425 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद, कीमत 27 लाख रुपये आंकी गई, दो तस्करों को गिरफ्तार

बलिया  यूपी-बिहार को जोड़ने वाले जयप्रभा सेतु के पुलिस पिकेट के पास पुलिस और सर्विलांस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 425 पेटी (3672 लीटर) अंग्रेजी शराब बरामद की। इस शराब की कीमत लगभग 27 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान जयप्रकाशनगर (भवन टोला) निवासी अमरजीत सिंह और गड़वार थाना क्षेत्र के सिंहाचवर निवासी मंजीत वर्मा के रूप में हुई है। प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने जयप्रभा सेतु के पास घेराबंदी की और पिकअप वाहन में लदी शराब के साथ दोनों तस्करों को धर दबोचा। सूचना मिली थी कि ये तस्कर भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब को बिहार ले जा रहे थे। कार्रवाई में बैरिया चौकी इंचार्ज सुशील कुमार यादव, एसआई अजय कुमार, सर्विलांस प्रभारी विश्वनाथ यादव, एसओजी के दिलीप पाठक और उनके सहयोगी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ बैरिया थाने में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। इनके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं। प्रभारी निरीक्षक ने कहा कि यह जांच की जा रही है कि तस्करी में और कौन-कौन शामिल है और यह शराब किस दुकान से लाई गई थी। इस कार्रवाई से क्षेत्र में शराब तस्करी पर नकेल कसने की कोशिश तेज हो गई है। recent visitors 43

गुड़ी पड़वा का पर्व कब मनाया जाएगा, 29 या 30 मार्च को जानें

गुड़ी पड़वा भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण पर्व में से एक हैं. इसी दिन हिंदू वर्ष की भी शुरुआत होती है. ऐसे में गुड़ी पड़वा का महत्व और भी बढ़ जाता है. यह पर्व देश भर में मनाया जाता है. लेकिन विशेष रूप से महाराष्ट्र और कोंणक क्षेत्र में गुड़ी पड़वा हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. गुड़ी पड़वा मराठी हिंदुओं के लिए पारंपरिक नए साल का प्रतीक है. गुड़ी पड़वा दो शब्दों से मिलकर बना हैं. जिसमें गुड़ी का अर्थ होता हैं विजय पताका और पड़वा का मतलब प्रतिपदा होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, गुड़ी पड़वा यानी चैत्र माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 मार्च को शाम 4 बजकर 27 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस बार गुड़ी पड़वा का पर्व रविवार 30 मार्च को मनाया जाएगा. गुड़ी पड़वा पूजा विधि गुड़ी पड़वा की पूजा करने से लिए गुड़ी को अच्छी तरह बांधकर सुगंध, फूल और अगरबत्ती लगाकर दीपक से गुड़ी की पूजा करें. उसके बाद दूध-चीनी, पेड़े का प्रसाद अर्पित करते हैं. इसके बाद दोपहर के समय गुड़ी पर मीठा प्रसाद अर्पित करें. इसके अलावा परंपरा के अनुसार श्रीखंड-पुरी या पूरन पोली का भोग लगाएं. उसके बाद सूर्यास्त के समय हल्दी-कुमकुम, फूल और अक्षत आदि अर्पित कर गुड़ी को उतार लें. recent visitors 43

अक्षय कुमार की ‘केसरी चैप्टर 2’ का प्रोमो जारी

मुंबई अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म 'केसरी' 2019 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। अब फिल्म का सीक्वल भी आ रहा है, जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। वहीं, अब दर्शकों का उत्साह बढ़ाने के लिए निर्माताओं ने आज 'केसरी चैप्टर 2' का दमदार प्रोमो भी जारी कर दिया है। निर्माताओं ने फिल्म की छोटी सी झलक साझा की है। फिल्म का प्रोमो अक्षय कुमार ने जारी किया। प्रोमो जारी करने के साथ ही 'केसरी चैप्टर 2' के टीजर की रिलीज डेट का भी खुलासा किया गया। बात करें प्रोमो की तो वीडियो में लिखा है कि साहस को दिखाती एक क्रांति। वहीं, प्रोमो साझा करते हुए अक्षय कुमार ने कैप्शन में लिखा, 'कुछ लड़ाईयां हथियारों से नहीं जीती जातीं।' recent visitors 41

फॉरेस्ट्स एण्ड फूड्स थीम पर आधारित है वर्ष 2025 का विश्व वानिकी दिवस

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा के समिति कक्ष में आयोजित विश्व वानिकी दिवस संगोष्ठी में शामिल होकर प्रदेशवासियों को वन संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का ‘ऑक्सिजोन’ बनकर पूरे भारत को ऑक्सीजन प्रदान कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जो न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का अभिन्न हिस्सा भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2025 का विश्व वानिकी दिवस ‘फारेस्ट एंड फूड' थीम पर आधारित है, जो इस बात पर बल देता है कि वन केवल ऑक्सीजन ही नहीं, बल्कि पोषण, रोजगार और संस्कृति का भी स्रोत हैं। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘वाइल्ड एडिबल प्लांट्स इन छत्तीसगढ़ स्टेट’ पुस्तक का विमोचन किया तथा पुदीना-मिंट फ्लेवर के बस्तर काजू प्रोडक्ट को लॉन्च भी किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 32 प्रतिशत आबादी जनजातीय भाई बहनों की है जो वनों के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार वनों में निवासरत जनजातीय भाई-बहनों को वनाधिकार पट्टे प्रदान कर रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और खेती की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने बताया कि बस्तर की इमली, जशपुर का महुआ, चिरौंजी, हर्रा-बहेड़ा जैसे सैकड़ों लघु वनोत्पाद छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान हैं, जिनका वैल्यू एडिशन कर आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की नैसर्गिक सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि यहां के जलप्रपात, वनवासी संस्कृति और समृद्ध जैव विविधता पूरे देश के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। बस्तर का धूड़मारास अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थान बना चुका है। पर्यटन का विस्तार हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में लगभग चार करोड़ वृक्ष लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में पीपल फॉर पीपल कार्यक्रम के अंतर्गत हर चौराहे पर पीपल का रोपण किया गया है, जो भविष्य में शुद्ध ऑक्सीजन का सशक्त स्रोत बनेंगे। पीपल का पेड़ वैज्ञानिक रूप से सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाला वृक्ष है, और यह पहल शहरी हरियाली की दिशा में एक प्रभावी कदम है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के वन विश्व के सबसे सुंदर वनों में गिने जाते हैं। साल और सागौन के वृक्ष यहां की प्राकृतिक शोभा हैं। साल के वनों में एक अनूठा सम्मोहन है और यह गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक जंगल हैं, तब तक जीवन है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों का पूरा जीवन वनों पर आधारित है। उनका जीवनस्तर ऊँचा उठाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है।  उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, और इसका सबसे कारगर उपाय वन क्षेत्र का विस्तार है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी भाई-बहनों के पास प्रकृति का अनुभवजन्य ज्ञान है – उसका समुचित उपयोग कर हम विकास और संरक्षण दोनों को संतुलित कर सकते हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विधायकगण धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, योगेश्वर राजू सिन्हा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। recent visitors 39

प्रशिक्षण से अधिकारियों को नीति निर्माण और योजना क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मिलेगा मदद

रायपुर राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ द्वारा नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यशाला का  सफलतापूर्वक समापन हुआ। अटल नगर, नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के सभाकक्ष में 20 और 21 मार्च को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली को सुदृढ़ करना, नीति-निर्माण को डेटा आधारित बनाना और योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाना था। सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिकारियों के लिए मूल्यांकन, क्यों, कब और कैसे विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में राज्य शासन के अधिकारियों को मानिटरिंग और इवैल्यूएशन के मूल सिद्धांतों की जानकारी दी गयी। योजनाओं की प्रगति प्रभाविता को ट्रैक करने और परिणामों का विश्लेषण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। मूल्यांकन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण, योजनाओं के प्रभाव को मापने के लिए लॉजिकल फ्रेमवर्क और थ्योरी ऑफ चेंज का उपयोग, डेटा संग्रह की पद्धतियां, प्रभावी नीति निर्माण के लिए डेटा एनालिटिक्स का उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गयी। कार्यशाला में मूल्यांकन में आने वाली चुनौतियां और समाधान पर भी विस्तृत व्याख्यान दिया गया। कार्यशाला में प्रोग्राम/स्कीम इवैल्यूएशन के महत्व, उसके विभिन्न प्रकार, तरीकों, रूपरेखा (फ्रेमवर्क) और गुणवत्ता आश्वासन (क्वालिटी एश्योरेंस) पर विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रभावी मूल्यांकन से न केवल योजनाओं की सफलता और विफलता का विश्लेषण किया जा सकता हैए बल्कि सुधार के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान डेटा संग्रह, विश्लेषण तकनीक, निगरानी एवं मूल्यांकन के सर्वाेत्तम प्रथाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों को प्रभाव मूल्यांकन, प्रक्रियात्मक मूल्यांकन और परिणाम मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं से भी अवगत कराया गया। राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमण्यम ने बताया कि आयोग मूल्यांकन हेतु संस्थागत क्षमता निर्माण और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उपाय अपना रहा है। आने वाले समय में नीति निर्माण को डेटा संचालित और प्रभावी बनाने इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। डॉ. सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए पारदर्शी और सटीक मूल्यांकन आवश्यक है। यह प्रशिक्षण अधिकारियों को नीति निर्माण और योजना क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करेगा। कार्यशाला के समापन अवसर पर राज्य नीति आयोग की सदस्य सचिव डॉ. नीतू गोरडिया ने सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और डी.एम.ई.ओ. टीम को धन्यवाद देते हुए कहा, कि भविष्य में राज्य नीति आयोग और डी.एम.ई.ओ. इस तरह की और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे, ताकि छत्तीसगढ़ में डेटा-संचालित शासन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। कार्यशाला में डी.एम.ई.ओ., नीति आयोग, भारत सरकार के निदेशक अबिनाश दास व उनकी एक्सपर्ट टीम द्वारा आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, डाटा गर्वनेंस क्वालिटी इंडेक्स एवं लॉजिकल फ्रेमवर्क तथा मॉनिटरिंग व इवैल्यूएशन के बारे में प्रस्तुतीकरण व परिचर्चा की गई। उक्त कार्यशाला में सुशासन एवं अभिसरण विभाग, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, खाद्य विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, योजना विभाग सहित अन्य विभागों के राज्य एवं जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारीगण शामिल हुये। recent visitors 22

राज्यपाल डेका ने सरोवरों के आसपास पेड़ लगाने और जल संचयन के उपाय करने की आवश्यकता पर बल दिया

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के कलेक्टरेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने जिले में चल रही विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली और उनकी समीक्षा की। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना, दुर्ग संभाग आयुक्त सत्यनारायण राठौर, राजनांदगांव रेंज आईजी दीपक झा, कलेक्टर चन्द्रकांत वर्मा सहित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में जिले में संचालित "अमृत सरोवर" योजना की जानकारी लेते हुए राज्यपाल डेका ने सरोवरों के आसपास पेड़ लगाने और जल संचयन के उपाय करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जल स्तर की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण जनों को जल स्तर बढ़ाने और जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से पर्यावरण संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। राज्यपाल रमेन डेका ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कार्य करें। राज्यपाल ने लाइव टीबी केस की जानकारी भी ली और जिला प्रशासन को जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया ताकि टीबी से बचाव और उपचार की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंच सके। इसके अलावा, राज्यपाल ने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की समीक्षा भी की और टीबी उन्मूलन में रेड क्रॉस की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से जिले में चल रहे सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी ली और समय पर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नागरिकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने एक पेड़ माँ के नाम पर अभियान की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की कि वृक्षारोपण के महत्व के बारे में नागरिकों को जागरूक किया जाए और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाए। बैठक में सहकारी संस्थाओं की भी समीक्षा की गई, जिसमें राज्यपाल ने कहा कि आम नागरिकों को समय पर योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए और उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जनजातीय और वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का विकास करने और इन क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने के लिए उपाय करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में शिविर लगाकर सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए ताकि सही समय पर जनजातीय समुदायों को इनका लाभ मिल सके। राज्यपाल ने श्रमिकों के बच्चों के लिए संचालित योजनाओं की भी जानकारी ली और श्रम विभाग से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी। अंत में, राज्यपाल ने कृषि विभाग की समीक्षा की, जिसमें जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए चल रही गतिविधियों की जानकारी ली गई। उन्होंने कोदो फसल प्रदर्शन और जैविक खेती मिशन के अंतर्गत कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम की समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। राज्यपाल डेका ने कहा कि जिले के विकास के लिए सभी नागरिकों को प्रदेश की योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए और समय पर उनका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक योजना का जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। recent visitors 26

बिजली के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को नम्बर एक राज्य बनाना है। इसके लिये टीम भावना के साथ कार्य करें : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल बिजली के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को नम्बर एक राज्य बनाना है। इसके लिये टीम भावना के साथ कार्य करें। बिजली कंपनियों की नवीन संगठनात्मक संरचना (ओ.एस.) स्वीकृत होते ही भर्ती की प्रक्रिया शुरू करें। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश गुरूवार को मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिये। सभी कंपनियों की नीति एक जैसी हो मंत्री श्री तोमर ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी रखने की नीति सभी कंपनियों की एक समान होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की एक टीम बनायें, जो यह देखे कि कंपनियों में क्या समस्यायें हैं। साथ ही उनके निराकरण के लिए एक समान नीति बनाये। लाइन लासेस कम करें मंत्री श्री तोमर ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्डों के आधार पर लाइन लॉसेस कम करें। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में बिजली बिलों की बसूली कम होती है, वहाँ वसूली बढ़ाने के लिये कार्य योजना बनायें। उपभोक्ता संतुष्टि को प्राथमिकता दें। लोक अदालतों में कराये प्रकरणों का निराकरण मंत्री श्री तोमर ने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम से लंबित प्रकरणों का निराकरण करायें। इससे कंपनी की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि बिलिंग के सिस्टम में समानता होनी चाहिए। अवैध कनेक्शन को मीटरीकृत कर वैध करें। इससे बिलों की वसूली हो सकेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों में तत्परता से कार्यवाही करें। शासन के निर्देशों के अनुरूप नीति बनायें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हों। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत करें। जनसंवाद करें ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि जन संवाद को गंभीरता से लें। यह कंपनी और उपभोक्ता दोनों के लिये लाभकारी है। वर्ष 2021 से अभी तक 17 लाख 20 हजार से अधिक बिजली उपभोक्ताओं से संवाद हो चुका है। उन्होंने कहा कि विभाग की परिसंपत्तियों को सूचीवद्ध करवाकर उन्हें सुरक्षित करें। आवश्यकतानुसार फेंसिंग अथवा वाउण्ड्रीबाल बनवायें। बैठक में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मण्डलोई ने विभागीय योजनाओं की उपलब्धियों की जानकारी दी। बैठक में एम.डी. पूर्व क्षेत्र कंपनी श्री अनय द्विवेदी, एम.डी. मध्य क्षेत्र कंपनी श्री क्षितिज सिंघल और एम.डी. पश्चिम क्षेत्र कंपनी श्री अनूप सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 37