Friday, July 10, 2026 8:24 am

सोने के दाम में आ रही बड़ी गिरावट: इस महीने पहुंचेगा 56,000 रुपये तोला, एक्सपर्ट्स की भविष्यवाणी

मुंबई सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, और निवेशक जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या सोने का भाव 56,000 रुपये तक गिर सकता है। हालिया घटनाओं और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कई Gold Market एक्सपर्ट्स इस संभावना को लेकर अपने विचार साझा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ महीनों में सोने के दामों में और गिरावट आने की संभावना है, और अगर ये ट्रेंड जारी रहता है, तो सोने का भाव 56,000 रुपये तक पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण अमेरिका के tariff chart, वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, और डॉलर की मजबूत स्थिति को माना जा रहा है। इसके अलावा, मांग में कमी और अधिक खनन के कारण भी सोने के दामों में गिरावट आ सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ चार्ट ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला किया, जिसके बाद इन देशों ने भी जवाबी कार्रवाई में टैरिफ बढ़ा दिए। इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ा, और कहीं न कहीं हर देश में महंगाई बढ़ने की आंशका जताई जा रही है। इसी बीच, सोने की कीमतों को लेकर एक नया अनुमान सामने आया है। गोल्ड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के टैरिफ की वजह से अगले महीने सोने की कीमतों में भारी गिरावट आने वाली है। कब तक आएगी सोने में गिरावट? रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने के दाम 40% तक गिर सकते हैं, और ये गिरावट अगले महीने तक महसूस हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सोने का दाम 90,000 रुपये से घटकर महज 50-55 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। क्या है सोने के दाम गिरने की वजह? सोने के दाम में यह गिरावट अमेरिका के टैरिफ चार्ट, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण हो सकती है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव और सोने की मांग में कमी भी इसकी वजह हो सकती है। अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए बेहतरीन हो सकता है। मगर, क्या यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी, या यह महज एक अस्थायी बदलाव है? क्यों गिरेगा सोने का भाव? अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थितियां: वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव सोने के दाम को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती: डॉलर के मजबूत होने से सोने के दाम में गिरावट हो सकती है, क्योंकि डॉलर की तुलना में सोने की मांग घट सकती है। सार्वभौमिक खनन और आपूर्ति: सोने के ज्यादा खनन और कम डिमांड के चलते भी इसकी कीमतों में कमी हो सकती है। निवेशकों के लिए क्या है सही समय? अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अच्छा हो सकता है, खासकर अगर सोने के दाम में गिरावट आती है। लेकिन, जैसा कि एक्सपर्ट्स का कहना है, सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना है, तो आपको सावधानी से काम करना चाहिए और बाजार की स्थिति को ध्यान से देखना चाहिए।   recent visitors 47

सुशासन तिहार को लेकर लोगों में भारी उत्साह, कलेक्टर ने स्वयं आवेदन लेकर दी पावती

रायपुर राज्य शासन के निर्देशानुसार आज बलौदाबाजार जिले में सुशासन तिहार 2025 के प्रथम चरण के तहत आवेदन लेने का शुभारंभ आज जिले के  ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में हुआ। आवेदन प्राप्त करने के स्थल को रंगोली  एवं बैनर से आकर्षक ढंग से सजाया गया तथा प्रथम आवेदक का तिलक लगाकर व गुलदस्ता देकर स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया।  कलेक्टर दीपक सोनी ने संयुक्त जिला कार्यलय में आवेदन प्राप्ति स्थल  पर स्वयं आवेदको से आवेदन प्राप्त किया और पंजी में आवश्यक प्रविष्टि कर पावती दिया।उन्होंने इस दौरान सुशासन तिहार में सबकी सहभागिता हेतु लोगों को प्रोत्साहित किया। जिले में सुशासन तिहार को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला।  सुशासन तिहार के उद्देश्य को जन- जन तक पहुंचने के लिए सायकिल रैली, नारा लेखन  सहित अन्य जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। विकासखंड कसडोल के ग्राम पंचायत गिरौद में एसडीएम की उपस्थिति में प्रथम आवेदक श्रीमती प्रेमलता पटेल का तिलक लगाकर व गुलदस्ता भेंट कर अभिनन्दन किया गया। प्रेमलता के आवेदन को पंजी में प्रविष्टि उपरांत पावती दी गई और आवेदन को समाधान पेटी में डाला गया। प्रेमलता पटेल ने बताया कि सुशासन तिहार राज्य शासन की बहुत अच्छी पहल है। इसके माध्यम से लोगों की समस्याओं और मांग से सम्बंधित आवेदनों का उपयुक्त निराकरण तय समय पर होगा। उन्होंने बताया कि  एक सामाजिक भवन मांग के लिए आवेदन दिया है।    नगर पालिका परिषद बलौदाबाजार में एसडीएम की उपस्थिति में वार्ड क्रमांक 3 में प्रथम आवेदक सूरज पटेल का गुलाब फूल देकर स्वागत किया गया। विकासखंड भाटापारा के ग्राम पंचायत देवरी में मंडल अध्यक्ष की उपस्थिति में प्रथम आवेदक का स्वागत किया गया।  इसीतरह सभी नगरीय निकायों के वार्डो और ग्राम पंचायतों में  सुशासन तिहार का आगाज हुआ। recent visitors 38

सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्पेशल कैजुअल लीव का नियम बनाया, अपना अंगदान करने वाले को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारी अब 42 दिन की अतिरिक्त छुट्टी (स्पेशल कैजुअल लीव) ले सकते हैं। हालांकि इन छुट्टियों के लिए शर्त जोड़ी गई है। ये छुट्टियां उन्हीं कर्मचारियों को मिलेंगी जो अपना अंगदान करेंगे। इस दौरान कर्मचारियों की सैलरी में कुछ भी कटौती नहीं होगी। यानी उन्हें छुट्टियां भी मिलेंगी और उतने दिनों की सैलरी भी। 42 दिन की छुट्टियों से जुड़े इन नियमों के बारे में सरकार ने संसद में भी बताया है। हाल ही में लोकसभा में एक सवाल के जवाब में इन छुट्टियों के बारे में जानकारी दी गई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्पेशल कैजुअल लीव का नियम बनाया है। यह नियम सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने अपने कर्मचारियों को अंगदान करने पर अधिकतम 42 दिनों की स्पेशल कैजुअल लीव देने का फैसला किया है। 2023 में आया था आदेश इन छुट्टियों के बारे में साल 2023 में आदेश आया था। यह आदेश पर्सनेल मिनिस्ट्री (Personnel Ministry) ने जारी किया था। इस आदेश के मुताबिक अंगदान करने वाले कर्मचारी को 42 दिनों तक की छुट्टी मिल सकती है। हालांकि यह छुट्टी इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि ऑपरेशन कैसा था। किसी भी स्थिति में 42 दिन से ज्यादा की छुट्टी नहीं मिलेगी। फिर चाहे ऑपरेशन छोटा हो या बड़ा। वहीं इन छुट्टियों के लिए डॉक्टर की मंजूरी जरूरी है। यानी बिना डॉक्टर की मंजूरी के छुट्टी नहीं मिलेगी। ये छुट्टियां अस्पताल में भर्ती होने वाले दिन से शुरू होंगी। बढ़ाया जा सकता है समय सरकारी नियमानुसार छुट्टियों के समय में इजाफा किया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में 42 दिन से ज्यादा की छुट्टियां नहीं मिलेंगी। अगर किसी सर्जरी के लिए डॉक्टर 7 दिन की छुट्टी की मंजूरी देता और उसे बाद में लगता है कि मरीज को और छुट्टियों की जरूरत है तो वह छुट्टियों के दिनों में इजाफा कर सकता है। हालांकि इसके लिए डॉक्टर को लिखित में देना होगा। वहीं नियमानुसार छुट्टियों उस दिन से लागू होंगी जिस दिन अंगदान करने वाला शख्स अस्पताल में भर्ती होगा। लेकिन यहां भी कुछ राहत दी गई है। अगर डॉक्टर को लगता है कि अंगदान के लिए उस शख्स की सर्जरी से पहले उसे अस्पताल में कुछ दिन भर्ती करना जरूरी है तो ऐसे मामले में छुट्टियां सर्जरी से अधिकतम एक सप्ताह पहले से उपलब्ध हो सकती हैं। recent visitors 35

राज्य का पूर्ण विकास नागरिकों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक उन्नति तथा प्रसन्नता से ही संभव

भोपाल नागरिकों की खुशहाली एवं बेहतर जीवन के लिए आंतरिक तथा बाह्य सकुशलता आवश्यक है। राज्य का पूर्ण विकास नागरिकों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक उन्नति तथा प्रसन्नता से ही संभव है। नागरिकों के लिये इस प्रकार वातावरण तैयार करना होगा जो उनके लिए आनंद का कारक बनें। विकास का मापदण्ड भौतिक सुविधाओं पर आधारित होने के साथ-साथ नागरिकों के आनंद के आधार पर भी होना चाहिए। इस उदद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा आनंद संस्थान का गठन अगस्त 2016 में किया गया था। यह संस्थान, मध्यप्रदेश शासन के आनंद विभाग अन्तर्गत संचालित है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य आनंद संस्थान आशीष कुमार ने बताया कि अपनी स्थापना के समय से ही राज्य आनंद संस्थान, प्रदेश के नागरिकों की खुशहाली और मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करने के लिए सतत कार्यरत है। संस्थान का यह दृढ़ विश्वास है कि सुख बाहरी प्रभाव नहीं, बल्कि एक आंतरिक अनुभूति और एक स्वाभाविक अवस्था है, जिसे सही दृष्टिकोण, जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इसी दिशा में कार्य करते हुए, संस्थान अपने विभिन्न कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और आनंदम गतिविधियों से नागरिकों में सकारात्मकता और आत्मिक आनंद की भावना विकसित करने का प्रयास कर रहा है। राज्य आनंद संस्थान द्वारा विगत माह भोपाल में एक नेशनल सेमिनार ऑन हैप्पीनेस का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन चर्चा करना था। इस सेमिनार में देश के प्रमुख मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों और नीति निर्माताओं को आमंत्रित किया गया, ताकि वे अपने अनुभवों और शोध निष्कर्षों को साझा कर सकें। आयोजन ने आनंद के विविध आयामों एवं तत्वों पर केंद्रित विभिन्न विषयों पर चर्चा करने और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक मंच प्रदान किया। सेमिनार में आतंरिक आनंद की अनुभूति, आनंद और स्वास्थ्य के बीच संबंध, खुशहाल परिवार एवं कार्य स्थल, विद्यार्थियों और युवाओं में मानवीय मूल्य को बढ़ावा देने की रणनीतियों और भारतीय परंपरा में आनंद के स्त्रोतों पर चर्चा की गई।   recent visitors 35

रायपुर : राज्य शासन के सहयोग से गौ पालक राजाराम का जीवन हुआ खुशहाल

रायपुर जरूरतमंद को समय पर मिली एक छोटी सी मदद भी उसकी राह आसान बना देती है। जिला कोरिया के जनपद पंचायत मुख्यालय की ग्राम पंचायत सोनहत में रहने वाले किसान राजाराम के परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। पेशे से किसान और महात्मा गांधी नरेगा में अकुशल श्रम के लिए पंजीकृत मनरेगा श्रमिक श्री राजाराम के परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे सहित कुल पाँच सदस्य हैं। इनकी थोड़ी सी कृषि भूमि है और उसमें परंपरागत धान की फसल लगाकर यह परिवार अपना जीवन यापन करता है। साथ ही मनरेगा के अकुशल श्रम पर निर्भर इस परिवार के पास अतिरिक्त कोई आय का साधन नहीं था। अपने छोटे से मकान में राजाराम दो-तीन गाय पालने का कार्य भी करते थे, जिससे उनके घर का दैनिक खर्च बमुश्किल चलता रहा। अपनी आर्थिक स्थिति से संघर्ष कर रहे राजाराम के परिवार को पंजीकृत श्रमिकों को पशुपालन के लिए मिलने वाले शेड की जानकारी प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने ग्राम पंचायत में आवेदन देकर पशु शेड बनाए जाने की मांग रखी। उनके आवेदन के आधार पर ग्राम पंचायत की अनुशंसा पर कलेक्टर एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक मनरेगा द्वारा दो साल पहले महात्मा गांधी नरेगा के तहत एक लाख बीस हजार रूपए से बनने वाले एक पशु शेड की स्वीकृति प्रदान की गई। इस कार्य के लिए ग्राम पंचायत सोनहत को ही निर्माण एजेंसी बनाया गया। शेड का कार्य लगभग तीन माह में पूरा होने के बाद राजाराम को ज्यादा संख्या में पशु पालन की सहूलियत मिल गई। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे कुल छह दुधारू गाय पाल ली हैं। अब उनके घर पर औसतन पंद्रह से बीस लीटर दूध का उत्पादन होने लगा है। इससे इस परिवार के पास स्वरोजगार के साथ आर्थिक उन्नति का रास्ता बन गया है। अपने संघर्ष और उसके बाद मनरेगा की सहूलियत से आजीविका का एक नया साधन पाकर राजाराम और उनका परिवार बेहद खुश हैं और अब उनकी मनरेगा के अकुशल श्रम पर निर्भरता भी काफी कम हुई है। recent visitors 33

नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार वर्ष 2027 तक तैयार किया गया है कार्यक्रम

भोपाल प्रदेश में नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप साक्षरता कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। साक्षरता कार्यक्रम वर्ष 2022 से 2027 तक की अवधि के लिये तैयार किया गया है। प्रदेश में निरक्षरता उन्मूलन के लिये उल्लास-नव साक्षरता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 5 व्यापक उद्देश्य को लेकर संचालित किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता प्रदान करना महत्वपूर्ण जीवन कौशल बुनियादी शिक्षा व्यावसायिक शिक्षा और सतत् शिक्षा प्रदान करना है। यह कार्यक्रम 15 वर्ष से अधिक आयु समूह के व्यक्तियों के लिये है। पठन-पाठन प्रदेश के परिदृश्य को ध्यान में रखकर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा अक्षर पोथी नाम से प्रवेशिका बनाई गई है। यह प्रवेशिका सीखने की परिष्कृत गति एवं विषय वस्तु पर आधारित है। इस प्रवेशिका में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता के साथ महत्वपूर्ण जीवन कौशल जैसे वित्तीय, कानूनी, डिजिटल साक्षरता और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न मुद्दों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम का क्रियान्वयन प्रदेश में असाक्षरों के पठन-पाठन के लिये छात्र-छात्राओं, सरकारी-गैर सरकारी संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जा रहा है। सहयोग देने वाले व्यक्ति को अक्षर साथी का नाम दिया गया है। बुनियादी साक्षरता परीक्षा राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष में 2 बार नवसाक्षरों के लिये बुनियादी साक्षरता परीक्षा लिये जाने का प्रावधान है। सितम्बर 2024 में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में आयोजित परीक्षा में 16 लाख 49 हजार से अधिक नवसाक्षर शामिल हुए थे। शामिल नवसाक्षरों में से 90 प्रतिशत नवसाक्षरों ने परीक्षा में उत्तीर्ण होकर प्रमाण-पत्र हासिल किये हैं।   recent visitors 29

मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिली, नेशनल हाईवे होगा अपग्रेड

भोपाल मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिल गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश से गुजर रहे नेशनल हाईवे-34 के हिस्से को अपग्रेड करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद एक्स पर साझा की है। 531.84 करोड़ रुपए की स्वीकृति केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी साझा करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के शाहगढ़-बक्सवाहा-नरसिंहगढ़-दमोह से 63.50 किमी लंबाई के खंड को पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन में अपग्रेड करने के लिए 531.84 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी गई है। बनाए जाएंगे 4 बाईपास आगे जानकारी देते हुए लिखा है कि नेशनल हाईवे-34 उत्तराखंड के गंगोत्री धाम को मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर) पर लखनादौन से जोड़ता है। शाहगढ़-दमोह खंड के उन्नयन में 5 प्रमुख पुल, बक्सवाहा, भटेरा, नरसिंहगढ़ और पिपरिया चंपत में 4 बाईपास और दमोह के निर्मित क्षेत्रों में सर्विस/स्लिप रोड (दोनों तरफ 1.3 किलोमीटर) शामिल हैं। इस राजमार्ग के जुड़ने से कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी और आर्थिक विकास को भी तेजी से बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से चल रही थी मांग नेशनल हाईवे 34 प्रदेश के नरसिंहपुर, सागर, दमोह और राजगढ़ से निकलता है। इस मार्ग को लंबे समय से अपग्रेड करने की मांग की जा रही थी। बता दें कि, 63.50 किलोमीटर का हिस्सा एमपी से गुजरता है। इस मार्ग के अपग्रेड होने से कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी। recent visitors 46