पानी का टैक्स नहीं भरने वालों के खिलाफ इंदौर नगर निगम दर्ज कराएगा एफआईआर, लगेगा जोर का झटका

इंदौर इंदौर नगर निगम अब जलकर के बकायादारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगा। इसके लिए छह जनवरी से विशेष मुहिम शुरू की जा रही है। जिन बकायादारों ने बार-बार नोटिस देने के बावजूद जलकर जमा नहीं किया है, ऐसे बड़े बकायादारों की सूची भी तैयार कर ली गई है। अब इनके खिलाफ निगम पुलिस कार्रवाई करेगा। इंदौर निगम सीमा में करीब एक लाख 89 हजार जल कनेक्शन हैं। लगभग 60 हजार कनेक्शन ऐसे हैं जो अनियमित हैं। यानी इन कनेक्शनधारियों ने सालों से नगर निगम में जलकर जमा ही नहीं किया है। यही वजह है कि बकाया राशि करोड़ों रुपये में पहुंच गई। वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की थी इंदौर नगर निगम ने ऐसे कनेक्शनधारियों को राहत देते हुए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की थी। इसके तहत बकायादारों को बकाया राशि का 50 प्रतिशत भुगतान करके अपना खाता नियमित करवाने की सुविधा दी गई थी। निगम को बकायादारों से जलकर के रूप में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूलने हैं। निगम को उम्मीद थी कि वन टाइम सेटलमेंट योजना को अच्छा प्रतिसाद मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सिर्फ 45 करोड़ रुपये ही निगम के खाते में पहुंचे। शिविर लगाकर जलकर जमा करवाएंगे इसके बाद भी निगम ने बकायादारों को कई अवसर दिए ताकि वे अपना जलकर खाता नियमित करवा सकें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब निगम ने सख्ती बरतते हुए जलकर बकायादारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। निगम छह जनवरी से इसके लिए विशेष अभियान भी शुरू करेगा। नगर निगम अलग-अलग क्षेत्रों में शिविर लगाकर जलकर जमा कराएगा। recent visitors 40

प्रदेश में निवेश बढ़ रहा है, इसके साथ ही हजारों लेागों को रोजगार भी मिल रहा है, तीन महीने में पूरे होंगे दो अहम प्रोजेक्ट

इंदौर मध्यप्रदेश में इंदौर रीजन में तेजी से औद्योगिक इकाईयां पैर पसार रही है। इससे न केवल प्रदेश में निवेश बढ़ रहा है, इसके साथ ही हजारों लेागों को रोजगार भी मिल रहा है। यही कारण है कि मप्र औद्योगिक विकास निगम(एमपीआइडीसी) द्वारा इंदौर रीजन में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रही है। दो वर्ष पूर्व इंदौर में हुई सातवीं ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में तिलगारा(धार) और मोहना(धार) औद्योगिक पार्क प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था। 282 हेक्टेयर में विकसित हुए इस प्रोजेक्ट 3 हजार करोड़ रुपए के निवेश से 10 लोगों को राेजगार मिलेगा। मोहना औद्योगिक पार्क फरवरी और तिलगारा औद्योगिक पार्क मार्च में पूरा हो जाएगा। धार जिले के आदिवासी अंचल में इस वर्ष इन दोनों प्रोजेक्ट के शुरू होते ही 10 हजार से अधिक लोगाें को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। जहां इंदौर से धार के बीच रेल मार्ग शुरू हो जाएगा। जिले के पेटलावद-बदनावर मार्ग से करीब चार किमी दूर तिलगारा औद्योगिक पार्क आकार ले चुका है। 79 करोड़ रूपये से यह प्रोजेक्ट मार्च माह में पूरा कर लिया जाएगा। कुल मिलाकर आदिवासी अंचल धार में इस प्रोजेक्ट पूरा होते ही 5 हजार से अधिक लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। इस बहुउद्देशीय पार्क में अलग-अलग सेक्टर के उद्योग संचालित होंगे। 10 हेक्टेयर क्षेत्र में हरियाली विकसित की जाएगी। 1.6 हेक्टेयर में पार्किंग बनेगी। लाजिस्टिक के लिए 3.3 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है। हालांकि अभी यहां प्लाट आवंटन शुरू नहीं हुआ है। 147.39 हेक्टयर जमीन पर 60 इकाईयां विकसित होगी इंदौर से 25 किमी दूर धार जिले के मोहना में औद्योगिक पार्क काम जनवरी 2022 में शुरू हुआ था। दो फेस में तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट को 61.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसमें 147.39 हेक्टयर जमीन पर 60 प्लाट निकाले गए है। जिसमें से 16 प्लाट का आवंटन किया जा चुका है। इस क्षेत्र बहुउद्देशीय पार्क के रूप में विकसित किया गया है, जिसके चलते यहां अलग-अलग कार्य क्षेत्र की इकाईयां शुरू हो सकेगी। एप्रोच रोड, सड़क, बिजली आदि काम पूरे हो चुके है। इस प्रोजेक्ट में 1500 करोड़ रुपये के निवेश आने की संभावना है। इससे 5 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। प्रोजेक्ट फरवरी अंत तक पूरा हो जाएगा।   recent visitors 40

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमती शर्मा के स्वास्थ्य का हालचाल जाना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमती शर्मा के स्वास्थ्य का हालचाल जाना नर्मदा अस्पताल में भर्ती मरीजों से चर्चा भी की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार शाम भोपाल के नर्मदा अस्पताल पहुंचकर वरिष्ठ नेता शैलेन्द्र शर्मा की माता जी और पूर्व मंत्री स्व. लक्ष्मी नारायण शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मी देवी शर्मा के स्वास्थ्य का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल के चिकित्सकों से श्रीमती शर्मा के बेहतर उपचार के संबंध में चर्चा की। उन्होंने श्रीमती शर्मा के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल में दाखिल अन्य रोगियों और उनके परिजन से भी चर्चा कर चिकित्सकों को उपचार के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने गुना जिले से चार धाम यात्रा पर गए श्रद्धालुओं में से दुर्घटना में घायल और अस्पताल में भर्ती होकर उपचाररत श्रद्धालु को भी समुचित चिकित्सा सहायता प्रदान करने के निर्देश डॉक्टर्स को दिये।   recent visitors 40

महाकुंभ के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया गया, श्रद्धालुओं के लिए तैयार प्रयागराज

महाकुंभ नगर कभी संकरी और खस्ताहाल सड़कों के लिए पहचाने जाने वाले प्रयागराज का आज कायाकल्प हो चुका है। पहले कुंभ 2019 और अब महाकुंभ 2025 को देखते हुए योगी सरकार ने यहां की सूरत ही बदल दी है। 2019 कुंभ के दृष्टिगत जो विकास कार्य हुए, उसे 2025 महाकुम्भ में और विस्तार देते हुए स्थाई कार्यों पर जोर दिया गया है। सनातन आस्था के सबसे बड़े समागम महाकुंभ के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया गया है। आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसको देखते हुए इस बार 200 सड़कों का निर्माण और विकास किया गया है। इन सड़कों को 3 लाख पौधों और एक लाख हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग से सजाया गया है। कुल मिलाकर महाकुंभ के दौरान जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आएंगे तो यहां की सड़कों और उनके सौंदर्यीकरण की मनमोहक छवि के साथ यादगार अनुभव लेकर वापस जाएंगे। प्रयागराज में महाकुंभ के महा आयोजन को देखते हुए कुल 200 ऐसी सड़कें हैं, जिनका उन्नयन किया गया है। इसमें नई सड़कों का भी निर्माण हुआ है, जबकि सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण भी किया गया है। सड़कों के निर्माण और विकास में तीनों विभागों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें सबसे ज्यादा काम प्रयागराज नगर निगम की ओर से किया गया है, जिसने कुल 78 सड़कों का नव निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण करने में सफलता प्राप्त की है। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 74 और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने कुल 48 सड़कों का विकास किया है। इसके साथ ही सड़कों का सौंदर्यीकरण भी किया गया है। खासतौर पर विभिन्न तरह के पौधों को यहां सजाया गया है, जबकि हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग्स भी की गई है। इन 200 सड़कों पर कुल मिलाकर तीन लाख पौधों को रोपित किया गया है, जबकि एक लाख हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग्स को प्लांट किया गया है। इन्हीं सड़कों के माध्यम से श्रद्धालुओं का संगम तक आवागमन सुगम हो सकेगा और उन्हें दिव्य आनंद की अनुभूति प्राप्त होगी। इन सड़कों का निर्माण तीनों विभागों के लिए कतई आसान नहीं रहा है। इसके लिए इन्हें कई तरह की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। उदाहरण के तौर पर निर्माण के दौरान कई ऐसे स्थल थे, जहां पर एंक्रोचमेंट था जिन्हें हटाया गया है। श्रद्धालुओं के साथ ही प्रयागराज वासियों की सुविधा के लिए निर्मित इन सड़कों के विकास के लिए कुल मिलाकर 4426 एंक्रोचमेंट को ध्वस्त किया गया है। इसी तरह, कई स्थलों पर निर्माण को लेकर कोर्ट केस का भी सामना करना पड़ा है। कुल मिलाकर 82 कोर्ट केसेस को रिजॉल्व किया गया है। वहीं, निर्माण के दौरान 4893 इलेक्ट्रिक पोल्स को भी यहां से शिफ्ट करने में सफलता प्राप्त हुई है। इतना ही नहीं, सड़कों के निर्माण के साथ-साथ 170 किमी. लंबी अंडरग्राउंड केबलिंग भी की गई है।   recent visitors 55

केंद्र सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्डों के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए, 24 जनवरी से हाईवे के नियम बदल जाएंगे

नई दिल्ली नए साल की शुरूआत होते ही केंद्र सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्डों के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। ये दिशा-निर्देश 24 जनवरी से प्रभावी होंगे, जिनका उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट, मानकीकृत और समय पर जानकारी प्रदान करना है। इन परिवर्तनों के जरिए दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है। स्पीड लिमिट और चेतावनी संकेतक नई व्यवस्था के तहत रंबल स्ट्रिप्स जैसे संभावित खतरनाक स्थानों से पहले संकेतक लगाए जाएंगे, ताकि ड्राइवर को अपनी गति समायोजित करने का समय मिल सके। स्पीड लिमिट की जानकारी हर पांच किलोमीटर पर साइन बोर्डों के माध्यम से दी जाएगी। इन बोर्डों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन चालकों के लिए पढ़ना और समझना आसान हो। मानकीकरण और एकरूपता सड़क परिवहन मंत्रालय ने साइन बोर्डों पर उपयोग किए जाने वाले अक्षरों और संख्याओं के आकार और रंग को मानकीकृत कर दिया है। इस कदम से संकेतकों की एकरूपता बढ़ेगी और उन्हें समझने में आसानी होगी। साथ ही, अलग-अलग वाहनों की गति सीमा को एक ही बोर्ड पर स्पष्ट रूप से दर्शाने की व्यवस्था की गई है। No parking और पैदल यात्री सुरक्षा दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए "नो पार्किंग" बोर्ड हर पांच किलोमीटर पर लगाए जाएंगे। इसके अलावा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, क्रॉसिंग की जानकारी पहले से देने की व्यवस्था की गई है। समग्र सुरक्षा के प्रयास इन दिशा-निर्देशों को तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और सड़क सुरक्षा के आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया। इसके आधार पर मार्ग संकेतकों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया: अनिवार्य, चेतावनी और सूचना संबंधी संकेतक। recent visitors 59

भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में

मुंबई  भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में हैं। हिंदू बिजनसलाइन की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अंबानी ने रिलायंस जियो के आईपीओ की तैयारियां शुरू कर दी है। कंपनी का आईपीओ 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक इसमें ऑफर ऑफ सेल के साथ-साथ ताजा शेयर भी जारी किए जाएंगे। यह आईपीओ साल की दूसरी छमाही में आ सकता है। हुंडई मोटर इंडिया पिछले साल 27,870.16 करोड़ रुपये का आईपीओ लाई थी जो देश में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस जियो के आईपीओ के लिए प्री-आईपीओ प्लेसमेंट पर शुरुआती बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है। इनवेस्टमेंट बैंकर्स का कहना है कि यह इश्यू बड़ा हो सकता है और इसमें सब्सक्रिप्शन की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। प्री-प्लेसमेंट की राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि इसमें फ्रेश इश्यू का साइज क्या होगा। ओएफएस और फ्रेश इश्यू का हिस्सा कितना होगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में रिलायंस को भेजे ईमेल का कोई जबाव नहीं आया। किस-किस की है हिस्सेदारी सूत्रों का कहना है कि रिलायंस जियो के आईपीओ में ओएफएस कंपोनेंट अहम होगा क्योंकि इससे कई मौजूदा निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा। कंपनी में विदेशी निवेशकों की 33 फीसदी हिस्सेदारी है। रिलायंस ने साल 2020 में अबू धाबी इनवेस्टमेंट फंड, केकेआर, मुबादला और सिल्वर लेक जैसे विदेशी फंड्स से 18 अरब डॉलर जुटाए थे। कई ब्रोकरेज का कहना है कि रिलायंस जियो की वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर हो सकती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनी की नजर 120 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर है। अंबानी एआई सेक्टर में भी बड़ा दांव खेल रहे हैं। एआई लेंग्वेज मॉडल विकसित करने के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में एनवीडिया से हाथ मिलाया है। टेक के साथ-साथ एआई पुश से रिलायंस जियो दूसरी स्टार्टअप कंपनियों से आगे निकल सकती है। कंपनी को सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज शुरू करने के लिए भी रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई है। रिलायंस ने अपने टेलीकॉम, इंटरनेट और डिजिटल बिजनस को मजबूत करने के लिए पिछले पांच साल में अधिग्रहण पर 3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है। अक्टूबर के अंत तक कंपनी के 46 करोड़ सब्सक्राइबर थे। पिछले साल जून में कंपनी ने टैरिफ बढ़ाया था जिसके कारण उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट आई है। लेकिन इसके बावजूद वह नंबर 1 बनी हुई है। टैरिफ बढ़ाने से सितंबर तिमाही में कंपनी के मुनाफे में काफी तेजी आई है। इसे लिस्टिंग से पहले 5जी सर्विसेज को मॉनीटाइज करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। recent visitors 76

सफलता प्राप्त करने के लिए आप को उपयुक्त साफ्टवेयर की आवश्यकता

सफलता की विशेषताओं के बारे में जानना एवं विश£ेषण करना सरल है, परंतु इनको अपने व्यक्तित्व में समाहित करना एक वास्तविक चुनौती है। सफलता की विशेषताओं में सकारात्मक सोच, स्वयं पर विश्वास, साहस, लक्ष्य के प्रति समर्पण, कुशल समय प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन आदि गुण सम्मिलित होते हैं। इनसे एक सजग व्यक्ति भली-भांति परिचित होता है। हर व्यक्ति इन गुणों को स्वयं में उतारने एवं बनाए रखने का इच्छुक होता है। किंतु जब उसका वास्तविकता से सामना होता है, तो पता चलता है कि इनका अभ्यास करना कठिन है। ऐसा आकांक्षा एवं इच्छाशक्ति के बीच एक बड़ा अंतर होने की वजह से होता है। सफलता के कारकों की सूची काफी लंबी हो सकती है, यदि इनको विभिन्न शीर्षकों-उपर्शीषकों में रखा जाए, परंतु सरल बनाने के क्रम में उनको चार शीर्षकों के अंतर्गत रखना पसंद करता हूं। जिनको सफलता के पहिए की चार तीलियां कहा जा सकता है। ये हैं-मस्तिष्क, समय, ऊर्जा एवं मानवीय संबंध। ईश्वर द्वारा मनुष्य को प्रदान किए गए इन चार बेशकीमती उपहारों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन कर आप जीवन की किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं। सफलता की शुरुआत आप के स्वयं की पहचान के साथ होती है। प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सफलता, शांति एवं प्रसन्नता हासिल करने एवं उसका अभिवर्धन हासिल करने की असीम क्षमता के साथ ईश्वर का एक अद्वितीय सृजन होता है। स्वयं की क्षमता एवं अद्वितीयता की समझ एवं पहचान एक अद्भुत अनुभव है। मैक्स लुकाडो कहते हैं-आप एक दुर्घटना नहीं हो सकते। आप थोक में पैदा नहीं हुए। आप जैसे तैसे पुर्जों को जोडकर बनाए गए उत्पाद नहीं हैं। आप सर्वशक्तिमान स्त्रष्टा द्वारा जानबूझकर नियोजित, विशिष्ट उपहार में दिए गए तथा बड़े प्यार से इस धरती पर उतारे गए हैं। हममें से हरेक व्यक्ति का इस धरती पर आने का एक उद्देश्य होता है और हर व्यक्ति में अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कुछ अद्वितीयता होती है। फिलहाल इस आलेख में मैं मस्तिष्क प्रबंधन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाल रहा हूं। मानव मस्तिष्क में असीम स्मरणशक्ति और सोचने की क्षमता होती है। विश्व का कोई भी कंप्यूटर एक स्वस्थ मस्तिष्क की बराबरी नहीं कर सकता। यहां तक कि महान वैज्ञानिक आइंस्टीन भी अपने मस्तिष्क के 15 प्रतिशत से अधिक इस्तेमाल का दावा नहीं कर सके थे। इस विश्व में हमारे मस्तिष्क के परे कुछ भी नहीं है। वास्तव में, सिर्फ हमारे मस्तिष्क की वजह से ही हमारे लिए इस विश्व का कोई अर्थ है। हमें बचपन से ही खाना, पहनना, जीवन जीना, बातचीत करना, काम करना और आनंद लेना तो सिखाया जाता है, लेकिन यह नहीं सिखाया जाता कि हमें अपने मन व मस्तिष्क को कैसे इस्तेमाल करना चाहिए, जो हमारे लिए हर चीज को संचालित करता है। कल्पना करें, बिना हमारे मस्तिष्क के इस विश्व में हमारे अधीन अथवा हमारे आसपास की चीज का क्या अर्थ रह जाएगा? निस्संदेह, हमारे लिए अपने मस्तिष्क से परे किसी भी चीज का कोई अर्थ नहीं है। इसलिए हमारी सभी उपलब्धियां हमारे मस्तिष्क के कौशलपूर्ण इस्तेमाल से सीधे संबंधित होती हैं। सफलता की कला वास्तव में हमारे मस्तिष्क के दक्षतापूर्ण संचालन की एक कला है। यहां, यह समझना महत्वपूर्ण है कि साक्षरता एवं शिक्षा में बहुत बड़ा अंतर होता है। एक व्यक्ति बिना साक्षर हुए भी पूर्ण रूप से शिक्षित हो सकता है। अकबर महान इसका एक सर्वोत्तम उदाहरण हैं। बहुत से संत महात्मा एवं धार्मिक गुरु निरक्षर थे, किंतु वे काफी ज्ञानी थे। दूसरी ओर, हमारे देश में या विश्व में कहीं भी साक्षर और उच्च डिग्री प्राप्त लोगों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन उन लोगों की संख्या काफी कम होती है जो उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने तथा इस विश्व को कुछ अर्थपूर्ण योगदान दे जाने के लिए वास्तविक रूप से स्वयं को शिक्षित होने का दावा करते हैं। सच्चे अर्थ में शिक्षा का सीधा संबंध आत्मबोध से होता है। अकादमिक शिक्षा हमें साक्षर और सूचनाओं एवं ज्ञान से समृद्ध बना सकती है, लेकिन उनका इस्तेमाल एवं अर्थवत्ता हमारी वास्तविक शिक्षा की शक्ति पर निर्भर करती है। गैलीलियो का कहना है कि आप व्यक्ति को कुछ भी नहीं सिखा सकते। आप उसे स्वयं के अंदर ढूंढने में केवल सहायता कर सकते हैं। ईश्वर ने पहले से ही हमारे मस्तिष्क को शक्ति प्रदान कर रखी है, हमें सिर्फ इस बात की खोज करनी है कि हम अधिकतम लाभ के लिए उसका कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। एक सच्चा शिक्षक वही है, जो अपने विद्यार्थी के मस्तिष्क की मौलिकता को मारे नहीं, बल्कि उसे आत्मानुभूति करने में सहायता प्रदान करे। मैं इस संबंध में गौतम बुद्ध के दर्शन में काफी विश्वास करता हूं। वे कहते हैं कि किसी भी चीज पर तब तक विश्वास मत करो, जब तक कि वह तुम्हारे अपने विवेक एवं अपनी सहज बुद्धि को स्वीकार्य न हो, चाहे जहां से तुमने उसे पढ़ा हो, या जिसने भी कहा हो, यहां तक कि मैंने भी कहा हो। इस प्रकार सफलता की मेरी कला का उद्देश्य आप सबको उन गुणों को याद दिलाना है जो पहले से ही आप के मस्तिष्क में गहरे बैठे हुए हैं। आप को सिर्फ अनुभव करने और अपनी उच्च उपलब्धियों के लिए गति प्रदान करने की जरूरत है। यहां यह समझना प्रासंगिक होगा कि हम किसी भी चीज या उससे संबंधित चीज को सही परिप्रेक्ष्य में पहचान, समझ और व्यायाख्यित करने में असमर्थ होंगे, जिससे संबंधित सूचना हमारी स्मृति में न हो। दूसरे शब्दों में, हमें अपने मस्तिष्क से इच्छित परिणाम प्राप्त करने के लिए उपयुक्त मानव साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार कंप्यूटर बिना उपयुक्त साफ्टवेयर के इच्छित परिणाम नहीं दे सकता, ठीक ऐसी ही स्थिति हमारे मस्तिष्क की होती है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आप को उपयुक्त साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। सिविल सेवा के परीक्षा के मामले में, आप के व्यक्तित्व में प्रशासनिक गुणों वाले मानव साफ्टवेयर की जरूरत होगी।   recent visitors 87