Friday, July 10, 2026 11:09 am

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनिल विज का सामन्जसय कोई नया नहीं, समीक्षा करने में जुटे राजनीतिक दिग्गज

चंडीगढ़ हरियाणा में बीजेपी की राजनीति के पिछले करीब चार दशक से प्रमुख चेहरे हरियाणा के सबसे सीनियर विधायक परिवहन, ऊर्जा और श्रम मंत्री अनिल विज की दिल्ली परिक्रमा और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के राजनीतिक मायने राजनीतिक समीक्षक निकालने में लगे हुए हैं। अनिल विज भाजपा सरकार में 2014 में, 2019 में व अब 2024 में कैबिनेट मंत्री के पद पर हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनिल विज का सामन्जसय कोई नया नहीं है। लाल चौक कश्मीर में जब भाजपा के तत्कालीन नेता तिरंगा झंडा लहराने के लिए जा रहे थे, उस यात्रा में नरेंद्र मोदी के साथ अनिल विज का लगाव सबने देखा था। अनिल विज हरियाणा के उन राजनीतिक लोगों में से एक है, जो अपने संबंधों का ढींढोरा पिटने के आदि नहीं है। चार दशक से अधिक लंबी राजनीतिक पारी खेलने वाले अनिल विज भाजपा की हैट्रिक लगने के बाद सत्ता पक्ष में एक मात्र ऐसे विधायक और मंत्री है, जो हरियाणा के बहुत सारे लोग जब उनसे मिलने आते हैं तो उन्हें उनका नाम लेकर संबोधित करते हैं। आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और जनसंघ की पृष्ठभूमि से जुड़े अनिल विज ने भाजपा की राजनीति की बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे हैं। हरियाणा की विधानसभा में जब भाजपा के दो व चार विधायक हुआ करते थे, उस समय भी अनिल विज विधायक थे और विपक्ष के विधायक के रूप में सदन के भीतर इनकी आक्रामक भूमिका सबने देखी है। छात्र राजनीति से की शुरूआत 15 मार्च 1953 को जन्मे अनिल विज राजनीति में आने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा में थे। अनिल विज ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जरिए छात्र राजनीति में कदम रखा। वह एसडी कॉलेज, अंबाला कैंट में पढ़ते हुए राजनीति में एक्टिव रहे। 1970 में एबीवीपी ने अनिल विज को महासचिव बनाया। अनिल विज ने विश्व हिंदू परिषद, भारत विकास परिषद बीएमएस और ऐसे अन्य संगठनों के साथ सक्रिय रूप से काम किया। अनिल विज 1974 में भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी करने लगे लेकिन बीजेपी से जुड़े रहे। सुषमा स्वराज की जगह लड़े उपचुनाव 1990 में जब सुषमा स्वराज राज्यसभा के लिए चुनी गईं तो अंबाला छावनी की सीट खाली हो गई। अनिल विज ने बैंक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सुषमा स्वराज की सीट से उपचुनाव लड़े। अनिल विज यह उपचुनाव जीत गए। करीब 34 साल पहले 27 मई 1990 को तत्कालीन सातवीं हरियाणा विधानसभा में दो रिक्त हुई सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उस समय ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री हुआ करते थे। तब दडवा कला हलके से जनता दल की टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और अंबाला कैंट से अनिल कुमार विज विधायक निर्वाचित हुए थे। तब अनिल विज की आयु 37 वर्ष की थी। बैंक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अनिल विज 2019 में हुए 14वीं विधानसभा के चुनाव में लगातार तीसरी बार और कुल छठी बार अंबाला छावनी से चुनाव जीते थे। recent visitors 91

नर सेवा ही नारायण सेवा के मूलमंत्र को साकार कर रही है सरकार : ऊर्जा मंत्री श्री तोमर

भोपाल नर सेवा ही नारायण सेवा है, सेवा के इस मूलमंत्र को प्रदेश सरकार साकार कर रही है। समाज की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनायें पहुँचें, इसी भाव के साथ प्रदेश सरकार काम कर रही है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह बात शुक्रवार को रेसकोर्स रोड स्थित स्थानीय कार्यालय पर सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के 564 लाभार्थियों को हितलाभ प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने जेसी मिल के 34 श्रमिक परिवारों को आवासीय पट्टे सौंपकर उन्हें वास्तविक रूप से घर का स्वामी बनाया। मंत्री श्री तोमर ने 20 जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्राईसिकल भी सौंपीं। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने वायदे के अनुरूप जरूरतमंदों को योजनाओं का लाभ दिला रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को 564 हितग्राहियों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित कराया गया है। उन्होंने आह्वान किया कि ग्वालियर शहर को इन्दौर की तर्ज पर नम्बर एक शहर बनाने के लिए हम सब एकजुट होकर काम करें। ग्वालियर को स्वच्छता में अव्वल बनाने में सरकार भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। शुक्रवार को रेसकोर्स रोड़ स्थित अपने स्थानीय कार्यालय में ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत लाभ के प्रमाण पत्र प्रदान किए। आवासीय पट्टे मिले तो खुशी से झूम उठे जेसी मिल श्रमिक ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने जब लाइन नं.-1, सिमको साइट व श्याम बाबा मंदिर के पीछे निवासरत 34 जेसी मिल श्रमिकों को बहुप्रतीक्षित आवासीय पट्टे सौंपे तो श्रमिक परिवारों की खुशी देखते ही बनी। पट्टे पाकर श्रमिकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व ऊर्जा मंत्री श्री तोमर के जयकारे लगाए। पट्टा दिखाकर खुशी से झूम रहे राजकुमार दीक्षित बोले कि ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने प्रदेश सरकार के माध्यम से नामुमकिन से काम को मुमकिन करके दिखाया है। हम सब प्रदेश सरकार का यह उपकार कभी नहीं भूलेंगे। इस दौरान स्थानीय जन-प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 141

पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा विभिन्न जिलों में ई-लर्निंग सेंटर का किया शुभारंभ

  छतरपुर पुलिस मुख्यालय के निर्देशन में माह सितंबर वर्ष 2023 को पुलिस लाइन परिसर छतरपुर में पुलिस परिवार के बच्चों हेतु आवश्यक आधुनिक सुविधाओं सहित "दिशा स्टूडेंट लर्निंग सेंटर" की शुरुआत की गई थी। अध्यनरत विद्यार्थियों हेतु अनुकूल वातावरण, आवश्यकता अनुसार पाठ्य पुस्तकों, कंप्यूटर सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे एवं इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों की व्यवस्था भी की गई थी। आवश्यकता अनुसार दिशा लर्निंग सेंटर के विस्तारीकरण हेतु अतिरिक्त कक्ष क्रमांक 2 का शुभारंभ किया गया था। आज पुलिस महानिदेशक मध्य प्रदेश पुलिस श्री सुधीर कुमार सक्सेना द्वारा प्रदेश स्तरीय वर्चुअल मीटिंग आयोजित की गई। सागर संभाग, उज्जैन संभाग के जिलों एवं विशेष सशस्त्र बल बटालियन में आज ई लर्निंग सेंटर का शुभारंभ किया गया। साथ ही छतरपुर जिले सहित अन्य जिलों में पूर्व से संचालित ई लर्निंग सेंटर का निरीक्षण किया गया। सागर ज़ोन के जिला टीकमगढ़, निवाड़ी एवं 10वीं बटालियन सागर तथा जिला देवास, शाजापुर, रतलाम, आगर मालवा, नीमच, 24 बटालियन, 32 बटालियन में ई लर्निंग सेंटर का शुभारंभ किया गया। छतरपुर जिले में पुलिस लाइन में संचालित पुलिस परिवार के छात्र-छात्राओं के अध्ययन हेतु ई लर्निंग सेंटर के दो कक्ष हैं, 5G फाइबर वाईफाई नेटवर्किंग, सीसीटीवी कैमरा, पेयजल हेतु आर ओ वाटर कूलिंग, फर्नीचर इत्यादि की व्यवस्था है। कंप्यूटर सिस्टम एवं अन्य सॉफ्टवेयर उपयोग में है। पाठ्यक्रम पुस्तकें, समाचार पत्र, मासिक पत्रिका की उपलब्धता है। प्रतियोगी परीक्षाओं एवं इंटरव्यू की प्रैक्टिस भी होती है। छतरपुर ई-लर्निंग सेंटर से 4 अभ्यर्थी शासकीय सेवा में चयनित हो चुके हैं एवं 6 अभ्यर्थी पुलिस आरक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होकर शारीरिक दक्षता परीक्षा में चयनित हुए हैं। पुलिस महानिदेशक द्वारा छात्र-छात्राओं से संवाद कर शैक्षणिक स्थिति जानी, नियमित रूप से, ईमानदारी व अनुशासन से अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने हेतु प्रेरित किया। साथ ही पुलिस महानिदेशक द्वारा छात्र-छात्राओं के अध्ययन हेतु शांतिपूर्ण वातावरण की व्यवस्था करने पर पुलिस अधिकारियों, नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारी तथा संचालक को उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रशंसा कर शुभकामनाएं दी गई। आयोजित वर्चुअल मीटिंग में छतरपुर जिले से पुलिस उप महानिरीक्षक छतरपुर रेंज श्री ललित शाक्यवार, पुलिस अधीक्षक छतरपुर श्री अगम जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विक्रम सिंह, नोडल अधिकारी ई लर्निंग सेंटर छतरपुर रक्षित निरीक्षक पूर्णिमा मिश्रा, सहायक नोडल अधिकारी सूबेदार प्रभा सिलावट, संचालक महिला आरक्षक शिवानी पाठक संबंधित पुलिस अधिकारी एवं ई-लर्निंग सेंटर छतरपुर से छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। recent visitors 67

विधायक रिकेश सेन प्रकरण पर कांग्रेस विधायक निषाद बोले – इन्हें जनता और विकास से कोई मतलब नहीं

रायपुर भिलाई वैशाली नगर के विधायक रितेश सेन ने तालाब के नामकरण को लेकर विरोध जता रहे युवक का जबड़ा पकड़ लिया था. इस घटनाक्रम पर कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब से बीजेपी की सरकार छत्तीसगढ़ में आई है, सत्ता के नशे में चूर है. सभी अहंकार में डूबे हुए हैं. इन्हें जनता और विकास से कोई मतलब नहीं है. गुंडरदेही से कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने मीडिया से चर्चा में कहा कि तालाब के नाम बदलना उनकी कुंठित मानसिकता का प्रतीक है. किसी दूसरे के धार्मिक मान्यताओं पर ऐसा करना सही नहीं है. वो छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता को नहीं बदल सकते हैं. इसके पहले विधायक रिकेश सेन ने घटना पर अपनी सफाई देते हुए कहा था कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि तालाब पहले से ही स्व. देवदास बंजारे के नाम पर था. इसके साथ उन्होंने मुद्दे को भिलाई नगर निगम के एमआईसी में ले जाने की बात कही. वहीं भाजपा नेता राजीव चक्रवर्ती ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर दुष्प्रचार कर रही है, जबकि घटना के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से बैठकर बात कर चुके हैं. सोशल मीडिया में मचा बवाल इस मामले में सोशल मीडिया में भी बवाल मचा हुआ है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटना का वीडियो एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जो युवक का धमका रहा है वह भाजपा विधायक रिकेश सेन है, और जिनसे बात हो रही है वह छत्तीसगढ़ की जनता है. यही है भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा. इसके साथ बहुत से दूसरे यूजर ने भी पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया दी है. पीसीसी चीफ ने सरकार को घेरा वहीं विधायक रिकेश सेन के वायरल वीडियो पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार को घेरते हुए कहा कि इस सरकार के विधायक सत्ता के नशे में चूर हो गये हैं. देश-प्रदेश की राजनीति में बीजेपी विफल होती है, तो दूसरों को दोष देती है. अपने विधायकों को नहीं रोक पा रही सरकार. अपराध क्या रोकेगी. बैज ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि के पास जनता जाती है, तो गला पकड़कर दादागिरी की जाती है. ईश्वर साहू के बेटे ने भी मारपीट की, स्वास्थ्य मंत्री पत्रकार को धमका रहे हैं. इस हरकत से साफ़ है कि विधायक सत्ता के नशे में चूर हो चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष के नाते घटना की निंदा करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता देख रही है. कांग्रेस मानसिक रूप से दिवालिया कांग्रेस के बयान पर पलटवार बीजेपी प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव ने कहा देश के अंदर व्यवस्था है, कानून है, संविधान है. आम नागरिक को अपनी राय रखने का अधिकार है. इस मामले पर सवाल होने चाहिए, सही-गलत पर चर्चा होनी चाहिए. मैंने भी वीडियो देखा, किसी भी तरह का आपत्तिजनक विषय नहीं है. भाजपा प्रदेश महामंत्री ने कहा कि विधायक, सांसद या जनप्रतिनिधि भी मानव हैं. कांग्रेस मानसिक रूप से दिवालिया हो चुकी है, इसलिए छोटे-छोटे मुद्दों पर विवाद कर रही है. कांग्रेस पहले जवाब दे कि अपराधिक घटनाओं में उनके लोग क्यों शामिल हैं? नाराज ग्रामवासियों ने जताया था विरोध बता दें कि कुरूद के नकटा तालाब (स्व. देवादास बंजारे) का नामकरण बिहार की लोक गायिका शारदा सिन्हा के नाम पर करने से नाराज ग्रामवासी अपना विरोध दर्ज कराने गुरुवार को विधायक रिकेश सेन के कार्यालय में पहुंचे थे. चर्चा के दौरान विधायक रिकेश सेन ने एक युवक का जबड़ा पकड़ लिया था, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है. recent visitors 127

मतदान से एक दिन पहले और मतदान दिवस के दिन प्रकाशित होने वाले राजनैतिक विज्ञापनों का प्रमाणन जरूरी

रायपुर सभी राजनैतिक दलों, रायपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के लिए उप निर्वाचन लडने वाले सभी प्रत्याशियों को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देश अनुसार मतदान दिवस एवं मतदान से एक दिन पूर्व मीडिया में प्रकाशित होने वाले राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों के विज्ञापनों का प्रमाणन मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी समिति (एमसीएमसी) से अनिवार्य रूप से कराना होगा। इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. गौरव सिंह ने जरूरी निर्देश भी जारी किए है। रायपुर दक्षिण विधानसभा उप निर्वाचन में 13 नवम्बर बुधवार को वोट डाले जाएंगे, इसे देखते हुए 12 व 13 नवम्बर को प्रिंट मीडिया में प्रकाशित किए जाने वाले ऐसे तमाम राजनीतिक विज्ञापनों को राज्य स्तर या जिला पर गठित प्रमाणन व मीडिया निगरानी समिति (एमसीएमसी) से पूर्व-प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए है। इन दोनों दिन राजनीतिक लाभ लेने व मतयाचना के लिए राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों द्वारा समाचार-पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराया जाता है। भारत निर्वाचन आयोग के निदेर्शानुसार राज्य स्तर पर एक राज्य स्तरीय एमसीएमसी कमेटी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा गठित की गई है, राज्य स्तरीय कमेटी में राजनीतिक दलों द्वारा प्रकाशित कराये जाने वाले राजनीतिक विज्ञापनों का प्रमाणीकरण कराया जा सकता है, इसके साथ ही हर जिले में जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जिला स्तर पर एमसीएमसी कमेटी गठित है। विधानसभा उप निर्वाचन लडने वाले प्रत्याशी अपने राजनीतिक विज्ञापनों को जिला स्तरीय समिति से प्रमाणीकरण करा सकते हैं। इसके लिए प्रत्याशियों को विज्ञापन प्रकाशन की प्रस्तावित तिथि से 3 दिन पहले तक विज्ञापन के प्रारूप की तीन प्रतियों के साथ निर्धारित प्रपत्र में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मीडिया प्रमाणन का मूल आधार आदर्श आचार संहिता के पालन से जुड़ा है। मीडिया में ऐसा कोई विज्ञापन नहीं दिया जाएगा जो सामाजिक समरसता को बिगाडने अथवा तनाव को बढ़ाने, शांति भंग करने, संविधान और कानून के विपरीत, नैतिकता, सदाचार के विपरीत हो। किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाले विज्ञापनों के प्रकाशन पर भी रोक रहेगी। कलेक्टर ने बताया कि मतदान के दिन और मतदान से एक दिन पहले मीडिया में प्रकाशित होने वाले राजनैतिक विज्ञापन का समिति द्वारा प्रमाणन कराया जाना आवश्यक है। इन विज्ञापनों में प्रिंट मीडिया, टीवी चैनल, केबल टीवी चैनल, रेडियो (निजी एफएम सहित), सिनेमा घर, ई-समाचार पत्र, बल्क एवं वाईस एसएमएस एवं सार्वजनिक स्थलों पर दृश्य-श्रव्य माध्यम शामिल है। recent visitors 48

थुलथुली मुठभेड़ में अत्याधुनिक हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद, 11 हथियारों की पहचान

दंतेवाड़ा अबूझमाड़ (नारायणपुर) के थुलथुली में महीने भर पहले हुई अब तक की सबसे बड़ी मुठभेड़ में मिले अत्याधुनिक हथियारों में से 11 हथियारों की पहचान हो गई है, जो नक्सलियों ने दो दशक में विभिन्न अलग-अलग मुठभेड़ों में फोर्स से लूटा था। इस मुठभेड़ में डीकेएसजेडसी मेंबर स्तर की नक्सली नीति उर्फ उर्मिला समेत 38 नक्सली मारे गए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बरामद हथियारों में से एक इंसास नक्सलियों ने 2009 में राजनांदगांव के मदनवाड़ा मुठ मुठभेड़ में लूटा था, जिसमें एसपी विनोद चौबे समेत 29 जवान बलिदान हुए थे। अबुझमाड़ के थुलथुली नेंदुर में बरामद दो दर्जन से अधिक हथियारों की पहचान की कोशिश में पुलिस जुटी हुई थी। ज्यादातर एके-47, इंसास, एसएलआर, इंसास एलएमजी, यूबीजीएल, 2 इंची मोर्टार जैसे हथियार पुलिस व अर्धसैनिक बलों से लूटे हुए हैं, लिहाजा इसमें दर्ज सीरियल नंबर और आबंटित कोड से हथियारों की पहचान की जाती है। अन्य हथियार नक्सलियों के कारखाने द्वारा निर्मित स्वदेशी बंदूकें और जुगाड़ वाली होते हैं। इन मुठभेड़ों में 127 जवान बलिदान थुलथुली मुठभेड़ में बरामद हथियार सात मुठभेड़ों से लूटे गए हैं, उन मुठभेड़ों में फोर्स के कुल 126 जवान बलिदान हुए थे। इन मुठभेड़ों में 24 अप्रैल 2017 को सुकमा के बुरकापाल में हुई मुठभेड़ में 25 जवानों को बलिदान कर लूटी गई एलएमजी, नारायणपुर के झारा कैंप से निकले जवानों पर 9 जून 2011 को हमला कर लूटी गई एक एके 47, 24 जनवरी 2018 को नारायणपुर इरपानार में चार जवानों को बलिदान कर लूटी गई एके 47 मिली है। नारायणपुर के नटुमपारा में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में तीन जवान को शहीद कर लूटी गई एक इंसास राइफल, तीन अप्रैल 2021 को बीजापुर के टेकुलगुड़ेम में 23 जवानों को बलिदान कर लूटे गए हथियारों में से 1 एके-47, 11 मार्च 2014 को सुकमा के टहाकवाड़ा में 11 सीआरपीएफ और जिला बल के चार जवानों के बलिदान के बाद लूटे गए हथियारों में से एक इंसास मिली है। इसी तरह 18 मई 2016 को बीजापुर के बासागुड़ा थाने में पकड़कर रखा गया नक्सली वहां से यूबीजीएल छीनकर ले गया था। वह भी बरामद हुई है। 13 मई 2003 को दंतेवाड़ा के गीदम थाना को लूटकर ले जाए गए हथियारों में से एक एसएलआर, 10 मई 2003 को धमतरी के मांदागिरी में 11 जवानों की हत्या कर लूटे गए हथियारों में से एक एसएलआर मिली, एनएमडीसी माइनिंग पर 9 फरवरी 2006 को आठ सीआइएसएफ जवान की हत्या कर लूटे गए हथियारों में से एक एसएलआर और सुकमा-बीजापुर के टेकलगुड़ेम मुठभेड़ में 23 जवानों को शहीद कर लूटे गए हथियारों में से एक एके 47 मिली है। इंप्रोवाइज कर स्नाइपर रायफल में बदला थुलथुली मुठभेड़ में अत्याधुनिक स्नाइपर रायफल भी मिले थे। मुठभेड़ स्थल में नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद हुआ, जिनमें एक इंसासा एलएमजी, चार एके-47, छह एसएलआर, तीन इंसास, दो 303 रायफल और नक्सलियाें द्वारा निर्मित स्वदेशी हथियार व गोला-बारूद शामिल हैं। सबसे खास बात यह रही कि इनमें से तीन एके-47 को नक्सलियों ने स्नाइपर रायफल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि हुई। इन अत्याधुनिक हथियारों में अलग से उपकरण लगाए गए थे। recent visitors 90

ईपीएफओ ने नए निकासी नियम लागू: रिटायरमेंट से 1 साल पहले निकाल सकते हैं 90% राशि

रायपुर यदि किसी कर्मचारी की नौकरी सेवानिवृत्ति से पहले ही चली जाती है, तो वह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से अपनी कुल जमा राशि का 75 प्रतिशत एक माह बाद ही निकाल सकता है। अगर दो महीने तक बेरोजगारी बनी रहती है, तो वह अपनी पूरी राशि निकाल सकता है। नई नौकरी मिलने पर शेष फंड को नए ईपीएफओ खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है। ईपीएफओ ने इस संबंध में पैसे निकालने के नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे निकासी प्रक्रिया अधिक सरल हो गई है। ईपीएफओ में फंड जमा और निकासी की प्रक्रिया नौकरीपेशा व्यक्ति अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा ईपीएफओ में जमा करता है, जो सेवानिवृत्ति के बाद मैच्योर होती है। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर इसमें से आंशिक राशि समय-समय पर निकाली जा सकती है। अ ब नए नियमों के तहत, कोई भी सदस्य अपनी जमा राशि के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। शिक्षा, घर खरीदने या निर्माण, शादी, या चिकित्सा खर्चों के लिए फंड निकासी का प्रावधान है। सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पहले तक 90% निकासी की सुविधा नए नियमों के अनुसार, कोई भी कर्मचारी सेवानिवृत्ति से एक साल पहले तक अपनी कुल जमा राशि का 90 प्रतिशत तक निकाल सकता है। इसके लिए सदस्य की न्यूनतम आयु 54 वर्ष होनी चाहिए। यह प्रावधान उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच रहे हैं और उन्हें तत्काल धन की आवश्यकता होती है। टैक्स लाभ का प्रावधान यदि कोई कर्मचारी पांच साल तक ईपीएफ में योगदान करता है, तो निकासी के समय उसे टैक्स में छूट का लाभ मिल सकता है। मैच्योरिटी पर टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) भी लागू होगा। हालांकि, यदि निकासी 50,000 रुपये से कम की है, तो टीडीएस नहीं कटेगा। पैन कार्ड जमा होने पर 10 प्रतिशत टीडीएस काटा जाएगा, जबकि पैन कार्ड न होने पर यह कटौती 30 प्रतिशत होगी। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया ईपीएफओ सदस्य अपने फंड की निकासी के लिए ईपीएफ पोर्टल या उमंग एप का उपयोग कर सकते हैं। आवेदन जमा करने के बाद, नियोक्ता से मंजूरी मिलने पर राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाती है। इसके साथ ही सदस्य अपने आवेदन का स्टेटस भी ऑनलाइन चेक कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी बनी रहती है। recent visitors 93