Wednesday, July 8, 2026 2:49 am

वन परिक्षेत्र चितरंगी के जंगलों में लगी भीषड़

वन परिक्षेत्र चितरंगी के जंगलों में लगी भीषड़ वन संपदा की सुरक्षा करने  कि आखिर किसकी जिम्मेदारी ‌? चितरंगी वन परिक्षेत्र चितरंगी के कक्ष क्रमांक आर 12 बगदरा कला के जंगल मे 24 अप्रैल 2025 को आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। बीट प्रभारी सुरेश प्रजापती ने मौके से पहुच कर अपने चौकीदार एवं ग्रामीणों के सहयोग से इस तपती धूप में आग को बुझाने केलिए कड़ी मेहनत किया । लेकिन गर्मियों में पेड़ो के पत्ते सभी झड़ जाते है जंगलो में खड़पतवार होने से हवाओ में आग फैलने में अधिक मौका रहता है। केलिन सभी के सूझबूझ से खड़पतवार की कटिंग कर आग पर काबू पाया गया। ग्रामीणों द्वारा आग को बुझाने में अपनी एक अहम जिम्मेदारी को दिखाया इसलिए बहुत जल्द ही विकराल रूप धारण किया आग को नियंत्रित कर लिया गया। स्थल से लौटते ही आग बेकाबू हो गई और बगदरा कला के जंगल से बढ़ कर चितरंगी अधियारी तक पहुंच गई है आंधी तूफान आग को बढ़ावा देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी रवि शेखर सिंह ने इस घटना पर नज़र बनाये रखने और उचित मार्गदर्शन करते रहे। अंततः एक तरफ सफलता हासिल हुई। और दूसरे दिन वही आग चितरंगी पहुंच गई श्री सिंह ने आम जन मानस से अपील किया हैं कि वन संपदा से जसमे सब कुछ मिलता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ऑक्सीजन मिलती है जो जीवन उसके बैगर एक पल जिन मुश्किल होता है। इसलिए सभी आम जन मानस से मेरी अपील हैं कि वन सुरक्षा अपनी नैतिक जिम्मेदारी है। अपने खुद के फायदे के लिए वन को छति नही पहुचाये। चितरंगी तहसील जनपद मुख्यालय होने के बावजूद एक भी फायर ब्रिगेड नहीं है। जंगल के आलावा किसानों की फसलें, घर,वाहन अनेकों प्रकार की आगजनी होती रहती है। शासन प्रशासन से क्षेत्रीयजनों की ओर से मांग की जाती है की फायर ब्रिगेड की ब्यवस्था कराई जाय जिससे जान माल की सुरक्षा हो सके। recent visitors 32

PM मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का विचार पूरे देश में तेज़ी से फैल रहा है, जो अत्यंत गर्व की बात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

समाज मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया को बढ़ावा दे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वदेशी का भाव भारत की आत्मा में रचा-बसा PM मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का विचार पूरे देश में तेज़ी से फैल रहा है, जो अत्यंत गर्व की बात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर लाल बाग में स्वदेशी मेले का समापन समारोह संपन्न इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वदेशी का भाव भारत की आत्मा में रचा-बसा है। वर्षों पूर्व शुरू हुई स्वदेशी जागृति आज 'मेक इन इंडिया' और 'मेड इन इंडिया' जैसे अभियानों के रूप में देश को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का विचार पूरे देश में तेज़ी से फैल रहा है, जो अत्यंत गर्व की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  लालबाग परिसर में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित स्वदेशी मेले के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत ने समय-समय पर अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन स्वावलंबन और स्वदेशी की भावना कभी क्षीण नहीं हुई। हमें इस भावना को और सशक्त बनाना है ताकि भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने महेश्वर जैसे स्थान पर स्थानीय कारीगरी और वस्त्र निर्माण को प्रोत्साहित कर स्वदेशी विचार को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया। समारोह में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, श्रवण चावड़ा, सुमित मिश्रा, स्वदेशी मेला प्रमुख योगेश मेहता एवं सिख समाज के बाबा तेजा सिंह सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे। समारोह में सिकल सेल बीमारी के प्रति जागरूकता हेतु एक पोस्टर का विमोचन भी किया गया। विभिन्न संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सम्मान भी किया गया।   recent visitors 30

दुश्मनों के दिल दहलती है भारत की ये 5 ‘हाईटेक’ मिसाइलें

नई दिल्ली जब आसमान गूंजता है, धरती कांपती है और दुश्मनों के दिल दहलते हैं, तो समझ जाइए कि भारत की सुपर हाईटेक मिसाइलें दहाड़ रही हैं! भारत ने पिछले कुछ समय में रक्षा क्षेत्र में जो तरक्की की है, उसका लोहा विश्व स्तर पर माना जाता है। यह बात खासकर मिसाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सबसे ज्यादा लागू होती है। हाइटेक मिसाइलें बनाने के मामले में भारत ने वो ऊंचाइयां छू ली हैं कि दुशमन देशों के लिए यह डर का दूसरा नाम बन चुकी हैं। आइए आज जानते हैं भारत की उन 5 सुपर हाईटेक मिसाइलों के बारे में, जो ताकत और तकनीक की बेजोड़ मिसाल हैं। भारत का लंबा हाथ है अग्नि-V ​महाशक्तिशाली और सबसे एडवांस तकनीक पर आधारित मिसाइलों की सूची में सबसे पहला नाम अग्नि-V का आता है। यह भारत की सबसे एडवांस्ड और हाईटेक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है। इसका नाम सुनते ही दुशमन के पसीने छूटते हैं क्योंकि ये 8,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता रखती है। आसान भाषा में कहा जाए, तो यह अमेरिका, यूरोप और एशिया के लगभग हर कोने तक पहुंच सकती है। इसे तकनीक और तबाही का सबसे अच्छा कॉम्बो इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है और "कैनीस्टराइज़्ड लॉन्च" टेक्नोलॉजी से लैस है। इसका मतलब है कि इसे कहीं भी तैनात करके फौरन फायर किया जा सकता है। इसकी MIRV क्षमता यानी एक साथ कई टारगेट पर हमला करने की क्षमता, इसे दुनिया के सबसे घातक हथियारों में शामिल करती है। सबसे तेज और घातक है ब्रह्मोस ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो आवाज की रफ्तार से तीन गुना तेज चलती है। यह इतनी हाईटेक है कि इसे जमीन, समुद्र और आसमान तीनों ही जगह से लॉन्च किया जा सकता है। कहने का मतलब है कि ये मिसाइल इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम करती है कि दुश्मन कहीं भी छिपा हो, ब्रह्मोस उसे ढूंढ निकालेगी। इसकी रेज 500 किलोमीटर से ज्यादा है। वहीं 1 मीटर के भीतर सटीक वार और रडार से छिपने की ताकत इसे बेजोड़ बनाती है। इसकी रफ्तार के आगे दुश्मन के पास किसी तरह की प्रतिक्रिया करने का समय नहीं बचता। टैंकों का काल नाग मिसाइल किसी भी फौज की ब़ड़ी ताकत उसके टैंक होते हैं और उन टैंको का काल है नाग मिसाइल। यह एक फायर एंड फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। जैसा कि कुछ-कुछ नाम से समझ में आता है यह इतनी हाईटेक है कि एक बार लॉन्च होने के बाद यह खुद लक्ष्य को पहचान कर उसे खत्म कर देती है। दरअसल नाग मिसाइल थर्मल इमेजिंग सीकर का इस्तेमाल करती है, जिससे यह दिन-रात, धूल-धुंआ और हर मौसम में काम कर सकती है। इसमें इस्तेमाल की गई टॉप अटैक तकनीक टैंकों के सबसे मजबूत हिस्से को भी भेद सकती है। भारतीय सेना के रेगिस्तानी युद्धक्षेत्रों में यह दुश्मन के टैंकों का काल बन चुकी है। हवा में मौत का तीर है अस्त्र मिसाइल ​यह भारत की पहली स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल है। जो कि 100 किलोमीटर दूर उड़ते दुश्मन के विमान को एक झटके में मार गिराने की ताकत रखती है। इस मिसाइल में एडवांस्ड रडार होमिंग सिस्टम लगा है, जो लक्ष्य को लॉक कर उसे नष्ट कर देता है। इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने के लिए इसमें खास ECCM तकनीक लगी है। यह तेजस, सुखोई-30 और मिराज जैसे फाइटर जेट्स के लिए भारत का सबसे एडवांस और भरोसेमंद हथियार बन चुका है। जमीन पर दुश्मन के सर्वनाश के लिए शौर्य मिसाइल शौर्य एक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जो जमीन से जमीन पर पारंपरिक ही नहीं बल्कि परमाणु हमला भी कर सकती है। इसकी रफ्तार Mach 7.5 है यानी साउंड से साढ़े सात गुना तेज। इस मिसाइल की खासियत यह है कि बहुत कम ऊंचाई पर उड़ने की वजह से यह दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमला कर पाती है। 700 से 800 किलोमीटर की रेंज के साथ यह बहुत ही एडवांस और हाइटेक मिसाइल की कैटेगरी में आती है। इसकी हाइपरसोनिक तकनीक भारत को खतरनाक से खतरनाक युद्ध के लिए तैयार करती है। recent visitors 35

3727 पदों पर होगी पटवारियों की भर्ती, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने पदों की संख्या में किया इजाफा

जयपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने पटवारी भर्ती में पदों की संख्या बढ़ा दी है। अब यह भर्ती 3727 पदों पर आयोजित की जाएगी, जबकि पहले 2020 पदों पर परीक्षा होनी थी। चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि पद बढ़ाए जाने के कारण अब आवेदन प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी, ताकि इच्छुक अभ्यर्थी दोबारा आवेदन कर सकें। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में अपने बजट भाषण के दौरान पटवारी भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की थी। उन्होंने कुल 4799 पदों पर भर्ती का वादा किया था, हालांकि फिलहाल 3727 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। चयन बोर्ड द्वारा पहले 2020 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे, जिन पर अब तक 6,43,639 उम्मीदवार आवेदन कर चुके हैं। पहले यह परीक्षा 11 मई को आयोजित होनी थी, लेकिन अब पदों में बढ़ोतरी के चलते भर्ती परीक्षा की तिथि भी आगे बढ़ा दी गई है। बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने बताया कि अब परीक्षा मई में नहीं, बल्कि अगस्त या सितंबर में आयोजित किए जाने की योजना है। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी किया गया है कि परीक्षा को एक ही पारी में आयोजित किया जाएगा। इससे परीक्षा संचालन और पारदर्शिता में आसानी होगी। आलोक राज ने कहा कि जल्द ही नए आवेदन कार्यक्रम और परीक्षा तिथि की विस्तृत जानकारी जारी की जाएगी। बोर्ड ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर बनाए रखें ताकि समय पर सभी अपडेट मिल सकें। जिन उम्मीदवारों ने पहले आवेदन कर दिया है, उन्हें फिर से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी, जबकि नए अभ्यर्थी बढ़े हुए पदों के अनुसार आवेदन कर सकेंगे। पटवारी भर्ती के इस बड़े अपडेट से लाखों युवा उम्मीदवारों को नया मौका मिलेगा। अब उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे बढ़े हुए पदों का लाभ उठाकर सरकारी नौकरी पाने की अपनी तैयारी को और मजबूत करें। recent visitors 44

रायपुर की भविष्य की कनेक्टिविटी के लिए ऐतिहासिक कदम, विधायक राजेश मूणत ने कहा- अब बदल रही है तस्वीर

रायपुर पूर्व मंत्री और रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 7 क्षेत्र का आज निरीक्षण किया गया. इस निरीक्षण में रेलवे प्रशासन, रायपुर नगर निगम, पुलिस विभाग, कलेक्टर, एसपी, डीआरएम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्लेटफॉर्म नंबर 7 के पास रेलवे द्वारा बनाई जा रही सड़क कार्य का अवलोकन किया. इसके साथ ही शुक्रवारी बाजार से पहाड़ी चौक तक PWD विभाग द्वारा किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया गया. इस दौरान रेलवे और PWD के अधिकारियों के बीच सड़क निर्माण को लेकर मतभिन्नताओं पर चर्चा हुई और आपसी शंकाओं का समाधान किया गया. विधायक राजेश मूणत सहित डीआरएम दयानंद, कलेक्टर गौरव सिंह और निगम आयुक्त विश्वदीप ने भी अपने सुझाव दिए. अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई, जिसमें मुआवजा देने का कार्य तहसीलदार और एसडीएम के माध्यम से किया जाएगा. इसके अलावा रायपुर की भविष्य की ट्रैफिक और कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए सड़क निर्माण की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई, जिससे आने वाले 50 वर्षों के लिए शहर को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी. इस योजना का उद्देश्य प्लेटफॉर्म 7 को गुढ़ियारी, रामनगर, कबीरनगर, कोटा सहित रायपुर के प्रमुख इलाकों से सीधे जोड़ना है. यह कार्ययोजना यात्रियों को आसान और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के साथ-साथ ट्रैफिक की समस्या को भी हल करेगी. साथ ही, रायपुर पश्चिम क्षेत्र और गुढ़ियारी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नए विकास के अवसर पैदा होंगे. मुख्य विशेषताएं और कार्य     पहाड़ी चौक से शुक्रवारी बाजार होते हुए प्लेटफार्म-7 तक सड़क चौड़ीकरण एवं एक्सप्रेस-वे से डायरेक्ट कनेक्टिविटी.     यह प्रोजेक्ट रायपुर की सबसे बड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक होगा.     तेलघानी नाका ब्रिज के नीचे से प्लेटफार्म-7 तक अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित.     20 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी.     PWD और राजस्व विभाग ने सर्वे कार्य लगभग पूरा कर लिया है.     PWD को 15 मई तक विस्तृत प्रेजेंटेशन देने के निर्देश विधायक मूणत द्वारा दिए गए हैं. विधायक राजेश मूणत ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार जनहितैषी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में सुशासन ला रही है. कांग्रेस शासनकाल में रायपुर शहर की हालत बदहाल हो गई थी. न सड़कें बन रही थीं, न नालियां, न सौंदर्यीकरण. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास की नई रफ्तार दिखाई दे रही है. उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना लाखों लोगों को सीधी राहत देगी, जो पहले एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने के लिए फाफाडीह और तेलघानी होकर लंबा रास्ता तय करते थे. गुढ़ियारी क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान भी इस योजना से संभव होगा. रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 1 और 7 दोनों को स्मार्ट कनेक्टिविटी के साथ शहर से जोड़ने की यह बहुप्रतीक्षित योजना अब जमीन पर उतरने जा रही है, जो रायपुर शहर के भविष्य को बेहतर और संगठित स्वरूप देने में मील का पत्थर साबित होगी. recent visitors 28

जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में हीट वेव का असर

जयपुर प्रदेश में आज 8 जिलों में तीव्र हीट वेव्स चलने का अलर्ट जारी हुआ है। इसमें जैसलमेर और बाड़मेर में ऑरेंज श्रेणी का अलर्ट जारी किया गया है। यहां दिन के साथ रात के समय भी भयंकर हीट वेव्स का असर देखने को मिल रहा है। वहीं मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी किए हैं कि अगले चार दिनों तक प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में हीट वेव्स चलेगी। वहीं मई के पहले सप्ताह में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। विक्षोभ के प्रभाव से मई के पहले सप्ताह के दौरान प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर चल सकता है। वहीं प्रदेश के तापमान की बात करें तो बीते 24 घंटों के दौरान बाड़मेर सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, वहीं प्रदेश के 19 शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया है। अगले 4 दिनों में इसमें तेजी से बढ़ोतरी होने होने का अनुमान है। मौसम विभाग का कहना है कि इस दौरान अधिकतम तापमान में 3 डिग्री तक इजाफा हो सकता है। इस दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के साथ रात में भी हीट वेव चलेगी। प्रदेश के अन्य शहरों का तापमान इस प्रकार रहा- जैसलमेर में 43.5 डिग्री, बीकानेर में 43.2, चित्तौड़गढ़ में 42.8, जयपुर में 39.5, चूरू में 41.3, गंगानगर में 43.5, पिलानी में 40.5, करौली में 40.1, नागौर में 38.8, जालौर में 40.3 व धौलपुर में 43.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। recent visitors 37

स्लीपर बसों में रोज क्षमता से ज्यादा ढोया जा रहा वजन, नहीं हो रही कार्रवाई

 इंदौर हाईवे पर रोज ऐसी यात्री बसें देखी जा सकती हैं, जिनमें सीटिंग और स्लीपर व्यवस्था के साथ बस की छत पर भारी मात्रा में सामान लदा होता है। इससे दुर्घटना की आशंका होती है। मगर अब ओवरलोडेड बसों का यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल हुई है, जिसमें पूरे देश में ओवरलोडेड यात्री बसों का मुद्दा उठाया गया है। कहा गया है कि ओवरलोडेड यात्री बसें न सिर्फ लोगों के जीवन के लिए गंभीर खतरा हैं, बल्कि ये पर्यावरण को भी प्रदूषित करती हैं। जीएसटी छुपाने से राजस्व का भी नुकसान बसों पर लदे सामान का जीएसटी छुपाने से राजस्व का भी नुकसान होता है। यह याचिका वकील संगम लाल पांडेय ने दाखिल की है। इसमें केंद्र और सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया है। इंदौर से अन्य शहरों और राज्यों तक जाने वाली 400 स्लीपर बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक वजन भरा जा रहा है। केबिन में भर देते हैं, 40 से 50 टन वजन बसों की छत और नीचे केबिन में 40 से 45 टन तक वजन भर दिया जाता है। इससे यात्रियों की जान भी जोखिम में रहती है, लेकिन परिवहन और यातायात विभाग की सुस्ती के कारण इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बसों पर कार्रवाई नहीं होती शहर की सड़कों से ये बसें खुलेआम निकलती हैं और गंतव्य तक पहुंचती हैं, लेकिन कहीं भी कार्रवाई नहीं होती है। प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी होने से इंदौर से अन्य राज्यों तक बड़ी मात्रा में सामान भेजा जाता है। यह ट्रांसपोर्ट की अपेक्षा स्लीपर बसों से पहुंचा रहे हैं। महाराष्ट्र, राजस्थान और यूपी जाने वाली बसों में भरते हैं सामान इंदौर शहर से प्रतिदिन 200 स्लीपर बसें रवाना होती हैं और 200 आती हैं। इनमें टनों वजन भर दिया जाता है। इंदौर से सर्वाधिक स्लीपर बसें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जाती हैं। सूत्रों का कहना है उप्र की तरफ जाने वाली बसों में सर्वाधिक सामान भरा जाता है। काटन, किराना, मशीनरी, प्याज आदि का बड़ी मात्रा में परिवहन स्लीपर बसों से किया जाता है। वहीं महंगे आइटम और जल्दी पहुंचने वाले सामान भी इन्हीं से पहुंचाया जा रहा है। सीट के नीचे बना रखे हैं केबिन अधिकांश स्लीपर बसों में सीट के नीचे बड़े केबिन बना रखे हैं। इनमें ठूस-ठूस कर लगेज भर देते हैं। बस की छत पर भी सामान रखा जाता है। कई बसें तो यात्रियों से ज्यादा लगेज ढोती हैं। लगेज बस संचालकों की कमाई का हिस्सा बन चुका है। recent visitors 28