Sunday, July 5, 2026 9:51 am

180 अधिकारियों को विभिन्न राज्यों में मिला कैडर, छत्तीसगढ़ को मिले 3 आईएएस ऑफिसर

रायपुर केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने 2024 बैच के आईएएस अधिकारियों को उनके कैडर आवंटित कर दिए हैं. इस बैच में कुल 180 अधिकारियों को विभिन्न राज्यों में कैडर मिला है. छत्तीसगढ़ को इस बार 3 आईएएस अधिकारी मिले हैं, जिनमें सभी अन्य राज्यों से हैं. आवंटन सूची जारी होने के बाद अब संबंधित राज्य सरकारें इन अधिकारियों की पोस्टिंग करेंगी. इन अधिकारियों को मिला छत्तीसगढ़ कैडर:     पश्चिम बंगाल के निवासी अक्षय दोशी ने यूपीएससी में 75वीं रैंक प्राप्त किया है. उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला है और वे जनरल कैटेगरी से आते हैं.     उत्तर प्रदेश के निवासी विपिन दुबे ने को भी छत्तीसगढ़ कैडर मिला है. उन्होंने यूपीएससी में 238वीं रैंक हासिल किया है और वे भी जनरल कैटेगरी से हैं.     महाराष्ट्र निवासी क्षितिज गुरभेले ने यूपीएससी में 441वीं रैंक प्राप्त किया है. वे अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से आते हैं और उन्हें भी छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ है. बता दें, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट 16 अप्रैल 2024 को घोषित किया गया था. परीक्षा कुल 1139 पदों के लिए आयोजित हुई थी, जिसमें पहली सूची में 1016 अभ्यर्थियों का चयन हुआ. बाद में 25 अक्टूबर 2024 को रिजर्व लिस्ट जारी की गई, जिसमें 120 अतिरिक्त अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे. UPSC परीक्षा टॉपर्स और उनके कैडर:     आदित्य श्रीवास्तव (उत्तर प्रदेश): टॉपर रहे आदित्य को उनका होम कैडर (उत्तर प्रदेश) आवंटित हुआ.     अनिमेष प्रधान (ओडिशा): दूसरे स्थान पर रहे अनिमेष को ओडिशा कैडर मिला.     अनन्या रेड्डी (तेलंगाना): तीसरे स्थान पर रहीं अनन्या को महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ. यूपीएससी 2023 परीक्षा का रिजल्ट इस साल 16 अप्रैल 2024 को जारी हुआ. यूपीएससी 2023 परीक्षा माध्यम से चयनित सभी अभ्यर्थियों को 2024 बैच का हिस्सा बनाया गया है. recent visitors 34

‘देश में आया बड़ा परिवर्तन’, छत्तीसगढ़-कबीरधाम से डिप्टी सीएम विजय शर्मा हुए बागेश्वर धाम की सनातन हिंदू एकता यात्रा में शामिल

कबीरधाम. मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में प्रभु श्रीरामराजा सरकार की पवित्र नगरी ओरछा तक सनातन हिंदू एकता यात्रा निकाली जा रही है। इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा शामिल हुए। यूपी के बरुआ सागर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यह पदयात्रा पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। डिप्टी सीएम ने कहा कि जब-जब देश में महापुरुषों ने पदयात्रा निकली है, तब-तब देश में बड़ा परिवर्तन आया है। पूर्व में आदि शंकराचार्य, विवेकानंद ने भी पदयात्रा की थी, तब परिवर्तन आया था। मैं पूरी उम्मीद के साथ कहना चाहता हूं कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यह पदयात्रा भी देश में परिवर्तन लाएगी। जातिपात की करो बिदाई, हिन्दू- हिन्दू भाई-भाई। शर्मा ने कहा कि इस पदयात्रा को लेकर हमारे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुभकामनाएं भेजी हैं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से छत्तीसगढ़ में भी ऐसे ही पदयात्रा निकालने के लिए निवेदन किया है। recent visitors 88

नए कानूनों से सामंजस्य पर चर्चा, राजस्थान-जोधपुर में पुलिसिंग विथ एक्सीलेंस इश्यू एंड-वे फॉरवर्ड सम्मेलन

जोधपुर. जोधपुर पुलिस लाइन स्थित सरदार पटेल सभागार में शनिवार को पुलिसिंग विथ एक्सीलेंस इश्यू एंड वे फॉरवर्ड सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस एक दिवसीय सम्मेलन में पुलिस कमिश्नर राजेंद्र सिंह सहित सभी अधिकारी मौजूद रहें। इसके लिए ड्रेस कोड भी निर्धारित किया गया। इसमें पुरुष पुलिसकर्मी ट्राउजर, शर्ट, टाई व ब्लेजर पहन कर आएं, जबकि महिलाओं के लिए ब्लेजर व साड़ी का ड्रेस कोड रखा गया था। कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि पूर्व एडीजीपी और सरदार वल्लभभाई पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक त्रिपाठी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पुलिस के सामने आ रही है। चुनौतियां वर्तमान समय में नए कानून लागू हुए हैं और पुलिस नए कानून के साथ सामंजस्य से बिठाते हुए कैसे काम कर सकती है, इसको लेकर इस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर राजेंद्र सिंह ने यह सराहनीय प्रयास किया, क्योंकि जिस तरीके से नए कानून आने के बाद पुलिस के सामने कई चुनौतियां आ रही थी, ऐसे में बेहतर पुलिसिंग के लिए अधिकारियों को कांफ्रेंस की आवश्यकता थी। इसीलिए यह आयोजन की शुरुआत हुई और आने वाले समय में इस तरीके से कॉन्फ्रेंस होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि पुलिस के सामने कई तरह की समस्याएं हैं। ट्रैफिक में भी कई तरह की समस्या है। इन समस्याओं को लेकर ही आज की कांफ्रेंस आयोजित की गई है। ट्रैफिक में कैसे हादसों को कंट्रोल किया जाए, इसके बारे में भी विस्तार चर्चा होगी और किस प्रकार से साइंटिफिक रूल का इस्तेमाल किया जाए और ट्रेंड किया जाए। किस तरीके से समाज को इंवॉल्व किया जाए, लोगों को इंवॉल्व किया जाए, ड्राइवरस को इंवॉल्व किया जाए और सेफ ड्राइविंग के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इस तरह के कई इश्यूज है, उनपर आज इस कांफ्रेंस में चर्चा की जाएगी। recent visitors 52

अमित जोगी ने किया ट्वीट, छत्तीसगढ़-जोगी कांग्रेस करेगी ईवीएम से सभी चुनावों का बहिष्कार

रायपुर. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे (जेसीसीजे) ने ईवीएम से चुनाव कराये जाने का बहिष्कार किया है। इस संबंध में पार्टी की कोर कमेटी ने निर्णय लिया है कि “जब तक भारत में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के माध्यम से चुनाव कराये जाएंगे, तब तक वो सभी गैर एनडीए राजनीतिक दलों से ऐसे सभी चुनावों का सीधे बहिष्कार करने का आह्वान करेगी। भारत के संविधान में प्रजातांत्रिक प्रक्रिया में देश के मतदाताओं का पुनः विश्वास स्थापित करने के लिये बैलट पेपर से चुनाव कराने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इस संबंध में जेसीसीजे के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्वीट कर लिखा कि 'जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की कोर कमिटी ने निर्णय लिया है कि “जब तक भारत में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के माध्यम से चुनाव कराये जाएँगे, तब तक वो सभी ग़ैर-एनडीए राजनीतिक दलों से ऐसे सभी चुनावों का सिधे बहिष्कार करने का आह्वान करेगी।” भारत के संविधान में प्रजातांत्रिक प्रक्रिया में देश के मतदाताओं का पुनः विश्वास स्थापित करने हेतु बैलट पेपर से चुनाव कराने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। recent visitors 43

निशानेबाज मनु भाकर इसलिए नेशनल चैंपियनशिप में नहीं खेलेंगी: राणा

नई दिल्ली ओलंपिक कांस्य पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने एक बार फिर अभ्यास शुरु कर दिया है पर वह अगले महीने होने वाली नेशनल चैंपियनशिप में भाग नहीं खेलेंगी। मनु ने पिछले माह अक्टूबर में दिल्ली में हुए आईएसएसएफ निशाने विश्वकप में भी फाइनल से भी अपना नाम वापस ले लिया था। इस प्रकार ये दूसरा टूर्नामेंट है जिसमें वह नजर नहीं आयेंगी। मनु के कोच जसपाल राणा के अनुसार मनु ने अभी पर्याप्त अभ्यास नहीं किया है, इसलिए वह किसी बड़े टूर्नामेंट में नहीं उतरना चाहती हैं। वह अभी अपनी ग्रिप को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही हैं। कोच ने कहा कि हम फिलहाल मनु भाकर की ग्रिप को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जिस कारण हमने यूरोपीय दौरे का फैसला पहले ही कर लिया था। ऐसे कई पक्ष है जिसपर हमें ध्यान देना है। जिससे वह आने वाले समय में और बेहतर निशानेबाज के तौर पर उभरेंगी।   recent visitors 41

कांस्य पदक विजेता अभिषेक ने कहा ने कहा- भारतीय हॉकी के स्वर्ण युग को वापस लाना है लक्ष्य

नई दिल्ली ओलंपिक कांस्य पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के फारवर्ड अभिषेक का कहना है कि उनका लक्ष्य भारतीय हॉकी के स्वर्ण युग को वापस लाना है। अभिषेक का कहना है कि हमने ओलंपिक में पदक जीतने की प्रक्रिया शुरू कर दी है पर स्वर्ण युग अभी हासिल नहीं हुआ है जिसके लिए हमें अभी और प्रयास करने हैं। वह हांगझोऊ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम में भी शामिल थे। अभिषेक हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) की नीलामी में दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी रहे। उन्हें श्राची रार बंगाल टाइगर्स ने 72 लाख रुपये में खरीदा था। वह पहली बार एचआईएल टूर्नामेंट खेलने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, ‘यह अंतरराष्ट्रीय मैचों से अलग अनुभव होगा। एचआईएल भारतीय हॉकी के लिए भी एक बड़ी बात होने जा रही है क्योंकि हमें लीग में बहुत सारे विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार एचआईएल से राष्ट्रीय टीम को लाभ ही मिलेगा, उसे बेहतर खिलाड़ी मिलेंगे। उन्होंने कहा, ‘हमारी एचआईएल टीम में बेल्जियम और जर्मनी के कुछ बेहतरीन खिलाड़ी हैं। एचआईएल के दौरान उनके साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना और खेल से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना बहुत अहम होगा। हम उनसे छोटी-छोटी बातें सीखेंगे। अभिषेक लीग के दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी है पर उन्होंने कहा कि वह दबाव लेने की जगह इसका आनंद उठायेंगे। उन्होंने कहा, ‘जिम्मेदारी तो होगी लेकिन मैं कोई दबाव नहीं लेना चाहता। मैं अपना खेल खेलूंगा। अगर मैं दबाव लूंगा तो अपना सौ फीसदी नहीं दे पाऊंगा। मैं बस अपने खेल का आनंद उठाने की कोशिश करूंगा। अधिषेक ने कहा कि पढ़ाई से बचने के लिए हॉकी खेलना शुरू किया था लेकिन उन्हें इस फैसले पर कभी पछतावा नहीं हुआ क्योंकि इस खेल ने उन्हें पहचान सहित वह सब कुछ दिया जो वह जिंदगी में पाना चाहते थे।   recent visitors 99

नमाज पर पाबंदी की उठी मांग, राजस्थान-अजमेर दरगाह के बाद अब ‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ गरमाया

अजमेर. देश की सबसे प्राचीन मस्जिदों में से एक अढ़ाई दिन का झोपड़ा के पीछे ढेर सारे विवाद हैं। इस बार विवाद नमाज को लेकर है। दरअसल, पिछले दिनों से हिंदू और जैन संत यहां आकर जबरन नमाज़ पढ़ने का विरोध जता चुके हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां के गर्भगृह और बाहर की दिवारों के खंभों पर साफ-साफ हिंदू-जैन मंदिर शैली में देखे जा सकते हैं। दरअसल, साल की शुरुआत में जब एक जैन साधु अढ़ाई दिन के झोपड़े को देखने के लिए जा रहे थे। तब उनको समुदाय विशेष के लोगों ने रोक दिया था। इसके बाद विवाद बढ़ा, क्योंकि अढ़ाई दिन का झोपड़ा एक पर्यटन स्थल है, जिसकी देखरेख की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व विभाग की है। इस घटना के बाद अजमेर सहित देश भर के जैन समुदाय ने प्रशासन के सामने अपत्ति दर्ज कराई थी। क्या है अढ़ाई दिन का झोंपड़ा? दरअसल 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' 1192 ईंस्वीं में अफगान सेनापति मोहम्मद गोरी के आदेश पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया था। असल में इस जगह पर एक बहुत बड़ा संस्कृत विद्यालय (स्कूल) और मंदिर थे, जिन्हें तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया था। अढ़ाई दिन के झोपड़े के मुख्य द्वार के बायीं ओर संगमरमर का बना एक शिलालेख भी है, जिसपर संस्कृत में उस विद्यालय का जिक्र किया गया है। इस मस्जिद में कुल 70 स्तंभ हैं। असल में ये स्तंभ उन मंदिरों के हैं, जिन्हें धवस्त कर दिया गया था, लेकिन स्तंभों को वैसे ही रहने दिया गया था। इन स्तंभों की ऊंचाई करीब 25 फीट है और हर स्तंभ पर खूबसूरत नक्काशी की गई है। 90 के दशक में यहां कई प्राचीन मूर्तियां ऐसे ही बिखरी पड़ी थीं, जिन्हें बाद में संरक्षित किया गया। लंबी है इसकी कहानी अढ़ाई दिन का झोपड़ा नाम की लंबी कहानी है। माना जाता है कि तब मोहम्मद गोरी पृथ्वीराज चौहान को हराने के बाद अजमेर से गुजर रहा था। इसी दौरान उसे वास्तु के लिहाज से बेहद उम्दा हिंदू धर्मस्थल नजर आए। गोरी ने अपने सेनापति कुदुबुद्दीन ऐबक को आदेश दिया कि इनमें से सबसे सुंदर स्थल पर मस्जिद बना दी जाए. गोरी ने इसके लिए 60 घंटों यानी ढाई दिन का वक्त दिया। गोरी के दौरान हेरात के वास्तुविद अबु बकर ने इसका डिजाइन तैयार किया था। जिसपर हिंदू ही कामगारों ने 60 घंटों तक लगातार बिना रुके काम किया और मस्जिद तैयार कर दी। recent visitors 192