Friday, July 3, 2026 11:31 am

8वां वेतन आयोग- वेतन विसंगति दूर होगी, स्थाई, संविदा, दैनिक वेतन भोगी, आउटसोर्स कर्मचारियों को उम्मीद

भोपाल  केंद्र सरकार आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर चुकी है। उम्मीद है कि इसे 2026 में लागू कर दिया जाएगा। इससे पहले आयोग गठित होगा। वेतन वृद्धि की अनुशंसा करेगा। इसके बाद सरकार निर्णय लेगी। सबसे पहले केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों पर लागू करेगी। इसके बाद राज्य सरकार विचार करेगी। हालांकि हलचल प्रदेश में भी शुरू हो गई है। वह यह कि आठवें आयोग की सिफारिश लागू होने से पहले कर्मचारी वेतन विसंगति दूर करवाने की कोशिश में है। यहां आठ वर्ष पहले लागू सातवें वेतनमान की विसंगति बरकरार हैं। अदालत तक पहुंचे मामले प्रदेश में कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं, जो पांचवें और छठे वेतनमान पर ही अटके हैं। सातवां वेतनमान पाने को संघर्ष कर रहे हैं। ज्यादातर कर्मचारी निगम-मंडल, प्राधिकारण आदि के हैं। इनमें आवास संघ, उपभोक्ता संघ, हस्तशिल्प विकास निगम, औद्योगिक केंद्र विकास निगम, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड इत्यादि शामिल हैं। तिलहन संघ, परिवहन निगम के कर्मचारियों को तो पांचवां वेतनमान ही मिल रहा। हालांकि इन दोनों निगमों को सरकार बंद कर चुकी है, लेकिन यहां कुछ कर्मचारी पदस्थ हैं। कुछ मामले अदालत तक भी पहुंचे हैं। छठा वेतनमान केंद्र ने एक जनवरी 2006 से लाभ दिया। एमपी में 2008 से लागू हुआ। हालांकि लाभ 2006 से ही दिया गया। सातवां वेतनमान केंद्र ने अपने कर्मचारियों को लाभ एक जनवरी 2016 से दिया। एमपी में जुलाई 2017 से लागू हुआ। कर्मचारियों को 18 माह के एरियर का भुगतान किया गया। 8वां वेतनमान लागू हुआ तो एक लाख करोड़ तक पहुंचेगा खर्च एमपी में वर्तमान में रुपए 88581 करोड़ के लगभग वेतन-भत्तों पर खर्च होते हैं। यह राज्य के बजट का 16.65 प्रतिशत है। 8वां वेतनमान लागू होने पर खर्च एक लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। 8वें वेतनमान को लेकर राज्य कर्मचारियों को उम्मीद मध्यप्रदेश में 8वां वेतनमान चुनावी साल 2028 में लागू होगा। वहीं 31 दिसंबर 2025 सातवें वेतन आयोग की अवधि है। इसी से राज्य के कर्मियों को उम्मीद जगी है। सबकी अपनी-अपनी मांगें पहले सातवें वेतनमान की विसंगति दूर की जाए। संविदा कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ तो दिया गया, लेकिन भारी विसंगति है। वरिष्ठता में भेदभाव किया गया। वर्षो पूर्व सेवा में आए और मौजूदा कर्मचारियों को एक समान वेतनमान मिल रहा है। समयमान वेतनमान, पदोन्नति, क्रमोन्नति का लाभ भी नहीं मिल रहा। -रमेश राठौर, अध्यक्ष, संविदा कर्मचारी महासंघ राज्य के कर्मचारियों का बुरा हाल है। सातवें वेतनमान की विसंगतियां सात साल भी दूर नहीं हो पाई हैं। यह भारी विडंबना है। आठवां वेतनमान लागू होने के पहले वेतन विसंगतियां दूर की जाएं। इसके अलावा कर्मियों की अन्य लंबित मांगों पर भी सरकार विचार कर जल्द से जल्द दूर करे। -जितेंद्र सिंह, अध्यक्ष, एमपी अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा बात ऐसी है कि कर्मचारियों को अभी सातवां वेतनमान मिल रहा है। अब आठवें की तैयारी की जाएगी, लेकिन कुछ निगम मंडल ऐसे हैं जहां के कर्मचारी आज भी छठा वेतनमान पा रहे हैं। सरकार को इन कर्मचारियों पर भी ध्यान देना चाहिए। कर्मचारियों को सातवां वेतनमान का लाभ मिले और वेतन विसंगति भी दूर हो। -अनिल बाजपेयी, अध्यक्ष, अर्धशासकीय कर्मचारी फेडरेशन 35 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ दिया जा चुका है, लेकिन विधानसभा सचिवालय के कर्मचारी इससे वंचित हैं। इसके अलावा सातवें वेतनमान की विसंगति भी दूर नहीं हुई है। -रामनारायण आचार्य, संरक्षक मप्र विधानसभा कर्मचारी संघ ये भी चाहते हैं कर्मचारी -पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए। -पदोन्नति शुरू की जाएं। -प्रदेश के अधिकारी, कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को केंद्र के समान महंगाई भत्ता देते हुए एरियर दिया जाए। -लिपिक संवर्ग को मंत्रालय कर्मियों की तरह समयमान वेतनमान दिया जाए। -सभी विभागों के कर्मियों को समयमान वेतनमान का लाभ, पदोन्नत वेतनमान के अनुसार दिया जाए। -पंचायत सचिवों, स्थाई कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ मिले। -पटवारियों का ग्रेड पे 2800 रुपए किया जाए। -स्वास्थ्य कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण किया जाए। अतिथि शिक्षकों एवं अतिथि विद्वानों को नियमित किया जाए। -दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मचारी, स्थाई कर्मियों को विभाग में खाली पदों पर नियमितीकरण किया जाए। शेष पर सीधी भर्ती की जाए। -विभागाध्यक्ष को नियमितीकरण के अधिकार दिए जाएं। -प्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्स से की जाने वाली भर्ती पर रोक लगाई जाए। -इसके अलावा कार्यभारित कर्मियों को अवकाश नकदीकरण का लाभ भी प्रदान किया जाना चाहिए। अनुकंपा प्रकरणों का करें निराकरण 1.प्रदेश के कर्मचारियों सहित पेंशनर्स, निगम-मंडलों इत्यादि में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ कैबिनेट के अप्रेल 2020 के निर्णय के तहत दिया जाए। 2. वाहन चालकों की नियमित भर्ती हो। पदनाम परिवर्तित कर टैक्सी प्रथा पर पूर्णत: प्रतिबंधित लगाया जाना चाहिए। 3. निर्माण विभागों में तृतीय समयमान वेतनमान प्राप्त करने के लिए विभागीय परीक्षा की बाध्यता समाप्त कर अन्य विभागों की भांति तृतीय समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए। 4. आंगनबाड़ी सहायिकाओं, कार्यकर्ताओं को उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार नियमित वेतनमान का लाभ दिया जाए। 5. प्रदेश के सभी विभागों में अनुक्पा नियुक्ति के प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया जाए। recent visitors 42

MP में ग्रामीण क्षेत्रों में आगामी तीन वर्षों प्रति वर्ष चार लाख घर बनाए जाएंगे, शुरुआत 2025-26 से हो जाएगी

भोपाल मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आगामी तीन वर्षों में 12 लाख आवास बनाए जाएंगे। केंद्र सरकार इसकी सैद्धांतिक सहमति दे चुकी है। प्रति वर्ष चार लाख आवास बनेंगे। इसकी शुरुआत वित्तीय वर्ष 2025-26 से हो जाएगी। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 54 हजार 832 करोड़ रुपये का प्रविधान रखा है। इससे निर्माण कार्य में गति आएगी। वहीं, जल जीवन मिशन को वर्ष 2028 तक संचालित किए जाने की घोषणा ने भी मध्य प्रदेश को राहत दी है। 20 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश में 77,952 करोड़ रुपये की 22 हजार 408 परियोजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हैं। मिशन के संचालन से प्रदेश को 20 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के क्रियान्वयन में देश में अव्वल है। लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य गरीब कल्याण मिशन में आवास को उच्च प्राथमिकता में रखा गया है। केंद्र सरकार के बजट से उम्मीद है कि राज्य को लक्ष्य के अनुरूप राशि प्राप्त होगी। इसके साथ ही नारी सशक्तीकरण के लिए लखपति दीदी बनाने का जो लक्ष्य रखा है, उसकी पूर्ति के लिए भी आर्थिक सहायता मिलेगी। राज्य बजट से अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई गई जल जीवन मिशन में वर्ष 2023-24 में 10,773 करोड़ रुपये व्यय किए गए थे। 2024-25 में 17 हजार करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। अभी 2,622 करोड़ रुपये की किस्त मिली है। 1,422 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त मांगी गई है। राज्य बजट से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई गई है। लक्ष्य प्राप्ति में सहायता मिलेगी मिशन की अवधि बढ़ाने से मिशन के अपेक्षित लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिलेगी। उधर, स्कूली बच्चों में साइंस, टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग और गणित के प्रति रुचि जगाने के लिए अटल टिंकरिंग प्रयोगशाला और माध्यमिक स्कूलों में ब्राडबैंड सुविधा के प्रविधान का लाभ भी मध्य प्रदेश को होगा। युवा, नारी और किसानों पर केंद्रीत बजट उप मुख्यमंत्री वित्त जगदीश देवड़ा ने कहा कि बजट गरीब कल्याण, युवा कल्याण, नारी शक्ति और किसानों की समृद्धि पर केंद्रित है। विशेष पूंजीगत सहायता योजना का विशेष लाभ होगा, क्योंकि पूंजीगत व्यय के मामले में मध्य प्रदेश का अच्छा प्रदर्शन रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, किसान क्रेडिट कार्ड में ऋण की सीमा बढ़ाने, सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए ऋण गारंटी कवर दस करोड़ रुपये करने से प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों का विस्तार होगा। recent visitors 36

प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में , रेस में अब सबसे आगे बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल का नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सभी 62 जिला अध्यक्षों का चुनाव हो गया है। अब सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव ही बाकी है। पार्टी ने पहले ही केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है और उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द ही मध्य प्रदेश का दौरा करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन रेस में अब सबसे आगे बैतूल से विधायक और पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल का नाम तेजी से आगे आया है। खंडेलवाल को संघ, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पार्टी के अन्य नेताओं का समर्थन मिल रहा है। हेमंत खंडेलवाल के पिता स्व. विजय खंडेलवाल भी भाजपा के नेता थे, जिससे उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत और पार्टी से बहुत गहरा जुड़ाव है। पार्टी सूत्रों के अनुसार हेमंत खंडेलवाल के संघ से जुडे होने और विवादों से दूर रहने के चलते पार्टी अब धीरे धीरे उनके नाम पर सहमति बना रही है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल पांच साल का हो चुका है और उन्हें फिर से मौका मिलने की संभावना कम है। बताया जा रहा है कि अध्यक्ष पद के लिए हेमंत खंडेलवाल पहली पसंद बन गए हैं। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष के चुनाव के लिए भी जातिगत समीकरणों को साधना चाहेगी। ऐसे में संभावना है कि नया अध्यक्ष सामान्य, आदिवासी या महिला वर्ग से हो सकता है, क्योंकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के बाद डिप्टी सीएम और मंत्रियों के लिए भी जातिगत समीकरणों का पूरा ध्यान रखा था। अभी अध्यक्ष पद की रेस में कई सीनियर नेता भी दावेदार हैं। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा सीनियर नेता को कमान सौंपती है या फिर किसी नए चहेरे पर दांव लगाती है।   नरोत्तम मिश्रा- पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है। वह सवर्ण वर्ग से आते हैं और राज्य की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनकी केंद्रीय नेतृत्व से भी अच्छी ट्यूनिंग मानी जाती है। फग्गन सिंह कुलस्ते- पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता फग्गन सिंह कुलस्ते आदिवासी वर्ग से आते हैं और मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग की अहमियत को देखते हुए उनकी दावेदारी काफी मजबूत हो सकती है। वीडी शर्मा– वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी रेस में हैं, क्योंकि उनके कार्यकाल में बीजेपी ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी एक बार फिर उनके नाम पर विचार कर सकती है। अरविंद भदौरिया- पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया संगठन के एक कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं। हालांकि, वह 2023 के विधानसभा चुनाव में हार गए थे, लेकिन पार्टी उन्हें एक बार फिर सक्रिय करना चाहती है।     recent visitors 47

केंद्रीय योजनाओं में सहायता अनुदान मध्य प्रदेश को 45 हजार करोड़ मिलेगा

भोपाल  केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार का असर अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगा है। वर्ष 2025-26 में केंद्रीय करों के हिस्से में 1,11,661 करोड़ रुपये मिलेंगे यानी वर्तमान वित्तीय वर्ष की तुलना में 15,908 करोड़ रुपये राज्य को अधिक मिलेंगे। इतना ही नहीं विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में सहायता अनुदान 45 हजार करोड़ रुपये के आसपास मिलेगा। दोनों राशि को मिला दिया जाए तो प्रदेश को आगामी वित्तीय वर्ष में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक मिलेंगे। 5,247 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे वहीं, 2024-25 के पुनरीक्षित अनुमान के अनुसार केंद्रीय करों के हिस्से में अब 5,247 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होंगे। उल्लेखनीय है कि नईदुनिया ने 'डबल इंजन के भरोसे मोहन सरकार, जागी डेढ़ लाख करोड़ मिलने की उम्मीद' शीर्षक से प्रकाशित खबर में पहले ही बता दिया कि आगामी वर्ष में प्रदेश को डेढ़ लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं। जीएसटी के बाद प्रदेश के बजट का मुख्य आधार केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता होता है। वर्ष 2024-25 के बजट में एक लाख 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास केंद्रीय करों में हिस्सा और केंद्रीय सहायता अनुदान मिलने का अनुमान लगाया गया था। 7.82 प्रतिशत के हिसाब से राशि मिलती है अब इससे अधिक राशि राज्य को प्राप्त हो रही है। दरअसल, राज्यों को केंद्र सरकार कुल राजस्व का 41 प्रतिशत केंद्रीय करों में हिस्से के रूप में देती है। इसमें मध्य प्रदेश को 7.82 प्रतिशत के हिसाब से राशि मिलती है। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए यह 95 हजार 753 करोड़ रुपये अनुमानित थी। केंद्रीय करों से प्राप्त राशि के अनुपात में अब राज्य को 5,247 करोड़ रुपये अधिक प्राप्त होंगे। इसका उपयोग सरकार विकास परियोजनाओं को गति देने में करेगी। यह राशि अगले वित्तीय वर्ष में 15,908 रुपये बढ़कर मिलेगी। केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सहायता अनुदान 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलेगा। यह लगभग 600 करोड़ रुपये अधिक रहेगा। निश्चित ही इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ेगा। 12 हजार करोड़ रुपये मिलेगी विशेष पूंजीगत सहायता बजट में सरकार ने अधोसंरचना विकास को गति देने के लिए विशेष पूंजीगत सहायता योजना को निरंतर रखने का निर्णय लिया है। प्रदेश में पूंजीगत व्यय लगातार बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 15 हजार करोड़ रुपये प्राप्त करने के लक्ष्य रखा गया था। 6,187 करोड़ रुपये मिल चुके हैं और सात हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि आगामी वित्तीय वर्ष में भी 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक इस योजना में प्रदेश को मिल जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 64,738 करोड़ रुपये पूंजीगत निवेश का लक्ष्य रहा है। जीएसडीपी का तीन प्रतिशत तक ऋण ले सकती है सरकार राज्य सरकार ने बजट पूर्व बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के अनुपात में चार प्रतिशत तक ऋण लेने की अनुमति देने की मांग रखी थी, लेकिन इसे नहीं माना गया। प्रदेश जीएसडीपी के अनुपात में तीन प्रतिशत तक ही भारतीय रिर्जव बैंक के माध्यम से बाजार से ऋण ले सकता है। आधा प्रतिशत ऋण ऊर्जा के क्षेत्र में सुधार के लिए निर्धारित कदम उठाने के लिए लिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि मार्च के प्रथम सप्ताह में जब 16वां वित्त आयोग आएगा तो एक बार फिर इस मुद्दे को बेहतर वित्तीय प्रबंधन का हवाला देकर उठाया जाएगा। अब बजट को अंतिम रूप देने को जुटेगी राज्य सरकार सूत्रों का कहना है कि आम बजट से प्रदेश को आगामी वित्तीय वर्ष में मिलने वाली राशि को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। इसके आधार पर अब प्रदेश सरकार अपने बजट को अंतिम रूप देने में जुटेगी। यह इस बार चार लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 15 फरवरी के पहले बजट को लेकर मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। recent visitors 64

देश के पहले सफेद टाइगरों का ब्रीडिंग सेंटर को CZA की मंजूरी, रीवा में खुलेगा बाघ प्रजनन केंद्र

रीवा केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सफेद बाघ प्रजनन केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। गोविंदगढ़ में सफेद बाघ प्रजनन केंद्र के प्रस्ताव को सीजेडए ने मुकुंदपुर, सतना में महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव सफेद बाघ सफारी और चिड़ियाघर के लिए संशोधित मास्टर (लेआउट) योजना के हिस्से के रूप में मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी 9 और 17 दिसंबर, 2024 को अपनी 114वीं बैठक के दौरान विशेषज्ञ समूह द्वारा की गई सिफारिशों और 19 दिसंबर, 2024 को अपनी 112वीं बैठक में तकनीकी समिति द्वारा की गई सिफारिशों के बाद दी गई है। डेप्युटी सीएम राजेंद्र शुक्ल का कहना एमपी के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने केंद्र सरकार के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और इस बात पर प्रकाश डाला कि सफेद बाघ प्रजनन केंद्र की स्थापना से सफेद बाघों की आबादी बढ़ाने और क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ाने में मदद मिलेगी। शुक्ला ने कहा कि सीएम मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए समर्पित है। मील का पत्थर साबित होगा निर्णय उन्होंने गोविंदगढ़ में व्हाइट टाइगर ब्रीडिंग सेंटर की मंजूरी को इन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया, जो वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी होने के राज्य के दृष्टिकोण को पुष्ट करता है। मध्य प्रदेश ने अपने अनुकरणीय वन्यजीव संरक्षण कार्यों के लिए 'टाइगर स्टेट', 'लेपर्ड स्टेट' और 'चीता स्टेट' का खिताब अर्जित किया है। वन्यजीव कार्यकर्ता ने जताई चिंता हालांकि, वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को एक पत्र भेजकर व्हाइट टाइगर ब्रीडिंग सेंटर को लेकर चिंता जताई है। दुबे का मानना है कि यह वन्यजीव संरक्षण सिद्धांतों के विपरीत है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुविधा सफेद बाघों की सुरक्षा और उनकी संख्या में वृद्धि सुनिश्चित करेगी. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश बाघों की संख्या के मामले में देश में सबसे आगे है और यह पहल राज्य की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगी.  बता दें कि 3 अप्रैल 2016 को रीवा के मुकुंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी एंड जू की स्थापना की गई थी. महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव के नाम से व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर में बनी है. दो सफेद बाघिनों विंध्या और राधा की मौत के बाद फिलहाल इस सफारी में 5 और व्हाइट टाइगर हैं.  recent visitors 42

एमपी गजब: सागर में पुलिस के सिटी सर्विलांस कैमरों की बैटरी चोरी: तलाश में जुटी पुलिस

MP Gajab: Battery of police’s city surveillance cameras stolen in Sagar: Police engaged in search सागर । कैंट थाना क्षेत्र में लगे पुलिस की सर्विलांस कैमरों की बैटरी चोरी हो गई। कैमरे बंद हुए तो वारदात सामने आई। मामले में थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की है। पुलिस के अनुसार, फरियादी त्रिलोक सिंह परिहार(54) ने थाने में शिकायत करते हुए बताया कि मैं प्रभारी सीसीटीवी जिला सागर में सउनि (रेडियो) के पद पर पदस्थ हूं। 25 नंबर गेट के सामने चितंरजन कॉलोनी के पास तिराहा पर पुलिस विभाग की ओडीसी लगी है जो 2 फरवरी की सुबह 10 बजे सिटी सर्विलांस कैमरों की डीएसआर बनाते समय डिंपल पेट्रोल पंप सीसीटीवी साइट के कैमरे 4.52 मिनट से बंद होना पाए गए। कंपनी प्रतिनिधि सौरभ यादव और बीएसएनएल टीम द्वारा दोपहर 15.59 बजे चेक करने पर ओडीसी का ताला और गेट टूटा हुआ पाया गया। जिसको खोलने पर देखा कि उसमें लगी 3 नग 12 वोल्ट 42 एएचसी की बैटरी नहीं थी। कोई अज्ञात चोर बैटरी चोरी कर ले गया है। चोरी होने पर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। जिसके बाद शिकायत की। शिकायत मिलते ही पुलिस टीम आरोपियों की तलाश कर रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। recent visitors 153

छतरपुर : मुआवजे को लेकर किसानों का कलेक्ट्रेट के बाहर धरना-प्रदर्शन : लेकिन कलेक्टर किसानों मिलने नहीं पहुंचे

Chhatarpur: Farmers’ protest for compensation: Hundreds of farmers sat outside the collectorate for three hours, but the collector did not reach the farmers छतरपुर । सिंचाई परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई जमीनों का उचित मुआवजा मांगने के लिए सोमवार को करीब 100 किसानों ने कलेक्टर कार्यालय में धरना दिया। सटई तहसील के 6 गांवों के किसान दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक कलेक्टर कार्यालय में डटे रहे। जिसके बाद 5:45 बजे एडीएम मिलिंद नागदेवे ने किसानों से ज्ञापन लिया और जांच करवाने की बात कही। नैगुवां तालाब और छापर के पास लघु सिंचाई परियोजना के तहत बन रहे तालाब के लिए सिलावट, सटई, बछरौनियां, नैगुवां, पड़रिया और कदवां गांव के 500 किसानों की जमीनें अधिग्रहीत की गई हैं। सरकार इन जमीनों का मुआवजा 3 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से दे रही है, जिसे किसान कम बता रहे हैं। किसान प्रति एकड़ 10 लाख की मांग कर रहे किसान नेता राजेंद्र पटेल के अनुसार, प्रभावित किसान या तो 3 लाख रुपए में उतनी ही जमीन किसी अन्य स्थान पर चाहते हैं या फिर 10 लाख रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा मांग रहे हैं। किसानों का कहना है कि पिछले तीन सप्ताह में वे कई बार कलेक्टर को आवेदन दे चुके हैं। अपर कलेक्टर जीएस पटेल और राजनगर एसडीएम बलवीर रमण ने किसानों से बातचीत की कोशिश की, लेकिन किसान सीधे कलेक्टर से मिलने पर अड़े रहे। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बताया कि वे मीटिंग में व्यस्त हैं और शाम में 5 बजे के बाद किसानों से मुलाकात करेंगे। जिसके बाद एडीएम ने किसानों से ज्ञापन लिया। recent visitors 163