WWE Backlash :रैंडी ऑर्टन बैकलैश में जॉन सीना से लड़ने की तैयारी कर रहे

नई दिल्ली रेसलमेनिया के बाद वाला मंडे नाइट रॉ (Monday Night Raw) बहुत ही धमाकेदार रहा। इसमें पुरानी दुश्मनी फिर से शुरू हुई। एक बड़ा उलटफेर हुआ, नए चैंपियन बने, एक बड़ा सितारा वापस आया और WWE ने अपने सबसे बड़े आकर्षण को मेन इवेंट में शामिल किया। रेसलमेनिया 41 के बाद वाला मंडे नाइट रॉ यादगार रहा। बैकलेश पर फैंस की निगाहें अब सबकी निगाहें आगे आने वाले मुकाबलों पर हैं। रेसलमेनिया बैकलैश (WrestleMania Backlash) कुछ ही हफ्तों में होने वाला है। उसके कुछ हफ्तों बाद सैटरडे नाइट्स मेन इवेंट (Saturday Night’s Main Event) होगा। ऐसे आइए बैकलेश मुकबलों की लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़ी सभी जानकारियों के बारे में जानते हैं। बैकलेश मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़ी सभी जानकारियां     बैकलैश कब है? WWE बैकलैश का आयोजन शनिवार, 10 मई को होगा।     बैकलैश किस समय शुरू होगा? भारतीय दर्शकों के लिए यह कार्यक्रम भारतीय समयानुसार सुबह 3:00 बजे से शुरू होगा। वहीं मेन इवेंट शुरू होने से पहले एक घंटे के प्री शो का आयोजन किया जाएगा।     बैकलैश कहां हो रहा है? बैकलैश का आयोजन सेंट लुईस के एंटरप्राइज सेंटर में होगा।     भारत में कहां देख सकेंगे बैकलेश के मुकाबले? भारतीय दर्शकों के लिए यह कार्यक्रम नेटफ्लिक्स पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा। बैकलेश में होंगी दमदार कहानियां मंडे नाइट रॉ में बहुत कुछ हुआ। एक पुरानी दुश्मनी फिर से शुरू हो गई। इसका मतलब है कि कुछ पुराने दुश्मन एक बार फिर आमने-सामने होंगे। कुछ बड़े उलटफेर हुआ, जिससे कई लोग हैरान रह गए। नए चैंपियन बने, जिन्होंने अपने विरोधियों को हराकर खिताब जीता। एक बड़ा सितारा वापस आया, जिसे देखकर दर्शक बहुत खुश हुए। अब देखते हैं कि बैकलैश में कौन-कौन से पहलवान लड़ सकते हैं। मंडे नाइट रॉ के बाद यह कहना मुश्किल है, लेकिन कुछ संभावित नाम सामने आ रहे हैं। रेसलमेनिया 41 के बाद वाला मंडे नाइट रॉ बहुत ही रोमांचक था। अब देखना यह है कि बैकलैश में क्या होता है। recent visitors 44

जापान को पीछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत, अब सिर्फ ये देश आगे

नई दिल्ली भारत की जीडीपी 2025 में जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से जारी किए गए वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अप्रैल 2025 में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत की नॉमिनल जीडीपी बढ़कर 4,187.017 अरब डॉलर हो जाएगी। वहीं, जापान की जीडीपी का आकार 4,186.431 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। भारत मौजूदा समय में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जीडीपी में अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान, भारत से आगे हैं। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है और इस दौरान जीडीपी का आकार 5,069.47 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं, 2028 तक भारत की जीडीपी का आकार 5,584.476 अरब डॉलर होगा जबकि इस दौरान जर्मनी की जीडीपी का आकार 5,251.928 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। आईएमएफ के अनुमानों में कहा गया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन 2025 के साथ आने वाले करीब एक दशक तक अपनी रैंकिंग बरकरार रख सकते हैं। आईएमएफ ने 2025 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर को घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले जनवरी आउटलुक रिपोर्ट में यह आंकड़ा 6.5 प्रतिशत पर था रिपोर्ट में बताया गया कि विकास दर में कमी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ की अनिश्चितताओं के कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी हुई है। अगले दो वर्षों में दुनिया की एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था होगी, जो कि 6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा, “हमारे अप्रैल 2025 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में 2.8 प्रतिशत की कमजोर वैश्विक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिसमें 127 देशों की वृद्धि दर में गिरावट शामिल है, जो विश्व जीडीपी का 86 प्रतिशत है। recent visitors 36

उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग ने सुव्यवस्थित और सुनियोजित विकास के लिए 54 नगर पालिकाओं और 124 नगर पंचायतों के साथ किया मंथन

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने नगर सुराज संगम में आज भी प्रशिक्षण की कमान खुद संभाली और नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों के अध्यक्षों को पीपीटी (Power Point Text) के जरिए शहरों के विकास एवं जनसुविधाएं विकसित करने का रोडमैप समझाया। उन्होंने नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्षों के साथ ही मुख्य नगर पालिका अधिकारियों और अभियंताओं से संवाद कर अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना पर चर्चा की। साव ने डेढ़ घंटे के अपने प्रेजेंटेशन में अटल विश्वास पत्र के प्रमुख बिंदुओं, नगरीय निकायों की चुनौतियों, नागरिकों की अपेक्षाओं, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा, शहरी वानिकी, शहरी परिवहन, स्ट्रीट लाइटिंग, कर संग्रहण और सिटी डेव्हलपमेंट प्लान के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम-सह-कार्यशाला के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्षों से कहा कि आप लोग शहर के प्रथम नागरिक हैं, आपका शहर आपका घर है। शहरवासियों को अपना परिजन मानते हुए उनकी चिंता करें, उनकी बेहतरी के लिए काम करें। शहर का विकास, साफ-सफाई और जन सुविधाएं विकसित करना आपकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यशाला में सहभागिता कर रहे सभी लोगों से पूरे मनोयोग से कार्यशाला में मौजूद रहने को कहा। यहां सिखाई जा रही बातों को एकाग्रता और तन्मयता से आत्मसात करने को कहा। साव ने नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपके निकाय उभरते हुए शहर हैं। उन्हें विकास के पथ पर दौड़ाना है। सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास से ही शहर स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनेंगे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि आप लोग अपने शहरों में ऐसा काम करें जो यादगार हो, शहर को नई दिशा देने वाला हो, नागरिकों की सुख-सुविधाएं बढ़ाने वाला हो, शहर को सुंदर, स्वच्छ और सुविधापूर्ण बनाने वाला हो। साव ने शहरों के प्रत्येक घर में रोज पर्याप्त जल की आपूर्ति को बड़ी चुनौती बताते हुए रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर कड़ाई से अमल करने को कहा। साव ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से संसाधनों के बेहतर उपयोग, नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहर को सुविधापूर्ण बनाने देश-विदेश में स्थानीय स्वशासनों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और श्रेष्ठ प्रथाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने पार्षदों के लिए भी संभागीय स्तर पर इस तरह के प्रबोधन कार्यक्रम-सह-कार्यशाला के आयोजन की बात कही। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने ’’नगर सुराज संगम’’ में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि नगरीय निकायों के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को केंद्र व राज्य सरकार तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) की योजनाओं की जानकारी देने इसका आयोजन किया गया है। इस दौरान नगरीय निकायों से संबंधित अधिनियमों और उनके महत्वपूर्ण प्रावधानों की भी जानकारी दी जाएगी। यह संगम दोनों तरफ से संवाद का मंच है। इस मंच के माध्यम से आप लोग नगरीय प्रशासन और विकास से जुड़ी अपनी शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान कर सकते हैं। इस कार्यशाला का आप लोग पूरा लाभ उठाएं। नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक आर. एक्का और सुडा के सीईओ शशांक पाण्डेय भी कार्यशाला में मौजूद थे। recent visitors 34

MP में गेहूं खरीद को लेकर बड़ा अपडेट, इन किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका, अब तक 76 लाख मीट्रिक टन गेहूं

भोपाल  मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद का आंकड़ा 85 लाख मीट्रिक टन (एमटी) रहने का अनुमान है। यह सरकार की ओर से निर्धारित किए गए खरीद के लक्ष्य 80 लाख एमटी से अधिक है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि करीब 8.76 लाख पंजीकृत किसानों से 76 लाख एमटी गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खरीद प्रक्रिया जिसमें केवल पंजीकृत किसानों से ही तौल करना शामिल है, अतिरिक्त पांच दिनों तक जारी रहेगी। राज्य ने 15 मार्च को गेहूं खरीद अभियान शुरू किया था और अपने 4,000 निर्धारित खरीद केंद्रों पर 2,600 रुपए प्रति क्विंटल की कीमत की पेशकश की थी। पिछले साल मध्य प्रदेश में 5.85 लाख किसानों से 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। जल्द ही अपडेटेड आंकड़े आने की उम्मीद है, मंगलवार तक खरीद 81 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। सरकार को अब इस सीजन में कुल 85 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद होने की उम्मीद है। घर बैठे करा सकते हैं नामांकन इसके अलावा सरकार ने घोषणा की कि अब तक किसानों को उनकी उपज के भुगतान के लिए 16,472 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। कार्यों को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार ने एसएमएस के माध्यम से किसानों को पंजीकृत किया और एक समर्पित वेब या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर से नामांकन करने का विकल्प प्रदान किया। किसान ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और तहसील कार्यालयों में स्थित सुविधा केंद्रों पर भी पंजीकरण करा सकते हैं। 175 रुपए का मिलेगा बोनस केंद्र सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी संशोधित किया है, इसे 2025-26 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2,425 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। हालांकि, मध्य प्रदेश 2,600 रुपए प्रति क्विंटल का खरीद मूल्य प्रदान करेगा, जिसमें 175 रुपए प्रति क्विंटल की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी शामिल है। मध्य प्रदेश में सीहोर, उज्जैन, नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और देवास जिलों में मालवा पठार के कम वर्षा वाले क्षेत्र में शरबती और डरम जैसी कुछ कम सिंचित उच्च उपज वाली किस्में उगाई जाती हैं। इन सभी किस्मों में से शरबती सबसे पसंदीदा किस्म है क्योंकि इसमें उच्च प्रोटीन होता है।  किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका मध्‍य प्रदेश में गेहूं की एमएसपी पर सरकारी खरीद की प्रक्रिया 5 मई को खत्‍म हो गई, लेकिन सरकार ने अभी भी कई किसानों को 9 मई तक गेहूं बेचने का मौका दिया है. ऐसे में जानिए आखिर पूरा मामला क्‍या है और कौन-से किसान फसल बेचने के लिए पात्र हैं… दरअसल, ऐसे किसान जिन्‍होंने स्‍लॉट तो बुक किए थे, लेकिन उनकी वैलिड‍िटी खत्‍म हो गई है, उन्‍हें 9 मई तक अपनी फसल बेचने का मौका दिया गया है. इसके लिए अफसरों को डीएसओ लॉगिन के जरिए स्‍लॉट की अवधि‍ बढ़ाने के लिए कहा गया है. इसे लेकर खाद्य विभाग ने अफसरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. गेहूं की सबसे ज्‍यादा सरकारी कीमत MP में वहीं, सरकार ने 5 मई तक खरीद के लिए 30 अप्रैल तक स्‍लॉट बुक करने की मोहलत दी थी, लेकिन खरीद के अंतिम दिन भी किसानों को ऑफलाइन स्‍लॉट बुक करने का ऑप्‍शन दिया गया और वे फसल बेच सके. मालूम हो कि प्रदेश में गेहूं खरीद की प्रक्रिया 15 मार्च से 5 मई तक चली. इस दौरान किसानों को 2425 रुपये प्रत‍ि क्विंटल एमएसपी और 175 रुपये प्रत‍ि क्विंटल बोनस का भुगतान किया गया यानी 2600 रुपये प्रति क्विंटल. हालांकि, उपज में नमी और क्‍वालिटी के चलते कीमत में अंतर आना सामान्‍य है. प्रदेश में हुआ गेहूं का बंपर उत्‍पादन मध्‍य प्रदेश में इस साल ग‍ेहूं की अच्‍छी फसल हुई है, जिसके चलते मंडियों में नई फसल की बंपर आवक दर्ज की गई. राज्‍य के सीएम मोहन यादव ने दावा किया कि प्रदेश में किसानों को गेहूं की जितनी कीमत मिल रही है, वह सभी राज्‍यों के मुकाबले सबसे ज्‍यादा है. व्‍यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि एमएसपी और बोनस मिलने के कारण किसानों ने निजी व्‍यापारियों की जगह सरकारी एजेंसियाे को गेहूं बेचना पसंद किया. बीते हफ्ते ही केंद्र ने मध्‍य प्रदेश का गेहूं खरीद लक्ष्‍य मिल‍ियन टन बढ़ा दिया था. 312 LMT है खरीद का अनुमानित लक्ष्‍य वहीं, देश के अन्‍य राज्‍यों में भी केंद्रीय पूल के तहत गेहूं की खरीद चल रही है. पिछले महीने केंद्र सरकार ने सभी प्रमुख राज्‍यों में गेहूं खरीद को लेकर आंकड़े जारी किए थे. इसमें 30 अप्रैल 2025 तक रबी मार्केटिंग सीजन यानी आरएमएस 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद के लिए तय 312 लाख मीट्रिक टन के अनुमानित लक्ष्य की तुलना में केंद्रीय पूल में 256.31 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है. इस साल 30 अप्रैल तक खरीदे गए गेहूं की मात्रा पिछले साल की इसी तारीख को हुई कुल खरीद 205.41 लाख मीट्रिक टन से 24.78 प्र‍तिशत ज्‍यादा है. प्रमुख गेहूं उत्‍पादक राज्‍यों पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्‍यादा खरीद हुई है. recent visitors 34

अखाड़े में बदला स्कूल प्राँगण, प्रिंसिपल-लाइब्रेरियन की मारपीट का वीडियो वायरल

 खरगोन मध्य प्रदेश के एक स्कूल में प्रिंसिपल और लाइब्रेरियन के बीच झगड़ा हो गया। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों आपस में हाथापाई करने लगीं। दोनों ने एक दूसरे को थप्पड़ मारे और बाल खींचे। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद दोनों महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया गया है। दोनों ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। एमपी के खरगोन की घटना घटना मध्य प्रदेश के खरगोन के एकलव्य आदर्श स्कूल में हुई। यह जगह भोपाल से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। वीडियो में दोनों महिलाएं बहस करती हुई दिखाई दे रही हैं। गुस्से में प्रिंसिपल ने लाइब्रेरियन को थप्पड़ मार दिया और उसका फोन छीनकर जमीन पर फेंक दिया। इसके बाद दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। दोनों को फिलहाल असिस्टेंट कमिश्नर प्रशांत आर्य के ऑफिस में ट्रांसफर कर दिया गया है। पहले फोन तोड़ा, टोकने पर दोबारा फेंका वीडियो में लाइब्रेरियन प्रिंसिपल से पूछती है, 'मैडम, आपकी हिम्मत कैसे हुई? आपने मुझे थप्पड़ कैसे मारा? आपकी हिम्मत कैसे हुई?' वह शिकायत करती है कि उसका फोन टूट गया है। प्रिंसिपल फोन उठाती है और उसे फिर से फेंक देती है, जिससे वह और भी बुरी तरह टूट जाता है। लाइब्रेरियन पूछती है, 'आपने मेरा फोन कैसे तोड़ा? आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे थप्पड़ मारने की?' प्रिंसिपल का दुपट्टा खींचा फिर शुरु हुई 'कैटफाइट' इसके बाद प्रिंसिपल अपने फोन में बहस रिकॉर्ड करने लगती है। लाइब्रेरियन प्रिंसिपल के हाथ पर थप्पड़ मारती है, जिससे दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो जाती है। लाइब्रेरियन प्रिंसिपल का दुपट्टा खींचती है। जवाब में प्रिंसिपल उसे पकड़ लेती है और उसे खूब मारती है। लाइब्रेरियन बार-बार पूछती है, 'तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की?' दोनों एक दूसरे के बाल खींचती रहती हैं और एक दूसरे को मारती रहती हैं। जुबानी जंग के बाद हुई हाथापाई सूत्रों के अनुसार पहले दोनों के बीच जुबानी जंग चल रही थी। अचानक से विवाद इतना बढ़ा कि प्रिंसिपल ने लाइब्रेरियन के गाल पर तमाचा जड़ दिया। यही नहीं प्रिंसिपल प्रवीण दाहिया ने मधुरानी का फोन छीनकर भी फेंक दिया और मधुरानी पर एक के बाद एक लगातार थप्पड़ों की बौछार कर दी। पुलिस में लिखवाई शिकायत इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मारपीट के बाद दोनों प्रिंसिपल और लाइब्रेरियन ने एक-दूसरे के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने दोनों को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। इस दौरान प्रिंसिपल ICU में भर्ती हो गईं और लाइब्रेरियन मधुरानी को भी वार्ड में भर्ती किया गया। कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश खरगोन की कलेक्टर भव्या मित्तल ने इस पूरे मामले के जांच के आदेश दिए हैं। बता दें कि एकलव्य आदर्श आवासीय परिसर को दिल्ली से संचालित किया जाता है। इस स्कूल में बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल के लिए हर साल लगभग 5 करोड़ रुपए भेजे जाते हैं। महिला सफाई कर्मचारी ने कराया बीच-बचाव वीडियो में पीछे से एक लड़का कहता हुआ सुनाई देता है, 'मम्मा, रहने दो।' कोई भी बीच-बचाव नहीं करता है, जब तक कि एक महिला शांति से दोनों लड़ रही महिलाओं को पीछे हटने के लिए नहीं कहती। सोशल मीडया पर हो रही चर्चा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने इसे 'बिल्ली की लड़ाई' बताया, तो दूसरे ने तीसरी महिला की तारीफ की जिसने झगड़ा रोकने की कोशिश की। एक यूजर ने X पर लिखा, 'सबसे अच्छी तो सफाई करने वाली महिला है, जिसने उन्हें अलग करने की कोशिश की। बाकी दोनों पढ़ी-लिखी हो सकती हैं, लेकिन वह ज्यादा समझदार है।' recent visitors 31

कोरंडम खदान एक बार फिर चर्चा में, भारी पैमाने पर वनक्षेत्र साफ किया जा रहा , वन विभाग की प्रतिक्रिया

बीजापुर भोपालपटनम ब्लाक के कुचनूर क्षेत्र की वर्षों पुरानी कोरंडम खदान एक बार फिर चर्चा में है। इस बार खनन से पहले सैकड़ों पेड़ों की चुपचाप कटाई को लेकर इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है। बात यह है कि जहां मौके पर भारी पैमाने पर वनक्षेत्र साफ किया गया है। वहीं वन विभाग और खनिज विभाग दोनों ही इस गतिविधि से अनभिज्ञ होने का दावा कर रहे हैं। करीब तीन दशक से बंद पड़ी खदान को लेकर हाल के दिनों में गतिविधियां तेज हुई हैं। भारी वाहनों की आवाजाही, मजदूरों की हलचल और वन क्षेत्र में साफ-सफाई जैसी गतिविधियां देखने को मिली हैं। लेकिन, इस पूरे स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड है, न ही यह स्पष्ट है कि किस एजेंसी या ठेकेदार के अधीन यह कार्य हो रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्य छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CMDC) के अंतर्गत किया जा रहा है। जिसने रायपुर के एक ठेकेदार को खदान संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, यहां न तो CMDC का कोई स्थानीय कार्यालय मौजूद है, न ही उसके कोई कर्मचारी है। पेड़ों की कटाई पर गंभीर सवाल स्थानीय निवासियों का कहना है कि खदान क्षेत्र के आसपास सैकड़ों सागौन व अन्य कीमती पेड़ काटे जा चुके हैं। दो साल पहले  300 पेड़ों की कटाई की अनुमति ली गई थी, लेकिन अब बिना किसी सार्वजनिक सूचना या प्रक्रिया के दोबारा भारी कटाई की गई है। यह भी गौर करने वाली बात है कि खदान स्थल तक पहुँचने का रास्ता वन विभाग के नाके के पास से होकर गुजरता है, बावजूद इसके वन अमला इस कटाई से अनजान बना हुआ है। वन विभाग की प्रतिक्रिया इस विषय में जब आईटीआर के रेंजर रामायण मिश्रा  से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र 'उत्पादन विभाग' को हैंडओवर किया जा चुका है और पेड़ों की कटाई की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे स्थल का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करेंगे। खनिज विभाग भी अनभिज्ञ स्थानीय खनिज अधिकारियों ने भी इस काम के बारे में किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी होने से इनकार किया है। यदि वास्तव में कोई कानूनी प्रक्रिया के तहत खनन कार्य शुरू हुआ है, तो उसकी जानकारी और दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध क्यों नहीं हैं? प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह मुद्दा उठाया है कि क्या खदानों से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव अब भी बना हुआ है? यदि यह कार्य CMDC के माध्यम से किया जा रहा है, तो क्या जिले के अधिकारियों को सूचना देना जरूरी नहीं था?   recent visitors 38

डिजिटल गवर्नेंस, आधार-अनुप्रयोग और तकनीकी नवाचारों पर होगा मंथन

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग द्वारा 8 और 9 मई 2025 को "AI भारत @ MP – कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधार और डिजिटल गवर्नेंस में नवाचार" विषय पर कार्यशाला का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया जाएगा। दो दिवसीय कार्य़शाला प्रातः 9:30 से सांय काल 5:30 बजे तक आयोजित होगी। कार्यशाला डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी, समावेशी और नागरिकोन्मुखी बनाने के लिये ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) और ‘आधार’ (UIADI) के प्रयोग की संभावनाओं पर केंद्रित होगी। कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सरकारी प्रतिनिधियों की भागीदारी से नॉलेज शेयर और विचार-विमर्श किया जायेगा। कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अपर मुख्य सचिव संजय दुबे राज्य की डिजिटल रणनीति पर प्रकाश डालेंगे। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के सीईओ नंद कुमारम, डिजिटल नीति पर राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा करेंगे। मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी देंगे। कार्यशाला का पहला दिन 8 मई कार्यशाला का पहले दिन प्रशासन को गतिशील बनाने में AI नवाचार और आधार के प्रयोग पर केंद्रित रहेगा। इसमें IIT इंदौर की प्रो. अरुणा तिवारी और IIM इंदौर के डीन प्रो. प्रशांत सलवान AI अनुसंधान में शिक्षा जगत की भूमिका पर चर्चा करेंगे। UIDAI के डीडीजी आमोद कुमार और DBT सचिवालय के अपर सचिव सौरभ कुमार तिवारी आधार-सक्षम लाभ वितरण पर जानकारी देंगे। AWS, Oracle और India AI Mission जैसे तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ भी वास्तविक AI अनुप्रयोगों को प्रस्तुत करेंगे। कार्यशाला में प्रयागराज कुंभ जैसे बड़े आयोजनों में AI के प्रयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, अधोसंरचना और सुरक्षा क्षेत्रों में इसके प्रभाव और भविष्य की दिशा पर केंद्रित सत्र होंगे। कार्यशाला में AI मोरल्स और सरकारी विभागों में AI की मदद से कैपेसिटी बिल्डिंग पर विशेष चर्चा की जायेगी। कार्यशाला का दूसरा दिन 9 मई कार्यशाला के दूसरे दिन "डिजिटल इंडिया स्टेट कंसल्टेशन वर्कशॉप" आयोजित की जायेगी, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए संवाद और सहयोग पर बल दिया जाएगा। कार्यशाला में DigiLocker, API Setu, UMANG, मेरी पहचान और myScheme जैसे प्रमुख एप पर विशेष प्रेजेंटेशन सत्र आयोजित किये जायेंगे। साथ ही प्रमाणीकरण सेवाओं, साइबर सुरक्षा, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम 2023, eSanjeevani, DIKSHA, और MSH प्लेटफ़ॉर्म्स पर भी सत्रों के माध्यम से गहन चर्चा की जायेगी। कार्यशाला का उद्देश्य उभरती तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना और मध्यप्रदेश को तकनीकी रूप से सक्षम व फ्यूचर-रेडी राज्य के रूप में स्थापित करना है।   recent visitors 33