Friday, July 10, 2026 12:03 pm

आमाखोखरा बांध से 21 गांव के 7 हजार किसान सिंचाई सुविधा से होंगे लाभांवित

कोरबा आमाखोखरा में 11 साल पहले बना जलाशय का पानी अब तक खेतों में नहीं पहुंच सका है। मुआवजा वितरण विवाद और कोरोना काल की वजह से नहर निर्माण में देरी हुई। जिस नहर का निर्माण 52 करोड़ में पूरा होना था, उसकी लागत दोगुना यानी 104 करोड़ रुपये हो गई है। जल संसाधन विभाग ने फिर से बजट की मांग शासन से की थी। बढ़ी हुई लागत 52 करोड़ रुपये शासन ने स्वीकृत कर दी है। मुआवजा के लंबित प्रकरणों के निराकरण के साथ निर्माण कार्य शुरू होगा। 23.10 किलोमीटर नहर निर्माण का काम पूरा होने से 21 गांव के सात हजार किसान सिंचाई सुविधा से लाभांवित होंगे। प्रक्रिया धीमी होने कारण काम लंबित होता चला गया जलसंसाधन कटघोरा अनुविभाग ने 13 साल पहले वर्ष 2011 में आमाखोखरा गांव में जलाशय निर्माण के लिए काम शुरू किया। 2013 में अहिरन नदी पर 18. 50 करोड़ की लागत से बांध का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। जलाशय के लिए तो पर्याप्त जमीन मिल गई पर नहर के लिए निजी जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका। प्रक्रिया धीमी होने कारण काम लंबित होता चला गया। जमीन का मूल्य समय के बढ़ने के कारण नहर निर्माण का लागत भी बढ़ गया। किसान सहयोग के लिए तैयार निर्मित हो चुके बांध से केवल कटघोरा नहीं बल्कि पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के खेतों तक पानी पहुंचाना है। सिंचाई सुविधा बढ़ने की आस लेकर किसान सहयोग के लिए तैयार हैं, कुल खेती 46 फीसदी रकबा ही सिंचित है। अधिकांश किसान छोटे जलाशयों पर निर्भर हैं, लेकिन नहर विस्तार नहीं होने से सिंचित रकबा में बढ़ोतरी नहीं हो रही। अधूरे छोटे जलाशय का निर्माण और पूर्ण हो चुके जलाशयों के नहर का विस्तार किया जाए तो किसानाें को वर्षा आश्रित खेती से मुक्ति मिल सकती है। आठ सहायक नहरों का भी होगा निर्माण आमाखोखरा बांध से 21 गांवों में पानी पहुंचाने के लिए 23.10 किलोमीटर नहर बनाया जाना है। मुख्य नहर के दाएं व बाएं छोर में आठ शाखा नहर बनाने की योजना हैं, जिसकी लंबाई 9.93 किलोमीटर है। इन नहरों से पानी खेतों तक पहुंचने से किसानाें को न केवल खरीफ बल्कि रबी फसल में भी सुविधा होगी। नहर बनाने के लिए प्रति हेक्टेयर दो लाख 81 हजार रुपये खर्च आएगा। नगर पंचायत में हो रही जलापूर्ति इस जलाशय के पानी का उपयोग भले ही सिंचाई के लिए नहीं हो रहा हो लेकिन पेयजल आपूर्ति के काम आ रहा रहा है। नगर पंचायत कटघोरा के 13 हजार आबादी में जलापूर्ति करने पाइप लाइन बिछाया है। जलाशय निर्माण के समय नगर पंचायत ने जल संसाधन से जलापूर्ति का अनुबंध किया था। प्रति दिन 1.32 मिलियन घन मीटर पेयजल के रूप में प्रदाय किया जा रहा। जलाशय निर्माण का मुख्य उद्देश्य सिंचाई सुविधा देना है। पुन: राशि स्वीकृति होने से निर्माण पूरा होने की उम्मीद एक बार फिर बंध गई है। इन गांवों तक पहुंचाना है पानी आमाखोखरा डायर्वन से जिन गांवों तक पानी पहुंचना है उनमें जुराली, कसनिया, कापूबहरा, लखनपुर, विजयपुर, अभयपुर, सिंघाली, भेजीनारा, शुक्लाखार, रोहिना, पुरैना, मड़वाढोढ़ा, मोंगरा, कोरई, बांकी, अरदा, हर्राभांठा, जमनीमुड़ा, घनाकछार, जमनीमुड़ा, ढपढप, कसरेंगा, ढेलवाडीह शामिल है। सिंचाई के लिए चिन्हांकित गांवों में अधिकांश कालरी प्रभावित हैं जहां खदान के कारण वर्षा खेतों में अधिक समय नहीं ठहरता। recent visitors 83

सर्दियों में खुश्‍क नजर आती है स्किन , इन नुस्खों से चेहरे को दें राहत

वैसे तो ठंड का मौसम बहुत सुहावना लगता है लेकि‍न इस मौसम में स्किन र‍िलेटड समस्‍याएं खूब होती है। खासकर ड्राय स्किन। सर्दियों में त्वचा का फटना एक आम समस्या है, लेकिन कुछ घरेलू उपायों से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। यहां कुछ देसी नुस्खे दिए गए हैं, जो आपकी त्वचा को मॉइश्चराइज करेंगे और इसे कोमल बनाए रखेंगे। घी थोड़ी मात्रा में घी लें और इसे अपनी त्वचा पर लगाएं। इसे 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर हल्के गर्म पानी से धो लें। घी त्वचा को गहराई तक पोषण देता है और नमी बनाए रखता है। नारियल तेल सर्दियों में नारियल तेल को हल्का गर्म करके चेहरे और शरीर पर मालिश करें। यह त्वचा में गहराई तक जाकर नमी को बनाए रखता है और रूखापन दूर करता है। एलोवेरा जेल एलोवेरा जेल को चेहरे पर लगाएं और इसे 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से धो लें। एलोवेरा त्वचा को ठंडक और नमी देता है, जिससे त्वचा मुलायम बनी रहती है। दूध और शहद दूध और शहद का मिश्रण बनाएं और इसे अपने चेहरे पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद इसे धो लें। यह त्वचा को प्राकृतिक रूप से मॉइश्चराइज करता है और त्वचा को चमकदार बनाता है। बेसन और हल्दी बेसन, हल्दी और दूध का पेस्ट बनाएं और इसे चेहरे पर लगाएं। 10-15 मिनट बाद इसे धो लें। यह त्वचा को डिटॉक्सिफाई करता है और रूखेपन से राहत दिलाता है। बादाम का तेल सोने से पहले कुछ बूंदें बादाम के तेल की लेकर चेहरे पर मसाज करें। यह तेल त्वचा को पोषण देकर नमी को बरकरार रखता है। केला और मलाई केले को मसल कर उसमें ताजी मलाई मिलाएं और इसे चेहरे पर लगाएं। 15-20 मिनट बाद धो लें। यह रूखी त्वचा को गहराई तक मॉइश्चराइज करता है। गुलाबजल गुलाबजल का टोनर की तरह प्रयोग करें। यह त्वचा को हाइड्रेट रखता है और रूखापन कम करता है। इन घरेलू नुस्खों के अलावा, सर्दियों में अधिक पानी पीने, संतुलित आहार लेने और अधिक समय तक गर्म पानी से न नहाने का ध्यान रखें। इससे आपकी त्वचा मुलायम और चमकदार बनी रहेगी। recent visitors 64

कांग्रेस धर्म और जातियों के नाम पर लोगों को लड़ा रही है, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे

महाराष्ट्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। उन्होंने धुले एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस का एजेंडा देश के सभी आदिवासी समुदायों के बीच दरार पैदा करना है। कांग्रेस धर्म और जातियों के नाम पर लोगों को लड़ा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कांग्रेस का एजेंडा देश के सभी आदिवासी समुदायों के बीच दरार पैदा करना है… जब कांग्रेस ने धार्मिक समूहों के साथ इस साजिश की कोशिश की, तो इससे देश का विभाजन हुआ। अब कांग्रेस एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़का रही है। भारत के लिए इससे बड़ी कोई साजिश नहीं हो सकती… जब तक आप एकजुट रहेंगे, तब तक आप मजबूत रहेंगे… 'एक है तो सुरक्षित है'।"   इनका युवराज इसी खतरनाक भावना के साथ काम कर रहा- मोदी पीएम मोदी ने धुले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "आजादी के समय बाबासाहेब दलितों और वंचितों के लिए आरक्षण चाहते थे लेकिन नेहरू जी इस बात पर अड़े थे कि दलितों, पिछड़ों और वंचितों को आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। बड़ी मुश्किल से बाबासाहेब दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षण का प्रावधान कर पाए थे। नेहरू जी के बाद इंदिरा जी आईं और उनका भी आरक्षण के खिलाफ यही रवैया था। ये लोग चाहते थे कि SC, ST, OBC हमेशा कमजोर रहें। राजीव गांधी ने भी OBC आरक्षण का खुलकर विरोध किया था। राजीव गांधी के बाद अब इस परिवार की चौथी पीढ़ी, इनका युवराज इसी खतरनाक भावना के साथ काम कर रहा है। कांग्रेस को आदिवासियों की एकता पसंद नहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का एकमात्र एजेंडा SC, ST, OBC समाज की एकता को किसी भी तरह से तोड़ना है। कांग्रेस चाहती है कि SC, ST, OBC समाज अलग-अलग जातियों में बंटा रहे। कांग्रेस आदिवासी समाज की पहचान, ST की एकता को तोड़ने में लगी हुई है। कांग्रेस को आदिवासियों की एकता पसंद नहीं है। जब कांग्रेस ने धर्म के नाम पर ऐसी साजिश रची थी, जब देश का बंटवारा हुआ था, अब कांग्रेस SC, ST, OBC की एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ खड़ा कर रही है। इससे बड़ी साजिश भारत के खिलाफ नहीं हो सकती।" recent visitors 78

मां अंगारमोती परिसर में हुआ जहां 54 गांवों के देवी-देवता निसंतान दंपत्तियों को मिला आशीर्वाद

धमतरी मां अंगारमोती शक्तिपीठ गंगरेल में आज भी सदियों की आस्था लोगों में जागृत है। दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को गंगरेल मड़ई का आयोजन मां अंगारमोती परिसर में हुआ जहां 54 गांवों के देवी-देवता निसंतान दंपत्तियों को आशीर्वाद देने के लिए पहुंचे। मां अंगारमोती की पूजा-अर्चना कर निसंतान महिलाओं ने संतान प्राप्ति की कामना की। मड़ई में क्षेत्र के सैकड़ों लोग तो शामिल हुए है साथ ही आसपास के जिलों के लोग भी संतान प्राप्ति के लिए पहुंचे हुए थे। मड़ई में पहुंचे बैगाओं ने त्रिशूल, कासल, सांकल आदि हाथ में रख संस्कृति का प्रदर्शन किया। युवक डांग लेकर उनकी अगुवाई करते रहे। जगह-जगह इनकी पूजा-अर्चना भी की गई। इस दौरान आंगादेव पारंपरिक बाजे की थाप पर जमकर थिरकते रहे। गंगरेल मड़ई देखने शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों लोग पहुंचे। मां अंगारमोती देवी के दर्शन कर उन्होंने अपने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना भी की। नि:संतान महिलाओं ने मां अंगारमोती के दरबार में जल चढ़ाकर संतान प्राप्ति की कामना की। मान्यता के अनुसार दिवाली के बाद आने वाले पहले शुक्रवार को यहां मड़ई का आयोजन किया जाता है। इसके बाद ही अंचल के अन्य गांवों में मड़ई मेले के आयोजन का सिलसिला शुरू होता है। साल की पहली मड़ई होने के कारण यहां शहर समेत गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मड़ई का मुख्य आकर्षण 54 गांवों से पहुंचने वाले देवी-देवता रहते हैं, जिन्हें विधि-विधान के साथ मां अंगारमोती के दरबार में आमंत्रित किया जाता है। इन देवी-देवताओं के साथ आंगा देवता भी आते हैं। recent visitors 178

दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास के साथ भारत वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल होने का हकदार: पुतिन

मॉस्को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर भारत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने दोनों देशों के रिश्ते को ऐतिहासिक बताया। भारत की आजादी में सोवियत संघ की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया है कि भारत एक 'प्राकृतिक सहयोगी' और दशकों से भागीदार है। रूसी राज्य मीडिया ने बताया कि गुरुवार को सोची में वल्दाई चर्चा क्लब को संबोधित करते हुए पुतिन ने भारत को एक महान देश बताया और कहा कि मॉस्को और नई दिल्ली सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। पुतिन बोले, सभी दिशाओं में विकसित हो रहे संबंध पुतिन ने पूर्ण सत्र में कहा, हम भारत के साथ सभी दिशाओं में अपने संबंध विकसित कर रहे हैं। भारत एक महान देश है। यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक विकास के मामले में अग्रणी है, इसकी जीडीपी 7.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज कर रही है। समाचार एजेंसी ने पुतिन के हवाले से कहा, हमारे संबंध कहां और किस गति से विकसित होंगे, इसका हमारा दृष्टिकोण आज की वास्तविकताओं पर आधारित है। हमारे सहयोग की मात्रा साल दर साल बढ़ रही है। विश्वास के मामले में अद्वितीय संबंध बनाए पुतिन ने भारत की स्वतंत्रता की घोषणा में सोवियत संघ की भूमिका को याद किया, जिसने दोनों देशों के बीच गुणवत्ता और विश्वास के मामले में अद्वितीय संबंध बनाए। पुतिन ने कहा कि यह हमारे लिए सभी आयामों में द्विपक्षीय संबंधों को विकसित करने का आधार है। पुतिन ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार कारोबार लगभग 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि अपनी डेढ़ अरब की आबादी, दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास, प्राचीन संस्कृति और आगे विकास की बहुत अच्छी संभावनाओं के साथ भारत वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल होने का हकदार है। ब्रह्मोस का दिया उदाहरण पुतिन ने आगे कहा कि भारत और रूस के बीच सुरक्षा क्षेत्र और रक्षा क्षेत्र में संपर्क विकसित हो रहे हैं। देखें कि कितने प्रकार के रूसी सैन्य उपकरण भारतीय सशस्त्र बलों की सेवा में हैं। इस रिश्ते में काफी हद तक विश्वास है। हम सिर्फ भारत को अपने हथियार नहीं बेचते हैं; हम उन्हें संयुक्त रूप से डिजाइन करने के लिए संयुक्त अनुसंधान में लगे हुए हैं। उन्होंने ब्रह्मोस को भारत-रूस संयुक्त सहयोग का एक उदाहरण बताया। पुतिन ने कहा, ब्रह्मोस सिस्टम का उपयोग हवा और समुद्र में किया जाता है और यह साझेदारी कुछ ऐसी चीज है जिसके बारे में लोग जानते हैं और यह उच्च स्तर के विश्वास और हमारी साझेदारी के उच्च स्तर की गवाही देता है जो भविष्य में भी जारी रहेगी। ब्रह्मोस का नाम भारत और रूस की ब्रह्मपुत्र और मोस्कवा नदियों के नाम पर रखा गया है। इसका गठन भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया था। इस बीच, गुरुवार के कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने ब्रिक्स समूह की संभावनाओं पर भी बात की, जिसके सदस्य रूस और भारत दोनों हैं। रूसी नेता ने कहा कि यह देशों और लोगों के बीच संबंधों की आधुनिक, मुक्त और गैर-ब्लॉक प्रकृति का एक प्रोटोटाइप है। इस साल अक्टूबर में कजान में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस ने एक प्रतीकात्मक ब्रिक्स बैंकनोट का अनावरण भी किया था। recent visitors 78

गजब मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक हैं या भैंसों के तबेलाघर

Amazing Madhya Pradesh: Is Chief Minister Sanjeevani Clinic or Buffalo Stables? मुरैना नगर निगम के सीएम संजीवनी क्लीनिक खस्ताहाल हैं. अधिकांश क्लीनिक बंद हो गए. यहां लगे खिड़की-दरवाजे तक चोरी हो गए मुरैना। जनता को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक शुरू किए गए. 25-25 लाख रुपए की लागत से संजीवनी क्लीनिक शुरू करने के लिए भवन बनाए गए. लेकिन अब अधिकांश संजीवनी क्लीनिक बंद पड़े हैं. यहां न कोई स्टाफ है और ना कोई इलाज होता है. शाम होते ही यहां गाय-भैंसों का डेरा जम जाता है. मुरैना के जौरी गांव में संजीवनी क्लीनिक की दुर्दशा देखकर आप दंग रह जाएंगे. इसके अलावा और भी कई स्थानों पर संजीवनी क्लीनिक बंद पड़े हैं. जौरी गांव का संजीवनी क्लीनिक लावारिस मुरैना नगर निगम सीमा अंतर्गत शहर के जौरी गांव में पिछले वर्ष 2023 में 25 लाख रुपए की लागत से संजीवनी क्लीनिक की स्थापना की गई. लेकिन आज ये संजीवनी क्लिनिक बंद है. बिल्डिंग के अंदर कमरों में गाय-भैंस का गोबर पड़ा हुआ है. लोग खिड़की एवं लोहे की जालियां तोड़कर ले गए और कई दरवाजे टूटे पड़े हुए हैं. काफी समय से यह क्लीनिक बंद है. इसकी बाउंड्री भी तोड़ दी गई. जिसे बाद में मेंटेनेंस कराया गया. स्थानीय निवासी शिवाकांत उपाध्याय बताते हैं “जब यह संजीवनी क्लिनिक आरंभ हुआ था, तब यहां बीपी एवं डायबिटीज सहित कुछ अन्य जांच हुआ करती थी और 4 लोगों का स्टाफ बैठता था. लेकिन वर्तमान में यह पूरी तरह से तहस-नस पड़ा हुआ है.” मुरैना नगर निगम क्षेत्र में 14 संजीवनी क्लीनिक स्वीकृत संजीवनी क्लीनिक के पास में ही आरोग्यधाम है, जहां से ग्रामीण छोटी-मोटी बीमारियों की दवा ले लेते हैं. गंभीर बीमारियों के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है. वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र में अधिकांश संजीवनी क्लीनिक की यही हालत है. बता दें कि वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा संजीवनी क्लीनिक बनाने की प्रदेश में घोषणा की गई थी. नगर निगम मुरैना क्षेत्र में 14 संजीवनी क्लीनिक स्वीकृत किए गए. स्वीकृत संजीवनी क्लीनिक में से अभी तक आधे निर्मित हुए हैं जबकि आधे क्लीनिक के लिए जगह नहीं मिल पाई है, जिस कारण यह योजना अब खतरे में पड़ गई है. कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर कहीं और शिफ्ट कर दिए इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मेश उपाध्याय ने बताया “14 संजीवनी क्लीनिक स्वीकृत हुए थे. 4 या 5 हमारे हैंडओवर किए गए थे. अभी तुस्सीपुरा, मुड़िया खेड़ा, छोंदा गांव, जोरी गांव, गडोरापुरा, न्यू आम पुरा क्लीनिक सही चल रहे हैं. संजीवनी क्लीनिक में केवल ओपीडी का काम होता है और दवाइयां आरोग्यधाम से मिलती हैं. अभी कुछ इसमें तब्दीली की गई है, इस वजह से कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर इधर-उधर शिफ्ट कर दिए गए हैं.” recent visitors 255

ICC मैच रेफरी जेफ क्रो ने कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम के आउटफील्ड को असंतोषजनक रेटिंग

ग्वालियर  ग्‍वालियर के नवनिर्मित माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम की पिच को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) ने अच्छी रेटिंग दी है। भारत-बांग्लादेश के बीच खेली गई टी-20 सीरीज के तहत पहला मैच छह अक्टूबर को यहां खेला गया था। इसके अलावा दिल्ली और हैदराबाद की पिचों को भी अच्छी रेटिंग मिली है, क्योंकि ये केंद्र सबसे छोटे प्रारूप की आवश्यकताओं के अनुरूप थे। आइसीसी मैच रेफरी जेफ क्रो ने कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम के आउटफील्ड को असंतोषजनक रेटिंग दी है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) ने चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम की पिच को बहुत अच्छा माना है जबकि सत्र के दौरान इस्तेमाल किए गए अन्य चार घरेलू केंद्रों को संतोषजनक माना गया है। सरकारी स्वामित्व वाले कानपुर स्टेडियम की खराब जल निकासी प्रणाली के कारण बांग्लादेश के विरुद्ध केवल दो ही पूरे दिन का खेल हो सका और पिच को संतोषजनक रेटिंग दिए जाने के बावजूद आउटफील्ड न्यूजीलैंड के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर की नाराजगी से नहीं बच पाई। बांग्लादेश के विरुद्ध भारत के टेस्ट मैच के लिए इस्तेमाल की गई कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम के आउटफील्ड को आइसीसी मैच रेफरी जेफ क्रो ने असंतोषजनक रेटिंग दी है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) ने चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम की पिच को बहुत अच्छा माना है जबकि सत्र के दौरान इस्तेमाल किए गए अन्य चार घरेलू केंद्रों को संतोषजनक माना गया है। सरकारी स्वामित्व वाले कानपुर स्टेडियम की खराब जल निकासी प्रणाली के कारण बांग्लादेश के विरुद्ध केवल दो ही पूरे दिन का खेल हो सका और पिच को संतोषजनक रेटिंग दिए जाने के बावजूद आउटफील्ड न्यूजीलैंड के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर की नाराजगी से नहीं बच पाई। बांग्लादेश के विरुद्ध टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए इस्तेमाल किए गए ग्वालियर, दिल्ली और हैदराबाद की बड़े स्कोर वाली पिचों को बहुत अच्छी रेटिंग मिली है क्योंकि वे सबसे छोटे प्रारूप की आवश्यकताओं के अनुरूप थे। न्यूजीलैंड के विरुद्ध इस्तेमाल किए गए सभी तीन टेस्ट स्थल बेंगलुरु का चिन्नास्वामी स्टेडियम, पुणे के गहुंजे में महाराष्ट्र क्रिकेट संघ स्टेडियम और मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम को आइसीसी मैच रेफरी से संतोषजनक रेटिंग मिली। recent visitors 131