरा करना होगा ताकि धूल से निजात मिले recent visitors 124

नहर एवं सिंचाई विभाग दौहान नदी को पुनर्जीवित करने 20 से अधिक गांवों के गिरते भूजल के लिए किसी वरदान से कम नहीं

महेंद्रगढ़ नहर एवं सिंचाई विभाग दौहान नदी को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू की गई दो परियोजनाएं क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों के गिरते भूजल के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। विभाग की ओर से 50 वर्ष से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही 30 किलोमीटर क्षेत्र में फैली दौहान नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 120 क्यूसिक नहरी पानी छोड़ने की परियोजना तैयार कर ली है। विभाग की ओर से इन दो परियोजनाओं पर कुल 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दौहान नदी क्षेत्र में पानी पहुंचने से 20 से अधिक गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह दो परियोजनाएं होंगी क्षेत्र के लोगों सिंचाई विभाग की ओर से जवाहरलाल नेहरू नहर (जेएलएन) के एनबी-1 झगड़ोली पंप हाउस से 60 क्यूसिक पानी की क्षमता वाली भूमिगत पाइप लाइन दबाकर गांव माजरा दौहान क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। जुलाई माह में इस परियोजना पर काम शुरू किया गया था जो युद्ध स्तर पर जारी है। 1600 एमएम परिधि वाले सीमेंटेड पाइप की 5.2 किलोमीटर लंबी लाइन से 60 क्यूसिक पानी दौहान क्षेत्र में छोड़ा जा सकेगा। सिंचाई विभाग इस परियोजना पर 13 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इस समय युद्ध स्तर पर इस परियोजना पर काम चल रहा है तथा अंतिम चरण में है। वहीं दूसरी परियोजना के तहत जेएलएन के एमसी-5 व एनबी-1 पंप हाउसों के बीच से गांव भगड़ाना तक कुल 4.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन दबाकर भगड़ाना गांव के दौहान नदी क्षेत्र में 60 क्यूसिक पानी पहुंचाया जाएगा। इस परियोजना पर सिंचाई विभाग कुल 15 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इस परियोजना के लिए विभाग की ओर से सभी प्रक्रिया पूरी कर एजेंसी को टेंडर अलॉट किया जा चुका है तथा नवंबर माह तक इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार 30 किलोमीटर लंबाई तक फैले दौहान नदी क्षेत्र से गांव डेरोली जाट, देवास, कुकसी, नांगल सिरोही, कौथल कलां, कौथल खुर्द, नानगवास, खातीवास, बेरी, भांडोर ऊंची, जासावास, देवनगर, चितलांग, डुलाना, माजरा खुर्द, माजरा कलां, सिसोठ, भगड़ाना, लावन, झूक, मालड़ा सराय, मालड़ा बास, पाली, जाट, भुरजट, बसई तक 20 से अधिक गांवों के भूजल स्तर में 120 क्यूसिक नहरी पानी रिचार्ज का काम करेगा। डार्क जोन में शामिल महेंद्रगढ़ क्षेत्र के इन गांवों के लिए यह दोनों परियोजनाएं किसी वरदान से कम नहीं हैं। साथ ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही दौहान नदी को भी नया जीवन मिल सकेगा। इस समय जेएलएन को मिलने वाला अतिरिक्त पानी देवास गांव से गुजरने वाले दौहान क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है। जिले के लिए जीवन रेखा कही जाने वाली जेएलएन कैनाल से पानी ओवरफ्लो होकर हर साल किसानों की फसलें बर्बाद हो रही थी लेकिन अब इस पानी से क्षेत्र का भूजल स्तर सुधरेगा। – कंवर सिंह यादव, विधायक महेंद्रगढ़। सिंचाई विभाग की ओर से दोनों परियोजनाओं को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। एनबी-1 झगड़ोली पंप हाउस से 60 क्यूसिक पानी की क्षमता वाली परियोजना का काम अंतिम चरण में चल रहा है। नवंबर माह तक यह परियोजना पूरी हो जाएगी। इसके शीघ्र बाद ही नवंबर माह में ही भगड़ाना दौहान क्षेत्र में पानी छोड़ने के लिए 4.5 किलोमीटर लंबी 1600 एमएम परिधि की पाइप लाइन दबाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। – दीपक कुमार, कनिष्ठ अभियंता नहर एवं सिंचाई विभाग महेंद्रगढ़ recent visitors 116

निवेश की पसंदीदा जगह बना भारत, मैन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलाजी के क्षेत्र में विश्व में बन रहा अग्रणी

नई दिल्ली भारत को विदेशी निवेश का पसंदीदा केंद्र बनाने में हमारी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की अहम भूमिका है। पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में देश की विकास दर अनुमान से अधिक 7.2 प्रतिशत रही। गत जून में देश में जीएसटी संग्रह, विनिर्माण के लिए पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआइ), यात्री वाहनों की बिक्री और यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) के जरिये हुए लेनदेन में प्रभावी वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे उत्साहवर्द्धक आर्थिक आंकड़ों से दुनियाभर के वित्तीय संगठन और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां चालू वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की विकास दर के छह से 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद व्यक्त कर रही हैं। कहा जा रहा है कि भारत विश्व अर्थव्यवस्था में नई शक्ति प्राप्त कर रहा है। चार वैश्विक रुझान-जनसांख्यिकी, डिजिटलीकरण, डिकार्बोनाइजेशन और डिग्लोबलाइजेशन नए भारत के पक्ष में हैं। साथ ही देश में प्रतिभाशाली नई पीढ़ी की कौशल दक्षता, आउटसोर्सिंग और बढ़ते हुए मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति के कारण विदेशी निवेशक भारत की ओर देखने लगे हैं। मोदी सरकार ने उद्योग-कारोबार को आसान बनाने के लिए विगत नौ वर्षों में करीब 1,500 पुराने कानूनों और 40 हजार अनावश्यक अनुपालन समाप्त किए हैं। इस दौरान आर्थिक क्षेत्र में जीएसटी और दिवालिया कानून जैसे सुधार किए गए हैं। बैंकिंग क्षेत्र में जोरदार सुधार करके मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद की मदद से अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया गया है। कारपोरेट टैक्स को कम किया गया है। भारत के युवाओं ने डिजिटल और उद्यमिता के क्षेत्र में दुनिया भर में दबदबा कायम किया है और 100 से ज्यादा यूनिकार्न बनाए हैं। पिछले नौ साल में एक लाख से ज्यादा स्टार्टअप भी शुरू हुए हैं। कानून के कई प्रविधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे कदमों से देश में विदेशी निवेश का प्रवाह तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए सरकार जिन रणनीतियों के साथ आगे बढ़ रही है, उससे देश में विदेशी निवेश बढ़ रहा है। भारत को एक वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में बदलने के लिए मेक इन इंडिया 2.0, मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों के लिए तकनीकी समाधान को बढ़ावा देने के लिए उद्योग 4.0, स्टार्टअप संस्कृति को उत्प्रेरित करने के लिए स्टार्टअप इंडिया, मल्टीमाडल कनेक्टिविटी अवसंरचना परियोजना के लिए पीएम गतिशक्ति और उद्योगों को डिजिटल तकनीकी शक्ति प्रदान करने के लिए डिजिटल इंडिया जैसी सफल गतिविधियों के कारण भारत चौथी औद्योगिक क्रांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियां शोध एवं नवाचार में आगे बढ़ रही हैं। आटोमेशन और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों पर भी उद्योग जगत की ओर से अपेक्षित ध्यान दिया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआइ) स्कीम के तहत 14 उद्योगों को करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये का आवंटन सुनिश्चित किया है। अब पीएलआइ स्कीम के सकारात्मक परिणाम आने शुरू भी हो गए है। इसकी बदौलत इस समय एशिया में अधिकांश निवेशकों को भारत से बेहतर कोई नहीं दिख रहा है। भारतीय शेयर बाजार में तेजी की यह भी एक बड़ी वजह है। प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे के बाद उद्योग-कारोबार से संबंधित ऐसा महत्वपूर्ण परिदृश्य उभरकर सामने आ रहा है, जिससे भारत दुनिया का नया मैन्यूफैक्चरिंग हब बनते हुए दिखाई देगा। माइक्रोन, एप्लाइड मैटेरियल्स और लैम रिसर्च जैसी कंपनियों की घोषणाओं से आने वाले दिनों में लाखों की संख्या में नई नौकरियां भी सृजित होंगी। कंप्यूटर चिप बनाने वाली अमेरिकन कंपनी माइक्रोन ने गुजरात में अपने सेमीकंडक्टर असेंबली एवं परीक्षण संयंत्र के परिचालन को वर्ष 2024 के अंत तक शुरू करने की घोषणा की है, जिस पर करीब 2.75 अरब डालर खर्च किए जाएंगे। देश में सेमीकंडक्टर के निर्माण से अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल जाएगी, क्योंकि सेमीकंडक्टर उद्योग स्टील, गैस और रसायन की तरह आधारभूत उद्योग है, जो कई सेक्टर की जरूरतों को पूरा करता है। सेमीकंडक्टर के निर्माण से आटोमोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स एवं रक्षा सेक्टर को काफी लाभ मिलेगा। उम्मीद करें कि भारत नई लाजिस्टिक नीति, गतिशक्ति योजना के कारगर कार्यान्वयन, नीतिगत सुधारों, कारोबार आरंभ करने के लिए सिंगल विंडो मंजूरी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, श्रमिकों को नए दौर के अनुरूप प्रशिक्षण देने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक और वित्तीय सुधारों से अगले वर्ष दुनिया के शीर्ष पांच पसंदीदा एफडीआइ वाले देशों की सूची में दिखाई देगा। इसका देश की आर्थिकी को व्यापक रूप से लाभ मिलेगा। (लेखक एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च, इंदौर के निदेशक हैं) recent visitors 103