खाटू धाम में बनेगा रेलवे स्टेशन, सीधे पहुंचेंगे खाटू धाम, नया रेलवे स्टेशन होगा बिल्कुल पास

सीकर  विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम में रेलवे स्टेशन को लेकर चर्चाएं एक दशक से लगातार जारी है। मौजूदा केन्द्र और राज्य सरकार से संबद्ध नेताओं के खाटूश्याम नगरी तक पटरिया बिछाने को लेकर लगातार बयान आते रहते है। इसे लेकर अब ताजा बयान राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का आया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि धार्मिक नगरी खाटूश्यामजी में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और जनभावना को देखते हुए इस मामले में उनकी रेल मंत्री से पत्र व्यवहार हुआ है। राठौड़ ने अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा राठौड़ ने बताया कि रींगस से खाटूश्यामजी प्रस्तावित रेल लाइन के संबंध में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। राठौड़ ने पत्र में प्रस्तावित रेल लाइन और रेलवे स्टेशन का निर्माण राज्य सरकार के राजस्व विभाग और रेलवे विभाग की ओर से निर्धारित मापदंडों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए गजट अधिसूचना के अनुसार करवाने की मांग की है। पत्र में आया जबाव – अधिकारियों को किया निर्देशित इस बारे में सीकर जिला मीडिया संयोजक जितेंद्र माथुर ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के पत्र के बाद रेल मंत्री ने भी आश्वासन दे दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार खाटूश्यामजी रेलवे स्टेशन और रींगस से खाटूश्यामजी तक रेल लाइन के निर्माण का कार्य गजट नोटिफिकेशन के अनुसार करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। रेल मंत्री वैष्णव ने निर्माण कार्य अधिसूचना के अनुसार हो, इसके लिए विस्तृत जांच करने के भी निर्देश दिए है। खाटू धाम में बनेगा नया रेलवे स्टेशन रेल मंत्रालय ने भारत के सैकड़ों रेलवे स्टेशनों को पुनर्विकसित करने की योजना बनाई है, और इसी के तहत Khatu Shyam Mandir में एक नया रेलवे स्टेशन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह कदम लाखों श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जो हर साल श्याम बाबा के दर्शन के लिए यहां आते हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान सीकर जिला स्थित खाटू श्यामजी का मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु देश के कोने-कोने से बाबा श्याम के दर्शन के लिए आते हैं।अब तक यहाँ आने वाले भक्तों को सड़क मार्ग से सफर करना पड़ता था। निकटतम रेलवे स्टेशन खाटू से 18 किलोमीटर दूर स्थित है। वहीं, ट्रेन से आने वाले यात्रियों को रींगस रेलवे स्टेशन उतरकर आगे की यात्रा करनी पड़ती है। इस परेशानी को देखते हुए, नया रेलवे स्टेशन धाम के पास ही बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे भक्तों को सीधी सुविधा मिलेगी और उनकी यात्रा अधिक सुगम होगी। जयपुर एयरपोर्ट से जुड़ी सुविधाएं हवाई यात्रा करने वाले भक्तों के लिए जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट निकटतम हवाई अड्डा है। Khatu Shyam Mandir से इसकी दूरी 90 किलोमीटर है। भक्त एयरपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुंचते हैं। नया रेलवे स्टेशन बनने से जयपुर एयरपोर्ट से ट्रेन के माध्यम से भी खाटू धाम तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। यह कदम न केवल भक्तों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि क्षेत्र के पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। बर्बरीक की पूजा और आस्था का केंद्र खाटू श्यामजी मंदिर महाभारत काल के महान योद्धा घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक को समर्पित है। यहां उनके शीश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि बाबा श्याम के दरबार में आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं, और फाल्गुन मेले के दौरान तो यहां लाखों भक्तों का जमावड़ा होता है। ऐसे में नया रेलवे स्टेशन भक्तों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा Khatu Shyam Mandir धार्मिक महत्व के अलावा एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। नया रेलवे स्टेशन क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए, इस निर्णय से यात्री सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। रेल मंत्रालय के इस कदम से न केवल श्रद्धालुओं को फायदा होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्र में रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। अभी 16 किलोमीटर दूर है स्टेशन राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्यामजी एक बड़ा धार्मिक स्थल है। अलग अलग राज्यों में रहने वाले लाखों लोगों में बाबा के प्रति श्रद्धा है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। खाटू श्यामजी तक सड़क मार्ग तो है लेकिन रेलवे स्टेशन 16 किलोमीटर दूर है। ट्रेन से आने वाले श्रद्धालुओं को अभी पलसाना रेलवे स्टेशन पर उतरना पड़ता है। हालांकि पलसाना देश के बड़े शहरों से सीधा जुड़ा हुआ नहीं है। बड़े शहरों से जुड़ा सीकर जंक्शन धर्म नगरी से 50 किलोमीटर दूर है। ऐसे में खाटू श्यामजी में रेलवे स्टेशन बनने पर बाबा के भक्तों को बड़ी राहत मिलेगी। जयपुर एयरपोर्ट से 90 किलोमीटर दूर है खाटू धर्म नगरी देश के अलग अलग राज्यों में रहने वाले लाखों लोगों में खाटू श्याम बाबा के प्रति आस्था है। लिहाजा दूरस्थ राज्यों से भी श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। हवाई सफर से आने वाले श्रद्धालुओं को जयपुर एयरपोर्ट उतरना पड़ता है क्योंकि नजदीकी एयरपोर्ट यही है। जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से खाटू श्यामजी की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को जयपुर एयरपोर्ट से सड़क मार्ग होते हुए धर्म नगरी पहुंचना होता है। भक्तों को भरोसा, हर मनोकामना होती है पूरी राजस्थान के सीकर जिले में यह खाटू श्यामजी नामक धार्मिक स्थल है। यहां पर भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की पूजा श्याम के रूप में की जाती है। भक्तों में ऐसी मान्यता है कि बाबा के दर्शन करने मात्र से उनकी हर मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। यही वजह है कि देश के अलग अलग राज्यों से लाखों भक्त बाबा के मंदिर में दर्शन करने आते हैं। recent visitors 48

ऑरेंज कैप की रेस में शामिल टॉप 5 खिलाड़ियों में तीन भारतीय और पर्पल कैप की रेस में टॉप 5 में चार भारतीय

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के 5 मुकाबले हो चुके हैं। सभी टीमों ने एक-एक मैच खेल लिया है। इन पांच मैचों के बाद ऑरेंज कैप की रेस में कौन आगे है और पर्पल कैप पर किसका कब्जा है? ये जान लीजिए। आने वाले समय में ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस दिलचस्प होती जाएगी। हालांकि, पांच मैचों के बाद अच्छी बात यह है कि ऑरेंज कैप की रेस में शामिल टॉप 5 खिलाड़ियों में तीन भारतीय हैं। पर्पल कैप की रेस में टॉप 5 में चार भारतीय हैं। IPL 2025 के ऑरेंज कैप की रेस की बात करें तो टॉप 5 में तीन भारतीय खिलाड़ी हैं, जिनमें ईशान किशन शतक के साथ शीर्ष पर हैं। उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 106 रनों की पारी खेली थी। दूसरे नंबर पर श्रेयस अय्यर हैं। श्रेयस ने 97 रन गुजरात के खिलाफ बनाए। लिस्ट में तीसरा नाम निकोलस पूरन का है, जिन्होंने दिल्ली के खिलाफ 75 रनों की पारी खेली। चौथे नंबर पर लिस्ट में तीसरे भारतीय साई सुदर्शन हैं। उन्होंने 74 रन पंजाब के खिलाफ बनाए। पांचवें पायदान पर मिचेल मार्श हैं। उन्होंने 72 रनों की पारी खेली। IPL 2025 ऑरेंज कैप की रेस में शामिल खिलाड़ी 1. ईशान किशन – 106 रन IPL 2025 की पर्पल कैप की रेस की बात करें तो इसमें शीर्ष पर नूर अहमद हैं, जो इस बार चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा हैं। उन्होंने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 4 विकेट निकाले थे। इसके अलावा टॉप 5 में जो अन्य चार खिलाड़ी हैं उनको 3-3 विकेट ही मिले हैं। इनमें खलील अहमद, क्रुणाल पांड्या, आर साई किशोर और विग्नेश पुथुर का नाम शामिल है। सभी खिलाड़ियों ने एक-एक मैच ही खेला है। IPL 2025 पर्पल कैप की रेस में शामिल खिलाड़ी 1. नूर अहमद – 4 विकेट 3. क्रुणाल पांड्या – 3 विकेट 4. आर साई किशोर – 3 विकेट 5. विग्नेश पुथुर – 3 विकेट recent visitors 38

लखीमपुर खीरी में सड़क हादसा, एक बाइक पर पांच सवार, चार लोगों की मौत, जिन्दा बची एक मासूम

लखीमपुर खीरी लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में मंगलवार शाम को दर्दनाक हादसा हुआ। इस हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि मंजर देखकर लोगों का कलेजा कांप गया। लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में मंगलवार को हादसे ने एक झटके में पूरा परिवार खत्म कर दिया। मां की अंत्येष्टि में शामिल होकर ससुराल लौट रही महिला, उसके पति, पुत्र और ससुर की ऋषिकेश डिपो की बस से कुचलकर मौत हो गई। हादसे में मृतका की पांच वर्षीय पुत्री घायल हुई है। ये सभी एक ही बाइक पर सवार थे। वहीं तीन रिश्तेदार और बाइक सवार एक राहगीर भी घायल हुआ है। शाम चार बजे गोला-खुटार राष्ट्रीय राजमार्ग पर टेड़वा पुल के निकट तेज गति से आ रही ऋषिकेश डिपो की रोडवेज बस ने उनकी बाइक को रौंद दिया। पुलिस ने घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला भिजवाया। वहां डॉक्टर ने राधा, शिव कुमार, रामौतार और शिवांश को मृत घोषित कर दिया। हादसे में शिवि बाइक से दूर जा गिरी, उसे हल्की चोटें आई। हादसे ने खत्म किया परिवार खुटार मार्ग पर हुए भीषण हादसे में पलक झपकते ही पूरा परिवार खत्म हो गया। मृतक शिवकुमार और राधा के दो बच्चों में आठ वर्षीय शिवांश की भी मौत हो गई। इस भीषण हादसे में मासूम शिवि अनाथ हो गई। घटनास्थल पर रोती बिलखती शिवि को देखकर हर किसी की आंखें छलक आई। हादसे की सूचना मिलते ही संसारपुर चौकी इंचार्ज मोहित पुंडीर और लाल्हापुर गुरुद्वारे की सेवादार जोगा सिंह मौके पर पहुंचे। मोहित पुंडीर एक निजी वाहन और जोगा सिंह अपने कारसेवा वाहन से सभी को लेकर गोला सीएचसी पहुंचे, लेकिन हादसा इतना भीषण था कि किसी की जान नहीं बचाई जा सकी। recent visitors 39

MP बोर्ड 10वीं व 12वीं की दूसरी परीक्षा के दौरान फीस को लेकर विद्यार्थी असमंजस में हैं

भोपाल इस साल से मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं की परीक्षा दो बार आयोजित की जाएगी। पहली परीक्षा मंगलवार को समाप्त हुई। अब दूसरी परीक्षा जुलाई में आयोजित होगी। इस संंबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन इसमें फीस के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है। फीस को लेकर विद्यार्थी असमंजस में हैं। मंडल के अधिकारियों का कहना है कि अभी तो दूसरी परीक्षा कराने की गाइडलाइन तय की गई है। फीस के संबंध में परीक्षा समिति के साथ बैठक कर तय किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि अप्रैल तक बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य पूरा कर लिया जाएगा।   जून में भरे जाएंगे फार्म दूसरी परीक्षा में उन्हीं विद्यार्थियों को मौका मिलेगा, जो पहली परीक्षा में शामिल हुए हैं। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए एक विषय का 250 रुपये शुल्क लगेगा। इसके लिए जून में आवेदन कराए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि रिणाम घोषित होने के बाद अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर दूसरी परीक्षा की तैयारी शुरू की जाएगी। अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका तैयार कराए जाएंगे। इसके बाद परीक्षा आयोजित की जाएगी। केडी त्रिपाठी, सचिव, माशिमं ने बताया दूसरी परीक्षा जुलाई में आयोजित होगी। फीस के संबंध में परीक्षा समिति की बैठक में तय किया जाएगा।   recent visitors 43

मयाली नेचर कैम्प में साहसिक खेलों की रोमांचक शुरुआत: जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच और युवाओं को मिलेगा रोजगार

रायपुर : जशपुर की छवि को राष्ट्रीय पर्यटन पटल पर उकेरने मुख्यमंत्री साय की पहल: तीन प्रमुख पर्यटन सर्किटों का हुआ लोकार्पण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  जशपुर जिले को एक नई पहचान देने वाली ऐतिहासिक पहल की मयाली नेचर कैम्प में साहसिक खेलों की रोमांचक शुरुआत: जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच और युवाओं को मिलेगा रोजगार रायपुर मयाली नेचर कैम्प में साहसिक खेलों की रोमांचक शुरुआत: जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच और युवाओं को मिलेगा रोजगारमयाली नेचर कैम्प में साहसिक खेलों की रोमांचक शुरुआत: जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच और युवाओं को मिलेगा रोजगारमयाली नेचर कैम्प में साहसिक खेलों की रोमांचक शुरुआत: जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच और युवाओं को मिलेगा रोजगारमयाली नेचर कैम्प में साहसिक खेलों की रोमांचक शुरुआत: जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच और युवाओं को मिलेगा रोजगारमयाली नेचर कैम्प में साहसिक खेलों की रोमांचक शुरुआत: जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच और युवाओं को मिलेगा रोजगारमयाली नेचर कैम्प में साहसिक खेलों की रोमांचक शुरुआत: जनजातीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच और युवाओं को मिलेगा रोजगार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  जशपुर जिले को एक नई पहचान देने वाली ऐतिहासिक पहल की। उन्होंने कुनकुरी स्थित मयाली नेचर कैम्प में एडवेंचर जोन का शुभारंभ किया और जिले के लिए तीन प्रमुख पर्यटन सर्किटों—आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक (स्पिरिचुअल एंड हेरिटेज), प्राकृतिक एवं वन्य जीव (नेचर एंड वाइल्ड लाइफ) और साहसिक पर्यटन (एडवेंचर) सर्किट—का लोकार्पण किया। यह कदम न केवल जशपुर को छत्तीसगढ़ के भीतर एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनाएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोलेगा। मुख्यमंत्री साय ने स्वयं पोंटून बोट में सवार होकर मधेश्वर महादेव के विहंगम दृश्य का अवलोकन किया और कहा कि मयाली एडवेंचर ज़ोन अब रोमांच और रोजगार का केंद्र बनेगा। यहाँ एक्वा साइक्लिंग, कयाकिंग, स्पीड बोट, फ्लोटिंग जेटी, बम्पर बोट जैसे एडवेंचर एक्टिविटी की शुरुआत की गई है। तीन नए पर्यटन सर्किटों की झलक मुख्यमंत्री साय द्वारा जिन तीन प्रमुख पर्यटन सर्किटों का लोकार्पण किया गया, वे जशपुर की विविधता और विशेषता को दर्शाते हैं। स्पिरिचुअल और हेरिटेज सर्किट कोतेबीरा से शुरुआत होती है, जो तमता, कैलाश गुफा, मधेश्वर पहाड़, शारदा धाम, ग्वालिन सरना जैसे स्थलों से होकर गुजरता है—यह सर्किट श्रद्धा, विरासत और जनजातीय परंपराओं की अनमोल झलक पेश करता है। प्राकृतिक एवं वन्य जीव सर्किट उन पर्यटकों को आकर्षित करेगा जो प्रकृति की गोद में सुकून तलाशते हैं। इसमें मकरभंजा जलप्रपात, बादलखोल अभ्यारण्य, रानीदाह और गुल्लू जलप्रपात से लेकर सारुडीह का चाय बागान तक शामिल हैं—प्राकृतिक धरोहरों से भरपूर यह सर्किट पर्यावरण प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं होगा। साहसिक पर्यटन सर्किट रोमांच के शौकीनों को आकर्षित करेगा। इसमें दनगरी कैम्प साइट, बेलवार जलप्रपात, देशदेखा हिल कैम्प, सरना ईको एथेनिक रिसोर्ट और क्लाइम्बिंग सेक्टर जैसे स्थान शामिल हैं, जो ट्रेकिंग, क्लाइम्बिंग और नेचर-कैम्पिंग जैसी गतिविधियों के लिए एक आदर्श स्थान बनेंगे। जनजातीय युवाओं के लिए पर्वतारोहण अभियान: हिमाचल की ऊंचाइयों से लौटेगा जशपुर का आत्मविश्वास मुख्यमंत्री साय की पहल पर अब जशपुर के जनजातीय युवाओं को हिमाचल प्रदेश के मियाड़ घाटी में पर्वतारोहण, रोप क्लाइम्बिंग आदि का प्रशिक्षण मिलेगा। प्रशिक्षण प्राप्त युवा वापस लौटकर स्थानीय युवाओं को भी प्रशिक्षित करेंगे, जिससे पर्यटन और युवाशक्ति दोनों को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री साय से अभियान में जाने वाले बच्चों ने मिलकर कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्हें ये अनोखा अवसर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन द्वारा युवाओं को विभिन्न साहसिक खेलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विगत दिनों छत्तीसगढ़ की एक पर्वतारोही बेटी ने अफ्रीका के सबसे ऊंचे शिखर पर तिरंगा फहराने की इच्छा दर्शाई थी जिसे तुरन्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई थी। उसने किलीमंजारो फतह किया। इसी तरह आपको भी खूब मेहनत कर राज्य का नाम ऊंचा करना है। जिस पर युवा तेजल भगत ने कहा अब हमारी पारी है हम भी राज्य को गौरवान्वित करेंगे। स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने कहा—पर्यटन ने बदली जिंदगी मयाली नेचर कैम्प में कार्यरत लक्ष्मी एवं तुलसी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उनका आभार जताया। उन्होंने बताया कि पर्यटन की वजह से अब उन्हें नियमित आय मिल रही है और बच्चों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। महिलाओं ने मधेश्वर महादेव की काष्ठ-निर्मित कलाकृति भेंट कर मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री साय की यह पहल पर्यटन को सिर्फ सैर नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का साधन बना रही है। जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक विरासत और जनजातीय आत्मबल को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की यह ऐतिहासिक शुरुआत है। recent visitors 32

शनि अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का संयोग, ना करें ये काम

 हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की अमावस्या तिथि इस बार 29 मार्च, शनिवार को आ रही है, जिसे शनि अमावस्या के रूप में मनाया जाएगा. जब अमावस्या तिथि शनिवार को पड़ती है, तो इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है. इस दिन सूर्य ग्रहण और शनि का मीन राशि में गोचर भी हो रहा है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है. शास्त्रों के अनुसार, शनि अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान और पितरों का तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है. विशेष रूप से जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष है, उनके लिए यह दिन अत्यधिक फलदायी होता है. ज्योतिष शास्त्र में शनि अमावस्या से जुड़ी कुछ विशेष सावधानियों का उल्लेख किया गया है. अगर इनका पालन नहीं किया गया, तो शनिदेव की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है, जिससे जीवन में कई कठिनाइयां आ सकती हैं. आइए जानते हैं कि इस शुभ दिन पर कौन-सी गलतियों से बचना चाहिए. पूजा के बाद पीठ न दिखाएं शनि अमावस्या के दिन शनिदेव के मंदिर जाकर विधिपूर्वक पूजा करें और शनि से संबंधित वस्तुओं का दान करें. लेकिन ध्यान रखें, मंदिर से लौटते समय शनिदेव को पीठ दिखाना अशुभ माना जाता है. ऐसा करने से जीवन में बाधाएं आ सकती हैं और शनि दोष बढ़ सकता है. पूजा के दौरान शनिदेव की आंखों में न देखें शनि अमावस्या पर पूजा करते समय यह ध्यान रखें कि शनिदेव की आंखों में सीधा देखने से बचें. शास्त्रों के अनुसार, शनिदेव की दृष्टि वक्री होती है और यदि कोई उनकी आंखों में देखता है, तो उसे उनके वक्री दृष्टि का अशुभ प्रभाव झेलना पड़ता है. इसलिए पूजा करते समय आंखें नीचे रखें. इन चीजों को घर न लाएं शनि अमावस्या के दिन गरीब, जरूरतमंद और असहाय लोगों की सहायता करना बहुत पुण्यकारी होता है. लेकिन इस दिन गरीबों का अपमान भूलकर भी न करें, अन्यथा शनिदेव की कृपा प्राप्त नहीं होती. साथ ही, इस दिन लोहे, काले जूते या अन्य शनि से संबंधित वस्तुएं घर लाने से बचना चाहिए. नाखून, बाल और दाढ़ी न काटें शनि अमावस्या के दिन नाखून काटना, बाल कटवाना या दाढ़ी बनवाना वर्जित माना गया है. ऐसा करने से जीवन में विघ्न-बाधाएं आ सकती हैं. इसके अलावा, झूठ बोलना, क्रोध करना, कटु वचन कहना और तामसिक भोजन ग्रहण करना भी इस दिन टालना चाहिए. स्त्री-पुरुष संबंध से बचें गरुड़ पुराण के अनुसार, शनि अमावस्या के दिन यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए. ऐसा करने से उत्पन्न संतान को कई प्रकार के कष्ट उठाने पड़ सकते हैं. इसके अलावा, इस दिन सुबह देर तक सोने से बचें. बल्कि जल्दी उठकर काले तिल डालकर स्नान करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करें. इन स्थानों पर न जाएं शनि अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण भी है, इसलिए इस दिन श्मशान, कब्रिस्तान, या सुनसान स्थानों पर जाने से बचना चाहिए. अमावस्या तिथि को नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं, जिससे अनचाही समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. साथ ही, इस दिन माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें और घर में किसी भी प्रकार के विवाद से बचें. ऐसा न करने से पितर और शनिदेव अप्रसन्न हो सकते हैं. शनि अमावस्या पर करें ये शुभ काम पवित्र नदी में स्नान करें और पितरों का तर्पण करें. शनिदेव को तिल, तेल, काले वस्त्र और उड़द दान करें. गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करें. हनुमान चालीसा और शनि चालीसा का पाठ करें. सात्विक भोजन ग्रहण करें और संयम का पालन करें. recent visitors 39

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दी बधाई

रायपुर विश्व क्षय (टीबी) दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य को "टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान" में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान 50 लाख से अधिक आबादी वाले राज्यों की श्रेणी में टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों के सर्वाधिक अनुपात हेतु प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने की। समारोह में देशभर के स्वास्थ्य सचिव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक, राज्य क्षय अधिकारी, विभिन्न मंत्रालयों एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से यह पुरस्कार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक विजय दयाराम के. ने प्राप्त किया। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की भूरि-भूरि सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने "टीबी मुक्त पंचायत" के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अनुकरणीय कार्य किया है। उल्लखेनीय है कि भारत सरकार द्वारा 2023 में "टीबी मुक्त ग्राम पंचायत" की परिकल्पना की गई थी। पहले ही वर्ष छत्तीसगढ़ की 2260 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया था, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 4102 पंचायतों तक पहुँच गई, जो देश में सर्वाधिक अनुपात दर्शाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ को मिले इस सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अभियान से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों को बधाई दी।  स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने  स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने निर्देश दिए कि 100 दिवसीय अभियान के दौरान चिन्हित सभी संभावित मरीजों की X-Ray और नाट परीक्षण प्राथमिकता से पूर्ण किए जाएँ, उनका तत्काल पंजीकरण और उपचार प्रारंभ कर निक्षय पोषण योजना व मित्रों से सहायता सुनिश्चित की जाए। "निक्षय निरामय छत्तीसगढ़" बना जन-आंदोलन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 7 दिसंबर 2024 से शुरू किए गए 100 दिवसीय 'निक्षय निरामय छत्तीसगढ़' अभियान ने ग्रामीण स्तर पर व्यापक पहचान, उपचार और सहभागिता को गति दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा इस अवसर पर समाज के सभी वर्गों – उद्योगों, कॉरपोरेट्स, NGO व आम जनता – से टीबी मरीजों को गोद लेने की अपील की गई थी। इस अपील के बाद प्रदेश में निक्षय मित्रों की संख्या बढ़कर 13,422 हो गई, जिन्होंने अब तक 26,039 टीबी मरीजों को पोषण आहार व अन्य सहयोग प्रदान किया है। recent visitors 20