जिले का नरहरा जल प्रपात बना आकर्षण का केन्द्र

धमतरी घने जंगल में चट्टानों के बीच से गिरता दुधिया रंग का पानी यह खूबसूरत नजारा है, धमतरी जिले में मौजूद नरहरा धाम का। इसे ऋषि मारकंडे की तपोभूमि के तौर पर भी जाना जाता है. नगरी विकासखण्ड के ग्राम झूरातराई-कोटरवाही के समीप स्थित नरहराधाम प्राकृतिक जलप्रपात को पर्यटन के दृष्टिकोण से उभारा गया है। इसकी खासियत यह है कि नरहरा धाम को पर्यटन क्षेत्र के तौर पर विकसित करने के साथ-साथ इसमें ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिससे उन्हें निश्चित आय और रोजगार मुहैया हो।    नरहरा धाम को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर उसका प्रबंधन एवं नियंत्रण का प्राधिकार ग्राम समिति अथवा ग्रामसभा ग्राम कोटरवाही एवं झूरातराई के ग्रामीणों को दिया गया। यहां पहुंचने के लिए पहुंच मार्ग तैयार किया गया है। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन के द्वारा सामुदायिक शौचालय का भी निर्माण किया गया है। पर्यटन क्षेत्र में सामुदायिक शौचालय, स्वच्छता, वाहन पार्किंग, टुरिस्ट गाइड आदि का संचालन स्थानीय ग्रामीण महिलाओं और पुरूषों का समूह द्वारा की जा रही है। धमतरी जिला मुख्यालय से तकरीबन 35 किलोमीटर दूर यह नरहरा धाम कुकरेल से बिरझुली जाने वाली पक्की सड़क के बाद कोटरवाही से 5 किलोमीटर है। जलप्रपात का स्वरूप पूरी तरह से प्राकृतिक है और आसपास का पूरा पानी बहकर आगे बढ़ने के दौरान नरहरा धाम में जलप्रपात का स्वरूप लेता है। चट्टानों के ऊपर से पानी का बहाव साफ जाहिर करता है कि पानी के तेज बहाव में चट्टानों को काटकर क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य दिया है यह पानी आगे बढ़कर महानदी में जाकर मिलता है।  नरहरा धाम पर्यटन के दृष्टि से ऐतिहासिक स्थल होने के साथ-साथ धार्मिक आस्था का केंद्र भी है। यहां कभी ऋषि मारकंडे तप किया करते थे और यह जगह उनका तपस्थली हुआ करता था। इसी जगह पर माता नारेश्वरी देवी का मंदिर भी स्थापित किया गया है। रोजाना यहां सैकड़ों लोग पिकनिक मनाने पहुंचते है। recent visitors 54

भजनलाल शर्मा की पहल पर वर्षाजल सहेजने की परम्परा को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू किया गया

जयपुर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर वर्षाजल सहेजने की परम्परा को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू किया गया “कर्मभूमि से मातृभूमि“ अभियान प्रदेश में भूजल स्तर की गिरावट को रोकने में महती भूमिका निभायेगा जिसके तहत राज्य सरकार भामाशाहों और प्रवासी राजस्थानियों को साथ लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रिचार्ज शाफ्ट संरचनाओं का निर्माण करेगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह अभियान जल संचयन में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अनूठी संकल्पना “कैच द रेन" से प्रेरित है। गत अक्टूबर में सूरत में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने ’जन्मभूमि से कर्मभूमि-जल संचय- जनभागीदारी- जनआंदोलन’ कार्यक्रम की रूपरेखा रखी थी। शुरुआती स्तर पर इस अभियान के तहत सिरोही, पाली, जोधपुर, भीलवाड़ा, झुंझुनूं और जयपुर जिलों में कार्य प्रारम्भ किए गए हैं। अन्य प्रदेशों को अपनी कर्मभूमि बना चुके प्रवासी राजस्थानी व्यवसायी, उद्यमी एवं अन्य अग्रणी लोगों को जोड़कर भावनात्मक रूप से प्रेरित करते हुए राजस्थान में अपने गांव में जल संरक्षण गतिविधियों में शामिल होकर वर्षा जल संचयन और जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्थानीय भामाशाहों के अलावा प्रवासी राजस्थानी क्राउड फंडिंग के माध्यम से और कॉरपोरेट्स सीएसआर फंडिंग के माध्यम से इस अभियान के तहत रिचार्ज शाफ्ट संरचनाओं के निर्माण में सहयोग दिया जा सकता हैं। उल्लेखनीय है कि भूजल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण 216 पंचायत समितियां यानी प्रदेश का 72 प्रतिशत भाग अतिदोहित श्रेणी में आ गया है, जिसमें भूजल की गुणवत्ता भी खराब हुई है। इस अभियान से भूजल स्तर में गिरावट रोकने के साथ-साथ घरेलू उपयोग तथा कृषि कार्यों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। अभियान में पर्यावरण अनुकूल रिचार्ज शाफ्ट संरचनाओं से व्यर्थ बह जाने वाले वर्षा जल और भाप बन कर उड़ जाने वाले सतही जल की एक-एक बूंद के संचय, संग्रहण एवं पुर्नभरण पर बल दिया जाएगा।   recent visitors 68

ओडिशा के राज्यपाल बने डॉ. हरि बाबू कंभमपति

भुवनेश्वर डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने शुक्रवार को राजभवन में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान ओडिशा के राज्यपाल के पद की शपथ ली। उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह ने डा़ कंभमपति को पद की शपथ दिलाई। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन माझी, उनके मंत्रिपरिषद के सदस्य, विपक्ष के नेता नवीन पटनायक, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल, राज्य के मुख्य सचिव मनोज आहूजा, पुलिस महानिदेशक योगेश बहादुर खुरानी और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। डॉ. कंभमपति गुरुवार को भुवनेश्वर पहुंचे और अपने परिवार के साथ पुरी का दौरा कर श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की पूजा की और पुरी राजभवन में रात्रि विश्राम किया। उन्होंने ओडिशा के 27वें राज्यपाल के रूप में शपथ लेने के बाद राजभवन में गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बी.टेक, इलेक्ट्रिकल और कंट्रोल सिस्टम में एम.ई. और नियंत्रण प्रणाली में पीएच.डी. किया है। डॉ. कंभमपति ने 24 वर्षों तक आंध्र विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में काम किया। डॉ. कंभमपति का राजनीतिक करियर उनके छात्र वर्षों के दौरान शुरू हुआ जब उन्होंने आंध्र राज्य के निर्माण के समर्थन में जय आंध्र आंदोलन में एक छात्र नेता के रूप में भाग लिया। उन्होंने टेनेटी विश्वनाथम, गौथु लचन्ना और वेंकैया नायडू जैसे उल्लेखनीय नेताओं के साथ काम किया। उन्होंने 1972 से 1973 तक आंध्र विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र संघ के सचिव के रूप में भी कार्य किया। डा़ कंभमपति 1974 से 1975 तक आपातकाल के विरोध में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में लोक संघर्ष समिति के आंदोलन में शामिल हुए। उन्हें आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (एमआईएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया और विशाखापत्तनम सेंट्रल जेल और मुशीराबाद जेल में छह महीने के लिए कैद किया गया। वह 1977 में जनता पार्टी की आंध्र प्रदेश राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य बने और 1978 में आंध्र प्रदेश राज्य जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 1990 के दशक की शुरुआत में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन किया एवं आंध्र प्रदेश राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य (1991-1993) और राज्य इकाई के महासचिव (1993-2003) के रूप में कार्य किया। 1999 में डॉ. कंभमपति विशाखापत्तनम-I विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और 2003 में आंध्र प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता बने। मार्च 2014 में उन्हें अध्यक्ष के रूप में चुना गया। भाजपा राज्य इकाई और भाजपा उम्मीदवार के रूप में विशाखापत्तनम लोकसभा क्षेत्र से 2014 का आम चुनाव जीता। डॉ कंभमपति को 19 जुलाई 2021 को मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। बाद में 26 दिसंबर 2024 को उन्हें ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया।   recent visitors 191

सक्ती जिले में मंत्री राजवाड़े ने ली समीक्षा बैठक

रायपुर, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सक्ती जिले के कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में सभी विभागों के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने जिले में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनहितकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन करते हुए आमजन को ज्यादा से ज्यादा लाभान्वित कराने के निर्देश दिए। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को विभिन्न ग्राम पंचायतों में जाकर स्व-सहायता समूह को स्वच्छ भारत मिशन सहित अन्य कार्यों के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए है।      समीक्षा बैठक में सांसद लोकसभा क्षेत्र जांजगीर-चांपा श्रीमती कमलेश जांगड़े, पूर्व विधायक डॉक्टर खिलावन साहू, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती विद्या सिदार, जिला पंचायत सदस्य श्री टिकेश्वर गबेल, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा सहित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।      मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने समीक्षा बैठक में सक्ती जिले में अब तक किये गए पौधरोपण के कार्यों की जानकारी लेते हुए रोपित किये गए पौधों की देख रेख करने के निर्देश दिए। मंत्री ने समीक्षा बैठक में जिले के विभिन्न ग्रामों में मनरेगा अंतर्गत कौन-कौन से कार्य चल रहे है तथा कितने लोगों को मनरेगा अंतर्गत कार्य उपलब्ध कराया गया है की विस्तारपूर्वक जानकारी ली। श्रीमती राजवाड़े ने जिले के किसानों को धान के बदले अन्य फसल लेने के लिए कृषि विभाग के मैदानी अमलांे द्वारा जमीनी स्तर पर जागरुक करते हुए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने खाद्य अधिकारी से धान खरीदी कार्याे की जानकारी ली। जिले में बारदानो की उपलब्धता, धान उठाव की स्थिति, संग्रहण केन्द्रों की भण्डारण क्षमता, छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत जारी किये गए राशनकार्ड की संख्या सहित अन्य कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी लेते हुए सुव्यवस्थित रूप से धान खरीदी कार्य कराये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले में विभिन्न निर्माण कार्यों को गुणवत्तापूर्ण करने के निर्देश दिए।      मंत्री ने समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत पूरक पोषण आहार कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओ की संख्या, शिशुवती माताओं की संख्या, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, पोषण पुनर्वास केंद्र, नोनी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, सुकन्या समृधि योजना सहित अन्य विभिन्न विभागीय योजनाओं व कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। मंत्री ने सक्ती जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका भर्ती प्रक्रिया के वर्तमान स्थिति की जानकारी ली तथा उक्त भर्ती प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और उचित ढंग से नियमानुसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने महतारी वंदन योजना के लक्ष्य और उसके विरुद्ध किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। मंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी को जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों की व्यवस्थाए अच्छी रखने तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले बच्चों को नैतिक शिक्षा देने कहा।      मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित अन्य विभागों के योजनाओं की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सभी जरूरतमंद को मिले। recent visitors 52

46,000 KM/h की स्पीड से गुजरेंगे 2 विशाल एस्ट्रॉयड, नासा ने आज दो एस्ट्रॉयड के धरती के पास से गुजरने का अलर्ट जारी किया

नई दिल्ली नासा ने आज दो एस्ट्रॉयड के धरती के पास से गुजरने का अलर्ट जारी किया है। ये दोनों एस्ट्रॉयड तेज़ गति से धरती की ओर बढ़ रहे हैं और आज रात इनका धरती के पास से गुजरना तय है। हालांकि इनसे धरती को कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन अगर ये सोलर तूफान के संपर्क में आते हैं, तो उनकी टक्कर से तबाही मच सकती है। इन एस्ट्रॉयड्स के धरती के पास से गुजरने के दौरान कंपन (भूकंप) जैसा महसूस हो सकता है। अगर टक्कर होती है, तो भूकंप, तूफान और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाएं हो सकती हैं, साथ ही इलेक्ट्रिक और इंटरनेशनल शटडाउन भी हो सकते हैं। इन एस्ट्रॉयड्स का धरती से टकराना तो बेहद असंभव है, लेकिन वैज्ञानिक इन पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी संभावित खतरे से निपटा जा सके। एस्ट्रॉयड की जानकारी 2024 YF7: इसका आकार एक बड़े हवाई जहाज के बराबर है (78 फीट)। यह 3 जनवरी को धरती के पास से करीब 2:53 बजे गुजरा और इसकी स्पीड 30,367 मील प्रति घंटे थी। इसकी धरती से दूरी 20,80,000 मील थी।  2024 YR9: इस एस्ट्रॉयड का आकार 76 फीट है और इसकी गति 46,338 मील प्रति घंटे रहेगी। इसकी धरती से दूरी भी 20,80,000 मील होगी। एस्ट्रॉयड से मिलने वाली जानकारी एस्ट्रॉयड्स सौर मंडल के अतीत के बारे में अहम जानकारी देते हैं। ये आकाशीय दुनिया को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करते हैं और हमें सौर मंडल के बनने की प्रक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण सुराग देते हैं। इनकी निगरानी करना जरूरी है ताकि हम संभावित खतरों से निपटने के लिए तैयार रह सकें। recent visitors 61

चंगेज़ खान जैसे धुर्तों ने भारतीय सनातन संस्कृति की धरोहर को तोड़कर मस्जिदों को बनाया है: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

रामपुर रामपुर में एक निजी कार्यक्रम में प्रवचन करने पहुंचे बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने हिन्दुत्व को जगाने की बात की। अपने पूरे प्रवचन के दौरान उन्होंने हिंदुत्व जनजागरण और हिन्दुओं की तरक्की को लेकर प्रवचन दिए, उन्होंने कहा देश मे केवल एआई नहीं एचआई भी होना चाहिए जिसमें एच आई का मतलब उन्होंने हिन्दुत्व इंटेलिजेंस बताया। प्रवचन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए भी हिंदुत्व को लेकर कई बड़े बयान दिए। भारत हिंदू राष्ट्र के लिए हमारी कोशिशें, हमारा प्रयत्न है भारत हिंदू राष्ट्र बने, हिंदू राष्ट्र का मतलब किसी मजहब के खिलाफ नहीं हिंदू राष्ट्र का मतलब सबको लेकर चलना जैसे दुबई में सभी कल्चर संस्कृति रहती हैं। वैसे भी भारत में सबको रहने का अधिकार है यह भारत किसी का नहीं सबका है। सबके दादा परदादाओं ने आज़ादी के लिए युद्ध लड़े हैं। अपने प्राणों की आहुतियां दी हैं। हिंदुत्व का मतलब यह है जीवन जीने की सही विचार धारा। हिंदुत्व का मतलब अहिंसावादी जीवन है। 'हिंदुत्व का मतलब भारत को विश्व गुरु बनाने की पहल' संभल पर दिए बयान को लेकर हो रही चर्चाओं पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि संभल वाले बयान में हमने कुछ गलत नहीं दिया हैं। वहां के कलेक्टर महोदय, वहां के एसपी महोदय, वहां के कार्यकर्ता, पुलिस अधिकारी, पदाधिकारी, धन्यवाद के पात्र हैं। सदियों से बंद पड़े हनुमान मंदिर शिव मंदिर को खोद निकाला। सनातन का युग स्वर्णं युग है। हमारे देश में आक्रांताओं ने बाबर ने ब्रिटिश के समय में मुगलों ने चंगेज़ खान जैसे धुर्तों ने भारतीय सनातन संस्कृति की धरोहर को तोड़कर मस्जिदों को बनाया है। अब वहां पुनः मंदिर स्थापित हो रहे हैं। इसलिए मुसलमानों से हम यही कहेंगे और सभी मजहब के लोगों से कि आप बिल्कुल टेंशन ना लें आपके मजहब के खिलाफ सनातन संस्कृति के लोग नहीं हो सकते। जहां जहां मंदिर थे बस वहां वहां मंदिर बनेंगे बस इतना होना है। 'हमारे मंदिर की जांच करवा लें हमें कोई दिक्कत नहीं' धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा कि अब हमारे बयान के बाद ओबीसी के पेट में दर्द हो रहा है तो उनकी मूर्खता है। बल्कि उन्हें उदार दिल दिखाते हुए कहना चाहिए कि गुरुजी जितने सनातन धर्म के मंदिर हैं। हमारी तरफ से स्वागत है और हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करना देश की आचार्य श्रद्धा को न मानना है। देश के संविधान का मजाक उड़ाना है। हम तो कहते हैं हमारे मंदिर की जांच करवा लें हमें कोई दिक्कत नहीं है। भैया हिंदुओ को तो दिक्कत नहीं होगी। कितने भी मंदिरों की जांच हो जाए? उन्हें क्यों दिक्कत है इसका मतलब खोट है। उन्हें पता है के अंदर शिव जी बैठे हुए हैं। recent visitors 122

कृषि मंत्री ने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि दर्शिका 2025 का किया विमोचन

रायपुर, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने आज यहां नया रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि दर्शिका 2025 का विमोचन किया। कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि दर्शिका में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे अनुसंधान एवं विस्तार कार्यों के साथ ही नवीनतम कृषि प्रौद्योगिकी तथा किसानों के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारियों को शामिल किया गया है। यह कृषि दर्शिका किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कृषि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के किसानों के हित में इसी प्रकार निरंतर प्रयासरत रहे। मंत्री श्री नेताम ने कृषि दर्शिका के प्रकाशन हेतु इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं उनके सहयोगियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कृषि मंत्री को विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि दर्शिका 2025 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि दर्शिका में छत्तीसगढ़ राज्य की सामान्य जानकारी, कृषि क्षेत्रफल, प्रमुख कृषि फसलों, उनकी उत्पादन तकनीक, कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे अनुसंधान एवं विस्तार कार्य योजनाओं, गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी शामिल किया गया है। दर्शिका में विभिन्न खरीफ एवं रबी फसलों जिनमें अनाज, दलहन, तिलहन, लघु धान्य फसलें, चारा फसलें, औषधीय एवं सुगंधित फसलें तथा फल, फूल एवं सब्जी वाली फसलों की उन्नत कृषि कार्यमाला प्रकाशित की जाती है। इसके साथ ही कृषि विश्वविद्यालय की विगत वर्ष की गतिविधियों एवं उपलब्धियों, विश्वविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न फसलों की उन्नत किस्मों तथा विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एवं प्रसारित कृषक उपयोगी प्रौद्योगिकी की जानकारी भी प्रकाशित की जाती है। विभिन्न फसलों के प्रमुख कीट एवं प्रमुख रोग तथा उनका प्रबंधन भी शामिल किया जाता है। इसके साथ ही केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा किसानों के लिए संचालित विकास एवं कल्याण योजनाओं, उनके तहत दी जाने वाली सुविधाओं एवं अनुदान के संबंध में जानकारी दी जाती है। कृषि दर्शिका में कृषि विश्वविद्यालय, कृषि तथा संबंधित विभागों एवं किसानों के लिए उपयोगी अन्य संपर्क सूत्रों की जानकारी भी प्रकाशित की गई है। विमोचन समारोह में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेश विस्तार सेवाएं डॉ. एस.एस. टुटेजा, डॉ. नीता खरे, डॉ. ज्योति भट्ट, डॉ. दीप्ति झा एवं संजय नैयर उपस्थित थे। recent visitors 42