Tuesday, July 7, 2026 12:50 am

सरकार ने जारी किया नया आदेश, अब रजिस्ट्री में भूमि पर वृक्ष का नहीं होगा मूल्यांकन

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने लोगों को वृक्षों वाली भूमि के कारण रजिस्ट्री में होने वाली परेशानी से बचाने के लिए नया आदेश जारी किया है. अब रजिस्ट्री में भूमि पर वृक्ष का मूल्यांकन नहीं होगा, इससे रजिस्ट्री शुल्क के साथ पटवारी के पास चक्कर लगाने से मुक्ति मिल जाएगी. बता दें कि अब तक भूमि पर लगे वृक्ष का भी रजिस्ट्री के दौरान हिसाब देना होता था. इसमें सागौन, सरई जैसे मूल्यवान लकड़ियों के पेड़ों के लिए दर निर्धारित थी, जो भूमि के गाइडलाइन रेट में जुड़ जाती थी. इस कवायत से रजिस्ट्री शुल्क में वृद्धि तो होती ही थी, लेकिन उससे ज्यादा परेशानी पटवारियों के पास बिना वृक्ष की भूमि के प्रमाणपत्र बनाने में होती थी. पटवारी इस छोटी सी कवायद के लिए बार-बार चक्कर लगाते थे, और आखिर में लेन-देन से ही बात बनती थी. recent visitors 40

रिपोर्ट : भारत में लगातार बेहतर परफॉर्म करने वाली कंपनियों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर

 नई दिल्ली भारत ने ग्लोबल लेवल पर अपनी आर्थिक ताकत का मजबूत प्रदर्शन किया है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगातार बेहतर परफॉर्म करने वाली कंपनियों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है. ये भारतीय स्टॉक मार्केट के साथ ही देश के बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत का भी सबूत है. रिपोर्ट के मुताबिक 39 भारतीय कंपनियों ने बीते 20 साल में अपनी बुक वैल्यू में लगातार इजाफा किया है, इनमें 7 कंपनियों का परफॉर्मेंस बेहद शानदार रहा है. भारतीय कंपनियों ने 2008 की ग्लोबल इकोनॉमिक मंदी और कोविड-19 महामारी के बावजूद बेहतरीन प्रदर्शन किया है. चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियों का जोरदार परफोरमेंस रिपोर्ट बताती है कि इन भारतीय कंपनियों ने अपनी मजबूत फाइनेंशियल सेहत और मैनेजमेंट क्षमता के चलते लंबे समय तक स्टेबिलिटी बनाए रखी है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक से ज्यादा समय से भारतीय कंपनियां इक्विटी पर लगातार 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दे रही हैं. 75 फीसदी से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थितियों में भी पॉजिटिव बुक वैल्यू दर्ज की है. किसी कंपनी की बुक वैल्यू में लगातार बढ़ोतरी बताती है कि वो अपने इन्वेस्टर्स को लंबे समय तक हाई रिटर्न देने की क्षमता रखती है. ये रिपोर्ट इस बात का भी संकेत देती है कि भारतीय इकोनॉमी ने 2008 की मंदी और कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों का डटकर सामना किया है. भारतीय शेयर बाजार में भी बेहतर रिटर्न घरेलू शेयर बाजार में कंपनियों के बेहतर परफॉर्मेंस ने भारत को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर मजबूत पोज़िशन में ला खड़ा किया है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार के बेहतर प्रदर्शन की मुख्य वजह इसका मजबूत रिटर्न ऑन इक्विटी यानी ROE है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के पास तेज इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए मजबूत आधार होने के साथ ही किसी भी ग्लोबल संकट से निपटने की ताकत है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय कंपनियों की ये स्टेबिलिटी इन्वेस्टर्स के कॉन्फिडेंस को बढ़ाने के साथ ही देश की आर्थिक तरक्की का भी मजबूत बेस है. भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर की मजबूती ने घरेलू स्टॉक मार्केट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. ये रिपोर्ट इस बात का सबूत है कि भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन ना केवल डोमेस्टिक लेवल पर बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी सराहनीय है. मजबूत बुनियाद और फाइनेंशियल सेहत के दम पर भारतीय कंपनियां भविष्य में भी ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाए रखने की ताकत दिखा रही हैं.   recent visitors 49

US ने यूक्रेनी सेना में भर्ती हुए नए रंगरूटों को सैन्य प्रशिक्षण और हथियार देने का प्रस्ताव दिया

कीव अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में हैं। उनका कार्यकाल अब एक महीने से भी कम बचा है। इस बीच बाइडेन प्रशासन ने रूस के साथ चल रहे युद्ध में सैन्य शक्ति और सैनिकों की संख्या में इजाफा करने के लिए यूक्रेन को एक प्रस्ताव सुझाया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के इस सुझाव से यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की टेंशन में हैं। दरअसल, अमेरिका ने यूक्रेन में सैनिकों की भर्ती के लिए आयु सीमा को 25 से घटाकर 18 साल करने का सुझाव दिया है और सेना में भर्ती हुए नए रंगरूटों को सैन्य प्रशिक्षण और हथियार देने का प्रस्ताव दिया है लेकिन जेलेंस्की को इस सुझाव को मानने में दिक्कत हो रही है। उनका मानना है कि इसके दूरगामी और हानिकारक प्रभाव देखने को मिलेंगे और देश की जनसांख्यिकी बुरी तरह से प्रभावित हो जाएगी। कई विशेषज्ञों का मानना है कि सैनिकों की भर्ती की उम्र सीमा घटाकर 18 साल करने से यूक्रेन में जन्म दर पर बुरा असर पड़ सकता है, जबकि देश पहले से ही कम जन्म दर की मार झेल रहा है। न्यूज वीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल 10 लाख से ज्यादा यूक्रेनी सैनिक रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं। बावजूद यूक्रेन करीब 43000 सैनिकों की भारी कमी झेल रहा है। यूक्रेन को रूस जैसे देश से मुकाबला करने के लिए अभी 1.60 लाख अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत है। सैनिकों की कमी की समस्या से निजात पाने के लिए जेलेंस्की सरकार ने इस साल अप्रैल में सैनिकों की भर्ती में न्यूनतम उम्र सीमा 27 से घटाकर 25 साल की है। अगस्त में रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की थी कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत सैनिकों की भर्ती की न्यूनतम उम्र सीमा 25 से घटाकर 17 साल करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने जा रही है। इसके तहत 17 से 25 साल की उम्र के युवाओं को बिना किसी मेडिकल टेस्ट के सैन्य भर्ती के लिए पंजीकृत कर दिया जाएगा लेकिन जेलेंस्की सरकार को अब इसमें बड़ा जोखिम दिख रहा है। जानकारों का कहना है कि इस उम्र में नौजवानों के सेना में भर्ती होने और युद्ध में लड़ने से देश में जन्म दर प्रभावित हो सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने इस बात को लेकर भी चेतावनी जारी की है कि अगर इस पॉलिसी को अपनाया गया तो 2050 तक देश की जनसंख्या 15 फीसदी गिरकर 31,990,132 पर पहुंच सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पिछले साल यूक्रेन की आबादी, 37,732, 836 थी जो लगातार घट रही है। CIA के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यूक्रेन की जनसंख्या पिछले साल से घटकर अब 35,661, 826 है, जिसमें 17,510,149 पुरुष और 18.151, 677 महिलाएं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के कारण अगस्त तक यूक्रेन की मृत्यु दर जन्म दर की तुलना में तीन गुनी हो गई है। recent visitors 34

बिजली कार्मिकों ने ली ऊर्जा संरक्षण की शपथ

भोपाल ऊर्जा हमारे जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। ऊर्जा ने विभिन्न रूपों में हमारी जीवन-शैली में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। विभिन्न रूपों में बिजली ऊर्जा का वह प्रकार है जो सबको सुगमता से हर कहीं उपलब्ध और सुलभ है। यही कारण है कि ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों को भी बिजली के रूप में बदलकर उसका उपयोग प्रकाश, यातायात, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कृषि जैसी मूलभूत आवश्यताओं के साथ मनोरंजन, दूरसंचार एवं पर्यटन जैसे सुख-साधन में भी किया जा रहा है। निदेशक (तकनीकी) दीप्तापाल सिंह यादव ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह के अवसर पर कार्मिकों से कहा कि बिजली की बचत ही बिजली का उत्पादन है। उन्होंने कार्मिकों से आव्हान किया कि बिजली की बचत करने के लिए उचित प्रबंधन करते हुए गुणवत्तापूर्ण विद्युत के उपयोग के लिए ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करें और अनावश्यक बिजली के उपयोग पर अंकुश लगाएं। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह के अवसर पर कम्पनी के निदेशक (तकनीकी) दीप्तापाल सिंह यादव ने गोविंदपुरा स्थित कम्पनी मुख्यालय में कार्मिकों को बिजली बचत की शपथ दिलाई।   recent visitors 49

रूस और भारत के गहराते रिश्तों के बीच भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर, वीजा फ्री ट्रैवल की शुरुआत जल्द

मॉस्को रूस और भारत के गहराते रिश्तों के बीच भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. अब भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. इससे पहले जून में ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि भारत और रूस ने वीजा फ्री ट्रैवल के लिए एक-दूसरे के वीजा प्रतिबंधों को कम करने के लिए द्विपक्षीय समझौते पर चर्चा की है. रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं.  रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत शीर्ष पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. वर्तमान में भारत के नागरिकों को रूस में एंट्री करने, वहां रहने और बाहर निकलने के लिए रूसी दूतावास या फिर वाणिज्य दूतावास की तरफ से जारी वीजा लेना जरूरी होता है जो कि एक लंबी प्रक्रिया है. रिकॉर्ड संख्या में रूस जा रहे भारतीय ज्यादातर भारतीय बिजनेस या अपने काम के सिलसिले में रूस जाते हैं. 2023 में, रिकॉर्ड 60,000 से ज्यादा भारतीयों ने रूस का दौरा किया जो 2022 की तुलना में 26 प्रतिशत ज्यादा है. रूस अपने वीजा फ्री टूरिस्ट एक्सचेंज के तहत चीन और ईरान के यात्रियों को वीजा फ्री एंट्री दे रहा है. चीन और ईरान के साथ रूस का यह सहयोग सफल रहा है जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि भारत के साथ भी ऐसा ही सिस्टम शुरू किया जाएगा. वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 62 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 82वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय इंडोनेशिया, मालदीव और थाईलैंड जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन प्राधिकरण (IATA) के डेटा के आधार पर जारी किया जाता है. इंडेक्स मानता है कि किसी देश का पासपोर्टधारी सभी बुनियादी एंट्री जरूरतों को पूरा करता है, अकेले यात्रा करने वाले वयस्क नागरिक है, और कम समय के प्रवास या घूमने या फिर बिजनेस के मकसद से एंट्री चाहता है. इस इंडेक्स में हालांकि, राजनयिक यात्रा, आपातकालीन या अस्थायी पासपोर्ट और ट्रांजिट स्टे शामिल नहीं है.   recent visitors 65

हिन्दी भाषा पाठ्यक्रम का बैगानी और गोंडी बोली में हो रहा अनुवाद

शिक्षा के प्रसार के लिए डिंडोरी के बजाग में नया प्रयोग जनजातीय विद्यार्थियों को उनकी बोली में प्राथमिक शिक्षा देने का प्रयास हिन्दी भाषा पाठ्यक्रम का बैगानी और गोंडी बोली में हो रहा अनुवाद पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाई में मिलेगा लाभ भोपाल जनजातियों की देशज कला, संस्कृति, वानस्पतिक ज्ञान और जड़ी-बूटी रोग उपचार कौशल के संरक्षण और संवर्धन के लिए केन्द्र और मध्यप्रदेश सरकार विभिन्न कदम उठा रही हैं। जनजातियों की अपनी बोलियां होती हैं। वे अपनी बोली में ही बात करना पसंद करते हैं। ज्ञान अर्जन हो या तथ्यों को समझने की बात हो, जनजातीय समुदाय अपनी बोली में ही ज्यादा सहज होते हैं। जनजातियों के इसी मानस को समझकर केन्द्र एवं राज्य सरकार ने अब जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को उनकी बोली में प्राथमिक शिक्षा देने का मन बना लिया है। इस काम की शुरुआत ट्राईबल डामिनेटेड डिंडोरी जिले से की जा रही है। यहां विशेष रूप से पिछड़ी और आर्थिक रूप से कमजोर मानी जाने वाली (पीजीटीजी समूह की) बैगा जनजाति के अलावा गोंड जनजाति की बड़ी आबादी रहती है। जन सांख्यिकीय अनुपात में इन जनजातियों के बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूली शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन्हीं विद्यार्थियों के हित में डिंडोरी जिले के बजाग ब्लॉक में एक अनोखा और प्रेरणादायक कदम उठाया जा रहा है। अत्यंत पिछड़ी बैगा जनजाति की विलुप्त होती बोलियां और संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए प्राथमिक स्तर पर पहली से पांचवीं तक के छात्रों के लिए हिन्दी भाषा के पाठ्यक्रम का बैगानी और गोंडी बोली में अनुवाद किया जा रहा है। यह नवाचार न केवल शिक्षा को सरल और सुलभ बनाएगा, बल्कि जनजातीय छात्रों के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बोली संरक्षण के लिए बड़ा कदम कार्य योजना के तहत हिंदी भाषा में तैयार विषयवार पाठ्यपुस्तकों को बैगानी और गोंडी बोली की शब्दावली में अनुवादित किया जा रहा है। विशेष रूप से हिंदी, गणित और पर्यावरण विज्ञान विषयों पर जोर दिया गया है, जबकि अंग्रेज़ी भाषा को पाठ्यक्रम से बाहर रखा गया है। जनजातीय कार्य विभाग के अधीन ट्राईबल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (टीआरआई) भोपाल की पहल पर इस परियोजना को राज्य शिक्षा केंद्र के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। बैगानी बोली के संरक्षण और शिक्षा में उपयोग के लिए शब्दकोश से शब्दों का संग्रह किया गया है। यह प्रयास जनजातीय छात्रों को उनकी ही बोली में सुलभ शिक्षा देने का अनूठा प्रयास है। यह बैगा जनजाति की बोली और सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित करेगा। शिक्षकों और विशेषज्ञों की टीम कार्य योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए 35 शिक्षकों और भाषा/बोली विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। ये शिक्षक दो शिफ्टों में काम करते हुए हिंदी भाषा के पाठ्यक्रम को बैगानी और गोंडी बोली की शब्दावली में अनुवादित कर रहे हैं। परियोजना का लगभग 55 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की योजना है। शासकीय कन्या शिक्षा परिसर, बजाग के ऑडिटोरियम हॉल में छह मेजों पर इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। विशेषज्ञ शिक्षक हर शब्द और वाक्य की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं, ताकि पाठ्यक्रम जनजातीय छात्रों की समझ और उनकी संस्कृति के अनुरूप ही हो। उम्मीदों का उज्जवल भविष्य जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि जनजातियों की बोलियों के संरक्षण के लिए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ मिलकर राज्य सरकार पूरा प्रयास कर रही है। डिंडोरी जिले में बैगानी और गोंडी बोली में पाठ्यक्रम का अनुवाद एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया जा रहा है। सफल होने पर अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकेगा। इस नवाचार से न केवल बोलियों और संस्कृति के संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि बैगा जनजाति के सभी विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार होकर उनका बौद्धिक विकास भी होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में डिंडोरी जिले (बैगांचल) के वन्या रेडियो केंद्र, चांडा ने भी बैगानी बोली में कार्यक्रम प्रसारित किए थे। अब इस योजना के माध्यम से वही प्रयास और अधिक बेहतर स्वरूप में क्रियान्वित किया जा रहा है। जिले के लिए यह कदम न केवल शैक्षणिक विकास, वरन् संस्कृति संरक्षण के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। इस अनूठी पहल से बैगा जनजाति की आने वाली पीढ़ियां अपनी कला, संस्कृति, बोली और पहचान से जुड़ी रहेंगी। डिंडोरी जिले में इस कार्य के नोडल अधिकारी धनेश परस्ते बताते हैं कि हमने बैगानी और गोंडी बोली की शब्दावली तैयार कर ली है। हम हिन्दी भाषा के पाठ्यक्रम को जिले की जनजातियों की सामान्य बोलचाल की भाषा में अनुवादित कर रहे हैं। चूंकि यहां की जनजातियां मुख्यतः बैगा और गोंडी बोली में सहज होकर वार्तालाप करती हैं, इसीलिए हम टीआरआई के मार्गदर्शन में आंगनवाड़ी में पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों और प्रायमरी कक्षाओं के पाठ्यक्रमों का इन्हीं दो बोलियों में अनुवाद कर रहे हैं। हम जल्द ही यह काम पूरा कर लेंगे।   recent visitors 34

शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के डाटा का सत्यापन आईएफएमआईएस के तहत समग्र आईडी से सत्यापित किया जायेगा : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के डाटा का सत्यापन आईएफएमआईएस के तहत समग्र आईडी से सत्यापित किया जायेगा। साथ ही शासकीय सेवकों का वेतन भुगतान आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) के माध्यम से होगा। इस व्यवस्था में सभी शासकीय सेवकों का दायित्व होगा कि वे आईएफएमआईएस के अंतर्गत एम्प्लाई सेल्फ सर्विस प्रोफाइल के माध्यम से अपनी समग्र आईडी की प्रविष्टि कर जानकारी सत्यापित करना सुनिश्चित करें। आईएफएमआईएस में समग्र आईडी की प्रविष्टि करने की सुविधा प्रारंभ कर दी गई है। एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएफएमआईएस) में समग्र आईडी की प्रविष्टि एवं सत्यापन से पूर्व समस्त शासकीय सेवकों द्वारा उनकी समग्र आईडी का पंजीयन/अद्यतन एवं आधार से लिंक समग्र पोर्टल के माध्यम से कराया जाना होगा। कर्मचारियों के वेतन प्राप्त करने वाले बैंक खातों को भी आधार से लिंक कराया जाना अनिवार्य होगा। इस संबंध में शासन के समस्त विभागों के बजट नियंत्रण अधिकारी एवं आहरण संवितरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि 28 फरवरी 2025 तक समस्त शासकीय सेवकों की समग्र आईडी की प्रविष्टि आईएफएमआईएस अंतर्गत एम्प्लाई प्रोफाइल में हो जाये। आईएफएमआईएस अंतर्गत बजट नियंत्रण अधिकारी/आहरण संवितरण अधिकारियों की लॉगइन पर मॉनिटरिंग हेतु रिपोर्ट उपलब्ध करायी जायेगी। कर्मचारियों के डाटा के समग्र आईडी से सत्यापन कार्य के प्रथम चरण में नियमित शासकीय सेवकों के लिये समग्र आईडी के प्रविष्टि की कार्यवाही की जाना है। द्वितीय चरण में मानदेय/संविदा/दैनिक वेतनभोगी शासकीय सेवकों का भी सत्यापन एवं आधार से लिंक किया जायेगा। समग्र पोर्टल से संबंधित सहयोग/सहायता के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा निर्देश जारी कर दिये गये हैं। समग्र आईडी बनवाने/अद्यतन करवाने/सुधार करवाने संबंधी जानकारी/यूजर मैनुअल समग्र पोर्टल https://samagra.gov.in/ से प्राप्त किये जा सकते हैं।…पत्र के लिए क्लिक करें   recent visitors 47