Tuesday, July 7, 2026 6:05 am

पाकिस्तानी सेना जिन आतंकी लॉन्च पैड से ड्रोन हमले कर रहे थी, भारतीय सेना ने जमींदोज कर दिया

नई दिल्ली पाकिस्तानी सेना बीती रात से भारत के सैन्य और रिहायशी ठिकानों पर लगातार हमला कर रही है, जिसका मुंहतोड़ जवाब भारतीय सेना दे रही है. भारत के सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के आतंकी लॉन्च पैड नष्ट कर दिए हैं. पाकिस्तानी सेना जिन आतंकी लॉन्च पैड से ड्रोन हमले कर रहे थी. उन्हें भारतीय सेना ने जमींदोज कर दिया है. पाकिस्तान लगातार हमले कर रहा है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी लॉन्च पैड को किस कदर तबाह कर पड़ोसी मुल्क की कमर तोड़ दी है. इससे पहले पाकिस्तान ने भारत की पश्चिमी सीमा पर भारत के कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और राजौरी के साथ-साथ पंजाब के जालंधर में धमाका हुआ. पाकिस्तान की ओर से भारत के रिहायशी इलाकों पर ड्रोन हमले किए जा रहे हैं. जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर और पठानकोट में सुबह-सुबह तेज धमाके सुनाई दे रहे हैं. बता दें कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर का बदला लेने के लिए 8 और 9 मई की रात भारत की पश्चिमी सीमा पर एक साथ कई हमलों की कोशिश की थी. पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और अन्य हथियारों के जरिए भारतीय सीमाओं को निशाना बनाया गया था. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर कई बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया था. सेना ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत सभी ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया और सीजफायर उल्लंघनों का मुंहतोड़ जवाब दिया गया. सेना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय सीमाओं की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे और किसी भी नापाक मंसूबे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बता दें कि आतंक के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान गुरुवार को जम्मू कश्मीर से लेकर जैसलमेर तक हिन्दुस्तान के करीब 15 शहरों को निशाना बनाने की कोशिश की लेकिन भारतीय सेना ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया.   recent visitors 38

मध्यप्रदेश बना डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में शीर्ष राज्य

मध्यप्रदेश डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में शीर्ष राज्य, यहां 2 Gbps स्पीड वाला SD-WAN एनेबल्ड SWAN नेटवर्क—खुद का डेटा सेंटर भी दो दिवसीय ‘AI भारत @ एमपी’ कार्यशाला में हुआ डिजिटल गवर्नेंस, आधार-अनुप्रयोग और तकनीकी नवाचारों पर मंथन मध्यप्रदेश बना डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में शीर्ष राज्य भोपाल “AI भारत @ एमपी” कार्यशाला में डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी, समावेशी और नागरिकोन्मुखी बनाने के लिये ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) और ‘आधार’ (UIADI) के प्रयोग की संभावनाओं पर विचार मंथन किया गया। दो दिनों में नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सरकारी प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में भागीदारी करते हुए नॉलेज शेयर और विचार-विमर्श किया। कुशाभाऊ ठाकरे इन्टरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में आयोजित 2 दिवसीय कार्यशाला का समापन शुक्रवार को हुआ। कार्यशाला का आयोजन मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPSEDC) और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने संयुक्त रूप से किया। दूसरा दिन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय को बेहतर बनाने पर केन्द्रित रहा। साथ ही डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत तकनीक आधारित प्रशासन के लिए रोडमैप पर भी विचार मंथन किया गया। मध्यप्रदेश बना डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में शीर्ष राज्य कार्यशाला के दूसरे दिन समापन सत्र में MPSEDC के परियोजना निदेशक श्री गुरु प्रसाद ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ SD-WAN एनेबल्ड SWAN नेटवर्क स्थापित है। यह नेटवर्क 2 Gbps की स्पीड से संचालित हो रहा है। मध्यप्रदेश के पास 1 पेटाबाइट की क्षमता वाला स्वयं का डाटा सेंटर भी है। उन्होंने बताया कि 'संपदा 2.0' और एंड-टू-एंड सेवा ऑटोमेशन जैसे नवाचारों से मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। प्रदेश में एवीजीसी, ड्रोन, जीसीसी और सेमी-कंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में पॉलिसीज बनाकर उनकी गाइडलाइन्स भी जारी कर दी गई हैं। साझा सीख और सहयोग पर बल NeGD के निदेशक श्री जे. एल. गुप्ता ने बताया कि, इस कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाना था। राज्यों के अनुभव और मॉडल आरएफपी के आदान-प्रदान से हम डिजिटल परियोजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि सभी डिजिटल इंडिया इनिशियेटिव्स के लिए एकीकृत हेल्पलाइन शुरू करने की दिशा में कार्य हो रहा है। इसके लिए राज्य स्तर पर आने वाली रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान परक प्रतिदिन वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग परक विचार-विमर्श किया जा रहा है। डिजिलॉकर और UMANG से नागरिकों को मिला सुरक्षित पेपरलेस स्टोरेज वॉलेट NeGD के वरिष्ठ प्रबंधक श्री प्रसून कुमार ने डिजिलॉकर का महत्व बताते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ स्टोर करने की तकनीक के साथ ही नागरिकों के लिए पेपरलेस और सुरक्षित डिजिटल वॉलेट भी है। इसमें आधार, पैन, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और मार्कशीट जैसे दस्तावेज़ सहेज कर सुरक्षित रखे जा सकते हैं। श्री कुमार ने 'एंटिटी लॉकर' की भी जानकारी दीऔर बताया कि यहां एमएसएमई, ट्रस्ट और संस्थान अपने दस्तावेज़ सुरक्षित रूप से प्रबंधित रख सकते हैं। NeGD के उप महाप्रबंधक श्री अजीत कुमार ने कहा, UMANG ऐप से सुशासन और सुगम हो रहा है। इससे नागरिकों को एक ही मंच पर आधार, पैन और राज्य एवं केंद्र सरकार की कई अन्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा कि बहुभाषीय इंटरफेस और 24×7 उपलब्धता के गुणों से UMANG मोबाइल-फर्स्ट गवर्नेंस का भविष्य सिद्ध हो रहा है। प्रौद्योगिकी सत्र और स्टार्टअप नवाचार कार्यशाला के अंतिम दिन तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम 2023, साइबर सुरक्षा, ई-संजीवनी के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य और DIKSHA प्लेटफॉर्म से स्कूली शिक्षा जैसे विषयों पर प्रेजेंटेशन हुए। MeitY स्टार्ट-अप हब के सीईओ श्री पन्नीरसेल्वम मदनगोपाल ने कहा कि हम नवाचार को केवल विचार नहीं, बल्कि परिवर्तन मानते हैं। नीति, निवेश और वैश्विक एक्सपोजर के माध्यम से हम स्टार्ट-अप्स को ग्लोबल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कार्यशाला में डिजिटल इंडिया को जमीनी स्तर तक सफल बनाने के लिए नियमित परामर्श, कैपेसिटी-बिल्डिंग और पॉलिसी को-ऑर्डिनेशन को अत्यंत आवश्यक गया। प्रतिभागियों ने परस्पर सहयोग, अंतर-विभागीय संवाद और समावेशी एवं नवाचार आधारित सुशासन की दिशा में संयुक्त रूप से कार्य करने पर सहमित व्यक्त की।   recent visitors 23

जनजातीय वर्ग की पहचान उनके विशेष पहनावे, भोजन, वस्त्रों, नृत्य, संगीत और वाद्य यंत्रों के माध्यम से भी की जाती : मंत्री डॉ. शाह

भोपाल जनजातीय कार्य एवं गैस राहत मंत्री डॉ. कुँवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय शिल्प को बाजार उपलब्ध कराने के लिये संभाग एवं ट्रायबल के 20 जिलों में ट्रायबल मार्ट खोले जायेंगे। उन्होंने कहा कि जनजातीय कलाकारों को उनके उत्पाद का पूरा मूल्य नहीं मिल पाया। सभी शिल्पकारों और कलाकारों को उनके उत्पाद के माध्यम से उचित मूल्य दिलाकर उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सुदृढ़ और सशक्त बनाया जायेगा। मंत्री डॉ. शाह शुक्रवार को रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय जनजातीय शिल्पग्राम महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर अतिथि कलाकारों को संबोधित कर रहे थे। तीन दिवसीय शिल्प महोत्सव में प्रदेश के जनजातीय कलाकारों द्वारा निर्मित विभिन्न शिल्प कलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय स्वरूप को संरक्षित करने की आवश्यकता है। जनजातीय वर्ग की पहचान उनके विशेष पहनावे, भोजन, वस्त्रों, नृत्य, संगीत और वाद्य यंत्रों के माध्यम से भी की जाती है। उनकी पारंपरिक वेषभूषा एवं तीज-त्यौहारों के महत्व को हम समझते हैं। परन्तु आधुनिकता के साथ उनकी यह पारंपरिक पहचान लुप्त सी होने लगी हैं। इसे जीवित रखने के उद्देश्य से इस शिल्प ग्राम महोत्सव के माध्यम से ट्रेनर्स के लिये ट्रेनिंग कार्यक्रम रखे गये हैं। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि शिल्प उत्पादों को पहचान दिलाने के लिये मध्यप्रदेश सरकार प्रयासरत है। इस अनुक्रम में नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ डिजाइन भोपाल के माध्यम से "आदिरंग" प्रोजेक्ट प्रारंभ किया जा रहा है। इससे जनजातीय शिल्पकारेां को उनके कौशल उन्नयन करेंगे। इस प्रकार प्रशिक्षित हमारे कलाकार अन्य शिल्पियों और कलाकारों को प्रशिक्षित करेंगे। जनजातीय शिल्प महोत्सव पर रवीन्द्र भवन परिसर में प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इसमें जनजातीय कलाकारों द्वारा निर्मित उत्कृष्ट शिल्प कलाओं में यथा माटी शिल्प, होम आर्किटेक्चर, पेन्टिंग्स के अलावा जनजातीय व्यंजनों के भी स्टॉल लगाकार प्रदर्शन किया गया। प्रदेश के विभिन्न ट्रायबल जिलों से पधारे कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधानों में राज्य अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए 3 दिवसीय कार्यक्रम के बारे में अवगत कराया। आयुक्त श्री श्रीमन शुक्ला ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर एसीएस जनजाति श्री विनोद कुमार, प्रमुख सचिव श्री गुलशन बामरा, आयुक्त जनजातीय श्री श्रीमन शुक्ला, संचालक श्रीमती वंदना वैद्य सहित अनेक कलाकर और अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 22

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा सभी अधिकारी अलर्ट मोड पर रहें, अधिकारी मैदान में दिखें, जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लिया जाए

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय परिस्थितियों और वर्तमान परिदृश्य के दृष्टिगत शुक्रवार शाम एक उच्च स्तरीय बैठक कर वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ सुरक्षा प्रबंधों पर गहन चर्चा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षकों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए। शुक्रवार प्रात: भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में चर्चा कर निर्देश दिए थे। प्रदेश के मैदानी अधिकारियों के साथ शाम को हुई बैठक में विभिन्न प्राथमिकताओं पर चर्चा की। बैठक में भारत सरकार से प्राप्त विस्तृत दिशा-निर्देशों की जानकारी से जिलों को अवगत करवाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी अधिकारी अलर्ट मोड पर रहें। अधिकारी मैदान में दिखें। जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लिया जाए और आवश्यक जनसहयोग प्राप्त किया जाए। आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने में भी वॉलिंटियर्स का आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में रिटायर्ड फौजियों सहित सामाजिक कार्यों से जुड़े वॉलिंटियर्स की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। अपराधियों के साथ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाए। घटना घटित होने के पूर्व आवश्यक सावधानी बरती जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि नागरिकों के लिए आवश्यक सेवाएं भी समानांतर रूप से प्रदान करने का कार्य होता रहे। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष के अलावा जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष कार्य करेंगे। सभी नियंत्रण कक्ष वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित होंगे। फायर ब्रिगेड सेवाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली की सप्लाई, पेयजल व्यवस्था नियमित रूप से बनी रहे, यह सुनिश्चित किया जाएगा।  सभी जिलों में की जाएगी मॉक ड्रिल, भ्रामक कंटेंट पर होगी सख्त कार्रवाई बैठक में निर्देशित किया गया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक कंटेंट भेजने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। वरिष्ठ अधिकारी अवकाश पर नहीं जाएंगे। सभी जिलों में इमरजेंसी सेवाएं सुनिश्चित करते हुए सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा के संबंध में भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन का कार्य होगा। बैठक में जानकारी दी गई कि आवश्यक सायरन की व्यवस्था भी जिलों में रहेगी। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप नागरिकों को सुरक्षा के लिए सजग किया जा रहा है। आवश्यकता के अनुसार वॉलिंटियर्स एवं नागरिकों को प्रशिक्षित करने का कार्य भी किया जाएगा। जिलों में मॉक ड्रिल भी समय-समय पर होगी और रात्रि गश्त पुलिस की ओर से निरंतर होगी। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग संजय दुबे, होमगार्ड महानिदेशक अरविंद कुमार, एडीजी इंटेलीजेंस ए. साई मनोहर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 28

खनिज साधन विभाग के वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रस्तावित कार्य-योजना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में खनिज साधन विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। विभाग द्वारा 10 हजार 290 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त किया गया है, जो अभी तक प्राप्त खनिज राजस्व में सबसे अधिक है। मध्यप्रदेश खनिजों की खोज एवं भण्डारण प्रमाणन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। खनिज साधन विभाग द्वारा खनिजों की खोज के लिये पूर्वेक्षण कार्य के अंतर्गत प्रदेश में 76 क्षेत्रों पर खनिजों की खोज एवं भण्डारण प्रमाणन के लिये अन्वेषण कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। इन क्षेत्रों में से 30 क्षेत्रों में स्ट्रेटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल्स में रॉक-फास्फेट, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट, प्लेटिनम और दुर्लभ धातु के अन्वेषण का कार्य किया जा रहा है। अन्वेषण के बाद खनिज भण्डारण प्रमाणित होने पर इन क्षेत्रों को नीलामी में रखा जायेगा। खनिज साधन विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 में 31 मुख्य खनिज ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये, जो कि पूर्व में किसी वित्तीय वर्ष में किये गये खनिज ब्लॉक की नीलामी से सर्वाधिक हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में किये गये नीलामी प्रावधान के बाद प्रदेश में 100 खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गयी। यह संख्या देश में सर्वाधिक है। भारत सरकार द्वारा जनवरी-2025 में आयोजित स्टेट माइनिंग मिनिस्टर कॉन्फ्रेंस में वित्तीय वर्ष 2023-24 में खनिज ब्लॉकों की नीलामी में अनुकरणीय कार्य किये जाने के लिये खनिज साधन विभाग को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। माइनिंग कॉन्क्लेव-2024 भोपाल में विभाग द्वारा खनिज आधारित उद्योगों में निवेश को प्रोत्साहित करने एवं खनन क्षेत्र में उपयोगी नवीन तकनीक को साझा करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर की माइनिंग कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव में खनन क्षेत्र की 33 कम्पनियों तथा 1500 प्रतिभागियों ने भाग लिया। खनिज साधन विभाग द्वारा रेत खदानों का निवर्तन के अंतर्गत ई-निविदा सह नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 रेत समूहों के संचालन के लिये माइन डेवलपर एवं ऑपरेटर का चयन किया गया। मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम द्वारा 728 रेत खदानों के संचालन के लिये आवश्यक वैधानिक अनुमतियाँ प्राप्त की गयीं। विभाग द्वारा जिला खनिज प्रतिष्ठान के अंतर्गत प्राप्त राशि से खनन प्रभावित जिलों में विभिन्न विकास कार्यों के लिये वित्तीय वर्ष 2024-25 में 478 करोड़ रुपये के 4208 कार्य स्वीकृत किये गये। इसी वित्तीय वर्ष में पूर्व से चल रहे 2120 कार्यों, जिनकी लागत 653 करोड़ रुपये थी, के कार्य पूर्ण किये गये।  खनिज साधन विभाग के वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रस्तावित कार्य-योजना खनिज विभाग द्वारा खनिज राजस्व प्राप्ति के लिये वित्तीय वर्ष 2025-26 में 13 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नीलाम किये गये 24 मुख्य खनिज ब्लॉक तथा 9 अकार्यशील खदानों का संचालन प्रारंभ किया जायेगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिये खनिज साधन विभाग के लक्ष्य निर्धारित कर लिये गये हैं। खनिज साधन विभाग द्वारा 100 मुख्य खनिज ब्लॉकों की नीलामी के लिये ई-निविदा जारी की जायेगी। समेकित अनुज्ञप्ति के 8 खनिज ब्लॉकों में पर्यवेक्षण कार्य प्रारंभ किया जायेगा। साथ ही 10 खनिज ब्लॉकों में समेकित अनुज्ञप्ति के स्वीकृति आदेश जारी किये जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4 मुख्य खनिज ब्लॉक में समस्त वैधानिक अनुमतियाँ प्राप्त कर नीलाम किये जाने की योजना बनायी गयी है। खनिज साधन विभाग द्वारा भारत सरकार द्वारा आवंटित 4 कोयला ब्लॉकों का संचालन प्रारंभ किया जाना है। पर्यवेक्षण कार्य 20 क्षेत्रों में पूर्ण कर खनिज उपलब्धता प्रमाणित होने पर इन क्षेत्रों पर खनिज ब्लॉक की नीलामी की जायेगी। साथ ही 82 नवीन क्षेत्रों पर खनिज की खोज के लिये पर्यवेक्षण कार्य प्रारंभ किया जायेगा। अवैध उत्खनन एवं परिवहन की रोकथाम के लिये प्रदेश में खनिज परिवहन के लिये चिन्हित मार्गों के 41 स्थानों पर ई-चेकगेट की स्थापना की जा रही है। इसके अतिरिक्त खनिजों के अवैध उत्खनन की निगरानी के लिये उपग्रह आधारित खनन निगरानी प्रणाली का क्रियान्वयन भी किया जा रहा है।   recent visitors 23

रहवासियों ने सड़कों के निर्माण, सीवेज नेटवर्क के सुधार सहित अन्य ज़रूरी माँगों के संबंध में राज्यमंत्री श्रीमती गौर का ध्यान आकृष्ट कराया

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा क्षेत्र की सोनागिरी सहित अन्य कालोनियों में रहवासियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जाना। उन्होंने अधिकारियों को एक निश्चित समय-सीमा में समाधान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिए। स्थानीय रहवासियों ने सड़कों के निर्माण, सीवेज नेटवर्क के सुधार सहित अन्य ज़रूरी माँगों के संबंध में राज्यमंत्री श्रीमती गौर का ध्यान आकृष्ट कराया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि जरूरतमंदों की थाली में स्वाद, सम्मान और संपूर्ण पोषण बना रहे, इसी भावना से वह दीनदयाल रसोई घर, सोनागिरी का निरीक्षण कर रही हैं। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, सफाई और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश दिए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अयोध्या बायपास स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण कर कार्य की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कर वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर आवास आवंटन सुनिश्चित किया जाए, जिससे योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर मिल सके। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अयोध्या एक्सटेंशन लेक सिटी में भ्रमण कर नागरिको से भेंट की। क्षेत्र में अवैध बिजली कनेक्शन, सीवेज नेटवर्क को लेकर कुछ समस्या लोगों ने बताई, जिसके निराकरण के लिए उन्होंने त्वरित निर्देश दिए। अयोध्या एक्सटेंशन हाउसिंग बोर्ड एंव अयोध्या एक्सटेंशन सी-सेक्टर के रहवासियों से जनसंवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। पेयजल पाइप-लाइन में लीकेज की जानकारी मिलते ही संबंधित अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए। यहां के रहवासियों ने पार्क की फेंसिंग कर सौंदर्यीकरण की मांग की और महिलाओं ने रात के समय पुलिस गश्त नहीं होने की शिकायत की। राज्य मंत्री ने अधिकारियों को समय-समय पर पुलिस गश्त करने और अपराध रोकने की निर्देश दिए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बसंत कुंज में पार्क की फेंसिंग करने और गार्डन की सफाई के निर्देश दिए। आजाद नगर, अमृत कुंज के रहवासियों ने बताया कि हाई टेंशन लाइन घर के ऊपर से गुजर रही है, जिससे हादसे होते हैं। नागरिकों ने इसे शिफ्ट करने की मांग की। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को कवर कंडक्टर लगाकर हाईटेंशन लाइन को घरों से दूर करने के निर्देश दिए और सर्वे कर आगे की कार्यवाही करने के लिए कहा। भेल नगर कॉलोनी, गुप्ता कॉलोनी, प्रेस कॉलोनी और आनंद नगर के रहवासियों ने नाली निर्माण, सफाई नहीं होने और एक ही ट्रांसफार्मर से कई कॉलोनी में बिजली सप्लाई की समस्या से अवगत कराया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पार्षद श्रीमती छाया ठाकुर, श्रीमती ममता विश्वकर्मा, संतोष ग्वाल, प्रतीक पाराशर, मनोज विश्वकर्मा, बृजेश व्यास सहित बड़ी संख्या में स्थानीय रहवासी, कार्यकर्ता और विभिन्न विभागों के अधिकारी भ्रमण के दौरान उपस्थित थे।   recent visitors 20

विश्व की सबसे बड़ी ग्राउण्ड वॉटर रिचार्ज परियोजना ताप्ती बेसिन मेगा रीचार्ज के एम.ओ.यू पर होंगे हस्ताक्षर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में "मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र अंतर्राज्यीय नियंत्रण मंडल" की 28वीं बैठक 10 मई को अपरान्ह 3 बजे से मंत्रालय वल्लभ भवन में होगी। इसी दिन विश्व की सबसे बड़ी ग्राउण्ड वाटर रिचार्ज परियोजना "ताप्ती बेसिन मेगा रीचार्ज" के एम.ओ.यू. पर मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र सरकार द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश के लिए यह सौभाग्य एवं गौरव का विषय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के बाद यह मध्यप्रदेश की तीसरी महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय नदी परियोजना होगी। "ताप्ती बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना" विश्व की सबसे बड़ी ग्राउण्ड रिचार्ज परियोजना है। परियोजना के जरिए हम महाऱाष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती नदी की तीन धाराएं बनाकर राष्ट्रहित में नदी जल की बूंद-बूंद का उपयोग सुनिश्चित कर कृषि भूमि का कोना-कोना सिंचित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज योजना को राष्ट्रीय जल परियोजना घोषित कराने के लिए केन्द्र सरकार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि ताप्ती बेसिन बहुउद्देशीय परियोजना में मध्यप्रदेश के जल हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज योजना में 31.13 टी.एम.सी. जल का उपयोग होगा। इसमें से 11.76 टी.एम.सी मध्यप्रदेश को और 19.36 टी.एम.सी जल महाराष्ट्र राज्य के हिस्से में आएगा। इस परियोजना में प्रस्तावित बांध एवं नहरों से मध्यप्रदेश कुल 3 हजार 362 हैक्टेयर भूमि उपयोग में लाई जाएगी। परियोजना के अंतर्गत कोई गांव प्रभावित नहीं होगा। इसमें पुनर्वास की भी आवश्यकता नहीं होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना से मध्यप्रदेश के 1 लाख 23 हजार 82 हैक्टेयर भू-क्षेत्र और महाराष्ट्र के 2 लाख 34 हजार 706 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की स्थाई सुविधा उपलब्ध होगी। इस परियोजना से म.प्र. के बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले की बुरहानपुर, नेपानगर, खकनार एवं खालवा की कुल 4 तहसीलें लाभान्वित होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश की एक-एक नदी के एक-एक बूंद जल का समुचित उपयोग राष्ट्र और राज्य के हित में करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले दिनों हमने पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना का राजस्थान के साथ कार्य प्रारंभ किया है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के साथ केन-बेतवा नदी जोड़ो की बड़ी राष्ट्रीय परियोजना पर काम किया जा रहा है। इसी अनुक्रम में अब हम इस तीसरी राष्ट्रीय नदी जल परियोजना से महाराष्ट्र राज्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस परियोजना से महाराष्ट्र के उत्तर क्षेत्र एवं मध्यप्रदेश के दक्षिण क्षेत्र के हिस्से को पर्याप्त जल उपलब्ध कराएंगे। साथ ही नागपुर जैसे बड़े शहर में पीने के पानी की समस्या और छिंदवाड़ा जिले में भी सिंचाई जल की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज योजना मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्यों की संयुक्त परियोजना है। इस योजना से मध्यप्रदेश के 1,23,082 हैक्टेयर क्षेत्र में एवं महाराष्ट्र के 2,34,706 सेक्टर में सिंचाई प्रस्तावित है. योजना में भूजल भंडारण का विस्तार किया जाएगा, जिससे प्रदेश के बुरहानपुर एवं खंडवा जिलों की बुरहानपुर, नेपानगर, खकनार एवं खालवा तहसीलें लाभान्वित होंगी। इस योजना में पूर्व में पारंपरिक भंडारण हेतु 66 टीएमसी क्षमता का जल भराव बाँध प्रस्तावित किया गया था, जिससे 17 हज़ार हैक्टेयर से अधिक भूमि प्रभावित हो रही थी, जिसमें वन भूमि एवं बाघ अभ्यारण की भूमि भी शामिल थी। इसके अलावा 73 गांव की लगभग 14 हजार जनसंख्या भी प्रभावित हो रही थी। अब इस अवरोध को दूर करते हुए पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भूजल पुनर्भरण योजना द्वारा जल भंडारण प्रस्तावित किया गया है। परियोजना के अंतर्गत मुख्य रूप से 4 जल संरचनाएं प्रस्तावित खरिया गुटीघाट बांध स्थल पर लो डायवर्सन वियर :– यह वियर दोनों राज्यों की सीमा पर मध्यप्रदेश की खंडवा जिले की खालवा तहसील एवं महाराष्ट्र की अमरावती तहसील में प्रस्तावित है. इसकी जल भराव क्षमता 8.31 टीएमसी प्रस्तावित है। दाई तट नहर प्रथम चरण :- प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर क़े दाएं तट से 221 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है, जो मध्यप्रदेश में 110 किलोमीटर बनेगी. इस नहर से मध्यप्रदेश के 55 हज़ार 89 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। बाई तट नहर प्रथम चरण :- प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर के बाएं तट से 135.64 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है जो मध्यप्रदेश में 100.42 किलोमीटर बनेगी। इस नहर से मध्यप्रदेश के 44 हज़ार 993 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है। बाईं तट नहर द्वितीय चरण :- यह नहर बाईं तट नहर प्रथम चरण के आर डी 90.89 किलोमीटर से 14 किलोमीटर लम्बी टनल के माध्यम से प्रवाहित होगी। इसकी लंबाई 123.97 किलोमीटर होगी, जिससे केवल महाराष्ट्र के 80 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है।   recent visitors 21