Friday, July 10, 2026 11:13 pm

अमित शाह की अध्यक्षता में राज्यों में आपदा न्यूनीकरण परियोजनाओं के लिए 1115 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की

नई दिल्ली केन्द्र सरकार ने विभिन्न राज्यों के लिए आपदा न्यूनीकरण और क्षमता निर्माण परियोजनाओं के लिए 1115.67 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति की बैठक में इस राशि को मंजूरी दी गयी। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को यहां बताया कि वित्त मंत्री, कृषि मंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष की सदस्यता वाली समिति ने राष्ट्रीय आपदा शमन निधि से 15 राज्यों में भूस्खलन के जोखिम को कम करने के प्रस्ताव के वित्त पोषण और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि के फंडिंग विंडो से तैयारी और क्षमता निर्माण के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के प्रस्ताव पर विचार किया। उच्चस्तरीय समिति ने 15 राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 1000 करोड़ रुपये की कुल लागत से राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण परियोजना को मंजूरी दी है। समिति ने उत्तराखंड के लिए 139 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश के लिए 139 करोड़ रुपये, पूर्वोत्तर के 8 राज्यों के लिए 378 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र के लिए 100 करोड़ रुपये, कर्नाटक के लिए 72 करोड़ रुपये, केरल के लिए 72 करोड़ रुपए, तमिलनाडु के लिए 50 करोड़ और पश्चिम बंगाल के लिए 50 करोड़ रुपए को मंज़ूरी दी। उच्चस्तरीय समिति ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सिविल डिफेंस के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए 115.67 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली एक अन्य परियोजना को भी मंजूरी दी है। इससे पहले, समिति ने राष्ट्रीय आपदा शमन निधि से सात शहरों में 3075.65 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली शहरी बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण परियोजनाओं और 4 राज्यों में 150 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। गृह मंत्रालय ने देश में आपदाओं का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की हैं। भारत में आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रणाली को मजबूत करके आपदाओं के दौरान जान-माल को होने वाले किसी भी बड़े नुकसान को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इस वर्ष राज्यों को 21,476 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। इसमें राज्य आपदा मोचन निधि से 26 राज्यों को 14,878.40 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से 15 राज्यों को 4,637.66 करोड़ रुपये, राज्य आपदा शमन निधि से 11 राज्यों को 1,385.45 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा शमन निधि से 6 राज्यों को 574.93 करोड़ रुपये शामिल हैं।   recent visitors 34

खारा गांव में बेटी ब्याहने से लोग कर रहे परहेज, राजस्थान-बीकानेर में औद्योगिक प्रदूषण ने छीना सांसों का सुकून

बीकानेर. देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य इलाकों में प्रदूषण को लेकर चर्चा हो रही है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, लेकिन बीकानेर में एक ऐसा गांव है, जहां प्रदूषण का मानक इन सबसे कहीं ज्यादा है। प्रदूषण से गांव का हर घर पीड़ित है। इतना ही नहीं अब तो लोग यहां अपनी बेटी की शादी करने से भी परहेज करने लगे हैं। बावजूद इसके अभी तक जिम्मेदारों की आंखें नहीं खुली हैं। बदलते समय के साथ औद्योगिक विकास का पहिया चलना जरूरी है, लेकिन ऐसे विकास से यदि मानव जीवन के साथ खिलवाड़ हो या उसे खतरे में डाला जाए तो ऐसा विकास किस काम का? बीकानेर जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर बसे खारा गांव में रहने वाले लोगों के लिए अब यह औद्योगिक विकास जान पर आफत बनकर आया है। औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण से होने वाली बीमारियों को लेकर पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग के डॉ. गुंजन सोनी ने बताया कि खारा गांव में AQI (Air Quality Index) लेवल बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि यहां प्रदूषण में पीएम 10 कण पाए गए हैं, जिससे खांसी, सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में संक्रमण और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी रहता है। उन्होंने कहा कि पीएम-10 की अधिक मात्रा से श्वसन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे खांसी के दौरे, घबराहट और अस्थमा से लोगों को समस्या होती है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आउटडोर में खारा से आने वाले मरीजों में इस तरह की दिक्कत देखी गई है। दरअसल यहां स्थापित वूलन और पीओपी फैक्ट्रियों की संख्या ज्यादा है और अधिकांश प्रदूषण पीओपी फैक्ट्री के चलते होता है क्योंकि गांव से कुछ ही दूरी पर रीको इंडस्ट्रियल एरिया है, जहां करीब 40 पीओपी फैक्ट्रियां हैं, इनसे निकलने वाला धुआं रूपी पाउडर यहां के लोगों की बीमारी का कारण बन गया है। ग्रामीण गजेसिंह का कहना है कि गांव की कुल आबादी के 40 प्रतिशत लोग बीमार हैं और हर घर में सांस और दमा के मरीज हैं। खारा गांव में पीओपी की फैक्ट्रियों के कारण वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चीफ इंजीनियर प्रेमालाल ने अपनी टीम के साथ यहां 3 दिन तक हालात का जायजा लिया और अब सरकार को उसकी रिपोर्ट सौंपी जाएगी। उन्होंने भी माना कि पीएम-10 (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा मानक से कई गुना तक ज्यादा पाई गई। आम दिनों में इसकी मात्रा 1528 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रही, जबकि मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। गांव के हर घर की छत पर जमी हुई बारीक पाउडर की परत साफ देखी जा सकती है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के आने की सूचना के बाद यहां POP की सारी फैक्ट्रियां 3 दिन तक बंद रहीं। अमर उजाला की टीम ने जब ग्राउंड रिपोर्ट पर लोगों से बात की तो लोगों का कहना था कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के सामने हालात सामान्य नजर आए। इसके लिए फैक्ट्रियों को बंद रखा गया और सड़कों पर भी पानी गिराया गया, ताकि धूल-मिट्टी नहीं उड़े और हकीकत को छुपाया जा सके। गांव के भंवरसिंह खारा का कहना है कि हमने हर जगह अपनी बात पहुंचा दी लेकिन जिम्मेदारों की आंख नहीं खुल रही हैं और अब हमें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। समय रहते यदि बात मान ली गई तो ठीक, नहीं तो आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। ग्रामीण सुरेश पारीक कहते हैं कि यह समस्या अब हमारे लिए धीरे-धीरे बहुत गंभीर होती जा रही है, क्योंकि गांव के हर घर में इस प्रदूषण के चलते सांस और फेफड़ों में संक्रमण की बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं। अब तो कोई रिश्तेदार अपनी बहन-बेटी की शादी हमारे गांव में करना नहीं चाहता और यदि कोई एक दिन यहां आकर रुकता है तो वह अगले दिन जल्दी से जल्दी निकलने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रदूषण के चलते गांव में लड़कों की शादी होना अब मुश्किल होता जा रहा है। वही गांव की सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल सुमनलता सेठी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों पर इस मामले को लेकर असंवेदनशील होने का आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल से 100 मीटर की दूरी पर पीओपी की फैक्टरियां हैं। जब इन फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन चालू रहता है तो यहां सांस लेना तक दूभर हो जाता है। बहरहाल औद्योगिक विकास के बीच अब ग्रामीण भी आरपार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे हैं। recent visitors 69

संविधान के प्रति जन-जागरूकता के लिये 26 नवम्बर से “हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान” आज से प्रदेश भर में शुरू

भोपाल देश में 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद तैयार किया गया संविधान 26 नवम्बर 1949 को अपनाया गया था। इसके बाद देश में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था। संविधान को अपनाने के 75 वर्ष पूरे होने पर संविधान की जानकारी के प्रति जन-जागरूकता के लिये 26 नवम्बर 2024 से वर्ष भर चलने वाला "हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान" आज से प्रदेश भर में शुरू हो गया है। अभियान की शुरूआत में अभियान के दौरान जन-सामान्य को संविधान की प्रस्तावना, संविधान का निर्माण और देश के संविधान पर गर्व करने जैसे बिन्दुओं पर जनप्रतिनिधियों द्वारा मुख्य रूप से जानकारी दी गई। प्रदेश की विभिन्न विभूतियों का स्मरण किया गया, जिनका संविधान निर्माण में उल्लेखनीय योगदान रहा। इस मौके पर संविधान की प्रस्तावना का सामुहिक वाचन किया। इसमें शासकीय सेवकों के साथ आम नागरिकों को भी सहभागिता रही। वर्ष भर की गतिविधियों को एक डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने के लिये वेबसाइट constitution75.com भी तैयार की गई है। वेबसाइट में गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो अपलोड किये जा सकेंगे। इस अभियान में युवाओं और स्कूल के बच्चों को अधिक से अधिक जोड़ने के लिये एक अन्य वेबसाइट https://www.mygov.in: पर संविधान विषय पर निबंध, प्रश्नोत्तरी एवं पोस्टर प्रतियोगिता की तस्वीरें साझा की जा सकती हैं। वर्ष भर चलने वाले "हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान" जन-जागरूकता अभियान के दौरान प्रदेश की शैक्षणिक संस्थाओं में विशेष आयोजन होंगे। इस संबंध में संसदीय कार्य विभाग ने शासन के समस्त विभागाध्यक्ष, संभागीय आयुक्त और कलेक्टर्स को पत्र जारी कर निर्देश दिये है। अभियान के दौरान प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों में भी सामुहिक रूप से संविधान प्रस्तावना का वाचन किया जायेगा। ग्राम पंचायतों को बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान का प्रचार करने के लिये मायभारत स्वयं सेवकों के माध्यम से संविधान स्वाभिमान यात्राएं आयोजित की जायेगी। यह यात्राएं अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति घनत्व वाली आबादी में विशेष रूप से होंगी। यात्रा के दौरान बाबा साहेब की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की जायेगी। ग्राम सभाओं में संविधान के अनुच्छेद-51(ए) में नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों को पढ़कर सुनाया जायेगा।   recent visitors 162

भोपाल में​ रिकॉर्ड तोड़ने के बाद सर्दी अब पचमढ़ी तक गई है, सोमवार को रात का तापमान 5.6 डिग्री पर आ गया

भोपाल जैसे जैसे नवंबर का महीना खत्म होने को है वैसे वैसे मध्य प्रदेश में सर्दी का कहर बढ़ता ही जा रहा है।सोमवार को प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वही 49 साल बाद नवंबर के महीने में भोपाल में 9.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। नवंबर महीने में लगातार चार दिन तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहना भोपाल के लिए नया रिकॉर्ड है। भाेपाल की बात करें तो न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री दर्ज किया गया। 24 घंटे में इसमें 0.2 डिग्री की गिरावट हुई। भोपाल में लगातार 4 दिन से पारा 10 डिग्री से नीचे बना हुआ है। यहां 49 साल बाद ऐसी नौबत आई। भोपाल सहित मध्य प्रदेश के 7 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे रहा। एमपी मौसम विभाग ने इस हफ्ते शीतलहर और कोहरे की चेतावनी जारी की है। हवाओं का रुख उत्तरी होने से अगले 48 घंटों में तापमान में तेजी से गिरावट आएगी और कड़ाके की ठंड पड़ने के आसार है। पश्चिमी विक्षोभ, पहाड़ों पर बर्फबारी और जेट स्ट्रीम के असर से मैदानी इलाकों में भी तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। MP Meteorological Department का ताजा पूर्वानुमान वर्तमान में देश के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में जेट स्ट्रीम और पाकिस्तान के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ द्रोणिका के रूप में बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी में बना गहरे कम दबाव का क्षेत्र सोमवार को अवदाब के क्षेत्र में परिवर्तित हो गया है।हवाओं का रुख उत्तरी बना हुआ है। उत्तर भारत की तरफ से आ रही सर्द हवाओं के कारण मध्य प्रदेश में अच्छी ठंड पड़ रही है। पश्चिम विक्षोभ के असर से भी उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी होने के आसार हैं। इसके बाद न्यूनतम तापमान में और गिरावट देखने को मिलेगी। भोपाल: पारा 10 डिग्री के आसपास बना रहेगा     मौसम केंद्र की डिप्टी डायरेक्टर डॉ दिव्या ई सुरेंद्रन ने बताया कि पहाड़ी इलाकों से सीधी बर्फीली हवा आ रही है। इसका ज्यादा असर मप्र के मध्य और पूर्वी हिस्से में पड़ रहा है।     भोपाल संभाग, जबलपुर संभाग सहित मध्य प्रदेश के मध्य और पूर्वी हिस्से के शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। recent visitors 29

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पक्षी अवलोकन एवं नेचर कैम्प का आयोजन

 भोपाल मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड के सहयोग से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में छात्र-छात्राओं में वन, वन्यप्राणियों एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की दृष्टि से भोपाल शहर एवं उसके आस-पास के ग्रामों के शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिये एक दिवसीय पक्षी अवलोकन एवं नेचर कैम्प आयोजित किये जा रहे हैं। इसी क्रम में आज दिनांक 26.11.2024 को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालिका, स्टेशन भोपाल की 50 छात्राओं एवं 02 शिक्षिकाओं ने उक्त पक्षी अवलोकन एवं नेचर कैम्प में भाग लिया। कार्यक्रम में स्रोत व्यक्ति रूप में श्री ए.के. खरे, से.नि. उप वनसंरक्षक एवं श्री विजय नंदवंशी उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को पक्षी दर्शन, तितली, वन्यप्राणी दर्शन, स्थल पर विद्यमान वानिकी गतिविधियों की जानकारी, वन, वन्यप्राणी व पर्यावरण से संबंधित रोचक गतिविधियों कराई गई एवं जानकारी प्रदान कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया गया। इसके अतिरिक्त बाघ, तेंदुआ, भालू, मगर, घड़ियाल, चीतल, साभर, नीलगाय आदि वन्यप्राणियों का भी अवलोकन किया एवं ट्रेल वाक भी कराया गया। साथ ही किंग फिशर ओपन बिल स्टॉर्क, वुलीनेक स्टॉर्क, कार्पोरेंट, जकाना, कूट, आदि पक्षी दिखे एवं नीडम क्षेत्र में कृत्रिम घोंसले तथा पक्षियों के पुतले भी देखे। इस अवसर पर मिशन लाईफ अंतर्गत पर्यावरण को बचाने के लिये उपस्थित प्रतिभागियों द्वारा शपथ भी ली गई एवं विशेषज्ञों द्वारा मिशन लाईफ के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। पक्षी अवलोकन एवं नेचर कैम्प के दौरान सचालक वन विहार श्री मीना अवधेशकुमार शिवकुमार एवं इकाई प्रभारी पर्यटन श्री रविकांत जैन सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।   recent visitors 18

अब किसानों से धान के साथ बारदाना भी खरीदेगी सरकार, छत्तीसगढ़-कबीरधाम के अधिकांश खरीदी केंद्रों में बारदाना की कमी

कबीरधाम. कबीरधाम जिले में धान खरीदी पर संकट के बादल छाए हुए हैं, क्योंकि जिले के अधिकांश खरीदी केंद्र में बारदाना की कमी है। ऐसे में सरकार द्वारा किसानों से ही बारदाना खरीदी की जाएगी। इसके एवज में किसानों को 25 रुपये प्रति जूट बारदाना के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। प्रदेश के खाद्य सचिव अंबलगन पी ने सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में यह जानकारी दी है। उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दिए कि जूट बारदाने के इस अतिरिक्त भुगतान की जानकारी समिति व ग्राम स्तर के प्रभारी अधिकारियों के माध्यम से दी जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को उनके अधिकार की पूरी जानकारी मिले और वे इस योजना का लाभ उठा सकें। किसानों को धान खरीदी में आवश्यक परेशानी नही होनी चाहिए। धान के अवैध परिवहनों पर कड़ी निगरानी रखे व इनसे जुड़े लोगों पर कार्रवाई करें। सूचना तंत्र मजूबत बनाएं। खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में मिलरों द्वारा उठाए गए धान के चावल को 30 नवंबर 2024 तक एफसीआई व नागरिक आपूर्ति निगम के संबंधित केंद्रों में जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। अब तक की 4.9 लाख क्विंटल धान खरीदी कबीरधाम कलेक्टर गोपाल वर्मा ने वीडियो कांफ्रेंस बैठक में बताया कि जिले में 108 धान खरीदी केन्द्र के माध्यम से खरीदी जारी है। अब तक 8 हजार 217 पंजीकृत किसान से 4 लाख 9 हजार 600 क्विंटल धान खरीदी कर चुके है। 25 नवंबर को सभी केंद्रों पर 2 हजार 767 टोकन जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से 1 लाख 34 हजार 747 क्विंटल धान की खरीदी होगी। इस वर्ष जिले में 7 हजार 280 नए किसानों ने पंजीयन कराया है। अब तक कुल 1 लाख 24 हजार 787 किसानों ने अपने 1 लाख 24 हजार 411 हेक्टेयर रकबे में उपजाए गए धान को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। recent visitors 49

राजतिलक की तैयारी के बीच उपजा आक्रोश, राजस्थान-उदयपुर के सिटी पैलेस में भिड़े महाराणा प्रताप के वंशज

उदयपुर. पूर्व मेवाड़ राजघराने के विश्वराज सिंह मेवाड़ के सोमवार को हुए राजतिलक के बाद उदयपुर में सिटी पैलेस स्थित कुलदेवता के दर्शन की मांग को लेकर चल रहे दबाव के बीच देर रात मामले ने हिंसक रूप धारण कर लिया। विश्वराज सिंह समर्थक जब देर रात सिटी पैलेस के मुख्य द्वार पर पहुंचे तो सिटी पैलेस के अंदर से परिवार के अन्य सदस्यों के समर्थकों द्वारा पथराव कर दिया। मामला गरमा गया। इधर, स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन को रिसीवर नियुक्त करना पड़ा। विवादित स्थल को लेकर कुर्की के आदेश जारी किए गए। बता दें कि सोमवार को चित्तौड़गढ़ में राजतिलक के बाद विश्वराज सिंह उदयपुर स्थित सिटी पैलेस में अपने कुल देवता के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए जाने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही उनके चाचा अरविंद सिंह मेवाड़ के नेतृत्व वाली महाराणा मेवाड फाउंडेशन ने सिटी पैलेस में किसी के भी अनाधिकृत प्रवेश पर रोक लगा दी। इसी बात को लेकर राजपूत समाज के एक खेमे में आक्रोश व्याप्त हो गया। नोटिस के बाद  सिटी पैलेस पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। शाम को जब विश्वराज सिंह मेवाड़ चित्तौड़गढ़ से उदयपुर सिटी पैलेस में दर्शन के लिए पहुंचे तो दरवाजे बंद मिले, इससे राजपूत समाज के लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया। बड़ी संख्या में लोग सिटी पैलेस के बाहर जुटे रहे और विश्वराज सिंह को कुलदेवता के दर्शन के लिए अनुमति देने की मांग करते रहे। सिटी पैलेस में रह रहे अरविंद सिंह मेवाड़ के परिवार की ओर से इसकी अनुमति नहीं मिलने के बाद लोग पुलिस का गहरा तोड़कर जगदीश मंदिर छोड़ के मुख्य दरवाजे की ओर बढ़े। इसके बाद सिटी पैलेस के अंदर से पथराव शुरू हो गया। इसके बाद बात और बिगड़ती चली गई, दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। समझाइश की कोशिश कर रहे प्रशासन के अधिकारी भी मामले में बेबस दिखे। ऐसे में देर रात को जिला प्रशासन की ओर से विवादित स्थल के लिए रिसीवर नियुक्त कर दिया गया। विवादित जमीन को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया। रात करीब 1:30 बजे विश्वराज सिंह और उनके समर्थक वहां से चले गए। बताया जा रहा है कि मंगलवार को दोपहर 12:30 बजे एक बार फिर सर्व समाज के लोग सिटी पैलेस के बाहर जुटेंगे, ऐसा बताया गया। प्रशासन द्वारा रिसीवर नियुक्त किए जाने के बाद पूरी संभावना है कि अब विश्वाराज सिंह कुलदेवता के दर्शन कर सकेंगे। सोमवार रात को विश्वराज सिंह मेवाड़ ने अपने बयान में कहा कि जो कुछ भी हुआ, उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार हैं। यह परिवार की परंपरा है कि हम कुल देवता के यहां माथा टेके। इसके लिए रोकना पूरी तरह से गलत है। एकलिंग जी की सभी पर कृपा बनी रहे। प्रतीकात्मक महाराणा बने विश्वराज सिंह बता दें कि पिछले दिनों मेवाड़ राज परिवार के जस्ट पुत्र महेंद्र सिंह मेवाड़ का निधन हो गया था। मेवाड़ राज परिवार की परंपरा के अनुसार महेंद्र सिंह मेवाड़ के पुत्र विश्वराज सिंह का चित्तौड़गढ़ स्थित फतेह प्रकाश महल में राजतिलक समारोह आयोजित किया गया। राजतिलक समझ में विभिन्न राजघरणाओं के सदस्य और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और लोग शामिल हुए थे। सार्वजनिक सूचना के बाद बिगड़ी बात सोमवार को ही विभिन्न समाचार पत्रों में उनके चचेरे भाई और वर्तमान में सिटी पैलेस में निवास कर रहे महेंद्र सिंह मेवाड़ के छोटे भाई अरविंद सिंह मेवाड़ की अध्यक्षता वाली महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल ट्रस्ट फाउंडेशन की ओर से एक आम सूचना जारी की गई। जिसमें सिटी पैलेस में किसी भी तरह से अनादिकृत प्रवेश पर रोक की बात कही गई। दूसरी और राजतिलक के बाद विश्वराज सिंह मेवाड़ का सिटी पैलेस में अपने कुल देवता के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने जाने का कार्यक्रम था। 40 साल से है राज परिवार में विवाद मेवाड़ राज परिवार के दिवंगत महेंद्र सिंह मेवाड़ और उनके छोटे भाई अरविंद सिंह मेवाड़ में पिछले करीब 40 सालों से प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। राज परिवारों में बड़े पुत्र को ही उत्तराधिकारी माना जाता है, जबकि अरविंद सिंह मेवाड़ अपने पिता की वसीयत के आधार पर सिटी पैलेस में अपने परिवार सहित निवास करते हैं। वहीं महेंद्र सिंह मेवाड़ का परिवार सिटी पैलेस के समीप समोर बाग में निवास करता है। विश्वराज समर्थक कब्जा नहीं कर ले, इसी डर से जारी की सूचना इधर, माना जा रहा है कि सिटी पैलेस में अनधिकृत प्रवेश की सूचना इसलिए जारी की गई थी, कि राजतिलक के दिन बड़ी संख्या में राजपूत एकत्रित हुए। शायद अरविंद सिंह मेवाड़ के परिवार को आशंका थी कि कहीं विश्वाराज सिंह समर्थक सिटी पैलेस पर कब्जा नहीं कर ले। इसलिए राजतिलक से पहले ही सिटी पैलेस में प्रवेश पर रोक लगा दी गई और मुख्य द्वार बंद कर दिए गए। लोअर कोर्ट से जीत चुके हैं महेंद्र सिंह मेवाड़ करीब चार दशक तक कैसे चलने के बाद 2020 में उदयपुर की लोअर कोर्ट से विश्वराज सिंह के पिता महेंद्र सिंह मेवाड़ और उनकी बहन के पक्ष फैसला आया था, लेकिन अरविंद सिंह मेवाड़ द्वारा अपर कोर्ट में अपील की गई है और सुनवाई जारी है। नाथद्वारा से विधायक है विश्वराज सिंह महेंद्र सिंह मेवाड़ के पुत्र विश्वराज सिंह वर्तमान में नाथद्वारा से विधायक हैं। वहीं उनकी पत्नी महिमा कुमारी सिंह राजसमंद लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। दोनों दंपति भाजपा से चुने गए हैं। recent visitors 62