Thursday, July 9, 2026 9:30 pm

कुर्रम जिले में वाहनों के एक काफिल पर हुए हमले के बाद हिंसा भड़क उठी, मृतकों की संख्या बढ़कर हुई 100 से अधिक

इस्लामाबाद पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुर्रम जिले में सांप्रदायिक झड़पों में मरने वालों की संख्या 100 से अधिक हो गई है। यह जानकारी अस्पताल प्रशासन ने गुरुवार को मीडिया को दी। समाचार के अनुसार, गुरुवार को कुर्रम जिल में वाहनों के एक काफिल पर हुए हमले के बाद हिंसा भड़क उठी। जिले के घनी आबादी वाले बागान शहर में लगभग 200 वाहनों के काफिले पर भारी गोलीबारी की गई। बताया जा रहा है कि काफिले में अधिकतर शिया यात्री थे। हमले में कम से कम 43 लोग मारे गए थे और 16 अन्य घायल हो गए थे। यह काफिला पेशावर और पाराचिनार शहर के बीच यात्रियों को ले जा रहा था, जो कि अफगानिस्तान सीमा के निकट कुर्रम जिले में है, जहां सांप्रदायिक हिंसा और भूमि विवादों का इतिहास रहा है। इस हमले के बाद दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई जिसके कारण सोमवार तक मरने वालों की संख्या 88 हो गई थी। इस बीच प्रांतीय सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिले का दौरा किया और दोनों संप्रदायों के बीच युद्ध विराम पर सहमति बनी। हालांकि, युद्ध विराम के दौरान भी छिटपुट झड़प जारी रहीं, जिससे मरने वालों की संख्या अब 100 से अधिक हो गई है। जिले के डिप्टी कमिश्नर जावेद उल्लाह महसूद ने मीडिया को बताया कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल द्वारा युद्ध विराम सुनिश्चित करने में असफल रहने के बाद, पड़ोसी जिलों के जनजातीय समुदाय के बुजुर्गों का एक प्रतिमंडल गुरुवार को कुर्रम का दौरा करेंगे। इस दौरान 'जिरगा' या जनजातीय अदालत का आयोजन किया जाएगा। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि बुजुर्ग दोनों पक्षों को शत्रुता समाप्त करने के लिए नए सिरे से मध्यस्थता शुरू करने के लिए मनाने की कोशिश करेंगे। recent visitors 54

बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी?: अखिलेश यादव

लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल की हिंसा के बाद सियासी बयानबाजी और पोस्टरवार भी शुरू है। एक तरफ प्रशासन ने घटना में शामिल उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की है। वहीं दूसरी तरफ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी कर पूछा है जिन्होंने बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी? सपा मुखिया अखिलेश यादव ने गुरुवार को संभल हिंसा को लेकर एक तस्वीर जारी की है जिसमें सुप्रीमकोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन के साथ अन्य लोग भी दिख रहे हैं। उन्होंने लिखा कि जिन्होंने बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी? दरअसल हिंसा के तीन दिन बाद बुधवार को पुलिस की ओर से जारी किए गए पोस्टरों में अधिकतर उपद्रवी अधिकतर नौजवान दिख रहे हैं। सभी मुंह बांधे हुए हैं। उनके हाथ में ईंट पत्थर भी नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिसमें महिलाएं पत्थर चलाती नजर आ रही है। हालांकि उनके पोस्टर जारी नहीं हुए हैं। बवाल के बाद पुलिस-प्रशासन के अधिकारी लगातार कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं। सांसद जियाउर्रहमान बर्क को भी 168 का नोटिस तामील कराया गया था। वीडियो, सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज से आरोपियों को चिह्नित किया गया। एसपी ने कहा कि किसी भी निर्दोष को डरने की जरूरत नहीं है लेकिन जो लोग उपद्रव में शामिल रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। एसपी ने लोगों से उपद्रवियों की सूचना देने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और उन्हें इनाम भी दिया जाएगा। ज्ञात हो कि बीते रविवार को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा मामले में चार लोगों की मौत हो गई और कई पुलिसवाले घायल हो गए। इसको लेकर पुलिस ने पत्थरबाजी करने वाले की पहचान की है और इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है।   recent visitors 132

लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरणों में होंगे समझौते

भोपाल नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरणों को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय में संपर्क करें। विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि धारा 135 के अंतर्गत अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर – कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत आकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। लिटिगेशन स्तर पर – कंपनी द्वारा आकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी आवेदक को निर्धारित छूट के उपरांत शेष बिल आकलित सिविल दायित्व एवं ब्याज की राशि एकमुश्त भुगतान करना होगा। उपभोक्ता/उपयोगकर्ता को विचाराधीन प्रकरण वाले परिसर एवं अन्य परिसरों पर उसके नाम पर किसी अन्य संयोजन/संयोजनों के विरूद्ध विद्युत देयकों की बकाया राशि का पूर्ण भुगतान भी करना होगा। आवेदक के नाम पर कोई वैध कनेक्शन न होने की स्थिति में छूट का लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदक द्वारा वैध कनेक्शन प्राप्त करना एवं पूर्व में विच्छेदित कनेक्शनों के विरूद्ध बकाया राशि (यदि कोई हो) का पूर्ण भुगतान किया जाना अनिवार्य होगा। नेशनल लोक अदालत में छूट आवेदक द्वारा विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग पहली बार किये जाने की स्थिति में ही दी जाएगी। विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग के प्रकरणों में पूर्व की लोक अदालत/अदालतों में छूट प्राप्त कर चुके उपभोक्ता/उपयोगकर्ता छूट के पात्र नहीं होंगे। सामान्य बिजली बिलों में जुड़ी बकाया राशि पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। नेशनल लोक अदालत में उपरोक्‍तानुसार दी जा रही छूट आकलित सिविल दायित्‍व राशि 50 हजार तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘14 दिसंबर 2024 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी।   recent visitors 66

मध्यप्रदेश को प्राकृतिक खेती में अग्रणी बनाने उत्पादों की करें ब्रांडिंग

भोपाल मध्यप्रदेश को प्राकृतिक खेती में अग्रणी राज्य बनाने के लिए उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केट कनेक्टिविटी को बढ़ाया जाना चाहिए। महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर कम्युनिटी मॉडल अपनाए जाना चाहिए। प्राकृतिक खेती के लिए मानकों और प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। उक्त विचार विशेषज्ञों ने आज यहां मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग द्वारा "जलवायु सहनशीलता और सतत् कृषि के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: मार्ग, चुनौतियां और नीति समर्थन" विषय पर आयोजित संवाद में व्यक्त किए। संवाद में कृषि, बागवानी और सतत विकास के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, महिला किसानों, स्वयंसेवी संगठनों, और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। सीईओ, राज्य नीति आयोग श्री ऋषि गर्ग ने प्राकृतिक खेती के संवर्धन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने में किसानों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करना आवश्यक है। आंध्रप्रदेश के उप निदेशक हॉर्टिकल्चर श्रीनिवासुलु ने सामुदायिक प्राकृतिक खेती के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कम लागत और स्थानीय संसाधनों का उपयोग प्राकृतिक खेती को किसानों के लिए आकर्षक बनाता है। अतिरिक्त सचिव बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण श्रीमती प्रीति मैथिल ने बताया कि प्राकृतिक खेती के उत्पाद उपभोक्ताओं में लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन इसे व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए बेहतर नीति समर्थन और बाजार संपर्क की आवश्यकता है। श्री जी. प्रकाश राव ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक आधार, जैव विविधता में सुधार और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। पद्मश्री डॉ. सुभाष पालेकर ने जैविक और प्राकृतिक खेती के बीच के अंतर को स्पष्ट किया और प्राकृतिक खेती को अपनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के सुझाव दिए। उन्होंने "शून्य लागत प्राकृतिक खेती" की तकनीकों पर जोर दिया। प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने विशेषज्ञों से संवाद किया।   recent visitors 79

मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं, कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं: रिपोर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह जानकारी पुलिस की खुफिया रिपोर्ट में सामने आई है। ये सभी अलग-अलग समूह में पुरुषों के साथ काम कर रही हैं। यह भी पता चला है कि कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं। गांव के लोगों के साथ संवाद करने, उनकी समस्याएं जानने, पर्चा बांटने, लोगों को बरगलाने या किसी तरह की सहायता मांगने के लिए नक्सली महिलाओं को ही आगे करते हैं। महिलाएं गांव के लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाती हैं। इससे उन्हें गांव में प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी भी मिलती रहती है। पुरुषों की तरह महिलाएं भी छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र से ही हैं। अधिकतर महिलाओं की उम्र 25 से 40 वर्ष की है।   इस बार मुठभेड़ में नहीं फेंका पर्चा अभी तक ऐसा होता रहा कि नक्सली मुठभेड़ के दौरान अपने मांगों से जुड़ा पर्चा फेंक कर जाते थे। पिछले दिनों बालाघाट में हुई मुठभेड़ में उन्होंने ऐसा नहीं किया था। यह जरूर पता चला है कि इसके पहले कुछ गांवों में उन्होंने तेंदूपत्ता की राशि बढ़ाने, बांस कटाई की दर बढ़ाने और मजदूरी बढ़ाने के लिए पर्चे फेंके थे। गांव के लोगों का समर्थन पाने के लिए वह ऐसी मांग रखते हैं। नक्सलियों की मांग के अनुसार नहीं करते काम पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा कि हम उनकी मांग के हिसाब से नहीं बल्कि अन्य विभाग और एजेंसियों से मिलकर विकास की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देते रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र में संचार सुविधाएं बढ़ाने के लिए मोबाइल टावर का निर्माण, सड़क निर्माण, सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के लिए विशेष शिविर लगाने का काम करते हैं। निजी कंपनियों से कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) से भी काम कराए जा रहे हैं। recent visitors 104

अब तक 5 लाख 10 हजार से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने कराई ई-केवायसी

भोपाल राज्य शासन की लाभकारी योजनाओं का फायदा लेने के लिए बिजली उपभोक्ताओं को ई-केवायसी कराना अनिवार्य है। उपभोक्ताओं से कहा गया है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के "उपाय" ऐप के जरिए भी ईकेवायसी करा सकते हैं। गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध उपाय ऐप डाउनलोड कर बिजली उपभोक्ता समग्र केवायसी में अपना उपभोक्ता क्रमांक एवं समग्र क्रमांक दर्ज करके बाद लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी को दर्ज कर केवायसी प्रक्रिया को पूर्ण कर सकते हैं। अब तक 05 लाख 10 हजार 360 उपभोक्ताओं ने सफलतापूर्वक केवायसी करा ली है। कंपनी ने बताया है कि नर्मदापुरम ग्रामीण में 65 हजार 335, बैतूल ग्रामीण में 75 हजार 961, राजगढ़ ग्रामीण में 31 हजार 099, शहर वृत्त भोपाल में 38 हजार 747, भोपाल ग्रामीण में 34 हजार 181, गुना ग्रामीण में 29 हजार 602, विदिशा ग्रामीण में 37 हजार 157, सीहोर ग्रामीण में 19 हजार 752, ग्वालियर ग्रामीण में 19 हजार 513, शहर वृत्त ग्वालियर में 25 हजार 835, अशोकनगर ग्रामीण में 13 हजार 591, दतिया ग्रामीण में 18 हजार 574, रायसेन ग्रामीण में 36 हजार 384, शिवपुरी ग्रामीण में 18 हजार 477, हरदा ग्रामीण में 15 हजार 257, श्योपुर ग्रामीण में 08 हजार 313, मुरैना ग्रामीण में 14 हजार 889 एवं भिण्ड ग्रामीण में 07 हजार 693 बिजली उपभोक्ताओं की केवायसी की गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के जिलों के बिजली उपभोक्ताओं के बिजली संबंधी व्यक्तिगत विवरण को कंपनी के रिकार्ड में अपडेट करने के लिए नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी द्वारा नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया के तहत बिजली उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी जैसे समग्र आईडी, मोबाइल नंबर एवं बैंक खाता इत्यादि की जानकारी को अपडेट किया जा रहा है। नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया से बिजली उपभोक्ताओं को जहां राज्य शासन की योजनाओं का लाभ सीधे लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकेगा वहीं दूसरी ओर प्रणाली में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। साथ ही केवायसी से वास्तविक उपभोक्ताओं के विद्युत संयोजन एवं उनके भार की स्थिति का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे कंपनी कार्यक्षेत्र में विद्युत संरचनाओं के भविष्य में विस्तार की योजना बनाने में आसानी होगी तथा कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं की सही पहचान और मोबाइल नंबर को सटीक रूप से टैग करने में मदद मिलेगी। इससे कंपनी की सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।   recent visitors 57

20 हजार से अधिक गैस पीड़ितों के बनाये गये आयुष्मान कार्ड

भोपाल राज्य सरकार द्वारा भोपाल गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को आयुष्मान ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसमें गैस पीड़ितों एवं उनके बच्चों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे हैं। 28 नवम्बर तक 20 हजार 27 गैस पीड़ितों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों को भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधीन संचालित 6 अस्पतालों एवं 9 औषधालयों में सभी प्रकार के उपचार एवं आवश्यकतानुसार सुविधाएँ निःशुल्क दी जा रही हैं। साथ ही आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी अनुबंधित अस्पतालों में भी गैस पीड़ितों को उपचार सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेष प्रकरणों में इस योजना में निर्धारित पैकेज के अतिरिक्त इलाज पर खर्च होने पर संबंधित अस्पताल को उसकी प्रतिपूर्ति गैस राहत विभाग द्वारा की जाती है। गैस पीड़ित मरीज एवं उनके बच्चों को किडनी, लीवर ट्रॉन्सप्लांट एवं अन्य प्रकार की गंभीर बीमारियों के उपचार के लिये विशेष प्रकरण मानते हुए मरीजों को आवश्यकतानुसार इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। भोपाल गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों को कैंसर के उपचार के लिये गैस राहत विभाग द्वारा 3 निजी अस्पतालों एवं एम्स भोपाल के साथ अनुबंध भी किया गया है। यहां पीड़ितों को कैंसर के उपचार की नि:शुल्क सुविधा दी जा रही है। गैस राहत विभाग के अधीन संचालित सभी अस्पतालों में गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के उपचार के लिये अत्याधुनिक इमरजेंसी यूनिट सातों दिन 24 घंटे संचालित की जा रही हैं। गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के किडनी रोग (सी.के.डी.- IV) व अतिगंभीर मरीजों के उपचार के लिये कमला नेहरू अस्पताल, भोपाल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना भी की गई है। इसमें 13 डायलिसिस मशीनें लगाकर मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा रहा है। राज्य शासन की सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त गैस पीड़ित विधवाओं (कल्याणी) को पेंशन राशि के अलावा भोपाल गैस राहत विभाग द्वारा एक हजार रूपये प्रतिमाह अतिरिक्त पेंशन भी दी जा रही है। वर्तमान में करीब 4 हजार 406 गैस पीड़ित विधवाओं (कल्याणियों) को यह पेंशन दी जा रही है।   recent visitors 52