Friday, July 10, 2026 1:17 pm

पर्थ टेस्ट: पहली गेंद मैकस्वीनी को खेलने देने के ख्वाजा के फैसले की क्लार्क ने की आलोचना

पर्थ. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व टेस्ट कप्तान माइकल क्लार्क ने भारत के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में डेब्यू कर रहे सलामी बल्लेबाज नाथन मैकस्वीनी को पहली गेंद खेलने देने के उस्मान ख्वाजा के फैसले की आलोचना की। यशस्वी जायसवाल और विराट कोहली के शतकों की बदौलत भारत ने अपनी दूसरी पारी 487/6 पर घोषित कर ऑस्ट्रेलिया को 534 रनों का विशाल लक्ष्य दिया था। तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें और बढ़ गई। एक विशाल लक्ष्य के जवाब में मेजबान टीम की शुरुआत खराब रही। सलामी बल्लेबाज मैकस्वीनी सिर्फ चार गेंद ही खेल सके और जसप्रीत बुमराह की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए। चौथे दिन ख्वाजा भी सिराज का शिकार हुए। क्लार्क ने स्काई स्पोर्ट्स के बिग स्पोर्ट्स ब्रेकफास्ट शो में कहा, “बहुत से लोग पहली गेंद खेलना पसंद नहीं करते, इसलिए ओपनिंग बल्लेबाज रोटेट करते हैं। ख्वाजा ने पहली पारी में पहली गेंद खेली, जबकि दूसरी पारी में मैकस्वीनी ने यह जिम्मा उठाया। लेकिन मुझे लगता है कि ख्वाजा को ही दूसरी पारी में पहली गेंद खेलना चाहिए था। उन्हें कहना चाहिए था मैं एक सीनियर खिलाड़ी हूं। मैं जानता हूं कि तुम ऐसा करना चाहते हो लेकिन मुझे इसका लुत्फ उठाने दो।” उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की आलोचना भी की कि जब भारत ने दूसरी पारी में बल्लेबाजी की और विशाल स्कोर बनाया तो गेंद और मैदान पर फील्डिंग में कोई संघर्ष नहीं दिखा। क्लार्क ने कहा, “ऐसा लग रहा था कि हम भारत को फिर से कम समय में हराने की उम्मीद कर रहे थे, कोई इरादा नहीं था। वे हमारे सामने थे, लेकिन मैंने हमारे किसी भी गेंदबाज को किसी भी भारतीय बल्लेबाज पर हावी होते नहीं देखा। हमारा इरादा, हमारी ऊर्जा… यह सब गर्मियों के पहले टेस्ट के लिए थोड़ा फीका लग रहा था।” recent visitors 62

विधायकों के हस्तक्षेप से बस के रूट बदलने की खींचतान खत्म, राजस्थान-केकड़ी में ब्यावर-रावतभाटा तक नई बस शुरू

केकड़ी. जिले में ब्यावर-रावतभाटा वाया भिनाय होकर चलने वाली बस सेवा का शनिवार को रूट बदलकर वाया टांटोती कर दिए जाने के बाद दो क्षेत्रों के लोगों के बीच खींचतान की स्थिति बन गई थी, जो अब विधायकों के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गई है। इस बस का पुराना रूट यथावत कर दिया गया है, जबकि टांटोती के लोगों की मांग पर एक नई बस सेवा वाया टांटोती होकर शुरू कर दी गई है। दोनों बस सेवाओं का टाइम अलग-अलग किया गया है। बस का रूट भिनाय से बदलकर टांटोती कर देने से भिनाय क्षेत्र के लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने मसूदा विधायक वीरेंद्र कानावत को मामले की सूचना दी। इस पर विधायक कानावत ने ब्यावर डिपो के अधिकारियों को फटकार लगाई और रविवार को इस बस का रूट पहले जैसा यथावत कराया। उधर शनिवार को टांटोती होकर शुरू हुई बस सेवा अगले ही दिन रविवार को बंद हो जाने पर इस इलाके के लोगों ने केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम को मामले की जानकारी दी। इस पर विधायक गौतम ने रोडवेज विभाग से जवाब-तलब किया, जिस पर आखिरकार रोडवेज ने ब्यावर-रावतभाटा की एक नई बस सेवा वाया टांटोती होकर शुरू की है। इस मामले में रविवार को अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद दोनों विधायकों व रोडवेज प्रशासन ने सकारात्मक निर्णय लेकर प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को राहत प्रदान की। डिपो के ट्रैफिक मैनेजर लोकेंद्र जांगिड़ ने बताया कि ब्यावर से रावतभाटा वाया भिनाय होकर जो बस चलती थी, उसे मसूदा विधायक वीरेंद्र कानावत के हस्तक्षेप पर फिर यथावत कर दिया गया है। रोडवेज डिपो प्रशासन के अनुसार यह बस ब्यावर से निर्धारित समय सुबह 8:50 बजे से प्रस्थान कर मसूदा, बांदनवाड़ा होते हुए वाया भिनाय, नागोला, कनेईकला, जालिया, केकड़ी होकर रावतभाटा पहुंचेगी व इसी रूट से होते हुए वापस आएगी। जांगिड़ ने बताया कि केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम के हस्तक्षेप पर टांटोती के लिए अलग से बस सेवा शुरू की गई है और इस बस का समय परिवर्तन किया है। यह बस सेवा नियमित रूप से ब्यावर से सुबह 11:20 बजे रवाना होकर वाया टांटोती होकर रावतभाटा पहुंचेगी। वहीं रावतभाटा से नियमित सुबह 6:30 बजे रवाना होकर वापस उसी रूट से ब्यावर पहुंचेगी। क्षेत्र के लोगों ने रोडवेज बस सेवा पुन: शुरू होने पर केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम का आभार जताया। उल्लेखनीय है कि ब्यावर से केकड़ी तक वाया भिनाय 95 किलोमीटर दूरी है, वहीं ब्यावर से केकड़ी वाया टांटोती तक की दूरी भी 95 किलोमीटर ही है। उक्त दोनों मार्गों पर बस का किराया भी एक तरफ का 95 रुपये ही है। recent visitors 67

महाराष्ट्र विधानसभा में करारी हार के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले का इस्तीफा

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महा विकास अघाड़ी की हार के बाद नाना पटोले ने कथित तौर पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। मौजूदा महायुति ने महाराष्ट्र चुनावों में 235 सीटें और 49.6 फीसदी वोट शेयर हासिल करते हुए बंपर जीत दर्ज की थी। वहीं महाविकास अघाड़ी 49 सीटों और 35.3 फीसदी वोटों के साथ बहुत पीछे रह गई। नाना पटोले सकोली विधानसभा सीट से महज 208 वोटों के अंतर से जीत पाए। इससे पहले नाना पटोले ने रविवार को कहा था कि वो यह सुनिश्चित करेंगे कि नवनिर्वाचित महायुति सरकार अपने चुनावी घोषणा-पत्र और भाषणों में राज्य की जनता से किए गए वादों को पूरा करे. कांग्रेस नेता ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि महायुति को मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना के तहत महिलाओं के लिए मासिक भत्ता 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये करने का अपना वादा तुरंत पूरा करना चाहिए. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हम हार पर मंथन करेंगे। इस बीच पटोले ने इस्तीफा ही दे दिया है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी में अंतर्कलह भी जारी है। यहां तक कि चुनाव में हारे पृथ्वीराज चव्हाण ने तो शनिवार को ही कह दिया था कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों को लड़की बहिन योजना, आरएसएस के साथ और नेताओं की मेहनत का फायदा मिला है। वहीं अपनी लीडरशिप पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा था कि हमारा नेतृत्व ही कमजोर रहा। वहीं नाना पटोले ने कहा कि भले ही हमें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है, लेकिन हम पूरी मेहनत से काम करेंगे। पटोले ने कहा कि हम सरकार को उसके वादे याद दिलाते रहेंगे कि जनता को फायदा मिले। महायुति ने राज्य विधानसभा चुनाव में 288 में से 230 सीट पर जीत दर्ज की है.  महायुति में शामिल भाजपा को 132, शिवसेना को 57 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को 41 सीट पर जीत मिली. दूसरी ओर, एमवीए को करारी हार मिली, जिसने कुल मिलाकर महज 46 सीट जीती हैं. एमवीए में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को 10, कांग्रेस को 16 और शिवसेना (यूबीटी) को 20 सीट पर जीत मिली. पटोले खुद भंडारा जिले के साकोली विधानसभा क्षेत्र से 208 मतों के अंतर से जीते. पटोले ने कहा था, ‘‘हम यह सुनिश्चित करेंगे कि महायुति सरकार चुनाव के दौरान किसानों से किए गए अपने वादों को पूरा करे.'' recent visitors 54

छत्तीसगढ़ सीएम साय को ट्रेन में सफर करते हुए नजर आए, अचानक सीएम को ट्रेन में पाकर यात्री भौचक्के रह गए

रायपुर छत्तीसगढ़ सीएम विष्णुदेव साय रविवार को ट्रेन में सफर करते हुए नजर आए. अचानक सीएम को ट्रेन में पाकर यात्री भौचक्के रह गए. इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने ट्रेन के सहयात्रियों से गर्मजोशी से मिले और सभी यात्रियों को कुशलक्षेम भी पूछा. इससे पहले, प्लेटफॉर्म पर सीएम को देखकर ट्रेन के इंतजार में खड़े यात्री भी दंग रह गए. अमरकंटक एक्सप्रेस ट्रेन से बिलासपुर रवान हुआ सीएम विष्णु देव साय रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को बिलासपुर मे आयोजित कवि सम्मलेन में शिरकत करने के लिए सीएम विष्णु देव साय राजधानी रायपुर से बिलासपुर की यात्रा अमरकंटक एक्सप्रेस से तय की. सीएम ट्रेन से बिलासपुर की यात्रा का निर्णय अचानक लिया, लेकिन अब छत्तीसगढ़ सीएम किया है कि वो अब राज्य का दौरा भी ट्रेन के जरिए करेंगे. मुख्यमंत्री को ट्रेन में चढ़ता देखकर प्लेटफार्म पर दंग रह गए पैसेंजर सीएम साय रविवार शाम अमरकंटक एक्सप्रेस से रायपुर से बिलासपुर के लिए रवाना हुए. वे मुख्यमंत्री निवास से कार द्वारा स्टेशन पहुंचे और बिना विशेष ताम झाम के प्लेटफार्म तक पहुंच गए. मुख्यमंत्री को अचानक प्लेटफार्म पर देखकर प्लेटफार्म पर मौजूद पैसेंजर ठिठक गए. मुख्यमंत्री ने गर्मजोशी से सभी बातचीत की, जिससे लोग सहज हो पाए. ट्रेन के कोच आम यात्री की तरह मूंगफली खाते हुए पहुंचे सीएम साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि, रेल यात्राओं की आम भारतीय के जीवन में खास जगह है. अमरकंटक एक्सप्रेस से रायपुर से बिलासपुर की ओर रवाना हुए सीएम साय ट्रेन के कोच आम यात्री की तरह मूंगफली खाते हुए पहुंचे. ट्रेन में पहुंचकर सीएम मे बिल्कुल देशी अंदाज में बोले, मूंगफली के बिना रेल यात्रा पूरी नहीं हो सकती. हालांकि ट्रेन में स्वच्छता की हिदायत दी पीएम मोदी के कार्यकाल में बेहतर हुई रेलवे सुविधाओं की चर्चा की छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री की रेल यात्रा के दौरान रेलवे के अधिकारी भी मौजूद रहे. सीएम ने प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में बेहतर हुई रेलवे सुविधाओं की चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को भी इसका लाभ मिला है इस मौके पर विधायक अनुज शर्मा, भैयालाल राजवाड़े और गुरु खुशवंत साहेब भी यात्रा के दौरान उनके साथ उपस्थित थे. recent visitors 50

पर्थ पहुंचते ही रोहित शर्मा पिंक बॉल टेस्ट की तैयारी में जुटे

पर्थ. भारतीय कप्तान रोहित शर्मा सोमवार को पर्थ स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रहे पहले टेस्ट के चौथे दिन टीम से जुड़ गए। रोहित रविवार को वहां पहुंचे और सोमवार को टीम के ड्रेसिंग रूम में कोच गौतम गंभीर के साथ नजर आए। अपने बेटे के जन्म के कारण पर्थ में पहला टेस्ट मैच मिस करने वाले रोहित भारत की टेस्ट टीम के नियमित कप्तान हैं। रोहित ने दूसरे टेस्ट की तैयारी शुरू कर दी है। वह नेट्स पर जमकर प्रैक्टिस करते हुए दिखाई दिए। फॉक्स स्पोर्ट्स ने यह भी दिखाया कि रोहित लंच ब्रेक के दौरान पर्थ में नेट्स पर गुलाबी गेंद से अभ्यास कर रहे थे, जिसमें रिजर्व खिलाड़ी नवदीप सैनी, यश दयाल और मुकेश कुमार उन्हें गेंदबाजी कर रहे थे। भारत को 30 नवंबर और 1 दिसंबर को कैनबरा के मनुका ओवल में प्रधानमंत्री इलेवन के खिलाफ दो दिवसीय पिंक गेंद अभ्यास मैच खेलना है, जिसके बाद 6-10 दिसंबर तक एडिलेड ओवल में डे-नाइट टेस्ट मैच खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने कहा, “लंच ब्रेक के दौरान यहां नेट पर हमारे पास भारत के कप्तान रोहित शर्मा हैं, जो अभी-अभी यहां आए हैं। 6 दिसंबर को एडिलेड में शुरू होने वाले पिंक गेंद टेस्ट मैच से पहले हमारे पास कुछ भारतीय तेज गेंदबाज, अपने कप्तान के खिलाफ गेंदबाजी कर रहे हैं। जैसा कि हमने अभी देखा कि मुकेश कुमार एक अच्छी गेंद फेंक रहे हैं। लेकिन कप्तान को यहां देखना बहुत अच्छा है। हम उन्हें अगले कुछ दिनों में ऑस्ट्रेलियाई धरती पर फिर से मैदान पर देखने के लिए उत्सुक हैं।” रोहित की अनुपस्थिति में केएल राहुल ने यशस्वी जायसवाल के साथ बल्लेबाजी की शुरुआत की थी। पर्थ में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में 26 और 77 रनों की पारी खेलते हुए स्ट्रोक-प्ले और डिफेंस में ठोस प्रदर्शन किया। राहुल ने यशस्वी जायसवाल के साथ 201 रनों की ओपनिंग साझेदारी भी की, जिन्होंने शानदार 161 रन बनाए, जिससे भारत ने दूसरी पारी में 487/6 पर पारी घोषित की। recent visitors 61

मध्य प्रदेश सरकार ने 1988 बैच के आईपीएस अफसर कैलाश मकवाना को राज्य का नया डीजीपी नियुक्त किया

भोपाल आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना को मध्य प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया गया है। वे प्रदेश के 32वें डीजीपी होंगे। 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना प्रदेश के 32वें डीजीपी होंगे। 1 दिसंबर 2024 को वह यह पद ग्रहण करेंगे, जब वर्तमान डीजीपी सुधीर सक्सेना अपने कार्यकाल के बाद रिटायर हो जाएंगे। रविवार को डीजीपी सुधीर सक्सेना कैलाश मकवाना को बधाई देने उनके निवास पहुंचे। सुधीर सक्सेना ने मार्च 2020 में डीजीपी के रूप में पदभार संभाला था। कैलाश मकवाना के पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रही हैं, जिनमें मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन का पद भी शामिल है। कैलाश मकवाना 30 नवंबर 2026 तक डीजीपी रहेंगे। ऐसे में साफ है कि अब 1990 बैच तक के अफसर डीजीपी नहीं बन पाएंगे।  1988 बैच के अरविंद कुमार मई 2025 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। वहीं, 1989 बैच के अधिकारी अजय कुमार शर्ता अगस्त 2026 और इसी बैच के जीपी सिंह जुलाई 2025 में रिटायर्ड होंगे।   लोकायुक्त में भ्रष्टाचार की कई फाइलें खोली कैलाश मकवाना को तेज़-तर्रार और मेहनती अफसर माना जाता है। उन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। शिवराज सरकार के कार्यकाल में वह लोकायुक्त के डीजी के रूप में नियुक्त हुए थे, लेकिन महज छह महीने बाद उनका तबादला कर दिया गया। उनके कार्यकाल में लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई ठंडे बस्ते में पड़ी फाइलें खोलीं और महत्वपूर्ण जांचों को आगे बढ़ाया। इसके अलावा, महाकाल लोक कॉरिडोर के मामले में भी उन्होंने कार्रवाई की थी।     कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे मकवाना मकवाना का पुलिस विभाग में करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने साढ़े तीन साल के दौरान सात बार अपना स्थान बदला था, जिसमें कमलनाथ सरकार के दौरान तीन बार उनका ट्रांसफर हुआ था। उनके ट्रांसफर की सूची में एडीजी इंटेलिजेंस, एडीजी नारकोटिक्स, एडीजी सीआईडी, और एडीजी प्रशासन जैसी प्रमुख पदों पर कार्य करना शामिल है। 2021 में उन्हें पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन का चेयरमैन बनाया गया था, और फिर 2022 में उन्हें लोकायुक्त का महानिदेशक बनाया गया। हालांकि, लोकायुक्त में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के कारण सरकार ने उन्हें हटाकर पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन में भेज दिया। एसीआर खराब करने पर उठाए सवाल हालांकि, 2022 में उनकी एसीआर (गोपनीय चरित्रावली) को लेकर विवाद उठा था, क्योंकि लोकायुक्त के डीजी रहते हुए उनकी एसीआर को खराब कर दिया गया था। उन्होंने शासन से अपनी एसीआर सुधारने की अपील की थी, और सरकार ने उनके पक्ष में निर्णय लिया। इस बार जब डीजीपी की नियुक्ति के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने तीन नामों का पैनल भेजा, तो कैलाश मकवाना का नाम पहले स्थान पर था। इसके बाद अरविंद कुमार, जो वर्तमान में डीजी होमगार्ड हैं, और अजय शर्मा, जो डीजी ईओडब्ल्यू हैं, के नाम पैनल में शामिल थे। कैलाश मकवाना की त्वरित निर्णय क्षमता, भ्रष्टाचार विरोधी कार्यवाही, और प्रशासन में दक्षता के चलते एक प्रभावशाली अफसर है। साफ सुथरी छवि का मिला फायदा कैलाश मकवाना को अपने करियर में साफ सुथरी छवि और उज्जैन का होने का फायदा मिला है। कैलाश मकवाना का अकादमिक बैकग्राउंड भी मजबूत है। उज्जैन के रहने वाले कैलाश मकवाना ने मैनिट भोपाल से बीई किया है और आईआईटी दिल्ली से एमटेक की डिग्री प्राप्त की है।  उन्होंने कई प्रमुख पोस्टों पर कार्य किया है, जिनमें अति संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने का अनुभव शामिल है। उन्होंने दुर्ग, मुरैना, जबलपुर, रायपुर, दंतेवाड़ा, मन्दसौर और सागर जैसे विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, वह इंटेलिजेंस विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं।      एमपी के नए डीजीपी कैलाश मकवाना: तेज़-तर्रार अफसर, साढ़े तीन साल में हुए सात ट्रांसफर, 1 दिसंबर को संभालेंगे पद 1988 बैच के आईपीएस हैं मकवाना मकवाना 1988 बैच के आईपीएस अफसर हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के अध्यक्ष हैं.  2019 से लेकर 2022 तक उनका 7 बार ट्रांसफर हो चुका है. अब अगर आईपीएस अधिकारी मकवाना के सर्विस रिकॉर्ड की बात करें तो भोपाल से बीई और दिल्ली आईआईटी से एमटेक करने वाले मकवाना दुर्ग और मुरैना में एएसपी के पद पर काम कर चुके हैं.  दंतेवाड़ा, बस्तर जैसे जिलों के रहे हैं एसपी वो दंतेवाड़ा, बस्तर, मंदसौर और बैतूल जैसे जिलों के एसपी भी रहे हैं जिसके बाद उन्हें डीआईजी इंटेलिजेंस के पद पर नियुक्त किया गया था.  इसके बाद सीआईडी इंटेलीजेंस में एडीजी के पद पर भी काम कर चुके हैं जिसके बाद उन्हें स्पेशल डीजी सीआईडी बनाया गया था. recent visitors 162

उपचुनाव में जीत की गारंटी बन गए हैं योगी, कार्यकर्ता के रूप में दिखे सीएम

लखनऊ योगी आदित्यनाथ यानी जीत की गारंटी का नाम। विकास, रोजगार, सख्त कानून व्यवस्था, समृद्धि की बदौलत उत्तर प्रदेश के प्रति लोगों के मन में धारणा बदलने वाले योगी आदित्यनाथ की स्वीकार्यता अपने प्रदेश के ‘मन-मन’ के साथ अन्य प्रदेशों के ‘जन-जन’ में बढ़ गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव, उपचुनाव, विधान परिषद उपचुनाव, नगर निकाय चुनावों में भाजपा व एनडीए को जीत दिलाई तो अन्य राज्यों में भी भाजपा कार्यकर्ता के रूप में खूब पसीना बहाया. लिहाजा पीएम मोदी के नेतृत्व में कई राज्यों में भाजपा सरकार बनी. इसमें योगी आदित्यनाथ ने भी काफी मेहनत की. कुंदरकी व कटेहरी में भी कमल खिलाकर भाजपा ने नेतृत्व को विश्वास दिला दिया कि यूपी को योगी का ही साथ पसंद है, लिहाजा जन-जन ने योगी आदित्यनाथ को जीत की गारंटी मान लिया है. योगी की रणनीति और संवाद का ही असर रहा कि इस बार निकाय चुनाव में भी भाजपा ने क्लीन स्वीप किया. इस बार यूपी की सभी 17 की 17 नगर निगमों में भारतीय जनता पार्टी के महापौर निर्वाचित हुए हैं, जबकि पिछली बार 2017 में यह आंकड़ा 16 में से 14 का था. पिछली बार यूपी में भाजपा के 596 पार्षद जीते थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 813 हो गया. शहरों में भाजपा की यह जीत योगी के विकास परक नीति पर आमजन की मुहर है. नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर 2017 में भाजपा को 60 सीटों पर जीत मिली थी. 199 सीटों में से यह आंकड़ा इस बार बढ़कर 88 पहुंच गया. पालिका परिषद सदस्यों में पिछली बार भाजपा को 923 सीट मिली थी, 2023 में यह बढ़कर 1353 हो गई. नगर पंचायतों में भी 191 सीटों में अध्यक्ष पद पर भाजपा के प्रतिनिधि काबिज हुए. 2017 में यह आंकड़ा 100 का था. योगी के नेतृत्व में 2023 में 91 सीटें और बढ़कर भाजपा की झोली में आई, वोट प्रतिशत में भी खूब इजाफा हुआ. भाजपा के नगर पंचायत सदस्यों की संख्या भी 664 से बढ़कर 1403 हो गई। वहीं नगर निगम, पंचायत और पालिका में भी सपा की साइकिल पंचर हो गई तो बसपा का हाथी भी गिर गया. निकाय चुनाव में भी सपा-बसपा का ग्राफ जबर्दस्त गिरा. अखिलेश की कुटिल चाल पर योगी की कुशल रणनीति पड़ी भारी लक्ष्मण आचार्य के महामहिम राज्यपाल और बनवारी लाल दोहरे के निधन के कारण मई में विधान परिषद की दो सीटों पर उपचुनाव हुए. 403 में से 396 वोट पड़े थे, जबकि एक अवैध हो गया. सीएम योगी की कुशल रणनीति से अखिलेश की कुटिल चाल यहां भी धरी की धरी रह गई. भाजपा प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह 280 और पद्मसेन चौधरी 279 मत पाकर परिषद पहुंचे, जबकि सपा के रामकरण निर्मल को मज 116. रामजतन राजभर को 115 वोट से ही संतोष करना पड़ा था. जुलाई में हुए विधान परिषद उपचुनाव में भी सरकार के मुखिया के तौर पर सीएम योगी के नेतृत्व में बहोरन लाल मौर्य निर्विरोध सदन पहुंचे. कार्यकर्ता के रूप में योगी ने बहाया पसीना पीएम मोदी के नेतृत्व में महाराष्ट्र में भी महायुति गठबंधन ने फिर से सत्ता हासिल की. पीएम के निर्देशन में योगी आदित्यनाथ ने यहां जनसभा कर 24 प्रत्याशियों के लिए वोट की अपील की. इनमें से 22 पर महायुति गठबंधन ने जीत हासिल की. त्रिपुरा में योगी ने दो दिन में 6 रैलियां और रोड शो किया था. इन सबमें कमल खिला और पीएम मोदी के मार्गदर्शन में भाजपा सरकार बनी. मई में ओडिशा में हुए चुनाव में भी योगी आदित्यनाथ का जादू चला. यहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी योगी का आह्वान जनता तक पहुंचा. ओडिशा में नवीन पटनायक सरकार गिरी और भाजपा सरकार ने सत्ता संभाली. राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों में भी पीएम मोदी के मार्गदर्शन में योगी आदित्यनाथ ने भाजपा कार्यकर्ता के रूप में चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया. इन राज्यों में भी कमल खिला. विधानसभा चुनाव में योगी के जादू का ही असर है कि दोबारा सत्ता में भाजपा की वापसी हुई. योगी निरंतर सभी जनपदों में संवाद, विकास के बलबूते लोगों से मिलते रहे. इसका परिणाम विधानसभा उपचुनावों में भी दिखा. 2024 में हुए उपचुनाव हों या इसके पहले के उपचुनाव, भाजपा ने जबरदस्त जीत हासिल की. योगी ने विकास से रामपुर की कमान संभाली तो 10 बार के विधायक आजम खां का किला भी ढह गया. यहां योगी के नेतृत्व में कमल को पहली बार आकाश मिला. यहां सपा के आसिम रजा राजा नहीं बन पाए. इस चुनाव में 21वां अंक भाजपा के लिए लकी साबित हुआ. 21वें राउंड के बाद से ही भाजपा ने यहां बढ़त हासिल की, जो अंतिम तक बरकरार रही. recent visitors 56