Tuesday, July 7, 2026 5:08 am

समय से 5 मिनट पहले बुलाया ऑफिस, ओवरटाइम के लिए कंपनी को देने पड़ गए करोड़ों

टोक्यो  जापान को समय के लिए सबसे ज्यादा पाबंद देश माना जाता है. यहां पर इन दिनों एक अनोखा मामला देखने को मिला है. यहां सरकारी कर्मचारियों को तय समय से 5 मिनट  पहले ऑफिस बुलाने पर उन्हें 5 करोड़ का मुआवजा दिया गया. अब यह घटना जापानी इंटरनेट यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बन गई है. समय से पहले बुलाया ऑफिस 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' के मुताबिक जापान के एक छोटे से शहर गिनान में सरकारी कर्मचारियों को नियमित निर्धारित समय से पांच मिनट पहले काम पर आने का आदेश दिया गया था. यह नियम शहर के पूर्व मेयर हिदियो कोजिमा की ओर से लागू किया गया था. मेयर को उनके स्ट्रिक्ट मैनेजमेंट स्टाइल और वर्कप्लेस में अनुचित व्यवहार के लिए जाना जाता था. उन्होंने ऑफिस के सभी कर्मचारियों को रोजाना सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर ऑफिस आने के लिए बोला. यह तय समय से 5 मिनट पहले था.    कर्मचारियों ने की शिकायत मेयर के इस आदेश से सभी 146 कर्मचारी काफी नाराज हुए. उन्होंने इस फैसले के खिलाफ शिकायत दर्ज की और सीधा जापान फेयर ट्रेड कमीशन से संपर्क साधा. वहीं कमीशन ने भी कर्मचारियों के पक्ष में ही फैसला सुनाया और शहर के मेयर को उन्हें मुआवजे के रूप में  5,852,481 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया. चर्चा का विषय बनी घटना जापान की यह घटना अब इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही है. वहीं जापानी लोगों के बीच यह घटना चर्चा का विषय बन गई है. खासतौर पर उन लोगों के लिए जो अपनी कंपनी में ओवरटाइम वर्किंग कल्चर से परेशान हैं. लोग इसपर तरह तरह के रिएक्शंस दे रहे हैं. कुछ लोगों ने कर्मचारियों के इस फैसले की प्रशंसा की है और कहा कि यह फैसला जापान में ओवरटाइम वर्किंग कल्चर को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.  recent visitors 34

72 घंटे तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल न करने से डेली लाइफ में दिखेंगे 7 बदलाव

नई दिल्ली अगर हम आपसे कहें कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल 3 दिनों तक न करें, तो आपका क्या रिएक्शन होगा? 72 घंटों तक बिना फोन का इस्तेमाल किए रहना आजकल की दुनिया में काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि हमारे लगभग सभी काम इसी पर होते हैं। मनोरंजन हो या सोशल नेटवर्किंग सबकुछ स्मार्टफोन से ही होता है। लेकिन इसके इस्तेमाल को कम करने से आपके दिमाग में कुछ हैरान करने वाले बदलाव हो सकते हैं। इस बारे में एक स्टडी भी हुई है। आइए जानें इस बारे में। क्या है यह स्टडी? इस स्टडी में युवाओं को 72 घंटे तक फोन का कम से कम इस्तेमाल करने को कहा गया। वे फोन का इस्तेमाल सिर्फ काम के सिलसिले में या अपने परिवार और दोस्तों के साथ कॉन्टेक्ट में रहने के लिए ही कर सकते थे। इस रिसर्च से पहले सभी प्रतिभागियों का ब्रेन स्कैन किया गया, जिसमें क्रेविंग और रिवॉर्ड वाले हिस्से पर फोकस किया गया है। 72 घंटे तक स्मार्टफोन के इस्तेमाल को रेस्ट्रिक्ट करने के बाद ब्रेन स्कैन में प्रतिभागियों के ब्रेन केमिस्ट्री में बदलाव देखने को मिले। स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम होने की वजह से प्रतिभागियों के दिमाग में एडिक्टिव सब्स्टांस के विड्रॉवल जैसे रिएक्शन देखने को मिले। इससे यह समझा जा सकता है कि स्मार्टफोन एडिक्शन कितना गंभीर है और इसके इस्तेमाल को कम करने की कितनी ज्यादा जरूरत है। तनाव में कमी फोन का लगातार इस्तेमाल करने से हमारा दिमाग हमेशा एक्टिव रहता है। नोटिफिकेशन, मैसेज और सोशल मीडिया अपडेट्स की भरमार हमें मानसिक रूप से थका देती है। 3 दिन तक फोन से दूर रहने से हमारा दिमाग शांत होता है और तनाव कम हो जाता है। इससे हम ज्यादा शांत और बैलेंस्ड महसूस करते हैं। फोकस करने की क्षमता में सुधार फोन के बार-बार इस्तेमाल से हमारा ध्यान भटकता रहता है। फोन आसपास होने से भी हमारा ध्यान बार-बार उसी ओर जाता रहता है। 3 दिन तक फोन का इस्तेमाल न करने से हमारा दिमाग फोकस्ड होता है और हम अपने काम पर बेहतर ढंग से फोकस कर पाते हैं। इससे प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है। नींद की गुणवत्ता में सुधार फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है। फोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है। 3 दिन तक फोन से दूर रहने से हमारी नींद का पैटर्न सुधरता है और हम ज्यादा गहरी और आरामदायक नींद ले पाते हैं। क्रिएटिविटी में बढ़ोतरी फोन के इस्तेमाल से हमारा दिमाग लगातार इनफॉर्मेशन से भरा रहता है, जिससे क्रिएटिव थिंकिंग कम हो जाती है। फोन से दूर रहने पर हमारा दिमाग खुलकर और ज्यादा बेहतर ढंग से सोच पाता है। इससे नई चीजें सीखने और क्रिएटिव थॉट्स विकसित करने की क्षमता बढ़ती है। सोशल कनेक्शन में सुधार फोन के ज्यादा इस्तेमाल से हम वास्तविक दुनिया से कटने लगते हैं। फोन का कम इस्तेमाल करने से हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिता पाते हैं। इससे रिश्तों में मजबूती आती है और हम ज्यादा खुश महसूस करते हैं। सेल्फ रिफ्लेक्शन के लिए समय फोन से दूर रहने पर हमें अपने विचारों और भावनाओं को समझने का मौका मिलता है। यह सेल्फ रिफ्लेक्शन हमें अपने जीवन के गोल्स और प्रायोरिटीज के बारे में बेहतर तरीके से सोचने और इन्हें तय करने में मदद करता है। इससे हमारा मानसिक संतुलन बेहतर होता है। डिजिटल डिटॉक्स तीन दिन तक फोन का इस्तेमाल न करना एक तरह का डिजिटल डिटॉक्स है। यह हमें डिजिटल दुनिया के नेगेटिव प्रभावों से दूर रखता है और हमें असल जिंदगी के साथ जोड़ता है। इससे हमारी मेंटल और इमोशनल हेल्थ बेहतर होती है। recent visitors 31

SSC CGL और MTS भर्ती परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित, कट-ऑफ भी जारी, ऐसे चेक करें स्कोर

 कर्मचारी चयन आयोग ने कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा 2024 और एसएससी एमटीएस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। कैटेगरी-वाइज़ कट-ऑफ भी जारी हो चुका है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर परिणाम और योग्यता अंक चेक कर सकते हैं। बता दें एसएससी एमटीएस भर्ती परीक्षा का आयोजन 30 सितंबर से लेकर 4 नवंबर के बीच किया देशभर के विभिन्न शहरों में आयोजित किया गया था। वहीं एसएससी सीजीएल टियर-1 भर्ती परीक्षा देशभर के विभिन्न शहरों में 5 दिसंबर 2024 को आयोजित हुई थी। टियर-2 एग्जाम 18, 19, 20 और 31 जनवरी को हुई थी।  कितने उम्मीदवारों का हुआ चयन? एसएससी सीजीएल परीक्षा में कुल 18, 174 उम्मीदवार सफल हुए हैं। विभिन्न कारणों को लेकर 1267 उम्मीदवारों के रिजल्ट को रोका गया है। टायर 2 में शामिल 253 उम्मीदवारों के रिजल्ट को रिजेक्ट कर दिया गया है। एसएससी एमटीएस भर्ती परीक्षा में कुल 3428 उम्मीदवार सफल हुए हैं। जिसमें से 500 उम्मीदवारों का रिजल्ट कैंसिल कर दिया गया है। कदाचार के लिए 179 उम्मीदवारों के रिजल्ट पर रोक लगाई गई है। वहीं 198 उम्मीदवार डिसेबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करने में विफल  रहे। बता दें 5 से 12 फरवरी के बीच सीबीआईसी द्वारा फिजिकल टेस्ट का आयोजन किया गया था।   एनटीएस और हवलदार पदों के लिए आयोजित पीईटी/पीएसटी में 20,959 उम्मीदवारों का चयन हुआ था। ऐसे चेक करें रिजल्ट     सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर “Result” के टैब पर क्लिक करें।     अब एसएससी एमटीएस/एसएससी सीजीएल 2024 फाइनल रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें।     स्क्रीन पर पीडीएफ़ पेज खुलेगा। इसमें अपना रोल नंबर चेक करें।     भविष्य के संदर्भ में उम्मीदवार रिजल्ट को डाउनलोड या प्रिन्ट करके अपने पास रख सकते हैं। recent visitors 36

फ्लाइट में 30 हजार फीट की ऊंचाई पर एक-एक कर कपड़े उतारने लगी महिला

ह्यूस्टन “इस तरह की घटनाएं पहले कभी-कभार ही सुनने को मिलती थी, पर आज कल तो यह आम ही हो गया है।” अमेरिका के एक विमान में एक महिला की हरकतों से परेशान हो कर लोग ऐसा ही कुछ कह रहे हैं। यहां ह्यूस्टन से फीनिक्स जा रही एक फ्लाइट यात्रियों के लिए यादगार बन गई। हालांकि यात्री इसे जल्द ही भुलाना चाहेंगे। दरअसल इस फ्लाइट में एक महिला ने कोहराम मचा दिया। महिला 30 हजार फीट की ऊंचाई पर जा कर अचानक विमान से उतरने की जिद करने लगी। मना करने पर उसने जो किया उसे देख कर सब दंग रह गए। इस महिला ने विमान में बैठे लोगों के सामने एक-एक कर सारे कपड़े उतार दिए। नग्न अवस्था में वह विमान में परेड भी करने लगी। महिला ने कथित तौर पर जोर-जोर से चिल्लाते हुए कॉकपिट में घुसने की भी कोशिश की। एक यात्री ने बताया, "उसने सब कुछ उतारना शुरू कर दिया, टोपी, उसके जूते, सब कुछ।" महिला की हरकतों से पूरे विमान में कोहराम मच गया। उस वक्त वहां कई बच्चे भी मौजूद थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि वह कॉकपिट के दरवाजे को पीट-पीट कर अंदर आने देने की जिद करने लगी। स्थिति बिगड़ने पर आखिरकार पायलट को विमान को वापसी की ओर मोड़ना पड़ा। यह पूरा ड्रामा लगभग 25 मिनट तक चला। एक कर्मचारी ने महिला को कंबल से ढकने की कोशिश भी की, लेकिन वह किसी के काबू में नहीं आई। ह्यूस्टन पुलिस ने बाद में उसे हिरासत में लिया है और उसकी मेडिकल जांच की जा रही है। recent visitors 33

टी-72 टैंक को मिलेगा अधिक शक्तिशाली इंजन, भारत और रूस के बीच 248 मिलियन डॉलर की डील

नई दिल्ली रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के टी-72 टैंकों के लिए अधिक शक्तिशाली 1000 एचपी इंजन की खरीद के लिए रूस के  सोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 248 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया। इस सौदे में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट से आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (हैवी व्हीकल फैक्ट्री), अवाडी, चेन्नई को ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) भी शामिल है। टी-72 भारतीय सेना के टैंक बेड़े का मुख्य आधार है। वर्तमान में इसमें 780 एचपी इंजन लगा हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को 1000 एचपी इंजन से लैस करने से भारतीय सेना की युद्धक्षेत्र गतिशीलता और आक्रामक क्षमता में वृद्धि होगी। रूस में निर्मित टी-72 भारतीय सेना के बेड़े का मुख्य टैंक है, जो अभी 780 हॉर्स पावर इंजन से संचालित है। भारत के पास टी-72 टैंक के कुल तीन वेरिएंट हैं। टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को अब 1000 एचपी इंजन से लैस किया जाएगा, जिससे भारतीय सेना की युद्धक गतिशीलता और आक्रामक क्षमता बढ़ेगी। इस टैंकको 1960 के दशक में सोवियत रूस ने विकसित और निर्मित करके रूसी सेना ने तमाम मोर्चों पर इसका इस्तेमाल शुरू किया। चीन के साथ 1962 में लड़ाई के बाद भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने की योजना बनी। इसी क्रम में 1970 के आसपास भारत ने रूस से टी-72 टैंक खरीदा। यह यूरोप से बाहर भारत का पहला टैंक सौदा था और तबसे यह भारतीय सेना का भरोसेमंद साथी है। वहीं मजबूत सरकारी समर्थन के दम पर, भारत का रक्षा उत्पादन 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174 प्रतिशत अधिक है। देश का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भारत का आत्मनिर्भर अभियान ‘वांछित परिणाम दे रहा है’ और देश 2029-30 तक रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता हासिल करने के सरकार के प्रयास बेहद सफल साबित हो रहे हैं। रक्षा निर्यात, जो 10 साल पहले सिर्फ 600 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2023-24 में 21,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया। उन्होंने भरोसा जताया कि यह प्रगति जारी रहेगी और 2029-30 तक रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत सरकारी समर्थन और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से भारत का रक्षा क्षेत्र का उत्पादन वित्त वर्ष 24-29 के दौरान लगभग 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने वाला है। भारत के रक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के बीच सहयोग से हथियार और गोला-बारूद, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और नौसेना प्रौद्योगिकियों में प्रगति हुई है।   recent visitors 41

होली के त्यौहार पर जानिए सतयुग की है सबसे पुरानी और प्रचलित कथा

होली मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई, इस प्रश्न पर ज्योतिषाचार्य कहते हैं, इस बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। किंतु, सबसे पुरानी और प्रचलित कथा सतयुग है। ऐसे में कह सकते हैं कि होली सतयुग से मनाई जाती रही है। वह आगे कहते हैं, चार युग होते हैं- सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग। हमारे शास्त्रों में 1 युग लाखों वर्षों का बताया गया है। सतयुग करीब 17 लाख 28 हजार वर्ष, त्रेतायुग 12 लाख 96 हजार वर्ष, द्वापर युग 8 लाख 64 हजार वर्ष, तो कलियुग 4 लाख 32 हजार वर्ष का होना है। इस हिसाब से ही गणना कहती है कि होली 39 लाख वर्ष पहले, सतयुग से मनाई जा रही है। तब, भगवान ने नृसिंह अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, त्रिदेव इस सृष्टि का संचालन करते हैं। ब्रह्मा सृजक हैं, विष्णु पालनहार, तो शिव संहारक। इसके साथ ही विष्णु संतुलन बनाए रखने के लिए भी समय-समय पर अवतार लेते रहते हैं। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु के 10 अवतारों का जिक्र है। सतयुग में उन्होंने मत्स्य, हयग्रीव, कूर्म, वाराह और नृसिंह अवतार लिया, तो त्रेता में वामन, परशुराम और श्रीराम का। द्वापर में वह श्रीकृष्ण रूप में भक्तों के बीच आए। कलियुग में वह कल्कि अवतार लेंगे। वह समय कलियुग और सतयुग के संधिकाल का होगा। अभी तो कलियुग की शुरुआत ही हुई है। प्रभु अपने सभी अवतारों में दुष्टों का संहार करते हैं, तो अपनी लीलाओं से जीवन जीने का तरीका भी सिखाते हैं। होली का त्योहार भी कुछ ऐसा ही है, जिसका आरंभ सतयुग में भगवान के नृसिंह अवतार के समय हुआ। क्या है सबसे प्रचलित कथा? ज्योतिषाचार्य कहते हैं, सतयुग में एक अति पराक्रमी दैत्य राजा था- हिरण्यकश्यप। हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष का भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर वध किया था। इस कारण हिरण्यकश्यप उन्हें दुश्मन मानता था। हिरण्यकश्यप का विवाह कयाधु से हुआ, जिससे उसे प्रह्लाद नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। हिरण्यकश्यप ने मनचाहे वरदान के लिए ब्रह्मा की तपस्या शुरू की। इस दौरान देवताओं ने उसकी नगरी पर आक्रमण कर दिया और वहां अपना शासन स्थापित कर लिया। उस समय देवर्षि नारद मुनि ने कयाधु की रक्षा की और अपने आश्रम में स्थान दिया। वहीं पर हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद का जन्म हुआ। देवर्षि नारद मुनि की संगत में रहने के कारण प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त बन गया। उधर, कई वर्षों तक तपस्या के बाद हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा ने दर्शन दिए। हिरण्यकश्यप ने वरदान मांगा कि मेरी मृत्यु मनुष्य या पशु के हाथों न हो, न किसी अस्त्र-शस्त्र से, ना दिन व रात में, ना भवन के बाहर और ना ही अंदर, न भूमि ना आकाश में हो मेरी मृत्यु हो। कुल मिलाकर, अपनी समझ में उसने अमरता का वरदान मांगा। ब्रह्मा ने उसे यह वरदान दे दिया। किंतु, इसके बाद वह निरंकुश हो गया। वह ऋषि-मुनियों की हत्या करवाने लगा और स्वयं को भगवान घोषित कर दिया। किंतु, स्वयं उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्ति में लीन रहता। यह बात हिरण्यकश्यप को पता चली तो वह गुस्से से फट पड़ा। बार-बार समझाने के बाद भी प्रह्लाद ने जिद नहीं छोड़ी तो उसने उसे मारने का फ़ैसला कर लिया। अब शुरू होती है होलिका की कहानी हिरण्यकश्यप की एक बहन थी होलिका। होलिका को भी भगवान ब्रह्मा से एक वरदान मिला था। यह कि उसे अग्नि नहीं जला सकती। हिरण्यकश्यप ने होलिका को कहा कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, ताकि प्रह्लाद भाग न सके और वह उसी अग्नि में जलकर ख़ाक हो जाए। होलिका ने किया तो ऐसा ही, किंतु वह ख़ुद भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गया। कहा जाता है कि होलिका के एक वस्त्र में न जलने की शक्तियां समाहित थीं, किंतु भगवान विष्णु की कृपा से चली तेज आंधी से वह वस्त्र होलिका से हटकर, प्रह्लाद के शरीर से लिपट गया था। होलिका के जलने और प्रह्लाद के बच जाने पर नगरवासियों ने उत्सव मनाया, जिसे छोटी होली के रूप में भी जानते हैं। इसके बाद जब यह बात फैली तो विष्णु भक्तों ने अगले दिन और भी भव्य तरीके से उत्सव मनाया। होलिका से जुड़ा होने के कारण आगे इस उत्सव का नाम ही होली पड़ गया। उधर, हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए उसे एक खंभे में बांध दिया। वह प्रह्लाद को मारने ही वाला था कि भगवान विष्णु खंभा फाड़कर नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकश्यप को उसके भवन की चौखट पर ले जाकर, संध्या के समय, अपने गोद में रखकर नाखूनों की सहायता से उसका वध कर दिया। इस तरह ब्रह्मा का वरदान भी नहीं टूटा और आततायी का अंत हो गया। भगवान को भक्त प्रह्लाद को उसका उत्तराधिकारी बना दिया। भगवान शिव और कामदेव की कथा सबसे प्रचलित कथा सतयुग में होलिका दहन की ही है, लेकिन बाद के युगों में भी यह उत्सव अलग-अलग समय पर मनाया जाता रहा और इससे अन्य कथाएं भी जुड़ती गईं। होली की एक कहानी कामदेव की भी है। पार्वती शिव से विवाह करने के लिए उनकी तपस्या में लीन थीं लेकिन खुद ध्यानमग्न शिव ने काफी समय तक ध्यान नहीं दिया। ऐसे में कामदेव से रहा न गया और उन्होंने भगवान शिव पर पुष्प बाण चला दिया। ध्यान भंग होने से शिव को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और कामदेव भस्म हो गए। कामदेव के भस्म होने पर उनकी पत्नी रति रोने लगीं और कामदेव को जीवित करने की गुहार लगाई। इसके अगले दिन क्रोध शांत होने पर शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित कर किया। माना जाता है कि कामदेव के भस्म होने पर होलिका जलाई जाती है, तो उनके जीवित होने की खुशी में रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है। महाभारत काल की कथा जानते हैं? महाभारत काल, यानि द्वापर में युधिष्ठिर को प्रभु श्रीकृष्ण ने एक कहानी सुनाई। एक बार श्रीराम के पूर्वज रघु के शासन मे एक असुर महिला थी। उसे कोई नहीं मार सकता था, क्योंकि उसे एक वरदान था। एक दिन, गुरु वशिष्ठ ने बताया कि उसे मारा जा सकता है, यदि बच्चे अपने हाथों में लकड़ी के छोटे टुकड़े लेकर शहर के बाहरी इलाके के … Read more

सिंगापुर वालों ने खरीदी हल्दीराम में 9% हिस्सेदारी, पता चली कंपनी की सही कीमत

नागपुर भारत के मशहूर नमकीन और स्नैक्स ब्रांड हल्दीराम (Haldiram’s) के साथ सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक (Temasek) ने एक बड़ा करार की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि टेमासेक ने हल्दीराम के स्नैक्स बिजनेस में लगभग 9 फीसदी हिस्सेदारी 8,000 करोड़ रुपये में खरीदने का समझौता किया है. इस सौदे के बाद हल्दीराम की कुल वैल्यूएशन लगभग 90,000 करोड़ रुपये आंकी गई है. लंबी चर्चा और कई महीनों की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है. टेमासेक ने हल्दीराम को एक “मूल्यवान संपत्ति” माना है, जो भारत के उपभोक्ता क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी. इससे पहले, प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन ने हल्दीराम में निवेश करने से मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें कंपनी के मूल्यांकन को लेकर चिंता थी. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, हल्दीराम स्नैक्स 9 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी अन्य निवेशकों को बेचने पर भी विचार कर रहा है. पहले की खबरों के मुताबिक, हल्दीराम अपनी कंपनी में 20 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकता है. 1937 में राजस्थान के बीकानेर में स्थापित हल्दीराम आज भारत के स्नैक्स बाजार में एक बड़ा नाम है. यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल के अनुसार, हल्दीराम भारत के 6.2 अरब डॉलर के स्नैक्स बाजार में लगभग 13 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. इसकी सबसे प्रसिद्ध उत्पाद “भुजिया” है, जो आटे, जड़ी-बूटियों और मसालों से बनी एक कुरकुरी नमकीन है. यह छोटे दुकानों पर सिर्फ 10 रुपये में उपलब्ध है. टेमासेक ने पहले कहां-कहां किया है निवेश टेमासेक ने पहले भी भारत में मणिपाल हॉस्पिटल्स और देवयानी इंटरनेशनल (केएफसी और पिज़्ज़ा हट के ऑपरेटर) जैसी कंपनियों में निवेश किया है. हल्दीराम में हिस्सेदारी खरीदकर टेमासेक अब भारत के पैकेज्ड स्नैक्स इंडस्ट्री पर दांव लगा रहा है. हल्दीराम ग्रुप ने हाल ही में अपने एफएमसीजी बिजनेस का बंटवारा किया है. इसके तहत हल्दीराम स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड (एचएसपीएल या हल्दीराम दिल्ली ग्रुप) और हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (एचएफआईपीएल या हल्दीराम नागपुर ग्रुप) को एक नई कंपनी हल्दीराम स्नैक्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (एचएसएफपीएल) में शामिल किया गया है. इसमें एचएसपीएल और एचएफआईपीएल के मौजूदा शेयरधारकों को क्रमशः 56 फीसदी और 44 फीसदी हिस्सेदारी मिलेगी. क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, हल्दीराम ग्रुप का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी विविध है, जिसमें स्नैक्स, नमकीन, मिठाई, रेडी-टू-ईट/प्री-मिक्स फूड, फ्रोजन फूड, बिस्कुट, नॉन-कार्बोनेटेड ड्रिंक, पास्ता आदि शामिल हैं. ग्रुप का भारत में व्यापक प्रभाव है और यह अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों में निर्यात करता है. recent visitors 42