Sunday, July 5, 2026 3:16 am

स्टार की करारी हार, 56 लाख फॉलोवर्स वाले Ajaz Khan को मिले महज 153 वोट

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजे सामने आ रहे हैं। महायुति एक बार फिर से सत्ता में वापसी कर रही है। इस बीच महाराष्ट्र की ‘वर्सोवा’ सीट भी बेहद चर्चा में है। इस सीट से बिग बॉस के एक्स कंटेस्टेंट और अभिनेता एजाज खान भी चुनावी मैदान में थे। हालांकि, चुनावी नतीजे देखकर लग रहा है कि एजाज का ये फैसला गलत निकला है क्योंकि अगर वोटिंग रिजल्ट देखा जाए, तो एक्टर का करारी हार का सामना करना पड़ा है। ‘वर्सोवा’ सीट पर मतगणना जारी महाराष्ट्र की ‘वर्सोवा’ सीट सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए है क्योंकि इस सीट से एजाज खान चुनावी रणभूमि में थे। एजाज ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के टिकट पर नामांकन किया था। अभी भी ‘वर्सोवा’ सीट मतगणना जारी है और एजाज को अब तक महज 153 वोट मिले हैं। बता दें कि 10वें राउंड तक एजाज खान को सिर्फ 79 वोट मिले थे। हालांकि, दसवें राउंड के बाद हारूण 32,499 वोट 6,856 मतों से आगे चल रहे थे। वहीं, अगर बीजेपी की भारती की बात करें तो उन्हें 25,643 वोट मिले थे। इंस्टाग्राम पर एजाज की तगड़ी फैन फॉलोइंग गौरतलब है कि एजाज खान को सोशल मीडिया पर लोग खूब पसंद करते हैं। एजाज की इंस्टाग्राम पर तगड़ी फैन फॉलोइंग है। अगर एजाज के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की बात करें तो उन्हें करीब 5.6 मिलियन लोग इंस्टा पर फॉलो करते हैं, इसके बाद भी उन्हें इतने कम वोट मिलना अपने आपमें ही हैरानी की बात है। ‘वर्सोवा’ सीट से एजाज की हार की वजह से अब चारों ओर उनकी बातें हो रही हैं और लोग इस पर तरह-तरह का रिएक्शन दे रहे हैं। एजाज को नहीं मिले वोट जैसे ही महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे आने लगे तो सोशल मीडिया पर चुनावी नतीजों की चर्चा होने लगी और इसी के साथ एजाज को ट्रोल किया जाने लगा। लोगों ने कहा कि जिस शख्स को इंस्टाग्राम पर 5 मिलियन से भी ज्यादा लोग फॉलो करते हैं उसे 150 वोटों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है, तो बेहद बड़ी बात है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानभा में कुल 288 सीटें हैं और महायुति गठबंधन को 220 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, लेकिन इस हार की वजह से एजाज को खूब ट्रोल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर हो रहे ट्रोल हालांकि ये पहली बार नहीं है जब एजाज चुनाव हार गए हों। हर मामले में अपना रिएक्शन देने वाले एजाज का अभी तक रिएक्शन सामने नहीं आया है। मतगणना को देखते हुए सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल भी किया जाने लगा है। लोग उन्हें बोल रहे हैं कि ये आदमी सोशल मीडिया में खूब हीरो बनता है, लेकिन असल में सच्चाई दिख गई। वहीं, कुछ लोग उन्हें छपरी भी बता रहे हैं। एजाज के 56 लाख फॉलोअर्स हैं सोशल मीडिया पेज खुरपेंच ने अपनी पोस्ट में लिखा, संसद और विधायिका में लगभग हर वर्ग से लोग चुनकर जाते हैं , लेकिन आज तक छपरी समाज से वहां तक कोई नहीं पहुंच पाया , एजाज खान जी ने कोशिश की लेकिन उनको सिर्फ 103 वोट ही प्राप्त हुए हैं। ये सिर्फ छपरी समाज की हार नहीं है बल्कि समाज के तौर पर हमारी और लोकतंत्र की हार है। बता दें, सोशल मीडिया पर एजाज को 5.6 मिलियन लोग फॉलो करते हैं। recent visitors 82

ये लड़की 158 लड़कों के साथ संबंध बना चुकी है मात्र 14 दिनों में, माँ लेकर देती है कंडोम, करती थी सफाई

नॉटिंघम पोर्न इंडस्ट्री आजकल युवाओं को काफ़ी आकर्षित कर रही है. इसकी वजह है इसमें मिलने वाला पैसा. युवाओं का मानना है कि जल्दी पैसा कमाने के तरीकों में से ये एक है. कुछ माता-पिता अपने बच्चों के पोर्न इंडस्ट्री में काम करने को न सिर्फ़ स्वीकार करते हैं, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी करते हैं. कुछ दिन पहले इससे जुड़ा एक रील वायरल हुआ था. एक व्यक्ति ने बताया था कि जब उसने अपने माँ को पोर्न फिल्म में काम मिलने की बात बताई तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी. अब एक पॉर्न स्टार ने एक हैरान करने वाली बात बताई है.   पॉर्न स्टार का नाम बोनी ब्लू (Bonnie Blue) है. हाल ही में एक इंटरव्यू में बोनी ब्लू ने अपनी कमाई और काम के बारे में एक चौंकाने वाली बात बताई. वो एक एडल्ट साइट पर युवाओं का कंटेंट पोस्ट करती है. उसने बताया कि दो हफ़्तों में उसने 158 पुरुषों के साथ संबंध बनाए. कॉलेज के लड़के आगे आए! : बोनी ब्लू ने वीडियो कंटेंट के लिए कॉलेज के लड़कों के सामने अपना प्रस्ताव रखा. उसने 18-19 साल के लड़कों से बात की. सिर्फ़ 14 दिनों में 158 युवक इसके लिए तैयार हो गए. पहले बोनी ब्लू ने उनसे सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाए. फिर उनके साथ संबंध बनाए. उसके इस काम में उसके माता-पिता ने पूरा साथ दिया. उन्होंने बोनी की मदद की और उसे इस काम के लिए प्रोत्साहित किया. अब वही वीडियो बोनी ब्लू के लिए कमाई का ज़रिया बन गए हैं. बोनी ब्लू ने बताया कि वो वीडियो से काफ़ी पैसा कमा रही है. फ्रेशर्स के साथ किया सेक्स लोकप्रिय सोशल मीडिया स्टार ने हाल ही में दावा किया कि उसने अपने ऑनलाइन कंटेंट के लिए यूनिवर्सिटी फ्रेशर्स के साथ सेक्स किया है। बोनी ने कहा कि उसने अपने OnlyFans पेज के लिए कंटेंट बनाने के लिए 18 और 19 साल के लड़कों को अपने साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उसने दावा किया कि लड़के सहमति फॉर्म पर साइन करने से पहले घंटों तक अपार्टमेंट के अंदर कतार में खड़े रहते थे। शिकारी महिला से बच के रहना नॉटिंघम में जन्मी इस एडल्ट फिल्म स्टार ने अब खुलासा किया है कि उसके माता-पिता ने उसके इस आंकड़े को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। उसने दावा किया है कि वह अपने वीडियो से हर महीने £750,000 कमाने वाली है। इस महीने की शुरुआत में, बोनी ब्लू ने जल्दी पैसे कमाने के लिए सेक्स की योजना बनाई। सोशल मीडिया पर लोग अब इस महिला को “शिकारी” कह रहे हैं। मां ने किया सपोर्ट स्टार ने कहा- “मेरी मां नए छात्रों के बीच जाकर उन्हें पर्चे और कंडोम बांटती थीं और कहती थीं, ‘जाओ और मेरी बेटी के साथ सेक्स करो’. मूल रूप से डर्बीशायर की रहने वाली बोनी वास्तव में ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं. हालांकि, इस साल की शुरुआत में, उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि वह ऑस्ट्रेलियाई गर्मियों को छोड़कर ब्रिटेन के ठंडे तापमान की ओर वापस जा रही हैं ताकि कुछ मसालेदार कंटेंट बना सकें जिससे उन्हें पैसे की बरसात हो रही है. माँ लाती थी कंडोम : आज की दुनिया और लोगों की सोच बिल्कुल अलग है. बेटी के पोर्न वीडियो के लिए माँ का पूरा सहयोग है. बोनी ब्लू की माँ ने उसके लिए लोगो तैयार किया और घर आने वाले पुरुषों को कंडोम देती है. उनके जाने के बाद घर की सफ़ाई का ज़िम्मा भी माँ का ही है. पिता सभी को बिज़नेस कार्ड देते हैं. बोनी ब्लू ब्रिटेन के डर्बीशायर की रहने वाली है. अब वो ऑस्ट्रेलिया में रहती है. बोनी को किसी कंपनी में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं है. इसलिए उसने ये पेशा चुना. बोनी ब्लू ने शुरुआत में अपने माता-पिता की मर्ज़ी के बिना ये काम शुरू किया था. लेकिन पहला वीडियो लीक होने के बाद सब बदल गया. बोनी ब्लू बताती है कि उसके माता-पिता बेटी का वीडियो देखकर हैरान नहीं हुए, बल्कि उसका साथ दिया. उन्होंने कहा कि तुम्हारी ख़ुशी में ही हमारी ख़ुशी है और बेटी के काम में मदद करने लगे. recent visitors 66

महाराष्ट्र में महायुति की प्रचंड जीत में कांग्रेस को गुजरात वाली चोट मिली, कांग्रेस नहीं बचा पाई नेता विपक्ष की कुर्सी

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी के अगुवाई वाले महायुति की प्रचंड जीत में कांग्रेस को गुजरात वाली चोट मिली है। 2022 के गुजरात विधानसभा चुनावों कांग्रेस सिर्फ 17 सीटें जीत पाई थी। इसके बाद राज्य की सत्ता में 25 साल से बाहर कांग्रेस के हाथों से नेता विपक्ष का पद भी चला गया था। महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों में भी कुछ ऐसी स्थिति उभरी है। विपक्ष गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को कोई भी घटक जरूरी 29 सीटों के आसपास पहुंचता नहीं दिख रहा है। नियमानुसार संसद और विधानसभा में नेता विपक्ष के लिए 10 फीसदी सीटों का होना आवश्यक है। महाराष्ट्र में कम से 29 सीटों होनी चाहिए। कांग्रेस को 25 सीटों के अंदर सिमटती गई है। ऐसे में सवाल खड़ हो गया है कि जिस महाविकास आघाड़ी में सीएम बनने के लिए लड़ाई थी। उसके घटक दल नेता विपक्ष की हैसियत भी नहीं रख पाए। गुजरात को बनाया था मुद्दा महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र से गुजरात की तरफ निवेश, कारखाने और नौकरियां जानें को चुनावी मुद्दा बनाया था, लेकिन एमवीए का यह दांव उल्टा पड़ा। महायुति को 220 से अधिक सीटें मिलती दिख रही है तो वहीं एमवीए 50 के आसपास सिमट गया है। राहुल गांधी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के 99 सीटें हासिल करने के बाद नेता विपक्ष बन पाए थे। लोकसभा में 13 सीटें जीतने वाली कांग्रेस की यह दुर्गति होगी यह शायद किसी ने नहीं सोचा था। गुजरात के बाद कांग्रेस महाराष्ट्र में भी कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। महाराष्ट्र में कांग्रेस ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था। आखिर में कांग्रेस को मिला था पद 2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी बनी थी। से 105 सीटों पर जीत मिली थी। दूसरे नंबर पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना और फिर तीसरी नंबर पर एनसीपी रही थी। शिवसेना और एनसीपी के टूटने के बाद कांग्रेस को राज्य में नेता विपक्ष का पता मिला था। जब राज्य में शिंदे सीएम बने थे तो पहले संख्याबल के हिसाब से एनसीपी को यह पद मिला था और अजित पवार नेता विपक्ष बने थे। एनसीपी के टूटने के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी हो गई थी। तब विजय वडेट्टीवार नेता विपक्ष बने थे। वह 1 साल 112 दिनों तक नेता विपक्ष रहे। 2024 के चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि वह नेता विपक्ष की कुर्सी भी नहीं बचा पाई। recent visitors 57

डेढ़ लाख बालिकाओं को दिलाया गया रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण

स्कूल में पढ़ने वाली बालिकाओं को आत्म सुरक्षा के लिये दिया जा रहा है प्रशिक्षण  प्रदेश में एक लाख 50 हजार बालिकाओं को आत्म सुरक्षा के लिये जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया डेढ़ लाख बालिकाओं को दिलाया गया रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण भोपाल प्रदेश में शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं में आत्म-विश्वास और सुरक्षा की भावना सशक्त करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा रानी लक्ष्मीबाई आत्म सुरक्षा प्रशिक्षण योजना चलाई जा रही है। योजना से प्रदेश में करीब एक लाख 50 हजार बालिकाओं को जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया है। योजना में 15 हजार 245 शासकीय विद्यालयों की 80 हजार 466 बालिकाओं को प्रशिक्षण दिलाया गया। इसी के साथ प्रदेश में संचालित 207 कस्तूरबा गांधी विद्यालय और 324 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस बालिका छात्रावास में अध्ययनरत 70 हजार 450 बालिकाओं को जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया। स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 से 8 की बालिकाओं के विद्यालयों के लिये प्रशिक्षण राशि भी जारी की है। दृष्टि बाधित बच्चों को पुस्तकों का वितरण स्कूल शिक्षा विभाग ने दृष्टि बाधित बच्चों की सुविधा को देखते हुए उनके पाठ्यक्रम की समस्त पुस्तकें ब्रेल लिपि में उपलब्ध करवाई हैं। ब्रेल लिपि पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण शासकीय ब्रेल प्रेस भोपाल से कराया गया है। दिव्यांग बच्चों का चिकित्सीय मूल्यांकन प्रदेश के शासकीय स्कूलों में पढने वाले दिव्यांग बच्चों का चिकित्सीय मूल्यांकन शिविरों के माध्यम से कराया गया। पिछले वर्ष 30 जिलों के विकासखंडों पर आयोजित शिविर में 6 हजार 560 दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उन्हें उनकी आवश्यकता के उपकरण वितरित किये गये। इसी के साथ दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को भी गृह आधारित शिक्षा एवं बच्चों की दैनिक गतिविधियों पर फेस-टू-फेस प्रशिक्षण जिला स्तर पर प्रदान किया गया है।   recent visitors 121

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में मिलिंग नीति की खाद्य मंत्री ने की समीक्षा

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के मिलिंग नीति की समीक्षा की। उन्होंने अफसरों को कड़े निर्देश दिये  कि उपार्जन के दौरान या उसके बाद होने वाली गड़बडि़यों को रोकने के लिए विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त उपार्जन केन्द्रों का औचक निरीक्षण करें। मंत्रालय में प्रस्तावित मिलिंग नीति की समीक्षा करते हुए खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अफसर कड़े निर्णय लेने से गुरेज न करें। व्यवस्था में सुधार लाने के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनिमितता पाये जाने पर जिम्मेदारों के  खिलाफ कठोर कार्यवाही करें। उपार्जन में गड़बड़ी रोकने के लिए उड़न दस्ता गठित करें। उड़नदस्ता औचक रूप से उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करेंगे।     मंत्री राजपूत ने कहा कि मैदानी स्तर पर   जिला प्रबंधक नियमानुसार कार्य करने में कोई कोताही न बरतें।  अफसरों को निर्देश दिये गये कि उपार्जन कार्य में संलग्न सर्वेयरों पर सतत् निगरानी रखें, जिससे वे उपार्जन के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही न करें। उन्होंने व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कुछ नई कार्य-योजना बनाने के भी निर्देश अधिकारियों को दिये। बैठक में प्रमुख सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण शमी, आयुक्त खाद्य सिबि चक्रवर्ती, एमडी नागरिक आपूर्ति निगम पी.एन. यादव सहितसंबंधित अधिकारी उपस्थित थे।   मशीनों से होगी अनाज की सफाई, मंडला में पायलेट प्रोजेक्ट खाद्य मंत्री राजपूत ने निर्देश दिये कि भारतीय खाद्य निगम को उच्च गुणवत्ता का चावल प्रदान करने के लिए अनाज की सफाई मशीनों से कराई जाये। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस कार्य को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में मंडला से शुरूआत की जायेगी। इसे बाद में पूरे प्रदेश में लागू किया जायेगा, जिससे भारतीय खाद्य निगम को गुणवत्ता युक्त चावल दिया जा सके। 20 दिन में मानक स्तर का चावल जमा कराना अनिवार्य प्रस्तावित नई मिलर्स नीति 2024-25 में पहली बार दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें  चावल की सूचना मिलर्स को प्राप्त होने के दिनांक से 20 दिवस में मानक स्तर का चावल जमा कराना अनिवार्य होगा। ऐसा न होने की स्थिति में मिलर्स पर 2 रूपये प्रति दिन प्रति क्विंटल का जुर्माना लगाया जाऐगा और एक माह में मानक स्तर का चावल जमा न कराये जाने पर मिलर्स द्वारा जमा की गई प्रतिभूति राशि राजसात कर ली जाऐगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि मिलर्स द्वारा भारतीय खाद्य निगम को प्रदान किये जाने वाले चावल की मात्रा 60 प्रतिशत से कम प्रदान करने पर मिलर्स को प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाऐगी।   recent visitors 72

हर हाथ में इंटरनेट के साथ बढ़ा है ठगी का नया मायाजाल, 5,463 केस केवल साइबर सेल में दर्ज हुए बीते 10 महीनों में

 भोपाल डिजिटल दुनिया के विस्तार ने अपराधियों के हाथ में ठगी का नया मायाजाल दे दिया है। अब ठग वेश बदलकर आपसे मिलने का जोखिम नहीं लेते। वे इंटरनेट मीडिया, ई-मेल और स्मार्टफोन के एप के जरिए चारा डालते हैं और एक क्लिक कर आपका खाता खाली कर देते हैं। हालात कितने भयावह हैं, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अकेले भोपाल के थानों में इस साल जितनी एफआईआर हुई हैं, उनमें 27% केवल साइबर ठगी की शिकायतों पर हुई हैं। राजधानी के 34 पुलिस थानों में इस वर्ष 15 नवंबर तक जहां अपराध के 14 हजार 454 आपराधिक मामले दर्ज हुई हैं। कुल अपराधों का 27% ऑनलाइन फ्रॉड वहीं, अकेले साइबर क्राइम सेल में इसी दौरान पांच हजार 463 केस दर्ज हो चुकी हैं। यह कुल अपराधों का 27% है। यह स्थिति तब है, जब हर साइबर अपराध थाने तक नहीं पहुंच पाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस साल दर्ज 14 हजार से अधिक मामलों में चोरी, ठगी, छिनैती, जेबकतरी जैसे वित्तीय अपराधों के मामले केवल एक हजार के करीब हैं। मगर, साइबर क्राइम सेल में जो पांच हजार से अधिक केस आए हैं, उनमें चार हजार मामलों में तो पीड़ित के खातों से रकम उड़ा ली गई है। चोरी, ठगी और छिनैती जैसे वित्तीय अपराधों की तुलना में साइबर ठगों ने सैकड़ों गुना अधिक रकम चुराई है। यह ठगी कितनी तेजी से बढ़ी है, इसका अंदाजा आप ऐसे लगाइए कि 2019 में भोपाल में दो हजार 792 एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसमें एक करोड़ 48 लाख रुपये की ठगी का ब्यौरा था। इस साल के 10 महीनों में ही पांच हजार 491 केस दर्ज हो चुके, जिसमें 55 करोड़ 88 लाख रुपयों की ठगी हुई है। इस साल ठगी जा चुकी रकम 2019 की तुलना में 3800% ज्यादा है। ठगों ने इन तरीकों से दिया झांसा     ओएलएक्स पर बाइक बेचने का एड डाला था। एक व्यक्ति ने मैसेज कर बाइक खरीदने की इच्छा जाहिर की। अगले दिन बाइक लेने के लिए आने से पहले उसने फोन पर भुगतान करने को कहा। उसने पेटीएम के माध्यम से दो रुपये मेरे खाते में भेजे। इसके बाद 50 हजार रुपये की राशि भेजी। साथ ही मुझे पेमेंट स्वीकार करने के लिए पिन डालने का बोला। मैंने पिन डाला तो खाते से रुपये गायब हो गए। पता चला कि उसने मुझे रुपये नहीं भेजे, बल्कि पेमेंट की रिक्वेस्ट भेजी थी। -रवि दुबे, रेलवे कर्मचारी     फेसबुक लिंक के माध्यम से ट्रेडिंग एप डाउनलोड किया था। ऐसा दावा था कि वे हर कंपनी के आइपीओ दिलवाते हैं। एप पर नए आइपीओ की जानकारी ठीक उसी तरह दिखती थी, जैसे किसी अन्य एप या वेबसाइट पर नजर आती है। मैंने एक आइपीओ के लिए आठ लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन तय समय पर आइपीओ नहीं मिला, जिसके बाद ठगी का एहसास हुआ। – अरुण पारिख, डॉक्टर, एम्स     आईसीआईसीआइ बैंक के प्रतिनिधि का फोन आया। उसने बताया कि क्रेडिट कार्ड के 600 रिवार्ड प्वाइंट्स हैं, उसे रिडीम कर लीजिए। उसने रिडीम करने का तरीका भी बताया। रिडीम की प्रकिया के दौरान उसने ओटीपी भेजा। मेरे नंबर पर ओटीपी बैंक के नाम से आया था, विश्वास कर मैंने उसे बता दिया। फोन कटने के कुछ देर बाद क्रेडिट कार्ड से तीन लाख रुपये कटने का मैसेज आया। – सोनम जैन, व्यापारी     किसी व्यक्ति ने मेरे बैंक खाते में 1800 रुपये भेजे थे। अगले दिन फोन कर उसने कहा कि आपने 1800 रुपये का लोन लिया था, उसे 3200 रुपये भरकर चुकाएं। इन्कार किया तो छेड़छाड़ कर मेरे अश्लील फोटो बहुप्रसारित करने की धमकी दी। डरकर मैंने उन्हें रुपये भेज दिए। इसके बाद खाते में पांच हजार रुपये भेजे गए और दस हजार की मांग की। इसके बाद मांग लगातार बढ़ती गई। बाद में दोस्तों और परिवार को बात बताई तथा साइबर पुलिस से शिकायत की। -विजेंद्र यादव, व्यापारी वर्ष     शिकायतें               ठगी राशि 2019     2792          1 करोड़ 48 लाख (लगभग) 2020    3643           3 करोड़ 20 लाख (लगभग) 2021   3915           4 करोड़ 18 लाख 2022   5491       17 करोड़ 15 लाख 2023 6087 24 करोड़ 35 लाख 2024 5463 55 करोड़ 88 लाख 2019 से 2024 तक ठगी की राशि में वृद्धि (प्रतिशत में) 2019 से 20     212 2020 से 21     130 2021 से 22     410 2022 से 23     142 2023 से 24     229 इस साल के साइबर अपराध पर भी नजर डालिए     भोपाल साइबर क्राइम सेल में दर्ज कुल शिकायतें (15 नवंबर 2024 तक)- 5463।     पारंपरिक अपराध की तुलना में 38 प्रतिशत अपराध सिर्फ साइबर क्राइम के हुए।     1073 मामले साइबर बुलिंग और इंटरनेट मीडिया पर उत्पीड़न के सामने आए हैं।     ऑनलाइन फ्रॉड के 4370 मामलों में हुई है 55 करोड़ 88 लाख रुपये की ठगी।     विभिन्न थानों में पारंपरिक अपराध के लिए एक हजार दर्ज की गई एफआईआर। प्रदेश से इस साल 290 करोड़ चुरा लिए वर्ष     राशि रुपये में 2021     11 करोड़ 2022     45 करोड़ 2023     200 करोड़ 2024     290 करोड़ कैसे बढ़ा डिजिटल दुनिया में अपराध का ग्राफ स्मार्ट फोन का बढ़ता उपयोग– पांच वर्षों में मोबाइल धारकों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ गई है। वे इंटरनेट पर विभिन्न एप का उपयोग करते हैं, जहां उपभोक्ता का डाटा मौजूद होता है। सस्ता और हाइ स्पीड इंटरनेट- भारत में इंटरनेट काफी किफायती दरों पर उपलब्ध है। साथ ही उसकी स्पीड भी बीते वर्षों में काफी तेज हुई है। इसने इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ाई है। डिजिटल ट्रांसफार्मेशन- डिजिटल परिवर्तन के अंतर्गत सरकारी सेवाओं से लेकर निजी व्यवसाय सब कुछ आनलाइन हो गया है। डिजिटल पेमेंट व्यवस्था ने इसे नया रूप दिया है। जागरूकता का अभाव- 90 प्रतिशत से अधिक मोबाइल व इंटरनेट उपभोक्ता अब भी साइबर सुरक्षा के बुनियादी ज्ञान से वंचित हैं। वे साइबर ठगों का सबसे आसान शिकार होते हैं। साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे में कमी- साइबर सुरक्षा के लिए देश में मजबूत ढांचा तैयार नहीं किया जा सका है। जो नियम-कानून बने हैं, वे भी कमजोर हैं। पुलिस के पास भी साइबर अपराधियों को पकड़ने का तंत्र कमजोर है। recent visitors 65

बारिश की कमी ने दिल्ली में प्रदूषण संकट को बढ़ा, वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है: CAQM

नई दिल्ली दिल्ली एक बार फिर गंभीर प्रदूषण स्तर से जूझ रही है, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता खतरनाक श्रेणी में पहुंच गई है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को प्रदूषण की निगरानी करने और विभिन्न राज्यों को उचित उपाय करने के लिए मार्गदर्शन देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. वायु प्रदूषण का मुख्य कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली को माना जाता है, लेकिन इस साल पराली जलाने पर रोक लगाने के बावजूद भी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस साल रिकॉर्ड तोड़ रहा है. प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि के लिए CAQM द्वारा पहचाने गए प्रमुख कारकों में से एक नवंबर में देखा गया असामान्य मौसम पैटर्न है. इंडिया टुडे से खास बातचीत में, आयोग के एक तकनीकी सदस्य एसडी अत्री ने बताया कि पिछले साल नवंबर में घने कोहरे ने मौसमी गतिविधियों को काफी हद तक बदल दिया है. घना कोहरा, जो पहले इस अवधि में असामान्य था ने वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण का संकट बढ़ गया है. दिल्ली में क्यों घुट रहा है लोगों का दम? पिछले दो हफ़्तों में बढ़े प्रदूषण स्तर ने आयोग के लिए काफी चिंता पैदा कर दी है. जिससे मौसम की स्थिति पर फिर से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है क्योंकि यह एक प्रमुख कारक है. एसडी अत्री ने बताया कि पिछले 20 साल में औसतन नवंबर में आधे दिन तक घना कोहरा दर्ज किया जाता था. हालांकि, इस साल लगातार और तीव्र धुंध ने स्थिति को जटिल बना दिया है, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी समस्या है. हाल के वर्षों में वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां दुनिया भर के शहरी वातावरण में तेजी से देखने को मिल रही हैं. कई दशकों से भारतीय मौसम विभाग से जुड़े एक अनुभवी विशेषज्ञ अत्रेय ने बताया कि कैसे ये वैश्विक घटनाएं दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. बारिश की कमी के कारण भी बढ़ा प्रदूषण आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के महीनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण भारत के मैदानी इलाकों में बारिश होती है. हालांकि, इस साल बारिश नहीं हुई है. बारिश ना होने से एक प्राकृतिक तंत्र को नष्ट हो गया है, जो आमतौर पर प्रदूषकों को फैलाने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है. बारिश की कमी ने दिल्ली में प्रदूषण संकट को बढ़ा दिया है, जहां वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है. इंडिया टुडे से बातचीत में अत्री ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सामने प्रदूषण के स्तर की निगरानी और नियंत्रण में आने वाली चुनौतियों पर जोर दिया. हालांकि, आयोग स्थिति पर कड़ी नज़र रखता है, लेकिन मौसम और वायुमंडलीय कारकों को नियंत्रित करना लगभग असंभव है. ये कारक प्रदूषकों के फैलाव और सांद्रता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हवा की गति से लेकर हवा की दिशा तक हर तत्व इस बात को प्रभावित करता है कि प्रदूषक दिल्ली में कैसे पहुंचते हैं और कैसे बसते हैं. दुर्भाग्य से पिछले दो हफ़्तों में ये कारक अनुकूल नहीं रहे हैं, जिससे हवा में स्थिरता बनी हुई है और प्रदूषण में वृद्धि हुई है. सीएक्यूएम द्वारा दी गई जानकारी दिल्ली और इसी तरह के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को संबोधित करने की जटिलता को रेखांकित करती है. चूंकि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन मौसम के पैटर्न को बदलना जारी रखते हैं इसलिए नीति निर्माताओं के लिए वायु गुणवत्ता को प्रबंधित करने के लिए समाधान तैयार करते समय इन कारकों पर विचार करना अनिवार्य है. इन वैश्विक मुद्दों से उत्पन्न प्रदूषण चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों में जलवायु लचीलापन शामिल होना चाहिए.   recent visitors 58