कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा कालकाजी विधानसभा सीट पर ‘आप’ की प्रत्याशी आतिशी को टक्कर दे सकती हैं

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प होने जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल के बाद अब आतिशी के खिलाफ भी मजबूत उम्मीदवार उतारने जा रही है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा कालकाजी विधानसभा सीट पर दिल्ली की मुख्यमंत्री और 'आप' की प्रत्याशी आतिशी को टक्कर दे सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर हुई कांग्रेस की बैठक में 35 सीटों के लिए उम्मीदवार कों नामों पर चर्चा हुई। इसमें अलका लांबा सहित पर 28 नामों पर सहमति बनने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की अलका लांबा को आतिशी के सामने कालकाजी विधानसभा सीट पर उतारने की तैयारी है। वहीं, सीमापुरी सीट से राजेश लिलोठिया कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं। वहीं मनीष सिसोदिया की सीट जंगपुरा से फरहाद सूरी को कांग्रेस का टिकट मिल सकता है। इनके अलावा बिजवासन से देवेंद्र सहरावत और मटिया महल सीट से आसिम अहमद कांग्रेस उम्मीदवार हो सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि 35 सीटों पर चर्चा के लिए आज हुई कांग्रेस की बैठक में 28 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम लगभग तय हो चुके हैं, जबकि 7 सीटों के लिए उम्मीदवारों पर चर्चा होना अभी बाकी है। बता दें कि, कांग्रेस ने 21 उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट जारी कर दी है। बता दें कि, कांग्रेस 2013 से दिल्ली की सत्ता से बाहर है, जबकि आम आदमी पार्टी 2015 से दिल्ली में अपने दम पर सत्ता में काबिज है। उससे पहले कांग्रेस की तरफ से शीला दीक्षित लगातार 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं। हालांकि, 2015 और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे अधिक खराब रहा और वो अपना खाता तक नहीं खोल सकी। गौरतलब है कि, दिल्ली विधानसभा के लिए फरवरी 2025 में चुनाव होने की उम्मीद है। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी 2025 तक है। ऐसे में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी चौथी बार सत्ता में आने का प्रयास कर रही है। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 70 में से 67 सीटें हासिल कर बंपर जीत दर्ज की थी। वहीं, वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 70 में से 62 पर जीत दर्ज की थी। भाजपा को वर्ष 2015 में 3 और 2020 में महज 8 सीटों से संतोष करना पड़ा था। recent visitors 61

ऑस्ट्रेलिया का रहा है दबदबा, भारत ने भी चखा है जीत का स्वाद, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चौथा टेस्ट मेलबर्न में

मेलबर्न भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का चौथा मुकाबला गुरुवार से मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाएगा। पर्थ टेस्ट भारत के नाम रहा, जबकि एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया ने वापसी करते हुए पिंक बॉल टेस्ट में दमदार जीत हासिल की। तीसरा मैच बारिश के कारण ड्रॉ पर समाप्त हुआ था। वहीं चौथा मैच सीरीज के लिहाज से दोनों टीमों के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया का काफी दबदबा रहा है और पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड पर नजर डाले तो ऑस्ट्रेलिया की टीम मेलबर्न में विपक्षी टीम पर हावी रही है। पैट कमिंस के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलिया की टीम ने एडिलेड और ब्रिसबेन में भारत पर दबाव बनाया था और ज्यादातर समय खेल में आगे रही थी। हालांकि ब्रिसबेन में भारतीय टीम ने दमदार वापसी की थी और ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में 100 रन के अंदर सात विकेट गंवा दिए थे। हालांकि मेलबर्न में रोहित की टीम के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। वहीं चौथे मैच से पहले कई विवादों ने भी भारतीय खेमे में हलचल पैदा की है। विराट कोहली का एयरपोर्ट पर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया को तस्वीर लेने से रोकना, फिर जडेजा का इंग्लिश रिपोर्ट को जवाब ना देना और फिर प्रैक्टिस के लिए दी गई यूज्ड पिच को लेकर भी सवाल उठे हैं। मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम ने इस मैदान पर 116 टेस्ट मैच खेले हैं। यहां पर पहला टेस्ट 1877 में खेला गया था। ऑस्ट्रेलिया की टीम ने कुल 67 मैच जीते हैं और 32 में उसे हार मिली है, जबकि 17 मैच ड्रॉ रहे हैं। 2010 से ऑस्ट्रेलिया ने कुल 14 मैच खेले हैं, जिसमें नौ में उसे जीत मिली है और तीन गंवाए हैं, दो ड्रॉ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में पिछले 14 साल में तीन मैच गंवाए हैं और उनमें से दो मैच भारत ने जीते हैं। 2018 और 2020 में भारत ने जीत हासिल की थी। इससे पहले 2010 में ऑस्ट्रेलिया की टीम को इस मैदान पर पारी और 157 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। recent visitors 60

एक मर्डर से खुल गया बड़ा खेल, बांग्लादेश के मिदुल मियां और फरदीन कैसे बने दिल्ली के वोटर, पुलिस ने 11 लोग गिरफ्तार किये

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने एक मर्डर केस की जांच के दौरान बांग्लादेशियों को अवैध तरीके से भारत में बसाने में शामिल एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। डीसीपी साउथ अंकित चौहान ने मंगलवार को बताया कि गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में से पांच लोग बांग्लादेशी नागरिक हैं, जबकि 6 लोग फर्जी तरीके से दस्तावेज बनाने वाले रैकेट से जुड़े हैं। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान करने के लिए खास ऑपरेशन शुरू किया है। अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी संगम विहार और गिरोह के गुर्गे रोहिणी इलाके से पकड़े गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से 6 लैपटॉप, 6 मोबाइल फोन, आधार कार्ड मशीन, रिकॉर्ड रजिस्टर और विभिन्न दस्तावेज, 25 आधार कार्ड, 4 मतदाता पहचान पत्र और 8 पैन कार्ड बांग्लादेशी नागरिकों के होने का शक है। हत्या की जांच से खुला रैकेट का राज दिल्ली पुलिस ने बताया कि नवंबर महीने में आपसी रंजिश में भारत के ही शिंटू शेख की हत्या की जांच में इस गिरोह का खुलासा हुआ। शिंटू ने ही आरोपियों को अवैध तरीके से दिल्ली पहुंचाया था, बाद में पैसे के विवाद में उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि रैकेट से जुड़े लोग बांग्लादेशी नागरिकों को जंगल के रास्ते से भारत में प्रवेश कराकर बाइक और स्थानीय परिवहन का इस्तेमाल करने के बाद ट्रेन से दिल्ली लाते थे। इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में भी रहने लगते थे। इसके बाद दिल्ली में रजत मिश्रा नामक शख्स उनका फर्जी कागजात बनाता था, वह फर्जी वेबसाइट बनाकर जरूरी जानकारी लेकर कागजात बनाता था। अब तक 21 लोगों के आधार कार्ड सीज कर 6 पैन कार्ड और वोटर कार्ड बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस ने बताया कि रैकेट से जुड़े आरोपी रोहिणी में कार्यालय बनाकर गिरोह चल रहे थे और दुकान, मिस्त्री, ब्यूटी पार्लर वगैरह का काम करते थे। अक्टूबर में हुई थी शिंटू शेख की हत्या पुलिस अधिकारी ने बताया कि 20 अक्टूबर 2024 को रात में लगभग 12 बजे एक महिला संगम विहार पुलिस थाने में जाकर पुलिस को बताया कि उसका पति शिंटू शेख उर्फ ​​राजा उनके घर पर बेहोश पड़ा है। इस सूचना पर 21 अक्टूबर 2024 को संगम विहार थाने में हत्या की एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के बाद संगम विहार पुलिस में बीएनएस की धारा 103 (1) के तहत एक मामला और 8 नवंबर 2024 को दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की एक टीम बनाकर मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया। बांग्लादेशी नागरिकों ने ही ली थी शिंटू की जान इस हत्याकांड की जांच के दौरान चार बांग्लादेशी नागरिक- मिदुल मियां उर्फ ​​आकाश अहमद, फरदीन अहमद उर्फ ​​अभि अहमद और दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। हत्या के पीछे का मकसद यह पता चला कि मृतक शिंटू शेख उर्फ ​​राजा उन्हें किसी न किसी बहाने से धमकाता रहता था। चारों आरोपियों ने शिंटू शेख की हत्या की योजना एक महीने पहले ही बना ली थी और योजना के अनुसार उन्होंने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी, साथ ही उसकी नकदी और सामान भी लूट लिया, जो जांच के दौरान बरामद किया गया। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि चारों आरोपी अवैध रूप से भारत में घुसे थे और पिछले एक साल से दिल्ली के संगम विहार इलाके में फर्जी भारतीय पहचान पत्र खरीदकर रह रहे थे। पूछताछ के दौरान, उन सभी ने अपने बांग्लादेशी पहचान पत्र (चिप आधारित एनआईडी कार्ड) या जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए। इसके अलावा, शिंटू शेख के घर से 21 आधार कार्ड, 4 वोटर आईडी कार्ड और 8 पैन कार्ड बरामद किए गए, जो बांग्लादेशी नागरिकों के होने का शक है। इसके बाद पुलिस की जांच फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाने, अवैध घुसपैठ को सुविधाजनक बनाने वाले रूटों और तंत्रों में लिप्त गिरोह की ओर बढ़ी। 3 अहम बिंदुओं पर पुलिस की पूरी जांच फोकस का टिका रहा 1. फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाले तरीके। 2. अवैध घुसपैठ को सुविधाजनक बनाने वाले रूट और तंत्र। 3. बरामद वोटर आईडी कार्ड के संबंध में जांच और पहचान। फर्जी दस्तावेजों की जांच 1. आरोपियों ने अपने आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार करने के लिए फर्जी आईडी का इस्तेमाल किया। इस संबंध में थाना संगम विहार में 6 दिसंबर 2024 को बीएनएस की धारा 318(2)/319(2)/337/61(1ए) बीएनएस और 34 आधार एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। 2. जांच में पता चला कि आरोपियों ने अपने आधार कार्ड दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-5 स्थित 'पूनम ऑनलाइन कंप्यूटर सेंटर' से बनवाए थे, जिसका मालिक 26 वर्षीय साहिल सहगल है। 3. साहिल सहगल को गिरफ्तार किया गया और पूछताछ में पता चला कि मृतक शिंटू शेख उर्फ ​​राजा के माध्यम से अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों ने उससे संपर्क किया था। साहिल ने फर्जी वेबसाइट 'जनताप्रिंट्स.साइट' का इस्तेमाल कर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाए और उन्हें आधार कार्ड प्रोसेसिंग के लिए अपने सहयोगी रंजीत को भेजे थे। 4. रोहिणी सेक्टर 7 के नाहरपुर गांव वाला 30 वर्षीय रंजीत रोहिणी सेक्टर-5 के कर्नाटक बैंक में अधिकृत आधार ऑपरेटर अफरोज के साथ काम करता था। फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करके बवाना की जेजे कॉलोनी निवासी 25 वर्षीय अफरोज ने आधार कार्ड बनाने में मदद की।   recent visitors 169

राहुल पहुंचे सब्जी मंडी, कहा- बढ़ती महंगाई ने बिगाड़ा आम आदमी की रसोई का बजट-कुंभकरण की नींद सो रही सरकार

नई दिल्ली राहुल गांधी ने अपने एक्स अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वह सब्जी मंडी में सब्जियों के दाम पूछते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उनके साथ कुछ स्थानीय लोग और महिलाएं भी हैं। इस दौरान वह अलग-अलग सब्जियों के रेट पूछ रहे हैं। महिलाएं बता रही हैं कि सब्जियों के दाम इस साल कम ही नहीं हो रहे हैं। एक महिला ने कहा कि जो मटर सीजन में 60 रुपए प्रतिकिलो तक बिकती है, इस साल 120 रुपए किलो से नीचे आ ही नहीं रही है। महिलाओं ने बताया कि कोई भी सब्जी 30-35 रुपए किलो है ही नहीं। राहुल गांधी ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है कि ‘लहसुन कभी ₹40 था, आज ₹400!’ बढ़ती महंगाई ने बिगाड़ा आम आदमी की रसोई का बजट-कुंभकरण की नींद सो रही सरकार! सब्जियां खरीदते हुए एक महिला कहती है कि पूरे साल एक भी सब्जी सस्ती नहीं हुई है। आलू-प्याज जो बेसिक चीज है हम मिडिल क्लास के लोगों के लिए, उनमें से भी कुछ सस्ता नहीं हुआ है। एक महिला ने राहुल गांधी ने बताया कि हम आए थे चार-पांच सब्जियां लेने के लिए, लेकिन दो सब्जियां लेकर घर जा रहे हैं। इसी दौरान राहुल गांधी एक महिला से पूछते हैं कि आपको क्या लगता है महंगाई क्यों बढ़ रही है? इस पर वह महिला गुस्से में कहती है कि जो सरकार बैठी हुई है, वो इस चीज को देखती नहीं है। वह बस अपने भाषणों में लगे हुए हैं। वह यह नहीं देखते कि जो आम पब्लिक है वह इतना महंगा खाना कैसे खाएगी। राहुल गांधी का यह वीडियो दिल्ली के गिरीनगर के सामने के हनुमान मंदिर सब्जी मंडी का है। इसमें राहुल गांधी के साथ कुछ महिलाएं भी हैं। महिलाएं कहती हैं कि हमने राहुल गांधी को अपने घर चाय पर भी बुलाया है। वह भी देखें कि कितनी महंगाई है। एक महिला कहती है कि हमारा बजट बहुत ज्यादा बिगड़ रहा है। सैलरी किसी की नहीं बढ़ी। लेकिन सब्जियों का दाम जो बढ़ गया, फिर वो घटने का नाम नहीं लेता। सब्जी मंडी में पहुंचे राहुल गांधी महिलाओं से पूछते हैं कि आज क्या खरीद रही हैं। इस पर महिला उन्हें बताती है कि थोड़ा सा टमाटर और थोड़ा सा प्याज, ताकि कुछ तो चल जाए। एक महिला सब्जीवाले से पूछती है कि भैया इस बात सब्जियां इतनी महंगी क्यों हैं। 30-35 रुपए तो किसी सब्जी का दाम है ही नहीं, जो भी है सब 50 रुपए के ऊपर है। महिला की इस बात पर सब्जी वाला भी स्वीकार करता है कि इस बार सब्जियों के दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। वह कहता है कि इस साल बहुत महंगाई है। इससे पहले कभी नहीं हुई। राहुल गांधी सब्जीवाले से लहसुन का दाम पूछते हैं। इस पर महिला कहती है कि भैया हम लहसुन नहीं खरीद पाएंगे। वह आगे कहती है कि सोना सस्ता हो गया, लहसुन महंगे हो गए। सब्जीवाला लहसुन के दाम 400 रुपए किलो बताता है। तब महिला कहती है कि कुछ कम कीजिए कि हम थोड़ा तो खरीद पाएं। महिला की बात सुनकर सब्जीवाला 90 रुपए पाव के हिसाब से देने को तैयार हो जाता है। recent visitors 73

सालों से सड़क मरम्मत की मांग कर रहे लोग, नगरपालिका चुनाव का बहिष्कार करने की दी चेतावनी

बलौदाबाजार सालों से खराब सड़क की मरम्मत कराने की ग्रामीणों की मांग आज तक पूरी नहीं हो पाई है. इस संबंध में कलेक्टर और नगरपालिका को लोगों ने कई बार आवेदन भी दिया. आज कलेक्टर आफिस रोड में नवीनीकरण कराने पहुंचे अधिकारियों और नगरपालिका अध्यक्ष को कालोनीवासियों ने रोड की मरम्मत नहीं होती तब तक चुनाव में वोट नहीं डाले जाएंगे. दिनभर धुल उड़ रहा वार्ड नंबर 1 निवासी तुलसी तिवारी ने बताया कि सड़क खराब होने से दिनभर धुल उड़ रहा है, घरों में सामान रखना मुश्किल हो गया है, बीमारी फैल रही है. इसलिए हम सबने निर्णय लिया है कि जब तक रोड नहीं बनेगा, हम मतदान नहीं करेंगे, पहले रोड फिर वोट. अधिकारी ने रोड निर्माण जल्द पूरा करने का दिया आश्वासन वहीं मामले की जानकारी के बाद नगरपालिका अधिकारी खिरोद्र भोई भी तत्काल वार्ड नंबर एक पहुंचे और कालोनी वासियों को समझाने का प्रयास किया. नगरपालिका अधिकारी ने मीडिया से कहा कि टेंडर की प्रक्रिया शीघ्र की जायेगी और रोड का निर्माण किया जायेगा. recent visitors 45

आंबेडकर और संविधान पर AAP-BJP पार्षदों में भिड़ंत, आंबेडकर और संविधान पर सियासी लड़ाई ने अब हिंसक रूप

चंडीगढ़ संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान पर सियासी लड़ाई ने अब हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है। चंडीगढ़ नगर निगम की मीटिंग के दौरान इस मुद्दे पर कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी के पार्षद आपस में भिड़ गए। उनके बीच हाथापाई की भी खबर है। इसकी शुरुआत तब हुई, जब कांग्रेस और आप के पार्षदों ने आंबेडकर के खिलाफ कथित टिप्पणी के विरोध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ एक प्रस्ताव के जरिए उनसे इस्तीफे की मांग की। भाजपा के पार्षदों ने इसका पुरजोर विरोध किया लेकिन धीरे-धीरे यह विरोध हिंसक हो गया और पार्षद आपस में ही उलझ पड़े। हाथापाई की ये घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। बाद में इसका का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। समाचार एजेंसी PTI ने उस वीडियो को साझा किया है। उसमें पार्षद हाथापाई करते नजर आ रहे हैं। सारा विवाद नामित पार्षद अनिल मसीह के सदन में पहुंचने के बाद शुरू हुआ क्योंकि उनके पहुंचते ही कांग्रेस और आप के पार्षद नारेबाजी करने लगे। ये पार्षद अनिल मसीह को वोट चोर कहकर नारा लगा रहे थे। इससे मसीह को गुस्सा आ गया और वे बेल में चले गए। उन्होंने कांग्रेस पार्षदों से भिड़ते हुए कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत कांग्रेस पार्टी के कई नेता जमानत पर हैं। इसके बाद आप के पार्षदों और कांग्रेस के पार्षदों ने मसीह के सामने पोस्टर लहराना शुरू कर दिया। इस दौरान भाजपा के पार्षदों ने उनसे पोस्टर छीनने की कोशिश की। इसमें उनके बीच झड़प और हाथापाई हो गई। कुछ पार्षद तो हाथापाई के दौरान कैमरे की ओर देखते हुए भी पकड़े गए, लेकिन इससे उनका प्रयास नहीं रुका। विपक्षी दलों ने शोर-शराबे के बीच अमित शाह पर आंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाया। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं ने इस आरोप का जोरदार खंडन किया । recent visitors 65

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 78 साल से जारी आरक्षण पर सवाल उठाया, आरक्षण व्‍यवस्‍था सिर्फ 10 साल की थी

नई दिल्ली बाबा साहब भीम राव आंबेडकर पर संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर सियासी घमासान अभी थमा नहीं है। कांग्रेस के बाद आज बसपा सुप्रीमो मायावती के आह्वान पर बसपा इस मुद्दे को लेकर देश व्‍यापी आंदोलन कर रही है। इस बीच ज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जातिगत आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि आरक्षण की व्‍यवस्‍था सिर्फ 10 साल के लिए की गई थी। बाबा साहब ने कभी नहीं चाहा था कि लोग आरक्षण की वैशाखी लेकर जिंदगी भर चलते रहें। लेकिन लागू होने के 78 साल बाद भी वो वर्ग जिसके लिए इसे लागू किया गया था, मुख्‍य धारा में शामिल नहीं हो सका है। इसका मतलब है कि या तो आंबेडकर फेल हो गए या तो आंबेडरवादी फेल हो गए। उन्‍होंने कहा कि लोगों को इसमें नहीं जाना चाहिए बल्कि शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य जैसी चीजों से जुड़ी अपनी समस्‍याओं को उठाना चाहिए। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहीं। वह सोमवार को काशी पहुंचे। यहां केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में डॉ. हरिप्रकाश पांडेय ने सपत्नीक पादुका पूजन किया। बताया जा रहा है कि शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत के दौरान किसी प्रश्‍न के उत्‍तर में उपरोक्‍त बातें कहीं। उन्‍होंने कहा, '78 साल हो गए। बाबा साहब आंबेडकर के संविधान की बात की जाती है। 78 साल में जो लोग आंबेडकर के पीछे थे उनका कितना उन्‍नयन हुआ, ये बताइए। 10 साल के लिए आरक्षण दिया गया था, 78 साल हो गया वो आरक्षण कंटीन्‍यू है और उसके लिए जूझ रहे हैं उनके लोग कि ये न खत्‍म किया जाए। आरक्षण इसलिए थोड़े दिया गया था कि आप जिंदगी भर के लिए पंगु होकर आरक्षण की बैसाखी पर खड़े रहें।' उन्‍होंने कहा- ' आरक्षण इसलिए दिया आंबेडकर साहब ने कि उसका लाभ लेकर आप समाज की मुख्‍य धारा में आ जाएं। आप कहां आ पाए? जो लोग आंबेडकर का नाम लेते हैं हम उन्‍हीं से पूछना चाहते हैं कि आंबेडकर की भावना का कितना उन्‍होंने ख्‍याल रखा। आंबेडकर ने यह नहीं चाहा था कि जिंदगी भर, अगले दो सौ साल, हजार साल तक ये लोग आरक्षण खाते रहें। उन्‍होंने ये चाहा था कि आरक्षण की वैशाखी को लेकर चलें और मुख्‍य धारा में शामिल हो जाएं। 78 साल में आप लोग मुख्‍य धारा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इसका मतलब है कि आंबेडकर या तो फेल हो गए या तो आंबेडरवादी फेल हो गए।' शंकराचार्य ने कहा कि 'हमारा यह कहना है कि इसमें न जाइए। आपकी जो समस्‍याएं हैं। आपको शिक्षा नहीं मिल रही है आप शिक्षा की मांग करिए। आपको स्‍वास्‍थ्‍य नहीं मिल रहा है, आप स्‍वास्‍थ्‍य की मांग करिए। आपको मुख्‍य धारा में नहीं लाया जा रहा है, कहीं अपमान हो रहा है, उसको उठाइए कि भाई जब समाज एक है तो भेदभाव नहीं होना चाहिए। ये तो ठीक है लेकिन आंबेडकर का किसी ने मान कर दिया किसी ने अपमान कर दिया। अब इसी में आप ढोल पीटते रहिए और राजनीतिज्ञों को जो करना है वे कर रहे हैं।' शंकराचार्य का एयरपोर्ट पर रवि त्रिवेदी, यतींद्र चतुर्वेदी, कीर्ति हजारी शुक्ला आदि ने स्वागत किया। वहां से वह कचहरी में अधिवक्ताओं के एक कार्यक्रम में पहुंचे। फिर सड़क मार्ग से राजघाट पहुंचे। राजघाट से जल मार्ग से केदारघाट गए। शंकराचार्य 25 दिसंबर तक काशी में प्रवास करेंगे। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अनंत जन्मों के पुण्य कर्मों के फलों के उदित होने पर जीव को काशीवास सुलभ होता है। काशीवासियों को दृढ़ता से धर्म का पालन करना चाहिए। recent visitors 74