वैक्यूम ट्यूब और प्रेशराइज्ड व्हीकल तकनीक से न्यूयॉर्क-लंदन का सफर मात्र 54 मिनट में होगा पूरा, 19 ट्रिलियन डॉलर का सपना होगा पूरा?

वॉशिंगटन अमेरिका और यूके के बीच हवाई यात्रा करने में 8 घंटे का समय लगता है। लेकिन कल्पना कीजिए यह यात्रा आप एक ही घंटे में पूरी कर सकें। एक प्रस्तावित ट्रांसअटलांटिक टनल न्यूयॉर्क और लंदन को जोड़ेगी और यह भविष्य की एक शानदार योजना हो सकती है। 4828 किमी लंबी ट्रांस-अटलांटिक ट्रेन सुरंग बनाने का कॉन्सेप्ट सामने आया है। संभव है कि किसी दिन टेक्नोलॉजी इतनी आगे पहुंच जाए कि यह कॉन्सेप्ट सच हो जाए। यह प्रस्ताव नया नहीं है, लेकिन इसके निर्माण की लंबाई और आवश्यक धनराशि के कारण इसे एक बार असंभव माना गया था। वैक्यूम ट्यूब टेक्नोलॉजी से लेकर प्रेशर व्हीकल का विकास हुआ है। ऐसे में एक बड़ी कीमत के साथ यह कॉन्सेप्ट सच साबित हो सकता है। हवाई यात्रा से दोनों शहरो के बीच 8 घंटे के सफर की तुलना में सिर्फ 54 मिनट का सफर पूरा करना बेहद आकर्षक लग सकता है। लेकिन इसकी लागत ही सुरंग बनने के रास्ते का रोड़ा है। बनाने में कितना आएगा खर्च इस सुरंग की अनुमानित लागत 19.8 ट्रिलियन डॉलर है। फ्रांस और इंग्लैंड को जोड़ने वाली चैनल टनल 37.8 किमी लंबी है, जो छह साल में बनकर तैयार हुई। लेकिन न्यूयॉर्क और लंदन को जोड़ने वाली इस सुरंग को बनाने में बहुत अधिक समय और धन लगेगा। यह पर्यावरण के अनुकूल भी हो सकता है और हवाई यात्रा से होने वाले भारी वायु प्रदूषण में कटौती कर सकता है। वहीं जिस तरह की ट्रेनों का कॉन्सेप्ट दिया गया है उसके रास्ते में हवा प्रतिरोध नहीं होगा, जिस कारण इसकी गति 4828 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। वैक्यूम के कारण तेज चलेगी ट्रेन? यह टेक्नोलॉजी सुपरलूप ट्रेनों की तरह है, जिसका स्विस इंजीनियरों ने परीक्षण किया और दावा किया कि यह यात्रा का भविष्य बदल सकता है। वर्षों से कई और लोगों ने हाइपरलूप ट्रेन विकसित करने की कोशिश की है, जिसमें नाकामयाबी मिली है। सबसे बड़ी बाधा वैक्यूम सिस्टम, कैप्सूल प्रोपल्शन सिस्टम, स्केलेबिलिटी, सुरक्षा और आर्थिक व्यवहार्यता को बनाए रखना शामिल है। recent visitors 57

इंदौर-खंडवा हाईवे 70% बन चुका, 30 फीसद निर्माण बाकी, एनएचएआइ डेडलाइन बढ़ाने की तैयारी की तैयारी में

 इंदौर  इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का निर्माण पूरी होने की मियाद जनवरी में खत्म होगी, लेकिन अभी तक सुरंग और सड़क का काम पूरा नहीं हुआ है। लगभग तीस फीसद काम होना बाकी है। अब इसके लिए प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ाने पर विचार होने लगा है। निर्माण एजेंसी की तरफ से प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने फाइल को मुख्यालय भेजा है। अधिकारियों के मुताबिक तीन से छह महीने की अवधि बढ़ाई जाएगी। वैसे काम तेज करने के लिए निर्माण एजेंसी को निर्देश जारी कर दिए है। जनवरी 2025 तक इसे पूरा किया जाना था 216 किमी लंबे राजमार्ग का काम अगस्त 2022 में शुरू किया गया। प्रोजेक्ट को जनवरी 2025 तक पूरा होना था। जमीन अधिग्रहण, सुरंग व अप्रोच रोड निर्माण के दौरान ग्रामीणों से विवाद, दो से तीन बार प्रोजेक्ट में बदलाव ने निर्माण कार्यों गति धीमी कर दी। इधर भवरकुआं से लेकर तेजाजी के बीच सड़क का हिस्सा बन चुका है। इन दिनों तेजाजी से सिमरोल के बीच सड़क, अंडरपास, फ्लाइओवर का काम किया जा रहा है। भेरूघाट के पास जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बाकी उमरीखेडा वनक्षेत्र से 0.80 हेक्टेयर जमीन की प्रक्रिया अक्टूबर में पूरी हुई है। इतने हिस्से में सड़क अधूरी हो, जो नवंबर से बनाना शुरू की है। इसके अलावा भेरूघाट के पास 800 मीटर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया होना बाकी है। जमीन के बदले किसानों को मुआवजा दिया जाना है। यह काम जनवरी तक होगा। सिमरोल से चोरल के बीच भी सड़क पूरी नहीं हो पाई है। जबकि चोरल और बड़वाह के बीच भी कुछ हिस्सों में काम रुका है। फिलहाल मेघा इंजीनियरिंग की तरफ से मियाद बढ़ाने पर जोर दिया है। सुरंग फरवरी तक होगी पूरी राजमार्ग पर तीन सुरंग बनाई जाएगी, जो तलाई-भेरुघाट और चोरल में 1300 मीटर की रखी है। सुरंग की अप्रोच फरवरी तक पूरी होगी। साथ ही सुरंग के भीतर भी काफी काम बचा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अक्टूबर में अप्रोच रोड के लिए ब्लास्टिंग करने पर विवाद हुआ था। उसके बाद महीनेभर सुरंग के आसपास का काम बंद था। इसका असर प्रोजेक्ट की अवधि पर पड़ा है। वैसे अप्रोच के लिए माउंट ड्रील मशीन बुलवाई है। इससे खोदाई करने पर एजेंसी को तीन से चार महीने का अतिरिक्त समय लग रहा है। मार्च तक देंगे मोहलत     इंदौर-खंडवा राजमार्ग की डेडलाइन नजदीक आ चुकी है। निश्चित ही प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अवधि बढ़ाना पड़ेगी। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। फाइल को मुख्यालय भेजा गया है। –     सुमेश बांझल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई   recent visitors 176

इन पांच प्राणियों को खिलाएं खाना, रहेगी स्थिर लक्ष्मी

हमारें जीवन में कई उतार चढ़ाव आते है जिससे की लोग बहुत दुखी होते है और कुछ लोग उस समस्या का निजात निकाल कर उससे निकल जाते है। इस दुनिया में बहुत कम लोग है जो अपने जीवन से खुशी है। किसी न किसी को की न कोई समस्या है। अमीर के पास धन होते हुए भी और धन की ललसा और एक गरीब के पास धन न होते हुए सिर्फ पेट की भुख मिटाने तकी ललसा। हम माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए क्या नही करते है। तरह-तरह के उपाय अपनाते है जिससे कि माता लक्ष्मी हमारे घर से कभी न जाएं। हिंदू धर्म के शास्त्रों में कई ऐसे उपाय बताए गें है जिनका आमरण करे तो हम सफलता ही हर ऊचांई को छूते चले जाएगे। शास्त्रों में दी गई बातें हमें कभी निराश नही कर सकती है। इसी प्रकार शास्त्रों में भोजन के बारें में की बातें बताई गई है। इसके अनुसार जब भोजन करते है तो उससे पहले हमें इन लोगों के लिए भोजन जरूर निकालना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से माता लक्ष्मी हमारें घर से कभी नही जाएगा। एक उपाय तो ये है कि हम अपनी मेहनत से और स्वयं की समझदारी से इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास करें और दूसरा उपाय यह है कि हम धार्मिक कर्म करें। शास्त्रों में पांच लोग ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें खाना खिलाने से हमारे जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। जानिए वह कौन पांच लोग है। जिससे आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी। गाय को खिलाएं रोटी हिंदू धर्म में गाय को माता समान माना जाता है। यह पुज्नीय भी है। हमारें शास्त्रों में कहा गया है कि जब भी हम खाना बनाएं उसके बाद सबसे पहले एक रोटी गाय को खिलाएं। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी गाय को रोटी या हरी घास रोज खिलाता है तो उसे जल्द ही कोई अच्छा फल मिलता है साथ ही कई गुना पुण्य भी मिलता है। साथ ही कुंडली में लगे कई दोष ही शांत हो जाते है। और घर में माता लक्ष्मी का वास हो जाता है। इसलिए एक रोटी जरुर खिलाना चाहिए। कुत्तें को खिलाएं रोटी अगर आपको अपने शत्रु का भय सता रहा हो जिसके कारण आप उससे डर कर रह रहे है। तो रोज एक रोटी कुत्ते को खिलाएं। इससे आपका शत्रु का भय खत्म हो जाएगा। और आप निडर हो कर रह सकेगे। साथ ही अगरा पकी कुंडली में शनि का दोष है तो शिवार के दिन काले रंग के कुत्तें को रोटी खिलाएं। इससे आपको जल्द फायदा मिलेगा। और शनि दोष शांत होगा। माता लक्ष्मी आपके घर हमेशा के लिए आ जाएगी। मछली को खिलाएं आटे की गोली शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि अगर आपकी पुरानी संपत्ति हाथ से निकल गई हो या फिर कोई मुल्यवान चीज खो गई हो तो रोज तालाब या नदी में जाकर मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं। ऐसा करने से आपकी पुरानी संपत्ति वापस मिल जाएगी। साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। जिसके कारण आपके घर में कभी भी धन की कमी नही होगी। साथ ही आपको अक्षय पुण्य की प्राप्त होगा। चीटियों को डालें आटा अगर आप बहुत ज्यादा परेशान है। आपको हर काम में असफलता मिल रही है जिसके कारण आप कर्ज में डूबते चले जा रहे है। जिसके कारण आप तनाव में चले जाते है। शास्त्रों में माना जाता है कि अगर आप अपने घर में निकलने वाली चीटियों को आटा या चीनी डालेगे। जो इससे आपको अधिक फायदा होगा। इससे हमें सभी कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही घर में कभी भी धन की कमी नही होगी। पक्षियों को खिलाएं अनाज शास्त्रों के अनुसार माना गया है कि अगर आपके घर में आर्थिक लाभ न हो रहा हो। हर काम में असफलता प्राप्त हो रही हो तो इस समस्या से निजात आपको पक्षी दिला सकते है। इसके लिए रोज पक्षियों को दाना डालें जिससे महालक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। और काम में आपको सफलता प्राप्त होगी।   recent visitors 81

पीएम जन-मन में पीवीटीजी बहुल 360 गांवों की 432 बसाहटों में नल से स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की तैयारी – मंत्री शाह

भोपाल प्राणवायु के बाद स्वच्छ जल सबकी बुनियादी जरूरत है। राज्य सरकार 'हर घर नल से जल' योजना में सबको स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिये प्रयासरत है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की बसाहटों में भी विशेष प्राथमिकता से 'नल से स्वच्छ पेयजल' आपूर्ति की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रदेश में निवासरत बैगा, भारिया एवं सहरिया जनजातियों (पीवीटीजी) की बहुलता वाले 11 जिलों के 360 गांवों की 432 प्रबल पीवीटीजी बसाहटों में यह काम तेजी से जारी है। राज्य सरकार इन बसाहटों में रहने वाले 5 हजार 783 पीवीटीजी परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन देकर सामुदायिक रूप से स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की स्थायी व्यवस्था कर रही है। इन सभी बसाहटों में फिल्हाल तेजी से काम जारी है, जिसे 31 दिसम्बर 2024 तक पूर्ण कर लिया जायेगा। इस पूरे काम में 60 करोड़ 19 लाख 95 हजार रूपये व्यय किये जा रहे हैं। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि पीवीटीजी समुदाय के सभी जनजातीय बंधुओं को 'नल से जल' उपलब्ध कराने के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। सबको स्वच्छ जल प्रदान करने के लिये लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग योजनाबद्ध रूप से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि पीएम जन-मन योजना में उमरिया जिले के सर्वाधिक 91 गांवों की 102 पीवीटीजी बसाहटों, मंडला जिले के 61 गांवों की 61 बसाहटों, अनूपपुर जिले के 55 गांवों की 57 बसाहटों, छिंदवाड़ा जिले के 41 गांवों की 73 बसाहटों, शहडोल जिले के 38 गांवों की 39 बसाहटों, विदिशा जिले के 26 गांवों की 50 बसाहटों, डिंडोरी जिले के 22 गांवों की 24 बसाहटों, सीधी जिले के 13 गांवों की 13 बसाहटों, बालाघाट जिले के 8 गांवों की 8 बसाहटों, छिंदवाड़ा जिले के 4 गांवों की 4 बसाहटों तथा नरसिंहपुर जिले के 1 गांव की 1 पीवीटीजी बसाहट में हर घर नल से स्वच्छ जल आपूर्ति के लिये तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि पीएम जन-मन में पीएचई ने 3 हजार 928 पीवीटीजी बहुल गांवों की 5 हजार 161 बसाहटों में हर घर नल से स्वच्छ जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त पीएचई द्वारा अन्य योजना से 3 लाख 15 हजार 82 परिवारों को नल से स्वच्छ जल प्रदान कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इनमें से एक लाख 56 हजार 600 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन दे दिये गये हैं। शेष 1 लाख 58 हजार 391 परिवारों को नल से जल प्रदाय के लिये मैदानी अमला मिशन मोड पर काम कर रहा है।   recent visitors 58

भुराडाबरा, पालेड़ी और भंवरपिपलिया में आठ किसानों के खेतों में स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए, किसानों ने एक नई दिशा में कदम रखा

भोपाल मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में जब पारम्परिक खेती से आगे बढ़ने की बात आई, तो जनजातीय किसानों ने एक नई दिशा में कदम रखा। जिले के प्रगतिशील किसान रमेश परमार और साथी अन्य किसानों ने अपनी हिम्मत, मेहनत और नवाचार से असंभव को संभव बना दिया है। पारम्परिक खेती से उद्यानिकी की ओर जिले के जनजातीय बहुल क्षेत्र में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रयोग शुरू हुआ। परम्परागत रूप से ज्वार, मक्का और अन्य सामान्य फसलों के लिए जाने जाने वाले इस इलाके में अब किसानों ने उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया है। जिले के रामा ब्लॉक के तीन गांवों भुराडाबरा, पालेड़ी और भंवरपिपलिया में आठ किसानों के खेतों में स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए गए। झाबुआ में, स्ट्रॉबेरी सामान्यतः ठंडे इलाकों की फसल है, को यहां अनुकूलित परिस्थितियों में उगाने का प्रयोग किया गया। महाराष्ट्र के सतारा जिले से 5000 पौधे मंगवाकर हर किसान के खेत में 500 से 1000 पौधे लगाए गए। हर पौधे की कीमत मात्र 7 रुपये थी, लेकिन इसे उगाने की प्रक्रिया ने किसानों को बागवानी की उन्नत और आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया। रोटला गांव के रमेश परमार ने अपने खेत में ड्रिप और मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर 1000 स्ट्रॉबेरी पौधे लगाए। वे बताते हैं कि "पहले बाजार में इन फलों को देखा था, लेकिन खरीदने की हिम्मत कभी नहीं हुई। अब जब खुद के खेत में उगाए, तो इसका स्वाद भी चखा और इसकी उच्च कीमत का महत्व भी समझा।" रमेश ने 8 अक्टूबर 24 को पौधों की बुवाई की थी और केवल तीन महीनों में फलों की पैदावार शुरू हो गई। वर्तमान में बाजार में स्ट्रॉबेरी की कीमत 300 रुपये प्रति किलो है। फिलहाल उन्होंने अपनी पहली फसल घर के सदस्यों और रिश्तेदारों के साथ बांटी है। समूह की सफलता रमेश अकेले नहीं हैं। उनके साथ अन्य किसान भंवरपिपलिया के लक्ष्मण, भुराडाबरा के दीवान, और पालेड़ी के हरिराम ने भी अपनी जमीन पर स्ट्रॉबेरी उगाई है। सभी किसानों के पौधों में फल लगने शुरू हो गए हैं। ये किसान अपनी उपज को लोकल हाट-बाजार और हाईवे के किनारे बेचने की योजना बना रहे हैं। नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक झाबुआ जिले की यह पहल न केवल कृषि नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की ओर एक ठोस कदम भी है। यह झाबुआ जिले के जनजातीय किसानों ने साबित किया है कि सही मार्गदर्शन, तकनीक और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में अपार संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं। आर्थिक और सामाजिक बदलाव की ओर बढ़ रहे जनजातीय किसान स्ट्रॉबेरी की खेती से न केवल इन किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। यह पहल झाबुआ जिले के लिए उद्यानिकी खेती का एक नया अध्याय खोलेगी। झाबुआ के जनजातीय किसान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े बदलाव की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।   recent visitors 65

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। साय ने उनकी रचनाओं के आम जीवन पर प्रभाव को याद करते हुए कहा कि मैथिलीशरण गुप्त जी की राष्ट्रीय और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत खड़ी बोली की रचनाओं ने भारतीय समाज के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी रचनाओं के प्रभाव को देखते हुए  उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि प्रदान की गई थी। उन्होंने खड़ी बोली को काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नये कवियों को काव्यलेखन के लिए प्रेरित किया। गुप्त जी को उनके कालजयी साहित्य के लिए पद्मभूषण सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुप्त जी की रचनाएं भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं जो नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करती रहेगी। recent visitors 60

मध्य प्रदेश वालों कड़ाके की ठंड के लिए हो जाओ तैयार, अब शीत लहर से होगा सामना; येलो अलर्ट जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ने वाली है। मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। पिछले 24 घंटों का मौसम देखें तो प्रदेश के सभी संभागों के जिले का मौसम शुष्क रहा। रायसेन, राजगढ़, धार, जबलपुर, सिवनी, सागर, पचमढ़ी (नर्मदापुरम), नीमच, में शीत लहर का प्रभाव रहा। वहीं शाजापुर में तीव्र शीत लहर का प्रभाव रहा। भोपाल, राजगढ़, इंदौर, शाजापुर, उज्जैन, बैतूल, रायसेन और नीमच जिलों का दिन ठंडा रहा। मौसम विभाग ने बताया है कि पश्चिमोत्तर भारत के ऊपर मध्य समुद्र तल से 12.6 किमी की ऊंचाई पर 240 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से सब- ट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही हैं। पश्चिमी विक्षोभ मध्य क्षोभमंडलीय पछुआ पवनों के मध्य एक ट्रफ के रूप में मध्य समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई 70 डिग्री पूर्वी देशांतर व 33 डिग्री उत्तरी अक्षांश के उत्तर में अवस्थित है। प्रदेश के जिलों का तापमान प्रदेश में नर्मदापुरम, जबलपुर, शहडोल संभागों के जिलों में विशेष रूप से गिरा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रीवा, सागर संभागों के जिलों का तापमान ज्यादा गिरा। शेष सभी संभागों के जिलों के तापमानों विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। पचमढ़ी का तापमान 3.5, रायसेन 3.6, शाजापुर 4.1, राजगढ़ 5.0, शिवपुरी 5.3, सीधी 12.6, खरगोन, देवास 12.0, सिंगरौली, छिंदवाड़ा 10.9, उज्जैन, सिवनी 10.0 रहा। इन जिलों में शीतलहर का अलर्ट मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर जिलों में शीत लहर और ठंड दिन का अलर्ट जारी किया है। वहीं विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, धार, आगर, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, दमोह, और सागर जिले में शीत लहर का अलर्ट जारी किया है। बृहस्पतिवार को भी दिल्ली एनसीआर में रहेगी शील लहर जैसी स्थिति मौसम विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को दिल्ली-एनसीआर में शीत लहर की स्थिति रह सकती है। इसलिए मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। दिल्ली में बृहस्पतिवार को न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार सुबह दिल्ली में न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस हुआ दर्ज, जो सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम है। कैसे आंकी जाती है शीत लहर? आया नगर में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस कम है। इस वजह से आया नगर में ठंड ज्यादा रही। दिल्ली में अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। स्काईमेट वेदर के विशेषज्ञ महेश पलावत ने बताया कि न्यूनतम तापमान सामान्य से साढ़े चार डिग्री सेल्सियस कम हो तो शीत लहर माना जाता है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम रहा है। इस वजह से दिल्ली के कई इलाकों शीत लहर रही। दूसरी ओर दिल्ली के एयर इंडेक्स में पिछले दिन के मुकाबले आंशिक सुधार हुआ है। फिर भी हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रही। दिल्ली का AQI 207 दर्ज केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण (सीपीसीबी) के अनुसार बुधवार सुबह दिल्ली का एयर इंडेक्स 207 दर्ज किया गया। स्विस कंपनी के एप आइक्यूएयर ने सुबह में दिल्ली का एयर इंडेक्स 203 बताया। हवा चलने और आसमान साफ होने के कारण दोपहर में एयर इंडेक्स में सुधार होने की संभावना है। recent visitors 71