Friday, July 3, 2026 9:25 am

विश्व जलदिवस पर ‘ग्लेशियर संरक्षण‘ थीम पर एक सेमिनार का आयोजन आज

जबलपुर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स लोकल सेंटर साउथ सिविल लाइन्स जबलपुर के तत्वावधान में आज शाम 06 बजे से विश्व जलदिवस पर ‘‘ग्लेशियर संरक्षण‘‘ थीम पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया है। आयोजन समिति के अध्यक्ष इंजी. सुरेन्द्र सिंह पवार ने बताया कि इस सेमिनार में जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. राजीव चांडक मुख्य अतिथि रहेंगे, जबकि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जबलपुर के सीनियर जियोलॉजिस्ट श्री ए.एस. खान मुख्य वक्ता के रूप में अपना व्याख्यान देंगे। लोकल सेंटर के चेयरमेन श्री संजय कुमार मेहता, संयोजक डॉ. संजय के वर्मा, मानसेवी सचिव डॉ. राजीव जैन, आयोजक सचिव श्री राजेश ठाकुर एवं सहसंयोजक श्री मनीष वाजपेई ने इस महत्वपूर्ण सेमिनार में इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों एवं अन्य से उपस्थिति की अपील की है। recent visitors 26

Google जल्द ही जीमेल के सर्च इंजन को भी AI से करेगी लैस

नई दिल्ली दुनियाभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली ईमेल ऐप Gmail का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। टेक्नोलॉजी में एआई (AI) के बढ़ते प्रभुत्व को देखते हुए अब Google जल्द ही जीमेल (Gmail) के सर्च इंजन को भी AI से लैस करेगी। इसके बाद किसी ईमेल को सर्च करना आसान हो जाएगा। इसके बाद जीमेल के इनबॉक्स में यूजर्स की पसंद के हिसाब से ईमेल नजर आएंगे। यह अपडेट आने के बाद ईमेल में सबसे ऊपर सबसे रिसेंट की जगह यूजर्स की पसंद के ईमेल दिखेंगे। जानकारों के मुताबिक AI अपग्रेड की मदद से जीमेल के सर्च रिजल्ट बेहतर हो सकेंगे। इससे यूजर्स को कोई ईमेल सर्च करने में ज्यादा टाइम खर्च नहीं करना पड़ेगा। कंपनी ने बताया कि नई अपडेट में कीवर्ड पर बेस्ड क्रॉनोलॉजिकल ऑर्डर में ईमेल दिखाने की बजाय सबसे ज्यादा क्लिक किए गए और फ्रीक्वैंट कॉन्टैक्ट आदि के ईमेल ऊपर दिखाए जाएंगे। यानी अब इनबॉक्स में रिसेंट की जगह उन ईमेल को सबसे ऊपर दिखाया जाएगा, जो AI को लगता है कि आपके लिए सबसे जरूरी है। अब ईमेल सर्च होगी पहले से तेज पहले जीमेल में जब कोई ईमेल खोजा जाता था, तो सिर्फ कीवर्ड के आधार पर ईमेल दिखते थे, लेकिन अब नया फीचर कई और चीजों को ध्यान में रखेगा। इससे जरूरी ईमेल जल्दी मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। गूगल का कहना है कि इससे लोगों का समय बचेगा और वे अपनी जरूरी जानकारी आसानी से खोज सकेंगे।यह फीचर वेब ब्राउजर, एंड्रॉयड और iOS के जीमेल ऐप में उपलब्ध होगा, जिससे किसी भी डिवाइस से इसका फायदा लिया जा सकेगा। यूजर को दिया जाएगा कंट्रोल गूगल इस फीचर का पूरा कंट्रोल यूजर के हाथ में देगी। यानी यूजर इस फीचर को ऑन या ऑफ कर सकेंगे। उनके हाथ में AI-पावर्ड सर्च इंजन या ट्रेडिशनल सर्च फीचर में से एक चुनने का ऑप्शन होगा। इसके लिए ऐप में एक टॉगल दिया जाएगा। इसकी मदद से यूजर मोस्ट रेलिवेंट या मोस्ट रिसेंट में से एक चुन सकेंगे। कंपनी ने इस फीचर को धीरे-धीरे रोलआउट करना शुरू कर दिया है और कई पर्सनल गूगल अकाउंट्स पर यह नजर भी आने लगा है। वेब के अलावा एंड्रॉयड और iOS पर जीमेल ऐप में यह फीचर उपलब्ध होना शुरू हो गया है। गूगल अन्य जगहों पर जोड़ रही AI जीमेल के अलावा, गूगल अपने सर्च और शॉपिंग पोर्टल में भी AI का इस्तेमाल बढ़ा रही है। इस महीने ही कई नए AI-संबंधित अपडेट देखने को मिले हैं। अगर कोई यूजर AI की मदद से सर्च नहीं करना चाहता, तो जीमेल में एक टॉगल ऑप्शन होगा, जिससे वे पुराने तरीके से ईमेल खोज सकते हैं।गूगल लगातार अपने प्लेटफॉर्म पर AI का उपयोग बढ़ा रही है, ताकि लोगों को बेहतर और तेज सेवाएं मिल सकें। recent visitors 34

मार्च के शेष 10 दिन बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे

इन्दौर मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मार्च के राजस्व संग्रहण महा अभियान एवं उपभोक्ता सुविधा के मद्देनजर इंदौर, उज्जैन, रतलाम जिले सहित मालवा निमाड़ के सभी 434 जोन, वितरण केंद्र के तहत बिजली बिल भुगतान केंद्रों को अगले दस दिनों 22 से 31 मार्च तक प्रतिदिन खुले रखने का निर्णय लिया हैं। भुगतान केंद्र शनिवार, रविवार को अवकाश के दिन के साथ ही गुड़ी पड़वा 30 मार्च, ईद उल फितर 31 मार्च के अवकाश के दिन भी खुल रहेंगे। बिजली उपभोक्ता बकाया देयकों का इन केंद्रों पर कार्यालय अवधि में भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा कैशलेस तरीके से देयकों का घर बैठे पेटीएम, फोन पे, गुगल पे, अमेजान इत्यादि माध्यमों, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड से भुगतान किया जा सकता हैं। कैशलेस बिजली बिल भुगतान पर प्रत्येक बिल पर निर्धारित छूट प्रदान की जाती हैं, यह कैशलेस छूट अगले बिल में स्पष्ट उल्लेखित होती हैं। recent visitors 16

बस्तर में अमन लौटा, और साथ लौटी खेलों की रौनक, जहां कभी डरते थे पांव भी रखने से, आज वहीं खेलते हैं हज़ारों खिलाड़ी: मुख्यमंत्री

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया खिलाड़ियों का सम्मान, कहा “आपने छत्तीसगढ़ का सिर गर्व से ऊंचा किया” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय खेल पदक विजेता खिलाड़ियों को बताया छत्तीसगढ़ का गौरव: खिलाड़ियों को दी ओलंपिक विजेता बनने की शुभकामनाएं बस्तर में अमन लौटा, और साथ लौटी खेलों की रौनक, जहां कभी डरते थे पांव भी रखने से, आज वहीं खेलते हैं हज़ारों खिलाड़ी: मुख्यमंत्री 130 खिलाड़ियों को 1 करोड़ 95 लाख 20 हजार रूपए की सम्मान राशि उनके बैंक खाते में अंतरित रायपुर आप सभी ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और जुनून से छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है। ये सिर्फ आपकी नहीं, पूरे प्रदेश की जीत है। आप प्रदेश के खेल जगत के हीरे हैं। सरकार आपको तराशेगी, निखारेगी और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाएगी। आपके लिए हर संभव संसाधन और समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित राष्ट्रीय खेल विजेता सम्मान समारोह में गोवा और उत्तराखंड नेशनल गेम्स में पदक जीतने वाले छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने समारोह में गोवा में वर्ष 2023 में सम्पन्न 37वें नेशनल गेम में छत्तीसगढ़ के पदक विजेता 72 खिलाड़ियों को और वर्ष 2025 में उतराखंड में सम्पन्न 38 वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ पदक विजेता 58 खिलाड़ियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए कहा कि आप सभी छत्तीसगढ़ के गौरव है। आपने न सिर्फ पदक जीते हैं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। आप सभी ने छत्तीसगढ़  का सर गर्व से ऊंचा किया है। मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि वे अब एशियाड, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों पर छत्तीसगढ़ और भारत का नाम रोशन करें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  अपने संबोधन में कहा कि आज गोवा और उत्तराखंड में हुए नेशनल गेम्स विजेता खिलाड़ियों का सम्मान कर हम सब बहुत गौरव का अनुभव कर रहे हैं। आप सभी ने अपने शानदार प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया है इसके लिए आप सभी की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हम लोगों ने गोवा में पदक जीतने वाले राज्य के 72 खिलाड़ियों को 1 करोड़ 7 लाख 60 हजार रुपए की राशि एवं उत्तराखंड में नेशनल गेम्स जीतने वाले 58 खिलाड़ियों को 87 लाख 60 हजार रुपए की राशि प्रदान कर सम्मानित किया है। इस प्रकार समारोह के माध्यम से छत्तीसगढ़ के 130 राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को कुल 1 करोड़ 95 लाख 20 हजार रुपए की सम्मान राशि हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के खाते में अंतरित की जा रही  है। ओलंपिक विजेता खिलाड़ियों के लिए विशेष पुरस्कारों की हमारी सरकार ने की है घोषणा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के जो भी खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में पदक लाएंगे, उनके लिए विशेष पुरस्कारों की घोषणा हमारी सरकार ने की है। ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को तीन करोड़ रुपए, रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को दो करोड़ रुपए तथा कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को एक करोड़ रुपए देने का निर्णय हमारी सरकार ने किया है। बस्तर क्षेत्र में खेलों की वापसी, नई आशा और विश्वास का प्रतीक मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बरसों तक माओवादी आतंक झेलने के बाद जब बस्तर में अमन लौटा तो खेल भी लौटा, वहां हमने बस्तर ओलंपिक का आयोजन कराया। उन्होंने कहा कि जहां कभी पांव भी रखने से लोग डरते थे, आज वहीं हज़ारों खिलाड़ी खेल रहे हैं। लोगों में जबर्दस्त उत्साह दिखा, पूरे देश में कम ही हुआ होगा कि किसी खेल आयोजन में 1 लाख 65 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और वह भी ऐसा आयोजन जो बस्तर संभाग में हुआ जहां की आबादी शेष जगहों की तुलना में काफी विरल है। इसमें ऐसे लोगों ने भी हिस्सा लिया, जो नक्सल हिंसा में अपने अंग गंवा चुके थे। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भी हिस्सा लिया। नक्सल हिंसा प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। इस आयोजन से प्रदेश के खेलप्रेमियों की उम्मीदें काफी बढ़ी हैं। खिलाड़ियों को बेहतरीन खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराने सरकार कर रही प्रयास मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों में काफी दमखम है। हम छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए शानदार अधोसंरचना तैयार कर रहे हैं। खेलो इंडिया के 7 नये सेंटर हमने आरंभ किये हैं। छत्तीसगढ़ में हर तरह की खेल प्रतिभाएं हैं। हमने इसे ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तरह के खेलों के लिए कोचिंग की विशेष व्यवस्था की है। इसी साल हमने तीन नई अकादमी की शुरूआत की है। रायपुर में टेनिस, राजनांदगांव में हाकी और नारायणपुर में मल्लखंभ अकादमी हमने आरंभ की है। परंपरागत खेलों को मिलेगा नया जीवन: 20 करोड़ रूपए की छत्तीसगढ़ क्रीडा प्रोत्साहन योजना मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने परंपरागत खेलों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन खेलों का समुचित विकास होता रहे, इसके लिए हमने 20 करोड़ रुपए का प्रावधान छत्तीसगढ़ क्रीडा प्रोत्साहन योजना के तहत किया है। हमारी सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। खेलों में जीत के लिए कुशल रणनीति, तकनीक में महारत के साथ ही फिटनेस बहुत जरूरी मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कुछ दिनों पहले हमने मल्लखंभ के खिलाड़ियों का ढोलकल की पहाड़ियों पर अद्भुत करतब देखा, यह मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य था।  मल्लखंभ या किसी भी तरह के खेल के लिए लचीलापन बहुत जरूरी होता है और यह सब फिटनेस से आता है। खेलों में जीतने के लिए कुशल रणनीति, तकनीक में महारत के साथ ही एक अच्छे लेवल का फिटनेस भी बहुत जरूरी है। मोदी जी ने फिट इंडिया मूवमेंट चलाया है। फिटनेस के माध्यम से खेलों में तो सफलता हासिल की ही जा सकती है। फिट रहने से आप एक हेल्दी लाइफ स्टाईल भी जीते हैं जिससे कोई भी कार्य आप करें, उसमें आपको सफलता मिलती है। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं में अपार खेल प्रतिभा है। जिसे पहचान कर तराशना हमारी प्राथमिकता है। इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव … Read more

रायपुर : हाथियों के प्रति नकारात्मक धारणा बदलने की जरूरत

रायपुर छत्तीसगढ़ वन विभाग ने हाथियों के प्रति समाज में व्याप्त नकारात्मक धारणा को लेकर चिंता व्यक्त की है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रेम कुमार ने कहा कि समाचार पत्रों और अन्य मीडिया माध्यमों में ‘आतंकी, उत्पाती, हत्यारा, हिंसक, पागल, बिगड़ैल, जिद्दी‘ जैसे नकारात्मक शब्दों का उपयोग किया जाता है, जिससे समाज में हाथियों के प्रति भय और नकारात्मकता बढ़ती है। यह प्रवृत्ति मानव-हाथी सह-अस्तित्व के प्रयासों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा है कि भारत में हाथी सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है। प्राचीन काल से भगवान गणेश का प्रतीक माने जाने वाले हाथी को धैर्य, शक्ति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है। हाथी को ‘कीस्टोन प्रजाति‘ एवं ‘ईको-सिस्टम इंजीनियर‘ भी कहा जाता है, क्योंकि वे वनों के पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके रहने से वनों की कार्बन अवशोषण क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। हाथी और मानव के मधुर संबंध के प्रमाण छत्तीसगढ़ के इतिहास में हाथियों का मनुष्य के साथ घनिष्ठ संबंध रहा है। बस्तर के 11वीं शताब्दी के ताम्रपत्रों, मुगलकालीन अभिलेखों और ब्रिटिश शासनकाल के गजेटियरों में इसका विस्तृत उल्लेख मिलता है। अकबर के दरबारी लेखक अबुल फजल की ‘आईने-अकबरी‘ और कलचुरी राजाओं के शासनकाल के अभिलेखों में भी छत्तीसगढ़ के हाथियों और मनुष्यों के पारस्परिक संबंधों का प्रमाण मिलता है। मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रेम कुमार ने मीडिया से अपील की है कि हाथियों को लेकर सकारात्मकता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाएं। मानव-हाथी संघर्ष को केवल टकराव के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया जाए, ताकि सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने मीडिया को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि हाथियों का संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में समाज को हाथियों के महत्व को समझना होगा और उनके संरक्षण में सकारात्मक योगदान देना होगा। recent visitors 28

सूरजपुर : मनबस ने दृढ़ इच्छाशक्ति से बनाई अपने आर्थिक उन्नति की राह

सूरजपुर : मनबस ने दृढ़ इच्छाशक्ति से बनाई अपने आर्थिक उन्नति की राह स्व सहायता समूह से जुड़कर कर रही हैं 25 से 35 हजार तक की आय सूरजपुर कर्मठ व्यक्ति अपने में बदलाव लाने और अपने जीवन शैली को बेहतर करने अर्थिक रूप से उन्नत होने के लिए में हमेशा कुछ नया करने का प्रयास करता रहता है। ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिलता है सूरजपुर जिले में जहां एक नारी ने अपने दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच से  अपनी परिस्थिति को बेहतर कर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह कहानी है जिला सूरजपुर के जनपद पंचायत प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सरहरी की रहने वाली मनबस कुशवाहा की । इन्होंने अपने आर्थिक स्थिति को बेहतर करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए एक नए प्रयास के रूप में 14 जुलाई 2019 के दिन मां गौरी महिला स्व सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। मनबस की शुरुआत शून्य अधिशेष से हुई, लेकिन समूह के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे अपनी उन्नति की राह बनाई। समूह की साप्ताहिक बचत, चक्रिय निधि और सामुदायिक निवेश कोष ने सदस्यों को कृषि आधारित कार्यों ने उन्हें सहयोग दिया। महत्वपूर्ण बात यह है कि मनबस कुशवाहा अपने सकारात्मक सोंच से निरंतर आगे बढ़ने की राह चुनी। अपने भविष्य को संवारने की उनकी इच्छाशक्ति ने उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा लोन के लिए प्रेरित किया। जिससे ऋणस्वरूप 1,42,000 रुपये की राशि प्राप्त हुई । इस राशि का प्रयोंग करने उन्होंने नमकीन खाद्य उत्पाद मक्के से बने पोला, रिंग, पफ और कपड़ा दुकान संचालन का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। इस कदम में बी.पी.एम. अल्का कुजूर और पी.आर.पी. ललीता मिंज का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। जब इंसान खुद पर विश्वास करता है, तो जीवन में चमत्कार होने लगते हैं। आज मनबस कुशवाहा वाड्रफनगर और प्रतापपुर विकासखंड के 100 से अधिक गांवों में किराना दुकानों को होलसेलर के रूप में खाद्य सामग्री सप्लाई कर रही हैं। इससे हर महीने 20 से 30 हजार रुपये तक की आय हो रही है। साथ ही, कपड़े के व्यवसाय से भी 5 से 8 हजार रुपये मासिक आमदनी हो रही है। अब उनका परिवार भी अपनी छोटी बड़ी इच्छाओं को खुल कर पूरा करने न समर्थ है, उनकी सफलता केवल आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में स्वरोजगार को लेकर महिलाओं की सोच में एक सकारात्मक बदलाव का बड़ा कारण बनी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को तो मजबूत किया ही, साथ ही अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गईं। आज मनबस कुशवाहा अपने समूह को अपने परिवार का अभिन्न अंग मानती हैं और कहती हैं। कि तंगहाली से खुशहाली की ओर जाने वाला यह सफर आसान नहीं था, हर सपनों को पूरा करने के पहले अनेकों चुनौतियां सामने खड़ी होती थी, लेकिन समूह और बिहान योजना ने सभी चुनौतियों से लड़ने की शक्ति देते हुए इसे संभव बनाया। उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल है, जो अपने सपनों को सच करने की चाह रखती हैं। प्रयास करने वाले ही अपने जीवन में चमत्कार कर सकते हैं, और मनबस कुशवाहा इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। recent visitors 80

दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस कलिंगा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस

रायपुर कलिंगा विश्वविद्यालय में ‘विकसित भारतः प्रोग्रेस एंड डेवलपमेंट’ थीम पर आज दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरूआत जनसम्पर्क विभाग के अपर संचालक आलोक देव के मुख्यअतिथ्य में हुई। यह संगोष्ठी जनसंपर्क विभाग छत्तीसगढ़, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, सिस्टर निवेदिता युनिवर्सिटी कोलकाता, राजमोहिनी देवी गर्ल्स पीजी कॉलेज अंबिकापुर और इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन का संयुक्त आयोजन है। इन दो दिनों में 20 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, इस संगोष्ठी में देश भर के विभिन्न नामी विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स द्वारा अपनी भागीदारी की जा रही है। संगोष्ठी में शोध प्रस्तुतकर्ताओं को मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों के विषय हैं- आर्थिक विकास एवं समृद्धि, लैंगिक समानता, सामाजिक समावेशन, आंतरिक सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधन, संस्कृति व जैव विविधता का संरक्षण, शासन एवं संस्थागत सुधार, डिजिटल समृद्धि, विश्व शांति में भारत की भूमिका। इन विषयों पर प्रस्तुत शोध पत्रों का संपादन कर पुस्तक प्रकाशन की योजना है ताकि राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और पुस्तकालयों में पाठकों को इन विषयों पर समग्र जानकारी मिलेगी। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. शिल्पी भट्टाचार्य ने बताया कि शासन की जनकल्याणकारी नीतियों की प्रगति एवं नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में विस्तार से विचार-विमर्श किया जा रहा है। संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए जनसम्पर्क विभाग के अपर संचालक आलोक देव ने विकसित भारत / 2047 प्रोग्रेस एंड डेवलपमेंट’ के संबंध में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी राज्यों को पूरा करने उच्च तकनीकों, गुणवत्ता युक्त उत्पादों का उत्पादन सहित पर्यावरणीय, जलवायु परिवर्तन और विकसित देशों के अनुभव जैसे महत्वपूर्ण गोल्स पर कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में खनिज, वन संपदा, मानवीय संसाधन, उद्योग, उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण संसाधनों जिससे योजनाबद्ध ढंग से विकसित भारत के लिए छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। आलोक देव ने विकसित भारत के संबंध में राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभागियों के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए। राष्ट्रीय संगोष्ठी को सीआईडीसी के डायरेक्टर जनरल डॉ. पी.आर. स्वरूप, उच्च शिक्षा संचालनालय के संयुक्त संचालक डॉ. जी.ए.घनश्याम, रिटायर्ड आई.एफ.एस अरविंद बोज., कलिंगा यूनिवर्सिटी की राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर डॉ. अनिता, जनरल सेक्रेटरी इंडिया एकोनॉमी एसोसिएशन डॉ. रविन्द्र ब्रम्हे सहित अन्य विद्यवान वक्ताओं ने ‘विकसित भारतः प्रोग्रेस एंड डेवलपमेंट’ के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की। राष्ट्रीय संगोष्ठी विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर छात्र-छात्राएं एवं विभिन्न विषयों के जानकार लोगांे ने चर्चा में भागीदारी की। recent visitors 20