Wednesday, July 15, 2026 2:51 pm

रोज़मर्रा की सफाई में काम आने वाला घड़ी डिटर्जेंट, अब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म्स का नाम होगा

नई दिल्ली देश की राजधानी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अब यात्रियों को एक नया नजारा देखने को मिलेगा। रोज़मर्रा की सफाई में काम आने वाला घड़ी डिटर्जेंट, अब केवल घरों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका नाम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1, 6, 7, 8 और 9 पर प्रमुखता से चमकेगा। आरएसपीएल ग्रुप (RSPL Group) की इस प्रमुख डिटर्जेंट ब्रांड ने भारतीय रेलवे के साथ एक साल के लिए प्लेटफॉर्म्स के नामकरण अधिकार हासिल किए हैं। कंपनी ने गुरुवार को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी। ब्रांडिंग में दिखेगा घड़ी का नया अवतार समझौते के तहत इन पांच प्लेटफॉर्म्स पर घड़ी डिटर्जेंट की ब्रांडिंग पैनल, बिलबोर्ड, विनाइल रैपिंग और डिजिटल साइन बोर्ड्स के जरिए की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य है ब्रांड को यात्रियों के बीच अधिक व्यापक रूप से पहुंचाना और स्टेशन की सुंदरता में भी इजाफा करना। आरएसपीएल समूह के प्रवक्ता ने कहा: "यह हमारे लिए मील का पत्थर है। यह अनूठा अवसर हमें अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंचने में मदद करेगा, और हम भारतीय रेलवे के साथ साझेदारी करके बेहद खुश हैं।" यात्रियों के लिए सुविधाओं में भी बढ़ोतरी ब्रांडिंग के अलावा, घड़ी डिटर्जेंट ने यात्रियों की सुविधाओं को भी ध्यान में रखा है। समझौते के तहत इन प्लेटफॉर्म्स पर: ➤ महिला फीडिंग रूम ➤ साफ-सुथरे साइन बोर्ड्स ➤ डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन घड़ी डिटर्जेंट: एक घरेलू ब्रांड से राष्ट्रीय पहचान तक घड़ी डिटर्जेंट की कहानी 1987 में आरंभ हुई थी, जब आरएसपीएल समूह ने इसे भारतीय बाजार में लॉन्च किया। आज यह भारत के शीर्ष डिटर्जेंट ब्रांड्स में शामिल है, जिसका मार्केट शेयर 25% से अधिक है। इसकी टैगलाइन "पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें" ने इसे आम भारतीय उपभोक्ताओं से जोड़ा और इसे एक भरोसे का नाम बना दिया। घड़ी की सफलता के पीछे कारण हैं: ➤ किफायती मूल्य ➤ मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क ➤ सटीक मार्केटिंग रणनीति ➤ ग्राहकों की जरूरतों को समझना ब्रांडिंग और स्टेशन सुधार का नया मॉडल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यह ब्रांडिंग एक उदाहरण है कि कैसे कॉर्पोरेट साझेदारियों के ज़रिए सार्वजनिक स्थलों को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे ना केवल ब्रांड को नई पहचान मिलती है, बल्कि यात्रियों को सुविधाएं भी बढ़ती हैं। भारतीय रेलवे और निजी कंपनियों के बीच इस तरह की साझेदारियां भविष्य में रेलवे स्टेशनों की सूरत बदलने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती हैं।   recent visitors 36

आखिर टूट गया 2016 से चला आ रहा वाम छात्र गठबंधन, 2015-16 में आखिरी बार जीती थी ABVP, मुकाबला हुआ दिलचस्प

नई दिल्ली जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) चुनाव के लिए 2016-17 से चला आ रहा वाम छात्र संगठनों का गठबंधन टूट गया है। आखिरी समय तक अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान चलती रही। अब आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) ने गठबंधन बनाया है। दूसरी ओर, स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई), बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंटस एसोसिएशन (बापसा), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) और प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (पीएसए) ने अपना गठबंधन बनाने की घोषणा की है। 2015-16 में आखिरी बार जीती थी ABVP हालांकि, इनके अधिकतर उम्मीदवारों के नामांकन रद हो गए और देर रात तक गठबंधन अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं कर पाया। 2015-16 में आखिरी बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2016-17 के चुनावों में आईसा, एसएफआई और एआईएसएफ ने गठबंधन किया था। 2018 के चुनावों में डीएसएफ भी इस गठबंधन का हिस्सा बन गया था। तब से चारों संगठन साथ मे चुनाव लड़ते आ रहे हैं। लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। कोविड में तीन साल नहीं हुए चुनाव कोविड के तीन वर्ष बाद 2023 में भी हुए चुनावों में संयुक्त वाम गठबंधन ने जीत हासिल की थी। एबीवीपी कोई सीट नहीं जीत सकी थी। लेकिन, इस वर्ष अध्यक्ष पद को लेकर जेएनयू के दो प्रमुख छात्र संगठन आईसा और एसएफआई आमने-सामने थे। दोनों अपने उम्मीदवार को अध्यक्ष पद देना चाहते थे। इसलिए गठबंधन पर बात नहीं बन सकी। आईसा और डीएसएफ साथ चले गए। उधर, एसएफआई और अन्य छात्र संगठन आखिरी तक अपने उम्मीदवार अंतिम नहीं कर सके। जिसके चलते उनके अधिकतर उम्मीदवारों के नांमाकन रद हो गए। एसएफआई ने सूची को गलत बताया जो सूची बाहर आई है, उसमें एसएफआई की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार बताई जा रहीं गोपिका का ही नाम नहीं है। एसएफआई का अध्यक्ष पद पर चौधरी तैय्यबा अहमद का नाम है। एसएफआई ने सूची को गलत बताया है। इसलिए वह प्रदर्शन कर रहे हैं और नाम वापसी के लिए और समय मांग रहे हैं। अगर उनको समय नहीं मिलता है तो इसका सीधा फायदा एबीवीपी को मिल सकता है। एनएसयूआई ने चारों पदों पर घोषित किए उम्मीदवार नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने जेएनयूएसयू चुनाव में चारों पदों पर उम्मीदवार उतारे हैं। अध्यक्ष पद के लिए प्रदीप ढाका, उपाध्यक्ष पर फर्टिनिटी से मोहम्मद कैफ, महासचिव पद पर अरुण प्रताप और संयुक्त सचिव के लिए सलोनी खंडेलवाल को उम्मीदवार बनाया है। recent visitors 37

कोतवाली थाना में कालेज छात्रा ने एक युवक पर प्यार और फिर विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म करने की शिकायत की

जबलपुर कोतवाली थाना में कालेज छात्रा ने एक युवक पर प्यार और फिर विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म करने की शिकायत की है। छात्रा (24) की वर्ष 2021 में सोशल मीडिया पर पनागर बम्हनौदा निवासी सौरभ लोधी से मित्रता हुई। कुछ दिन सोशल मीडिया पर चैट के बाद दोनों ने एक-दूसरे का मोबाइल नंबर आपस में साझा किया। उनकी मोबाइल फोन पर बातचीत होने लगी। इसी दौरान आरोपित ने छात्रा को अपने प्रेमजाल में फंसा लिया। फिर दोनों अकेले में मिलने लगे। इस दौरान आरोपित उखरी चौक स्थित होटल नीलकंठ और होटल राॅयल इन में छात्रा को साथ लेकर गया। छात्रा के साथ शीघ्र विवाह करने का झांसा देकर उसके साथ होटल में दुष्कर्म किया। कई बार आरोपित छात्रा को अपने दोस्त के घर पर ले गया, वहां भी उसके साथ दुष्कर्म किया। छात्रा जब भी उससे विवाह के लिए कहती वह शीघ्र घरवालों से बात करने की बात कहता। उसकी बात को टाल देता। कुछ दिन पूर्व छात्रा ने युवक पर विवाह के लिए दबाव बनाया। घरवालों से बात कर तिथि तय ना करने पर उसकी हरकत के बारे में उनको जानकारी देने की बात कही। इस पर युवक ने छात्रा से कहा कि वह अपने माता-पिता को रिश्ते के लिए उसके घर जाने बोले। छात्रा के कहने पर जब उसके माता-पिता युवक के घर पहुंचे और विवाह का प्रस्ताव रखा तो युवक के माता-पिता चौंक गए। उन्होंने विवाह से मना कर दिया। युवक का विवाह एक अन्य युवती के साथ तय हो जाने की जानकारी दी। यह पता चलने पर छात्रा ने युवक को समझाने का प्रयास किया। जब वह विवाह के लिए नहीं माना तो छात्रा ने आरोपित सौरभ लोधी के विरुद्ध दुष्कर्म का मामला पंजीबद्ध कराया। पुलिस फरार आरोपित सौरभ की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।   recent visitors 21

UP के जिलों से आने लगी रिपोर्ट, धार्मिक नाम पर आवंटित वक्फ संपत्तियों पर बने हैं मकान-दुकान

लखनऊ यूपी के जिलों से जिलाधिकारियों ने धीरे-धीरे वक्फ संपत्तियों की जानकारी शासन को भेजनी शुरू कर दी है। शासन को अब तक मिली जिलों की रिपोर्ट के मुताबिक धार्मिक, शैक्षिक कामों और कब्रिस्तान के लिए दी गई 761 से अधिक संपत्तियों पर घर और दुकानें बना दी गई हैं। शासन ने जिलाधिकारियों से वक्फ संपत्तियों के बारे में पूरी रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है कि वक्फ की संपत्तियों का आवंटन के बाद मनमाना इस्तेमाल किया जा रहा है। जिलाधिकारियों से अपने-अपने जिलों में स्थित वक्फ संपत्तियों की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदेश भर में वक्फ संपत्तियों की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। शासन को करीब 2528 वक्फ संपत्तियों की रिपोर्ट मिली है। इनमें 761 संपत्तियां ऐसी हैं जिनका उपयोग किन्हीं और कार्यों में किया जा रहा है। 25 संपत्तियों को वक्फ संपत्तियां घोषित करने के मामला अदालत में चल रहा है। चंदौली की 15 और मुजफ्फरनगर की चार, बाराबंकी, हमीरपुर, झांसी, कासगंज, लखीमपुर खीरी व सिद्धार्थनगर की एक-एक संपत्तियां हैं। अंबेडकरनगर में 15 संपत्तियों का सही और 15 का उपयोग दूसरे कार्यों में हो रहा है। अमेठी में छह का उपयोग सही और छह का उपयोग दूसरे, इटावा में 11 का सही और 11 का गलत, गौतमबुद्ध नगर में एक-एक, हमीरपुर में चार का सही और एक का गलत उपयोग हो रहा है। अमरोहा में पांच का सही एक का गलत उपयोग हो रहा है। बागपत में 44 का सही चार का गलत, बाराबंकी में 21 में से तीन संपत्तियों का उपयोग दूसरे कार्यों में किया जा रहा है। इसी प्रकार झांसी में 20 में से एक संपत्ति का उपयोग दूसरे कार्य में किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, आगरा, बस्ती, उन्नाव, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत में भी गड़बड़ियां मिली हैं। recent visitors 37

कपिल सिब्बल ने कहा- राज्यपाल द्वारा विधेयकों को रोकना वास्तव में विधानमंडल की सर्वोच्चता में दखलंदाजी है

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर आपत्ति जताए जाने वाले उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान पर वरिष्ठ वकील व राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने नाराजगी जाहिर की है। सिब्बल ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति और राज्यपाल के बारे में पता होना चाहिए, जिन्हें मंत्रियों की सहायता और सलाह पर काम करना होता है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सिब्बल ने कहा कि राज्यपाल द्वारा विधेयकों को रोकना वास्तव में विधानमंडल की सर्वोच्चता में दखलंदाजी है। यह धनखड़ जी (उपराष्ट्रपति) को पता होना चाहिए, वे पूछते हैं कि राष्ट्रपति की शक्तियों को कैसे कम किया जा सकता है, लेकिन शक्तियों को कौन कम कर रहा है? कपिल सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''आज सुबह कई अखबारों में जब मैंने धनखड़ साहब का भाषण पढ़ा तो दुख और आश्चर्य हुआ, क्योंकि ज्यूडिशियल इंस्टीट्यूशन फिर चाहे सुप्रीम कोर्ट हो या हाई कोर्ट हो, इन पर ही विश्वास है। मुझे लगता है कि जब सरकार के लोगों को ज्यूडिशियरी के फैसले पसंद नहीं आते हैं तो वे आरोप लगाना शुरू कर देते हैं कि ये हद से बाहर हैं। जब पसंद आते हैं तो विपक्ष को कहते हैं कि यह तो सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया था। फिर चाहे 370 हो या राम मंदिर का फैसला हो, इस पर कहते हैं कि यह तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला था। जो आपको जजमेंट सही नहीं लगे, सोच के हिसाब से नहीं हो वह गलत है और जो सोच के हिसाब से है, वह ठीक है।'' उन्होंने आगे कहा, ''मैं उनका बड़ा आदर करता हूं, लेकिन आपने कह दिया कि आर्टिकल 142 न्यूक्लियर मिसाइल है, यह कैसे कह सकते हैं? आपको पता है कि आर्टिकल-142 द्वारा सुप्रीम कोर्ट को संविधान ने हक दिया है ना कि किसी सरकार ने, ताकि न्याय हो। जब राष्ट्रपति अपना फैसला करती हैं तो वह कैबिनेट के सुझाव से करती हैं। इसी तरह जब कोई विधेयक पारित होता है तो राज्यपाल के पास जाता है। संविधान ने हक दिया है कि राज्यपाल कमेंट करके विधेयक को वापस भेज सकता है। जब दोबारा विधानसभा पारित कर दे तो राज्यपाल को साइन करना पड़ता है। यह संविधान कहता है। राज्यपाल यह भी कर सकता है कि वह किसी विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेज सकता है। राष्ट्रपति व्यक्तिगत तौर पर कुछ नहीं करतीं, वह केंद्र सरकार के कैबिनेट पर जाती हैं और वो एडवाइस करते हैं कि क्या करना है। धनखड़ जी को यह पता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की पावर को कम कैसे कर सकते हैं, आखिर कौन कम कर रहा है उनकी ताकत कम।'' साइन करने से मना नहीं कर सकते राष्ट्रपति राज्यसभा सांसद ने आगे कहा कि संसद अगर बिल पास करे तो क्या राष्ट्रपति उसे लेकर बैठ सकते हैं कि हम साइन नहीं करेंगे और यदि ऐसा नहीं करें तो किसी को अधिकार है या नहीं कि यह अहम बिल है। वह यह नहीं कह सकते कि वह साइन नहीं करेंगे। वह कमेंट करके वापस भेज सकते हैं, फिर दोबारा पास हो। यह संविधान की परंपरा है। अदालतों ने फैसला पहले ही कर दिया है। मुझे इस बात का आश्चर्य है कि कभी मेघवाल जी कहते हैं कि हद में रहना चाहिए। कभी रिजिजू कहते हैं कि यह क्या हो रहा है? वहीं, धनखड़ जी कहते हैं कि पुराने समय में जब सुप्रीम कोर्ट में आठ जज थे तो पांच जज फैसला करते थे, अब तो इतने जज हो गए हैं। दो ही जज फैसला करेंगे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट बेंच पर ही बैठेगा। ऐसे ही सुप्रीम कोर्ट फैसला करता है। सुपर संसद की तरह काम कर रहे जज: धनखड़ धनखड़ ने 17 अप्रैल को एक कार्यक्रम के दौरान राज्यसभा के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की थी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बना रहे हैं, कार्यकारी कार्य कर रहे हैं और सुपर संसद के रूप में काम कर रहे हैं। धनखड़ ने अपने संबोधन के दौरान कहा, "राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के लिए कहा जाता है, और यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह कानून बन जाता है। इसलिए हमारे पास ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बनाएंगे, जो सुपर संसद के रूप में काम करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है।" धनखड़ ने कहा, "हाल ही में आए एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है। हम कहां जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमें बेहद संवेदनशील होना चाहिए। यह सवाल नहीं है कि कोई समीक्षा दायर करता है या नहीं। हमने इस दिन के लिए लोकतंत्र की कभी उम्मीद नहीं की थी।" recent visitors 31

बिना अनुमति के चलने ढाबों को तत्काल ध्वस्त कर दिया जाएगा और उनके पानी और बिजली के कनेक्शन काट दिए जाएंगे: पर्यावरण मंत्री

नई दिल्ली दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में अवैध ढाबों और मांस की दुकानों पर कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना अनुमति के चलने वाले इन ढाबों को तत्काल ध्वस्त कर दिया जाएगा और उनके पानी और बिजली के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। सिरसा ने यह निर्देश पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके के दौरे के दौरान दिए, जब उन्होंने नागरिक मुद्दों की समीक्षा की। मनजिंदर सिंह सिरसा के इन सख्त निर्देशों से यह साफ है कि दिल्ली सरकार अवैध ढाबों और प्रदूषण की समस्या पर कड़ा रुख अपनाने के लिए तैयार है। इन कार्रवाईयों से न केवल अवैध प्रतिष्ठानों पर काबू पाया जाएगा, बल्कि प्रदूषण कम करने के लिए उठाए गए कदमों से दिल्ली को और भी साफ और हवादार बनाया जा सकेगा। सिरसा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा "राजधानी में कहीं भी अवैध व्यवसायों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासकर, यहां 40-50 अवैध ढाबे और मांस की दुकानें बिना अनुमति के चल रही हैं। ऐसे गैरकानूनी प्रतिष्ठानों को बिल्कुल भी नहीं छोड़ा जाएगा।" उन्होंने जिला आयुक्त और अधिकारिक आयुक्त को आदेश दिया कि वे इस मामले में तुरंत कार्रवाई करें और इन सभी अवैध ढाबों को सील करें। साथ ही इन प्रतिष्ठानों के पानी और बिजली कनेक्शन काट दिए जाएं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए कदम इसके अलावा, सिरसा ने प्रदूषण से निपटने के लिए कई उपायों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जीपीएस युक्त पानी के टैंकरों का इस्तेमाल प्रदूषण वाले क्षेत्रों में किया जाएगा। इन टैंकरों को उस क्षेत्र में तैनात किया जाएगा जहां धूल और प्रदूषण का स्तर अधिक है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन टैंकरों की गतिविधि और आवागमन पर दैनिक रूप से निगरानी रखी जाए। सिरसा ने बताया कि यह कदम दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को सुलझाने के लिए उठाया गया है, और इसके प्रभावी परिणाम मिलने की उम्मीद है। पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक इसके अलावा, सिरसा ने पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार उन वहनों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए कदम उठा रही है, जो प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। यह कदम दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और साफ हवा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। सिरसा ने बताया कि दिल्ली सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और ऐसे सख्त कदम उठाए जा रहे हैं जो शहर में स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण को बेहतर बनाएं। सरकार की सख्त नीति सिरसा ने यह भी कहा कि इन सभी कदमों का उद्देश्य दिल्ली को एक सुरक्षित, स्वच्छ और प्रदूषण रहित शहर बनाना है। उन्होंने राज्य सरकार के दृढ़ इरादों का जिक्र करते हुए कहा- "दिल्ली में प्रदूषण कम करना हमारी प्राथमिकता है, और हम इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे।" उनका यह भी कहना था कि यह सुनिश्चित करना होगा कि दिल्ली में कोई भी अवैध गतिविधि न हो, ताकि नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सके।   recent visitors 31

ट्रंप के टैरिफ से अर्थव्यवस्था कमजोर होगी, महंगाई बढ़ेगी लेकिन, उथल-पुथल के बीच IMF ने दी राहत

वाशिंगटन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने गुरुवार को वैश्विक व्यापार में मची उथल-पुथल के बीच राहत भरी खबर दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में बढ़ते टैरिफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और इस वर्ष महंगाई भी बढ़ेगी लेकिन ये वैश्विक मंदी का कारण नहीं बनेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि बढ़ते व्यापारिक तनाव और वैश्विक व्यापार प्रणाली में हो रहे बड़े बदलावों के चलते IMF अपनी आर्थिक विकास दर के पूर्वानुमानों में गिरावट करेगा, लेकिन वैश्विक मंदी की आशंका नहीं है। आईएमएफ के अगले सप्ताह जारी किए जाने वाले अनुमानों के आधार पर उन्होंने यह बात कही। जॉर्जीवा ने कहा कि अमेरिका की ओर से लगाए गए नए टैरिफ और चीन तथा यूरोपीय संघ की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को झकझोर दिया है। इससे व्यापार नीति में "अत्यधिक अनिश्चितता" और वित्तीय बाजारों में "बेहद अस्थिरता" देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा, “व्यवधानों की कीमत चुकानी पड़ती है… हमारे नए विकास अनुमान में महत्वपूर्ण गिरावट शामिल होगी लेकिन मंदी नहीं होगी।” जॉर्जीवा ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा शुल्क की दरों में की गई वृद्धि ने वैश्विक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘आयात शुल्क वैश्विक वृद्धि को धीमा कर देंगे और महंगाई बढ़ेगी लेकिन ये दुनिया भर में मंदी का कारण नहीं बनेंगे।’’ जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक व्यापार प्रणाली में बड़े बदलावों से विश्व अर्थव्यवस्था के जुझारूपन की परीक्षा ली जा रही है जिससे वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मचने का खतरा है। IMF की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीति और वैश्विक बाजार में हलचल के चलते दुनिया भर के केंद्रीय बैंकर और वित्त मंत्री वाशिंगटन की बैठक में भाग लेने वाले हैं। उन्होंने कहा कि शुल्क अनिश्चितता का कारण बनते हैं, जो महंगा पड़ सकता है। सप्लाई चैन की जटिलता से कई देशों में शुल्क के कारण एक-एक वस्तु की लागत प्रभावित हो सकती है। व्यापार बाधाओं में वृद्धि से भी वृद्धि पर तत्काल प्रभाव पड़ता है, तथा यद्यपि इससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि हो सकती है लेकिन इसे ऐसा होने में समय लगता है। हालांकि, आईएमएफ प्रमुख ने अमेरिकी प्रशासन की कुछ चिंताओं को भी दोहराया। उन्होंने देशों से शुल्क कम करने और व्यापार में अन्य बाधाओं को कम करने का आह्वान किया। आईएमएफ का पूर्ण आकलन अगले मंगलवार को जारी किया जाएगा। आर्थिक स्थिति और बाजार पर चिंता जॉर्जीवा ने कहा कि विश्व की वास्तविक अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है—मजबूत श्रम बाजार और स्थिर वित्तीय प्रणाली अभी भी है। लेकिन उन्होंने यह भी आगाह किया कि अगर आर्थिक मंदी को लेकर नकारात्मक धारणाएं बनीं, तो इसका असर वास्तविक आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “संकट के दौर में मैंने यह सीखा है कि धारणा जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही हकीकत भी होती है। अगर धारणा नकारात्मक हो जाए, तो वह अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।” टैरिफ का असर और संभावित महंगाई IMF ने जनवरी में 2025 और 2026 के लिए वैश्विक विकास दर 3.3% रहने का अनुमान लगाया था। अब यह संस्था मंगलवार को अपना नया ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ जारी करेगी। जॉर्जीवा ने यह नहीं बताया कि नए अनुमानों में कितनी गिरावट होगी, लेकिन उन्होंने चेताया कि यह गिरावट “महत्वपूर्ण” होगी। महंगाई को लेकर उन्होंने कहा कि टैरिफ से कुछ देशों में उपभोक्ता और उत्पादक कीमतों में इजाफा हो सकता है, जबकि कहीं-कहीं खर्च में कटौती से महंगाई घट भी सकती है। कुल मिलाकर, कुछ देशों के लिए महंगाई बढ़ने का अनुमान है। अमेरिका और चीन से की सहयोग की अपील जॉर्जीवा ने कहा कि व्यापार तनाव कोई नया नहीं है; अमेरिका, चीन और अन्य देशों के बीच शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं पहले से बनी हुई थीं, लेकिन अब स्थिति और बिगड़ गई है। उन्होंने आग्रह किया कि अमेरिका और चीन, जो विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, मिलकर एक निष्पक्ष और नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था के लिए समाधान खोजें, क्योंकि इससे छोटे देशों पर भी असर पड़ता है। उन्होंने कहा, “संरक्षणवाद दीर्घकाल में उत्पादकता को नुकसान पहुंचाता है, खासकर छोटे देशों में। उद्योगों को प्रतिस्पर्धा से बचाने की कोशिश नवाचार और उद्यमिता को भी नुकसान पहुंचाती है।” IMF की सिफारिशें IMF प्रमुख ने देशों से आग्रह किया कि वे मौद्रिक नीति में लचीलापन बनाए रखें, वित्तीय बाज़ारों की निगरानी करें, और आर्थिक सुधारों को जारी रखें। विकासशील देशों को अपने विनिमय दरों में लचीलापन बनाए रखने की सलाह दी गई, जबकि समृद्ध देशों से कमजोर देशों को सहायता बनाए रखने की अपील की गई। उन्होंने कहा, “हमें अधिक लचीली वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरत है, न कि विभाजन की ओर बहाव की। सभी देशों, बड़े हों या छोटे, को इस अनिश्चित दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।” recent visitors 38