मंत्री कश्यप ने जामगांव (एम) में केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन कर अद्यतन कार्यों का जायजा लिया

 रायपुर प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने आज दुर्ग जिले के पाटन विकासखण्ड  अंतर्गत ग्राम जामगांव (एम) में केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन कर अद्यतन कार्यों का जायजा लिया। वनमंत्री ने यथाशीघ्र गुणवत्ता पूर्ण निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा करने संबंधितों को निर्देशित किया। इस अवसर पर सांसद विजय बघेल व जिला एवं जनपद पंचायत के प्रतिनिधि भी साथ मौजूद थे। लघु वनोपजों के प्रसंस्करण हेतु लगभग 23 करोड़ की लागत से 110 एकड़  क्षेत्र में विभिन्न प्रसंस्करण इकाई स्थापित किया जा रहा है।  वन मंत्री कश्यप ने इन इकाई में प्रसंस्करण होने वाले उत्पाद तथा गोदामों में भंडारित वनोपज, मिलेट्स फसल, प्रसंस्करण पश्चात् वितरण आदि की भी जानकारी ली। वन मंत्री कश्यप ने सम्पूर्ण इकाई परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को एक पेड़ माँ के नाम पर लोगों से पौध रोपण करने की अपील की। इस अवसर पर डीएफओ चंद्रशेखर परदेशी, एसडीएम लवकेश ध्रुव एवं अन्य विभाग के अधिकारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। recent visitors 27

महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जल्द लागू किए जाने की SC की जज नागरत्ना ने जताई आशा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की जज बीवी नागरत्ना ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जल्द लागू किए जाने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने आशा जताई कि यह ऐतिहासिक कदम उनके जीवनकाल में ही साकार हो और यह दिन भारत के संविधान निर्माताओं द्वारा देखे गए वास्तविक समानता के सपने की पूर्णता का प्रतीक बनेगा। जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने जा रही हैं। वह Women Laws – From the Womb to the Tomb नामक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में बोल रही थीं। यह पुस्तक वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी द्वारा लिखी गई है। पुरुषों की जगह नहीं छीन रहे, बल्कि अपना हक वापस ले रहे उन्होंने कहा, "नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान है। मुझे उम्मीद है कि यह कानून हमारे जीवनकाल में लागू होगा। यह दिन महिलाओं द्वारा सदियों से चली आ रही समानता की लड़ाई की परिणति होगा, जिसे हमारे संविधान निर्माताओं ने एक आदर्श लक्ष्य के रूप में देखा था।" जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि महिलाएं सार्वजनिक जीवन और जिम्मेदारियों में अपनी उचित हिस्सेदारी की हकदार हैं। उन्होंने कहा, "वे पुरुषों की जगह नहीं ले रही हैं, बल्कि उस अधिकार क्षेत्र को वापस ले रही हैं, जिसे पितृसत्तात्मक सोच और भेदभाव ने उनसे छीन लिया था। हम पुरुष विरोधी नहीं हैं, हम महिला समर्थक हैं।" कानून आयोग से की खास अपील उन्होंने हाल ही में कानून आयोग के अध्यक्ष नियुक्त हुए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज डी. एन. महेश्वरी से अपील की कि वे महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करने वाले सभी कानूनों का अध्ययन करें और केंद्र सरकार को ऐसे सभी कानूनों को संशोधित करने के लिए सिफारिशें भेजें। समानता सिर्फ शब्दों में नहीं, व्यवहार में भी जरूरी कार्यक्रम में जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि संविधान में समानता का अधिकार केवल कागज़ों पर नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप में भी दिखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है कि देश की आधी आबादी को समान अवसर और प्रतिनिधित्व मिले। recent visitors 33

फतेहगढ़ में शादी समारोह में भोजन के बाद 125 लोगों की तबीयत बिगड़ गई, स्कूल को बनाया अस्पताल

मंदसौर  जिले के ग्राम फतेहगढ़ में शादी समारोह में भोजन के बाद लगभग 125 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। मंदसौर जिला अस्पताल से पहुंची टीम ने गांव के शासकीय स्कूल को ही अस्पताल बनाकर लोगों का उपचार किया। दोपहर तक लोगों की हालत में सुधार होने लगा था। बताया जा रहा है कि रस मलाई मिठाई खाने वाले लोग बीमार हुए हैं। इधर पहले विधायक विपिन जैन व बाद में सांसद सुधीर गुप्ता भी गांव में पहुंचे। सांसद गुप्ता ने सीएमएचओ के मौके पर नहीं पहुंचने पर नाराजगी भी जताई। 2 घंटे के इलाज में सुधरी हालत     जानकारी के अनुसार शनिवार को सुबह ग्राम फतेहगढ़ में एक शादी समारोह में भोजन का कार्यक्रम हुआ। यहां भोजन के बाद महिलाओं, पुरुषों व बच्चों को जी घबराने, मितली आने, उल्टी दस्त की शिकायत होने लगी।     तत्काल गांव में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं से उपचार की कोशिश के बाद विधायक विपिन जैन की सूचना पर जिला अस्पताल से टीम पहुंची। फतेहगढ़ गांव के स्कूल को अस्थायी अस्पताल बनाया गया।     लगभग दो घंटे उपचार के बाद अधिकांश लोग ठीक होने लगे। ग्राम फतेहगढ़ पहुंचे सांसद सुधीर गुप्ता ने भी मरीजों से मुलाकात की। सीएमएचओ और उनके उच्च स्टाफ के नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताते हुए तत्काल मेडिकल सुविधा बढ़ाने को कहा।   recent visitors 42

मोहन सरकार का बड़ा फैसला, अब शिक्षकों की लापरवाही सामने आने पर होगी वेतन में कटौती

 भोपाल  शिक्षा विभाग कार्यालय मे काम कर रहे शिक्षकों को अब स्कूल भेजे जाएंगे. इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. वहीं ट्रांसफर के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ जांच के भी निर्देश दिए गए हैं. दरअसल,  स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों की बैठक ली. उन्होंने कहा कि कई शिक्षक लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केंद्र, बोर्ड ऑफिस, जिला शिक्षा कार्यालय, बीआरसीसी और जनशिक्षक कार्यालयों में अटके हुए हैं. इन्हें कार्यमुक्त कर स्कूलों में भेजा जाएगा. इसके अलावा सभी शिक्षकों को अपने दैनिक कार्य समय और उपस्थिति को दर्ज करने के लिए शिक्षा पोर्टल 3.0 का उपयोग करना होगा. बिना पोर्टल पर उपस्थित के वेतन नहीं मिलेगा. जो शिक्षक निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करते हैं, उनके खिलाफ आवश्यक जांच और कार्रवाई की जाएगी. ट्रांसफर के बाद ज्वाइन नहीं करने वालों की होगी जांच     बैठक में निर्देश दिए गए कि ऐसे शिक्षकों की सूची भी बनाई जाए, जिनका पहले ट्रांसफर हो चुका है या जो अतिशेष में थे, लेकिन उन्होंने स्कूल ज्वाइन नहीं किया। मंत्री ने साफ कहा कि इन मामलों में अब और लापरवाही नहीं चलेगी।     अब पोर्टल पर उपस्थिति, तभी वेतन : शिक्षकों के लिए यह भी अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपनी पूरी उपस्थिति शिक्षा पोर्टल 3.0 पर दर्ज करें। बिना उपस्थिति फीड किए वेतन नहीं मिलेगा। अब सरकारी स्कूलों से शिक्षक गायब नहीं रह पाएंगे मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। स्वयं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश के कुछ जिलों में शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते, बल्कि उनकी जगह अन्य लोग पढ़ाने जाते हैं। इसके अलावा, कई शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है ऐसे करेंगे सख्ती     शिक्षकों की उपस्थिति अब बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज की जाएगी।     ‘सार्थक’ ऐप के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जाएगी।     इस ऐप की मदद से न सिर्फ लोकेशन की निगरानी होगी, बल्कि अन्य जरूरी गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जाएगी।     निर्देशों की अनदेखी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ वेतन में कटौती जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। गैर हाजिरी पर लगेगी लगाम सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की गैरहाजिऱी पर लगाम लगाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने इस दिशा में एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत प्रदेश के लगभग चार लाख शिक्षकों की उपस्थिति अब ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इसके लिए विभाग "सार्थक एप" का उपयोग करेगा। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होगी जुलाई में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जैसे ही स्कूल दोबारा खुलेंगे, शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस बार उपस्थिति दर्ज करने के लिए चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन) का उपयोग होगा, जिससे उन शिक्षकों पर रोक लगेगी जो अपनी जगह किसी और को पढ़ाने भेजते हैं। उज्जैन और नरसिंहपुर जिलों में सबसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह प्रणाली सबसे पहले उज्जैन और नरसिंहपुर जिलों में लागू की जाएगी। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए हर जिले से दो-दो प्रोग्रामरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति प्रदेश के कुल 99,145 स्कूलों में से सिर्फ 8,051 स्कूलों में ही विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इसका मतलब है कि 91,094 स्कूल अब भी इस अनिवार्य प्रणाली का पालन नहीं कर रहे हैं, जबकि यह व्यवस्था ऐच्छिक नहीं बल्कि आवश्यक रूप से लागू की गई थी। असफलता के पीछे का कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की यह व्यवस्था तीन बार यानि साल 2017, 2020 और 2022 में शिक्षा मित्र एप के माध्यम से लागू की गई, लेकिन हर बार असफल रही। शिक्षकों ने कभी स्मार्टफोन की कमी का हवाला दिया तो कभी नेटवर्क की समस्या का, जिससे यह प्रणाली कभी पूरी तरह से लागू नहीं हो सकी। अब नहीं होगी गड़बड़ी, उपस्थिति होगी सटीक ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पहले एम शिक्षा मित्र एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जाती थी। यह एप नेटवर्क न होने की स्थिति में भी उपस्थिति दर्ज कर लेता था और जैसे ही नेटवर्क मिलता, डेटा अपडेट हो जाता था। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई बार गड़बडय़िां सामने आईं। अब इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए शिक्षकों की उपस्थिति सार्थक एप के माध्यम से दर्ज की जाएगी, जिसमें चेहरा पहचान कर उपस्थिति ली जाएगी। जुलाई से अनिवार्य होगी "सार्थक एप"   स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति "सार्थक एप" से सुनिश्चित की जाएगी। इसे इस बार बेहतर ढंग से लागू किया जाएगा और जुलाई से इसका उपयोग अनिवार्य कर दिया जाएगा। छुट्टी के लिए भी एप पर कर सकेंगे आवेदन सार्थक एप केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे शिक्षक अपनी लोकेशन की जानकारी के साथ-साथ अन्य ज़रूरी कार्य भी कर सकेंगे। अब कर्मचारी व शिक्षक अवकाश के लिए आवेदन भी इसी एप के माध्यम से कर सकेंगे और शासन से होने वाला पत्राचार भी यहीं से किया जा सकेगा। recent visitors 54

निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त तहसील न्यायालय में दर्ज प्रकरणों, लंबित मामलों तथा सुनवाई के लिए निर्धारित तैयार प्रकरणों की विस्तृत जानकारी ली

कवर्धा दुर्ग संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर ने 19 अप्रैल 2025 को दोपहर 12 बजे सहसपुर लोहारा तहसील कार्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तहसील न्यायालय में दर्ज प्रकरणों, लंबित मामलों तथा सुनवाई के लिए निर्धारित तैयार प्रकरणों की विस्तृत जानकारी ली। संभागायुक्त ने त्रुटि-सुधार संबंधित प्रकरणों की विशेष रूप से समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि ऐसे सभी मामलों में पक्षकारों को अनिवार्य रूप से नोटिस जारी किए जाएं, जिससे समयबद्ध रूप से सुनवाई एवं निराकरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राजस्व संबंधी जनसमस्याओं का निराकरण संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने राजस्व निरीक्षकों एवं हल्का पटवारियों के लिए निर्देशित किया कि वे जांच प्रतिवेदन एवं समीकन प्रतिवेदन समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत कराना सुनिशित करें। साथ ही उन्होंने राजस्व कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखते हुए गति लाने पर सख्त निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान डीसीएस (रबी फसल) कार्य की भी समीक्षा की गई। राठौर ने इस दिशा में तत्परता दिखाते हुए दो दिवस के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर तहसीलदार विवेक कुमार गोहिया ने सभी आवश्यक जानकारियाँ प्रस्तुत कीं। निरीक्षण के दौरान नायब तहसीलदार नागेश तान्जय एवं हुलेश्वर कुमार पटेल भी उपस्थित थे। recent visitors 26

आगरा हिंसा : अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, करणी सेना नहीं वो योगी सेना, सरकार ने की फंडिंग

लखनऊ राणा सांगा पर राज्यसभा में दिए बयान के बाद छिड़े सियासी घमासान के बीच शनिवार को सपा मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन से मिलने संजय प्लेस स्थित उनके आवास पहुंचे। इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि करणी सेना नहीं ये योगी सेना है, जिसके लिए सरकार से फंडिंग हो रही है। सीएम के स्वजातीय लोगों ने जिस तरह तलवारें लहराईं, वो पिछड़ा, दलित अल्पसंख्यकों को डराना चाहते हैं। जिस तरह हिटलर सेना रखता था, लोगों की आवाज दबाने के लिए उसी तरह ये योगी सेना लोगों को डरा रही है। ताकत दिखाने नहीं आया हूं… अखिलेश यादव ने कहा कि जिस समय सांसद सुमन के यहां आने का फैसला लिया, तभी साफ किया कोई प्रदर्शन नहीं करना है। कोई ताकत नहीं दिखाई है। अपनी पार्टी के नेता के घर जाना है, जो जा रहा हूं।   पीडीए को डराने की कोशिश अखिलेश यादव ने सपा के राज्यसभा सांसद राजीलाल सुमन के आवास पर करणी सेना द्वारा किए गए हमले को लेकर कहा कि ये पीडीए को डराने की कोशिश की गई है। सांसद के आवास पर अचानक हमला नहीं हुआ। ये हमला साजिश के तहत हुआ है। ये एक सोची समझी चाल है। हमलावरों का इरादा जान लेने का था। दलितों-अल्पसंख्यकों को डराने कोशिश पूरी कोशिश की गई।  अखिलेश के आने से पूर्व ही किसी तरह के उपद्रव की आशंका को देखते हुए हरीपर्वत चौराहे से स्पीड कलर लैब तक सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। सपा कार्यकर्ताओं ने कोई हंगामा किया तो उनसे निपटने के लिए भी रणनीति तैयार की गई। आगरा में अलर्ट किया गया है, इसके साथ ही यहां फोर्स तैनात की गई है।   recent visitors 36

बेटी के नाम जमीन करने पर नाराज बेटा, मरने के बाद अंतिम संस्कार से इनकार; 22 घंटे पड़ी रही पिता की लाश

टीकमगढ़  मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के एक गांव में शनिवार दोपहर एक बुजुर्ग की मौत हुई। उनके जाने के बाद उनका बेटा अंतिम संस्कार करने से इनकार करने लगा। वह ऐसा इसलिए कर रहा था क्योंकि उसके पिता ने पैतृक जमीन उसकी बहन के नाम कर दी थी। इस वजह से पूरे गांव में तनाव का माहौल था और पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। युवक मानने को तैयार ही नहीं हो रहा है। ताल मऊ गांव में चिन्ना अहिरवार नाम के एक बुजुर्ग शुक्रवार शाम करीब 4:00 बजे इस दुनिया को छोड़ चले गए। गांव के लोग उनके अंतिम संस्कार की तैयारी के लिए उनके घर पहुंचने लगे। पर वहां तो विवाद की स्थिति देखने को मिली। शनिवार दोपहर 2:00 बजे तक अंतिम संस्कार नहीं हो पाया था। क्योंकि चिन्ना अहिरवार के इकलौते बेटे राजू अहिरवार ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। जिसके नाम जमीन वही करे क्रियाकर्म- बेटा राजू का कहना था कि उसके पिता ने पैतृक जमीन उसकी बहन के नाम कर दी है। इसलिए अब उनका अंतिम संस्कार करना उसकी जिम्मेदारी नहीं है। इस घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और राजू को समझाने की कोशिश की। इस कारण अर्थी 22 घंटे तक घर के बाहर रखी रही। पुलिस और समाज के लोग बेटे को समझाने की कोशिश कर रहे थे, पर उसपर कोई असर नहीं हुआ। उसका कहना है कि जिसके नाम जमीन है वही अंतिम संस्कार करेगा। तीन साल पुराना है विवाद गांव के बुजुर्ग रामकिशोर ने बताया कि चिन्ना अहिरवार ने करीब तीन साल पहले अपनी बेटी के नाम जमीन की रजिस्ट्री करवा दी थी। तभी से राजू इस बात से नाराज था और पिता से बातचीत तक बंद कर दी थी। अब पिता की मृत्यु के बाद भी वह अपनी नाराजगी नहीं छोड़ रहा है। गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है और पुलिस लगातार मौके पर डटी हुई है, ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने। तीन साल से नाराज है बेटा गांव के लोगों ने बताया कि करीब 3 साल पहले चिन्ना अहिरवार ने अपनी बेटी के नाम जमीन की रजिस्ट्री करा दी थी। तभी से उनका इकलौता बेटा राजू अहिरवार नाराज है। recent visitors 26