मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव और केन्‍द्रीय राज्य मंत्री मेघवाल ने वीर भारत संग्रहालय का भूमि‍-पूजन किया

उज्‍जैन मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्‍य आतिथ्‍य में कोठी महल पर युगयुगीन भारत के कालजयी महानायकों की तेजस्विता की महागाथा का वर्णन करने वाले "वीर भारत संग्रहालय" का भूमि पूजन किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अर्जुनराम मेघवाल भी कार्यक्रम में सम्‍मिलित हुए। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि उज्‍जैन का इतिहास अत्‍यंत प्राचीन है। हर कल्‍प में उज्‍जयिनी का अपना इतिहास रहा है। प्राचीन भारत के वीर महापुरूषों की गौरव गाथा की जानकारी इस संग्रहालय में प्रदान की जाएगी। संग्रहालय का निर्माण भव्‍य स्‍तर पर किया जाएगा। प्राचीन काल की सभी प्रमुख घटनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी। संग्रहालय का निर्माण लगभग 20 करोड़ रूपए की लागत से किया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त आवश्‍यकता पडने पर और धन राशि भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमें अपनी विरासत पर गर्व करने का एक और अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी ओर से संग्रहालय के निर्माण हेतु शुभकामनाँ दी।    कार्यक्रम में बतौर विशिष्‍ट अतिथि सांसद उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र अनिल फिरोजिया, सांसद राज्यसभा बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, विधायक उज्जैन-उत्तर अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल,  महापौर  नगर पालिक निगम मुकेश टटवाल  निगम अध्यक्ष नगर पालिक निगम श्रीमती कलावती यादव और संस्‍कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्‍ला‍शामिल हुए। कार्यक्रम में सर्वप्रथम पंडित चंदन व्‍यास एवं उनके दल के द्वारा स्‍वस्ति वाचन किया गया। वीर भारत न्‍यास के न्‍यासी सचिव श्रीराम तिवारी के द्वारा पुष्‍प गुच्‍छ भेंट कर अतिथितियों का स्‍वागत किया गया। श्रीराम तिवारी ने स्‍वागत वक्‍तव्‍य देते हुए कहा कि भारतवर्ष के गौरवशाली और पराक्रमी अतीत से परिचय तथा प्रेरणा हमारे समय की अपरिहार्य आवश्यकता है। यह एक राष्ट्रव्यापी, महत्वाकांक्षी स्वप्न है, जिसे चरितार्थ करने के लिए वीर भारत संग्रहालय में भारत की तेजस्विता और पराक्रम के विभिन्न आयामों को व्यापक रूप से प्रस्तुत किये जाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार संकल्पित है। तेजस्विता और शौर्य हमारे जीवन, परंपरा, चित्त-वृत्ति, चिंतन-प्रकृति, दर्शन, जीवन मूल्य, आस्था और विश्वासों का स्वर है। हमारा प्रयास है कि वीर भारत संग्रहालय में राष्ट्र की सभी मंगलकारी दृष्टियों का प्रतिबिंबन हो। भारत वर्ष का प्रागैतिहास-पुरापाषाण काल, पूर्व वैदिक, वैदिक/उपनिषद, सरस्वती सिंधु घाटी सभ्यता, उत्तर वैदिक, श्रीराम के पूर्वज, श्रीकृष्ण के पूर्वज, रामायण काल, महाभारत काल, प्राचीन भारत की जनजातियों, महाजनपद काल, गौतम बुद्ध, महावीर, आदि शंकराचार्य, चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट विक्रमादित्य काल, सातवाहन, गुप्त साम्राज्य, चोल, पल्लव, भोजदेव, मध्ययुग, भक्ति काल, भारत के शूरवीर, पराधीनता के विरूद्ध सिंहनाद करते हुए भारत की सुदीर्घ परंपरा में तेजस्वी नायकों, चिंतकों, दार्शनिकों, मंत्रद्रष्टा, ऋषियों, संतों, मनीषियों, कवियों, लेखकों, कलाकारों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों के अनुपम योगदान को रेखांकित किया जायेगा। उल्‍लेखनीय है कि वीरभारत संग्रहालय युगयुगीन भारत के महानायकों की महागाथा का अनूठा केंद्र बनने जा रहा है। प्रदेशवासियों के लिए गर्व की बात है कि यह उज्जैन में स्थापित होने जा रहा है। सनातन परंपरा से ही, सृष्टि के आरंभ से ही बाबा महाकाल और उनकी प्रिय उज्जयिनी विराजित है। भारत वर्ष प्रागैतिहासिक-पुरापुरापाषाण काल से ही मानव सभ्यता और संस्कृति के विकास की कर्मभूमि रहा है। वीर भारत संग्रहालय में चाहे वैदिक काल हो, उपनिषद काल हो, रामायण महाभारत काल हो, हमारे ऋषि वैज्ञानिक हों, हमारे राष्ट्र के महानायक हों या फिर वे राजा महाराजा रहे हों, वैज्ञानिक रहे हों, साहित्यकार, इतिहासकार, खगोलविद हों, योद्धा हों, संन्यासी हों, उद्यमी रहे हो, ऐसे सभी प्रेरक चरित्रों को यादगार बनाने की कोशिश की जायेगी जिन्होंने भारत को तेजस्वी भारत बनाने का काम किया हो। मैंने निर्देश दिए हैं कि इस संग्रहालय जो दुनिया में अपनी तरह का सबसे अकेला होगा, इसे समय सीमा में पूरा किया जाए, सिंहस्थ के पहले पूरा किया जाये।  भारत वर्ष में विक्रमादित्य युग परिवर्तन और नवजागरण की एक महत्वपूर्ण धुरी रहे हैं, और उनके द्वारा प्रवर्तित विक्रम सम्वत् हमारी एक अत्यंत मूल्यवान धरोहर है। कार्यक्रम में वीर भारत संग्रहालय की रुप रेखा पर आधारित फिल्‍म का प्रदर्शन भी हुआ। अतिथीयों द्वारा इस दौरान कोठीमहल का अवलोकन भी किया गया।   recent visitors 31

रायपुर : छत्तीसगढ़ की बुनाई, संस्कृति और जीवंत परंपराओं का प्रतीक – प्रधानमंत्री मोदी को भेंट किया गया कोसा सिल्क से बना हस्तनिर्मित शॉल

रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर जिले के ग्राम मोहभट्ठा में आयोजित आमसभा और विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में कोसा सिल्क से निर्मित एक विशेष हस्तनिर्मित शॉल भेंट किया, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध बुनाई परंपरा और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह शॉल न केवल कपड़े का एक सुंदर नमूना है, बल्कि छत्तीसगढ़ की कला, संगीत और जनजातीय अस्मिता का जीवंत दस्तावेज भी है। यह शॉल पूरी तरह हस्तनिर्मित है और इसमें राज्य की स्थानीय बुनकर परंपरा की गहराई को दर्शाया गया है। इस शॉल पर बांस से निर्मित पारंपरिक वाद्ययंत्र ‘टोड़ी’ और बस्तर के प्रसिद्ध ‘बाइसन हॉर्न माड़िया नृत्य’ को कढ़ाई के माध्यम से दर्शाया गया है। टोड़ी वाद्ययंत्र छत्तीसगढ़ की जनजातीय जीवनशैली में संगीत का अभिन्न हिस्सा है। वहीं माड़िया जनजाति का यह नृत्य शौर्य, ऊर्जा और सामूहिक एकता की अभिव्यक्ति है।  यह शॉल केवल वस्त्र नहीं, बल्कि जनजातीय गर्व, सांस्कृतिक विविधता और शिल्प कौशल की अभिव्यक्ति है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया गया यह कोसा शॉल छत्तीसगढ़ की हुनरमंद बुनकर महिलाओं, जनजातीय समुदायों, और लोक परंपराओं की महत्ता को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का एक भावनात्मक और सशक्त प्रयास है। यह भेंट भारत की विविधता में एकता, और लोककला के माध्यम से जुड़ाव का प्रतीक है। recent visitors 25

उज्जैन मेले में सीएम के आदेश पर बढ़ाई गई मेला अवधि, अब 9 अप्रैल तक गाड़ी खरीदने पर मिलेगा टैक्स में छूट

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर विक्रम व्यापार मेले की अवधि आगामी 9 अप्रैल तक बढ़ाई गई है। इसी अनुक्रम में के परिवहन सचिव मनीष सिंह ने आदेश जारी किए है। मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम के तहत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये, राज्य सरकार द्वारा परिवहन विभाग की अधिसूचना दिनांक 14 जनवरी, 2025 के माध्यम से ऐसे सभी गैर-परिवहन यानों (मोटर साइकिल, मोटर कार, निजी उपयोग के लिये ओमनी बस) तथा हल्के परिवहन यानों के वर्ष 2024-25 में उज्जैन विक्रम व्यापार मेला की मेला अवधि के दौरान विक्रय पर उनके देय जीवनकाल मोटरयान कर की दर में 50 प्रतिशत की छूट मेला अवधि 30 मार्च 2025 तक प्रदान की गई थी। अधिनियम में प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में करते हुये, राज्य सरकार ने अधिसूचना में विहित की गई शर्तों के अध्यधीन रहते हुए अधिसूचना के माध्यम से दी गई छूट की समय-सीमा 9 अप्रैल 2025 तक के लिये, वर्तमान में जारी विक्रम व्यापार मेले की मेला अवधि तक के लिए वृद्धि की गई है।   recent visitors 21

तेज हवाओं के चलते फैलती जा रही है माउंट आबू के जंगलों में लगी भीषण आग

सिरोही राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित एकमात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू के जंगलों में भीषण आग लगी हुई है. बताया जा रहा है कि माउंट सड़क मार्ग (Mount Abu Road) के छिपा बेरी के नजदीक 29 मार्च के दोपहर में आग भड़क उठी, जो धीरे-धीरे विकराल रूप लेती गई. वन विभाग और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, साथ ही फायर ब्रिगेड को भी बुलाया गया. लेकिन गहरी खाई और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण आग बुझाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. माउंट रोड के 7 घूम क्षेत्र से घना धुआं उठता हुआ देखा जा सकता है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है. आग के चलते वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति ने हालात को और भी गंभीर बना दिया है. आग बुझाने के प्रयास जारी माउंट आबू-आबूरोड मार्ग पर 7 घूम के आसपास के पूरे क्षेत्र में आग फैली हुई है. रात बढ़ने के साथ ही आग का विकराल रूप और भी भयावह हो गया है. नगर पालिका प्रशासन, फायर ब्रिगेड, आपदा राहत प्रबंधन दल, CRPF के जवान और अन्य स्थानीय संगठन आग पर काबू पाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं. हालांकि, अभी तक स्थिति नियंत्रण में नहीं आ पाई है. वन विभाग की नाकामी उजागर हर साल माउंट आबू के पहाड़ी इलाकों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग द्वारा कोई ठोस पूर्व योजना नहीं बनाई जाती. आग लगने के बाद ही विभाग सक्रिय होता है, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है. इस बार भी वही कहानी दोहराई जा रही है. आगजनी की घटनाओं से वन्य जीव-जंतुओं को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है. पिछले साल भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं, लेकिन कोई प्रभावी रोकथाम की योजना नहीं बनाई गई. वन विभाग की निष्क्रियता और प्रशासन की लापरवाही पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं. अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में भी ऐसी घटनाएं होंगी और माउंट आबू की बहुमूल्य वन संपदा खत्म होती रहेगी. recent visitors 38

रायपुर : रेल नेटवर्क से जुड़ा नया रायपुर राजधानी क्षेत्र, प्रधानमंत्री ने अभनपुर-रायपुर मेमू ट्रेन सेवा का किया शुभारंभ

रायपुर रायपुर से नया रायपुर राजधानी क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। अब यहां आवागमन के लिए मेमू ट्रेन नियमित रूप से चला करेगी। रायपुर रेल्वे स्टेशन से मंदिर हसौद होते हुए नया रायपुर सीबीडी, केन्द्री होते हुए अभनपुर और अभनपुर से रायपुर ट्रेन के जरिए आवागमन हो सकेगा। इससे मंदिर हसौद, मंत्रालय, सचिवालय, नया रायपुर, अभनपुर आवागमन में सस्ता और आसान होगा। इससे शासकीय कर्मचारियों सहित नया रायपुर के नागरिकों और विद्यार्थियों को एक नई सुविधा सुलभ हो गई है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ के मोहभट्ठा बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभनपुर-रायपुर मेमू ट्रेन सेवा का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर छत्तीसगढ़ में 2,695 करोड़ रूपए की लागत से पूरी हो चुकी चार रेल परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करने के साथ ही उन्होंने 7 रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखी। रायपुर अभनपुर मेमू ट्रेन का ठहराव मंदिर हसौद, सीबीडी, केंद्री और अभनपुर स्टेशनों पर होगा। रेल यात्री रायपुर से नवा रायपुर और अभनपुर की यात्रा कर सकेंगे, वो भी महज दस रुपये में। अभनपुर-रायपुर के बीच चलने वाली मेमू ट्रेन अत्याधुनिक थ्री-फेज़ है। बड़ी और खास बात ये है कि ये अत्याधुनिक ट्रेन ऊर्जा दक्षता, उच्च गति और बेहतर आराम के साथ यात्रियों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में भी कई रेल सेक्शनों में थ्री-फेज़ मेमू ट्रेनें चलाई जा रही हैं। हर कोच में सौंदर्यपूर्ण इंटीरियर, कुशन वाली सीटें, बड़ी खिड़कियां, स्लाइडिंग दरवाजे और मोबाइल चार्जिंग सॉकेट उपलब्ध है। जीपीएस-आधारित पीएपीआईएस के तहत डिस्प्ले स्क्रीन और लाउडस्पीकर प्रत्येक कोच में लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को स्टेशन की जानकारी मिलेगी। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली भी उपलब्ध कराई गई है। प्रत्येक ट्रेलर कोच में पर्यावरण-अनुकूल बायो-टॉयलेट्स की सुविधा है। recent visitors 33

मध्यप्रदेश में पहली बार 1000 ड्रोन के माध्यम से आकर्षक ड्रोन-शो की प्रस्तुति दी गई : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विक्रमोत्सव-2025 विक्रमोत्सव का आयोजन एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को करता है स्थापित: राज्यपाल पटेल उज्जैन में विक्रमादित्य के नाम से स्थापित हो न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश-राजस्थान में टूरिस्ट सर्किट बनाने की आवश्यकता : केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. मेघवाल राज्यपाल पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री डॉ. मेघवाल ने विक्रमोत्सव में प्रदेशव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया मध्यप्रदेश में पहली बार 1000 ड्रोन के माध्यम से आकर्षक ड्रोन-शो की प्रस्तुति दी गई प्रसिद्ध गायिका सुश्रेया घोषाल ने दी में मनमोहक प्रस्तुति सिंहस्थ-गान हुआ लांच उज्जैन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारतीय नववर्ष विक्रम सम्वत् 2082 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ अवसर पर उज्जैन में विक्रमोत्सव के प्रसंग में आयोजित कार्यक्रमों में प्रदेशवासियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी आभार ज्ञापित करता हूँ। जिन्होंने दुनिया की पहली वैदिक घड़ी और भगवान महाकाल के अद्भुत महालोक की सौगतों से महाराजा विक्रमादित्य की उज्जयिनी के गौरव और वैभव की पुनर्स्थापना की है। विक्रमोत्सव का आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं के प्रकटीकरण के लिए हमारी गौरवशाली विरासत और वर्तमान के विकास का उत्सव है। यह दिन हमारे लिए एक नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हमारे पूर्वजों के योगदान को याद करने का अवसर है। राज्यपाल पटेल रविवार को उज्जैन में विक्रमोत्सव अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री डॉ. अर्जुनराम मेघवाल भी मौजूद रहे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि नववर्ष का यह पर्व विविध स्वरूपों में मनाया जाने वाला 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को स्थापित करता है। इसे कहीं 'गुड़ी पड़वा' तो कहीं 'चैती चांद', कहीं 'युगादि' तो कहीं 'उगादि' और कहीं 'नवरोज अगदु' के अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। इसी के साथ नौ दिन आरोग्य, साधना और कायाकल्प के नवरात्र का भी आरंभ होता है। राज्यपाल ने कहा कि विक्रम सम्वत् वर्ष का प्रवर्तन भारतीय सम्राट विक्रमादित्य के द्वारा विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर, उनके राज्यभिषेक के दिन से होता है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि नव सम्वत्सर की तिथि सृष्टि निर्माण की तिथि है, जिसका निर्धारण संपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ हुआ है। वास्तव मे भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन ऋतु परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को सक्षम बनाने का समय है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि भारतीय नववर्ष प्रकृति के संरक्षण, संवर्धन और निर्माण की प्रेरणा देता है, जिसमें सृष्टि, संस्कृति और समाज का संगम है। ऋतुकाल संधि के इन दिनों में नवचेतना, नवजागृति का संदेश है। इसे मनाने की परंपरा व्यक्ति, परिवार और समाज, तीनों के स्वस्थ जीवन और समृद्धि को ध्यान में रखकर शुरू की गई। यह हम सब प्रदेशवासियों के लिये गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय नववर्ष विक्रम सम्वत् उज्जयिनी से शुरू हुआ है। सम्राट विक्रमादित्य का सारी दुनिया में न्यायप्रियता, ज्ञानशीलता, धैर्य, पराक्रम, पुरुषार्थ, और वीरता जैसी विशेषताओं के लिए स्मरण किया जाता है।  राज्यपाल ने उत्सव में विविध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रमों के साथ सम्राट विक्रमादित्य के समूचे व्यक्तित्व, कृतित्व और विशेषताओं को परिचित कराने के राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई और मंगलकामनाएं दी। उज्जैन में  न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था सम्राट विक्रमादित्य के नाम से प्रारंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन नगरी सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल की नगरी है। उज्जयिनी वह नगरी है जिसमें योगीराज श्रीकृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की तो अनेक राजा महाराजाओं ने अपने न्याय प्रिय शासन से दुनिया को न्याय की ओर मोड़ा। आज का दृश्य देख कर लग रहा है मानो आज सम्राट विक्रमादित्य स्वयं इस नगरी में पधारे हैं। हम सबके लिए यह सौभाग्य की बात है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में श्रीमहाकाल महालोक का निर्माण हुआ और भगवान महाकालेश्वर की नगरी का वैभव और बड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनका शासन काल रामराज्य की याद दिलाता है। हमारी सरकार भी निरंतर जनता की बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। विक्रमादित्य ने अपने पुरुषार्थ से अपनी प्रजा का ध्यान रखा और सदैव प्रजा की रक्षा की। उन्होंने जनता का कर्ज माफ किया। उन्होंने विक्रम संवत का प्रवर्तन करते हुए सनातन परंपरा की पुनर्स्थापना की। सम्राट विक्रमादित्य की न्याय परंपरा का लोहा आज भी माना जाता है। उनकी न्याय प्रियता हजारों साल से जानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. मेघवाल से अनुरोध किया कि भविष्य में उज्जैन में  न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था सम्राट विक्रमादित्य के नाम से प्रारंभ की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव संवत्सर पर सभी लोगों के जीवन में खुशहाली की कामना की और सभी को अपनी ओर से नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी निरंतर विकास के कार्य सरकार द्वारा किए जाएंगे और इस प्रकार के आयोजन हर्षोल्लास के साथ आयोजित किए जाएंगे। उज्जैन में राजा महाराजा काल के जैसी होटल 'सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज' होटल का लोकार्पण भी किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्यपाल पटेल की उपस्थिति में विक्रमोत्सव के कार्यक्रम से प्रदेशव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की जा रही है। प्रदेश के सभी जिलों  में प्रभारी मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय कार्यक्रम से जल गंगा संवर्धन अभियान आज से शुरू हो गया है। उज्जैन में 100 से अधिक कुआं, बावड़ी, तालाबों और अन्य जल स्त्रोतों में स्वच्छता, जीर्णोद्धार और नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आज हम सब क्षिप्रा नदी के पावन तट पर विक्रमोत्सव मना रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से सबका अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य के शासन का प्रभाव अफगानिस्तान तक था। वे राजस्थान के बीकानेर से आते हैं। उन्होंने राज्यपाल पटेल के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान और एमपी के द्वारा भविष्य में टूरिस्ट सर्किट बनाए जाने के लिए कार्य योजना बनाई जाएगी। इस टूरिस्ट सर्किट से राजा भर्तहरि और सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल से … Read more

रायपुर : मुख्यमंत्री ने ईद-उल-फितर की दी मुबारकबाद

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ईद-उल-फितर की मुबारकबाद देते हुए सभी प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और शांति की कामना की है। उन्होंने कहा कि ईद का त्यौहार इंसानियत, भाईचारे और सौहार्द्र का प्रतीक है। यह पर्व मिलजुलकर रहने, भेदभाव मिटाने और सौहार्द्र बढ़ाने का संदेश देता है।   recent visitors 24