Friday, July 3, 2026 2:59 pm

फिल्म द पैराडाइज का ऐलान, जल्द शुरू होगी शूटिंग

मुंबई,  प्रोडक्शन हाउस एसेसलवी सिनेमा ने अपनी अगली फिल्म 'द पैराडाइज' का ऐलान कर दिया है। श्रीकांत ओडेला के निर्देशन में बनने वाली यह फिल्म का ऐलान दिलचस्प पोस्टर के साथ किया गया। फिल्म द पैराडाइज में म्यूजिक की कमान रॉकस्टार अनिरुद्ध रविचंदर ने संभाली है। फिल्म द पैराडाइज में अभिनेता नानी लीड रोल में नजर आएंगे। फिल्म पैराडाइज के निर्माता एसएलवी प्रोडक्शन ने सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प पोस्टर शेयर करते हुए लिखा है, "हैदराबाद की धड़कनें पूरी दुनिया में गूंजेंगी। द पैराडाइज में रॉकस्टार अनिरुद्ध का म्यूजिक है, निर्देशक श्रीकांत ओडेला है और फिल्म में मुख्य कलाकार नानी हैं। शूटिंग जल्द ही शुरू होगी।यह फिल्म तीन शानदार ताकतों का मिलाजुला परिणाम होगी: नेचुरल स्टार नानी, निर्देशक श्रीकांत ओडेला, और रॉकस्टार अनिरुद्ध रविचंदर।' तेलुगु और तमिल सुपरस्टार नानी इन दिनों शानदार सफलता की राह पर हैं। उनके पिछले फिल्में जैसे 'सारिपोढा शनिवाराम' और 'दसरा' ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है, और अब 'द पैराडाइज' उनके इस बेहतरीन सफर में एक और महत्वपूर्ण जुड़ाव है। नानी की आने वाली फिल्म 'द पैराडाइज' में एक और धमाल होने वाला है, जिसे निर्देशक श्रीकांत ओडेला बना रहे हैं। नानी और श्रीकांत ओडेला की ये दूसरी बार साझेदारी है और दोनों की जोड़ी पहले भी सफल साबित हो चुकी है।     recent visitors 44

कैबिनेट ने दी मंजूरी, जारी रहेगी ढाई लाख की सब्सिडी, शहरी क्षेत्रों में हितग्राहियों को अगले पांच सालों में 10 लाख आवास उपलब्ध कराए जाएंगे

भोपाल शहरों को झुग्गीमुक्त करने की दिशा में राज्‍य सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में हितग्राहियों को आगामी पांच वर्ष में 10 लाख आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 को स्वीकृति दे दी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 50 हजार करोड़ रुपये निवेश करेंगी, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बनेंगे। ऐसे समझें किसे क्‍या लाभ मिलेगा प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत दस लाख आवास बनाए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास बनाने वाले को ढाई लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसमें डेढ़ लाख रुपये केंद्र और एक लाख रुपये राज्य सरकार से मिलेंगे। भू-संपदा विनियामक अधिकरण (रेरा) से पंजीकृत बिल्डर द्वारा बनाए आवास लेने पर अनुदान का वाउचर दिया जाएगा। इसका प्रावधान योजना में प्रदेश सरकार की ओर से किया गया है। इसे मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही इंदौर की हुकमचंद मिल की भूमि पर हाउसिंग बोर्ड बड़ी आवासीय परियोजना लाएगा। इसका भी अनुमोदन किया गया। लागत निकालने के बाद इससे जो लाभ होगा, उसमें आधा हिस्सा इंदौर नगर निगम को दिया जाएगा। ढाई लाख की सब्सिडी जारी रहेगी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 शहरी प्रदेश में लागू करने की सहमति केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। अब इसे लागू करने का अनुमोदन कैबिनेट द्वारा किया गया। योजना में पांच वर्ष में दस लाख आवास निर्मित किए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा। बिल्डरों की एक वाइड श्रेणी बनाई जाएगी। इसमें वे बिल्डर शामिल किए जांएगे, जिनकी योजना को रेरा से अनुमति होगी और रिकार्ड अच्छा होगा। योजना के तहत पात्र व्यक्तियों को इनसे आवास लेने पर अनुदान का वाउचर दिया जाएगा। योजना में उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास कहीं भी पक्का आवास नहीं है। नौ लाख रुपये तक की वार्षिक आय और राज्य व केंद्र सरकार की किसी भी आवास योजना में लाभ ले चुके व्यक्ति योजना के लिए अपात्र होंगे। ऐसे व्यक्ति, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक हो और उनके पास स्वयं का भूखंड हो, उन्हें मकान बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से ढाई लाख रुपये की मदद की जाएगी। यह राशि तीन किस्तों में दी होगी। इसी तरह सरकारी या निजी एजेंसी की परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 30 से 45 वर्ग मीटर का फ्लैट दिलाया जाएगा। हुकुमचंद मिल की भूमि पर बनेगी टाउनशिप, 3,700 करोड़ का होगा निवेश हुकुमचंद मिल की देनदारी 436 करोड़ रुपये चुकाने के बाद अब इसकी 17.52 हेक्टेयर भूमि पर टाउनशिप बनाई जाएगी। 40 प्रतिशत भूमि पर आवासीय परियोजना तो शेष 60 प्रतिशत भूमि का उपयोग वाणिज्यिक किया जाएगा। लगभग 5,100 करोड़ रुपये का निवेश होगा और दस लोगों को रोजगार मिलेगा। परियोजना में 2,323 करोड़ रुपये के अन्य कार्य कराए जाएंगे, जिससे शहर की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। सरकार को जीएसटी के रूप में 400 करोड़, निर्मित क्षेत्र के विक्रय से 600 करोड़, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क सहित अन्य कर से लगभग 1,200 करोड़ रुपये मिलेंगे। परियोजना के लिए नगर निगम इंदौर भूमि की रजिस्ट्री बिना नीलामी के हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में करेगा। इस पर लगभग 19 करोड़ रुपये का शुल्क लगेगा। हाउसिंग बोर्ड को अनुज्ञेय फर्शी तल अनुपात से .5 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर मिलेगा यानी अधिक निर्माण कार्य हो सकेगा। यह अभी दो प्रतिशत है। परियोजना लागत निकालने के बाद जो लाभ होगा, वो नगर निगम इंदौर और हाउसिंग बोर्ड के बीच बराबर बंटेगा। कैबिनेट के महत्‍वपूर्ण फैसले ये भी निजी डेवलपर से हितग्राही यदि आवास खरीदता है तो अनुदान का बाउचर दिया जाएगा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित अन्य बड़े शहरों को मलिन बस्ती मुक्त करने की दिशा में पीपीपी माडल पर आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। नगरीय निकाय, राज्य की अन्य निर्माण एजेंसी के साथ निजी बिल्डर आवास बनाकर देंगे। इसके साथ ही कामकाजी महिला, औद्योगिक श्रमिक, शहरी प्रवासी, बेघर, निराश्रित, छात्रों सहित अन्य पात्र हितग्राहियों के लिए किराए पर आवास बनाकर उपलब्ध किए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा। बिल्डरों की एक वाइट श्रेणी बनाई जाएगी। इसमें वे बिल्डर शामिल किए जांएगे, जिनकी योजना को रेरा से अनुमति होगी और रिकार्ड अच्छा होगा। केंद्र सरकार ने योजना में अविवाहित कमाऊ वयस्क सदस्यों को अलग से लाभ दिए जाने का प्रविधान समाप्त कर दिया है। एक हितग्राही परिवार में अब पति, पत्नी, अविवाहित बेटा-बेटियां शामिल होंगे। 20 वर्ष में किसी भी आवासीय योजना में लाभ प्राप्त करने वाले अपात्र होंगे। सफाई कर्मी, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा योजना के हितग्राही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मलिन बस्ती के निवेश या विशेष समूह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हितग्राही पांच वर्ष तक आवास न तो बेच सकेंगे, न ही किसी को स्थानांतरित कर सकेंगे। recent visitors 21

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव : समय खत्म होने के बाद नामांकन जमा नहीं हो सकेगा तो कांग्रेसी नेता ने किया हंगामा

गौरेला पेंड्रा मरवाही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नामांकन के आखिरी दिन गौरेला में एक कांग्रेसी नेता की दबंगई का मामला सामने आया है. कांग्रेस नेता गजरूप सिंह सलाम ग्राम पंचायत मेढूका में बने एआरओ कार्यालय पहुंचे और निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी पंच पद के लिए अपने किसी समर्थक का नामांकन जमा करने चुनाव अधिकारी पंचायत सचिव पर दबाव बनाने लगे. जब उन्हें पंचायत सचिव ने बताया कि समय बीत गया है और नामांकन जमा नहीं हो सकेगा तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया और गाली गलौच देते हुए सबको देख लेने की धमकी देने लगे. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बता दें कि गजरूप सिंह सलाम के भाई की पत्नी नेहा सलाम को कांग्रेस ने जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 8 से अपने प्रत्याशी बनाए जाने का समर्थन भी दिया है. वायरल वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि कांग्रेसी नेता किस प्रकार देख लेने की धमकी दे रहे हैं. इतना ही नहीं अपने भाई की पत्नी के जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का दावा करते हुए अधिकारियों को देख लेने की चेतावनी दे रहे हैं. वहीं वहां मौजूद पुलिस के जवान कुलदीप चतुर्वेदी ने हंगामा मचाने वाले नेता को अपने साथ गौरेला थाना ले गए. शिकायत नहीं होने पर कांग्रेस नेता को चेतावनी देकर छोड़ा इस मामले में अभी तक कोई शिकायतकर्ता के नहीं होने के कारण कांग्रेस नेता को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है. इस मामले में एडिशनल एसपी ओम चंदेल ने बताया कि किसी प्रकार की शिकायत नहीं मिलने पर थाने से कांग्रेस नेता को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है. वहीं नेताजी के हंगामे की सोशल मीडिया में जमकर चर्चा हो रही है. recent visitors 49

मंत्री परमार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर सीएम राइज विद्यालय गौलाना में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा का हुआ अनावरण

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लागू होने के बाद से ही, प्रदेश में शिक्षा में आमूलचूल और व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। मध्यप्रदेश नए संकल्प के साथ, भारत केंद्रित शिक्षा और भारतीय दर्शन से समृद्ध शिक्षा की ओर सतत् आगे बढ़ रहा है। शिक्षा में व्यापक परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में, राज्य सरकार ने सीएम राइज योजना के अंतर्गत विद्यालय स्थापित किए हैं। निर्धनता, अब शिक्षा अर्जित करने में बाधा नहीं बन सकेगी। निर्धन अभिभावक का दर्द समझकर ही सीएम राइज योजना अंतर्गत विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। सभी वर्ग के विद्यार्थी समान रूप से गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा अर्जित कर सकेंगे। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कही। मंत्री परमार मंगलवार को शाजापुर जिले की शुजालपुर विधानसभा के गौलाना स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सीएम राइज विद्यालय में "भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम" में संबोधित कर रहे थे। मंत्री परमार ने गौलाना स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सीएम राइज विद्यालय में भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक भारत रत्न बाबा साहेब डॉ.भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश के प्रथम सीएम राइज विद्यालय के रूप में स्थापित होने के समय ही, हमने इस विद्यालय का नामकरण बाबा साहेब के नाम पर कर दिया था। परमार ने कहा कि बाबा साहेब का संपूर्ण जीवन देश और समाज के लिए एवं सभी के लिए समान अधिकारों के लिए समर्पित रहा। इसके लिए उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना था। परमार ने कहा कि बाबा साहेब सभी के लिए श्रद्धा का केंद्र हैं, सभी वर्ग के लोग उनका सम्मान करते हैं और उनके जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेते हैं। मंत्री परमार ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे डॉ. अंबेडकर के जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेकर, उनके विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात् करें और उनकी तरह ही राष्ट्र निर्माण के लिए देशभक्त एवं ईमानदार नागरिक बनने की ओर आगे बढ़ें। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। परमार ने कहा कि विद्यालय परिसर में महापुरुषों के लिए कथनों पर आपस में संवाद कर, उन्हें अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करें। परमार ने कहा कि गौलाना में शीघ्र ही महाविद्यालय का भी लोकार्पण होगा, इससे विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर सुलभ रूप से गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक उच्च शिक्षा प्राप्त हो सकेगी। परमार ने विद्यार्थियों से कहा कि मातृभूमि, जन्मभूमि, मां गंगा जैसी नदियां एवं गौमाता, इन चार माताओं के प्रति जीवन भर कृतज्ञता ज्ञापित करने का भाव जागृत करें। परमार ने कहा कि निरंतर अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से आगे बढ़ें और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता के भाव को आत्मसात् करें। परमार ने कहा कि हम सभी की सहभागिता से स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत पुनः विश्वमंच पर सिरमौर बनेगा। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने विद्यालय का भ्रमण कर शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा भी की और विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई के बारे में संवाद भी किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया, जिला शिक्षा अधिकारी विवेक दुबे, अंतर सिंह जादौन, मांगीलाल, महेंद्र गोवा, योगेंद्र सिंह बंटी बना, राजेश कुमार पाटीदार एवं विद्यालय के प्राचार्य गोपाल कृष्ण शर्मा सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य जन उपस्थित थे।   recent visitors 45

राजधानी भोपाल में भीख मांगने और देने पर बैन, उल्लंघन करने वालों पर होगी क़ानूनी कार्रवाई

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भीख मांगना और भीख देना अपराध की श्रेणी में आ गया है. कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इसके लिए आदेश जारी किया है, जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगने और देने दोनों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है और इसका उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी. भीख मांगने पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया? डीएम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राजधानी भोपाल में ट्रैफिक सिग्नलों, चौराहों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने वाले लोग यातायात में बाधा डालते हैं और शासन के आदेशों की अवहेलना करते हैं. इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि भीख मांगने में अन्य राज्यों और शहरों के लोग भी संलग्न रहते हैं, जिनमें से कई का आपराधिक इतिहास होता है. इनमें से कई व्यक्ति नशे और अन्य अवैध गतिविधियों में भी लिप्त पाए गए हैं. इसके अलावा, भीख मांगने की आड़ में कई आपराधिक गिरोह भी सक्रिय हैं, जो इसका फायदा उठाते हैं. ट्रैफिक सिग्नलों पर दुर्घटनाओं का खतरा भीख मांगने का एक और बड़ा खतरा सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ा है. अक्सर देखा गया है कि भिक्षुक ट्रैफिक सिग्नलों पर गाड़ियों के बीच आकर भीख मांगते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है. भोपाल प्रशासन ने इसे एक सामाजिक बुराई मानते हुए इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है. भीख देने वाले पर भी होगी कार्रवाई भोपाल कलेक्टर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सिर्फ भीख मांगना ही नहीं, बल्कि भिक्षुकों को भिक्षा देना या उनसे कोई सामान खरीदना भी अपराध माना जाएगा. अगर कोई व्यक्ति किसी भिक्षुक को भोजन, पैसे या अन्य चीजें देता है या उनसे कोई सामान खरीदता है, तो इसे भी इस आदेश का उल्लंघन माना जाएगा और उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. भिक्षुओं के लिए आश्रय स्थल की व्यवस्था प्रशासन ने भीख मांगने पर पूरी तरह से रोक लगाने के साथ ही, भिक्षुकों को पुनर्वासित करने के लिए विशेष प्रबंध भी किए हैं. आदेश के अनुसार, कोलार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आश्रय स्थल को भिक्षुक गृह के रूप में आरक्षित किया गया है. प्रशासन का कहना है कि इससे बेघर और बेसहारा भिक्षुकों को रहने के लिए उचित स्थान मिलेगा और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा. आदेश का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई डीएम कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने यह भी कहा कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसे सार्वजनिक प्रचार, समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा. यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. भीख न देने पर बदतमीजी दरअसल, एक नागरिक ने भीख न देने पर भिखारी द्वारा की गई बदतमीजी की शिकायत की थी। पुलिस ने भिखारी को पकड़ा और पूछताछ की। जमानती धारा होने के कारण उसे नोटिस देकर छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए भीख मांगने और देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी नए आदेश के अनुसार भोपाल की सीमा में कोई भीख नहीं मांग सकता। कोई भी किसी को भीख नहीं दे सकता। यहां तक कि भिखारियों से कोई सामान खरीदना भी मना है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। प्रशासन चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करेगा। इससे नियम तोड़ने वालों पर नज़र रखी जा सकेगी। इस नियम के तहत निकाला आदेश यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है। इस धारा के तहत प्रशासन को लोगों की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार है। भिक्षावृत्ति करने वालों के लिए पुनर्वास भिखारियों के पुनर्वास के लिए भी व्यवस्था की गई है। कोलार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भिक्षुक गृह बनाया गया है। यहां भिखारियों के रहने, खाने-पीने की व्यवस्था होगी। उन्हें यहां आश्रय दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे भिखारियों को भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। यह कदम शहर की सुंदरता और सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है। इससे नागरिकों को भीख मांगने वालों से होने वाली परेशानी से भी निजात मिलेगी।   recent visitors 52

रेलवे की गति को शक्ति देने वाला बजट

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में बड़े परिवर्तन के आसार पहले से ही दिखाई पड़ रहे थे। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए एक ऐसे समावेशी वातावरण का निर्माण आवश्यक है जहां लोग दकियानुसी विचारों को छोड़कर अग्रगामी सोच अपनाते हुए नवाचारों को बढ़ावा दें। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट के माध्यम से नए और विकसित भारत की नींव रखने का काम किया है। विकसित भारत में परिवहन के सभी साधनों का विकसित होना अपरिहार्य है। भारतीय रेल – देश की जीवन रेखा है, परिवहन का सबसे सशक्त माध्यम है। नए विकसित भारत में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मिडिल क्लास की होने वाली है। मिडिल क्लास की पहली पसंदीदा सवारी भारतीय रेल ही है। यही कारण है कि करोड़ों लोग रेलवे व्यवस्था के नवीकरण की ओर टकटकी लगाए देखते रहते हैं। जम्मू से कश्मीर तक की रेल कनेक्टिविटी और तमिलनाडु में पंबन पर नई तकनीक के पुल के निर्माण ने आम लोगों को भारतीय रेल पर गर्व करने का मौका दिया है। अश्विनी वैष्णव के प्रभावशाली नेतृत्व में भारतीय रेल ने तमाम किस्म की चुनौतियों पर विजय पाते हुए कश्मीर वैली को भारत के मुख्य नेटवर्क से जोड़ने में कामयाबी हासिल की है। पंबन चैनल पर बना पुल भी अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है जिसके माध्यम से रामेश्वरम को एक बार फिर से भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दोनों गौरवशाली परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इस वर्ष के बजट में किए गए प्रावधान भारतीय रेल को मजबूती प्रदान करने वाले हैं। भारतीय रेल के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में ₹ 2,52,200 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसी तरह अगले वित्तीय वर्ष के लिए कुल पूंजीगत व्यय (Capex) ₹ 2,65,200 करोड़ निर्धारित किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार रेल परियोजनाओं के मामले में काफी गंभीर है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2009-14 में भारतीय रेल का कैपेक्स मात्र ₹ 45,900 करोड़ था। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय रेल युवाओं की आकांक्षाओं और उनके सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत ट्रेनों की त्रिवेणी तथा 1300 से अधिक अमृत भारत स्टेशन का नवनिर्माण कर भारतीय रेल एक ऐसा दृष्टांत प्रस्तुत करने वाली है जिस पर हर भारतीय को गर्व होगा और वह कह सकेंगे कि उनके देश की रेल व्यवस्था विश्व की श्रेष्ठ रेलवे व्यवस्थाओं में से एक है। विगत 10 वर्षों में पूरे रेल व्यवस्था का कायाकल्प हुआ है। समग्र पूंजीगत व्यय का फोकस – नेटवर्क विस्तार, सुरक्षा, विद्युतीकरण, और रोलिंग स्टॉक एवं बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में पिछले 10 वर्षों में जितनी रेल लाइनों का निर्माण हुआ है, वह स्विटजरलैंड, मलेशिया और बेल्जियम जैसे देशों के कुल रेलवे नेटवर्क से अधिक है। नई रेल लाइनों के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में ₹ 32,235.24 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। जबकि वित्त वर्ष 2009-14 में नई रेल लाइनों के निर्माण हेतु औसत वार्षिक बजट केवल ₹ 5,075 करोड़ था। वित्त वर्ष 2025-26 में गेज परिवर्तन के लिए ₹ 4,550 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2009-14 में इसका औसत वार्षिक बजट ₹ 3,088 करोड़ था। रोलिंग स्टॉक के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में ₹ 57,693 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2009-14 में इसका औसत वार्षिक बजट ₹ 16,029 करोड़ था। इस राशि का उपयोग कर सैकड़ो की संख्या में नए वंदे भारत एक्सप्रेस, नमो भारत रैपिड रेल और अमृत भारत ट्रेनों की व्यवस्था की जानी है। जिन शहरों के बीच वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत का परिचालन प्रारंभ हुआ है,  वहाँ के लोगों ने इन ट्रेनों को खुले दिल से करतल ध्वनि के साथ स्वीकार किया है। देश के प्राय: हर शहर से वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के परिचालन की मांग हो रही है। नए ट्रेन सेट के निर्माण से आम लोगों की आकांक्षाओं के आलोक में नई ट्रेनों का परिचालन संभव हो पाएगा। भारतीय रेल द्वारा बिजी रूट के दोहरीकरण और चौहरीकरण हेतु भी अनेक योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इस कार्य के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में ₹ 32,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2009-14 में औसत वार्षिक बजट केवल ₹ 2,461 करोड़ था। बिजी रूट की लाइनों में वृद्धि होने से लोकप्रिय डेस्टिनेशंस के लिए अधिक संख्या में ट्रेनों का परिचालन संभव होगा। भारतीय रेल में सुरक्षा को सर्वोपरि माना जाता है। यदि परिवहन व्यवस्था सुरक्षित न हो, तो कंफर्ट और नवाचारों का कोई महत्व नहीं रह जाता। वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे की सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं के लिए  1,16,514 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में रोड ओवर ब्रिज (ROB) / रोड अंडर ब्रिज (RUB) के निर्माण हेतु ₹ 7,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2009-14 में यह मात्र ₹ 916 करोड़ था। ट्रैक नवीनीकरण के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में ₹ 22,800 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। जैसा कि सभी मानते हैं, भारतीय रेल समृद्ध वर्ग का नहीं बल्कि आम लोगों की पसंदीदा परिवहन व्यवस्था है। बजट में निम्न-मध्यम एवं मध्यम वर्ग के लोगों की आवश्यकताओं के मद्देनजर 17,500 गैर-एसी जनरल कोचों का निर्माण संबंधी प्रावधान किए गए हैं। इससे आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। भारतीय रेल की योजना है कि अगले 5 वर्षों में पारंपरिक कोचों को अत्यधिक तकनीक से लैस एलएचबी कोचों से बदल दिया जाए। इसे सफर आरामदायक तो होगा ही, सुरक्षा और बेहतर होगी क्योंकि एलएचबी कोचेस में एडवांस फीचर्स लगे हुए हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस की अपार लोकप्रियता ने भारतीय रेल को वंदे स्लीपर ट्रेन बनाने के लिए प्रेरित किया। प्रथम वन्दे स्लीपर रेक का निर्माण किया जा चुका है और अभी इसका परीक्षण चल रहा है। परीक्षण की सफलता के बाद यह ट्रेन यात्रियों की सेवा में भारतीय रेल … Read more

चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर को एम.सी.एच. सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की 03 सीटों की मंजूरी

रायपुर  पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के कैंसर विभाग (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) को राष्ट्रीय कैंसर दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (चिकित्सा शिक्षा -1) ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एन.एम.सी.) को निर्देशित किया है कि चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विषय में सुपर स्पेशलाइजेशन पाठ्यक्रम (एम.सी.एच.) के लिए 03 सीटों की स्वीकृति प्रदान की जाए। इससे यह महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ किया जा सकेगा। प्रदेश में कैंसर उपचार को मिलेगा नया आयाम उल्लेखनीय है कि चिकित्सा महाविद्यालय के कैंसर विभाग में पहले से एम.डी. (रेडियोथेरेपी) की 6 मान्यता प्राप्त सीटें पहले से संचालित की जा रही हैं। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विषय में सुपर स्पेशलाइजेशन पाठ्यक्रम की स्वीकृति के बाद अब प्रदेश के कैंसर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल पाएगी। मध्य भारत का पहला शासकीय चिकित्सा संस्थान बना रायपुर मेडिकल कॉलेज, जहां विशेष पाठ्यक्रम होगा संचालित महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी और सर्जिकल आंकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष गुप्ता ने बताया कि रायपुर मेडिकल कॉलेज मध्य भारत का पहला शासकीय चिकित्सा संस्थान है, जहां यह विशेष पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। महाविद्यालय के एन.एम.सी. सेल के चेयरमैन डॉ. अरविंद नेरल ने बताया कि गत वर्ष इस पाठ्यक्रम के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन कुछ कमियों के कारण एन.एम.सी. ने एल.ओ.पी. (लेटर ऑफ परमिशन) जारी नहीं किया था। महाविद्यालय प्रशासन द्वारा इन कमियों को दूर कर दो बार पुनर्विचार के लिए अपील की गई। हाल ही में एन.एम.सी. के निर्देशानुसार सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष गुप्ता को व्यक्तिगत रूप से नई दिल्ली भेजा गया, जहां स्टाफ, अधोसंरचना, उपकरण, क्लिनिकल सुविधाओं और उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की गई। संतोषजनक मूल्यांकन के बाद एन.एम.सी. ने एम.सी.एच. पाठ्यक्रम की स्वीकृति प्रदान की। कैंसर मरीजों को मिलेगी बेहतर सुविधाएं एम.सी.एच. सर्जिकल ऑन्कोलॉजी पाठ्यक्रम के शुरू होने से:  कैंसर के मरीजों को उन्नत शल्य चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। प्रदेश को सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सुपर-विशेषज्ञ मिलेंगे। चिकित्सा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के कैंसर रोगियों को अत्याधुनिक उपचार की सुविधा मिलेगी और चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर कैंसर उपचार और शोध के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। recent visitors 37