Tuesday, July 7, 2026 1:51 am

रान्या राव ने यूट्यूब से सीखा सोना छिपाना, तैनात कॉन्स्टेबल बसवराज ने खुलासा किया, जांच के आदेश जारी

बेंगलुरु गोल्ड स्मगलिंग केस में गिरफ्तार कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव (Ranya Rao) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. एयरपोर्ट पर रान्या राव की मदद करने वाले कॉन्स्टेबल ने दावा किया है कि वो ऐसा डीजीपी रामचंद्र राव के कहने पर करते थे. रान्या राव कर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव की सौतेली बेटी हैं. कॉन्स्टेबल बसवराज का दावा है कि डीजीपी रामचंद्र राव ने उन्हें एयरपोर्ट पर रान्या की मदद करने का निर्देश दिया था. रान्या के सौतेले पिता कर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव ने उनसे कहा था कि वह रान्या को बेंगलुरु के कैम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छोड़कर आए. कैम्पेगौड़ा एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन पर तैनात कॉन्स्टेबल बसवराज ने खुलासा किया कि वह सीधे रामचंद्र राव के आदेश का पालन कर रहे थे. वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर रान्य राव को लाने-ले जाने की बंदोबस्त करने की जिम्मेदारी उन पर थी. बसवराज का कहना है कि जिस दिन रान्या को गिरफ्तार किया गया. उस दिन शाम 6.20 बजे रान्या ने उन्हें कॉल किया. रान्या कि बताया कि वह दुबई से आ रही है और मदद मांगी. जब एयरपोर्ट से रान्या रवाना हो रही थी तो उस समय बसवराज उनके साथ थे. इसके बाद ही डीआरआई ने रान्या को गिरफ्तार कर लिया था. रन्या राव का कैसे हुआ पर्दाफाश? एक्ट्रेस रन्या राव 3 मार्च को दुबई से बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची थी. रन्या ने 15 दिनों के भीतर दुबई की चार ट्रिप की, जिससे संदेह पैदा हुआ. बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उनकी मदद के लिए पहले से ही बसवराजू नाम का एक पुलिस कांस्टेबल तैयार था. उसी की मदद से एक्ट्रेस ने सिक्योरिटी चेक से बच निकलने की कोशिश की, लेकिन DRI की टीम उस पर पहले से ही नजर बनाए हुई थी. DRI ने रन्या को सोने की खेप के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया. जांच के दौरान अधिकारियों ने उसके जैकेट में छिपा विदेशी मूल का 14.2 किलोग्राम सोना बरामद किया, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 12.56 करोड़ रुपये है.  एक्ट्रेस रान्या का दोस्त भी अरेस्ट रान्या राव ने डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) को अपने बयान में बताया कि उसने यूट्यूब वीडियो देखकर सोना छिपाना सीखा था। रान्या को 14.2 करोड़ रुपए की गोल्ड तस्करी केस में गिरफ्तार किया गया है। 14 करोड़ रुपए के गोल्ड तस्करी केस में गिरफ्तार कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव के दोस्त तरुण राजू को पुलिस ने अरेस्ट किया है। राजू बेंगलुरु के एट्रिया होटल के मालिक का पोता है। रान्या ने ये भी बताया कि तस्करी (स्मगलिंग) के लिए उसे अनजान नंबरों से कॉल आते थे। ये पहली बार था, जब वह सोना दुबई से बेंगलुरु लेकर आई थी। रान्या के मुताबिक सोने को अपने शरीर से चिपकाने के लिए उसने एयरपोर्ट पर ही क्रेप बैंडेज और कैंची खरीदी था। सोना प्लास्टिक चढ़े दो पैकेटों में था। उसे छिपाने के लिए टॉयलेट में जाकर सोने के बिस्किट्स शरीर से चिपका लिए। अज्ञात व्यक्ति को सौंपना था सोना बेंगलुरु में तस्करी का सोना किसे देना था, ये पूछने पर रान्या ने बताया, 'मुझे सोना एक अज्ञात व्यक्ति को देने के लिए एयरपोर्ट टोल गेट के बाद सर्विस रोड पर जाने के लिए कहा गया था। सिग्नल के पास एक ऑटो रिक्शा में सोना रखना था, लेकिन मेरे पास ऑटो रिक्शा का नंबर नहीं था।' रान्या के फोन और लैपटॉप से ​​​​डेटा के आधार पर रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) तस्करी गिरोह को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, रान्या ने अनजान नंबर से कॉल करने वाले को पहचानने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरी तरह से यकीन नहीं है कि मुझे किसने कॉल किया। कॉल करने वाला अफ्रीकी-अमेरिकन लैंग्वेज में बात करता था। सोना सौंपने के बाद वह तुरंत चला गया। मैं उससे फिर कभी नहीं मिली। वह आदमी करीब 6 फीट लंबा और गोरा था।' भाजपा बोली- स्मगलिंग में एक मंत्री का भी नाम भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस रान्या राव को जांच से बचा रही है। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा पर अभिनेत्री से जुड़ी एक कंपनी को संदिग्ध परिस्थितियों में जमीन देने का आरोप लगाया है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा, सबसे बड़ी गोल्ड स्मगलिंग में सिद्धारमैया सरकार के एक प्रमुख मंत्री के शामिल होने के बारे में मीडिया रिपोर्ट कोई आश्चर्य की बात नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 करोड़ रुपए से ज्यादा के सोने की तस्करी के लिए सरकारी प्रोटोकॉल का दुरुपयोग उच्चस्तरीय राजनीतिक समर्थन के बिना नहीं हो सकता। राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि जांच जारी है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, हम कुछ नहीं कह सकते। भाजपा सरकार ने रान्या राव से जुड़ी एक कंपनी को 12 एकड़ जमीन आवंटित की थी।     recent visitors 52

शिवपुरी : माधव टाइगर रिजर्व में जल्द आएगा एक और टाइगर, ‘मादा टाइगर के लिए यह जंगल नया’

शिवपुरी  मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के माधव टाइगर रिजर्व में मादा बाघ को छोड़ा गया है। जब से वह पिंजरे से छूटी है तभी से वह जंगल में घूम रही है। पार्क सूत्रों ने बताया है कि मादा टाइगर पिछले 24 घंटे में जंगल के 15 किमी के क्षेत्र में भूरा खो से लेकर अन्य स्थानों पर घूमती रही। पार्क प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी मादा टाइगर के लिए यह जंगल नया है। वह पहले पूरे क्षेत्र को देखेगी और परखेगी। पार्क प्रबंधन ने इस नई बाघिन को एमटी-4 नाम दिया है। इसे पन्ना रिजर्व से लाया गया है। जंगल को समझ रही है बाघिन पार्क के अधिकारियों का कहना है कि अभी मादा टाईगर को जिस क्षेत्र में छोड़ा गया था। वह अभी उसी क्षेत्र में विचरण कर रही रही है। धीरे-धीरे वह जंगल को समझने के बाद अपना स्थायी आशियाना बनाएगी। अधिकारियों के अनुसार बाघिन किसी पानी किनारे वाली जगह पर आशियाना बनाएगी। बताया जा रहा है कि मादा टाईगर को शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा गया। पहले तो वह कुछ देर तक टावर के आसपास रही। इसके बाद फिर उसने जंगल में इधर से उधर घूमना फिरना शुरू किया। सूत्रों की माने तो मादा टाइगर की लोकेशन मंगलवार सुबह भूरा खो के पास मिली। माधव टाईगर रिजर्व में जल्द आएगा एक और बाघ पार्क अधिकारियों का कहना है कि मादा टाइगर के बाद इसी सेलिंग क्लब वाले क्षेत्र में एक नर टाइगर भी छोड़ा जाना है। इसको लेकर पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बात चल रही है। जैसे ही वह नर टाइगर को पकड़ लेंगे तो जल्द ही उसे माधव टाइगर रिजर्व में सेलिंग क्लब के पास छोड़ दिया जाएगा। फिर पार्क में बाघों की संख्या 6 से बढ़कर 7 हो जाएगी। इसके बाद बाघों की संख्या समय के साथ बढ़ेगी। जल्द आएगा एक और बाघ पार्क अधिकारियों का कहना है कि मादा टाइगर के बाद इसी सैलिंग क्लब वाले क्षेत्र में एक नर टाइगर भी छोड़ा जाना है। इसको लेकर पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बात चल रही है। जैसे ही वह नर टाइगर को पकड़ लेंगे तो जल्द ही उसे माधव टाइगर रिजर्व में सैलिंग क्लब के पास छोड़ दिया जाएगा। फिर पार्क में बाघों की संख्या 6 से बढ़कर 7 हो जाएगी। इसके बाद बाघों की संख्या समय के साथ बढ़ेगी।   recent visitors 42

भारत का बड़ा कदम, दवा बाजार में बड़ा बदलाव, विदेशी कंपनियों को भी घटाने होंगे दाम

नई दिल्‍ली डायबिटीज की दवा के बाजार में प्राइस वॉर छिड़ गई है। भारतीय दवा कंपनियां टाइप-2 डायबिटीज की दवा 'एमपेग्लिफ्लोजिन' के सस्ते विकल्प बाजार में उतार रही हैं। इससे मरीजों को यह जरूरी दवा कम दाम में मिल सकेगी। बोह्रिंगर इंगेलहाइम और एली लिली की इस दवा का पेटेंट खत्म होने के बाद भारतीय कंपनियों ने इसका फायदा उठाया है। इससे 'जारडिएंस' ब्रांड नाम से बिकने वाली इस दवा की कीमत में 80% तक की गिरावट आई है। मैनकाइंड फार्मा, ग्लेनमार्क और एल्केम जैसी कंपनियां इस दवा के अलग-अलग वर्जन और एफडीसी (फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन) बाजार में ला रही हैं। आईसीएमआर के अनुसार, भारत में 10.1 करोड़ से ज्‍यादा डायबिटीज के मरीज हैं। सस्ती दवा आने से ज्‍यादा लोग इसका इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे दवा बाजार में बड़ा बदलाव आएगा। विदेशी कंपनियों को अपनी कीमतें कम करनी पड़ेंगी। ब‍िजनेस टुडे की र‍िपोर्ट के अनुसार, पहले 'जारडिएंस' के 10 mg टैबलेट की कीमत 58-60 रुपये और 25 mg की कीमत 65-70 रुपये थी। अब मैनकाइंड फार्मा 'एमपेग्लाइड' और 'एमपेग्रेट' 10 mg टैबलेट 5.49 रुपये और 25 mg टैबलेट 9.90 रुपये में बेच रही है। ग्लेनमार्क की 'ग्लेम्पा' 8.50-10 रुपये प्रति टैबलेट में मिल रही है। एल्केम की 'एम्पेनॉर्म' और भी सस्ती हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां डायबिटीज के बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। IQVIA के अनुसार, दो साल में जेनेरिक दवाओं की बिक्री 60% से ज्‍यादा हो सकती है। कंपन‍ियों ने लॉन्‍च किए कई ब्रांड ग्लेनमार्क ने 'ग्लेम्पा' ब्रांड के तहत 10 mg और 25 mg टैबलेट के साथ 'ग्लेम्पा-L' (एमपेग्लिफ्लोजिन + लिनैग्लिप्टिन) और 'ग्लेम्पा-M' (एमपेग्लिफ्लोजिन + मेटफॉर्मिन) जैसे FDC भी लॉन्च किए हैं। ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के प्रेसिडेंट और हेड (इंडिया फॉर्मलेशन्स बिजनेस) आलोक मलिक ने कहा, 'ग्लेनमार्क का कार्डियोमेटाबोलिक केयर में एक मजबूत इतिहास रहा है। 'ग्लेम्पा' रेंज का लॉन्च हाई क्‍वालिटी, कम कीमत वाली दवाएं उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारी एडवांस्‍ड R&D यह सुनिश्चित करती है कि यह दवा, असली ब्रांडेड दवा जितनी ही असरदार हो, लेकिन उसकी कीमत के एक छोटे से हिस्से पर।' मैनकाइंड फार्मा ने 'एमपेग्लाइड', 'एमपेग्रेट' और 'डायनाडुओ' जैसे कई ब्रांड लॉन्च किए हैं। कंपनी के वाइस चेयरमैन और एमडी राजीव जुनेजा ने कहा, 'हमारा मानना है कि जरूरी दवाओं के लिए कीमत कभी रुकावट नहीं बननी चाहिए। इसीलिए हमने एमपेग्लिफ्लोजिन को सस्ती कीमत पर पेश किया है ताकि लाखों भारतीय डायबिटीज मरीज इसे ले सकें।' कंपनी शहरों, छोटे शहरों और गांवों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए दो ब्रांड की रणनीति अपना रही है। साथ ही, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और अस्पतालों के साथ मिलकर एमपेग्लिफ्लोजिन के फायदों के बारे में जागरूकता फैला रही है। टैबलेट का छोटा क‍िया है आकार एल्केम लैबोरेटरीज ने 'एम्पेनॉर्म' को असली ब्रांडेड दवा से 80% तक सस्ता रखा है। नकली दवाओं की चिंता को दूर करने के लिए कंपनी ने एंटी-काउंटरफीट सिक्योरिटी बैंड और कई भाषाओं में मरीजों के लिए जानकारी वाली सामग्री पेश की है। एल्केम लैबोरेटरीज के सीईओ डॉ. विकास गुप्ता के मुताबिक,'हमारे क्रॉनिक पोर्टफोलियो के विस्तार के रूप में एमपेग्लिफ्लोजिन का लॉन्च खासकर दिल और किडनी की बीमारी के प्रबंधन में डायबिटीज केयर को बेहतर बनाने के हमारे मिशन के अनुरूप है।' कंपनी ने बुजुर्ग मरीजों के लिए टैबलेट का आकार और कोटिंग भी बेहतर बनाई है। एल्केम के एमपेग्लिफ्लोजिन रेंज में 'एम्पेनॉर्म' के अलावा 'एम्पेनॉर्म L' (एमपेग्लिफ्लोज़िन + लिनैग्लिप्टिन), 'एम्पेनॉर्म डुओ' (एमपेग्लिफ्लोजिन + सिटाग्लिप्टिन) और 'एम्पेनॉर्म M' (एमपेग्लिफ्लोजिन + मेटफॉर्मिन) जैसे FDC भी शामिल हैं। डॉ.गुप्ता ने कहा, 'डायबिटीज मैनेजमेंट में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है दवा नियमित रूप से लेना। टैबलेट का आकार छोटा करके और FDC देकर हम दवा नियमित रूप से लेने और मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार लाना चाहते हैं।' फोर्टिस C-DOC हॉस्पिटल फॉर डायबिटीज एंड अलाइड साइंसेज के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा, 'एमपेग्लिफ्लोजिन बहुत दी जाती है, लेकिन कम कीमत होने से गरीब लोग भी इसे ले सकेंगे। इससे इस बेहतरीन दवा का नियमित सेवन बढ़ेगा।' क‍ितना बड़ा है डायब‍िटीज मार्केट? डायबिटीज के बढ़ते मामलों के कारण दुनिया भर में डायबिटीज दवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट्स के अनुसार, 2024 में इस बाजार का मूल्य लगभग 7,400,000 करोड़ रुपये (88.32 अरब डॉलर) था। 2032 तक इसके 19,600,000 करोड़ रुपये (233.84 अरब) तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान CAGR 12.7% रहेगा। मार्केट रिसर्च फ्यूचर के अनुसार, भारत में डायबिटीज केयर दवाओं का बाजार 2023 में 56,000 करोड़ रुपये (6.75 अरब डॉलर) का था। 2032 तक इसके 95,000 करोड़ रुपये (11.46 अरब डॉलर) तक पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान CAGR 6.54% रहेगा। recent visitors 43

मिडिल ईस्ट के हथियार बाजार में चीन को बड़ा झटका, शी जिनपिंग की स्ट्रैटजी की क्राउन प्रिंस ने निकाली हवा

रियाद  चीन की मिडिल ईस्ट स्ट्रैटजी को तगड़ा झटका देते हुए सऊदी अरब ने J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने से इनकार कर दिया है। शी जिनपिंग के लिए ये बहुत बड़ा झटका है। क्योंकि शी जिनपिंग की स्ट्रैटजी के मुताबिक खाड़ी के ताकतवर देशों में चीनी हथियारों से अमेरिकी हथियारों को रिप्लेस करना था। शी जिनपिंग चाहते थे कि सऊदी अरब जैसे ताकतवर देश अगर J-35 स्टील्थ फाइटर खरीदते हैं, तो ना सिर्फ चीनी जेट्स की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि रणनीतिक तौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हथियारों के लिए भी वो दरवाजे बंद कर सकता है। लेकिन IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने चीन को उस वक्त झटका दिया है, जब पिछले साल नवंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था और चीनी अधिकारी झुहाई एयर शो के कामयाब होने का जश्न मना रहे थे। चीन ने बार बार दावा किया था कि सऊदी अरब चीनी स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने वाला है। लेकिन जी-20 शिखर सम्मेलन ने एक कहानी के एक नये अध्याय को ही खोलकर रख दिया है। नई रिपोर्ट में कहा गया है की सऊदी अरब अब छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए ब्रिटेन, इटली और जापान के साथ मिलकर काम करने वाला है और इन देशों के बीच प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत एडवांस स्तर तक पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक ये सौदा पक्का हो जाएगा। इस दौरान प्रोजेक्ट की रूपरेखा तय कर ली जाएगी। चीन को सऊदी ने दिया बहुत बड़ा झटका चीन के लिए ये पैरों तले जमीन खिसकाने वाला झटका है। मिडिल ईस्ट में उसकी रणनीति पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को कमजोर करने की थी। इसके अलावा वो J-35 स्टील्थ फाइटर के लिए बड़े बाजार की तलाश कर रहा है। अभी तक J-35 स्टील्थ फाइटर को खरीदने के लिए सिर्फ पाकिस्तान तैयार हुआ है। एक्सपर्ट्स लगातार J-35 स्टील्थ फाइटर की क्षमता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान भी चीनी प्रेशर की वजह से इस फाइटर को खरीदने के लिए तैयार हुआ है। लेकिन सऊदी अरब के सामने ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी। सऊदी अरब के इनकार के बाद कई और देश, जिनके साथ चीन J-35 स्टील्थ फाइटर की बिक्री को लेकर बातचीत कर रहा था, वो सौदे से पीछे हट सकते हैं। इसकी टेक्नोलॉजी पर अब शक के बादल और गहरे हो गये हैं। IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने ये फैसला अचानक नहीं लिया है। बल्कि चीन की तरफ से करीबी संबंध बनाने के बावजूद बीजिंग की मानसिकता को लेकर सतर्क रहा है। उसने चीनी सैन्य हार्डवेयर को लेकर संतुलित रवैया अपनाया है। उसने कुछ चीनी हथियार जरूर खरीदे हैं, लेकिन स्ट्रैटजिक हथियार अभी तक नहीं खरीदे हैं। लिहाजा एक्सपर्ट्स इसे सिर्फ सऊदी अरब की हथियार खरीद में विविधिता के नजरिए से ही देख रहे हैं। IDRW ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी अरब और पश्चिमी देशों के अधिकारी पहले से ही गोपनीय स्तर पर इस नये प्रोजेक्ट पर बातचीत कर रहे हैं। पश्चिमी देशों के बीच फाइटर जेट निर्माण के लिए हाई टेक्नोलॉजी है, जो सऊदी और पश्चिमी देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देता है। जे-35 लड़ाकू विमान को नहीं मिल रहा खरीददार? पाकिस्तान के अलावा किसी भी और देश ने अभी तक जे-35 लड़ाकू विमान को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई है। चीनी फाइटर जेट हालांकि एफ-35 जैसे अमेरिकी फाइटर जेट्स की तुलना में काफी सस्ता है और इसका मेटिनेंस भी कम खर्चीला है, लेकिन ये प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा है। फरवरी 2024 में सऊदी अरब में आयोजित ग्लोबल एयरशो के दौरान चीन ने FC-31 को प्रदर्शन के लिए भेजा था। FC-31 लड़ाकू विमान, J-35 का पूर्व वैरिएंट है। लेकिन FC-31 भी डिफेंस एक्सपर्ट्स को प्रभावित नहीं कर पाया। चीन की डिफेंस इंडस्ट्री ने बहुत शानदार तरक्की की है और देश की रक्षा जरूरतों को पूरा किया है। लेकिन बावजूद इसके चीन को विदेशी ग्राहकों की तलाश के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मध्य-पूर्व से चीन को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वहां भी उसे कामयाबी नहीं मिल पा रही है। इन बातों के अलावा भी साल 2019 से 2023 तक चीन के हथियार कंपोनेंट्स में 77% हिस्सा रूस से आयात किया गया था। वहीं चीन कई क्रिटिकल हथियारों के लिए फ्रांस और रूस पर भी निर्भर था, लिहाजा यह निर्भरता चीन के आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल के दावों पर सवाल उठाती है। recent visitors 39

जमीन की खरीदी-बिक्री की सोच रहे हैं, तो जल्दी करें, एक अप्रैल से महंगी हो जाएगी जमीन रजिस्ट्री

रायपुर जमीन की खरीदी-बिक्री की सोच रहे हैं, तो इंतजार मत किजिए. एक अप्रैल से रजिस्ट्री दर में 10 प्रतिशत इजाफे के आसार हैं. ऐसी स्थिति में आपके साथ-साथ दूसरे पक्ष को भी कार्रवाई के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा. दरअसल, पिछले 6 साल से गाइडलाइन दरें नहीं बढ़ाई गई है. इसके साथ ही सालभर पहले रजिस्ट्री में मिलने वाली 30 फीसदी की छूट भी खत्म कर दी गई है. अबकी बार या करें इस साल इसे करीब 10 फीसदी बढ़ाने की तैयारी है. गाइडलाइन दरें बढ़ने से जमीनों का रेट बढ़ेगा. रजिस्ट्री कार्यालय में भीड़ गाइडलाइन दर बढ़ने की आशंका में अभी से रजिस्ट्री कार्यालय में पक्षकारों की भीड़ नजर आने लगी है. मार्च महीने के अंत तक तो कार्यालय में पैर रखने की भी जगह नहीं मिलेगी. हालांकि, भीड़ बढ़ने के चलते ही रजिस्ट्री का समय वो घंटे बढ़ा दिया गया है. बुकिंग स्लॉट भी बढ़ा दिया गया है. लेकिन प्रकरणों की संख्या ज्यादा होने से समय ज्यादा तो लगेगा ही लगेगा, साथ में गड़बड़ी की भी आशंका बढ़ जाएगी. इसलिए बेहतर है कि समय रहते कागजों की ठीक जांच-पड़ताल कर रजिस्ट्री करा लें. इन इलाकों में ज्यादा कारोबार राजधानी रायपुर के जिन इलाकों में जमीन का कारोार ज्यादा हो रहा है उनमें विधानसभा, कचना, रिंग रोड नंबर-3, धमतरी रोड, वीआईपी रोड, सेजबहार, माना, अभनपुर, खरोरा रोड शामिल. रियल इस्टेट कारोबारी और लोग में इन इलाकों में जमीन खरीदने की होड़ मची हुई ​है. recent visitors 26

आज पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में पहला ग्रहण रहेगा, करीब साढ़े तीन घंटे तक चलेगा

उज्जैन खगोलीय गणना के अनुसार आज साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। वर्ष 2025 में चार ग्रहण होंगे। इनमें दो चंद्र ग्रहण तथा दो सूर्य ग्रहण रहेंगे। इनमें से केवल 7 सितंबर को होने वाला चंद्र ग्रहण ही भारत में दिखाई देगा। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया कि जो ग्रहण दिखाई नहीं देते हैं, उनका सूतक मान्य नहीं होता है। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक प्रो.राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया वर्ष 2025 में चार ग्रहण होंगे। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में पहला ग्रहण रहेगा। यह ग्रहण सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगा। दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर ग्रहण का मध्य रहेगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह ग्रस्तोदित दिखाई देगा।   इन देशों में दिखाई देगा ग्रहण दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण अमेरिका, पश्चिम यूरोप, पश्चिम अफ्रीका, अटलांटिक महासागर में रहेगी। इसी प्रकार 29 मार्च को आशंकि सूर्यग्रहण रहेगा। इसकी शुरुआत दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर होगी। यह ग्रहण अमेरिका, ग्रीनलैंड, आइस लैंड, यूरोप व उत्तर पश्चिम रसिया में दिखाई देगा। तीसरी खगोली घटना 7 सितंबर को पूर्ण चंद्रग्रहण के रूप में होगी। यह ग्रहण पूरे भारत सहित उज्जैन में भी दिखाई देगा। रात 9 बजकर 56 मिनट पर चंद्र ग्रहण की शुरुआत होगी। रात 11 बजकर 41 मिनट पर ग्रहण का मध्य तथा रात 1 बजकर 26 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण काफी लंबा है, इसकी अवधि 3 घंटा 30 मिनट की रहेगी। साल 2025 का आखिरी ग्रहण 21 सितंबर को आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में रहेगा।   recent visitors 24

ऐतिहासिक ग्वालियर किले का आधा हिस्सा निजी हाथों में, 5 साल सौंदर्यीकरण और देखरेख के लिए दिया गया

 ग्वालियर  मध्यप्रदेश में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट Memorandum of understanding (MOU) पर वर्क शुरू हो गया है। इसी कड़ी में ऐतिहासिक ग्वालियर किले का आधा हिस्सा निजी हाथों में चला गया। राज्य पुरातत्व अधीन हिस्सा निजी हाथों में सौंपा गया है। 5 साल के लिए सौंदर्यीकरण और देखरेख के लिए दिया गया है। दरअसल कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत अब राज्य पुरातत्व की देखरेख में काम होगा। जनभागीदारी का MP में यह पहला कदम है। पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ MOU किया है। आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) को शामिल किया है। समझौते के तहत फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी और एकेसीएसएफ संरक्षण करेगी। समझौते की शर्तें समझौते के अनुसार, किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए पांच साल का करार किया गया है। यदि कार्य संतोषजनक रहा, तो इसे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है। फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी और संरक्षण कार्य AKCSF संभालेगी। पहले से जारी संरक्षण कार्य ग्वालियर किले का संरक्षण पहले से चल रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में इस पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए थे। वर्तमान में भी 75 लाख रुपए से अधिक की लागत से नवीनीकरण कार्य जारी है। विरोध और विवाद कुछ इतिहासकार और स्थानीय लोग किले के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। वे इसे ऐतिहासिक धरोहर का व्यावसायीकरण मानते हैं। 2022-23 में भीमसिंह राणा की छत्री पर होटल बनाने की योजना को जनता के विरोध के कारण रद्द करना पड़ा था। ग्वालियर किले की आय ग्वालियर किला पर्यटन का बड़ा केंद्र है। हर महीने यहां से 50 लाख रुपए की आय होती है। विशेष अवसरों पर यह राशि और बढ़ जाती है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियों को ऐतिहासिक धरोहरों की पूरी समझ नहीं होती। ऐसे में क्या वे सही तरीके से संरक्षण कार्य कर पाएंगी, यह सवाल बना हुआ है। recent visitors 47