Friday, July 3, 2026 1:48 pm

अक्षय कुमार ने ‘केसरी 2’की रिलीज डेट आउट, फिल्म का टीजर इस दिन लॉन्च करेंगे

मुंबई बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार ने अपनी 2019 की हिस्टोरिकल पीडियड ड्रामा फिल्म 'केसरी' के सीक्वल की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. साथ फिल्म के टीजर और रिलीज डेट से पर्दा भी हटा दिया है. इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया है. 22 मार्च को अक्षय कुमार ने अपने ऑफिशियल एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर 'केसरी 2' के बारे में अपडेट साझा किया है. खिलाड़ी कुमार ने केसरी 2 का एक क्लिप पोस्ट किया है. क्लिप में स्लेट्स पर लिखा था, साहस से भरी क्रांति. केसरी चैप्टर 2.' क्लिप में फिल्म के टीजर की तारीख की झलक दिखाया है, जिसमें बताया गया कि केसरी चैप्टर 2 का टीजर 24 मार्च को रिलीज किया जाएगा. क्लिप शेयर करते हुए अक्षय ने एक्स पर लिखा है, 'कुछ लड़ाइयां हथियारो से नहीं लड़ी जाती. केसरी चैप्टर 2 का टीजर 24 मार्च को रिलीज होगा.' उन्होंने यह भी पुष्टि की कि फिल्म 18 अप्रैल 2025 को दुनिया भर में रिलीज होगी. क्लिप से लगता है कि 'केसरी चैप्टर 2' जलियांवाला बाग हत्याकांड की अनकही कहानी पर आधारित होगा. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो, सीक्वल में 1919 के नरसंहार के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के लिए बैरिस्टर सी. शंकरन नायर की लड़ाई को दिखाया जा सकता है. 'केसरी चैप्टर 2' में अक्षय कुमार के अलावा बॉलीवुड एक्टर आर. माधवन और अनन्या पांडे प्रमुख भूमिकाओं में होंगे. 'केसरी' ने शुक्रवार यानी 21 मार्च 2025 को अपनी रिलीज के 6 साल पूरे किए. फिल्म ने ब्रिटिश भारतीय सेना के 21 सिख सैनिकों की वीरता की कहानी बताई है, जिन्होंने 1897 में 10,000 अफगान आदिवासियों के खिलाफ सारागढ़ी की रक्षा की थी. ईशर सिंह के किरदार में अक्षय कुमार की भूमिका को काफी पसंद किया गया था. फिल्म को सिख बहादुरी के लिए एक श्रद्धांजलि थी. recent visitors 29

महाकाल मंदिर में अवैध दर्शन का मामला, अदालत में पेश हुई 2360 पन्नों की चार्जशीट

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध मंदिर महाकालेश्वर में अवैध दर्शन के मामले में चार्जशीट फाइल हुई है.  पुलिस ने कोर्ट में 2360 पन्नों की चार्जशीट फाइल की है. दअरसल, मंदिर में अवैध दर्शन की बड़ी कार्रवाई तब हुई थी तब उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह खुद मंदिर में दर्शन करने पहुंचे और उन्होंने नंदी हॉल में बैठे दो श्रद्धालुओं से बातचीत की थी. कलेक्टर से बातचीत में श्रद्धालुओं ने बताया था कि दो मंदिर कर्मचारियों को पैसे देकर वे वीआईपी दर्शन करने पहुंच गए थे. इस घटना के बाद कलेक्टर के आदेश पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें से 10 गिरफ्तार किए गए और 4 फरार हैं. 14 आरोपियों में से 8 मंदिर समिति के स्थाई कर्मचारी उज्जैन महाकाल थाना पुलिस ने महाकाल मंदिर समिति की शिकायत पर इस मामले में 14 आरोपी बनाए थे. इसमें से 8 महाकाल मंदिर के स्थाई कर्मचारी, 2 मीडिया से जुड़े व्यक्ति, 3 आउटसोर्सिंग से नियुक्त कर्मचारी और एक कांग्रेस से संबंधित मंदिर समिति के पूर्व सदस्य थे. इन धाराओं के तहत मामला दर्ज महाकाल थाना के टीआई नरेंद्र परिहार ने कहा, '' इस मामले में अपराध क्रमांक 655/2024 के तहत बीएनएस की धारा 318(4), 316(2), 316(5) और धारा 193(9) बीएनएसएस में चार्जशीट दाखिल की है. गिरफ्तार आरोपियों में विनोद चौकसे, राकेश श्रीवास्तव, अभिषेक भार्गव, राजकुमार सिंह, राजेंद्र सिंह सिसोदिया, जितेंद्र सिंह पवार, ओमप्रकाश माली, रितेश शर्मा, उमेश पांडे और करण सिंह पवार के नाम शामिल हैं. वहीं, आशीष शर्मा, दीपक मित्तल, पंकज शर्मा और एक अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं. फरार आरोपी जल्द होंगे गिरफ्तार इस मामले में 2360 पेज की चार्जशीट दाखिल करने के बाद महाकाल पुलिस ने जांच जारी रखने की बात कही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा. वहीं, अब तक गिरफ्तार किए गए किसी भी आरोपी को अदालत से जमानत नहीं मिल सकी है. recent visitors 20

मध्यप्रदेश के वरिष्ठ कानूनविद, अधिवक्ता व समाजसेवी आनंद मोहन माथुर का निधन

इंदौर इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी आनंद मोहन माथुर का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 95 वर्ष की आयु तक वे सामाजिक आयोजनों और आंदोलनों में सक्रिय थे और वकालत भी करते थे। इसके बाद से वे बीमार हो गए थे। लंबी बीमारी के चलते ही उनका निधन हो गया। आनंद मोहन माथुर ने इंदौर के लिए कई उल्लेखनीय काम किए हैं। खुद के खर्च पर उन्होंने शहर में एक सभागृह, झूला ब्रिज और ओपीडी सहित अन्य काम कराए थे। वे कई संगठनों से भी जुड़े थे। उनके निधन पर कई संगठनों और नागरिकों ने शोक व्यक्त किया है। मिल में मजदूरी भी की वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी माथुर ने आजादी आंदोलनों में भी भाग लिया था। किशोरावस्था में वे अंग्रेजों के खिलाफ हो रहे आंदोलनों में हिस्सेदारी करने लगे थे। इसका खामियाजा उनके परिवार को भुगतना पड़ा। साथ ही उन्हें अपने परिवार का साथ भी छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वे गांव से इंदौर आ गए। उन्होंने मालवा मिल में बदली मजदूर के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने काॅलेज में अध्यापन कार्य भी किया। उनका सपना डाॅक्टर बनने का था, लेकिन फिर बाद में उन्होंने वकील बनने का निर्णय लिया। वकील बनकर उन्होंने अपने पेशे को बड़ी निष्ठा से निभाया। वकालत कर उन्हें जो भी फीस मिलती थी, उसका बड़ा हिस्सा वे समाजसेवा से जुड़े कामों में खर्च करते थे। देश का प्रतिनिधित्व भी किया माथुर ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कानून विशेषज्ञों के रूप में देश का प्रतिनिधित्व भी किया है। उन्होंने इंदौर की कान्ह नदी पर एक झूला ब्रिज बनवाया। इसके अलावा आनंद मोहन माथुर सभागृह का निर्माण भी कराया। बाइपास पर उन्होंने बेशकीमती जमीन समाज से जुड़े कामों के लिए दे दी। समाजसेवा से जुड़े कई ट्रस्टों में वे ट्रस्टी की भूमिका में लंबे समय तक रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताया दुख सीएम ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी श्री आनंद मोहन माथुर जी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। आपका सम्पूर्ण जीवन सामाजिक आंदोलनों एवं जनसेवा के लिए समर्पित रहा। इंदौर शहर के लिए किए गए आपके उल्लेखनीय कार्य हम सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में विश्रांति दें एवं शोकाकुल परिजनों को इस कठिन घड़ी में संबल प्रदान करें।' उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी हिस्सा लिया था और आपातकाल (Emergency) के दौरान जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, वे मालवा-निमाड़ सहित पूरे मध्य प्रदेश में आंदोलनकारियों के लिए कानूनी सलाहकार और मेंटर रहे। उनकी सामाजिक चेतना और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर वे हमेशा मुखर रहे, जैसे कि भोपाल एनकाउंटर (2016) और विकास दुबे एनकाउंटर (2020) जैसे मामलों में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग की थी। गरीब के कारण डॉक्टर नहीं बन पाए : आनंद मोहन माथुर शुरुआत से कानून नहीं बल्कि मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते थे। उनका परिवार गरीब था। स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते पिता की नौकरी भी चली गई थी। इसके बाद पैसों की तंगी हुई और आनंद मोहन माथुर का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया। पढ़ाई पूरी करने के लिए मजदूरी की : आनंद मोहन माथुर सामान्य व्यक्तित्व के व्यक्ति नहीं थे। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी लेकिन उनके हौसले बुलंद थे। उन्होंने अपने संघर्ष के शुरुआती दिनों में इंदौर की मालवा मिल में बदली मजदूर के रूप में काम किया। इसके बाद मेहनत करके उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उन्होंने कॉलेज में शिक्षक के रूप में भी सेवाएं दीं। बेटी को बनाया डॉक्टर : खुद डॉक्टर नहीं बन सके इसलिए अपनी बेटी को उन्होंने डॉक्टर बनाने का निर्णय लिया। मेहनत और लगन से उन्होंने अपनी बेटी को मेडिकल की पढाई करवाई। इस समय आनंद मोहन माथुर की बेटी डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहीं हैं। भोपाल गैस कांड का केस भी लड़ा : आनंद मोहन माथुर की कहानी का एक अहम हिस्सा भोपाल गैस कांड से जुड़ा है। जिस दिन उनकी बेटी की शादी थी उसी दिन भोपाल में गैस कांड हुआ। बेटी को विदा कर वे तुरंत भोपाल के लिए रवाना हो गए। उन्होंने भोपाल गैस कांड मामले से जुड़ी याचिका कोर्ट में दायर की। उनके द्वारा डाउ केमिकल फैक्ट्री से पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया। समाजसेवा से जुड़े काम : आनंद मोहन माथुर जितने बड़े कानूनविद थे उतने ही बड़े समाजसेवी थे। अधिवक्ता के नाते मिली फीस का बड़ा हिस्सा वे दान कर देते थे। उन्होंने अपनी जमीन भी समाजसेवा से जुड़े कामों में दी। अपने खर्च पर कान्हा नदी पर ब्रिज बनवाया और आनंद मोहन माथुर सभागृह का निर्माण भी किया। संगीत प्रेम भी थे आनंद मोहन माथुर : कानून के जानकर होने के साथ – साथ आनंद मोहन माथुर संगीत प्रेमी भी थे। उन्होंने अपने इसी प्रेम के चलते 94 साल की उम्र में हारमोनियम बजाना सीखा। recent visitors 21

10 फीट खाई में गिरा में शराब से भरा ट्रक

आजमगढ़ आजमगढ़ जिले के पवई थाना क्षेत्र के मधवापुर गांव के पास पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के 188 पॉइंट पर शनिवार की भोर में एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हरियाणा से बिहार जा रहा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया और 10 फीट गहरी खाई में जा गिरा। ट्रक में भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब की बोतलें भरी हुई थीं, जो संदेह के आधार पर अवैध मानी जा रही हैं। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी। ये है पूरा मामला जानकारी के मुताबिक ट्रक में शराब की बोतलों को छिपाने के लिए चालाकी से मिट्टी से भरी बोरियां रखी गई थीं। ट्रक के आगे और पीछे मिट्टी की बोरियां थीं, जबकि बीच में शराब की बोतलें भरी हुई थीं। ऐसा प्रतीत होता है कि तस्करों ने जांच से बचने के लिए यह तरकीब अपनाई थी। हादसे में ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और शराब की बोतलें खाई में बिखर गईं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रक हरियाणा से बिहार शराब की तस्करी के लिए जा रहा था। बिहार में शराब बंदी होने के कारण वहां अवैध शराब की मांग और तस्करी के मामले अक्सर सामने आते हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हादसे में चालक की स्थिति क्या है और ट्रक में कितनी मात्रा में शराब थी। स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर मामले की तफ्तीश में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि ट्रक के कागजात और शराब के स्रोत की जांच की जा रही है। पूरी जानकारी कुछ देर बाद उपलब्ध होने की उम्मीद है। यह घटना एक बार फिर अवैध शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है।   recent visitors 31

स्‍मार्टफोन्‍स की दुनिया में मेड इन इंडिया धमक

नई दिल्ली कुछ साल पहले तक सब यही कहते थे कि भैया फोन तो चाइनीज है, चाइना से आता है और भारत में बिकता है। मोदी सरकार के दौर में चीजें बदल गईं। आज आप और हम चाहे जिस कंपनी का स्‍मार्टफोन खरीदें, वो कंपनी जिस देश से भी ताल्‍लुक रखती हो, बेच तो मेड इन इंडिया स्‍मार्टफोन ही रही है। ना सिर्फ बेच रही है बल्कि मेड इन इंडिया स्‍मार्टफोन का शिपमेंट दुनियाभर में बढ़ रहा है। काउंटरपॉइंट की 'मेक इन इंडिया' सर्विस रिपोर्ट के अनुसार भारत में बने स्मार्टफोन के शिपमेंट में 2024 में 6% की बढ़ोतरी हुई है। इसमें बड़ा योगदान दिया है सैमसंग और ऐपल ने। दोनों कंपनियों के भारत से बढ़ रहे निर्यात की वजह से खुश होने का यह मौका आया है। काम कर रही सरकार की पीएलआई स्‍कीम मेड इन इंडिया स्‍मार्टफोन्‍स को हकीकत बनाने में भारत सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने अहम भूमिका निभाई है। इस स्‍कीम की वजह से दुनियाभर की स्‍मार्टफोन्‍स कंपनियों और मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनियों के लिए भारत में काम करना आसान हुआ है। काउंटरपॉइंट की रिपोर्ट बताती है कि 2023 के मुकाबले 2024 में सैमसंग का भारत से स्‍मार्टफोन शिपमेंट 7 फीसदी बढ़ा है। ऐपल स्‍मार्टफोन्‍स बनाने वाले फॉक्‍सकॉन के शिपमेंट में 17 फीसदी का उछाल आया है। चाइनीज प्‍लेयर वीवो का शिपमेंट 14 फीसदी बढ़ा है, लेकिन ओपो के शिपमेंट में गिरावट देखी गई है, वह भी पूरे 34 फीसदी की। DBG ने किया सबसे ज्‍यादा शिपमेंट मेड इन इंडिया स्‍मार्टफोन्‍स के शिपमेंट में DBG सबसे आगे है। डीबीजी देश के दो प्रमुख स्‍मार्टफोन्‍स प्‍लेयर शाओमी और रियलमी के लिए काम करती है। शाओमी और रियलमी भारत की प्रमुख स्‍मार्टफोन कंपनियों में शामिल हैं। इनके साथ काम करने का फायदा डीबीजी को हुआ है। टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स की ग्रोथ सबसे तेज साल 2024 में टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी बनी है। इसकी शिपमेंट 107% बढ़ी है। याद रहे कि iPhone 15 और iPhone 16 मॉडल को टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स भी बना रही है। कंपनी अब सेमीकंडक्‍टर के काराेबार में उतर गई है। इसके लिए उसने गुजरात में प्‍लांट लगाया है और अब असम में भी एक प्‍लांट लगाने की तैयारी है। 2025 में और ज्‍यादा ग्रोथ की उम्‍मीद रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि साल 2025 में भारत में स्‍मार्टफोन्‍स का प्रोडक्‍शन डबल डिजिट में बढ़ सकता है। ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियों का भारत से निर्यात बढ़ने की वजह से मेड इंडिया स्‍मार्टफोन्‍स की शिपमेंट में भारत को और फायदा होने की उम्‍मीद है। recent visitors 30

गड्ढे में पलटी तेज रफ़्तार बस , 15 यात्री घायल

राजसमंद राजसमंद जिले में जयपुर से अहमदाबाद जा रही एक ट्रेवल्स बस शनिवार रात करीब ढाई बजे बेकाबू होकर सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। बस में 40 लोग सवार थे, जिनमें से 15 यात्री घायल हो गए। हादसे के बाद पीछे आ रही दूसरी ट्रैवल्स बस के चालक और यात्रियों ने कांच तोड़कर घायलों को बाहर निकाला। चारभुजा और केलवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को आरके जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। हादसे का विवरण चारभुजा थाना प्रभारी प्रीति रत्नू ने बताया कि बस गोमती चौराहे के पास फोरलेन सड़क किनारे पलट गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। पीछे से आ रही बस के चालक ने अपनी बस रोककर राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। घायलों की स्थिति 15 घायलों को आरके जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां एक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है। अन्य घायलों की स्थिति सामान्य है। चिकित्सक डॉ. राशिद मोहम्मद और नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल उपचार शुरू किया। यात्रियों ने लगाया आरोप गुजरात निवासी मनीष भावसार ने बताया कि वह अपनी पत्नी ध्वनि के साथ खाटू श्यामजी के दर्शन कर लौट रहे थे। मनीष ने आरोप लगाया कि बस चालक ने शराब पी रखी थी और बस को लापरवाही से चला रहा था। यात्रियों ने कई बार उसे टोकने का प्रयास किया, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी। हरियाणा के पवन यादव ने भी यही आरोप लगाया और कहा कि चालक की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। घायलों की सूची:     राजेंद्र यादव (32), रेनवाल, जयपुर     पवन यादव (40), कोथरकला, हरियाणा     मनीष भावसार (25), अहमदाबाद, गुजरात     ध्वनि भावसार (29), अहमदाबाद, गुजरात     शांति राठौड़ (35), कोथरकला, हरियाणा     तेजाराम गमेती (49), कुराबड़, उदयपुर     बनवारी गुर्जर (52), चिराणा, झुंझुनूं     हनुमान (50), कोटपुतली, राजस्थान     पवन राजपूत (34), महेंद्रगढ़, हरियाणा     कृष्ण सिंह (45), नीम का थाना, सीकर     केसर सिंह, कोटपुतली, राजस्थान     कमलेश कंवर (43), नीम का थाना, सीकर     सम्पत (25), पीलवा, नागौर     शिवराज (36), पीलवा, नागौर     शिवदास, किशनगढ़, अजमेर चालक और खलासी फरार हादसे के बाद चालक और खलासी मौके से फरार हो गए। यात्रियों के अनुसार, जयपुर से राजसमंद तक बस को लापरवाही से चलाया जा रहा था। पुलिस ने ट्रैवल्स बस संचालक को सूचित कर मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी प्रीति रत्नू ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और राहत कार्य में सहयोग किया गया। घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया है और हादसे की जांच जारी है।   recent visitors 39

बढ़ई-प्लंबर को परमानेंट रेजिडेंसी क्यों दे रहा कनाडा

कनाडा कनाडा में परमानेंट रेजिडेंसी (PR) को लेकर नए-नए प्रतिबंधों का ऐलान किया गया। इस वजह से भारतीयों समेत विदेशी वर्कर्स के लिए उत्तर अमेरिका के इस देश में बसना मुश्किल हो चुका है। भारतीयों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि वे बड़ी संख्या में कनाडा में काम करने जाते हैं। हालांकि, हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता है और PR की परेशानी का हल भी खुद कनाडा ही लेकर आया है। कनाडा के नए परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम का ऐलान किया है। कनाडाई सरकार की तरफ से जिस PR प्रोग्राम का ऐलान हुआ है, वह आसानी से भारतीय वर्कर्स को देश में बसने की इजाजत देगा। सबसे अच्छी बात ये है कि इस प्रोग्राम इसलिए लाया गया है, क्योंकि एक सेक्टर में वर्कर्स की कमी हो गई है। आमतौर पर कनाडा में सेक्टर वाइज PR प्रोग्राम तभी लाए जाते हैं, जब वर्कर्स की कमी हो। आइए इस परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम के बारे में जानते हैं और समझते हैं किस तरह से इससे भारतीय आवेदकों को फायदा होने वाला है। क्या है PR देने वाला कनाडा का नया प्रोग्राम? दरअसल, कनाडा की सरकार कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम लेकर आई है। इस प्रोग्राम के जरिए स्किल कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को देश में बुलाकर घरों के संकट को दूर करने का प्लान है। सरकार इस प्रोग्राम के जरिए कनाडा में मौजूद लगभग 6000 अवैध रूप से रहने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को PR देगी, जबकि 14000 विदेशी वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंसी दी जाएगी। टेंपरेरी फॉरेन वर्कर्स (TFW) को बिना स्टडी परमिट अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम में दाखिला लेने की भी इजाजत दी जाएगी। अभी तक बहुत से विदेशी वर्कर कंस्ट्रक्शन, हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स में बिना स्टडी परमिट अप्रेंटिसशिप नहीं कर पाते थे। आसान भाषा में कहें तो इस प्रोग्राम से कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को सीधे कनाडा में PR मिलेगा, फिर वो देश में हों या फिर विदेश से काम करने आएं। बहुत से विदेशी छात्र कंस्ट्रक्शन सेक्टर में जॉब भी कर रहे हैं, जबकि उनका वर्क परमिट एक्सपायर हो चुका है या फिर होने वाला है। इन छात्रों के पास भी इस नए प्रोग्राम के जरिए कनाडा में PR पाने का ऑप्शन होगा। कनाडा को नया प्रोग्राम क्यों लाना पड़ा? कनाडा इस वक्त घरों की किल्लत से जूझ रहा है। लोगों के रहने के लिए पर्याप्त घर नहीं हैं। ऐसे में सरकार ने 2030 तक 10 लाख नए घर बनाने का टारगेट सेट किया है। हालांकि, कनाडा को स्किल लेबर की कमी से भी जूझना पड़ रहा है, खासतौर पर कंस्ट्रक्श सेक्टर में। ऐसे में सरकार के लिए घरों के टारगेट को पूरा करना मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि अभी सरकार को डॉक्टर्स-इंजीनियर्स की नहीं, बल्कि बढ़ई-प्लंबर की जरूरत है। वर्तमान में कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में काम कर रहे 23% वर्कर्स विदेशी हैं। इनमें से बहुत से छात्र हैं, जबकि ऐसे लोगों की संख्या भी अधिक है, जो अवैध रूप से देश में हैं। इस नए PR देने वाले प्रोग्राम को लाने का मकसद ही लेबर शॉर्टेज को कम करना है और स्किल वर्कर्स को देश में लाना है। PR प्रोग्राम से विदेशी वर्कर्स वैलिड तरीके से देश में दाखिल हो पाएंगे। TFW को कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम करने की इजाजत देकर सरकार ने विदेशी वर्कर्स के लिए ट्रेनिंग और एक्सपीरियंस हासिल करने का रास्ता खोल दिया है। इस तरह वे ना सिर्फ कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बेहतर ढंग से योगदान दे पाएंगे, बल्कि आसानी से परमानेंट रेजिडेंसी भी पा सकेंगे। भारतीयों को कैसे होगा फायदा? भारतीय छात्र जो पहले से ही कनाडा के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहे हैं, उन्हें कुछ निश्चित मानदंडों को पूरा करना होगा। ऐसे करने पर वे नए प्रोग्राम के तहत परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन के योग्य होंगे। भारतीय छात्र सिविल इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी, कंस्ट्रक्शन एस्टिमेशन, बढ़ईगीरी, ईंट बिछाने, प्लंबिंग, छत निर्माण, शीट मेटल जैसे काम कर रहे हैं। इन छात्रों के पास ऑप्शन होगा कि वे अब PR हासिल कर पाएं। कनाडा का फोकस मुख्यतौर पर स्किल वर्कर्स पर है, जिसका मतलब है कि अप्रेंटिसशिप के जरिए फॉर्मल ट्रेनिंग हासिल करने वाले छात्रों को एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम, प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) या कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के लिए नए PR प्रोग्राम जैसे कार्यक्रमों के जरिए परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन करते समय बढ़त मिलेगी। कनाडा में स्किल वर्कर्स की वैसे भी सबसे ज्यादा डिमांड है, खासतौर पर कंस्ट्रक्शन सेक्टर में। recent visitors 29