होली के त्योहार पर आउटफिट का चुनाव बेहद खास होता है, पहनें ये स्टाइलिश आउटफिट्स, लगेंगे खूबसूरत

नई दिल्ली होली के त्योहार पर आउटफिट का चुनाव बेहद खास होता है क्योंकि इस दिन रंगों के साथ मस्ती करने के साथ-साथ हमें ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो आरामदायक भी हों और लुक में भी आकर्षक लगें। क्योंकि हम होली सेलिब्रेशन में बहुत सारी फोटो भी खिंचवाते हैं, इसलिए जरूरी है कि हमारा ड्रेस भी परफेक्ट हो। आज हम आपको कुछ आउटफिट आइडियाज बताएंगे, जो आपको होली के दौरान परफेक्ट लुक दे सकते हैं। कॉटन कुर्ता और पलाज़ो गर्मी के मौसम में हल्का और आरामदायक आउटफिट सबसे अच्छा होता है। आप एक रंग-बिरंगे कॉटन कुर्ते के साथ पलाज़ो पहन सकती हैं, जो न केवल आरामदायक होगा बल्कि आपको स्टाइलिश भी दिखाएगा। साफा के साथ अनारकली सूट अगर आप ट्रेडिशनल लुक चाहती हैं तो अनारकली सूट के साथ साफा (पगड़ी) पहनें। यह आपको एक क्लासिक और एथनिक लुक देगा, और होली के रंगों के साथ यह परफेक्ट कॉम्बिनेशन होगा। चूड़ीदार और टॉप अगर आपको कुछ सिंपल और मॉडर्न चाहिए तो आप चूड़ीदार के साथ एक ब्राइट रंग का टॉप पहन सकती हैं। इस लुक में आप आराम से रंग खेल सकती हैं और हर जगह ट्रेंडी दिख सकती हैं। कुर्ती और स्कर्ट इस होली में अगर आप कुछ नया ट्राई करना चाहती हैं तो स्कर्ट और कुर्ती का कॉम्बिनेशन एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यह लुक न सिर्फ स्टाइलिश है बल्कि इसमें मूवमेंट भी आरामदायक है। फ्लोरल साड़ी किसी भी त्योहार में साड़ी पहनने से अलग ही लुक आता है। होली पर भी आप वाइट साड़ी में फ्लोरल प्रिंट ट्राई कर सकती हैं। सफेद साड़ी में बड़े-बड़े रेड, पिंक, येलो कलर के फ्लावर वाला डिज़ाइन बहुत ही ज़्यादा अट्रैक्टिव लुक देगा। इसमें आप मल्टीकलर ब्लाउज़ पेयर कर सकती हैं। इसके अलावा, होली के दिन हल्के रंगों के कपड़े चुनें क्योंकि रंग जल्दी लग सकते हैं और कम से कम ज्वेलरी पहनें ताकि ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित महसूस करें। recent visitors 46

अडानी ग्रुप ने हासिल किया एक और प्रोजेक्ट, जीती ₹36000Cr की बोली, मुंबई में पूरा करेगी ये काम

मुंबई दुनिया के टॉप अरबपतियों (World's Top Billionaires) की लिस्ट में शामिल अडानी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन गौतम अडानी (Gautam Adani) की कंपनी ने मुंबई में एक बड़ी परियोजना के लिए बोली जीती है और ये प्रोजेक्ट 36,000 करोड़ रुपये का है. ये Mumbai की सबसे बड़ी आवास-विकास परियोजनाओं में शामिल है और इसे अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड पूरा करेगी.  अडानी प्रॉपर्टीज ने लगाई सबसे ज्यादा बोली अडानी ग्रुप की कंपनी Adani Properties Pvt Ltd मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित मोतीलाल नगर I, II, III में 143 एकड़ में फैले आवास विकास प्रोजेक्ट में शामिल है. 36,000 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना के लिए अडानी प्रॉपर्टीज (APPL) सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी, जिसने 3.97 लाख वर्ग मीटर का बिल्टअप एरिया पेश किया. बोली जीतने के बाद अब आवंटन पत्र (LoA) जल्द जारी होने की उम्मीद है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी थी अनुमति बता दें कि बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने बीते सप्ताहा ही महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) को निर्माण एवं विकास एजेंसी (C&DA) के माध्यम से मोतीलाल नगर को डेवलप करने की अनुमति दे दी. इसके बाद राज्य सरकार की ओर से इसे एक स्पेशल प्रोजेक्ट घोषित किया है, जिस पर MHADA का नियंत्रण है, हालांकि ये एजेंसी के माध्यम से काम कर रही है. परियोजना के तहत म्हाडा के तहत 3,372 आवासीय इकाइयों, 328 पात्र वाणिज्यिक इकाइयों और 1,600 पात्र झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास किया जाएगा और अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा. अडानी ग्रुप की दूसरी बड़ी पुनर्विकास योजना मुंबई के मोतीलाल नगर में 36,000 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना के लिए अडानी समूह सबसे अधिक बोली लगाने वाला बनकर उभरा और ये धारावी पुनर्विकास परियोजना के बाद दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है. गौरतलब है कि भारतीय अरबपति Gautam Adani ने मुंबई के स्लम एरिया धारावी (Dharavi) का प्रोजेक्ट 610 मिलियन डॉलर की बोली लगाकर जीता था और उसी समय नई कंपनी अडानी प्रॉपर्टीज (Adani Properties) बनाई थी. अब इस कंपनी ने दूसरी बड़ी बोली जीती है. निवासी बोले- पारदर्शिता के साथ हो काम जब इंडिया टुडे ने मोतीलाल नगर साइट का दौरा किया, तो स्थानीय निवासियों ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि म्हाडा इस परियोजना के लिए निजी डेवलपर को शामिल कर रहा है और अगर इस परियोजना में पारदर्शिता नहीं होगी तो वे विरोध करेंगे. वहीं दूसरी ओर अडानी समूह को पुनर्विकास परियोजना मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना  (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के विधायक आदित्य ठाकरे ने भी कहा कि परियोजना में पारदर्शिता होनी चाहिए, अगर कोई कमी है तो हम मुद्दे उठाएंगे.   recent visitors 66

मिस्र के ऐतिहासिक कर्नाक मंदिर में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान ऐसा खजाना हाथ लगा, देवताओं की मूर्तियां भी मिलीं

काहिरा  आज मुस्लिम बहुल आबादी वाले मिस्र की पहचान एक ऐसे देश के रूप में रही है जो हजारों साल पुराने प्राचीन धरोहरों का केंद्र रहा है। इस देश की प्राचीन धरोहरों ने पूरी दुनिया से पुरातत्वविदों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित किया है। पुरातत्वविद यहां खुदाई में दशकों लगा देते हैं, ताकि कोई नायाब चीज खोज सकें। ऐसी ही एक खुदाई में पुरातत्वविदों ने कर्नाक मंदिर परिसर में 2600 साल पुराना खजाना खोज निकाला है। इसमें सोने के गहनों का एक शानदार भंडार और पारिवारिक देवताओं के समूह की मूर्तियां मिली हैं। प्राचीन मिस्र के बारे में नई जानकारी यह ताजा खोज 26वें राजवंश के दौरान प्राचीन मिस्र की धार्मिक और कलात्मक प्रथाओं के बारे में एक आकर्षक जानकारी देती है। इसके साथ ही यह एक हजार साल ईसा पूर्व में कर्नाक मंदिर परिसर के इतिहास और विकास पर नई रोशनी डालती है। कलाकृतियों के चल रहे शोध और जीर्णोद्धार से प्राचीन मिस्रवासियों की परंपरा और प्रथाओं के बारे में और जानकारी मिलती है। हाल ही में मिली कलाकृतियों को पूरी तरह से जीर्णोद्धार किए जाने के बाद लक्सर म्यूजियम में दिखाया जाएगा। इससे मिस्र की प्राचीन संस्कृति और धार्मिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी। कर्नाक में प्राचीन मिस्र का महत्वपूर्ण मंदिर कर्नाक मंदिर को मिस्र के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबे समय तक जीवंत रहने वाले धार्मिक परिसर के रूप में जाना जाता है। लक्सर के पास स्थित इस विशाल मंदिर परिसर का निर्माण लगभग 4000 साल पहले किया गया था और लगभग एक हजार साल तक इसका लगातार नवीनीकरण और संशोधन किया गया। यह परिसर सदियों से प्रमुख पुरातात्विक जांच का स्थल रहा है और इस दौरान सैकड़ों ऐतिहासिक खोजें हुई हैं। देवताओं की सोने की मूर्तियां नई खोजी गई वस्तुओं में सोने के बीज, ताबीज और मूर्तियां हैं। इन पर जटिल डिजाइन की कारीगरी की गई है। इन सभी चीजों को एक टूटे हुए बर्तन के अंदर पाया गया है, लेकिन संरक्षण विधि के चलते उनकी स्थिति हमेशा बरकरार रही। मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने बताया है कि पाए गए आभूषणों में सोने और धातु की अंगूठियां, साथ ही तीन-देवता की मूर्ति शामिल थीं। खुदाई के दौरान मिली तीन मूर्तियों में प्राचीन मिस्र के तीन प्रमुख देवता शामिल हैं। थेब्स के शासक देवता अमुन, उनकी पत्नी और मातृदेवी मुट और उनके बेटे खोंसू यानी चंद्र देवता। शुरू में माना जाता था कि इन मूर्तियों को ताबीज के रूप में पहना जाता थास क्योंकि मान्यता थी कि उन्हें गले में बांधने से वे रक्षा करते हैं। recent visitors 42

दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी शुरू करेगी अच्छे पैरेंट्स बनने ट्रेनिंग

 नई दिल्ली एक बच्चे की परवरिश करना आसान नहीं होता है। प्यार-दुलार के साथ, उन्हें एक बेहतर इंसान बनने के लिए पैरेंट्स को सही गलत-फर्क में समझाना होता है। साथ ही, दुनिया की चुनौतियों से सामना करने के लिए भी तैयार करना होता है और इस दौरान कई बार अभिभावकों को चैलेंज का सामना करना भी सिखाना होता है। कई, बार सिचुएशन यह भी बन जाती है कि, कप्लस फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों की इसी मुश्किल को सॉल्व करने के लिए अब दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी की ओर से अच्छे पैरेंट्स बनने की बकायदा ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रशिक्षण में अभिभावकों को सिखाया जाएगा कि, वे बच्चों की मानसिक स्थिति को कैसे समझें। विपरीत परिस्थितियों में कैसे किड्स के साथ कैसे बिहेव करें और कैसे उन्हें अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित करें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी (डीटीयू) के कुलपति प्रोफेसर प्रो. धनंजय जोशी ने बताया कि, यह एक डिप्लोमा कोर्स होगा। इसका नाम फेमिली वैल्यूज एंड पैरेंटिंग होगा, जिसे ट्रेंड टीचर्स पढ़ाएंगे। इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 महीने की होगी। यह इसी सत्र से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा, योग, ध्यान सहित अन्य कई कोर्सेज भी शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इसमें कब से एडमिशन दिए जाएंगे। साथ ही इसमें प्रवेश लेने के लिए योग्यता और अन्य पात्रता शर्तें क्या होंगी, फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इच्छुक कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि, वे डीटीयू की ऑफिशियल वेबसाइट्स पर विजिट करते रहें, जिससे उन्हें इस बारे में सही अपडेट मिल सके। इसके साथ ही, यहां संचालित होने वाले अन्य कोर्सेज की जानकारी भी मिल सकेगी। पैरेंटिंग स्किल्स को निखारने के लिए ऑनलाइन कई क्लासेज उपलब्ध हैं, जो देश और दुनिया में संचालित की जाती है। इनमें से कुछ में तो फ्री हैं, जिन पर रजिस्टर करके अभिभावक अपनी समस्या के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, बच्चों से जुड़ी प्रॉब्लम पर भी सॉल्यूशन पा सकते हैं। इन वेबसाइट्स पर वेबिनार और वीडियोज के रूप में पैरेंटिंग से संबंधित जानकारी मौजूद है। इसके अलावा, कई ऑनलाइन वीडियोज भी मौजूद हैं। recent visitors 40

होली विशेष : श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक कथा

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन माह पूर्णिमा को होलिका दहन होता है। होली की पौराणिक कथा चार घटनाओं से जुड़ी हुई है। पहली होलिका और भक्त प्रहलाद, दूसरी कामदेव और शिव, तीसरी राजा पृथु और राक्षसी ढुंढी और चौथी श्रीकृष्ण और पूतना। आओ इस बार जानते हैं श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक और प्रामाणिक कथा। वसुदेव का विवाह कंस की बहन देवकी से हुआ। कंस जब देवकी और वसुदेव को रथ पर बैठाकर उनके घर छोड़ने जा रहा था तो रास्ते में आकाशवाणी द्वारा उसे पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। बस फिर क्या था कंस ने दोनों को मथुरा के कारागार में डाल दिया। देवकी के छ: पुत्रों को कंस ने मार दिया था और सातवें पुत्र जो कि शेष नाग के अवतार बलराम थे। उनके अंश को योगमाया ने जन्म से पूर्व ही वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। फिर श्रीकृष्ण का अवतार आठवें पुत्र के रूप में हुआ। उसी समय वसुदेव ने रात में ही श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद और यशोदा के यहां पहुंचा दिया और उनकी नवजात कन्या (योगमाया) को अपने साथ ले आए। परन्तु कंस उस कन्या का वध नहीं कर सका और फिर से आकाशवाणी हुई कि तुझे मारने वाला तो गोकुल मैं पहुंच गया है। इसी कारण कंस ने उस दिन गोकुल में जन्में सभी बच्चों को मारने के आदेश दे दिया। परंतु कोई भी श्रीकृष्‍ण के पास तक नहीं पहुंच सका। तब बालकृष्ण की हत्या करने का काम राक्षसी पूतना को सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व जन्म में पूतना राजा बलि की पुत्री रत्नबाला थी। वह राजकन्या थी। राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगने के लिए भगवान वामन आए तो उनका रूप सौन्दर्य देखकर उस राजकन्या को हुआ कि 'मेरी सगाई हो गई है। काश, मुझे ऐसा ही बेटा हो तो मैं गले लगाऊं और उसको अपना खूब दूध पिलाऊं।' परंतु जब नन्हा मुन्ना वामन विराट हो गया और उसने बलि राजा का सर्वस्व छीन लिया तो वह क्रोधित हो गई "मैं इसको दूध पिलाऊं? नहीं इसको तो मैं जहर पिलाऊं, जहर!'… भगवान ने उसकी मंशा जान ली और कहा तथास्तु। बाद में वही राजकन्या पूतना बनी। पूतना सुंदर नारी का रूप बनाकर बालकृष्ण को विष का स्तनपान कराने गई लेकिन बालकृष्ण के द्वार उसका स्तनपान करने से उसको भयंकर पीड़ा उत्पन्न हुई और वह बालकृष्ण को अपने स्तन से छुड़ाने लगी परंतु यह संभव नहीं हो पाया। कराहते हुए उसने अपना असली रूप धारण किया और चीखती हुई श्रीकृष्ण को लेकर आकाश में पहुंच गई। यह दृश्य देखकर माता यशोदा और माता रोहिणी सहित नगर के सभी लोग घबरा गए और उसके पीछे दौड़े। पूतना कराहते हुए चीखती रहती है। अंतत: वह भूमि पर गिरकर मर जाती है। दूध पीने के बाद बालकृष्ण उसकी छाती पर बैठ जाते हैं। सभी लोग वहां पहुंचते हैं। यशोदा और रोहिणी कहती हैं कोई बचाओ मेरे लल्ला को। तब एक ग्रामीण पूतना की छाती पर चढ़कर जैसे-तैसे लल्ला को नीचे उतार लाता है। यशोदा लल्ला को गले लगा लेती है। बाद में नंद आते हैं तो उनको इस घटना का पता चलता है। फिर एक बूढ़ी महिला कहती है कि ऐसी राक्षसी के हाथों बच जाना तो कोई दैवीय चमत्कार है। ऋषि शांडिल्य से कहकर पूजा और दान करवाओ और उत्सव मनाओ। जिस दिन राक्षसी पूतना का वध हुआ था उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा थी। अत: बुराई का अंत हुआ और इस खुशी में समूचे नंदगांववासियो ने खूब जमकर रंग खेला, नृत्य किया और जमकर उत्सव मनाया। तभी से होली में रंग और भंग का समावेश होने लगा। recent visitors 53

छत्‍तीसगढ़ की परंपरा : गांव में सुख-षांति स्थापित हो इसलिए गांव वाले होलीका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते है

सुकमा गांव में सुख-षांति स्थापित हो और सभी के दुख-दर्द दूर हो इसलिए गांव वाले होलीका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते है। और देवी कृपा मानते हुए उनके पैरों में कोई भी निषान नहीं होता है। उसके बाद दूसरे दिन उसी राख से होली खेलते है। ये परंपरा पिछले 800 सालों से निभाई जा रही है। साथ ही होली के तीन-चार दिन पहले से ही वहां के युवा और बुर्जुग घेर (डांडिया) खेलते हैं। 800 साल पुरानी है परंपरा     जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी. दूर स्थित पेंदलनार गांव जहां आदिवासी और यादव समाज के करीब 800 लोग निवासरत है।     कुछ साल पहले गांव में नक्सलियों का दखल था लेकिन वर्तमान में गांव तक पक्की सड़क बन गई है।     ये गांव अनोखी होली मनाने के नाम से प्रसिद्ध है यहां आज भी 800 साल पुरानी परंपराओं को निभाया जा रहा है।     गांव के युवा रमेश यादव ने बताया कि होली से ठीक तीन-चार दिन पहले से शाम होते ही युवा और बुजुर्ग घेर (डांडिया) आपस में खेलते हैं।     इसके पीछे बुजुर्गो का कहना है कि गांव के युवा और वरिष्ठजनों के बीच आपस में अच्छा तालमेल हो और नाराजगी दूर करने का मकसद है।     उसके बाद होली के दिन यहां दहन के बाद गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्ग लोग धधकती आग पर चलते हैं। दूसरे दिन राख की होली     पुरानी मान्यताओं के मुताबिक होलिका दहन के बाद दूसरे दिन राख के ढेर से लोग होली खेलते हैं।     ऐसा करने के पीछे भी मान्यताएं है कि होलिका दहन के बाद वो राख पवित्र हो जाती है।     पूरे शरीर में लगाने से चर्म रोग नहीं होता है। और भी इसके पीछे मान्यताऐं हैं।     हालांकि वर्तमान में गांव के युवा होली के दिन रंग-गुलाल जरूर लाते हैं लेकिन पंरपराओं को भी निभाया जा रहा है।   recent visitors 36

मुंबई के थाणे इलाके में एक ऐसा रेलवे स्‍टेशन बनाया जा रहा है, जिसमें 11 मंजिल होगी, प्रोजेक्ट को 30 जून, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य.

मुंबई मुंबई के थाणे इलाके में एक ऐसा रेलवे स्‍टेशन बनाया जा रहा है, जिसमें 11 मंजिल होगी. यह रेलवे स्‍टेशन सिर्फ कनेक्टिविटी को ही नहीं, बल्कि लोगों के मनोरंजन को ध्‍यान में रखकर बनाया जा रहा है. रेलवे स्‍टेशन के ऊपर ही मॉल, ऑफिस स्‍पेस और रिटेल शॉप भी होंगी. यह प्रोजेक्‍ट रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ सरकार के लिए मोटा राजस्‍व भी पैदा करेगा. थाणे रेलवे स्‍टेशन के प्‍लेटफॉर्म 10ए के पास 9,000 वर्गमीटर एरिया में इस प्रोजेक्‍ट को डेवलप किया जाएगा. इसके साथ ही 24,280 वर्गमीटर का लीज स्‍पेस भी रहेगा. इस जगह को 60 साल की लीज पर दिया जा सकता है. प्रोजेक्‍ट को 30 जून, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रहेगा. इस रेलवे स्‍टेशन के पास कनेक्टिविटी का पूरा ख्‍याल रखा गया है, जिसे बस और मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा. क्‍या-क्‍या सुविधाएं होंगी रेलवे स्‍टेशन के बेसमेंट में पार्किंग की सुविधा दी जाएगी. इसके साथ ही रेलवे की सुविधाएं भी यहां दी जाएंगी. इससे जुड़ा ही बस का डेक बनाया जाएगा, जहां से लोकल बस पकड़ी जा सकेगी. नीचे के 2 फ्लोर पर यह सभी सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगी. ऊपर के फ्लोर को कॉमर्शियल यूज के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा. इन फ्लोर पर शॉपिंग और रिटेल शॉप बनाई जाएंगी. यह रेलवे स्‍टेशन सिर्फ कनेक्टिविटी को ही बढ़ावा नहीं देगा, बल्कि लोगों को सुविधाएं भी उपलब्‍ध कराएगा. ऊपर के फ्लोर पर फूड कोर्ट और रेस्‍तरां भी बनाए जाएंगे. यहां बच्‍चों के लिए गेमिंग जोन होगा, जबकि ऑफिस के लिए भी बड़ा स्‍पेस तैयार किया जा रहा है. होटल और सर्विस अपार्टमेंट के अलावा इस पर कोचिंग इंस्‍टीट्यूट भी बनाया जाएगा. किन जगहों के लिए होगी कनेक्टिविटी इस स्‍टेशन पर ट्रेन के अलावा अन्‍य साधनों की कनेक्टिविटी भी उपलब्ध कराई जाएगी. इस पर 2.24 किलोमीटर का एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा, जो ईस्‍टर्न एक्‍सप्रेसवे को सीधे रेलवे स्‍टेशन से जोड़ेगा. प्‍लेटफॉर्म 10 के पास से बस मूवमेंट के लिए डेक बनाया जाएगा, ताकि यात्रियों को ट्रेन से उतरकर बस पकड़ने के लिए दूर न जाना पड़े. इस प्रोजेक्‍ट को रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी और थाणे म्‍यूनिसिपल कॉरपोरेशन मिलकर बना रहे हैं. recent visitors 51