Sunday, July 5, 2026 12:49 pm

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा- जहां तक भारतीय सेना की बात है तो हमारा काम हमारे अग्रिम मोर्चों को सुरक्षित रखना

नई दिल्ली सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ती मिलीभगत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि "हमें इस उच्च स्तर की साजिश को स्वीकार करना होगा। वर्चुअल डोमेन में यह (मिलीभगत) लगभग 100 प्रतिशत है। भौतिक रूप से (पाकिस्तान के पास) अधिकतर सैन्य उपकरण चीनी मूल के हैं। दो मोर्चों पर युद्ध की आशंका एक वास्तविकता है।" मीडिया कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए सेना प्रमुख ने भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश का भी जिक्र किया जो आजकल पाकिस्तान के साथ नजदीकियां बढ़ा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन का नया गठजोड़ भारत के लिए चिंता की बात है, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया। हालांकि उन्होंने बांग्लादेश के संदर्भ में कहा कि उस देश की सेना के साथ हमारी सेना के अच्छे संबंध है और वहां चुनाव के बाद नई सरकार के बनने का इंतजार करना चाहिए। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, "जहां तक भारतीय सेना की बात है तो हमारा काम हमारे अग्रिम मोर्चों को सुरक्षित रखना। हम कई देशों के साथ अपने अग्रिम मोर्चे शेयर करते हैं। इसलिए हमारी क्षमता इतनी होनी चाहिए कि हम अपने पड़ोसियों की क्षमता को हैंडल कर सकें। सेना को हमेशा इसके लिए तैयार रहना चाहिए।" उन्होंने कहा, "जहां तक बांग्लादेश की बात है, तो उसको लेकर हमें जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। वहां चुनी हुई सरकार आने दीजिए। देखते हैं कि वह कैसे रिश्ते रखती है। फिर देखते हैं कि हम क्या करेंगे।" सेना प्रमुख ने आगे कहा कि मौजूदा समय में दोनों देशों की सेनाओं के बीच संबंध बहुत मजबूत हैं। उन्होंने कहा, "हम समय-समय पर एक दूसरे नोट्स देते रहते हैं ताकि किसी भी संदेह की स्थिति से बचा जा सके।" उन्होंने बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद का केंद्र केवल एक देश है। उन्होंने कहा, “अगर वह (पाकिस्तान) हमारे किसी भी पड़ोसी मुल्क के साथ संबंध रखता है तो मुझे चिंता होनी चाहिए। क्योंकि आतंकवाद का रास्ता उस देश से भी खुल सकता है। मौजूदा समय में मेरी यही सबसे बड़ी चिंता है।” सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों में कोई कमी नहीं सेना प्रमुख ने एलओसी (LoC) पर पाकिस्तान की सैन्य तैनाती और गर्मियों में घुसपैठ की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि "क्या कोई संकेत है कि आतंकवाद रुक गया है? क्या कोई कमी आई है? जवाब है- नहीं। हमें आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना होगा।" उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने 2018 से अब तक आतंकवादी घटनाओं में 83 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। घाटी में आतंकी भर्ती भी बेहद कम हो गई है, और 2024 में केवल 45 युवाओं की आतंकवाद में भर्ती की सूचना है। वहीं, अमरनाथ यात्रा में इस बार 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे यह साफ होता है कि क्षेत्र अब "आतंकवाद से पर्यटन" की ओर बढ़ रहा है। "पाकिस्तान खुद अपने ही आतंकवाद के कारण गर्त में जा रहा है" जनरल द्विवेदी ने कहा कि "पाकिस्तान अपने ही उग्रवाद का शिकार बन रहा है और खुद को संकट में डाल रहा है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान स्थिर रहे, न कि वह आतंकवाद का केंद्र बने।" उन्होंने यह भी बताया कि 2024 में मारे गए 60% से अधिक आतंकवादी पाकिस्तानी मूल के थे, जो सीमा पार से जारी खतरे को दर्शाता है। चीन के साथ स्थिति और भविष्य की रणनीति पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेपचोक में तनाव कम होने के बाद चीन के रुख पर चर्चा करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि "सीमा पर तैनात जवान अधिक सहयोगी और समझदार होते हैं, जिससे परस्पर तालमेल बेहतर हुआ है।" सैन्य संसाधनों पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि "युद्ध के समय कितने भी संसाधन हों, वे कभी पर्याप्त नहीं होते। युद्ध के बाद भी किसी देश को 25-30% संसाधन सुरक्षित रखने पड़ते हैं, ताकि भविष्य के खतरों से निपटा जा सके।" भारत हर तरह के युद्ध के लिए तैयार: सेना प्रमुख भविष्य के युद्धों की प्रकृति पर उन्होंने कहा कि "भारत पहले से ही 'न युद्ध, न शांति' की स्थिति में है। हमें ढाई मोर्चों (पाकिस्तान, चीन और आंतरिक चुनौतियों) का खतरा बना रहेगा।" उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा कि "आप अपने दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन अपने पड़ोसी नहीं"। अग्निवीर योजना सफल, लेकिन सुधार जारी अग्निवीर भर्ती योजना की सफलता पर सेना प्रमुख ने कहा कि "यह योजना बेहद सफल रही है। हमें बेहतरीन युवा मिल रहे हैं, जो सीखने के लिए बेहद उत्सुक हैं और प्रदर्शन भी शानदार कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अग्निवीरों की छुट्टियों और लाभों को नियमित सैनिकों के समान बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। तकनीकी दक्षता वाले अग्निवीरों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अधिकतम उम्र सीमा 21 से बढ़ाकर 23 वर्ष करने का सुझाव दिया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या अग्निवीरों की स्थायी भर्ती 25% से बढ़ाकर 50% की जाएगी, उन्होंने कहा कि "इस पर फैसला 2026 के अंत तक लिया जाएगा।" recent visitors 28

अरविंद चितांबरम ने प्राग मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट का खिताब जीता

प्राग भारत की शतरंज में बादशाहत जारी रखते हुए ग्रैंडमास्टर अरविंद चितांबरम ने अपने करियर का पहला बड़ा खिताब जीता। उन्होंने प्रतिष्ठित प्राग मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट में कई दिग्गज खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया। तमिलनाडु के 25 वर्षीय अरविंद ने नौवें और अंतिम दौर में तुर्की के गुरेल एदिज के खिलाफ ड्रॉ खेलते हुए कुल छह अंकों के साथ खिताब अपने नाम किया। विश्व नंबर 8 आर प्रज्ञानानंदा इस टूर्नामेंट में पांच अंकों के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें अंतिम दौर में डच ग्रैंडमास्टर अनीश गिरि के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। चीन के शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी वेई यी और गिरि भी प्रज्ञानानंदा के साथ पांच अंकों पर रहे। निर्णायक मुकाबले में दिखाया धैर्य अंतिम दौर में अरविंद ने काले मोहरों से खेलते हुए कैरो-कान डिफेंस का उपयोग किया। उनके प्रतिद्वंदी गुरेल एदिज ने किंग्स पॉन ओपनिंग का एडवांस वेरिएशन चुना। हालांकि, जल्द ही उन्हें एक मोहरा गंवाना पड़ा और खेल जटिल हो गया। अरविंद ने संयम बनाए रखा और स्थिति को नियंत्रण में रखा। कई चालों की पुनरावृत्ति के बाद दोनों खिलाड़ियों ने ड्रा पर सहमति जताई। जीत के बाद अरविंद की प्रतिक्रिया अरविंद चितांबरम ने जीत के बाद अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “मैंने पिछले दो दिनों से अच्छी नींद नहीं ली थी। सातवें दौर तक मैं पूरी तरह ठीक था, लेकिन बढ़त मिलने के बाद दबाव महसूस हुआ।” उन्होंने अपने कोच ग्रैंडमास्टर आर बी रमेश को धन्यवाद दिया और इस टूर्नामेंट में अनीश गिरि के खिलाफ अपने प्रदर्शन को सर्वश्रेष्ठ करार दिया। प्रज्ञानानंदा के लिए कठिन मुकाबला दूसरी ओर, प्रज्ञानानंदा ने अनीश गिरि के खिलाफ आक्रामक शुरुआत की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। उन्होंने किंग्स इंडियन डिफेंस अपनाया, लेकिन गिरि ने शानदार रणनीति के साथ एक महत्वपूर्ण मौके पर रुक के बदले लघु मोहरा लेकर खेल को अपने पक्ष में मोड़ लिया और जीत दर्ज की। अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन अंतिम दौर के अन्य मुकाबलों में चेक गणराज्य के डेविड नवारा और अमेरिका के सैम शैंकलैंड के बीच बाजी ड्रॉ रही। वहीं, जर्मनी के विंसेंट केमर के खिलाफ चेक खिलाड़ी गुयेन थाई दाई वान जीत के करीब पहुंचकर भी मुकाबला ड्रॉ खेलने को मजबूर हुए।महिला चैलेंजर्स वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख ने ग्रीस के स्टामाटिस कौर्कुलोस-अर्डितिस को हराकर जोरदार वापसी की। इस वर्ग में उज्बेकिस्तान के नोदिरबेक याकुब्बोएव और डेनमार्क के जोनास बुहक ब्जेरे सात अंकों के साथ संयुक्त विजेता बने।   recent visitors 41

डब्ल्यूपीएल : आरसीबी के लिए अब करो या मरो की स्थिति, प्लेऑफ के लिए जीतने होंगे बचे दोनों मैच

नई दिल्ली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) 2025 में अपने अभियान की शानदार शुरुआत की थी। पहले मुकाबले में गुजरात जायंट्स के खिलाफ रिकॉर्ड 202 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत दर्ज की, फिर दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) को आठ विकेट से हराया। लेकिन घरेलू मैदान पर खेले गए चारों मुकाबले गंवाने के बाद अब टीम प्लेऑफ से बाहर होने की कगार पर है। आरसीबी के अभी छह मैचों में सिर्फ चार अंक हैं और टीम अपने बचे हुए दो मुकाबले यूपी वॉरियर्स और मुंबई इंडियंस के खिलाफ जीतकर अधिकतम आठ अंकों तक ही पहुंच सकती है। दूसरी ओर, जायंट्स और मुंबई पहले ही आठ अंकों पर हैं, जबकि दिल्ली कैपिटल्स (10 अंकों के साथ) प्लेऑफ में पहुंच चुकी है। हालांकि आरसीबी के लिए राह मुश्किल जरूर है, लेकिन उनकी किस्मत अब भी उनके हाथों में है। वहीं, यूपी वॉरियर्स की टीम प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है। आरसीबी की प्लेऑफ की उम्मीदें शनिवार को यूपी वॉरियर्स के खिलाफ होने वाले मुकाबले पर टिकी हैं। हारने की स्थिति में उनकी दौड़ वहीं खत्म हो जाएगी। लेकिन जीत दर्ज करने पर आरसीबी को मुंबई इंडियंस और जायंट्स के बीच होने वाले मुकाबले के नतीजे पर नजर रखनी होगी, ताकि उन्हें यह पता चल सके कि प्लेऑफ में जाने के लिए उन्हें किस टीम से नेट रन रेट में आगे निकलना होगा। फिलहाल, जायंट्स का नेट रन रेट मुंबई से बेहतर है, लेकिन आरसीबी के लिए राहत की बात यह है कि उनका आखिरी मुकाबला मुंबई से ही होगा। आरसीबी इस समय मुंबई के नेट रन रेट से लगभग 60 रन पीछे है, लेकिन अगर वे यूपी वॉरियर्स को 10 रन से हरा दें और जायंट्स मुंबई को भी 10 रन से हरा दें, तो आरसीबी को प्लेऑफ में जाने के लिए मुंबई के खिलाफ केवल 20 रन की जीत चाहिए होगी। दूसरी ओर, जायंट्स से आगे निकलने के लिए आरसीबी को यूपी और मुंबई के खिलाफ कुल मिलाकर लगभग 62 रन के अंतर से जीत दर्ज करनी होगी, बशर्ते जायंट्स मुंबई से केवल 10 रन से हारे। क्या दिल्ली कैपिटल्स सीधे फाइनल में पहुंचेगी? दिल्ली कैपिटल्स लीग चरण का अंत टॉप पर रहते हुए कर चुकी है, लेकिन उनकी सीधी फाइनल एंट्री तय नहीं हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि मुंबई और जायंट्स दोनों ही अंक तालिका में उनसे आगे निकल सकते हैं। मुंबई दोनों मैच जीतकर पहले स्थान पर पहुंच सकती है, जबकि जायंट्स अगर मुंबई को बड़े अंतर से हरा देती है तो वे भी टॉप पर पहुंच सकते हैं। जायंट्स को मुंबई के खिलाफ 17 रन या 12 गेंद शेष रहते (अगर पहली पारी का स्कोर 180 हो) जीत दर्ज करनी होगी, जिससे वे दिल्ली के NRR से आगे निकल सकें। वहीं, मुंबई इस समय दिल्ली से लगभग 30 रन पीछे है, यानी अगर वे एक मैच 10 रन से हार जाते हैं, तो उन्हें दूसरा मैच करीब 40 रन से जीतना होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या आरसीबी अंतिम मौके का फायदा उठाकर प्लेऑफ में जगह बना पाती है या नहीं।   recent visitors 37

सभी महिला कर्मचारियों को चुनौतियों से निपटने के लिए देंगे मिर्च स्प्रे, रेलवे सुरक्षा बल की कर्मियों के लिए रेलवे की नई कवायद

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने सुरक्षा में लगी रेलवे सुरक्षा बल की कर्मियों के लिए एक नया फैसला किया है। सरकारी प्रेस नोट के मुताबिक इन सभी महिला कर्मचारियों को मिर्च स्प्रे के डिब्बे उपलब्ध कराए जाएंगे। रेलवे के मुताबिक यह गैर घातक लेकिन प्रभावी हथियार महिला कर्मियों को अकेले या बच्चों के साथ यात्रा कर रही महिला यात्रियों की सुरक्षा करने में मदद करेगा। चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने में मदद करेगा। रेलवे द्वारा जारी प्रेस में कहा गया कि यह नया कदम भारतीय रेलवे की लैंगिक समावेशिता और महिला शक्तिकरण और अपने नेटवर्क में बढ़ी हुई सुरक्षा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यहीं नहीं मिर्च स्प्रे उपलब्ध कराने से महिला आरपीएफ कर्मियों को सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मिलेगी, जिससे वे खतरों को रोक सकेंगी और आपात स्थितियों को प्रभावी ढंग से संभाव सकेंगी। आरपीएफ के डीजी मनोज यादव ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के महिलाओं को सशक्त बनाने और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है। भारतीय रेलवे ने महिला यात्रियों के लिए यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लगातार कई उपाय किए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी महिला आरपीएफ कर्मी ताकत, देखभाल और लचीलेपन का प्रतीक हैं। उन्हें मिर्च स्प्रे के डिब्बे से लैस करके, हम उनका आत्मविश्वास और परिचालन क्षमता बढ़ा रहे हैं, साथ ही यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि यात्रियों की सुरक्षा – विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस फैसले को लेकर मंत्रालय ने कहा कि रेलवे सुरक्षा बल में अधिक महिलाओं को शामिल करना एक प्रभावशाली नीति रही है। इस नीति की वजह से आरपीएफ में करीब 9 फीसदी महिला कर्मी हैं। इनमें से कई महिला आरपीएफ कर्मी मेरी सहेली टीमों का हिस्सा हैं, जिनकी मुख्य जिम्मेदारी महिला यात्रियों की सुरक्षित यात्राओं को सुनिश्चित करना है। recent visitors 35

रीवा अरोड़ा ने डिजिटल इन्फ्लुएंस एंड वुमन एम्पावरमेंट में कर ली PHD

मुंबई चाइल्ड आर्टिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रीवा अरोड़ा एक बार फिर से लोगों की आलोचनाओं का शिकार हो गई हैं। उन्होंने 19 साल की उम्र में डिजिटल इन्फ्लुएंस एंड वुमन एम्पावरमेंट में PHD कर ली है। उसकी डिग्री के साथ फोटो शेयर की और बताया कि अब वह डॉक्टर बन गई हैं। जिसके बाद तो इंटरनेट यूजर्स ने उन्हें छेंक लिया। 'भारत' और 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी फिल्मों में काम कर चुकीं रीवा अरोड़ा की सही उम्र तो आज तक कोई जान न सका है। लेकिन वह खुद को बड़ा ही बताती हैं। जबकि इंटरनेट उन्हें 14-16 साल का ही समझता है। अब इंस्टाग्राम पर उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिसमें वह कॉन्वोकेशन के दौरान पहने जाने वाली टोपी और गाउन में दिखाई दे रही हैं। हालांकि एक पैर में चोट लगी है लेकिन वह पोज दे रही हैं और खुशी जाहिर कर रही हैं। रीवा अरोड़ा ने हासिल की PHD की डिग्री आदि शंकर वैदिक यूनिवर्सिटी से उन्होंने ये PHD की डिग्री हासिल की है। कैप्शन में लिखा, 'अब से मैं डॉक्टर रीवा अरोड़ा हूं। इस मील के पत्थर तक पहुंचना एक सपने के सच होने जैसा है, और मैंने जो हासिल किया है, उस पर मुझे इससे ज़्यादा गर्व नहीं हो सकता।' अब इस पर एक्टर कुणाल सिंह, एक्ट्रेस अनेरी वजानी, सचिन गुप्ता समेत अन्य ने बधाई दी है लेकिन यूजर्स ने फिरकी ली है। रीवा अरोड़ा को लोगों ने सुनाई बातें रीवा अरोड़ा के पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा, 'बचपन में 55 की डिग्री।' एक ने कहा, 'कभी ट्यूशन या स्कूल भी गई है?' एक ने पूछा, 'ये डिग्री कैसे हासिल कर सकती है? कोई लॉजिक है?' एक ने लिखा, 'हे भगवान मुझे इस 15 साल की डॉक्टर से बचा ले।' एक ने कहा, '18 की उम्र में डिग्री? बढ़िया मजाक किया।' एक ने लिखा, 'पैसे देकर डिग्री ली है न?' एक ने पूछा, 'कितने पैसे दिए?' recent visitors 49

आईएएस शिल्पा गुप्ता की बढ़ी मुश्किलें, गिरफ्तारी वारंट जारी, कोर्ट के आदेशों का नहीं किया पालन

जबलपुर  आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश लोकशिक्षण संचनालय की कमिश्नर शिल्पा गुप्ता की मुश्किलें बढ़ गईं हैं. कन्टैंप्ट ऑफ कोर्ट के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. हाईकोर्ट ने शिल्पा गुप्ता को 23 मार्च को कम्प्लाइंस रिपोर्ट के साथ कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए हैं. दरअसल जबलपुर हाईकोर्ट ने डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता को 4 महीने पहले याचिकाकर्ताओं को शिक्षा विभाग में नियुक्ति देने के आदेश दिए थे, लेकिन उन्होने कोर्ट के इस आदेश का पालन करना तो दूर अपना जवाब भी नहीं दिया. हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती परीक्षा में आरक्षित वर्ग के मैरिटोरियस उम्मीदवारों को उनकी चॉइस फिलिंग के मुताबिक शिक्षा विभाग में नियुक्ति देने के आदेश दिए थे, लेकिन शिक्षा विभाग ने उन्हें ट्राइलब वैलफेयर विभाग में ही बरकरार रखा. ऐसे में उम्मीदवारों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की. आईएएस शिल्पा गुप्ता की बढ़ीं मुश्किलें कोर्ट को बताया गया कि आईएएस शिल्पा गुप्ता के खिलाफ हाईकोर्ट में कंटैंप्ट ऑफ कोर्ट के करीब 200 मामले लंबित हैं, जिनसे समझा जा सकता है कि वो अदालत के आदेशों का पालन नहीं करतीं. ऐसे में हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता के खिलाफ 10 हजार रुपयों का जमानती गिरफ्तारी वारेंट जारी कर दिया. हाईकोर्ट ने शिल्पा गुप्ता को ये आदेश दिया है कि वो 23 मार्च को कोर्ट के आदेश का पालन करने की रिपोर्ट के साथ हाईकोर्ट में हाजिर रहें. recent visitors 44

सड़कों पर आ गई भ्रष्टाचार से परेशान जनता, अर्थव्यवस्था भी बदहाल, नेपाल में एक बार फिर राजतंत्र की मांग तेज

नेपाल नेपाल में एक बार फिर राजतंत्र की मांग तेज हो गई है। राजशाही का समर्थन करने वाली राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) ने काठमांडू में एक रैली निकाली। इस रैली में बड़ी संख्या में लोग नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज लेकर शामिल हुए थे। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह ने हाल ही में दावा किया है कि वह एक बार फिर देश के लिए सक्रिय भूमिका में आना चाहते हैं। वहीं बात करें प्रधानमंत्री केपी ओली और नेपाली कांग्रेस चीफ शेर बहादुर देउबा की तो नेपाल का फिर से राजशाही की ओर लौटना संभव ही नहीं है। सीपीए-माओवादी सेंटर के चेयरमैन पुष्पकमल दहल प्रचंड ने भी कहा है कि ज्ञानेंद्र सिंह को जनता को मूर्ख बनाना छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर पूर्व राजा को लगता है कि वह बहुत फेमस हैं तो वह अपनी एक पार्टी बना सकते हैं। जनता अगर मौका देगी तो वह फिर से देश की सेवा कर सकते हैं। आरपीपी के समर्थकों का कहना है कि नेपाल की सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। ऐसे में लोकतंत्र को हटाकर एक बार फिर राजशाही लागू कर देनी चाहिए। नेपाल में 2008 तक राजशाही की ही व्यवस्था थी। वहीं राजशाही खत्म होने केबाद काठमांडू के रॉयल पैलेस को म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया था। गुरुवार को पोखरा मे ज्ञानेंद्र शाह ने पूर्व राजा वीरेंद्र शाह की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस मौके पर भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। वहां लोगों ने राजशाही का राष्ट्रगान भी गाया। रिपोर्ट्स की मानें तो राजशाही की मांग करने वालों में बड़ी संख्या युवाओं की है। मौजूदा व्यवस्था से दुखी हो गए लोग नेपाल में जब राजशाही का अंत हुआ था तो जनता को लगता था कि लोकतंत्र में देश और जनता दोनों का बहुत भला होने वाला है। हालांकि अब नेपाल की जनता इस व्यवस्ता से ऊब रही है। वहीं ज्ञानेंद्र शाह की पॉपुलरिटी एक बार फिर बढ़ रही है। नेपाल की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच भीलोगों का मोहभंग हो गया है। वहीं सरकार की विदेश नीति भी प्रभावी नहीं रही है। भारत के लिए कैसा है कम्युनिस्ट शासन नेपाल लंबे समय से भारत का सहयोगी रहा है। राजशाही के वक्त भारत और नेपाल के बीच मैत्रिसंबंध ज्यादा अच्छे थे। वहीं कम्युनिस्ट शासन में नेपाल की राजनीत में चीन का समर्थन और भारत विरोधी भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी है। नेपाल की सरकार में भारत की गोरखा रेजिमेंट में भर्तियां तक बंद करवा दीं। वहीं जनता को इससे नुकसान हो रहा है। ऐसे में वह पुराने दिनों को याद कर रही है। इसका फायदा राजशाही समर्थक उठाना चाहते हैं और वे जनता के आक्रोश को आंदोलन में बनदलने की फिराक में हैं। अर्थव्यवस्था का बुरा हाल राजशाही की मांग करने वाली आरपीपी की बात करें तो नेपाल की संसद में 275 में पार्टी की कुल संख्या 14 ही है। ऐसे में इस पार्टी का जनाधार मजबूत नहीं कहा जा सकता। नेपाल में 165 चुने हुए सांसद हैं और बाकी के 110 समानुपातिक प्रक्रिया से संसद भेजे गए हैं। नेपाल में अर्थव्यवस्था भी बदहाली से गुजर रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेपाल की आर्थिक मदद रोकने का ऐलान कर दिया है। सरकार कर्ज तले दबी है और यह बोझ बढ़ता ही जा रहा है। इस वित्त वर्ष में नेपाल पर बाहरी कर्ज करीब 2 लाख करोड़ बढ़ चुका है। recent visitors 25