Wednesday, July 8, 2026 5:11 am

एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ATOAI) के राष्ट्रीय सम्मेलन में टूरिज्म बोर्ड ने की सहभागिता

भोपाल मध्यप्रदेश को एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करने के लिये मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रयासों को निरंतर सफलता हासिल हो रही है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ATOAI) के राष्ट्रीय सम्मेलन में म.प्र. टूरिज्म बोर्ड को सर्वश्रेष्ठ साहसिक पर्यटन राज्य (बेस्ट एडवेंचर टूरिज्म स्टेट) के रूप में सम्मानित किया गया। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने टूरिज्म बोर्ड के संयुक्त संचालक डॉ. एस.के. श्रीवास्तव को यह सम्मान सौंपा। सर्वश्रेष्ठ साहसिक राज्य पुरस्कार उन राज्यों को दिया जाता है, जिन्होंने बुनियादी ढांचे, विविध गतिविधियों एवं नवाचारों के माध्यम से साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने में उत्कृष्टता हासिल की हो। प्रमुख सचिव पर्यटन व संस्कृति विभाग एवं प्रबंध संचालक म.प्र. टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने पुरस्कार पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी के मार्गदर्शन में प्रदेश को एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करने हेतु विभिन्न स्तरों पर प्रयास किये जा रहे हैं। यह पुरस्कार न केवल हमारे प्रदेश की अद्वितीय प्राकृतिक संपदा और विविध पर्यटन अनुभवों की पहचान है, बल्कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में किए गए नवाचारों का भी परिणाम है। उन्होंने कहा कि सतपुड़ा, पचमढ़ी, अमरकंटक और नर्मदा घाटी जैसे स्थानों ने साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य में स्काई डाइविंग, ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों के संचालन ने युवाओं और साहसिक पर्यटकों को आकर्षित किया है।   recent visitors 34

रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के लिये तैयार है नर्मदापुरम्

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के हर क्षेत्र में संतुलित और सामान विकास के संकल्प को सकार करने के लिये पूरे प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 6वीं रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव 7 दिसंबर को नर्मदापुरम में होगी, जिसकी तैयारी जोरों है। नर्मदापुम् राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय उद्योगपतियों के स्वागत के लिये तैयार है। इसके माध्यम से स्थानीय निवेशकों और उद्योगपतियों को भी प्रदेश की औद्योगिक रणनीतियों से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदापुरम में आयोजित होने वाले इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में नर्मदापुरम और आस-पास के क्षेत्र के औद्योगिक विकास और निवेश संभावनाओं के लिहाज से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसमें उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों, विकासात्मक योजनाओं और विभिन्न उद्योगों की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में क्षेत्रीय उद्योगों से संबंधित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। व्यापार संवर्धन केंद्र भी खुले रहेंगे, जहां निवेशक मध्यप्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को देख सकेंगे और संभावनाओं पर चर्चा कर सकेंगे। यह सम्मेलन न केवल राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित होगा। कॉन्क्लेव में निवेश के अवसर विषय पर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आईटीईएस और ईएसडीएम, माइनिंग, पर्यटन, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र शामिल हैं। इसके बाद दोहपर 12 बजे प्रमुख उद्योगपतियों द्वारा राज्य के व्यवसायिक माहौल पर अपने विचार साझा किए जाएंगे। राज्य की विकासात्मक संभावनाओं पर एक शार्ट फिल्म का प्रजेंटेशन भी किया जायेगा। कॉन्क्लेव में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी होगा।   recent visitors 36

विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट की यूनिट ने लगातार 200 दिन उत्पादन का बनाया नया रिकार्ड

भोपाल मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट की यूनिट नंबर 5 ने 200 दिन लगातार विद्युत उत्पादन करने नया रिकार्ड बनाया। इससे पूर्व इस यूनिट ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में 178 दिन लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड दर्ज किया था। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने संजय गांधी ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 के अभियंताओं व कार्मिकों को बधाई दी। उन्होंने यूनिट के अभियंताओं व कार्मिकों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, कड़ी मेहनत व प्रतिबद्धता से लक्ष्य अर्जित करने का यह सर्वश्रेष्ठ व अनुकरणीय उदाहरण है। संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने इस वर्ष 17 मई से लगातार संचालित रहते हुए गत दिवस 200 दिन लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। यूनिट ने 98.09 फीसदी प्लांट उपलब्धता फेक्टर (पीएएफ), 93.75 फीसदी प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) व यूनिट ने 5.81 प्रतिशत की ऑक्जलरी कंजम्पशन (एपीसी) की उपलब्धि हासिल की। यह यूनिट वर्तमान में भी सतत् विद्युत उत्पादन कर रही है। यह यूनिट 27 अगस्त 2008 को क्रियाशील हुई थी। 500 मेगावाट की इकाई ने पिछले वर्ष बनाया था अधिकतम विद्युत उत्पादन का रिकार्ड संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता कि इकाई क्रमांक पांच ने पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल 3927.6 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन एवं 89.7 प्रतिशत पीएलएफ अर्जित करते हुए अभी तक का सर्वाधिक विद्युत उत्पादन व सर्वाधिक पीएलएफ अर्जित करने का रिकार्ड कायम किया था। यूनिट की कुल विशिष्ट तेल खपत 0.24 मिलीलीटर प्रति यूनिट रही थी जो कि अभी तक की न्यूनतम तेल खपत है।   recent visitors 107

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को दी जानकारी

पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना के "मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट" पर सहमति  पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी परियोजना के  "मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट" पर हस्ताक्षर की सहमति बन गई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को दी जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना के "मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग" के बाद अब उसके "मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट" पर हस्ताक्षर की सहमति बन गई है। योजना की प्रशासकीय स्वीकृति के लिए मंत्रि-परिषद के समक्ष संक्षेपिका 15 दिवस में प्रस्तुत की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रि-परिषद की बैठक के पूर्व मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की 75 हजार करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से प्रदेश के 11 जिले गुना, शिवपुरी, सीहोर, देवास, राजगढ़, उज्जैन, आगर मालवा, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर और मुरैना के 2094 गांवों में लगभग 6 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। साथ ही पेयजल एवं औद्योगिक आपूर्ति के लिए जल भी उपलब्ध होगा। योजना में मध्यप्रदेश में 21 बांध एवं बैराज बनाए जाएंगे। योजना अंतर्गत प्रदेश में कराए जाने कार्यों की लागत लगभग 36 हजार 800 करोड़ रुपए है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के लाखों किसानों का जीवन बदलेगा। उन्हें न केवल सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा, अपितु संबंधित क्षेत्र में पर्यटन और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश की 17 परियोजनाएं एवं राजस्थान की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना शामिल हैं। परियोजना की कुल लागत 72 हजार करोड़ रूपए प्रस्तावित है। परियोजना के क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश के कुल लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर नवीन क्षेत्र में सिंचाई एवं पेयजल व उद्योगों के लिए लगभग 172 मि.घ.मी. जल का प्रावधान किया गया है। परियोजना से लगभग 40 लाख परिवार लाभांवित होंगे। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना में मध्यप्रदेश से प्रारम्भ होने वाली पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, क्षिप्रा एवं सहायक नदियों के जल का अधिकतम उपयोग किया जायेगा। परियोजना के अंतर्गत श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स में 04 बांध (कटीला, सोनपुर, पावा एवं धनवाड़ी), 02 बैराज (श्यामपुर, नैनागढ), कुम्भराज कॉम्पलेक्स में 02 बांध (कुम्भराज-1 एवं कुम्भराज-2) तथा रणजीत सागर, लखुंदर बैराज एवं ऊपरी चम्बल कछार में 07 बांध (सोनचिरी, रामवासा, बचेरा, पदुनिया, सेवरखेडी, चितावद तथा सीकरी सुल्तानपुरा) शामिल हैं। इसके अलावा गांधी सागर बांध की अपस्ट्रीम में चंबल, क्षिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे बांधों का निर्माण भी प्रस्तावित है। राज्य शासन की यह एक बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। केन्द्र सरकार के सहयोग से बनने वाली इस परियोजना का कार्य आगामी 05 वर्ष में पूर्ण कर लिया जाएगा। परियोजना अंतर्गत कुल 21 बांध, बैराज एवं बैलेंसिंग रिजर्वायर आदि का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही परियोजना में मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के मध्य मौजूदा चंबल दायीं मुख्य नहर (CRMC) एवं मध्य प्रदेश क्षेत्र में CRMC सिस्टम को अंतिम छोर तक नवीकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु प्रावधान रखा गया है, जिससे मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिण्ड जिलों को सिंचाई एवं पेयजल हेतु आवंटित जल प्राप्त हो सकेगा। जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के मंत्री, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री और दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव एवं सचिव की उपस्थिति में दिनांक 28 जनवरी 2024 को परियोजना की डी.पी. आर. तैयार करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश की श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स की 06 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण, भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी है। शेष परियोजनाओं की डीपीआर विभिन्न स्तरों पर प्रक्रियाधीन है। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना सह पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का भारत सरकार से प्राप्त ड्राफ्ट समझौता अनुबंध (MOA) को मध्य प्रदेश शासन द्वारा संशोधन उपरांत भारत सरकार को 25 अक्टूबर 2024 को प्रेषित कर अनुरोध किया गया था कि मध्यप्रदेश के बिन्दुओं (कार्यों) को MOA में समावेश कर अंतिम रूप दिये ड्राफ्ट समझौता अनुबंध (MOA) को मध्य प्रदेश शासन को भेजें, जिससे अंतिम ड्राफ्ट (MOA) पर शासन से अनुमोदन प्राप्त किया जा सके।   recent visitors 40

निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित कार्यशाला संपन्न : मंत्री सिंह

लोक निर्माण से लोक कल्याण नवाचार हमारी ताकत, पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ इन्हें लागू करें : मंत्री सिंह निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित कार्यशाला संपन्न भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन प्रशासनिक अकादमी में किया गया। इस दौरान अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता एमडी एमपीआरडीसी अविनाश लावनिया,एमडी एमपीबीडीसी डॉ पंकज जैन,ईएनसी पीडब्ल्यूडी केपीएस राणा, ईएनसी (भवन) एसआर बघेल एवं ईएनसी भवन विकास निगम अनिल श्रीवास्तव सहित विभाग के अन्य सभी मुख्य अभियंता, वरिष्ठ अधिकारी एवं इंजीनियर उपस्थित रहे। विभाग में नवाचार,पारदर्शिता और सामूहिकता से बढ़ेगी कार्यक्षमता  लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में नवाचार, पारदर्शिता और सामूहिकता की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा “नवाचार हमारी ताकत है हमें नवाचार के साथ समरस होकर कार्य करना चाहिए।”  मंत्री सिंह ने कहा कि “विकसित प्रदेश से विकसित भारत” की परिकल्पना को साकार करने में इंजीनियर्स की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “हम सभी भाग्यशाली हैं कि हमें ‘लोक निर्माण से लोक कल्याण’ की भावना को मूर्त रूप देने का अवसर मिला है। विभाग को अधिक जनहितैषी बनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।” मंत्री सिंह ने विभाग में नए आने वाले इंजीनियर्स को प्रेरित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी नवाचारों के माध्यम से विभाग को और अधिक सक्षम बना सकती है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे हमारे युवा इंजीनियरों की नई सोच को समझें और अगर कोई सुझाव उपयोगी हो तो उसे अपनाएं। हमारे निर्णय सही होने के साथ सही दिखना भी चाहिए  निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीक व्हाइट टॉपिंग पर चर्चा के दौरान कुछ इंजीनियर ने सुझाव दिया कि व्हाइट टॉपिंग के लिए सड़कों का चुनाव करते समय परफॉर्मेंस गारंटी की सड़कों को भी सम्मिलित किया जा सकता है क्योंकि व्हाइट टॉपिंग के लिए ऐसी सड़के चाहिए जिनकी बुनियाद या क्रस्ट मजबूत हो। इस बात पर मंत्री सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमारे निर्णय सही होने के साथ-साथ सही दिखने भी चाहिए। यदि तकनीकी रूप से ऐसा करना आवश्यक है तो इस आशय की सूचना सार्वजनिक रूप से जारी कर इस आवश्यकता को प्रचारित करना बेहतर होगा। अपने निर्माण कार्य को गर्व के साथ प्रचारित करें  मंत्री सिंह ने विभाग के अधिकारियों और इंजीनियर्स को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें अपने निर्माण कार्यों के प्रति स्वामित्व का भाव रखते हुए पूरी जिम्मेदारी के साथ सामने आना चाहिए और गर्व से कहना चाहिए कि निर्माण हमने किया है। भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। कार्य की पूर्णता और सफलता तब होती है जब उसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया जाए।”  मंत्री सिंह ने सड़कों और संरचनाओं की गुणवत्ता पर जोर देते हुए कहा, “जो संरचनाएं हम बनाते हैं, उन पर पीढ़ियां चलती हैं। हमें गर्व होना चाहिए कि हम ऐसा काम कर रहे हैं जो लंबे समय तक समाज के लिए उपयोगी साबित हो।”  मंत्री सिंह ने विभागीय कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संवाद बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा, “हमारे अच्छे कार्य संवाद के अभाव में जनता तक नहीं पहुँच पाते हैं। हमें अपने कार्यों की जानकारी लोगों तक प्रामाणिकता के साथ पहुंचानी चाहिए।” मानक निविदा दस्तावेज पर हुई वृहद चर्चा विभाग में पहली बार ऐसा हुआ कि निविदा दस्तावेज पर इतने व्यापक स्तर और एक बड़े मंच पर गहन चर्चा की गई है। मानक निविदा दस्तावेज में सुधार की संभावनाओं को तलाशने के लिए अन्य राज्यों में प्रचलित निर्माण कार्यों के निविदा दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया गया। मंत्री राकेश सिंह के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग से तीन अध्ययन दल महाराष्ट्र, तेलंगाना और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भेज कर निविदा शर्तों का अध्ययन कराया गया। इन दलों से प्राप्त सुझावों को कार्यशाला में सम्मिलित करते हुए इन पर विस्तार से चर्चा की गई। निविदा पत्र दस्तावेज में प्रस्तावित संशोधनो पर सार्थक चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि सभी निर्माण विभागों के लिए एक मानक निविदा दस्तावेज वर्ष 2014 में तैयार किया गया था। कालांतर में हुए तकनीकी विकास और नियमों में परिवर्तन के कारण इस दस्तावेज में अनेक सुधारो की गुंजाइश है। आज की आवश्यकताओं के अनुरूप मानक निविदा दस्तावेज को संशोधित कर निर्माण कार्यों को और अधिक पारदर्शी,गुणवत्तापूर्ण एवं अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।   निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने हेतु कार्यशाला में निविदा दस्तावेज में सुधार हेतु अनेक सुझाव प्राप्त हुए जिनमें मुख्य सुझाव इस प्रकार हैं:         2 करोड़ से अधिक लागत वाली सभी निविदाओं में प्रीक्वालिफिकेशन शर्तें लागू की जाएं पूर्व में यह सीमा 5 करोड़ थी।         अनुमानित लागत के 20% के बराबर के तीन कार्यों के अनुभव के स्थान पर 40% के तीन कार्यों को रखाजाए।         निविदाकर्ता के पास उपलब्ध मानव संसाधन और उपकरणों के लिए न्यूनतम शर्ते जोड़ी जाए।         2 करोड़ से अधिक के सड़क निर्माण कार्यों के लिए निर्माण स्थल पर गुणवत्ता परीक्षण लेब की स्थापना अनिवार्यकी जाए।         अव्यावहारिक दरें डालकर टेंडर प्राप्त की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए 80 प्रतिशत से कम दरें डालने वाले निविदाकर्ताओ से अंतर की दोगुनी परफॉर्मेंस गारंटी ली जाए। साथ ही बैंक गारंटी के स्थान पर फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट के माध्यम से परफॉर्मेंस सिक्योरिटी ली जाए।         क्षमता से अधिक कार्यों के ठेके लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए बिड कैपेसिटी संबंधी शर्तों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।         निविदाकर्ता के पास बैच मिक्स प्लांट, डब्लू एम एम मिक्स प्लांट एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता संबंधी शर्त जोड़ी जाए।         गुणवत्ता नियंत्रण हेतु समय-समय पर किए जाने वाले परीक्षणों, डामर की गुणवत्ता, आदि से संबंधित शर्तें भी जोड़ी जाए।  इसी प्रकार कंसलटेंट के चयन हेतु निर्धारित निविदा दस्तावेज पर भी अनेक सुझाव प्राप्त हुए जिसे कंसलटेंट एजेंसी और नियुक्त इंजीनियरिंग स्टॉफ की गुणवत्ता में सुधार हो सके।  मंत्री सिंह राकेश सिंह ने इन सभी सुझावों के अनुसार निविदा दस्तावेज में सुधार करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।  मानक निविदा दस्तावेज में सुधार की यह प्रक्रिया न केवल कार्यकुशलता को बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि ठेकेदारों से होने वाले विवादों को … Read more

5 दिसम्बर गुरुवार को होने वाला जनदर्शन स्थगित

रायपुर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में 5 दिसम्बर गुरूवार को प्रस्तावित जनदर्शन कार्यक्रम अपरिहार्य कारणों से स्थगित हो गया है। recent visitors 53

किसान ओरिजनल की जगह डुप्लीकेट खाद खरीदने को मजबूर

किसान ओरिजनल की जगह डुप्लीकेट खाद खरीदने को मजबूर अन्नदाता के खेत ताव पर सरकार खाद की पूर्ति नही कर पा रही बमीठा राजनगर तहसील में अन्नदाताओं किसानों को वेयर हाउस, सोसायटियों से खाद नहीं मिल रहा व्यापारियों द्वारा डुप्लीकेट खाद की बिक्री जोरो पर की जा रही है अन्नदाताओं के खेत ताव पर है लेकिन सरकार उन्हें खाद उपलब्ध कराने में अक्षम है किसान मजबूर हो कर डुप्लीकेट के खाद ख़रीने को मजबूर हैं व्यापारी किसान की मजबूरी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं राजनगर क्षेत्र में किसानों को एन पी के 123206 डुप्लीकेट खाद बेचा जा रहा है किसानों ने इस खाद को खेत मे डाल कर बोनी कर दी 5-,6के बाद फसल उग आई लेकिन खाद अभी तक नहीं घुली यह खाद घुलनशील नहीं है डुप्लीकेट खाद से किसानों की मेहनत पर पानी व्यापारी फेर रहे हैं 7सात सौ की बारी 15 सौ रुपये में बेच कर मुनाफा कमा रहे हैं क्षेत्र में खाद की किल्लत ज्यादा ही है डुप्लीकेट खाद बेकवाने में व्यापारी नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों को संभाल कर धंधा करते हैं सभी को नजराना भेट किया जाता है कहावत चरितार्थ है जब काजल नही होता तो लुगर अंजा जाता है वर्तमान में अन्नदाता किसानों की स्थिति ऐसी ही है अब देखना है क्या डुप्लीकेट खाद बेचने वाले व्यापारियों पर कोई कार्यवाही होनी या अन्नदाता किसान ठगते रहेंगे शुभांशु शुक्ला खजुराहो*।। recent visitors 46