Friday, July 10, 2026 3:39 am

शुक्रवार18 अप्रैल 2025: बदल जाएगी इन राशियों की किस्मत, मिलेगी बड़ी सफलता

मेष राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। परंतु सेहत का ध्यान रखें। खर्चों की अधिकता रहेगी। वृषभ राशि- आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। मन परेशान भी हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। रहन सहन कष्टमय हो सकता है। खर्च बढ़ेंगे। मिथुन राशि- मन परेशान हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। रहन-सहन कष्टमय रहेगा। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। संतान सुख में वृद्धि होगी। कर्क राशि- मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। अपनी भावनाओं के वश में रखें। बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में कठिनाई आ सकती है। सचेत रहें। सिंह राशि- मन अशांत रहेगा। मानसिक शांति बनाए रखने के प्रयास करें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव के साथ स्थान परिवर्तन हो सकता है। परिवार से दूर रह सकते हैं। कन्या राशि- आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। नौकरी में बदलाव हो सकता है। कार्यक्षेत्र में बदलाव के साथ स्थान परिवर्तन की संभावना बन रही है। भागदौड़ अधिक रहेगी। तुला राशि- मन अशांत रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। आय में वृद्धि होगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। वृश्चिक राशि- आत्मविश्वास में कमी रहेगी। संयत रहें। क्रोध से बचें। सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में स्थान परिवर्तन हो सकता है। किसी रुके धन की प्राप्ति हो सकती है। धनु राशि- मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। शैक्षिक कार्यों में व्यवधान आ सकते हैं। सचेत रहें। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए प्रयास करें। मकर राशि- मन परेशान हो सकता है। अपनी भावनाओं को वश में रखें। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। माता का साथ मिलेगा। आय में कमी व खर्च अधिक की स्थिति हो सकती है। कुंभ राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। मीन राशि- आपके लिए स्थिति पहले से अच्छी होगी। लवलाइफ में समस्याएं कम होगी। नौकरी में आप ऑफिस पॉलिटिक्स का शिकार हो सकते हैं। recent visitors 57

योगी सरकार प्रदेश के दो लाख से अधिक युवाओं को अग्नि सुरक्षा कर्मी के पद पर तैनाती के अवसर उपलब्ध कराएगी

लखनऊ योगी सरकार पिछले आठ वर्षों में प्रदेश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नए-नए अवसर प्रदान कर रही है। इसी क्रम में योगी सरकार प्रदेश के दो लाख से अधिक युवाओं को अब अग्निशमन विभाग द्वारा प्रशिक्षण के बाद निजी संस्थानों में अग्नि सुरक्षा अधिकारी और अग्नि सुरक्षा कर्मी के पद पर तैनाती के अवसर उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सीएम योगी के निर्देश पर विभाग ने कार्ययोजना तैयार कर ली है। इन युवाओं को ट्रेनिंग के बाद प्रदेश के मॉल, हॉस्पिटल, स्कूल और बड़े व्यावसायिक भवनों में नौकरी के अवसर उपलब्ध होंगे। योगी सरकार की यह पहल एक ओर जहां प्रदेश के युवाओं को रोजगार से जोड़ेगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को अधिक सुरक्षित, सजग और समय रहते आपदा से निपटने में सक्षम बनाएगी। इसी के साथ उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा, जहां युवाओं को अग्निशमन का प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। अग्निशमन विभाग की एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश के निजी भवनों में सिक्याेरिटी गार्ड की तरह अनिवार्य रूप से अग्नि सुरक्षा अधिकारी और अग्नि सुरक्षा कर्मियों को तैनात करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके लिए योग्यता के मानक भी तय कर लिए गए हैं। विभाग द्वारा प्रदेश के इच्छुक युवाओं को एक हफ्ते से लेकर चार हफ्ते की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद उन्हें विभाग द्वारा सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा, फिर प्रदेश के निजी भवनों जैसे मॉल, मल्टीप्लेक्स, 100 या उससे अधिक बेड की क्षमता वाले हॉस्पिटल, 24 मीटर से अधिक ऊंचाई के गैर आवासीय भवन, 45 मीटर से अधिक ऊंचाई के आवासीय भवन, 10,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले औद्योगिक भवनों में नौकरी के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने केंद्र सरकार के 'मॉडल फायर सर्विस बिल- 2019' को स्वीकार करते हुए 'उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा अधिनियम- 2022' लागू किया है। इस अधिनियम के तहत निजी भवनों में प्रशिक्षित अग्नि सुरक्षा अधिकारियों के साथ अग्नि सुरक्षा कर्मियों की तैनाती अनिवार्य है। इन भवनों में अग्नि सुरक्षा अधिकारियों और अग्नि सुरक्षा कर्मियों को तैनात करने वाला देश का पहला राज्य उत्तर प्रदेश बन जाएगा। एडीजी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में लागू 'उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा अधिनियम- 2022' और 'अग्निशमन नियमावली- 2024' देश के अन्य राज्यों के लिए आदर्श बन चुकी है। अन्य राज्य इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं और अपने यहां इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की दिशा में प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि इच्छुक युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए अग्निशमन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ अत्याधुनिक उपकरणों का गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के लिए उन्नाव स्थित ट्रेनिंग सेंटर की क्षमता 196 से बढ़ाकर 600 किए जाने का कार्य प्रगति पर है। रीजनल ट्रेनिंग सेंटरों की स्थापना का भी लक्ष्य है, जिससे आम नागरिकों और विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं के कर्मियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। विभिन्न श्रेणियों के भवनों के लिए निर्धारित न्यूनतम अर्हता और अनुभव प्राप्त महिला-पुरुष, जिसकी न्यूनतम आयु 18 वर्ष हो, अपने जनपद के किसी भी फायर स्टेशन पर एक सप्ताह के अनुकूलन/प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद फायर सेफ्टी ऑफिसर हो सकेगा। इसी प्रकार अग्नि सुरक्षा कर्मी के लिए कक्षा-10 उत्तीर्ण कोई भी महिला या पुरुष, किसी फायर स्टेशन से 4 सप्ताह का प्रशिक्षण प्राप्त करके या अग्नि सचेतक/फायर वॉलंटियर के रूप में लगातार 2 वर्ष तक पंजीकृत रहकर योगदान देने के बाद अग्नि सुरक्षा कर्मी बन सकेगा। recent visitors 48

‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में वित्तीय अनियमितता को लेकर सरदार पटेल ने भी दी थी पंडित नेहरू को चेतावनी, जताई थी कई आशंकाएं

नई दिल्ली 1937 में एसोसिएट जर्नल के गठन के बाद 9 सितंबर 1938 को जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार शुरू किया, यह बात आजादी मिलने के ठीक 9 साल पहले की है। इस अखबार को शुरू करने में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके तहत तीन अखबार थे, अंग्रेजी में 'नेशनल हेराल्ड', हिंदी में 'नवजीवन' और उर्दू में 'कौमी आवाज'। यही नेशनल हेराल्ड आज सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल, नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई लोगों पर ईडी ने 988 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर चार्जशीट दायर की है। जिसके बाद से उठा राजनीतिक बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन तीनों अखबारों का संचालन एसोसिएट जर्नल यानी एजीएल करता था। लेकिन तब भी यह माना जाता था कि यह अखबार पंडित जवाहर लाल नेहरू के इशारों पर चलता है। 1942 से 1945 तक इस अखबार के प्रकाशन पर अंग्रेजों ने रोक भी लगा दी थी। यानी 3 सालों तक इस अखबार का प्रकाशन नहीं हो पाया। देश की आजादी के बाद जब पंडित नेहरू प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इन अखबारों के बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी को इसके बोर्ड का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे इस एसोसिएट जर्नल यानी एजीएल की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। पंडित नेहरू के निजी सचिव ओ. एम. मथाई ने अपनी किताब में इस बात का जिक्र किया था कि फिरोज गांधी इस कंपनी के संचालन में बहुत अच्छे नहीं थे। इसलिए यह नेशनल हेराल्ड आर्थिक संकट में फंस गया। जिसे आर्थिक संकट से उबारने के लिए जनहित निधि ट्रस्ट के रूप में बदल दिया गया। इस नए ट्रस्ट पर भी नेहरू परिवार का ही कब्जा रहा। इस ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी नेहरू और उनके परिवार के बेहद करीबी लोग बनाए गए। ओ. एम. मथाई ने तो अपनी किताब में यहां तक दावा किया कि नेशनल हेराल्ड के लिए बड़ौदा के महाराजा से पूरे दो लाख रुपए की रिश्वत मांग ली गई थी। सरदार वल्लभभाई पटेल को जब इसकी सूचना मिली थी तो उन्होंने इसकी शिकायत नेहरू से की थी। उस समय विज्ञापन के नाम पर कई बड़े औद्योगिक घरानों से लाखों की रकम एक साल में इस अखबार ने हासिल की। पंडित नेहरू के प्रधानमंत्री रहते ही दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर नेशनल हेराल्ड को ऑफिस बनाने के लिए जमीन भी आवंटित की गई। यानी नेशनल हेराल्ड में हुआ घोटाला वित्तीय कदाचार की कोई हालिया कहानी नहीं है, इसकी जड़ें स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों से ही उभरी हुई हैं। 1950 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर नेशनल हेराल्ड का समर्थन करने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग करने के साथ ही संदिग्ध धन उगाही के बारे में भी चेतावनी दी थी। सरदार पटेल के पत्राचार में दर्ज इन चिंताओं को नेहरू ने खारिज कर दिया था, जबकि वह इसके दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में आशंकित थे। दशकों बाद, पटेल की ये चेतावनी अब लोगों के सामने आ रही है, जब ईडी इस मामले की जांच कर रही है। ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में आरोपपत्र दायर किया है, जिसमें उन पर यंग इंडिया लिमिटेड के जरिए 5,000 करोड़ रुपए की संपत्ति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है, जो उनके नियंत्रण में है और नेशनल हेराल्ड और उसकी मूल कंपनी एसोसिएट जर्नल लिमिटेड से जुड़ी है। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जो चेतावनी पत्र के रूप में तब शुरू हुई थी, वह अब एक बड़े घोटाले में बदल गई है। 5 मई, 1950 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर चिंता जताई कि नेशनल हेराल्ड ने हिमालयन एयरवेज से जुड़े दो व्यक्तियों से 75,000 रुपए से अधिक की रकम स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि एयरलाइन ने भारतीय वायुसेना की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए अवैध रूप से रात्रि हवाई डाक सेवा के लिए सरकारी अनुबंध इसके जरिए हासिल किया है। उसी पत्र में सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को आगाह किया कि नेशनल हेराल्ड ने अखानी नामक एक व्यवसायी से धन स्वीकार किया था, जो उनकी विमानन कंपनी के लिए रात्रि डाक अनुबंध हासिल करने में शामिल था। पटेल ने उल्लेख किया कि अखानी टाटा और एयर सर्विसेज ऑफ इंडिया जैसी फर्मों से भी धन जुटा रहा था। पत्र में आगे पटेल ने नेहरू को लिखा था कि अखानी पर बैंकों से धोखाधड़ी करने के लिए विभिन्न अदालतों में पहले से ही कई आरोप हैं। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अहमद किदवई द्वारा नेशनल हेराल्ड के लिए धन जुटाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने के बारे में भी चेतावनी पत्र के जरिए दी थी, जिसमें जेपी श्रीवास्तव जैसे लखनऊ स्थित व्यापारियों से धन इकट्ठा करना भी शामिल है। उसी दिन, 5 मई 1950 को, नेहरू ने पटेल को ऐसे लहजे में जवाब दिया था, जिससे लगता था कि उन्हें शांत करने की कोशिश की जा रही थी। नेहरू ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि उन्होंने अपने दामाद फिरोज गांधी, जो उस समय नेशनल हेराल्ड के महाप्रबंधक थे, से इस अवैध धन संग्रह के आरोपों की जांच करने के लिए कहा है। इसके ठीक अगले ही दिन, 6 मई को पटेल ने नेहरू के दावों का दृढ़ता से खंडन करते हुए फिर से नेहरू को जवाब दिया। फिर पटेल को शांत करने का प्रयास किया गया। लेकिन सरदार पटेल के द्वारा अवैध फंडिंग के बारे में जो चिंता व्यक्त की गई थी, उसे दरकिनार कर दिया गया। हालांकि, तब नेहरू ने यह स्वीकार किया था कि इसमें कुछ गलतियां हुई होंगी। recent visitors 37

दुल्हन ने रिश्ता तय होने के बाद दूल्हे से कहा- वह शेरवानी पहनकर आए, बताने के बाद भी दो-दो गलतियां कर बैठा दूल्हा

औरैया यूपी के औरैया के एक गेस्ट हाउस में उस समय अफरा-तफरी मच गई मच गई जब एक दूल्हा बताने के बाद भी दो-दो गलतियां कर बैठा। दुल्हन ने रिश्ता तय होने के बाद दूल्हे से कहा था कि वह शेरवानी पहनकर आए, लेकिन कोर्ट पैंट पहनकर चला गया। ये देखते ही दुल्हन का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। दुल्हन का मूड खराब था। जयमाल का कार्यक्रम शुरू हो तो दूल्हा वरमाला लाना ही भूल गया। हालांकि लड़के वालों ने वरमाला की आनन-फानन में व्यवस्था कर ली। इसके बाद भी दुल्हन का मूड ठीक नहीं हुआ और अचानक से शादी न करने की घोषणा कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। विवाद की स्थिति में किसी ने पुलिस को फोन कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को कोतवाली ले आई। भोर तक दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास होते रहे। मगर बात नहीं बनी। तय रकम देने के बाद दुल्हा व उसके घर वाले घर जा पाए। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र से एक बारात बीती रात औरैया कोतवाली के एक गेस्ट हाउस में आई थी। दूल्हा और उसका परिवार दिल्ली में रहता है। शादी तय होने के बाद परिवार शादी के लिए यहां आया था। दूल्हा बाराती भी कम ले गया था। चर्चा है कि दुल्हन ने दूल्हे से शेरवानी पहनकर आने को कहा था। मगर दूल्हा कोट पैंट पहनकर पहुंच गया। इससे दुल्हन नाराज थी। जयमाल के पहले ही दूल्हे के पिता ने शराब पी ली। इसकी जानकारी होने पर दुल्हन व उसके घर वाले नाराज हो गए। मगर रिश्तेदारों के समझाने बुझाने के बाद शांत हो गए। जयमाल के समय जब दूल्हा दुल्हन स्टेज पर पहुंचे। तब फोटो सेशन के बाद जयमाल की बारी आई तब पता चला कि दूल्हा वरमाला लाना ही भूल गया है। हालांकि, आनन फानन में दूल्हा पक्ष के लोगों ने वरमाला की व्यवस्था थोड़ी ही देर में कर ली। मगर इस बार दुल्हन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने शादी से इंकार कर दिया। इससे दोनों ही पक्षों में अफरातफरी मच गई। काफी समझाने बुझाने के बाद भी दुल्हन शादी के लिए तैयार नहीं हुई। तब कन्या पक्ष के लोग भी उसके समर्थन में आ गए। वर व कन्या पक्ष में शादी को लेकर विवाद होने लगा। सूचना पर कोतवाली पुलिस भी पहुंच गई। और दोनों पक्षों को बैठाकर समझौते का प्रयास किया। मगर बात नहीं बनी। भोर तक दूल्हा व उसके पिता कोतवाली में बैठे रहे। समझौते में तय रकम ढाई लाख रुपये देने के बाद दूल्हे व उसके पिता को जाने दिया गया। recent visitors 51

वक्फ हिंसा पर HC में ममता सरकार का कबूलनामा, 10,000 की भीड़ हुई जमा, छीन ली पुलिस की पिस्तौल

कोलकाता वक्फ संशोधन ऐक्ट के खिलाफ पिछले हफ्ते पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद में भड़की हिंसा पर राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि हिंसा के दिन करीब 10,000 की भीड़ जमा हो गई थी। इतना ही नहीं उन्मादी भीड़ ने तब मौके पर तैनात पुलिस की पिस्तौल भी छीन ली थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगाल सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्मादी भीड़ में से करीब 10 लोगों के पास घातक हथियार थे, जिनसे पुलिस को अपने अधिकारियों को बचाना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपद्रवियों की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले करीब 8000-10000 लोगों की भीड़ पीडब्ल्यूडी ग्राउंड आउट पर इकट्ठा हुई। इसके बाद भीड़ का एक हिस्सा अलग हो गया और करीब 5000 लोग उमरपुर की ओर बढ़ गए और एनएच को जाम कर दिया। इसके बाद देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और गंदी भाषा का इस्तेमाल करने लगी। इसके बाद उन्होंने पुलिस कर्मियों पर ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। तीन सदस्यीय समिति को प्रभावित इलाकों का दौरा करना चाहिए इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस राजा बसु चौधरी की खंडपीठ ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पश्चिम बंगाल राज्य मानवाधिकार आयोग और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक-एक सदस्य वाली तीन सदस्यीय समिति को हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास और शांति बहाली की निगरानी के लिए जिले के प्रभावित इलाकों का दौरा करना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई हाई कोर्ट राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुस्लिम बहुल जिले में सांप्रदायिक दंगों के दौरान बम विस्फोट हुए थे। एक अन्य याचिकाकर्ता ने हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों की उनके घरों में वापसी के लिए राज्य सरकार द्वारा कदम उठाए जाने का अनुरोध किया। केंद्र की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष अनुरोध किया कि मुर्शिदाबाद में सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की तैनाती को जिले की जमीनी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ समय के लिए और बढ़ा दिया जाए। केंद्रीय बलों की लगभग 17 कंपनियां तैनात मुर्शिदाबाद के उपद्रवग्रस्त सुती, शमसेरगंज-धुलियान इलाकों में फिलहाल केंद्रीय बलों की लगभग 17 कंपनियां तैनात हैं। उच्च न्यायालय ने शनिवार को शांति बहाली के लिए जिले में सीएपीएफ की तैनाती का आदेश दिया था। अदालत के समक्ष अपनी दलील रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने एक रिपोर्ट पेश की और दावा किया कि मुर्शिदाबाद में कानून-व्यवस्था की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि कुछ प्रभावित परिवार पहले ही अपने घर लौट चुके हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में मुर्शिदाबाद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में हुई हिंसा से बचकर कई लोगों ने मालदा जिले के एक स्कूल में राहत शिविर में शरण ली है। राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग दूसरी तरफ, शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य के मुर्शिदाबाद, मालदा और चौबीस परगना जैसे जिलों में भड़की हिंसा और लोगों के पलायन के बाद अब राज्य के हालात ममता बनर्जी सरकार के नियंत्रण से बाहर जा रहा है, इसलिए राज्य में अविलंब राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। भाजपा के वरिष्ठ नेता अधिकारी ने राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए कहा,“ममता सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल हो चुकी है।” उन्होंने 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को राष्ट्रपति शासन के तहत कराने की भी मांग की है। अधिकारी का आरोप है कि जिहादी तत्व खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस सत्ताधारी पार्टी के कैडर की तरह काम कर रही है। recent visitors 41

‘हम हिन्दू हैं, हिन्दी नहीं, तीन-भाषा नीति की आलोचना कर राज ठाकरे ने कहा-हर जगह हिन्दी थोपने नहीं देंगे

मुंबई त्रि-भाषा फॉर्मूले के तहत हिन्दी थोपने का विवाद अब महाराष्ट्र पहुंच चुका है। महाराष्ट्र की नव निर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार की तीन-भाषा नीति की आलोचना की है और कहा है कि वह हर जगह हिन्दी थोपने नहीं देंगे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "आपका जो भी त्रि-भाषा फॉर्मूला है, उसे सरकारी मामलों तक ही सीमित रखिए, उसे शिक्षा में न लाएं।" उन्होंने आगे कहा कि MNS केंद्र सरकार के हर चीज को 'हिंदीकृत' करने के मौजूदा प्रयासों को इस राज्य में सफल नहीं होने देगी। उन्होंने लिखा, "हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रूप में चित्रित करने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है। अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको एहसास होगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आगामी चुनावों में मराठी और गैर-मराठी के बीच संघर्ष पैदा करने और इसका फायदा उठाने की कोशिश है?" हाल ही में महाराष्ट्र में लागू हुआ त्रि-भाषा फॉर्मूला राज ठाकरे का यह बयान तब आया है, जब राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने पिछले दिनों कई राज्‍यों में हिन्‍दी भाषा को लेकर उपजे विरोध के बीच कक्षा 1 से 5 तक हिन्दी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया है। त्रिभाषा फॉर्मूले का नया पाठ्यक्रम 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से लागू किया गया है। महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत नया शैक्षणिक ढांचा लागू करने की घोषणा करते हुए हिन्दी को तीसरी भाषा के तौर पर अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत अब राज्य के मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएगी। CM फडणवीस ने किया बचाव इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में हिन्दी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने के सरकार के फैसले का बचाव किया है और केंद्र की इस नीति की प्रशंसा की है। फडणवीस ने कहा, "अगर कोई अंग्रेजी सीखना चाहता है, तो वह अंग्रेजी सीख सकता है। अगर कोई छात्र कोई अन्य भाषा सीखना चाहता है, तो किसी को भी अन्य भाषाएँ सीखने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि, सभी को मराठी आनी चाहिए। साथ ही, हमारे देश की अन्य भाषाओं को भी जानना चाहिए। केंद्र सरकार ने इस बारे में सोचा है। केंद्र सरकार को लगता है कि हमारे देश में संचार की एक भाषा होनी चाहिए। यहr प्रयास किया गया है।" recent visitors 60

करोड़ों रुपए स्वीकृत फिर भी अधर में लटकी नहर परियोजना, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे किसान

कवर्धा प्रदेश सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन कबीरधाम जिले की स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। गर्मी के इस मौसम में यहां के किसान बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। धरती के पुत्र कहे जाने वाले ये किसान आज खुद बेहाल हैं, क्योंकि सिंचाई के लिए पानी ही उपलब्ध नहीं है। रघुपारा, तिलाईभाट और बद्दो गांव के किसानों ने वर्षों पहले नहर विस्तारीकरण की मांग की थी। राज्य सरकार ने किसानों की समस्या को देखते हुए करिया आमा से राम्हेपुर तक तीन किलोमीटर लंबी नहर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी थी, जिससे किसान धान, चना, गन्ना जैसी फसलें उगा सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बने। नहर निर्माण कार्य शुरू भी हुआ और करीब दो किलोमीटर तक नहर तैयार भी हो गई, लेकिन पिछले पांच वर्षों से यह परियोजना अधर में लटकी हुई है। किसान जमीन देने तैयार नहीं इसलिए रुका है नहर का काम दरअसल, बद्दो गांव से आगे नहर निर्माण इसलिए रुका हुआ है क्योंकि कुछ किसानों ने अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया है, जबकि आधा दर्जन से अधिक किसान इसके लिए तैयार हैं। इसी कारण नहर का विस्तार कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। आज गांव में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। यदि नहर निर्माण कार्य पूरा होता है तो तिलाईभाट, बद्दो, रघुपारा समेत आसपास के दर्जनों गांवों के खेतों तक पानी पहुंचता और पानी की समस्या से राहत मिल जाती। विवाद सुलझने के बाद नहर निर्माण कार्य में आएगी तेजी : सब इंजीनियर जल संसाधन विभाग की सब-इंजीनियर रेखा ने बताया कि किसानों के बीच मध्यस्थता न बन पाने के कारण नहर निर्माण का कार्य रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि जैसे ही विवाद सुलझेगा, नहर निर्माण का काम तेजी से पूरा किया जाएगा। इसके बाद क्षेत्र में पानी की किल्लत खत्म हो जाएगी। recent visitors 51