बांके बिहारी मंदिर में 200 रुपये के नोटों से बनी ड्रेस चढ़ाई, राजस्थान के भक्त ने की डोनेशन

वृंदावन उत्तर प्रदेश एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है, जो भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का केंद्र माना जाता है। यहां कई मंदिर और स्थान हैं जो भक्ति और आध्यात्मिकता से भरपूर हैं। हाल ही में, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जहां भगवान बांके बिहारी को 200 रुपये के नोटों से बने कपड़े पहनाए गए थे। क्या था मामला? माघ पूर्णिमा के मौके पर राजस्थान के एक भक्त ने भगवान बांके बिहारी जी को 200 रुपये के नोटों से बने कपड़े समर्पित किए थे। इस मौके पर भगवान की चोली, धोती और मुकुट सभी नोटों से बनाए गए थे। यह पहली बार था जब भगवान बांके बिहारी को इस तरह के कपड़े पहने हुए देखा गया। इससे पहले भक्त केवल भगवान को नोटों की माला अर्पित करते थे, लेकिन अब यह एक नई और खास परंपरा बन गई है। कपड़ों का इतिहास राजस्थान के भक्त ने पहले सांवरिया सेठ को नोटों से बने कपड़े पहने हुए देखा था और प्रेरित होकर उन्होंने भगवान बांके बिहारी के लिए भी इसी तरह के कपड़े तैयार किए। इस काम में उन्होंने कारीगरों की मदद ली और भगवान के कपड़े बनाए। वृंदावन में और भी दर्शनीय स्थान प्रेम मंदिर: सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर अपनी लाइटिंग और सुंदर झांकियों के लिए प्रसिद्ध है। इस्कॉन मंदिर: यहां भजन-कीर्तन होते हैं और यह स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ है। निधिवन: माना जाता है कि यहां श्रीकृष्ण और राधा गोपियों के साथ रास रचाते हैं। रंगजी मंदिर: दक्षिण भारतीय शैली में बना यह मंदिर आकर्षक है और यहां रथ यात्रा आयोजित होती है। सेवा कुंज: यहां रात में श्रीकृष्ण के प्रकट होने की मान्यता है। गोविंद देव जी मंदिर: यह मंदिर अकबर के समय में बना और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। केसी घाट: यमुना नदी के किनारे स्थित यह स्थान बहुत पवित्र माना जाता है। पागल बाबा मंदिर: इसकी अनोखी वास्तुकला और झांकियां आकर्षक हैं। जयपुर मंदिर: यह 19वीं शताब्दी में बना और इसकी नक्काशी और संगमरमर की मूर्तियां बहुत सुंदर हैं। अगर आप वृंदावन जाएं, तो बांके बिहारी मंदिर के अलावा इन स्थानों का भी दर्शन करें। यहां हर जगह भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की झलक मिलती है और हर एक स्थान में भक्ति की विशेष ऊर्जा महसूस होती है।   recent visitors 58

बर्ड फ्लू के मामलों में फिर से बढ़ोतरी के कारण अंडों की कीमतों में तेजी से हुआ इजाफा

वाशिंगटन अमेरिका में बर्ड फ्लू के मामलों में फिर से बढ़ोतरी के कारण अंडों की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। हाल ही में जारी मासिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में एक दर्जन ‘ग्रेड ए’ अंडों की औसत कीमत 4.95 डॉलर तक पहुंच गई। यह कीमत दो साल पहले के रिकॉर्ड 4.82 डॉलर से भी अधिक है। 2015 के बाद सबसे बड़ी वृद्धि अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, अंडों की कीमतों में यह वृद्धि 2015 में हुए बर्ड फ्लू के प्रकोप के बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। पिछले कुछ महीनों में बर्ड फ्लू के मामलों में फिर से इजाफा हुआ है, जिससे पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों की संख्या में कमी आई है, जिसका सीधा असर अंडों की आपूर्ति पर पड़ा है। महंगाई से जूझ रहे अमेरिकी नागरिक अंडों की बढ़ती कीमतों ने आम नागरिकों के बजट पर दबाव डाला है। एक ओर जहां खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हो रही है, वहीं अंडे जैसे रोज़मर्रा के भोजन की कीमत में इतनी बढ़ोतरी ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। आखिर क्या है कारण? बर्ड फ्लू के प्रकोप के चलते मुर्गियों की बड़ी संख्या में मौत हो चुकी है, जिससे अंडों की उपलब्धता पर असर पड़ा है। पोल्ट्री फार्मों की उत्पादन क्षमता में कमी आने से अंडों की आपूर्ति पर संकट बढ़ गया है, जिसके कारण कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। recent visitors 49

सी. एस. चैलेंजर कप: राजस्थान लेखा सेवा महिला टीम ने जीती बैडमिंटन ट्रॉफी

जयपुर राजस्थान लेखा सेवा महिला टीम ने सी. एस. चैलेंजर कप बैडमिंटन ट्रॉफी पर तीसरी बार कब्जा कर लिया है। एसएमएस स्टेडियम में खेले गए फाइनल में राजस्थान लेखा सेवा महिला अधिकारी टीम ने चिकित्सा सेवा की डॉक्टर्स टीम को 2-0 से हराया। लेखा सेवा ने लगातार तीसरे साल यह ट्रॉफी जीती। फाइनल मैच में राजस्थान लेखा सेवा की लेखाधिकारी (परिवहन) सुश्री सुनिता सैनी व लेखाधिकारी (कोषाधिकारी) जयपुर(शहर) सुश्री  महिमा और एसएमएस हॉस्पिटल की डॉ. अक्षी एवं डॉ. भारती के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। विजेताओं को मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत ने  ट्रॉफी प्रदान की। फाइनल मैच में मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत, कार्मिक सचिव श्री  के. के. पाठक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती मालिनी अग्रवाल, संभागीय आयुक्त श्रीमती पूनम, जयपुर जिला कलेक्टर श्री जितेंद्र सोनी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे । recent visitors 61

सर्वाधिक विश्वसनीय शासकीय चिकित्सा संस्थान ने ओपन हार्ट सर्जरी के क्षेत्र में नया अध्याय कोरोनरी बाईपास सर्जरी का जोड़ा

रायपुर पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट सर्जरी विभाग में राज्य की जनता के लिए बहुप्रतीक्षित कोरोनरी बाईपास सर्जरी सुविधा की शुरुआत हो गई है। इसी के साथ स्वास्थ्य सुविधा के क्षेत्र में प्रदेश के सर्वाधिक विश्वसनीय शासकीय चिकित्सा संस्थान ने ओपन हार्ट सर्जरी के क्षेत्र में नया अध्याय कोरोनरी बाईपास सर्जरी का जोड़ा है। प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त किरण कौशल के अथक प्रयासों की बदौलत एवं अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी, अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर के कुशल प्रबंधन से हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू एवं टीम के दृढ़ प्रयासों ने 72 साल के मरीज की प्रथम क्रिटिकल कोरोनरी बाईपास सर्जरी (सीएबीजी) में सफलता दिलाई है। हार्ट सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में हुए इस सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति बेहतर है और वह डिस्चार्ज लेकर घर जाने को तैयार है। ऑपरेशन करने वाले हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू बताते हैं कि दुर्ग जिले के रहने वाले इस 72 वर्षीय मरीज जो कि रिटायर्ड शासकीय कर्मचारी है, को आज से डेढ़ महीने पहले छाती में तेज दर्द हुआ था, जिसके कारण उनको स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज की ईसीजी देखकर हार्ट अटैक का पता चल गया था। उसके बाद मरीज की एंजियोग्राफी की गई, जिससे पता चला कि मरीज के हृदय की मुख्य नस (लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी) में 65 प्रतिशत ब्लॉकेज एवं साथ ही साथ अन्य तीनों नसों में 90 से 95 प्रतिशत ब्लॉकेज था। हार्ट की नसों में ब्लॉकेज इतना ज्यादा था कि वहां के डॉक्टरों ने एंजियोप्लास्टी करने से मना कर दिया एवं वहां से कोरोनरी बाईपास सर्जरी के लिए बड़े संस्थान में रेफर कर दिया। इकोकार्डियोग्राफी करने से पता चला कि हार्ट बहुत ही ज्यादा कमजोर हो गया था। मात्र 35 से 40 प्रतिशत ही कार्य कर रहा था। इसको मेडिकल भाषा में लेफ्ट मेन (65 प्रतिशत) विद ट्रिपल कोरोनरी आर्टरी डिजीज विद सीवियर लेफ्ट वेंट्रिकुलर डिस्फंक्शन कहा जाता है। चूंकि इस मरीज के रिश्तेदार एवं स्वयं मरीज ने अंबेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग की कई सफल सर्जरी के बारे में काफी सुना था, इसलिए उन्होंने अन्य संस्थान न जाकर अंबेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग को चुना। मरीज एवं उसके रिश्तेदार एंजियोग्राफी की सीडी लेकर डॉ. कृष्णकांत साहू से मिले तो उन्होंने बताया कि कुछ दिनों बाद यहां पर बाईपास सर्जरी की सुविधा प्रारंभ होने की संभावना है, जिसके लिए अस्पताल प्रबंधन एवं विभाग के उच्च अधिकारी सतत सक्रिय हैं। आपकी बीमारी में बाईपास शीघ्र करना अत्यंत आवश्यक है। मरीज के रिश्तेदार अंबेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग में ही बाईपास कराना चाह रहे थे, इसलिए उन्होंने लगभग डेढ़ महीने तक इंतजार भी किया। यह ऑपरेशन सामान्य कोरोनरी बाईपास सर्जरी से ज्यादा क्रिटिकल इसलिए था क्योंकि मरीज के हार्ट की तीनों नसों के ब्लॉकेज के साथ-साथ मुख्य नस में भी ब्लॉकेज था एवं हार्ट मात्र 35 प्रतिशत ही कार्य कर रहा था एवं मरीज को क्रॉनिक किडनी डिजीज की बीमारी भी थी, जिसमें मरीज का क्रिएटिनिन लेवल 1.5 एम.जी. था। कई बार ऐसे मरीजों को अचानक किडनी फेल हो जाने के चांस बढ़ जाते हैं और डायलिसिस की नौबत आ जाती है। इस मरीज में बाईपास में आर्टेरियल ग्राफ्ट (लेफ्ट इंटरनल मेमेरी आर्टरी) एवं सैफेनस वेन का प्रयोग किया गया क्योंकि आर्टेरियल ग्राफ्ट की लाइफ ज्यादा होती है। ऑपरेशन के दौरान मरीज की एलएडी (लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग आर्टरी) इंट्रामस्कुलर थी, जिसको सर्जरी के दौरान ग्राफ्टिंग करना बहुत ही जटिल होता है। जाने बाईपास सर्जरी और ओपन हार्ट सर्जरी को ओपन हार्ट सर्जरी के लिए छाती को खोलकर विशेष मशीन, जिसको हार्ट लंग मशीन कहा जाता है, की सहायता से हार्ट और फेफड़ों के कार्य को बंद किया जाता है। फिर हृदय के चेंबर को खोलकर या तो वॉल्व बदला जाता है, या फिर रिपेयर किया जाता है, या फिर दो चेंबर के बीच छेद को बंद किया जाता है। बाईपास सर्जरी में छाती को खोला जाता है, परंतु हार्ट के चेंबर को नहीं खोला जाता। यह तब किया जाता है जब हार्ट के मांसपेशियों को सप्लाई करने वाली नस, जिसको कोरोनरी आर्टरी कहा जाता है, में ब्लॉकेज होता है। इसको कोरोनरी आर्टरी डिजीज कहा जाता है। इस ऑपरेशन में छाती के अंदर से (इंटरनल मेमरी आर्टरी), हाथ से रेडियल आर्टरी एवं पैरों से सैफेनस वेन (saphenous) को निकाल कर हार्ट की नस (कोरोनरी आर्टरी) जहां पर ब्लॉकेज है, उससे (ब्लॉकेज का बाईपास) जोड़ दिया जाता है, जिससे हार्ट की नसों में पुनः रक्त प्रवाह प्रारंभ हो जाता है। यह बाईपास सर्जरी हार्ट लंग मशीन की सहायता से होती है तो उसको ऑन पंप सीएबीजी कहा जाता है और बिना हार्ट लंग मशीन की सहायता से होती है तो उसे ऑफ पंप बीटिंग हार्ट सर्जरी कहा जाता है। बीटिंग हार्ट सर्जरी या ऑन पंप सीएबीजी मरीज के हार्ट की स्थिति पर निर्भर करता है एवं दोनों के ही परिणाम अच्छे होते हैं। मरीज के स्वास्थ्य में दिनों दिन सुधार हो रहा है। मरीज अपना सामान्य दिनचर्या जैसे खाना-खाना, चलना, बाथरूम जाना इत्यादि प्रारंभ कर चुका है।  recent visitors 37

नवाचार और विकास की संभावनाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में मध्यप्रदेश ने बनाई पहचान

भोपाल मध्यप्रदेश की उपजाऊ भूमि केवल भरपूर फसल ही नहीं, बल्कि नवाचार, सतत विकास और वैश्विक निवेश के नए द्वार भी खोल रही है। सरकार के इस रूपांतरणकारी प्रयास में दुनिया भर के निवेशकों को शामिल होने का आमंत्रण दिया जा रहा है। प्रदेश ने अपनी समृद्ध कृषि परंपरा और उन्नत कृषि तकनीकों के बल पर खुद को देश की “फ़ूड बास्केट” के रूप में स्थापित किया है। राज्य को अब तक सात कृषि कर्मण पुरस्कार मिल चुके हैं, जो इसकी कृषि क्षेत्र में मजबूती को दर्शाते हैं। मध्यप्रदेश में ‘श्वेत क्रांति’ का विस्तार मध्यप्रदेश में ‘श्वेत क्रांति’ तेजी से अपने पैर पसार रही है। राज्य में 2012 से 2023 के बीच दूध उत्पादन में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। इस विस्तार को डेयरी इन्वेस्टमेंट एक्सेलेरेटर जैसी योजनाओं से मजबूती मिली है, जो निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर डेयरी उद्योग के विकास को प्रोत्साहित कर रही है। मध्यप्रदेश दूध उत्पादन और उपलब्धता में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता (591 ग्राम प्रति दिन) में मध्यप्रदेश छठवें स्थान पर है। राष्ट्रीय सीएजीआर 6.18% की तुलना में मध्यप्रदेश की वृद्धि दर 8.60% है। देश के कुल दूध उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान वर्ष 2023 में 8.73% था। खाद्य और डेयरी प्रोसेसिंग में MSMEs को बढ़ावा राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को खाद्य और डेयरी प्रोसेसिंग में आगे बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है, जिनमें औद्योगिक विकास सब्सिडी, पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए वित्तीय सहायता और बिजली शुल्क में छूट शामिल है । पीएमएफएमई योजना से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को लाभ प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना के तहत क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे इस क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। बड़े निवेशकों के लिए आकर्षक सुविधाएं राज्य सरकार 50 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाले बड़े उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है। इसमें निर्यात इकाइयों को लाभ, हरित औद्योगिकीकरण (ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन) को बढ़ावा और कोल्ड चेन और वेयरहाउस जैसे खाद्य प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार के इन प्रयासों से राज्य का खाद्य और डेयरी उद्योग नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि पूरे देश के डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है। मध्यप्रदेश में निवेश की बयार: ‘सीड टू शेल्फ’ में वैश्विक निवेशकों का स्वागत मध्यप्रदेश खाद्य प्र-संस्करण और कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। राज्य अपने समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, रणनीतिक नीतियों और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के कारण ‘भारत की खाद्य टोकरी’ की उपाधि का वास्तविक हकदार बना है। अब, यह ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के जरिए वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तैयार है। खाद्य प्र-संस्करण में निवेश का हब बना मध्यप्रदेश राज्य सरकार की निवेश नीति को उद्योग जगत के सकारात्मक रुझान से बल मिल रहा है। पेप्सी -को, कोका कोला और अमूल जैसी शीर्ष वैश्विक कंपनियां पहले ही राज्य में निवेश कर चुकी हैं, जिससे यह क्षेत्र निवेशकों के लिए और भी आकर्षक बन गया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025: “सीड टू शेल्फ” सत्र पर फोकस 25 फरवरी 2025 को ‘इंवेस्ट मध्यप्रदेश – ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025’ के तहत “सीड टू शेल्फ” थीम पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र का उद्देश्य कृषि, खाद्य प्र-संस्करण और बागवानी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना होगा। इस सत्र में अधिकारी, उद्योग जगत के दिग्गज और निवेशक एक मंच पर आएंगे, जिससे नई साझेदारियों और व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा। यह पहल मध्यप्रदेश को कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।   recent visitors 45

पहले चरण की कार्यवाही संपन्न, ओम बिरला ने सदन में कामकाज पर खुशी जताई, 10 मार्च को अगली बैठक

नई दिल्ली लोकसभा में बजट सत्र के पहले चरण की कार्यवाही गुरुवार को संपन्न हो गई और अब सदन की अगली बैठक 10 मार्च को होगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में कामकाज पर खुशी जताते हुए कहा कि कार्य उत्पादकता लगभग 112 प्रतिशत रही। अदाणी समूह से संबंधित एक खबर को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के शोर-शराबे के कारण बृहस्पतिवार को सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे शुरू हुई। कार्यवाही शुरू होने पर सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच वक्फ संशोधन विधेयक संबंधी संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट पेश की गई और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विधेयक, 2025 प्रस्तुत किया। बजट पर सामान्य चर्चा 16 घंटे 13 मिनट चली वक्फ विधेयक संबंधी समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने रिपोर्ट पेश की और इस पर विरोध दर्ज कराते हुए विपक्ष के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बजट सत्र के पहले चरण की कार्यवाही संपन्न होने की घोषणा की। बिरला ने कहा, ‘‘बजट सत्र के प्रथम चरण का आखिरी दिन है। मुझे खुशी है कि अच्छे वातावरण में चर्चा हुई। सदस्यों का पूरा सहयोग मिला।'' उन्होंने बताया कि संसद की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में लगभग 17 घंटे 23 मिनट चर्चा हुई जिसमें 173 सदस्यों ने भाग लिया। बिरला ने बताया कि केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा 16 घंटे 13 मिनट चली, जिसमें 170 सदस्यों ने सहभागिता निभाई। उन्होंने कहा, ‘‘आशा है कि आगे भी इसी तरह से सदस्यों का सहयोग मिलता रहेगा।'' बिरला ने कार्यवाही आगामी 10 मार्च को प्रात: 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले आज सुबह सदन की बैठक शुरू हुई तो कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने अदाणी समूह से संबंधित एक खबर को लेकर हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही आरंभ होने के लगभग पांच मिनट बाद अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। नारेबाजी के बीच ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराया और जलशक्ति मंत्रालय से संबंधित कुछ पूरक प्रश्न पूछे गए। बिरला ने विपक्षी सदस्यों से नारेबाजी बंद करने और कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘आप प्रश्नकाल के दौरान नियोजित तरीके से गतिरोध करते हैं, यह अच्छी परंपरा नहीं है। आप (कांग्रेस) ने इतने साल शासन किया है….आप सदन में व्यवधान पैदा करना करते हैं।'' बिरला का कहना था, ‘‘मैंने कहा है कि दोपहर 12 बजे विषय को रखने देंगे, लेकिन आप चर्चा नहीं चाहते। आप महत्वपूर्ण विषयों को सदन में नहीं लाना चाहते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘प्रश्नकाल में सरकार की जवाबदेही तय होती है। यह सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। आप सदस्यों का अधिकार छीनना चाहते हैं।'' सत्र का दूसरा चरण 10 मार्च को शुरू होगा हंगामा नहीं थमने पर बिरला ने सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न करीब 11 बजकर पांच मिनट पर अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। विपक्षी सदस्यों ने जिस खबर को लेकर हंगामा किया, उसमें दावा किया गया है कि सरकार ने गुजरात में अदाणी समूह के नवीकरणीय ऊर्जा पार्क के लिए मार्ग प्रशस्त करने के मकसद से पाकिस्तान सीमा पर राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल में ढील दी है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने इस कारोबारी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला है। अदाणी समूह की ओर से इस आरोप पर फिलहाल प्रतिक्रिया नहीं आई है। बजट सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई और अगले दिन एक फरवरी को आम बजट पेश किया गया। सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट और बतौर वित्त मंत्री लगातार अपना आठवां बजट पेश किया। सत्र का दूसरा चरण 10 मार्च को शुरू होगा और इसके 4 अप्रैल तक जारी रहने की संभावना है। बजट सत्र में कुल 27 बैठकें प्रस्तावित हैं।   recent visitors 56

महामंडलेश्वर के पद से इस्तीफा नहीं दे रहीं ममता कुलकर्णी, ‘वो महामंडलेश्वर थीं, हैं और रहेंगी’: डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी

मुंबई बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी जब से इंडिया आई हैं, तब से लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। एक्ट्रेस ने हाल ही में ऐलान किया था कि वो किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर के पद से इस्तीफा दे रही हैं, लेकिन अब महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने उनके इस फैसले को लेकर कुछ और ही बताया है। त्रिपाठी ने खुलासा किया है कि वो किसी पद से इस्तीफा नहीं दे रही हैं। मीडिया से बात करते हुए महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने ममता कुलकर्णी के इस्तीफे वाली बात को पूरी तरह से नकार दिया और कहा कि वो महामंडलेश्वर थीं, हैं और रहेंगी। उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर यमाई ममतानंद गिरि के नाम से ही ममता जी को जाना जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि गुरु पर बात आई तो ममता ने आहत होकर इस्तीफा दिया था लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ममता जी को सजाकर, संवारकर रखना मेरा दायित्व है। पद की गरिमा रखने वालों को ही महामंडलेश्वर बनाया जाएगा।   ममता ने किया था ऐलान आपको बता दें ममता कुलकर्णी ने हाल ही में महाकुंभ में अपना पिंड दान किया था और इसके बाद उन्हें किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनाया गया था। लेकिन इस पर खूब विवाद हुआ। इसके कुछ दिनों बाद ममता ने ऐलान किया है कि वो इस पद से इस्तीफा दे रही हैं। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए ममता ने कहा था कि ‘मैं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दे रही हूं। मैं बचपन से ही साध्वी रही हूं और आगे भी रहूंगी…।     recent visitors 57