जनादेश दिवस पर कांग्रेस ने भाजपा पर कसा तंज, पूर्व पीसीसी चीफबोले- सरकार अपनी उपलब्धि बताए

रायपुर भाजपा आज जनादेश दिवस मना रही. इस पर पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि यह जीत जनादेश नहीं था, ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ के कारण जीत हुई थी. एक साल में सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए क्या किया, अपनी उपलब्धि बताते तो अच्छा होता. उसका उत्सव मनाते तो ठीक था, ये चुराई हुई जीत का जश्न मना रहे हैं. कांग्रेस का धान खरीदी केंद्र चलो अभियान पर पूर्व विधायक धनेंद्र साहू ने कहा, आज से धान खरीदी केंद्र चलो अभियान चलाया जा रहा है. आज पहला दिन है. आज धरसींवा और तिल्दा ब्लॉक के सांकरा गांव के धान खरीदी केंद्र में निरीक्षण के लिए जाएंगे. किसान चिंतित हैं, क्योंकि जो लिमिट तय किए हैं उसके अंदर धान खरीदी नहीं हो पाएगा. किसानों के मन में शंका है कि सरकार धान खरीदना नहीं चाहती है. साहू ने कहा, पॉलिसी बदलने की जरूरत ही क्या थी ? सभी अव्यवस्थाओं को लेकर निरीक्षण के लिए जाएंगे. इसके बाद सरकार को समस्याओं से अवगत कराएंगे. नतीजा नहीं आने पर आगे धरना प्रदर्शन और घेराव हमारा लक्ष्य रहेगा. डायरेक्ट मेयर चुनाव पर धनेंद्र साहू बोले – डरी हुई है सरकार अब डायरेक्ट मेयर चुनाव होगा. इस पर धनेन्द्र साहू ने कहा, अभी साय सरकार ने ये फैसला लिया है. आज इसकी जरूरत क्यों पड़ रही है? पुरानी पद्धति को बदलकर सरकार प्रत्यक्ष पद्धति से चुनाव कर रही है. सरकार डर रही है कि पुरानी पद्धति से चुनाव कराने पर उनको जनादेश नहीं मिल पाएगा. साहू ने कहा, काम तो कुछ हुआ नहीं है. सरकार पांच ही योजना बता दे. मुझे लगता है कि ये नगरीय निकाय चुनाव भी मोदी की गारंटी पर लड़ेंगे, क्योंकि इनकी तो कोई उपलब्धि नहीं है. recent visitors 50

जरा कान की भी सुनिए

आजकल सुनने की क्षमता में कमी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एक शोध कहता है कि 20 से 40 आयु वर्ग के 80 प्रतिशत लोगों में यह समस्या मोबाइल फोन के ज्यादा उपयोग के कारण बढ़ रही है। इसके अलावा भी इस समस्या के अनेक कारण हैं, जो आपके कानों को परेशान करते हैं। आप अपने कानों का कैसे रख सकते हैं ख्याल… विज्ञान के विकास ने हमारी जीवनशैली को काफी बदल दिया है। मोबाइल और गाडियों के बढ़ते उपयोग से ध्वनि प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है और उसी अनुपात में कानों की समस्याएं भी बढ़ी हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कानों की समस्याएं युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत के 20-22 प्रतिशत लोग कान की किसी न किसी बीमारी के शिकार हैं। इनमें कानों में दर्द होना, धीमी आवाजें सुनाई न देना, कान में किसी तरह का दबाव महसूस होना, कान में सूजन आ जाना या कान से तरल पदार्थ का बहना प्रमुख हैं। इसके अलावा कानों की एक गंभीर समस्या और है कि जब बाहर कोई आवाज नहीं है, तब भी आवाज सुनाई देना या कानों में घंटी बजना। ये समस्याएं आपके एक या दोनों कानों में हो सकती हैं। ध्वनि प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव:- ध्वनि प्रदूषण का सबसे अधिक जाना-पहचाना नुकसान है सुनने की क्षमता प्रभावित होना या कुछ निश्चित आवाजों को सुनने में अक्षमता, लेकिन ध्वनि प्रदूषण के कुछ दूसरे प्रभाव भी हैं। -ब्लड प्रेशर, हृदय की धड़कनें और सांस की गति बढ़ जाना -पाचन तंत्र गड़बड़ा जाना -कुछ लोगों में शोर माइग्रेन के ट्रिगर का कार्य करता है -ध्यान केंद्रन की शक्ति कमजोर होना और इम्यून तंत्र का कमजोर हो जाना -शोर घावों के भरने और स्वस्थ होने की गति को भी धीमा कर देता है -शोर तनाव के स्तर को बढ़ाता है -कभी-कभी अत्यधिक तेज ध्वनि या वायु दाब में परिवर्तन से कान का पर्दा फट जाता है -अधिक शोर वाले स्थानों में रहने वाले लोगों का व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाता है। ईयरफोन से दूरी जरूरी:- आजकल युवाओं में ईयरफोन या हेडफोन का बड़ा क्रेज है। इनके लगातार इस्तेमाल से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक तेज ध्वनि सुनने से कान के पर्दे की मोटाई प्रभावित होती है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और धीमी आवाजें सुनाई नहीं देती हैं। इसके अलावा इससे याददाश्त और बोलने की क्षमता भी प्रभावित होती है। शोधों में यह बात सामने आई है कि यदि कोई व्यक्ति रोज एक घंटे से अधिक 80 डेसीबल्स से तेज वॉल्यूम में संगीत सुनता है तो उसे अगले पांच वर्षों में सुनने में कठिनाई हो सकती है या स्थाई रूप से बहरा हो सकता है। कान के पर्दे में छेद होना:- जानलेवा घटना जैसे विस्फोट या वाहन चलाते समय कोई दुर्घटना घटित होने से कान में अचानक तेज दर्द हो तो हो सकता है कि कान के पर्दे में छेद हो गया हो। अगर दुर्घटना के समय तेज दर्द हो और फिर सुनाई पड़ना बंद हो जाए तो समझिए की कान के मध्य भाग को नुकसान पहुंचा है। अगर कान के पर्दे में छोटा छेद है तो वह खुद ही भर जाता है, लेकिन अगर बड़ा छेद हो जाए तो सर्जरी की आवश्यकता होती है। स्विमिंग से संक्रमण:- देर तक पानी में रहने से कानों में पानी चला जाता है। इससे कानों में दर्द होना या तरल पदार्थ बहने की समस्या हो सकती है। बचाव के लिए ईयर प्लग का इस्तेमाल करें। हवाई यात्रा में बरतें सावधानी:- हवाई यात्रा के दौरान अक्सर लोगों को कान में दर्द की शिकायत होती है। यह समस्या प्लेन के लैंडिंग करते समय अधिक होती है। बचाव के लिए ईयर प्लग का इस्तेमाल करें। च्यूइंगम चबा कर भी बच सकते हैं। सावधानी से करें सफाई:- कान से मैल अपने आप न निकल पाने के कारण अंदर जमा होने लगता है। इस पर तेल, धूल, धुआं, कचरा आदि लगने के कारण यह कड़ा हो जाता है, जिसे निकालना बेहद जरूरी होता है। कुछ दवाओं की मदद से मैल को मुलायम करके उसे निकाला जाता है। शोर-शराबे से रहें दूर:- मशीनों, फैक्ट्रियों और खासतौर पर ऑटोमोबाइल से निकलने वाले शोर के कारण वातावरण में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इस शोर-शराबे का हमारे स्वास्थ्य पर दो तरह से प्रभाव होता है। प्राथमिक स्तर पर इससे हमारी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। दूसरे स्तर पर एंग्जाइटी और अनिद्रा की समस्या होती है। 20-40 वर्ष की आयु वर्ग के 80 प्रतिशत लोगों में सुनने की समस्या अत्यधिक मोबाइल फोन का उपयोग करने से होती है। हालांकि अभी इसका कोई डॉंक्टरी आधार नहीं है, लेकिन कई शोधों में मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशंस को इसका सबसे प्रमुख कारण माना गया है। कानों को स्वस्थ रखने के टिप्स:- -अपने कानों को अत्यधिक सावधानी से साफ करें। कान में कोई नुकीली चीज न डालें। इससे ईयर कनैल या ईयरड्रम क्षतिग्रत हो सकता है। -ईयर वैक्स स्वयं ही कान की सफाई करता है। अगर यह अधिक मात्रा में एकत्र हो जाए और सुनने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। -कान के संक्रमण से बचने के लिए गले और नाक के संक्रमण को गंभीरता से लें और तुरंत इलाज कराएं। -कई बीमारियां भी सुनने की क्षमता को प्रभावित करती हैं, इसलिए अगर कोई ऐसा लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। -अगर कानों से मवाद बह रहा है तो इसे गंभीरता से लें और जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर को दिखाएं। -कई दवाएं भी सुनने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। अगर कानों में घंटी बजे या दूसरी आवाजें आएं तो इसे गंभीरता से लें। -अत्यधिक तेज आवाज में संगीत न सुनें। -बारिश में भी कई बार नमी के कारण कान की नली में संक्रमण हो जाता है, इससे बचने के लिए कान को सूखा रखें। -कान का मैल साफ करने के लिए नुकीली चीजों या ईयर बड का उपयोग न करें। -नहाने के तुरंत बाद कानों को अच्छी तरह साफ करके सुखाना चाहिए। -कान में कभी कोई तेल न डालें।   recent visitors 74

महतारी वंदन योजना: पोषणयुक्त आहार लेकर ममता अपने मजबूत भविष्य की रख रहीं नींव

अम्बिकापुर जिन छोटी-मोटी जरूरतों के लिए पहले महिलाओं को बार-बार अपने बजट में जोड़-तोड़ करनी पड़ती थी, अब महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली 1 हजार रुपए की सहायता राशि से वे पूरी हो रहीं हैं। यही नहीं, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार के क्षेत्र में भी महिलाएं इस राशि का उपयोग कर सामाजिक-आर्थिक रुप से सशक्त हो रही, और ऐसी महिलाओं की कहानी रोजाना हमें देखने मिल रही है। ऐसी ही एक कहानी अम्बिकापुर के खालपारा की ममता दास की है। ममता बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उनके खाते में हर महीने 1 हजार रुपए आते हैं। ये राशि मेरे लिए बहुत अहम है, क्योंकि यह मेरे होने वाले शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आधार साबित होगा। इस राशि से पोषणयुक्त आहार लेकर ममता अपने मजबूत भविष्य की नींव रख रहीं हैं। ममता ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं, पति मेहनत मजदूरी करते हैं, छोटी-सी आय में जीवनयापन हो रहा है, पर मैं अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ाना चाहती हूं, इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य एवं खान-पान का पूरा ध्यान रखती हूं। फल, सब्जी, दूध आदि पोषणयुक्त आहार महतारी वंदन योजना की राशि से खरीदकर मैं स्वयं अपने स्वास्थ्य एवं पोषण का ध्यान रख रही हूं, ताकि होने वाला बच्चा स्वस्थ एवं तंदरूस्त हो। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता ने मातृशक्ति को आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाया है। recent visitors 118

कल सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक की मौजूदगी में देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लग जाएगी!

मुंबई  पांच साल के सीएम, फिर 72 घंटे के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और फिर ढाई साल के डिप्टी सीएम। पिछले 10 साल तक अलग-अलग रोल में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति की राजनीति के हीरो बने रहे। अब पांच दिसंबर को वह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में अब पांच साल के मराठा राज के बाद 'पेशवा' की 'पेशवाई' की चलेगी। बीजेपी ने फडणवीस के नाम को सीएम पद के लिए फाइनल कर लिया है। चार दिसंबर को सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमन और विजय रूपाणी की मौजूदगी में उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण नेता, जो दूसरी बार सीएम बनेंगे मराठा इतिहास में पंतप्रधान यानी 'पेशवा' अपने कूटनीति और युद्धनीति के लिए जाने जाते थे। देवेंद्र फडणवीस के प्रशंसक भी उन्हें 'पेशवा' और देवा भाऊ ही कहते हैं। देवेंद्र फडणवीस पहले भी दो बार महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं, मगर उनके लिए यह कुर्सी 'लॉलीपॉप' की तरह नहीं मिली। हर बार उन्होंने बड़े चैलेंज को स्वीकार किया और हर दांव से पार्टी को जीत दिलाई। उनकी खासियत यह है कि उन्होंने युवा पार्षद के तौर पर राजनीति में एंट्री ली है, इसलिए वह जनता और कार्यकर्ताओं के नब्ज को पहचानते हैं। देवेंद्र फडणवीस संघ के 'लाडले' हैं और शाह-मोदी के प्रिय भी। काबिलियत के कारण ही वह मराठा राजनीति वाले राज्य में दूसरे ब्राह्मण सीएम बने। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण सीएम शिवसेना के नेता मनोहर जोशी थे, मगर वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। कांग्रेस-एनसीपी के 15 साल के शासन का किया था अंत 2014 में पहली बार देवेंद्र फडणवीस जब सीएम बने थे, तब उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया था। फडणवीस ने विधानसभा से सड़क तक कांग्रेस-एनसीपी शासन में हुए सिंचाई घोटाले को लेकर आवाज बुलंद की। मोदी लहर के बीच प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र ने चुनाव का ताना-बाना बुना और जीत हासिल की। दूसरी बार भी एंटी इम्कबेंसी को दरकिनार कर गठबंधन के साथ बहुमत हासिल किया, मगर सत्ता हासिल नहीं कर सके। 72 घंटे की सरकार बनाई, तब उन्होंने शरद पवार से बातचीत की थी। जब सरकार गिरी, तब फडणवीस ने विधानसभा में चेतावनी के लहजे में पवार और ठाकरे को एक शेर सुनाया था। 'मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं…लौटकर आऊंगा।' ढाई साल बाद ही शिवसेना दो हिस्सों में टूट गई। एनसीपी के दो टुकड़े हो गए। बीजेपी को फडणवीस सत्ता में ले आए। 2024 में एक बार फिर अपनी रणनीति से एंटी इम्कबेंसी की हवा बदल दी। बीजेपी सर्वाधिक 132 सीटें जीती ही, महायुति ने भी इतिहास रच दिया। नरेंद्र मोदी क्यों हुए देवेंद्र फडणवीस के मुरीद ? रिपोर्टस के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में रैली के दौरान नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पर बीजेपी के बड़े नेताओं से बातचीत कर रहे थे। वहां नितिन गडकरी, गोपीनाथ मुंडे और देवेंद्र फडणवीस भी थे। नरेंद्र मोदी ने पूछा कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी? गडकरी और मुंडे 17-18 के आंकड़े तक पहुंच सके। तब देवेंद्र फडणवीस ने 40 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की और यह सच साबित हुई। फिर विधानसभा चुनाव के दौरान फडणवीस ने शिवसेना से अलग चुनाव लड़ने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को राजी किया। यह प्रयोग भी सफल हुआ। 2014 में पहली बार शिवसेना से अलग प्रदेश में बीजेपी अकेले चुनाव लड़ी और 125 सीटें हासिल कीं। उनकी इस रणनीति का बीजेपी के बड़े नेताओं ने विरोध किया था, मगर फडणवीस की रणनीति कामयाब रही और बीजेपी को महाराष्ट्र की पहली बार सत्ता मिली। उद्धव ठाकरे के घमंड को तोड़ने वाले 'पेशवा'! यह कहानी महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में सुनाई जाती है। सच या झूठ, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने उद्धव ठाकरे को बातचीत का निमंत्रण दिया था। बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे ने संदेश दिया कि बीजेपी नेता मातोश्री में आकर उनसे चर्चा करे। यह बात बीजेपी को पसंद नहीं आई। तब देवेंद्र फडणवीस ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। पहले बीजेपी अकेले चुनाव लड़कर बड़ी पार्टी बनी। 44 साल की उम्र में जब पहली बार सीएम बने, तब फडणवीस ने पहली बार शिवसेना को गठबंधन का जूनियर पार्टनर बनाया। पांच साल तक सरकार चलाई। दूसरी बार बीजेपी और शिवसेना साथ में उतरी। महायुति को बहुमत मिला, मगर उद्धव ठाकरे सीएम पोस्ट पर अड़ गए। देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के क्षणिक बागी अजित पवार के साथ 80 घंटे के लिए सरकार बनाई, मगर चल नहीं सकी। फडणवीस विपक्ष में बैठे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ढाई साल में ही दो हिस्सों में बंट गई। जब चुनाव में उतरे तो ठाकरे की सेना को 20 पर समेट दिया। धीरे-धीरे देवेंद्र बनते गए मराठा राजनीति के सूरमा देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस जनसंघ और बीजेपी के नेता रहे। नागपुर के गंगाधर फडणवीस को नितिन गडकरी भी अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं। 22 साल की उम्र में फडणवीस ने नागपुर के पार्षद से राजनीति शुरूआत की, फिर 27 साल की आयु में युवा मेयर बनने का रेकॉर्ड बनाया। 1999 में दक्षिण पश्चिम नागपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़े और लगातार जीतते रहे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले गोपीनाथ मुंडे के आकस्मिक निधन के बाद नेतृत्व की चर्चा चल रही थी। नितिन गडकरी और एकनाथ खडसे जैसे दिग्गज कतार में थे। चुनाव के दौरान दिल्ली में नरेंद्र, महाराष्ट्र में देवेंद्र का नारा काफी लोकप्रिय हुआ। देखते ही देखते वह बीजेपी के पोस्टर बॉय बन गए। अपनी बेदाग छवि और लोकप्रियता के कारण आरएसएस ने भी उन्हें नेक्स्ट जेनरेशन के नेता के तौर पर चुना, जिसमें वह खरे साबित हुए। उन्होंने गठबंधन की सरकार चलाकर अपने नेतृत्व क्षमता को भी साबित कर दिया। recent visitors 56

बर्तन में छुपा सेहत का खजाना

सेहतमंद खाना पकाने के लिए आप तेल-मसालों पर तो पूरा ध्यान देती हैं, पर क्या आप खाना पकाने के लिए बर्तनों के चुनाव पर भी ध्यान देती हैं? अगर आपका जवाब न है तो आज से ही इस बात पर भी ध्यान देना शुरू कर दें। बर्तन कैसे आपको सेहतमंद बना सकते हैं… खाना पौष्टिक और सेहतमंद हो इसके लिए हम न जाने कितने जतन करते हैं। कम तेल इस्तेमाल से लेकर सब्जियों और दालों को सफाई से धोना, आटा साफ हाथ से गुनना, घर और किचन में साफ-सफाई का खास ख्याल रखना, भोजन की गुणवत्ता, ताजापन, सही मसालों का उपयोग और भी बहुत कुछ हमारी आदत में शुमार हो चुका है। लेकिन एक अहम चीज हम अकसर भूल जाते हैं और वह है हमारे बर्तन। जी हां, भोजन की पौष्टिकता में यह बात भी मायने रखती है कि आखिर उन्हें किस बर्तन में बनाया जा रहा है। आपको शायद मालूम न हो, लेकिन आप जिस धातु के बर्तन में खाना पकाते हैं उसके गुण भोजन में स्वतः ही आ जाते हैं। डाइटीशियन ईशी खोसला के मुताबिक भोजन पकाते समय बर्तनों का मैटीरियल भी खाने के साथ मिक्स हो जाता है। एल्यूमीनियम, तांबा, लोहा, स्टेनलेस स्टील और टेफलोन बर्तन में इस्तेमाल होने वाली आम सामग्री हैं। बेहतर है कि आप अपने घर के लिए कुकिंग मटेरियल चुनते समय कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखें और इसके लिए आपको उन बर्तनों के फायदे नुकसान के बारे में जानकारी होना जरूरी है। कास्ट लोहे के बर्तन:- देखने और उठाने में भारी, महंगे और आसानी से न घिसने वाले ये बर्तन खाना पकाने के लिए सबसे सही पात्र माने जाते हैं। शोधकर्ताओं की माने तो लोहे के बर्तन में खाना बनाने से भोजन में आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व बढ़ जाते है। एल्यूमीनियम के बर्तन:- एल्यूमीनियम के बर्तन हल्के, मजबूत और गुड हीट कंडक्टर होते हैं। साथ ही इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती। भारतीय रसोई में एल्यूमीनियम के बर्तन सबसे ज्यादा होते हैं। कुकर से लेकर कड़ाहियां आमतौर पर एल्यूमीनियम की ही बनी होती हैं। एल्यूमीनियम बहुत ही मुलायम और प्रतिक्रियाशील धातु होता है। इसलिए नमक या अम्लीय तत्वों के संपर्क में आते ही उसमें घुलने लगता है। खासकर टमाटर उबालने, इमली, सिरका या किसी अम्लीय भोजन के बनाने जैसे कि सांभर आदि के मामले में यह ज्यादा होता है। इससे खाने का स्वाद भी प्रभावित होता है। खाने में एल्यूमीनियम होना गंभीर चिंता का विषय है। यह खाने से आयरन और कैल्शियम तत्वों को सोख लेता है। यानी यदि पेट में गया तो शरीर से आयरन और कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। कुछ अल्जाइमर (याद्दाश्त की बीमारी) के मामलों में मस्तिष्क के उत्तकों में भी एल्यूमीनियम के अर्क पाए गए हैं। जिससे यह तो स्पष्ट है कि एल्यूमीनियम के तत्व मानसिक बीमारियों के संभावित कारण भी हो सकते हैं। शरीर में एल्यूमीनियम की मात्रा अधिक हो जाए, तो टीबी और किडनी फेल होने का सबब बन सकता है। यह हमारे लिवर और नर्वस सिस्टम के लिए भी फायदेमंद नहीं होता। शोधकर्ताओं की मानें तो एल्यूमीनियम के बर्तन में चाय, टमाटर प्यूरी, सांभर और चटनी आदि बनाने से बचना चाहिए। इन बर्तनों में खाना जितनी देर तक रहेगा, उसके रसायन भोजन में उतने ही ज्यादा घुलेंगे। तांबा और पीतल के बर्तन:- कॉपर और पीतल के बर्तन हीट के गुड कंडक्टर होते हैं। इनका इस्तेमाल पुराने जमाने में ज्यादा होता था। ये एसिड और सॉल्ट के साथ प्रक्रिया करते हैं। नेशनल इंस्टीटय़ूट आफ हेल्थ के अनुसार खाने में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, बर्तनों के साथ प्रतिक्रिया करके ज्यादा कॉपर पैदा कर सकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। इससे फूड प्वॉयजनिंग भी हो सकती है। इसलिए इनकी टिन से कोटिंग जरूरी है। जिसे कलई भी कहते हैं। स्टेनलेस स्टील बर्तन:- स्टेनलेस स्टील के बर्तन अच्छे, सुरक्षित और किफायती विकल्प हैं। इन्हें साफ करना भी बहुत आसान है। स्टेनलेस स्टील एक मिश्रित धातु है, जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकल मिलाकर बनाई जाती है। इस धातु में न तो लोहे की तरह जंग लगता है और न ही पीतल की तरह यह अम्ल आदि से प्रतिक्रिया करती है। इसकी सिर्फ एक कमी है कि इससे बने बर्तन जल्द गर्म हो जाते हैं। इसलिए इन्हें खरीदते वक्त ऐसे बर्तन चुनें जिनके नीचे कॉपर की लेयर लगी हो। लेकिन इसे साफ करते समय सावधानी बरती जानी चाहिए क्योंकि इसकी सतह पर खरोंच आने से क्रोमियम और निकल निकलता है। नॉन-स्टिक बर्तन:- नॉन-स्टिक बर्तनों की सबसे खास बात यह है कि इनमें तेल की बहुत कम मात्रा या न डालो तो भी खाना पढिया पकता है। नॉन-स्टिकी होने की वजह से इनमें खाना चिपकता भी नहीं। लेकिन नॉन-स्टिक बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या इनकी सतह पर खरोंच आने से कुछ खतरनाक रसायन निकलते हैं। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा इन बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या जलते गैस पर छोड़ने की सलाह नहीं देते हैं।   recent visitors 64

बैहर में थप्पड़कांड का वीडियो वायरल, कांग्रेस नेता रणजीत बैस पर एफआईआर दर्ज

बालाघाट एक अनुसूचित आदिवासी छात्र को स्कूल में थप्पड़ मारने के आरोप में मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस प्रदेश सचिव और बैहर जनपद उपाध्यक्ष रणजीत बैस पर एफआईआर दर्ज हो गया है. कांग्रेस के दोनों नेताओं पर गढ़ी थाने में एसटी/एससी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. बता दें, थप्पड़कांड का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद कार्रवाई हुई है. युवक कांग्रेस नेताओं पर एसटी-एससी एक्ट के तहत दर्ज हुई प्राथमिकी गौरतलब है युवक कांग्रेस नेताओं ने आदिवासी छात्र को स्कूल के अंदर गुटखा लाने से इनकार करने पर थप्पड़ जड़ दिया था. स्कूल छात्र को थप्पड़ मारने की घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ था. अब गढ़ी पुलिस ने दोनों कांग्रेस नेताओ के ऊपर एसटी-एससी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है. स्कूल में गुटखा लाने से इनकार करने पर कांग्रेस नेताओं ने मारा थप्पड़ रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल पहुंचे युवक कांग्रेस सचिव और युवक कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आदिवासी छात्र से गुटखा खरीदकर लाने के कहा, लेकिन ने स्कूल में गुटखा खरीदकर लाने से आदिवासी छात्र ने इनकार कर दिया. आदिवासी छात्र के इनकार से कांग्रेस नेता को गुस्सा आ गया और उसने छात्र को थप्पड़ जड़ दिया.   recent visitors 72

IANS की रिपोर्ट के अनुसार चिन्मय दास की बेल के लिए पैरवी करने को कोई वकील ही तैयार नहीं, बेल के लिए करना होगा इंतजार

ढाका इस्कॉन के संत चिन्मय कृष्ण दास को बांग्लादेश में जेल से बाहर निकलने के लिए इंतजार करना होगा। मंगलवार को केस की सुनवाई थी, लेकिन उनकी पैरवी के लिए कोई वकील ही नहीं पहुंचा। खबर है कि कट्टरपंथियों के डर से वकील उनका केस लेने से ही डर रहे हैं। इसी के चलते जब मंगलवार को अदालत लगी तो उनकी पैरवी के लिए कोई नहीं था। इस पर बेंच ने उनकी बेल अर्जी पर सुनवाई के लिए 2 जनवरी, 2025 की नई तारीख तय की है। IANS की रिपोर्ट के अनुसार चिन्मय दास की बेल के लिए पैरवी करने को कोई वकील ही तैयार नहीं हुआ है। इससे पहले उनके एक वकील पर हमला भी हुआ है, जो फिलहाल आईसीयू में एडमिट हैं और उनकी हालत गंभीर है। बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोते के प्रवक्ता रहे चिन्मय कृष्ण दास को बीते सोमवार को देशद्रोह के मामले में अरेस्ट कर लिया गया था। वह हिंदुओं और इस्कॉन के खिलाफ हिंसा के विरोध में हुए एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसके बाद उन पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया गया और एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया। चिन्मय कृष्णदास पर इस तरह की कार्रवाई किए जाने की भारत समेत दुनिया भर में निंदा हो रही है। कनाडा, अमेरिका जैसे देशों में रह रहे हिंदुओं ने भी इस ऐक्शन की निंदा की है और वहां विरोध प्रदर्शन हुए हैं। चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी का बांग्लादेश में अच्छा प्रभाव रहा है। वह बांग्लादेश चटग्राम में इस्कॉन के डिविजनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी रहे हैं। उनके वकील रामेन रॉय पर भी सोमवार को हमला हुआ है। वह फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। चिन्मय दास ने भी इस पर बयान जारी किया है। उनका कहना है कि रामेन रॉय का अपराध यही था कि अदालत में उन्होंने उनकी पैरवी की थी। खबरों के अनुसार इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रामेन रॉय के घर पर हमला किया था और फिर उन्हें भी जमकर पीटा गया। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में एडमिट हैं। इस्कॉन कोलकाता के प्रवक्ता ने कहा कि रामेन रॉय फिलहाल अस्पताल में एडमिट हैं। वह अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'एडवोकेट रामेन रॉय के लिए प्रार्थना करें। उनकी एक ही गलती थी कि उन्होंने अदालत में चिन्मय कृष्ण दास की पैरवी की थी।' बता दें कि भारत ने भी बांग्लादेश के हालातों पर चिंता जताई है और वहां की सरकार से कहा है कि हिंदुओं पर हमले न किए जाएं। recent visitors 45