मुसीबत की हर घड़ी में आपका यह सेवक चट्टान की तरह आपके साथ खड़ा रहा है और आगे भी सदैव अपने कर्तव्य के प्रति अडिग रहेगा- मंत्री तोमर

ग्वालियर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की सजगता से न केवल ग्वालियर-15 विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-1 के स्थानीय निवासियों को एक बड़े हादसे का शिकार होने से बचा लिया गया, बल्कि पहली बार केवल 48 घण्टे की अल्प अवधि में एक बड़े क्षेत्र को प्रदूषण रहित बना दिया गया। ऊर्जा मंत्री तोमर ने सभी अधिकारियों तथा देवतुल्य कार्यकर्ताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि मुसीबत की हर घड़ी में आपका यह सेवक चट्टान की तरह आपके साथ खड़ा रहा है और आगे भी सदैव अपने कर्तव्य के प्रति अडिग रहेगा। उल्लेखनीय है कि बुधवार की रात्रि ग्वालियर उप नगर के वार्ड क्रमांक 1 के बरा गांव के समीप नगर निगम द्वारा कचरा संग्रहण के रुप में उपयोग किए जा रहे खदान के गड्ढे में एकत्रित कचरे में आग लगने से उत्पन्न हुए प्रदूषण से आस-पास के रहवासियों को सांस लेने में दिक्क़त आ रही थी। इस गंभीर स्थिति को भांपकर ऊर्जा मंत्री ने बिना समय गंवाए प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों को आग पर नियंत्रण के निर्देश दिए तथा आग बुझाने का काम पूरा होने के बाद कचरा हटाने का कार्य शुरु कराया। गुरुवार रात भी ऊर्जा मंत्री ने मौके पर मौजूद रहकर कचरा हटवाने का काम जारी रखा तथा बरा गांव सहित किशन बाग, लक्ष्मीपुरम, तिरुआ पुरा, जाटवपुरा, और पादरी मोहल्ला को प्रदूषण रहित बनवाकर एक बड़ी घटना घटित होने से टाली। इस दौरान उन्होंने चौपाल भी लगाई तथा लोगों की समस्याओं को सुना और जन-सेवा के संकल्प को निभाते हुए, तत्काल समाधान के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इस बावत माकूल इंतजाम किए जाएं। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि आपका सेवक 2 दिवस से वार्ड क्रमांक 1 के रहवासियों की चिंता में रात-दिन प्रदूषण बढने से उत्पन्न हुए हालातों पर नियंत्रण कर स्वच्छ वातावरण बनाने में जुटा रहा। यह आप सभी के सहयोग से संभव हो सका। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में बरा गांव के इस स्थान पर एक भव्य पार्क बनाया जाएगा। इस दौरान स्थानिय जनप्रतिनिधि, प्रशासन, पुलिस तथा अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।   recent visitors 47

प्रधानमंत्री आदिवासियों के हितैषी होने का दिखावा कर रहे : कांग्रेस

नई दिल्ली कांग्रेस ने केंद्र पर आदिवासियों को न्याय से वंचित करने के प्रयासों में ‘‘पूरी ताकत'' लगा देने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' (डीएजेजीयूए) वन अधिकार अधिनियम का मजाक है एवं सरकार के पाखंड को दर्शाता है। विपक्षी दल ने यह भी आरोप लाया कि डीएजेजीयूए ‘‘विशुद्ध मनुवादी अंदाज'' में इन समुदायों को केवल जंगलों में रहने वाले ‘वनवासी' के रूप में देखता है, जो अपने आप में राजनीतिक और आर्थिक शक्ति होने के बजाय सिर्फ श्रमिक हैं। कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने कहा कि आज धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती है जो भारत के महानतम सपूतों में से एक और स्वशासन एवं सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक थे। प्रधानमंत्री आदिवासियों के हितैषी होने का दिखावा कर रहे रमेश ने एक बयान जारी कर कहा, ‘‘इस अवसर पर ‘नॉन बायोलॉजिकल' प्रधानमंत्री बिहार के जमुई में आदिवासियों के हितैषी होने का दिखावा कर रहे हैं, जबकि उनकी सरकार आदिवासियों को न्याय से वंचित करने के प्रयासों में पूरी ताकत लगा रही है।'' उन्होंने कहा, ‘‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) उनके इसी पाखंड को दर्शाता है। यह है तो भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर लेकिन यह वन अधिकार अधिनियम का पूरी तरह से मजाक बनाता है।'' रमेश ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार द्वारा पारित वन अधिकार अधिनियम (एफआरए 2006) एक क्रांतिकारी कानून था और इसने वनों से संबंधित शक्ति एवं अधिकार को वन विभाग से ग्राम सभा को हस्तांतरित किया था। उन्होंने बताया कि परंपरा से हटकर एक और कदम उठाते हुए जनजातीय कार्य मंत्रालय को कानून के क्रियान्वयन के लिए नोडल प्राधिकरण के रूप में सशक्त बनाया गया। रमेश ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम ने आदिवासी समुदाय और ग्राम सभाओं को वनों पर शासन और प्रबंधन का अधिकार दिया था जो वनों के लोकतांत्रिक शासन को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा सुधार था। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस क्रांति के बाद नरेन्द्र मोदी की प्रति-क्रांति आई।'' उन्होंने कहा, ‘‘डीएजेजीयूए इस ऐतिहासिक कानून और वन प्रशासन में लोकतांत्रिक सुधार को मूल रूप से खत्म कर देता है।'' रमेश ने कहा कि यह एफआरए के कार्यान्वयन में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अधिकार देकर जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधिकार को कमजोर करता है। उन्होंने बताया कि एफआरए के वैधानिक निकायों – अर्थात ग्राम सभा, उप-मंडल समिति, जिला स्तरीय समिति और राज्य स्तरीय निगरानी समिति – को सशक्त बनाने के बजाय डीएजेजीयूए ने जिला और उप-मंडल स्तरों पर एफआरए की इकाइयों का एक विशाल समानांतर संस्थागत तंत्र बनाया है और उन्हें बड़े स्तर पर धनराशि एवं संविदा कर्मचारियों से लैस किया है। रमेश ने कहा कि वे सीधे जनजातीय मामलों के मंत्रालय और राज्य जनजातीय कल्याण विभागों के केंद्रीकृत नौकरशाही नियंत्रण के अधीन हैं और एफआरए की वैधानिक निकायों के प्रति उनकी जवाबदेही नहीं है। उन्होंने कहा कि डीएजेजीयूए राज्य जनजातीय कल्याण विभागों द्वारा ग्राम सभाओं के एफआरए कार्यान्वयन और सीएफआर प्रबंधन गतिविधियों के लिए तकनीकी एजेंसियों/डोमेन विशेषज्ञों/कॉर्पोरेट एनजीओ को शामिल करता है और उनकी सेवाएं लेता है। रमेश ने तर्क दिया कि इन एफआरए इकाइयों को वे काम करने हैं जिन्हें एफआरए वैधानिक निकायों को कानून के तहत करना आवश्यकता हैं और इन वैधानिक निकायों को इन एफआरए इकाइयों के उप अंग के रूप में छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि एफआरए की इन इकाइयों को नाममात्र के एफआरए निकायों का आदेश मानने तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें शामिल आर्थिक और सामाजिक पहलुओं पर ध्यान दिए बिना ऐसा किया गया है, जबकि इसके लिए भारी भरकम बजट आवंटित किया गया है (प्रत्येक सीएफआर के लिए तकनीकी एजेंसियों को एक लाख रुपये)। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने ‘वनमित्र' ऐप बनाने के लिए ‘महाराष्ट्र नॉलेज कंपनी लिमिटेड' (एमकेसीएल) को नियुक्त किया जिसने एफआरए दावों को प्रस्तुत करने की पारदर्शी प्रक्रिया को एक अस्पष्ट, ऑनलाइन प्रक्रिया में बदल दिया और इसकी जिम्मेदारी तकनीकी ऑपरेटरों ने संभाली है।'' उन्होंने बताया कि इसके परिणामस्वरूप तीन लाख दावे खारिज कर दिए गए। रमेश ने कहा कि ऐसी तकनीकी एजेंसियों की भागीदारी के कारण बड़े पैमाने पर ऐसी घटनाएं होने से आदिवासी समुदाय चिंतित है। recent visitors 62

छत्तीसगढ़ की बेटी निशा अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो पर फहराएगी तिरंगा

आज सुबह मुख्यमंत्री के कॉल ने निशा के लिये खोली किलिमंजारो फतह की राह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निशा से कहा हम तुम्हारा सपना पूरा करेंगे छत्तीसगढ़ की बेटी निशा अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो पर फहराएगी तिरंगा  आर्थिक तंगी अब सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बनेगी रायपुर अलसुबह आज बिलासपुर में रहने वाली निशा यादव के पास एक फोन आया और फोन पर एक सौम्य सी आवाज में किसी ने उससे कहा आपको किलिमंजारो चढ़ना है, आप खर्च की चिंता न करें। निशा चकित हुई और आश्चर्य से पूछा आप कौन हैं, सामने से आवाज आई बेटा मैं विष्णु देव साय बोल रहा हूं। निशा ने आश्चर्यचकित भाव से कहा आप सच में मुख्यमंत्री बोल रहे हैं। उसे यकीन नहीं हो रहा था, लेकिन जब मुख्यमंत्री ने पूरी बात बताई और कहा कि आप अपने लक्ष्य पर फोकस करें। छत्तीसगढ़ के हर एक बेटी का सपना पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है। छत्तीसगढ़ सरकार आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री के स्नेहपूर्ण  आश्वासन को सुनकर निशा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। निशा को इस बात पर भी यकीन करना पड़ा मुश्किल हो रहा था कि बिना किसी आवेदन या आग्रह के मुख्यमंत्री ने उनका सपना पूरा करने की पहल की है।          मुख्यमंत्री साय ने निशा के साथ पर्वतारोहण के बारे विस्तार से बात की। निशा ने मुख्यमंत्री को यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस की चढ़ाई के दौरान आई चुनौतियों के बारे में बताया। उसने बताया कि पर्वत की यात्राएं रोमांच से भर देती हैं। पर्वतों की चोटी पर तिरंगा फहराना गर्व से भर देता है। निशा ने आगे बताया कि अब अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो को फतह करना चाहती हैं और उनका अंतिम लक्ष्य माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का है।         निशा ने नम आवाज में मुख्यमंत्री को आगे बताया कि मैं पिछले कई दिनों से सो नहीं पा रही थी। मेरे पिता ऑटो चालक हैं और मेरे सपने को पूरा कर पाना उनके लिए कठिन था।  मन में बड़ी दुविधा थी कि यह कैसे संभव हो पाएगा, मेरा सपना कैसे पूरा होगा । आज आप ने मेरी सारी चिंताओं को दूर कर दिया है।  मुख्यमंत्री जी मैं आपको बहुत धन्यवाद देती हूं।       निशा की आत्मविश्वास भरी इन बातों को सुनकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को अपनी बेटियों पर गर्व है। हम चाहेंगे कि छत्तीसगढ़ की बेटी माउंट एवरेस्ट पर भी तिरंगा फहराए। उन्होंने कहा कि आर्थिक हालात से हौसले पस्त नहीं होते। उन्होंने निशा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपका आत्मविश्वास और जुनून जरूर आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचाएगी। recent visitors 128

शिंदे ने कहा- सरकार दलितों और पिछड़ी जातियों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम कर रही है

महाराष्ट्र महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पिछली सरकार पर प्रमुख परियोजनाओं को रुकवाने और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की विचारधारा से हटने का आरोप लगाया। इंटरव्यू में शिंदे ने कहा, "यह चुनाव विकास पर केंद्रित है। लोगों का पूरी तरह से विश्वास है कि यह हमारी सरकार है, यह हमारे मुख्यमंत्री हैं। लोग महायुति सरकार को फिर से सत्ता में लाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।" शिंदे ने आरोप लगाया कि पूर्व महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को रोक दिया था। इनमें अटल सेतु, कोस्टल रोड, मेट्रो, नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं शामिल थीं। शिंदे का कहना था कि उनकी सरकार ने इन बाधाओं को हटाया और विकास की गति फिर से शुरू की। बाल ठाकरे की विचारधारा से विश्वासघात शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से विश्वासघात करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, "उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को छोड़ दिया, उन्होंने भाजपा से विश्वासघात किया और जनता के विश्वास को तोड़ा। जो जनादेश शिवसेना-भाजपा गठबंधन को मिला था, उसे उद्धव ठाकरे ने तोड़ दिया।" मराठा आरक्षण पर क्यों बोले शिंदे मराठा आरक्षण के मुद्दे पर शिंदे ने अपनी सरकार की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया, जो पहले नहीं दिया गया था। मराठा समुदाय के कुछ नेता ओबीसी वर्ग में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। शिंदे ने कहा, "हमने मराठा समुदाय को वह दिया, जो पहले दिया जाना चाहिए था। पहले की सरकारों ने मराठा समुदाय का इस्तेमाल तो किया, लेकिन असली लाभ नहीं दिया। हमारी सरकार ने 10 प्रतिशत आरक्षण दिया और हाई कोर्ट में इसका बचाव किया।" हमने नहीं किया गिरफ्तार शिंदे ने अपनी सरकार पर राज्य एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पूर्व MVA सरकार ने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "लोगों को हनुमान चालीसा का पाठ करने पर गिरफ्तार किया गया, जिसमें महिलाएं और पत्रकार भी शामिल थे। क्या हमने किसी को गलत तरीके से जेल में डाला है?" शिंदे ने कहा कि उनकी सरकार दलितों और पिछड़ी जातियों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम कर रही है। विपक्ष ने इन समुदायों के खिलाफ झूठी नकारात्मकता फैलाई है। recent visitors 46

जिले के स्कूलों में निशुल्क बनाए जा रहे अपार आईडी कार्ड

बिलासपुर जिले के स्कूलों मे अपार आईडी कार्ड बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। स्कूलों मे बड़ी संख्या मे छात्रों के अपार आईडी कार्ड बनाए जा रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी टीआर साहू ने बताया कि अपार आईडी कार्ड बनवाने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी है। वहीं शिक्षक और स्कूल प्रबंधन को भी अभिभावकों को अपार कार्ड से जुड़े तथ्यों की जानकारी देने को कहा गया है, जिससे अभिभावकों के मन में किसी भी तरह का संशय न रहे। अभी निशुल्क अपार आईडी कार्ड बनाए जाएंगे जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अभी निशुल्क अपार आईडी कार्ड बनाए जाएंगे। भविष्य में छात्रों को इसे बनवाने का खर्च खुद ही वहन करना पड़ सकता है। इसलिए अभिभावकों को अपार आईडी कार्ड से जुडी सभी जानकारियां देकर उनकी सहमति ली जा रही है। इस कार्ड को बनवाने के लिए छात्रों से मामूली दस्तावेज ही मंगाए जा रहे हैं, जैसे आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र आदि। कार्ड बनवाने वालों में समस्या आ रही सामने इस तरह की समस्या आ रही सामने कार्ड बनवाने वालों में एक बड़ा वर्ग ऐसे छात्रों की भी है जिन्हे कार्ड बनवाने मे तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। जिन छात्रों के बर्थ सर्टिफिकेट और आधार कार्ड के नाम में अंतर है या आधार कार्ड और स्कूल में दर्ज जन्म तिथि में अंतर है उनका कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। बीते दिन इसी तरह की समस्या महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल में देखी गई थी। अभिभावकों को चिल्हाटी स्थित एआरटीओ सेंटर जाकर सुधरवाने को कहा गया था। क्या है अपार आईडी कार्ड अपार आईडी कार्ड आधार कार्ड की तरह ही सभी स्कूली विद्यार्थियों के लिए तैयार की जाएगी। इसमें विद्यार्थियों के लिए 12 अंकों का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर होगा। इसमें बच्चों के नाम से लेकर उनके अभिभावकों तक की जानकारी होगी। इस आइडी को डिजिटल लाकर से जोड़ा जाएगा। इसमें बच्चे का नाम, पता, कक्षा, रोल नंबर, उनके नंबर, डीएमसी, परीक्षा परिणाम, क्रेडिट स्कोर, अभिभावकों का नाम, कारोबार, घर का पता आदि की जानकारी दर्ज होगी। कार्ड में होगी यह जानकारी एक तरह से इसमें विद्यार्थी की हर प्रकार की निजी जानकारी होगी। ये आईडी प्री नर्सरी से लेकर अंतिम पढ़ाई तक एक ही रहेगी। इस आइडी के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में विद्यार्थी अपने शैक्षणिक रिकार्ड को डिजिटल रूप देख सकेंगे और उसका उपयोग कर सकेंगे। अपार आईडी कार्ड के लाभ     अपार आईडी कार्ड विद्यार्थी की आजीवन पहचान संख्या के रूप में कार्य करता है, जिससे उन्हें अपनी शैक्षणिक प्रगति और उपलब्धियों पर सुचारू रूप से नज़र रखने में मदद मिलती है।     अपार नंबर स्कूल, डिग्री कॉलेज, जूनियर कॉलेज और स्नातकोत्तर सहित सभी स्तरों पर छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड पर नज़र रखेगा।     अपार आईडी कार्ड छात्रों के डेटा को डिजिटल रूप से एक स्थान पर रखेगा, जिसमें सीखने के परिणाम, परीक्षा परिणाम, रिपोर्ट कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड और सह-पाठ्यचर्या उपलब्धियां जैसे ओलंपियाड रैंकिंग, विशेषज्ञ कौशल प्रशिक्षण आदि शामिल होंगे।     स्कूल छोड़ देने वाले छात्रों पर नजर रखना उपयोगी है, ताकि सरकार उन्हें समाज में पुनः शामिल करने तथा शिक्षा के अवसरों से पुनः जोड़ने का प्रयास कर सके।     यह छात्रों को उनकी सभी शैक्षणिक जानकारी को एक संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरित करने में मदद करेगा। नतीजतन, देश में कहीं भी नए कॉलेज में प्रवेश पाना आसान हो जाएगा।     अपार आईडी को सीधे ABC बैंक से जोड़ा जाएगा। इस प्रकार, जब कोई छात्र सेमेस्टर या कोर्स पूरा करता है, तो क्रेडिट सीधे ABC में दर्ज हो जाते हैं, जिससे वे सभी भारतीय कॉलेजों में मान्य हो जाते हैं।     यह छात्रवृत्ति, डिग्री, पुरस्कार और अन्य छात्र प्रमाण-पत्र जैसे शैक्षणिक डेटा को डिजिटल रूप से केंद्रीकृत करेगा।अपार कार्ड छात्र के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करता है। इसमें छात्र का नाम, पता, जन्मतिथि, लिंग, फोटो, खेल गतिविधियाँ, शिक्षा ऋण , छात्रवृत्ति, पुरस्कार आदि की जानकारी शामिल है।   recent visitors 57

पतंजलि का लाखों करोड़ का यह जो पूरा साम्राज्य है, यह सब जनता का है और वही इसकी लाभार्थी है: बाबा रामदेव

हरिद्वार योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है पतंजलि के स्वामित्व को लेकर बड़ी बात कही है। बाबा रामदेव ने साफ किया है कि लाखों करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक ना तो वह हैं और ना ही आचार्य बालकृष्ण। हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में साइकलिंग करते हुए बाबा रामदेव ने कंपनी के मालिकाना हक को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह पूरा साम्राज्य देश की जनता का है और वही इसकी लाभार्थी है। उन्होंने यह भी कहा कि पंतजलि की संपत्ति पर कुछ लोगों की बुरी नजरें हैं। उन्होंने स्वदेशी कंपनी की यात्रा और इसके साम्राज्य को लेकर भी विस्तार से बात की। रामदेव ने कहा कि पतंजलि का लाखों करोड़ का यह जो पूरा साम्राज्य है, लोगों की बुरी नजर है कि ये इतना बड़ा अनुष्ठान कैसे खड़ो हो गया और इसका मालिक कौन है। निरामयम, योग ग्राम, पतंजलि योगपीठ, पतंजलि गुरुकुलम, पतंजलि वेलनेस, विश्वद्यालय तक हमारे सैकड़ों सेवा के संस्थान हैं। इन कार्यों के साथ साथ बहुत दूर तक हम इस अभियान को लेकर ले गए। आज हालात यह है कि पूरे देश में 100 से बड़ी संस्थाएं हमने खड़ी कर दी। हमने योग को बहुत ऊंचाई प्रदान की है। इसका कुल मूल्यांकन है तो कैपिटल मार्केट एक लाख करोड़ से ज्यादा कर रहे हैं।' बाबा रामदेव ने कहा कि एक लाख से अधिक जगहों पर हमारे योग शिक्षक भाई बहन योग के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें कम से कम 10 लाख से ज्यादा को यहां हमने ट्रेनिंग दी और 20-25 लाख को जिला स्तर पर दी गई। आज हमारे साथ कम से कम 25 लाख से ज्यादा वरिष्ठ योग शिक्षक सेवा दे रहे हैं। हमने शिक्षा की गुलामी, आर्थिक वैचारिक गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए पुरुषार्थ किया है। यह जो लाखों करोड़ का साम्राज्य है, यह ऐसे ही खड़ा नहीं हुआ है। इसमें बहुत पुरुषार्थ लगा है। रामदेव ने इस बात से इनकार किया कि पंतजलि के मालिक वह या आचार्य बालकृष्ण हैं। पतंजलि के साम्राज्य की विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, 'लोगों की दृष्टि है कि इसका असली लाभार्थी कौन है। हमारा विश्वास है समृद्धि, सेवा के लिए है, समाज की भलाई के लिए है। स्वामी रामदेव इसका मालिक नहीं है, आचार्य बालकृष्ण इसका मालिक नहीं है। इसका मालिक है पूरा देश और देश के लोग। आज हमने हेल्थ, एजुकेशन, पुअर रिलीफ, नेचर, रिसर्च, चैरिटी के जो काम किए हैं उसका कुल्य मूल्यांकन किया जाए तो हमने लाखों करोड़ रुपया खर्च किया है, एक ही ध्येय है कि यह यात्रा ऐसी ही बढ़ती रही। 200 करोड़ रुपए तो इसकी रनिंग कॉस्ट है।' recent visitors 133

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री बोले हमने बिल्कुल ठीक कहा है कि मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है, तुम हमारे यहां जाकर क्या करोगे

भोपाल  धीरेन्द्र शास्त्री बोले- हिन्दू मस्जिदों में घुसें तो जूते मारो “बंटेंगे तो कटेंगे” का किया समर्थन BCCI के फैसले पर कहा- भिखमंगा देश जाकर क्या करेंगे गजवा ए हिन्द वाले अपनी संख्या बढ़ा रहे 21 नवंबर से धीरेंद्र शास्त्री शुरू करेंगे पदयात्रा बीसीसीआई का फैसला सही, भिखमंगा देश जाकर क्या करेंगे कथावाचक और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री शुक्रवार को भोपाल पहुंचे। यहां उन्होंने अरेरा कॉलोनी स्थित विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक के निवास पर मीडिया से चर्चा की। पं धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के “बंटेंगे तो कटेंगे” वाले बयान पर कहा- राजनीतिक दृष्टि से वह गलत है। लेकिन, सामाजिक दृष्टि से देखा जाए तो भारत के लोग अगर बंटेंगे तो चीन वाले काटेंगे। धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा- किसी भी राजनेता के ऊपर आज तक हमने टिप्पणियां नहीं की हैं। ना कोई जवाब दिया है। ये हमारे स्वभाव में है क्योंकि हमारा रास्ता आध्यात्मिक रास्ता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने महात्मा होने और कट्टर हिंदू होने के नाते नारा दिया तो यह बहुत अच्छा दिया है। लोगों ने अपनी-अपनी दृष्टि से देखा, लेकिन हमने इसको ऐसे देखा कि अगर हम भारतीय आपस में बंटेंगे तो, चीन वाले हमको काटेंगे, पाकिस्तान वाले हम लोगों को काटेंगे। हम लोगों को विदेशी ताकते काटेंगी। भारत के प्रधानमंत्री ने कहा है कि हम एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे। अगर पॉलिटिकल बयान पर कहें तो इस पर हमारी कोई टिप्पणी नहीं है। लेकिन हिंदुस्तानी होने के नाते हमारी यह टिप्पणी हैं कि हम भारतीयों को बंटना नहीं है। अगर बंटेंगे तो सच में कटेंगे। बांग्लादेशी घुसपैठियों को शरण देने और सिलेंडर देने के ऐलान पर धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा इस देश में बहुत प्रायोजित तरीके से षड्यंत्र चल रहा है। विधर्मी लोग जिन्हें हिंदुत्व से बैर है, जिन्हें वंदे मातरम बोलने से दिक्कत है, जिन्हें राष्ट्रगान गाने से दिक्कत है। जिन्हें गजवा ए हिंद चाहिए। वह लोग अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं। बच्चे भी ज्यादा पैदा कर रहे हैं और विदेशों में भी रहने वाले उनके इष्ट मित्र बांग्लादेश के रोहिंग्याओं को बुला-बुला कर भारतीय वोट बैंक को बढ़ाकर अपनी सत्ता जमाना चाहते हैं। इसलिए भारत की सरकार को, हमको और आपको इसी वक्त जागना पड़ेगा कि हम विदेशी शरणार्थियों को और देश विरोधियों को देश में पनाह नहीं देंगे। कुंभ में गैर हिंदुओं की एंट्री को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा हमने बिल्कुल कहा है कि मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है। मक्का मदीना में हमें नहीं बुलाया जाता आप इतने ही उदारवादी गंगा- जमुनी वाले हो। तो मक्का मदीना में हमारी दुकान लगवा दो। हम भी गरीब ही हैं भैया। भारत में इतने हिंदू गरीब हैं तो आपकी मजारों के सामने हम लोगों की दुकान नहीं लगती तो मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है? आपको त्रिवेणी का ज्ञान नहीं, संगम का ज्ञान नहीं, संतों के मान का पता नहीं, कथा का पता नहीं। खालसा क्या होते हैं, पंथ क्या होता है इसके बारे में पता नहीं। तो तुम हमारे यहां जाकर क्या करोगे? धंधा करके मूत्र कांड करोगे? थूक कांड करोगे। इससे बेहतर यह है कि मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है ? हम तुम्हारी मस्जिदों में नहीं घुसते तुम हमारे यहां क्यों आओगे? हमारे हिंदू तुम्हारी मस्जिदों में घुसें तो जूते मारो। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- 21 नवंबर से 29 नवंबर तक हिंदू एकता पदयात्रा है। भारत के सनातनियों को जगाने के लिए, जाति-पांति, ऊंच- नीच, भेदभाव को मिटाने के लिए यह पदयात्रा होगी। क्योंकि भारत पर अब करो या मरो की बारी है। भारत पर संकट भारी है इसलिए हम पदयात्रा करेंगे। पं धीरेंद्र शास्त्री ने BCCI के पाकिस्तान टीम न भेजने पर कहा- उचित फैसला है। वो कंगाल देश है वहां जाकर क्या करेंगे? भिखमंगा देश है। आईसीसी चैम्पियन्स ट्रॉफी की मेजबानी पाकिस्तान को मिली है। इसको लेकर बीसीसीआई ने टीम इंडिया को पाकिस्तान न भेजने का फैसला किया है। इस चैम्पियंस ट्रॉफी में आठ टीमों का टूर्नामेंट होना है। आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में होगा। recent visitors 72