Wednesday, July 8, 2026 7:46 am

17 वर्षीय युवक चार पैरों के साथ जी रहा था, दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने सर्जरी कर दिया नया जीवन

नई दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के सर्जन एक अभूतपूर्व सर्जिकल केस में सफल रहे हैं। उन्होंने उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के 17 वर्षीय युवक से उसके परजीवी जुड़वां भाई के अवशेषों को निकालने में सफलता हासिल की। इस युवक के शरीर में एक अविकसित जुड़वां भाई था, जिसकी एक जोड़ी पैर और अविकसित पुरुष जननांग युवक के धड़ से बाहर निकले हुए थे। यह जन्मजात समस्या थी, जिससे युवक को 17 वर्षों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। जटिल सर्जरी युवक के शरीर में जुड़वां भाई के अविकसित अवशेष होने के कारण उसकी जीवनशैली में कई कठिनाइयां थीं। इसके कारण युवक को शारीरिक और मानसिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था और उसकी पढ़ाई भी आठवीं कक्षा में ही छूट गई थी। ऐसे मामलों में सर्जरी एक कठिन चुनौती होती है, क्योंकि इसमें नसों का जाल और अंगों को अलग करने की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। इस मामले में, एम्स के सर्जनों को छाती की दीवार, आंतों और किडनी के पास के टिशूज को अलग करना था। इस विशेष सर्जरी में युवक के अविकसित अंग न केवल बाहर निकले थे, बल्कि उनमें स्पर्श और दर्द का अहसास भी होता थाऔर समय के साथ यह अंग बढ़ते जा रहे थे। इनमें अविकसित पुरुष जननांग भी शामिल थे, जो युवक के लिए एक मानसिक चुनौती बन गए थे। सफल ऑपरेशन एम्स के डॉक्टरों की एक टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को आठ फरवरी 2024 को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह सर्जरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण और दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि दुनिया में इस तरह के केवल 40 मामले ही सामने आए हैं। इस प्रकार के ऑपरेशन में एक जुड़वां भाई विकसित हो जाता है, जबकि दूसरा अविकसित रहता है और शरीर में अलग तरह की जटिलताएं पैदा करता है। अब, युवक को एक नया जीवन मिला है और वह शारीरिक और मानसिक रूप से पहले से अधिक स्वतंत्र महसूस कर रहा है। उसे अब न केवल अपनी जिंदगी में एक नया मौका मिला है, बल्कि उसकी आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई है।   recent visitors 55

राज्यपाल बागडे ने फुलंब्री में महिला छात्रावास, ग्रंथालय और सभागृह निर्माण के भूमि पूजन समारोह में भाग लिया

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के  फुलंब्री में श्री संत सावता माळी ग्रामीण महाविद्यालय में पी.एम.उषा योजना के अंतर्गत निर्मित होने वाले महिला छात्रावास, ग्रंथालय और सभागृह निर्माण के भूमि पूजन समारोह में भाग लिया। उन्होंने इससे पहले भूमि पूजन करते हुए इन भवनों के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखने पर जोर दिया। उन्होंने गांवो में उच्च शिक्षा के प्रभावी प्रसार के साथ वहां आधारभूत सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताया। recent visitors 56

मुख्य सचिव सुधांश पंत ने ‘राइजिंग राजस्थान’ ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट, 2024 में हुए एमओयू के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की

जयपुर  मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत ने 'राइजिंग राजस्थान' ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के दौरान हस्ताक्षरित एमओयू के कार्यान्वयन की गुरूवार को समीक्षा बैठक ली। गत 13 फरवरी को हुई समीक्षा बैठक के बाद एमओयू के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए श्री पंत ने अधिकारियों को उपलब्ध सरकारी भूमि का लैंड बैंक बनाने और इसे निवेशकों को आसानी से उपलब्ध कराने हेतु ऑनलाइन करने के निर्देश दिए। रीको द्वारा भूमि बैंक विकसित करने और निवेशकों को तेजी से भूमि आवंटित करने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए श्री पंत ने राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास और स्थानीय स्वशासन  जैसे अन्य भूमि आवंटन संबंधित विभागों को भी अलग-अलग ऑनलाइन भूमि बैंक बनाने की संभावनाओं को तलाशने के निर्देश दिए।   मुख्य सचिव ने एमओयू की अधिक संख्या वाले जिलों में लैंड बैंक बनाने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिये। रीको के डायरेक्ट लैंड अलॉटमेंट पोर्टल के लॉन्च से पहले उन्होंने विभिन्न विभागों को शेष निवेशकों के लिए भूमि आवंटन से संबंधित टास्क क्रिएट करने के निर्देश दिए।   मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में बड़े सौर पार्क विकसित करने की संभावनाओं को तलाशा जाना चाहिए जहां उन ऊर्जा कंपनियों को स्थापित किया जा सके, जिन्होंने निवेश समिट के दौरान एमओयू हस्ताक्षरित किए थे। श्री सुधांश पंत ने कहा कि भूमि आवंटन किसी भी व्यावसायिक इकाई की स्थापना में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिन प्रमुख विभागों के पास बड़े सरकारी लैंड पार्सल हैं, उन्हें पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ऑनलाइन लैंड बैंक बनाने की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए। ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी संख्या में हस्ताक्षरित एमओयू को ध्यान में रखते हुए विभागों को ऐसे बड़े सोलर पार्क स्थापित करने की संभावनाएं तलाशनी चाहिए, जो रीको औद्योगिक क्षेत्रों की तर्ज पर ऊर्जा कंपनियों को समायोजित कर सकें और उनके एमओयू कार्यान्वयन में तेजी ला सकें। श्री पंत ने विभागीय सचिवों को निर्देश दिए कि वे एमओयू के कार्यान्वयन की साप्ताहिक समीक्षा करें और उनकी प्रगति से संबंधित जानकारी एमओयू इम्प्लीमेंटेशन पोर्टल पर अपलोड करें।  उल्लेखनीय है कि गत 9-11 दिसंबर को आयोजित निवेश समिट के दौरान कुल 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए गये। इनमें से 1.66 लाख करोड़ रुपये मूल्य के एमओयू का कार्यान्वयन मात्र दो महीने की रिकॉर्ड अवधि में शुरू किया जा चुका है। बैठक में  उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री अजिताभ शर्मा, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव श्री दिनेश कुमार, स्थानीय स्वशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री राजेश यादव, नगर विकास एवं आवासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री वैभव गालरिया, खनन एवं खान विभाग के प्रमुख सचिव श्री टी. रविकांत, रीको की प्रबंध निदेशक श्रीमति शिवांगी स्वर्णकार, बीआईपी के अतिरिक्त आयुक्त श्री सौरभ स्वामी सहित राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। recent visitors 57

एक राष्ट्र एक चुनाव: एक नई दिशा की ओर: न्यायमूर्ति रोहित आर्य (सेवानिवृत)

भोपाल प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने एक बार कहा था, 'कठिनाई नए विचारों को विकसित करने में नहीं, बल्कि पुराने विचारों से मुक्त होने में है।‘ संभवत: एक देश एक चुनाव का विरोध कर रहे राजनीतिक दल और नेता पुराने विचारों से मुक्‍त होने में ही कठिनाई महसूस कर रहे हैं, या सिर्फ विरोध की राजनीति के तकाजे उन्‍हें इस अभिनव प्रयास का समर्थन करने से रोक रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी नीव विविधता में एकता की अवधारणा पर टिकी हुई है। "एक राष्ट्र, एक चुनाव" इसी विचारधारा को सशक्त बनाता है, जिससे संसद और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जा सकें। यह विषय न केवल प्रशासनिक सुधार से जुड़ा है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र को अधिक संगठित, कुशल और प्रभावी बनाने की दिशा में एक एतिहासिक कदम भी है। यह प्रणाली चुनावी प्रक्रिया को सरल बनायेगी, शासन को स्थिरता प्रदान करेगी और अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम करेगी। पहले भी होते रहे हैं एक साथ चुनाव हालांकि "एक राष्ट्र, एक चुनाव" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिशा में की गई पहल के बाद से चर्चा का विषय बना है, लेकिन यह कोई नया विचार नहीं है। भारत में 1952 के पहले आम चुनाव से ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाते थे, इसके बाद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव होते थे। उससे पहले यही प्रकिया ब्रिटिश सरकार द्वारा 1935 के भारत शासन अधिनियम में भी अपनाई गई थी। हालांकि, 1967 के बाद राजनैतिक और सामाजिक बदलावों के कारण यह व्यवस्था टूट गई। 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसद को भंग कर समय से पहले चुनाव कराए, जिसके बाद यह प्रवृत्ति और मजबूत हो गई। नतीजा यह हुआ कि आज हम वर्षभर में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलग-अलग चुनाव होते हुए देखते हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव शासन व्यवस्था, आर्थिक संसाधनों और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ा है। 1962 में भारतीय चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि "अगर संभव हो तो प्रयास और खर्च की पुनरावृत्ति से बचना चाहिये "। 1983 की वार्षिक रिपोर्ट में भी संसदीय और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की आवश्यकता को दोहराया गया। 170वीं विधि आयोग की रिपोर्ट ने तो इसे और आगे बढ़ाते हुये अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को इसका प्रमुख कारण बताया। इस अनुच्छेद का अत्यधिक प्रयोग भारत के संघीय ढांचे के लिये चिन्ता का विषय बना रहा है। 2015 में 79वी स्थाई समिति की रिपोर्ट ने भी एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया। दूषित हो गई लोकतांत्रिक प्रणाली देश में होने वाले बहु-चरणीय चुनावों ने कई समस्याओं को जन्म दिया है और इनके कारण पैदा हुई बुराईयों ने हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही दूषित कर दिया है। चुनावों में बाहुबल का बढ़ता प्रयोग लोकतंत्र के लिये खतरा बन गया है। मतदान के दौरान होने वाली हिंसा जैसी घटनाएं चुनावी प्रक्रिया को बाधित करती हैं। बहु-चरणीय चुनावों में कानून व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता है। चुनावों में फर्जी समाचार, सोशल मीडिया में दुष्प्रचार और मतदाताओं को गुमराह करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है। बार-बार होने वाले चुनावों के कारण ध्यान शासन से हटकर चुनाव प्रचार पर  चला जाता है, जिससे नीतियों के कियान्वयन में देरी होती है। इससे मुफ्तखोरी की राजनीति की शुरुआत हुई जो राज्‍य की वित्‍तीय स्थिति को नुकसान पहुंचाती है। बार-बार होने वाले चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता विकास कार्यक्रमों और प्रशासन को बाधित करती है, जिससे नीतिगत गतिरोध उत्पन्न होता है और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है। हर बार के चुनावों में भारी सुरक्षा बल और कर्मचारियों की तैनाती होती है, जो न सिर्फ सरकारी संसाधनों पर दबाव डालती है, बल्कि‍ आवश्‍यक सेवाओं को भी बाधित करती है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में ही 70 लाख अधिकारियों की तैनाती हुई थी। बार-बार के चुनावों से मतदाताओं पर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पडता है। वे उदासीनता और थकान महसूस करने लगते हैं। जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी सीमित हो जाती है। देश के लिए हितकारी केन्द्र सरकार ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार को आगे बढ़ाने के लिये पूर्व राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्‍यक्षता में "कोविन्द समिति " का गठन किया था। इस समिति के सुझावों के आधार पर 129वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक साथ चुनाव होने से खर्च और प्रशासनिक लागत की  बचत होगी। कम चुनाव निर्बाध शासन और नीतियों का क्रियान्‍वयन सुनिश्‍चित करेंगे। एक साथ होने वाले चुनाव केन्द्र और राज्य की नीतियों के बीच समन्वय में सुधार करेंगे। मतदान प्रतिशत बढेगा और एक साथ होने वाले चुनावों से राजनीतिक स्थिरता तथा आर्थिक विकास की राह प्रशस्‍त होगी, जो निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा देगी। समिति ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का अनुमानित खर्च 1.35 लाख करोड बताया है। समिति के अनुसार एक देश, एक चुनाव से कम से कम 12000 करोड읧 की बचत तो होगी ही, काले धन और भ्रष्‍टाचार पर भी रोक लगेगी। समिति के अनुसार ‘एक देश, एक चुनाव’ देश के जीडीपी के 1.5 प्रतिशत की बचत कर सकता है। इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, अप्रत्याशित प्रचार खर्च कम होंगे और चुनाव के बाद मुद्रास्फीति में कमी होगी। यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएँ, तो सरकार को पूरे पाँच साल तक निर्बाध रूप से कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे विकास की गति तेज होगी, सामाजिक योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा और जनता को वास्तविक लाभ मिलेगा। सबका साथ, सबका विश्‍वास के साथ आगे बढ읧ी प्रक्रिया कोविंद समिति ने एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर व्‍यापक विचार विमर्श किया। समिति ने कुल 62 राजनीतिक दलों से इस प्रस्ताव पर सुझाव मांगे। इनमें से 47 दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी, जिनमें से 32 दलों ने इसका समर्थन किया और 15 ने इसका विरोध किया। इसके अतिरिक्त, भारत के चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने भी अपनी राय दी और सभी ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं है। उच्च न्यायालयों के 9 पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकी 3 … Read more

पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रम के सैद्धांतिक और व्यवहारिक परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा

जयपुर पशुपालन, डेयरी, गोपालन और मत्स्य विभाग के शासन सचिव  डॉ समित शर्मा ने कहा है कि पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रम के सैद्धांतिक और व्यवहारिक परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बहुत आवश्यक है। यह देखा गया है कि इन परीक्षाओं में पर्यवेक्षक और निरीक्षक के रूप में सेवानिवृत अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है जिससे कई बार परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते हैं। शासन सचिव ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इन भूमिकाओं में सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति की प्रथा को बंद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अब  प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर कम से कम दो पर्यवेक्षक/ परीक्षक की नियुक्ति की जाए जिनमें से एक अधिकारी राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजूवास) से तथा दूसरा पशुपालन विभाग से नामित हो। अगर किसी कारणवश राजूवास के अधिकारी उपलब्ध नहीं है तो पशुपालन विभाग के दो अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है। उन्होंने परीक्षा के दौरान नैतिक मानकों को बनाए रखने और किसी भी प्रकार के कदाचार को रोकने के लिए सभी नामित पर्यवेक्षकों और निरीक्षकों को नकद उपहार, मुफ्त या किसी प्रकार के भौतिक लाभ सहित किसी भी प्रकार केे आतिथ्य को स्वीकार करने से बचने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्रों के लीक होने और परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के प्रयोग को रोकने के लिए सभी स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संस्थान की संबद्धता और एनओसी निरस्त कर दी जाएगी। शासन सचिव ने बताया कि सभी परीक्षा केंद्र अधीक्षक, डीन और प्रिंसीपल को परीक्षा हॉल में रिकॉर्डिंग सिस्टम के साथ सीसीटीवी कैमरा लगाने के निर्देश दिए गए हैं जिसकी अधिसूचना राजूवास, बीकानेर द्वारा जारी की जा चुकी है। उन्होंने निर्देश दिया कि परीक्षा हॉल में कैमरा इस तरह लगाया जाए  कि प्रश्न पत्र के लिफाफे खोलने से लेकर उत्तर पुस्तिका के लिफाफे सील करने तक की पूरी प्रक्रिया बिना किसी रूकावट के रेकार्ड हो सके। साथ ही परीक्षा कक्ष का प्रत्येक विद्यार्थी कैमरे की जद में रहे। सभी रिकॉर्डिंग को दैनिक आधार पर डीवीडी में स्थानांतरित करना भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक होगा जिसकी एक प्रति संबंधित संस्थान अथवा कॉलेज के पास रहेगी तथा दूसरी प्रति राजूवास के परीक्षा नियंत्रक को भिजवाना होगा। किसी  भी प्रकार की अपूर्ण अथवा अनुचित रिकार्डिंग के लिए कोई बहाना स्वीकार्य नहीं होगा। डॉ शर्मा ने निष्पक्ष, पारदर्शी और नकल मुक्त परीक्षा आयोजित करने तथा परीक्षा की सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल और उचित कार्रवाई करते हुए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देश दिए। recent visitors 36

चैम्पियंस ट्रॉफी में हार का मुद्दा पाकिस्तानी संसद में उठेगा, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ देंगे बयान

इस्लामाबाद ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम की बड़ी फजीहत हुई है. यह टूर्नामेंट पाकिस्तान की ही मेजबानी में खेला जा रहा है. मगर यह मेजबान टीम ग्रुप स्टेज से भी आगे नहीं बड़ सकी है. बड़ी बात ये है कि पाकिस्तान टीम बगैर कोई मैच जीते टूर्नामेंट से बाहर हो गई है. ऐसे में अब बड़ी खबर सामने आ रही है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अब अपनी टीम की हार का मुद्दा संसद में उठाएंगे. वो इस मामले को व्यक्तिगत तौर पर संसद में रखेंगे. पीएम शरीफ के राजनीतिक और सार्वजनिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक निजी चैनल पर यह जानकारी दी है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (PML-N) के नेता राणा सनाउल्लाह ने कहा कि चैम्पियंस ट्रॉफी में पाकिस्तानी टीम की अपमानजनक हार हुई और वो टूर्नामेंट से जल्दी बाहर हो गई. इस पर शरीफ सरकार संज्ञान लेगी. चैंपियंस ट्रॉफी में भारत से हारते ही कटोरा थामने की नौबत चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर होती ही टीम के लिए स्पॉन्सर तलाशना भी असंभव नजर आ रहा है. कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत ने रविवार को दुबई में पाकिस्तान को छह विकेट से रौंदा था फिर न्यूजीलैंड ने बांग्लादेश को हराकर खुद तो सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया ही भारत भी टॉप-4 में पहुंच गया. इसी के साथ ग्रुप ए से पाकिस्तान और बांग्लादेश बाहर हो गए. टूर्नामेंट से बाहर हुआ पाकिस्तान भारत से हारने से एक दिन पहले ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड मैच के लिए गद्दाफी स्टेडियम में लोगों की शानदार भीड़ को देखकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारी आत्मविश्वास से भरे हुए थे. बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, ‘लोगों की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान से इतर मैच का आनंद लेते देखना एक उत्साहवर्धक अनुभव था.’ लोग स्टेडियम आएंगे या नहीं 1996 के विश्व कप के बाद पाकिस्तान पहली बार किसी आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा था. फैंस को उम्मीद थी कि आठ टीमों की इस प्रतियोगिता में घरेलू टीम टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी. अब पीसीबी के सामने एक समस्या ये भी है कि पाकिस्तान में बचे हुए मैच में दर्शकों की भीड़ स्टेडियम पहुंचती है या नहीं. ब्रांड वैल्यू पर पड़ेगा असर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के वाणिज्यिक इकाई के एक विश्वसनीय सूत्र ने कहा कि अगर पाकिस्तान सेमीफाइनल में नहीं भी खेलता है तो भी पीसीबी को वित्तीय रूप से कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा क्योंकि केवल गेट पर्ची और मैदान की आय के अन्य स्रोत ही प्रभावित होंगे, लेकिन संकटग्रस्त टीम की ‘ब्रांड वैल्यू’ पर असर पड़ने वाला है. भारत ने मारी पेट पर लात पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी ने कहा,’हमें मेजबानी शुल्क, टिकट बिक्री सहित आईसीसी राजस्व में हमारा हिस्सा मिलने की गारंटी है, लेकिन अन्य मुद्दे भी हैं जैसे कि लोगों का इस बड़े टूर्नामेंट में रुचि खत्म होना और प्रसारणकर्ता द्वारा आधे भरे हुए स्टेडियम दिखाना आदि. और सबसे बड़ी चिंता यह है कि यहां क्रिकेट के प्रति दीवानगी के बावजूद भविष्य में पाकिस्तान क्रिकेट को एक ब्रांड के रूप में बेचना आसान नहीं होगा. recent visitors 37

प्राकृतिक खेती के इच्छुक राज्य के किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल प्रारंभ किया गया : कृषि मंत्री श्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसान कल्याण मिशन अंतर्गत किसानों की आय में वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह मिशन कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने का प्रमुख माध्यम बनेगा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा प्राकृतिक कृषि के प्रसार एवं किसानों को प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड का गठन किया गया है। प्राकृतिक खेती कर रहे एवं प्राकृतिक खेती के इच्छुक राज्य के किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल प्रारंभ किया गया है।पोर्टल पर प्राकृतिक खेती करने के इच्छुक कुल 72 हजार 967 किसानों ने पंजीयन करवाया है। प्रत्येक पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केन्द्र की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में 81 लाख से अधिक किसानों को गत वर्ष चार हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि का अंतरण किया गया है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 3 हजार 900 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जा रही है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण के लिए इस वर्ष 600 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। विगत वर्ष में किसानों को समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ पर प्रति क्विंटल 125 रुपये का बोनस प्रदाय किया गया। देश में पहली बार राज्य सरकार ने सोयाबीन का 4 हजार 892 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर उपार्जन करने का निर्णय लिया। लगभग 2 लाख किसानों से प्रदेश में पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन का उपार्जन कर 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि का भुगतान किया गया। खरीफ-2024 में 1.23 लाख क्विंटल से अधिक प्रमाणित बीज का वितरण किया गया। किसानों को उर्वरक प्रदाय करने के लिए केन्द्रों की संख्या बढ़ाने के साथ ही अमानक उर्वरक बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने और उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोग शालाओं की भूमिका को सक्रिय बनाकर किसान हित सुनिश्चित किया गया। मध्यप्रदेश को कृषि उत्पादन में निरंतर अग्रणी स्थान मिला है। सात बार कृषि कर्मण अवॉर्ड भी प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना अब प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के नाम से लागू है। कृषकों को सौर ऊर्जा के लाभ से लाभांवित करने के लिए प्रदेश में अस्थाई विद्युत कनेक्शन लेने वाले लगभग सवा लाख किसानों को सौर ऊर्जा के पम्प प्रदाय किये जाएँगे। अगले चार वर्ष में सौर ऊर्जा पम्प प्रदाय कर किसानों को विद्युत आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। किसानों को अधिक दाम प्रदान करने वाली फसलों को लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश के सिंचित क्षेत्र का रकबा अगले पाँच वर्ष में 50 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर एक करोड़ लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का रकबा 26 लाख हेक्टेयर से अधिक है। संतरा, टमाटर, धनिया, लहसुन और मसाला उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम है। प्रदेश में 50 हाइटेक नर्सरी बनाई जा रही हैं। नर्सरियों के कुशल प्रबंधन के लिए ई-नर्सरी पोर्टल भी तैयार किया गया है।   recent visitors 37