युवक ने फोन पर अधिकारियों से कहा- योगी आदित्यनाथ को मारना चाहता है, ताकि वह डॉन बन सके

मुरैना मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के एक गांव के 20 वर्षीय युवक ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी है। यह घटना तब सामने आई जब युवक ने सोशल मीडिया के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार के विजिलेंस विभाग का फोन नंबर प्राप्त कर उसे कॉल किया। युवक ने फोन पर अधिकारियों से कहा कि वह योगी आदित्यनाथ को मारना चाहता है, ताकि वह "डॉन" बन सके युवक ने कैसे दी धमकी? युवक ने फोन पर अधिकारियों से कहा कि मेरी योगी आदित्यनाथ से बात करवा दीजिए।" जब अधिकारियों ने पूछा कि वह ऐसा क्यों करना चाहता है, तो उसने जवाब दिया, "मैं उन्हें मारकर डॉन बनना चाहता हूं।" उत्तर प्रदेश एसटीएफ की कार्रवाई इस धमकी की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और एसटीएफ की दो टीमों को मुरैना भेजा। मंगलवार देर शाम जब टीम युवक के गांव पहुंची, तो उसके घर पर ताला लगा मिला। करीब 10 घंटे की तलाश के बाद युवक को पकड़ लिया गया। युवक की सफाई युवक ने पूछताछ में बताया कि उसने यह सब सिर्फ मजाक में किया था। उसने कहा कि उसे यह फोन नंबर सोशल मीडिया पर मिला था और वह मोबाइल चलाते समय उसे कॉल करने का विचार आया। उसने आगे बताया कि वह अक्सर फोन पर धमकियां देता है और कुछ ग्रामीणों ने कहा कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है। आरोपी पहुंचा थाने दिलचस्प बात यह है कि आरोपी खुद ही सिविल लाइन थाने पहुंच गया और मुरैना पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। थाने के टीआई ने यूपी एसटीएफ के अधिकारियों को सूचित किया कि जिस युवक की तलाश थी, वह अब थाने में मौजूद है। इस घटना ने स्थानीय लोगों में भी चर्चा का विषय बना दिया है, क्योंकि कुछ ग्रामीणों ने बताया कि युवक अक्सर ऐसे फोन कॉल करता है। इस मामले की जांच अब आगे बढ़ रही है, और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि युवक के पीछे और क्या कारण हो सकते हैं।   recent visitors 26

पान मसाला और इत्र कारोबारियों पर आयकर विभाग की रेड, कानपुर-कन्नौज में 35 ठिकानों पर छापेमारी

कानपुर आयकर विभाग की टीमों ने आज बुधवार की सुबह कानपुर कन्नौज में कई ठिकानों पर एक साथ बड़ी कार्रवाई की. आयकर विभाग की टीम ने यहां 35 जगहों पर छापा मारा. यह छापेमारी खासतौर पर पान मसाला, इत्र और कोल्ड स्टोरेज कारोबार से जुड़े व्यापारियों के परिसरों पर की गई. जानकारी के अनुसार, कानपुर में मशहूर S&K पान मसाला ग्रुप के मालिक नवीन कुरेले के घर और व्यावसायिक ठिकानों पर रेड मारी गई, जबकि गणपति ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठिकानों पर भी जांच की गई. इसी तरह, कन्नौज में बड़े इत्र कारोबारियों और कोल्ड स्टोरेज मालिकों के परिसरों पर भी आयकर विभाग ने छापा डाला. सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई को टैक्स चोरी की जानकारी मिलने के बाद अंजाम दिया गया. आयकर विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि ये कारोबारी अवैध रूप से माल की आपूर्ति कर रहे हैं और अंदरूनी बिलिंग के जरिए टैक्स चोरी की जा रही है. इस जानकारी के आधार पर आयकर विभाग ने एक साथ इन सभी ठिकानों पर छापा मारा. बताया जा रहा है कि पं. चंद्रावली एंड सन्स फर्म पर भी जांच की गई है, जहां टैक्स चोरी से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिल सकते हैं. छापेमारी के दौरान आयकर विभाग की टीमों ने घरों, फैक्ट्रियों, गोदामों और कोल्ड स्टोरेज परिसरों में दस्तावेजों की जांच की. कानपुर और कन्नौज में जिन व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर छापा पड़ा, उनके बाहर आयकर विभाग की गाड़ियां तैनात नजर आईं, जिससे व्यापारी जगत में हलचल मच गई. अधिकारियों ने इस पूरी कार्रवाई को एक संयुक्त ऑपरेशन बताया है. सभी कारोबारी आपस में व्यापारिक लेन-देन के जरिए जुड़े हुए थे और एक-दूसरे को माल की आपूर्ति करते थे. छापेमारी से कानपुर और कन्नौज के व्यापारियों में हड़कंप मच गया. कई व्यापारियों और उद्योगपतियों के परिसरों में तलाशी ली जा रही है, जिसमें बड़ी मात्रा में काले धन, संपत्तियों के दस्तावेज और डिजिटल लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड मिल सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि टैक्स चोरी की असली रकम कितनी बड़ी है और किन-किन व्यापारियों पर कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल, आयकर विभाग की टीमें दस्तावेजों को खंगालने और वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल में जुटी हुई हैं. recent visitors 39

‘पीएम मोदी को हटाना चाहता था US, रची थी बड़ी साजिश’, पूर्व विदेश विभाग अधिकारी के दावे से मची खलबली

नई दिल्ली/ वाशिंगटन अमेरिका के पूर्व विदेश विभाग के अधिकारी माइक बेंज (Mike Benz) ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने भारत के आंतरिक राजनीति में दखल दिया है। इतना ही नहीं अमेरिका ने बांग्लादेश की राजनीति में भी दखल देने की कोशिश की है।उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ने मीडिया प्रभाव, सोशल मीडिया सेंसरशिप और विपक्षी आंदोलनों को वित्तीय सहायता के माध्यम से भारत की राजनीति को प्रभाव डालने की कोशिश की है। एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने अमेरिकी संस्था ‘यूएसएड’ (USAID) द्वारा भारत को विभाजित करने के लिए विभिन्न संस्थाओं को धन दिए जाने का दावा किया था। उन्होंने सोमवार को अपनी सरकार से मांग करते हुए कहा कि इस मामले में जांच कराई जाए और दोषी पाए गए लोगों को जेल में डाला जाए। अब दुबे के दावे को अमेरिका के एक पूर्व अधिकारी के खुलासे से और बल मिलेगा। दरअसल अमेरिका के पूर्व विदेश विभाग अधिकारी माइक बेंज ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने भारत और बांग्लादेश सहित कई देशों की आंतरिक राजनीति में दखल दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने मीडिया प्रभाव, सोशल मीडिया सेंसरशिप और विपक्षी आंदोलनों को वित्तीय सहायता के माध्यम से इन देशों की राजनीति को प्रभावित किया। बेंज का दावा है कि अमेरिकी सरकार से जुड़ी संस्थाओं ने ‘लोकतंत्र को बढ़ावा देने’ की आड़ में चुनावों को प्रभावित करने, सरकारों को अस्थिर करने और अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप विदेशी सरकार बनाने का काम किया। 2019 के भारतीय आम चुनाव में दखल का आरोप एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंज ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विदेश नीति से जुड़े इस कांड में यूएसएड, थिंक टैंक और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं। इन्होंने भारत के 2019 के आम चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि इन समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ चुनावी नैरेटिव तैयार किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संगठनों ने इस धारणा को बढ़ावा दिया कि मोदी की राजनीतिक सफलता गलत सूचनाओं की वजह से है। इसके आधार पर व्यापक सेंसरशिप का वातावरण तैयार किया गया। सोशल मीडिया पर दबाव का आरोप बेंज का कहना है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने फेसबुक, वॉट्सऐप, यूट्यूब और ट्विटर जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर प्रभाव डालते हुए मोदी समर्थक कंटेंट पर अंकुश लगाने का प्रयास किया। वॉट्सऐप की जनवरी 2019 में मैसेज फॉरवर्डिंग की सीमा को कम करने की नीति को भाजपा की डिजिटल पहुंच रोकने का एक सटीक उदाहरण बताया गया। बेंज के अनुसार, अमेरिका समर्थित संस्थाओं ने भारत के डिजिटल स्पेस में हस्तक्षेप को सही ठहराने के लिए मोदी के समर्थकों को ऑनलाइन फर्जी खबरें फैलाने के लिए रणनीतिक रूप से फंसाया। उनका दावा है कि यूएसएड से जुड़े संगठनों सहित कई अन्य संगठनों ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया और डिजिटल फोरेंसिक समूहों के साथ मिलकर ऐसी रिपोर्टें बनाईं, जिनमें भारत को गलत सूचना के गंभीर संकट से जूझते हुए दिखाया गया। उनका तर्क है कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मोदी समर्थक बयानों को दबाने का एक बहाना बन गया। बेंज का दावा है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने मोदी समर्थक कंटेंट को रोकने के लिए फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब और ट्विटर जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों पर दबाव डाला। ‘यूएसएड’ ने संस्थाओं को पैसा दिया- भाजपा सांसद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अमेरिका में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘यूएसएड’ संस्था को पूरी तरह बंद कर दिया है क्योंकि यह वर्षों से विभिन्न सरकारों को गिराने के लिए पैसा खर्च कर रही थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को बताना चाहिए, ‘‘क्या यूएसएड ने जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन को पांच हजार करोड़ रुपये भारत को विभाजित करने के लिए दिये या नहीं। उसने राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा दिया या नहीं।’’ दुबे ने सवाल उठाया कि क्या ‘यूएसएड’ ने तालिबान को पैसा दिया था? उन्होंने कहा कि इस अमेरिकी संस्था ने आतंकवादी और नक्सलवादी गतिविधिया बढ़ाने वाले कुछ संगठनों को पैसा दिया या नहीं, विपक्ष यह बताए। भाजपा सांसद ने देश में मानवाधिकार के नाम पर और ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ के नाम पर विभिन्न संस्थाओं को ‘यूएसएड’ द्वारा पैसा दिए जाने का आरोप लगाते हुए सरकार से अनुरोध किया कि इनकी जांच हो और जिन्होंने देश को नुकसान पहुंचाने के लिए पैसा लिया, उन्हें जेल में डाला जाए। दुबे के इन आरोपों पर कांग्रेस सदस्यों ने नारेबाजी की। कुछ सदस्य इस संबंध में व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाह रहे थे। हालांकि, पीठासीन सभापति संध्या राय ने कहा कि शून्यकाल में व्यवस्था का प्रश्न नहीं होता। भाजपा सांसद दुबे पहले भी सदन में इन मुद्दों को उठाते रहे हैं। बांग्लादेश में भी अमेरिकी हस्तक्षेप वहीं बेंज ने दावा किया कि अमेरिका ने बांग्लादेश की राजनीति को भी प्रभावित करने की कोशिश की, खासकर प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को कमजोर करने के लिए यूएसएड का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम बांग्लादेश और चीन के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के कारण उठाया गया। उनके अनुसार, अमेरिकी संगठनों ने सांस्कृतिक और जातीय तनावों का उपयोग करते हुए विभाजन पैदा करने और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बढ़ावा देने की योजना बनाई। रैप संगीत के जरिए सरकार विरोधी माहौल एक दिलचस्प आरोप में बेंज ने कहा कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल बांग्लादेश में ऐसे रैप संगीत को फंड करने के लिए किया गया, जो सरकार विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देता था। बेंज ने इन गतिविधियों को अमेरिका की वैश्विक रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य लोकतंत्र को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि चीन के प्रभाव का मुकाबला करना, सैन्य ठिकाने सुरक्षित करना और आर्थिक पहुंच बनाए रखना है। बेंज का कहना है कि ये गतिविधियां अक्सर अमेरिकी प्रशासन की अनुमति के बिना विदेश नीति प्रतिष्ठान के कुछ गुटों द्वारा की जाती हैं। उनके अनुसार, ट्रंप प्रशासन के दौरान भी इन गतिविधियों को अंजाम दिया गया, जबकि ट्रंप और मोदी के बीच अच्छे संबंध थे। बेंज ने अपनी रिसर्च के आधार पर यह दावा किया कि यह सिर्फ भारत और बांग्लादेश तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका ने वेनेजुएला, यूक्रेन, मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका जैसे कई देशों में भी … Read more

भारतीय शेयर बाजार में निचले स्तरों से रिकवर होकर 76,000 के पार बंद हुआ

मुंबई भारतीय शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र में निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी देखी गई। हालांकि, सत्र के अंत में सेंसेक्स 122.52 अंक या 0.16 प्रतिशत गिरकर 76,171.08 और निफ्टी 26.5 अंक या 0.12 प्रतिशत फिसलकर 23,045.25 पर था। दिन के दौरान दोनों मुख्य सूचकांकों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली। बीएसई बेंचमार्क में 75,388.39 के निचले स्तरों से करीब 800 अंकों और एनएसई बेंचमार्क में 22,798.35 के निचले स्तरों से करीब 250 अंकों की मजबूत रिकवरी देखी गई। निफ्टी के ऑटो, आईटी, फार्मा, एफएमसीजी, रियल्टी, एनर्जी, इन्फ्रा, पीएसई और हेल्थकेयर इंडेक्स में गिरावट देखी गई। पीएसयू बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज और मेटल इंडेक्स में तेजी देखी गई। लार्जकैप और मिडकैप में भी दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 131.55 अंक या 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 50,756 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 41.35 अंक या 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,033 पर बंद हुआ। बैंकिंग इंडेक्स में मजबूती देखी गई। निफ्टी बैंक 76.05 अंक या 0.13 प्रतिशत की तेजी के साथ 49,479.45 पर था। बाजार के जानकारों के मुताबिक, अगर निफ्टी 22,786 के स्तरों को नहीं तोड़ता है तो निफ्टी में 23,500 से लेकर 23,600 तक रिकवरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल रुकावट का स्तर 23,200 है और सपोर्ट 23,000 है। सेंसेक्स पैक में बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एलएंडटी, अल्ट्राटेक सीमेंट, कोटकबैंक, टाटा मोटर्स, एचयूएल, भारती एयरटेल, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, एनटीपीसी और बजाज फाइनेंस टॉप गेनर्स थे। एमएंडएम, आईटीसी, पावर ग्रिड, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडसइंड बैंक और टाइटन टॉप लूजर्स थे। रुपये की शुरुआत मजबूती के साथ हुई थी और सुबह 45 पैसे या 0.50 प्रतिशत की तेजी के साथ 86.43 पर था, लेकिन दिन के दौरान इसमें गिरावट देखने को मिली और यह 86.89 पर बंद हुआ। भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ खुला था। सुबह 9:33 बजे, सेंसेक्स 428 अंक या 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,864 और निफ्टी 130 अंक या 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,958 पर था। recent visitors 47

आचार्य सत्येन्द्र कुमार दास का देवलोक गमन आध्यात्मिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आचार्य सत्येन्द्र कुमार दास का देवलोक गमन आध्यात्मिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य को दी श्रद्धांजलि भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या धाम के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र कुमार दास महाराज के देवलोक गमन पर शोक प्रकट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परम रामभक्त का निधन अत्यंत दुःखद एवं आध्यात्मिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है, उनके मंगलकारी विचार और भक्तिमय व्यक्तित्व समस्त सनातन जगत को धर्म और मानव कल्याण के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करते रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त शिष्यों और अनुयायियों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।   recent visitors 25

रिपोर्ट में 1400 मौत का दावा- बांग्लादेश हिंसा के लिए शेख हसीना जिम्मेदार: संयुक्त राष्ट्र

ढाका संयुक्त राष्ट्र ने आज बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शन के लिए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को जिम्मेदार ठहराया है। संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को कहा कि बांगलादेश की पूर्व सरकार ने सत्ता बनाए रखने के लिए पिछले साल प्रदर्शनकारियों पर सुनियोजित हमले करवा और हत्याएं हुईं। यह'मानवता के खिलाफ अपराध' हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने विरोध प्रदर्शनों का दमन किया। इस दौरान सैकड़ों गैरकानूनी हत्याएं की गईं। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने बांगलादेश में 1 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच हुए घटनाओं की जांच की और पाया कि पूर्व सरकार द्वारा हत्या, यातना, कैद और अन्य अमानवीय कृत्य किए गए। इन कृत्यों में शेख हसीना की सरकार, उनके अवामी लीग पार्टी के हिंसक तत्वों और बांगलादेशी सुरक्षा एवं खुफिया सेवाओं के हाथ थे। इस दौरान बांगलादेश में विरोध प्रदर्शन सरकारी नौकरी में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुए थे। इसके बाद शेख हसीना से इस्तीफे की मांग शुरू हुई। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि करबी 1400 लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हुए। रिपोर्ट में कहा गया कि मारे गए अधिकांश लोग बांगलादेश के सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में मारे गए। उनमें बच्चे भी शामिल थे। मृतकों में 12 से 13 प्रतिशत बच्चे शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सुरक्षा बलों ने शेख हसीना की सरकार का समर्थन किया और प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिंसक उपायों का इस्तेमाल किया। इसमें महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और बच्चों के खिलाफ अत्याचार भी शामिल थे। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने बच्चों को मारा-पीटा और उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में गिरफ्तार किया और यातना दी। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा, "पूर्व सरकार की बर्बर प्रतिक्रिया सत्ता बनाए रखने की एक सुनियोजित और समन्वित रणनीति थी, जो जन विरोध का सामना कर रही थी।" उन्होंने कहा कि इस दौरान हजारों व्यक्तियों की हत्या, गिरफ्तारियां और यातनाएं राजनीतिक नेतृत्व और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की जानकारी में हुईं। recent visitors 27

छात्रों को नग्न कर प्राइवेट पार्ट्स से लटका दिए डम्बल, रैगिंग की खौफनाक कहानी सुन कांप उठेगी रूह

कोट्टायम: केरल के एक मेडिकल कॉलेज से रैगिंग की एक खौफनाक वारदात सामने आई है जिसमें जूनियर छात्रों को सीनियर्स ने पहले कपड़े उतारकर नग्न कर दिया गया, फिर उनके गुप्तांगों पर डम्बल लटका दिया। इतना ही नहीं, उसके बाद सीनियर्स ने ज्योमेट्री बॉक्स के कंपास से बार बार वार किया गया और तीन महीने तक बुरी तरह पीटा। केरल के एक सरकारी कॉलेज में हुए रैगिंग की इस घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है, जहां नर्सिंग के तीसरे वर्ष के पांच छात्रों को कथित तौर पर अपने जूनियर्स को महीनों तक क्रूर शारीरिक और मानसिक शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। थाने में दर्ज शिकायत से हुआ खुलासा यह घटना कोट्टायम के सरकारी नर्सिंग कॉलेज में हुई, जहां प्रथम वर्ष के तीन छात्रों, जो सभी तिरुवनंतपुरम से हैं, सभी ने कोट्टायम गांधीनगर पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज की, जिसमें नवंबर 2024 में शुरू हुई और लगभग तीन महीने तक जारी हिंसक कृत्यों का खुलासा किया गया। शिकायत के कारण आरोपी छात्रों को निलंबित कर दिया गया और एंटी-रैगिंग अधिनियम के तहत उनकी गिरफ्तारी की गई। घटना जानकर रूह कांप जाएगी पुलिस के अनुसार, प्रथम वर्ष के छात्रों को सीनियर छात्रों ने नग्न खड़े होने के लिए मजबूर किया, जबकि उनके वरिष्ठ छात्रों ने उनके निजी अंगों से डम्बल लटका दिए। पीड़ितों को ज्योमेट्री बॉक्स से कंपास सहित तेज वस्तुओं का उपयोग करके भी चोट पहुंचाई गई थी। उनकी क्रूरता यहीं नहीं रुकी. घावों पर लोशन लगाया गया, जिससे दर्द होने लगा। जब पीड़ित दर्द से चिल्लाने लगे तो उनके मुंह में जबरन लोशन ठूंस दिया गया। वरिष्ठों ने कथित तौर पर इन कृत्यों को फिल्माया और जूनियर्स को धमकी दी कि यदि उन्होंने दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने की हिम्मत की तो उनका कैरियर खत्म हो जाएगा। पांच छात्र हुए गिरफ्तार शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि रविवार को सीनियर्स नियमित रूप से जूनियर्स से शराब खरीदने के लिए पैसे वसूलते थे। जो लोग इस आदेश को मानने  से इनकार करते थे उन्हें पीटा जाता था। एक छात्र, जो अब उत्पीड़न सहन करने में असमर्थ था, ने अपने पिता को सबकुछ बताया दिया, जिन्होंने उसे पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया। सभी पांचों आरोपी छात्र फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और उनके बुधवार दोपहर तक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की उम्मीद है।  recent visitors 32