बन गया वक्फ बिल कानून, कैसे और कब से होगा लागू, विरोध में AIMPLB ने लिखा लेटर

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी। सरकार ने नए कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया। अब नए कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी। यह बिल (अब कानून) 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में 12-12 घंटे की चर्चा के बाद पास हुआ था। नए कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब तक छह याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं। नई याचिका केरल के सुन्नी मुस्लिम संगठन केरल जमीयतुल उलेमा ने दायर की है। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 11 अप्रैल से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, सिविल राइट्स संगठन एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी अलग-अलग याचिका लगा चुके हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में हो रहे पक्षपात, दुरुपयोग और अतिक्रमण को रोकना है। इस बिल (अब कानून) को राज्यसभा में 128 सदस्यों ने समर्थन दिया था, जबकि 95 ने इसका विरोध किया। वहीं लोकसभा में यह बिल 2 अप्रैल की आधी रात पारित हुआ था। इस दौरान 288 सांसदों ने समर्थन में और 232 ने विरोध में वोट डाला था। वक्फ बिल पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने शनिवार शाम को वक्फ बिल के विरोध में दो पेज का लेटर जारी किया। AIMPLB ने कहा कि हम सभी धार्मिक, समुदाय-आधारित और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक संशोधन पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाते। वक्फ बिल पर विपक्ष के नेताओं ने क्या कहा?     राहुल गांधी: वक्फ बिल मुसलमानों पर हमला करता है और भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने की मिसाल कायम करता है। बिल पास होने के बाद RSS ने अब कैथोलिक चर्च की जमीन पर फोकस कर लिया है। RSS को अपना ध्यान ईसाइयों की ओर मोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा। संविधान ही एकमात्र ढाल है जो हमारे लोगों को ऐसे हमलों से बचाता है और इसकी रक्षा करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।     कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे: सरकार का इरादा ठीक नहीं है। वक्फ लैंड किसको देंगे यह सामने नहीं आया। व्यापारियों को देंगे…मुझे पता नहीं। अंबानी-अडाणी जैसे लोगों को खिलाएंगे। मैं गृहमंत्री से अपील करूंगा कि आप इसे वापस ले लें। इसे प्रेस्टीज ईश्यू न बनाएं। मुसलमानों के लिए ये अच्छा नहीं है। संविधान के खिलाफ है।     PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती: ऐसा नहीं होना चाहिए। यह अल्पसंख्यकों, मुसलमानों की संस्था है और इसे इस तरह से बुलडोजर करना और राज्यसभा में पारित करना, मैं समझती हूं कि यह डाका डालने के बराबर है, जो बहुत गलत है जो नहीं होना चाहिए।     NC सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी: भाजपा को मुसलमानों के लिए बोलने का कोई नैतिक या राजनीतिक अधिकार नहीं है और वक्फ विधेयक पारित करके RSS-भाजपा शासन ने अपनी मुस्लिम विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी मंशा की पुष्टि की है। आज भारत क्रूर बहुसंख्यकवाद के एक अंधेरे युग में चला गया है, जहां अल्पसंख्यक हितों को दरवाजा दिखा दिया गया। वक्फ बिल कानून, कैसे और कब से होगा लागू, विरोध में AIMPLB ने लिखा लेटर   राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वक्फ संशोधन बिल अब कानून बन गया है। सरकार ने नए वक्फ कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब इसके आगे की राह कैसी होगी ये कई मायनों में अहम है। अब वक्फ कानून कबतक लागू होगा ये सरकार पर निर्भर करता है क्योंकि कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी और यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा। मुस्लिम पर्सनल लॉ ने लिखा लेटर  ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ बिल के विरोध में दो पेज का लेटर जारी किया और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे लेकर कहा कि हम सभी धार्मिक, समुदाय-आधारित और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि संशोधन पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाते। वक्फ संशोधन बिल इस्लामी मूल्यों, धर्म और शरीयत, धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता, सांप्रदायिक सद्भाव और भारतीय संविधान के आधारभूत ढांचे पर गंभीर हमला है। कुछ राजनीतिक दलों का भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे को दिए गए समर्थन ने उनके तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मुखौटे को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। वक्फ बिल का विरोध, बात सुप्रीम कोर्ट पहुंची आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ बिल के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज कराई। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं लगाई गईं थीं, पहली बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद की और दूसरी एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी की।वहीं, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा था कि कांग्रेस हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और उनके साथ ही तमिलनाडु की डीएमके ने भी वक्फ के खिलाफ याचिका लगाने की बात कही थी। बिहार के राज्यपाल ने किया समर्थन बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने लोकसभा और राज्यसभा से पास हुए वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- वक्फ की संपत्तियां अल्लाह की मानी जाती हैं। इसका इस्तेमाल गरीबों, जरूरतमंदों और जनहित के लिए होना चाहिए। गैर मुस्लिमों का भी वक्फ की संपत्तियों में बराबर का हक है। किस-किस दल ने लगाई याचिका?     कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को चुनौती देते हुए 4 अप्रैल को शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जावेद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य भी थे।     4 अप्रैल को ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।     आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी शनिवार को वक्फ विधेयक को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट (एससी) का दरवाजा खटखटाया था।     एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स नामक एक गैर सरकारी संगठन ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट … Read more

विद्युत भार (लोड) स्वीकृत करवायें एवं जुर्माने से बचें

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इन दिनों निम्नदाब के गैर घरेलू और औद्योगिक (पॉवर) उपभोक्ताओं के परिसरों का व्यापक चैकिंग अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के दौरान उपभोक्ता परिसर में विद्युत भार (लोड) में वृद्धि के प्रकरण पकड़े जा रहे हैं। कंपनी द्वारा विद्युत भार की वृद्धि स्वेच्छा से कराने के लिए उपभोक्ताओं को जागरूक करने का भी अभियान इन दिनों चलाया जा रहा है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे कंपनी के पोर्टल पर स्वेच्छिक ऑनलाइन आवेदन कर भार वृद्धि करा लें। विद्युत भार क्या है  बिजली कंपनी में नवीन कनेक्शन के लिए जब कोई व्यक्ति अधिकृत आवेदन देता है तो उसके परिसर में भार (लोड) की गणना कर भार निर्धारित किया जाता है। इस प्रक्रिया में नया कनेक्शन देने के लिए बिजली कर्मचारी परिसर का लोड सर्वे करते हैं। यह भार (लोड) विद्युत प्रणाली में जोड़ा जाता है। इसलिए इसे संयोजित भार या कनेक्टेड लोड कहा जाता है। भार की सही गणना  उपभोक्ता को बिजली कंपनी के साथ सहयोग कर भार की सही गणना कराना चाहिए ताकि विद्युत प्रणाली सुचारू रूप से संचालित की जा सके। उपभोक्ता द्वारा परिसर में कनेक्शन लेने के कुछ अन्तराल बाद कुछ नये विद्युत उपकरणों को स्थापित कर भार बढ़ा लिया जाता है। यह बढ़ा भार बिजली कंपनी के कार्यालय में यदि स्वीकृत नहीं कराया जाता है तो चैकिंग के दौरान भार वृद्धि का प्रकरण बन जाता है और उपभोक्ता को जुर्माना भरना पड़ता है। चैकिंग में पकड़े जाने पर जुर्माना  यदि उपभोक्ता के परिसर में भार वृद्धि का प्रकरण मिलता है तो ऐसे उपभोक्ताओं पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। बढ़े हुए भार की अनुपातिक खपत पर दो गुनी दर से शुल्क वसूली का प्रावधान है। साथ ही विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126 के अंतर्गत भी चैकिंग में अतिरिक्त भार पाए जाने पर ऐसे अतिरिक्त भार को संयोजित करने की दिनांक से बढ़े हुए भार की अनुपातिक खपत पर दोगुनी दर से पेनाल्टी लगाने का प्रावधान है। विद्युत भार वृद्धि : क्या करें मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी उपभोक्ताओं से आग्रह करती है कि वे बिजली कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल saralsanyojan.mpcz.in:8888/home पर ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करें। ऑनलाइन आवेदन में विद्युत उपकरणों एवं उनके भार की जानकारी दिया जाना आवश्यक है। उपभोक्ता द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने पर एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करने पर कंपनी द्वारा आगे भार स्वीकृत कर दिया जाता है। उपभोक्ता को चाहिए कि वे लाईसेंसी ठेकेदार से गणना करा कर यदि आनलाइन भार वृद्घि /कमी प्रस्तुत करेंगे तो उन्हें अनावश्यक परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने सभी सम्माननीय उपभोक्ताओं से अपील करती है कि वे आनलाइन सुविधा का लाभ लेकर अपने परिसर के वास्तविक भार के अनुसार अपना संयोजित भार स्वीकृत करवायें।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 35

नगर पालिका मंडला में आसपास के गांवों को शहर में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी

मंडला  अब मंडला नगर पालिका की सीमा में नया विस्तार होने वाला है, जिससे शहर की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। दरअसल नगर पालिका मंडला में आसपास के लगे गांवों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चिन्हित ग्रामों को मध्यप्रदेश के राजपत्र में प्रकाशन के लिए पंचायत इंस्पेक्टर या ग्राम सचिव से प्रस्ताव और विस्तृत जानकारी मांगी गई है। यदि सब कुछ योजना के अनुरूप चलता है, तो जल्द ही 11 गांवों को नगर पालिका मंडला में सम्मिलित कर लिया जाएगा। 24 की जगह होंगे 33 वार्ड जानकारी के अनुसार नगर पालिका की सीमा के विस्तार के लिए नगरीय क्षेत्र से लगी हुई 11 ग्राम पंचायतों के गांवों को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में मंडला नगर पालिका में कुल 24 वार्ड हैं, लेकिन नए परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 33 हो जाएगी। नगर पालिका की वर्तमान आबादी 50 हजार के ऊपर है, जो बढ़कर एक लाख के करीब हो जाएगी। नए परिसीमन में 11 ग्राम पंचायतों के राजस्व गांवों की 40 हजार से अधिक की आबादी को जोड़ा जाएगा। पूर्व में हुआ था विरोध मंडला नगर के पास बसे हुए गांवों को नगर पालिका में शामिल करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उस समय भारी विरोध हुआ था। बावजूद इसके अब फिर से 11 ग्राम पंचायतों के राजस्व गांवों को नगर पालिका में सम्मिलित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परिसीमन का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और अब वार्ड विस्तार के बाद नगर पालिका में कुल 33 वार्ड हो जाएंगे। बताया गया कि पिछले वर्ष इस सीमा विस्तार की प्रक्रिया को लेकर कुछ पंचायतों की ओर से विरोध हुआ था, जिसके चलते कार्य योजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही थी। विकास को मिलेगा बल नगर पालिका राजस्व निरीक्षक के अनुसार, 2011 की जनगणना के अनुसार मंडला की जनसंख्या लगभग 75 हजार थी, जो पिछले तीन वर्षों में एक लाख के करीब पहुंच गई है। जब नए गांवों को नगर पालिका में जोड़ा जाएगा तो यह संख्या एक लाख से अधिक हो जाएगी, जिससे इस नगरीय निकाय को अधिक फंडिंग प्राप्त होगी। ज्यादा बजट मिलने से शहर का विकास और अधिक व्यवस्थित और तीव्र गति से होगा। साथ ही, अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठान और छोटे-बड़े उद्योग स्थापित होंगे, जिससे नगर पालिका का राजस्व भी बढ़ेगा। ये गांव होंगे शामिल जनगणना 2011 के अनुसार जिन ग्राम पंचायतों के गांवों को नगर पालिका में शामिल करने की योजना है, उनमें बिझिंया, कटरा, देवदरा, पौंडी महाराजपुर, केहरपुर के मोहनटोला, माली मोहगांव, पुरवा, सकवाह, बिनैका, बड़ी खैरी शामिल हैं। इन सभी गांवों की आबादी तीन वर्ष पहले 36,469 थी, जो अब 40 हजार के पार पहुंच गई है। जब यह सभी ग्रामीण नगर पालिका मंडला से जुड़ जाएंगे, तो शहर की आबादी के साथ उसकी पहचान और आवश्यकता भी बदल जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए कार्य तेज कर दिया गया है। शहर से सटे गांवों को अब मिलेंगी सुविधाएं जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों को शहरी क्षेत्र में शामिल किए जाने से उनका विकास अधिक तेज गति से हो सकेगा। जहां अभी सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वहां नगर पालिका क्षेत्र में आने के बाद स्ट्रीट लाइट्स, नालियां और सौंदर्यीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। ग्रामों के विकास का रोड मैप तैयार किया जाएगा और प्लानिंग के आधार पर कार्य किया जाएगा। वर्तमान में इन ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की भारी समस्या है और सड़कों की हालत भी दयनीय है। नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। चुनावों ने डाली थी बाधा विगत वर्ष 2021 में ही नए परिसीमन के तहत जिला मुख्यालय से लगी 11 ग्राम पंचायतों को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। यदि यह कार्य समय पर पूर्ण हो जाता, तो मंडला नगर पालिका के 24 वार्ड बढ़कर 33 हो जाते और आबादी एक लाख से ऊपर हो जाती। लेकिन कुछ अटकलों और विवादों के चलते यह योजना पूरी नहीं हो सकी। वर्ष 2022 में जनवरी माह में पंचायत चुनावों की घोषणा और आचार संहिता लागू हो जाने के कारण परिसीमन का कार्य रोक दिया गया था। अब एक बार फिर से इस प्रक्रिया को लेकर उम्मीद जताई जा रही है। चारों दिशाओं में फैलेंगी नपा की सीमाएं नए परिसीमन के अनुसार नगर पालिका की सीमा अब चारों दिशाओं में विस्तृत होगी। पूर्व की दिशा में बिनैका, बड़ी खैरी, पुरवा, सकवाह और रामबाग जैसे गांव जुड़ेंगे। पश्चिम में माली मोहगांव, उत्तर में देवदरा, कटरा, बिझिंया और दक्षिण की दिशा में पौंडी महाराजपुर, मोहनटोला जैसे गांव नगर पालिका क्षेत्र का हिस्सा बनेंगे। इस विस्तार से शहर की सीमा का आकार बड़ा होगा और अधिक क्षेत्र में नगरीय सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा। प्रशासन तैयार नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) गजानन नाफड़े ने बताया कि “नगर पालिका क्षेत्र के परिसीमन की तैयारी पूरी कर ली गई है। प्रस्ताव भोपाल भेजा जाएगा। वहां से जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे, उस पर तत्काल कार्य किया जाएगा। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 39

इंदौर देवी अहिल्याबाई एयरपोर्ट पर स्वदेशी रूप से तैयार की गई ‘फ्रिक्शन रनवे टेस्टिंग मशीन’ का इस्तेमाल किया गया

इंदौर इंदौर के देवी अहिल्याबाई होल्कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए पहली बार देश में पूरी तरह से स्वदेशी रूप से तैयार की गई 'फ्रिक्शन रनवे टेस्टिंग मशीन' का इस्तेमाल किया गया। इस टेस्ट में रनवे को एयरक्राफ्ट की सुरक्षित और स्मूद लैंडिंग के लिए उपयुक्त पाया गया। विशेषज्ञों की टीम ने माना कि भारी-भरकम विमानों के संचालन के बावजूद वर्तमान में कोई खतरा नहीं है। यह मशीन रनवे पर दौड़ते हुए विमानों की लैंडिंग के दौरान होने वाले घर्षण की जांच करती है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा यह परीक्षण शनिवार को इंदौर एयरपोर्ट पर किया गया। देश में पहली बार बनी यह मशीन इंदौर एयरपोर्ट प्रबंधन ने बताया कि इस 'एयरपोर्ट सरफेस फ्रिक्शन टेस्टर' (ASFT) को पहली बार भारत में तैयार किया गया है। इससे पहले यह मशीन विदेशों से मंगाई जाती थी। इस मशीन को एक कार पर इंस्टॉल किया जाता है। इसमें एक विशेष पहिया रनवे की सतह को स्पर्श करता है। कार के दौड़ने पर यह पहिया रनवे पर उपलब्ध घर्षण का डेटा मशीन तक भेजता है। अक्सर विमानों के तेजी से उतरने पर उनके टायरों का रबर रनवे पर चिपक जाता है, जिससे रनवे की घर्षण क्षमता कम हो जाती है और फिसलन का खतरा बढ़ जाता है। यह मशीन इन सभी आंकड़ों को रिकॉर्ड करती है और उसी के आधार पर रनवे के सुधार की आवश्यकता तय की जाती है। यह टेस्ट क्यों जरूरी है? एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, जब विमान लैंड करता है, तो सबसे पहले उसके टायर रनवे से टकराते हैं। रनवे की सतह सीमेंटेड होती है और इस पर कारपेट की तरह लेयर बिछाई जाती है ताकि टायर खराब न हों। यदि यह सतह खराब हो जाए तो लैंडिंग के समय झटका महसूस हो सकता है या टायर फटने की घटनाएं हो सकती हैं। टेस्ट के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि रनवे पर किसी तरह की कोई परेशानी न हो। यदि कोई दिक्कत सामने आती है, तो सुधार कार्य किया जाता है क्योंकि यह विमानों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। 25 करोड़ रुपए की लागत से रनवे मरम्मत का कार्य जारी इंदौर एयरपोर्ट पर वर्तमान में 25 करोड़ रुपए की लागत से रनवे की मरम्मत का कार्य चल रहा है। इसके लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सितंबर में टेंडर जारी किए थे और नवंबर में चंद्रपुर की श्रीसाईं कंस्ट्रक्शन कंपनी को यह कार्य सौंपा गया। इस कार्य के अंतर्गत रनवे की पुरानी डामर परत को हटाकर लगभग 8 इंच मोटी नई परत बिछाई जा रही है। यह कार्य प्रतिदिन रात के समय किया जा रहा है, जिसके चलते रात की उड़ानों का संचालन नहीं हो रहा। अथॉरिटी द्वारा 1 अप्रैल से 31 अक्टूबर तक रात 10:30 बजे से सुबह 6:30 बजे तक रनवे क्लोजर का आदेश जारी किया गया है। बड़े विमानों की लैंडिंग अब आसान इंदौर एयरपोर्ट पर अब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नए बोइंग 777 जैसे बड़े विमान आसानी से उतर सकते हैं। साल 2022 में रनवे के टर्नपैड की चौड़ाई बढ़ाकर इसे संभव बनाया गया। दरअसल, 31 अगस्त 2021 को पीएम का विमान प्रैक्टिस फ्लाइट के तौर पर इंदौर आया था, लेकिन रनवे पर टर्नपैड की कम चौड़ाई के कारण बिना उतरे लौट गया था। इसके बाद टर्नपैड की चौड़ाई चार मीटर तक बढ़ाई गई, जिससे अब बोइंग 777 विमान आसानी से उतर सकते हैं। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 22

मध्यप्रदेश में शासकीय वाहनों को 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का कार्यक्रम बनाया

 भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को लेकर बहुत गंभीर है इसलिए शासन ने 750 करोड़ रुपये का प्रावधान कर मुख्यमंत्री नगरीय विकास योजना बनाई है इस पंचवर्षीय योजना में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के प्रयास किये जायेंगे साथ ही प्रदेश के पांच शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश के नगरीय क्षेत्र में हरित स्थान विकास और सौन्दर्यपरक पर्यावरण के लिये मुख्यमंत्री नगर विकास योजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया है। पांच वर्ष की इस योजना में वर्ष 2028-29 तक के लिये 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना राज्य सरकार द्वारा अपने वित्तीय संसाधनों से संचालित करेगी। प्रदेश में विकसित होंगे नगर वन योजना के मुताबिक विभाग द्वारा प्रत्येक नगर वन के विकास के लिये अधिकतम 2 करोड़ 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। योजना में न्यूनतम क्षेत्रफल प्रति एकड़ 10 लाख रुपये नगर वन के सृजन के लिये नगरीय निकायों को अनुदान स्वरूप दिये जाएंगे। योजना के संबंध में नगरीय निकायों को निर्धारित प्रावधान के अनुसार प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिये गये है। मुख्यमंत्री जन सहभागिता निर्माण योजना का मिलेगा लाभ नगरीय क्षेत्रों में जन-भागीदारी से नागरिकों की सुविधा के लिये अद्योसंरचना विकास के लिये “मुख्यमंत्री जन-सहभागिता निर्माण’’ योजना चलाने का भी निर्णय लिया है। योजना में 150 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से 5 वर्षों के लिये 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना में प्रतिवर्ष नगरपालिक निगमों के लिये 5 करोड़ रुपये, नगरपालिकाओं को एक करोड़ रुपये और नगर परिषदों को 25 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। जन-भागीदारी एवं राज्य शासन की आर्थिक सहायता का अनुपात समान रूप से 50-50 प्रतिशत रहेगा। योजना में नगरीय क्षेत्र के मोहल्लों में सीमेंट- कांक्रिट निर्माण, सीवरेज की उचित व्यवस्था के साथ कचरे के निपटान की उचित व्यवस्था को वरीयता दी जाएगी। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2028-29 तक किया जाएगा। सरकारी वाहन इलेक्ट्रिक वाहन में बदलेंगे प्रदेश के पर्यावरण को शुद्ध रखने की दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक प्रोत्साहन देने की योजना शासन ने बनाई है योजना के तहत नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शासकीय वाहनों को 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का कार्यक्रम बनाया है। इसी क्रम में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। हर 20 किलोमीटर पर होगा चार्जिंग स्टेशन योजना के तहत प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन के लिये हर 20 कि.मी. पर चार्जिंग स्टेशन और हाई-वे पर 100 कि.मी. पर फास्ट चार्जिंग सुविधा स्थापित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। मध्य प्रदेश की ईवी नीति में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन खोलने पर सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। प्रदेश में चलेंगी 552 शहरी बस इसके अलावा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजनांतर्गत 6 शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन में 552 शहरी बसों के संचालन पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। केन्द्र सरकार के शहरी कार्य मंत्रालय ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर के बस डिपो, अद्योसंरचना के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 26

खुलासा : मध्य प्रदेश में9,000 फिजियोथेरेपिस्ट में से केवल 40 क्लीनिक सरकार के स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकृत

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य में 9,000 से ज़्यादा फिजियोथेरेपिस्ट काम कर रहे हैं, लेकिन सरकारी हेल्थ पोर्टल पर सिर्फ 40 फिजियोथेरेपी क्लीनिक ही रजिस्टर्ड हैं। यह जानकारी 26 मार्च तक की है। इतने कम क्लीनिकों के रजिस्ट्रेशन से अवैध और बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों पर शक गहरा गया है। इसलिए इनकी जांच शुरू हो गई है। सरकार अब ऐसे क्लीनिकों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। राज्य के हेल्थ कमिश्नर तरुण राठी ने सभी जिलों के CMHO को एक आदेश दिया है और कहा है कि अवैध फिजियोथेरेपी क्लीनिकों को पहचाना जाए और उन्हें बंद किया जाए। साथ ही उन्होंने CMHO को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जो क्लीनिक सही हैं, वे सरकार के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। यह कार्रवाई विधानसभा सत्र में उठे सवालों के बाद की जा रही है। सवालों में बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई थी। यह राज्य के नर्सिंग होम एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का उल्लंघन है। इस एक्ट के अनुसार, सभी मेडिकल सर्विस देने वालों का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और आसान बनाए सरकार MP फिजियोथेरेपिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील पांडे ने कहा कि अवैध फिजियोथेरेपी क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन सरकार को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए। साथ ही फिजियोथेरेपिस्ट को MP एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल में तुरंत रजिस्टर करना चाहिए। वादे पूरे नहीं करने का भी आरोप पहले फिजियोथेरेपिस्ट पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराते थे। एक साल पहले तक इस काउंसिल में 3,028 फिजियोथेरेपिस्ट रजिस्टर्ड थे। जांच में यह भी पता चला है कि फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं हुए हैं। पहले घोषणा की गई थी कि सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे। साथ ही सरकारी अस्पतालों में फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति भी बढ़ाई जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सरकार की कार्रवाई से जागी उम्मीद इस पूरे मामले से कई सवाल उठ रहे हैं। क्या सरकार अवैध क्लीनिकों पर लगाम लगाने में सफल होगी? क्या फिजियोथेरेपिस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान हो पाएगी? और क्या फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं को लेकर किए गए वादे पूरे होंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिल पाएंगे, लेकिन फिलहाल, सरकार की कार्रवाई से फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में सुधार की उम्मीद जगी है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 27

भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा

नई दिल्ली देश के विकास की दिशा को ध्यान में रखते हुए, जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने बिना किसी संकोच के कहा: 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए , भारत को 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था में बदलना होगा। यह सिर्फ़ एक छलांग नहीं है – यह एक पीढ़ीगत धुरी है, और उन्होंने तर्क दिया कि फिनटेक क्षेत्र को इसे आगे बढ़ाने वाले इंजनों में से एक होना चाहिए। कांत ने कहा, "भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग नौ गुना वृद्धि होनी चाहिए, इसकी प्रति व्यक्ति आय में लगभग आठ गुना वृद्धि होनी चाहिए, और इसके विनिर्माण में लगभग 16 गुना वृद्धि होनी चाहिए।" उन्होंने व्यापक आर्थिक लक्ष्यों और क्षेत्र-विशिष्ट उत्प्रेरकों के बीच सीधी रेखा खींची। उनके लिए, फिनटेक केवल एक और उच्च-विकास वाला वर्टिकल नहीं है; यह समावेशी, व्यापक-आधारित विकास को प्राप्त करने का आधार है। "यह बहुत महत्वपूर्ण है कि फिनटेक क्षेत्र बढ़ता रहे और विस्तार करता रहे ताकि हम समाज में सभी स्तरों पर ऋण प्रदान करने में सक्षम हों।" आंकड़े उनके आत्मविश्वास को पुष्ट करते हैं। भारत अब वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा फिनटेक हब है, न केवल मात्रा के मामले में बल्कि मूल्य के मामले में भी। इस क्षेत्र ने 2023 में 25 बिलियन डॉलर का राजस्व दर्ज किया – जो कि साल-दर-साल (YoY) 56 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। 2030 के लिए अनुमान और भी चौंकाने वाले हैं: 150 फिनटेक यूनिकॉर्न जिनका संयुक्त मूल्यांकन 500 बिलियन डॉलर है और वार्षिक राजस्व 190 बिलियन डॉलर तक पहुँच रहा है। कांत इस विस्फोट का श्रेय तकनीक-प्रेमी युवा जनसांख्यिकी, पूंजी तक बेहतर पहुंच, सरकारी नीतियों को सक्षम बनाने और मोबाइल और इंटरनेट बुनियादी ढांचे में व्यापक प्रगति के शक्तिशाली मिश्रण को देते हैं। लेकिन उन्होंने एक चेतावनी भी जारी की- इस वृद्धि को जिम्मेदारी में बांधा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "नवाचार फिनटेक की जीवनरेखा है, और जब हम नवाचार करते हैं, तो हमें जिम्मेदारी से ऐसा करना चाहिए।" इसका मतलब है कि ऐसे उत्पाद डिजाइन करना जो कमजोर आबादी की सेवा करें, न कि उन्हें किनारे करें। इसका मतलब है साइबर सुरक्षा खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहना और यह सुनिश्चित करना कि UPI, डिजिटल वॉलेट, ब्लॉकचेन के माध्यम से मुख्यधारा का अपनाना, केवल नवीनता पर नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित हो। स्व-नियमन केंद्रीय विषय था। राज्य द्वारा हर कदम तय करने की प्रतीक्षा करने के बजाय, कांत भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम करने वाले स्व-नियामक संगठनों (एसआरओ) में फिनटेक शासन का भविष्य देखते हैं। "ये संस्थाएँ आरबीआई की निगरानी में काम करती हैं। वे उद्योग मानकों को निर्धारित करने, अनुपालन लागू करने और नियामकों और फिनटेक कंपनियों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।" वर्ष 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने की राह की चुनौतियाँ:     गरीबी और असमानता:         वर्ष 1947 में स्वतंत्रता से लेकर वर्ष 1991 तक गरीबी कम करने के उद्देश्य से समाजवादी नीतियों के क्रियान्वयन के बावजूद भारत की गरीबी दर 50% के आसपास बनी रही।         हालाँकि, उदारीकरण के बाद  (1991-2011) गरीबी लगभग 20% तक कम हो गई, जहाँ 350 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आ गए।     मध्यम-आय जाल:         विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार, मध्यम-आय जाल (Middle-Income Trap) से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें एक मध्यम-आय देश बढ़ती लागत और घटती प्रतिस्पर्द्धा के कारण उच्च-आय अर्थव्यवस्था में परिवर्तित होने में विफल रहता है।         भारत के लिये भी मध्यम-आय जाल में फँसने का खतरा है, जहाँ देश मध्यम-आय से उच्च-आय की स्थिति में पहुँचने में विफल हो जाते हैं।         वर्ष 1960 में 101 मध्यम-आय अर्थव्यवस्थाओं में से केवल 23 ही वर्ष 2018 तक उच्च-आय अर्थव्यवस्था बन सके।         ऐसी आशंकाएँ व्यक्त की जाती हैं कि विकसित अर्थव्यवस्था की राह पर आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था मध्यम-आय जाल में फँस सकती है। माना जाता है कि 5,000-6,000 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति आय तक पहुँचने के बाद यह अधिक तेज़ी से आगे नहीं बढ़ पाएगी।     वृद्ध होती आबादी:         भारत की आबादी, जो वर्तमान में लगभग 1.4 बिलियन है, वर्ष 2048 तक 1.64 बिलियन के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचने के बाद बाद वर्ष 2100 तक घटकर 1.45 बिलियन रह जाएगी।         इसके परिणामस्वरूप, भारत को वृद्ध होती आबादी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ते खर्च, बढ़ती पेंशन देनदारियाँ और संभावित श्रम की कमी शामिल हैं।     गतिहीन कृषि:         कृषि क्षेत्र भारत की लगभग 46% आबादी को रोज़गार प्रदान करता है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 16.5% है।         हालाँकि, अप्रभावी भूमि सुधारों, अवैज्ञानिक अभ्यासों, संस्थागत ऋण प्रवाह की कमी और जलवायु अनिश्चितताओं के कारण यह गतिहीन एवं निम्न उत्पादक क्षेत्र बना हुआ है।     विनिर्माण क्षेत्र का पिछड़ापन:         आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र भारत के केवल 11.4% कार्यबल को रोज़गार प्रदान करता है।         इसके अलावा, विनिर्माण क्षेत्र को उच्च इनपुट लागत और अस्थिर मांग के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।     अकुशल लॉजिस्टिक्स:         आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 से पता चलता है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद के 14-18% के बीच है, जो वैश्विक बेंचमार्क 8% से अधिक है। इसके साथ ही, लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (LPI) 2023 में भारत 38वें स्थान पर है।     रोज़गारहीनता और प्रच्छन्न बेरोज़गारी:         आईटी सेवाओं में उछाल से प्रेरित भारत के उच्च विकास वर्षों (2000-10) के बावजूद 46% श्रम शक्ति अभी भी कृषि में संलग्न है, जो सकल घरेलू उत्पाद में केवल 18% का योगदान देती है। इसकी उत्पादकता कम है और यह अल्प-रोज़गार (underemployment) की समस्या से भी ग्रस्त है।         इसके अलावा, CMIE के अनुसार भारत में बेरोज़गारी दर मई 2024 में 7% से तेज़ी से बढ़कर जून 2024 में 9.2% हो गई।     श्रम बल गतिशीलता:         महिला श्रम बल भागीदारी मात्र 37% है, हालाँकि वर्ष 2019 में 26% की तुलना में इसमें सुधार हुआ है। फिर भी, यह स्तर अन्य तेज़ी से विकास करते देशों की तुलना में कम है।     वैश्विक आर्थिक मंदी:         वैश्विक आर्थिक मंदी, वस्तुओं की अस्थिर कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और कठिन होती … Read more