Sunday, July 5, 2026 4:13 am

सरकारी नौकरी करने वाली 8 युवतियों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये ऐंठ जालसाज हुआ फरार

सोनभद्र  उत्तर प्रदेश के सोनभद्र रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में एक जालसाज का मामला प्रकाश में आया है। सरकारी नौकरी करने वाली युवतियों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। यह जालसाज शादी डॉट कॉम जैसी मेट्रोमोनियल वेबसाइट्स का उपयोग करके युवतियों को अपने जाल में फंसाता था। शुक्रवार दोपहर बाद इस जालसाज की शिकायत लेकर दो महिला शिक्षिका सहित एक अन्य महिला सदर कोतवाली पहुंची। सभी महिलाओं ने एक ही व्यक्ति को अपना पति बताया है। संतकबीर नगर निवासी एक शिक्षिका की तहरीर पर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरु कर दी है। इस मामले मे शिक्षिका सरिता ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि राजन गहलोत ने उसके साथ शादी की और फिर उसके नाम पर लाखो रुपये का लोन निकलवा लिया। सरकारी नौकरी वाली 8 महिलाओं से शादी शिक्षिका ने बताया कि वह अम्बेडकर नगर में अध्यापक पद पर कार्यरत है। वह अपनी मां के साथ रहकर नौकरी कर रही थी। यह जालसाज शादी डॉट कॉम जैसी मेट्रोमोनियल वेबसाइट्स का उपयोग करके हमारे संपर्क में आया था। काफी पता करने पर जानकारी हुई कि युवक ने 7-8 सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं से शादी करके उनसे करोड़ों रुपए ऐंठ लिए हैं। इस मामले में थाने में आई दो अन्य महिलाओं ने भी राजन गहलोत पर शादी करने का आरोप लगाया है। पीड़ित महिला का कहना है कि वर्तमान में राजन गहलोत मुसहीं कम्पोजिट विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षिका के साथ रह रहा है। महिला शिक्षिक की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, और उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस केस दर्ज कर जांच में जुटी एडिशनल एसपी कालू सिंह ने बताया कि संतकबीर नगर निवासी एक महिला की तहरीर पर सहिजन गांव निवासी राजन गहलोत के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। recent visitors 41

मध्य प्रदेश में डेढ़ माह में सड़क दुर्घटनाओं में 1656 मौतें, तेज रफ्तार बना बड़ा कारण

भोपाल  मध्य प्रदेश में पिछले ड़ेढ माह में सड़क हादसों में 1656 लोगों ने जान गंवाई। वहीं, प्रयागराज महाकुंभ के दौरान एमपी बॉर्डर पर सड़क हादसों में 202 लोगों की मौत हुई। विधायक दिनेश राय मुनमुन के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह जानकारी दी।  डॉ. मोहन यादव ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में 144 पुरुष, 50 महिलाएं और 8 बच्चे शामिल थे। उन्होंने कहा कि राज्यभर में कुल 1,656 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई, जिनमें 152 लोगों ने हेलमेट न पहनने के कारण और 26 लोगों ने सीट बेल्ट न पहनने की वजह से जान गंवाई। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में एमपी बॉर्डर पर कुल 552 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 944 लोग घायल हुए। इस दौरान  शराब पीकर गाड़ी चलाने से केवल एक हादसा हुआ, लेकिन इसमें कोई मौत नहीं हुई। 2022 के आकड़े के अनुसार सड़क हादसो में मध्य प्रदेश का देश में दूसरा स्थान है। 1,026 लोगों की मौत ओवरस्पीडिंग के कारण मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार है। 1,026 लोगों की मौत ओवरस्पीडिंग के कारण हुई, जबकि 40 लोगों की मौत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की वजह से हुई। इसके अलावा, 56 लोगों की मौत ब्लैक स्पॉट्स पर हुई।   सड़क सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी मुख्यमंत्री ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यातायात नियमों का पालन अनिवार्य है। इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे है। हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग, गति सीमा का पालन और यातायात नियमों का सही तरीके से अनुपालन करने से हादसों को रोका जा सकता है। recent visitors 29

Chandrayaan-3 ने चंद्रमा की सतह तापीय भौतिकी प्रयोग से पानी और बर्फ की खोज में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया

नई दिल्ली चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर पानी और बर्फ की खोज की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। चंद्रमा की सतह तापीय भौतिकी प्रयोग (ChaSTE) से पानी और बर्फ की खोज में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। विक्रम लैंडर द्वारा किए गए इस प्रयोग ने चांद की उच्च अक्षांश वाली मिट्टी (रेगोलिथ) से असाधारण इन-सीटू तापमान माप प्रदान किए हैं, जिससे चांद के तापीय वातावरण के साथ-साथ पानी और बर्फा के जमा होने की संभावना की उम्मीद जगी है। इसरो के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) से के दुर्गा प्रसाद ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, "पानी और बर्फ का पता लगाना चंद्रमा पर इंसानों के जीवन की संभावना और आगे की खोज के लिए एक अहम कदम है। चांद के तापमान न केवल पानी और बर्फ को निर्धारित करते हैं, बल्कि यह अन्य वैज्ञानिक और अन्वेषण पहलुओं को भी प्रभावित करते हैं।" चंद्रयान-3 मिशन से प्राप्त नई जानकारी को Nature Communications Earth & Environment पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। ChaSTE ने चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में 355K (82°C) तक तापमान मापे हैं जो कि अपेक्षित 330K से 25K अधिक था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वृद्धि लैंडर के सूरज की ओर झुके 6° के स्थानीय ढलान पर स्थित होने के कारण हुई। ChaSTE द्वारा किए गए अवलोकनों के आधार पर, टीम का कहना है कि 14° से अधिक ढलान वाले बड़े पोलर क्षेत्रों में पानी और बर्फ के स्थिर जमा होने की संभावना हो सकती है। ये क्षेत्र कम सौर विकिरण प्राप्त करते हैं और इसलिए तापमान कम बनाए रखते हैं, जिससे वे भविष्य के चांदी अन्वेषण और संभावित मानव जीवन के लिए अधिक उपयुक्त बनते हैं। चांद पर पानी की खोज और इसके संभावित उपयोग के लिए कई देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। चंद्रयान-3 से प्राप्त ChaSTE के परिणाम भविष्य के चांद मिशनों और स्थायी मानव जीवन की संभावनाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस डेटा को आगे विश्लेषण किया जाएगा और आगामी शोध प्रकाशित करने की उम्मीद है। recent visitors 47

पिछले एक वर्ष में, डिवीजन के कई माओवादियों को सुरक्षाबलों ने खत्म किया, सुरक्षा बल इलाके में शांति बहाल होने तक अपना अभियान जारी रखेंगे

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में गुरुवार को सुरक्षाबल के जवानों ने बड़ी कार्रवाई की। मुठभेड़ में सुरक्षाबल के जवानों ने 26 नक्सलियों को मार गिराया है। वहीं, एक अन्य एनकाउंटर में 4 नक्सली मारे गए हैं। बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ दो मुठभेड़ों में मारे गए 30 नक्सलियों में से 19 की अब तक पहचान कर ली गई है, जिनमें 15 महिलाएं शामिल हैं। माओवादियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी को भारी नुकसान पहुंचाया है। पश्चिमी डिवीजन पर सख्त कार्रवाई पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बस्तर की पश्चिमी डिवीजन कई नक्सली घटनाओं को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाती रही है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में इस वर्ष नक्सलियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सुरक्षाबलों ने बीजापुर जिले में 14 महिलाओं समेत 26 नक्सलियों को मार गिराया जबकि कांकेर जिले में एक महिला समेत चार अन्य को ढेर कर दिया गया। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि बीजापुर में मारे गए 26 नक्सलियों में से 18 की पहचान कर ली गई है और अन्य की पहचान कराई जा रही है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि बीजापुर मुठभेड़ में मिली सफलता के साथ ही सुरक्षा बलों ने माओवादियों के पश्चिम बस्तर डिवीजन को काफी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में, डिवीजन के कई माओवादियों को सुरक्षाबलों ने खत्म कर दिया है। सुरक्षा बल इलाके में शांति बहाल होने तक अपना अभियान जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि बीजापुर अभियान में मुठभेड़ स्थल से एक एके-47 राइफल, एक एसएलआर (सेल्फ लोडिंग राइफल), एक इंसास राइफल, तीन .303 राइफल और कई अन्य बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल), 12 बोर राइफल और 315 बोर राइफल, गैजेट और हथियारों का जखीरा बरामद किया गया है। 14 महीने में 37 नए शिविर पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले 14 महीनों में बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के 37 नए शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से अधिकतर बीजापुर जिले में सुरक्षा की कमी को पूरा करने और विकास कार्यों को सुविधाजनक बनाने के लिए स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बीजापुर में तर्रेम और पामेड़ के बीच सड़क संपर्क स्थापित किया गया है, जिसे पहले माओवादियों का गढ़ माना जाता था। अधिकारी ने बताया कि इस क्षेत्र में सड़क संपर्क स्थापित होने से एक बड़ा बदलाव आयेगा। बस्तर में लगातार एक्शन छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। बस्तर में सुरक्षाबल के जवान लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। सुरक्षाबल के लगातार एक्शन के कारण नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। recent visitors 44

बांग्लादेश की सेना ने राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों और बड़ी संख्या में सैनिकों को बुलाया

ढाका  बांग्लादेश की सेना ने राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों और बड़ी संख्या में सैनिकों को बुलाया है। रिपोर्ट के अनुसार, सेना की हर ब्रिगेड से 100 सैनिकों को ढाका में इकठ्ठा होने को कहा गया है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब बांग्लादेश की सेना और हसीना विरोधी आंदोलन की अगुवाई करने वाले संगठन स्टूडेंट अगेंस्ट्र डिस्क्रिमिनेशन के बीच संबंधों में दरार की खबरें आई है। नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि सावर स्थित सबसे महत्वपूर्ण 9वीं डिवीजन के सैनिकों ने क्रमिक तरीके से ढाका में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में बांग्लादेश के सुरक्षा प्रतिष्ठान के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से कहा है कि सेना देश को देश पर अपनी पकड़ मजबूत करने में कुछ और दिन लगेंगे। बांग्लादेश की सेना के पास डिवीजन आकार की 10 क्षेत्रीय कमान है, जिनमें ब्रिगेड की कोई निश्चित संख्या नहीं है। 9वीं इंन्फैंट्री डिवीजन सावर में स्थित है, जबकि एक अन्य महत्वपूर्ण 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन घाटैल में तैनात है। सेना प्रमुख को लेकर छात्र नेताओं का खुलासा बांग्लादेश सेना की सक्रियता छात्र नेता और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय के सलाहकार आसिफ महमूद शाजिब भुइयां के खुलासे के बाद हुई है। भुइयां ने एक वीडियो में दावा किया था कि सेना प्रमुख जनरल वकार उज-जमान ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त करने पर अनिच्छा से सहमति जताई थी। पहले से रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो को शुक्रवार को जारी किया गया था। इससे पहले एक अन्य प्रभावशाली छात्र नेता हसनत अब्दुल्ला ने 11 मार्च को जनरल जमान के साथ एक गुप्त बैठक के बाद सेना प्रतिष्ठान के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी थी। कहा गया था कि जनरल जमान ने सुझाव दिया था कि बांग्लादेश में चुनाव होने पर शेख हसीना की अवामी लीग राजनीति में वापस आ सकती है और चुनाव भी लड़ सकती है। सेना के खिलाफ आंदोलन की धमकी हालांकि, अब्दुल्ला और भुइयां ने यह नहीं बताया कि उन्होंने जनरल जमान के साथ बातचीत को सार्वजनिक करने के लिए दो सप्ताह से अधिक समय का इंतजार क्यों किया, लेकिन अब्दुल्ला ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी का रास्ता खोलने के लिए सेना के अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी दी। भुइयां के खुलासे और अब्दुल्ला की फेसबुक पोस्ट के तुरंत बाद बांग्लादेश की तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने एक वर्चुअल बैठक की, जिसका उद्येश्य निकट भविष्य में छात्रों के एक और विद्रोह की आशंका में कदम उठाना था। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सेना मजबूत कदम उठाएगी या नहीं। इस बीच 26 मार्च से मोहम्मद यूनुस तीन दिनों की चीन यात्रा पर जाने वाले हैं। सेना प्रमुख को बदनाम करने की कोशिश छात्र प्रतिनिधियों और जनरल वकार के बीच 11 मार्च की बैठक के विवरण को सार्वजनिक किए जाने ने बांग्लादेश में अधिकांश लोगों को हैरान कर दिया है। इसे सेना प्रमुख की छवि को खराब करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, यूनुस को यह महसूस होने लगा है कि पिछले साल 8 अगस्त को मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभालने के बाद उनकी स्थिति काफी कमजोर हो गई है। यही वजह है कि उन्होंने नई दिल्ली के सामने शांति का प्रस्ताव रखा है और बिम्सटेक सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की मांग की है। हालांकि, यह मुलाकात संभव नहीं है क्योंकि यूनुस सरकार में शामिल अधिकारियों ने लगातार भारत के खिलाफ उकसाऊ बयानबाजी की है। इसके अलावा भारतीय प्रतिष्ठान जल्द ही एक लोकतांत्रिक-चुनावी प्रक्रिया देखना चाहता है, जिससे एक वैध राजनीतिक दल सत्ता में आए, जिसके साथ वह आगे बढ़ सके। इस बीच जनरल जमान के नेतृत्व में सेना बांग्लादेश में अहम आधार बनी हुई है। recent visitors 46

एमपी के जबलपुर में राष्ट्रीय वायरोलॉजी लैब की स्थापना से मिलेगी बड़ी राहत, खतरनाक वायरस की जांच, शोध के लिए भी मिलेगी सुविधा

 जबलपुर  खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए मध्य भारत में बड़ी सुविधा शुरू करने की घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने  राज्यसभा में की है।मध्य प्रदेश के जबलपुर में सेंट्रल इंडिया का पहला नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी (एनआईवी) स्थापित किया जाएगा। यह देश के एकमात्र एनआईवी पुणे की तरह होगा। मंत्री ने बताया है कि जबलपुर के साथ बेंगलुरु, डिब्रूगढ़ और जम्मू में इसी तरह की लैब स्थापित की जाएंगी। एमपी में होने लगेगी जांच जबलपुर में यह लैब बनने के बाद घातक वायरसों की भी जांच मध्य प्रदेश में होने लगेगी। लैब प्रारंभ होने में दो से तीन वर्ष लग सकते हैं। हर वर्ष वायरस से होने वाली एक या दो नई बीमारियों का संक्रमण देश-दुनिया में फैलता है। इनकी जांच की सुविधा सिर्फ एनआईवी पुणे में होने से वहां बहुत अधिक मात्रा में देश से सैंपल पहुंचने के कारण बहुत अधिक दबाव रहता है, इस कारण देश के अलग-अलग क्षेत्र में चार और लैब बनाई जा रही हैं। बीसीएल सेफ्टी मानक होता है दरअसल, खतरनाक और बहुत ज्यादा संक्रामक वायरस की जांच के लिए बायोलॉजिकल सेफ्टी लेवल-4 (बीएसएल) लैब की आवश्यकता होती है। बीएसएल सेफ्टी मानक होता है। यह लैब इस तरह से तैयार की जाती हैं कि उनसे संक्रमण फैलने की गुंजाइश न रहे। मध्य प्रदेश के कुछ मेडिकल कालेजों में अभी बीएसएल- 2 स्तर की वायरोलॉजी लैब हैं, इस कारण खतरनाक वायरस की जांच नहीं हो पाती। स्टाफ भी उस तरह से प्रशिक्षित नहीं रहता। लैब में इन बीमारियों की हो सकेगी जांच यह लैब बनने पर जानवरों से इंसान में आने वाली (जूनोटिक) बीमारियां जैसे प्लेग, निपाह वायरस, इबोला, जीका, हंपी वायरस, इबोला, सार्स, एंथ्रेक्स, रिफ्ट वैली फीवर, मंकी पाक्स, काऊ पाक्स आदि की जांच हो सकेगी। वायरोलॉजी लैब में वायरस से होने वाली बीमारियों की ही जांच होती है, पर एनआईवी में ऐसे बैक्टीरियां की जांच और शोध भी किया जा सकता है जिनका उपयोग जैविक आतंकवाद में हो सकता है। साथ ही वायरस की नई-नई बीमारियों पर शोध भी हो सकेगा, जिससे उन्हें फैलने से रोका जा सके। छतरपुर में हनुखेड़ा के जंगल में पुलिस ने बदमाश लक्खू राजपूत को शॉर्ट एनकाउंटर में पकड़ा। बदमाश के पैर में लगी है गोली। recent visitors 41

साइबर क्राइम का नया गढ़ बना भोपाल, पुलिस ने खोली खौफनाक साजिश की परतें

भोपाल झारखंड का जामताड़ा और हरियाणा का नूंह जैसे शहर साइबर अपराध के लिए बदनाम हैं। अब भोपाल भी उसी राह पर चल रहा है। भोपाल अब साइबर अपराध का अड्डा बनता जा रहा है। यहां जामताड़ा और नूंह की तरह ही साइबर अपराधी सक्रिय हैं। वे लोगों को ठगने के लिए फर्जी बैंक खातों और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे कई गिरोहों को पकड़ा है जो साइबर अपराधियों को मदद करते हैं। ये गिरोह उन्हें फर्जी खाते और सिम कार्ड देते हैं। पुलिस इन गिरोहों को खत्म करने के लिए एक खास पोर्टल का इस्तेमाल कर रही है। इस पोर्टल पर कई शिकायतें दर्ज हैं और पुलिस उनकी जांच कर रही है। समन्वय पोर्टल का इस्तेमाल कर रही पुलिस भोपाल पुलिस साइबर अपराध को रोकने के लिए 'समन्वय पोर्टल' (NCCRP JMIS) का इस्तेमाल कर रही है। इस पोर्टल पर भोपाल के फर्जी बैंक खातों के खिलाफ 550 शिकायतें दर्ज हैं। इन खातों से 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी लेनदेन किए गए हैं। पुलिस अब इन गिरोहों को खत्म करने और ऑनलाइन अपराधों को रोकने के लिए काम कर रही है। शहर में संगठित गिरोह चला रहे अपराधी पहले भोपाल के लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करके देश भर के लोगों से पैसे ठगे जाते थे। लेकिन अब पुलिस को पता चला है कि शहर में ही संगठित गिरोह चल रहे हैं। ये गिरोह 'म्यूल' बैंक खाते और पहले से चालू सिम कार्ड साइबर अपराधियों को देते हैं। शहर में कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़ साइबर पुलिस अब इन संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश कर रही है। वे ऑनलाइन वित्तीय अपराधों को रोकने के लिए डिजिटल सुरक्षा उपायों को भी मजबूत कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने प्रभात स्क्वायर, ऐशबाग के पास चल रहे एक साइबर-धोखाधड़ी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। कॉल सेंटर के मालिक का बैंक खाता महाराष्ट्र के एक साइबर-अपराध पीड़ित से ठगे गए पैसे को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। टीकमगढ़ और महाराष्ट्र से निकला कनेक्शन कॉल सेंटर से बरामद एक सिम कार्ड का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति के साथ साइबर अपराध करने में किया गया था। ये दोनों बातें समन्वय पोर्टल के जरिए सामने आईं। कॉल सेंटर का मालिक अपने टीकमगढ़ के एक रिश्तेदार की मदद से सेंटर चला रहा था। टीकमगढ़ पहले से ही साइबर अपराध का एक बड़ा अड्डा बन चुका है। देश के कई राज्यों में ठगी DCP (क्राइम ब्रांच) अखिल पटेल ने बताया कि भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने खुद ही फर्जी बैंक खातों को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया है। ये खाते साइबर अपराधियों को दिए जा रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल देश के कई राज्यों में लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था। DCP पटेल ने बताया कि पुलिस ने समन्वय पोर्टल की मदद से इन संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है। शिकायतों का विश्लेषण करता है पोर्टल यह पोर्टल नेशनल साइबर-क्राइम हेल्पलाइन (1930) के जरिए मिली शिकायतों का विश्लेषण करता है। यह साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों को दिखाता है, जिससे पुलिस को उनके इस्तेमाल का पता लगाने में मदद मिलती है। भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने इन खातों की जांच करने के लिए बैंकों को नोटिस भेजे और आगे की जांच की। ऐसे चल रह सिंडिकेट DCP ने आगे बताया कि साइबर अपराधी दूसरे राज्यों में धोखाधड़ी करने के लिए भोपाल से फर्जी खाते खरीदते हैं। दूसरे राज्यों की पुलिस ऐसे खातों पर रोक लगा देती है, लेकिन वे अक्सर क्षेत्राधिकार या दूरी की वजह से FIR दर्ज नहीं करते हैं। अब भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने न केवल फर्जी खाताधारकों के खिलाफ FIR दर्ज करने का फैसला किया है, बल्कि यह भी जांच करने का फैसला किया है कि क्या बैंकों ने खाते खोलते समय KYC के नियमों का पालन किया था। पुलिस खुद इन मामलों में शिकायतकर्ता बनती है। बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में पुलिस को पता चला कि बैंकों में चालू खाते बिना आवेदक या उसकी दुकान के फिजिकल वेरिफिकेशन के ही खोल दिए गए थे। इसलिए, अगर एक ही ब्रांच से कई फर्जी खाते खोले गए हैं, तो बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बैंक अकाउंट के बाद फर्जी सिम कार्ड वालों पर कसेगी नकेल DCP पटेल ने कहा कि यह कार्रवाई साइबर अपराधियों को बैंक खाते देने वालों पर लगाम लगाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह की कार्रवाई सभी जिलों और राज्यों में की जाए, तो साइबर अपराध को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि फर्जी बैंक खातों से निपटने के बाद, अगला निशाना साइबर अपराधियों को पहले से चालू सिम कार्ड देने वाले धोखेबाज होंगे। recent visitors 34