विपक्ष की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाने को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए 10 मई की शाम सीजफायर की घोषणा की गई. इसके बाद भी बॉर्डर से सटे कई इलाकों में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमला किया जा रहा है. इसी बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है. विपक्ष की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाने को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी है. उन्होंने लिखा है कि भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी, मैं विपक्ष के सर्वसम्मति से किए गए अनुरोध को दोहराता हूं कि संसद का विशेष सत्र तुरंत बुलाया जाए.   पिछले सारे घटनाक्रम पर सामूहिक चर्चा जरूरी चिट्ठी में राहुल ने आगे लिखा है कि लोगों और उनके प्रतिनिधियों के लिए पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और आज के युद्ध विराम पर चर्चा करना बहुत जरूरी है, जिसकी घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने की थी. यह आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारे सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित करने का भी एक अवसर होगा. मुझे विश्वास है कि आप इस मांग पर गंभीरता से और तेज़ी से विचार करेंगे. सीजफायर के बाद ही विपक्ष ने की थी विशेष सत्र की मांग सीजफायर के बाद से ही विपक्ष के नेता संसद के विशेष सत्र की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इसको लेकर पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी थी. विपक्ष का कहना है कि सीजफायर की घोषणा होने के बाद इस पर सामूहिक रूप से चर्चा होना बहुत जरूरी है.   recent visitors 37

भारत-पाकिस्तान सीमा पर आतंकियों को ढेर करने वाले अग्निवीर मुरली नाइक को अंतिम विदाई, परिवार को मिलेंगे ₹1.65 करोड़!

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान सीमा रेखा (LoC) पर आतंकियों को ढेर करके अग्निवीर मुरली नाइक ने कर्तव्य की राह पर अपने प्राणों की आहुति दे दी. आज जब उनका पार्थिव शरीर गृहनगर गोरंटला मंडल के कल्लिथंडा गांव, आंध्र प्रदेश पहुंचा तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई. देश के लिए मुरली नाइक के सर्वोच्च बलिदान पर नेताओं, अधिकारियों और नागरिकों ने समान रूप से भावभीनी श्रद्धांजलि दी. बचपन से देखा था देश सेवा का सपना अग्निवीर मुरली नाइक, जिनका जन्म 8 अप्रैल 2002 को हुआ, ने बचपन से ही देश सेवा का सपना देखा था. 2022 के दिसंबर में, 20 वर्ष की आयु में, उन्होंने अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने सपने को साकार किया. नासिक में 6 महीने के कठिन प्रशिक्षण के बाद, उन्होंने असम में 1 साल तक सेवा की और वर्तमान में पंजाब में तैनात थे. आंध्र प्रदेश के शिक्षा और आईटी मंत्री नारा लोकेश ने अग्निवीर मुरली नाइक के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. बेहद भावुक होकर मंत्री ने शहीद जवान के शोकाकुल माता-पिता से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, उन्हें सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि सरकार इस दुखद समय में उनके साथ खड़ी रहेगी. परिवार से बात करते हुए मंत्री लोकेश ने कहा, "राज्य मुरली नाइक की बहादुरी के सम्मान में नतमस्तक है. राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा."   राज्य के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, मंत्री अनगनी सत्य प्रसाद, वंगालापुडी अनिता और सविता, सांसद बी.के. पार्थसारथी, पूर्व मंत्री पल्ले रघुनाथ रेड्डी और कलावा श्रीनिवासुलु, विधायक पल्ले सिंधुरा रेड्डी, एम.एस. राजू और जे.सी. प्रभाकर रेड्डी समेत कई अन्य जनप्रतिनिधि मुरली नाइक को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे. अग्निवीर मुरली नाइक के बलिदान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि उनके परिवार को भारत सरकार की अग्निपथ योजना के तहत क्या लाभ मिलेंगे, विशेष रूप से, क्या उन्हें शहीद का दर्जा मिलेगा? क्योंकि उनकी मृत्यु जंग के दौरान ड्यूटी करते हुई है. उनके परिवार को कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी? आइए जानते हैं. अग्निपथ योजना क्या है? दरअसल, भारत सरकार की अग्निपथ योजना, जो 2022 में शुरू हुई, सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है. इस योजना के तहत भर्ती होने वाले सैनिकों को 'अग्निवीर' कहा जाता है. अग्निपथ योजना भारतीय सेना, नौसेना, और वायुसेना में युवाओं को चार साल के लिए भर्ती करने की एक अनूठी स्कीम है, जिसकी शुरुआत 14 जून 2022 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी. अग्निपथ योजना का उद्देश्य इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों को युवा, ऊर्जावान, और तकनीक-प्रवीण बनाना है. इस योजना के तहत 17.5 से 23 वर्ष की आयु के युवा 'अग्निवीर' के रूप में भर्ती होते हैं. चार साल की सेवा में 6 महीने का कठिन प्रशिक्षण और 3.5 साल की तैनाती शामिल होती है. चार साल बाद, 25% अग्निवीरों को उनकी योग्यता के आधार पर स्थायी सैनिक के रूप में चुना जाता है, जबकि बाकी को 'सेवा निधि' पैकेज और स्किल सर्टिफिकेट के साथ समाज में पुनर्वास के लिए तैयार किया जाता है. क्या मुरली नाइक को शहीद का दर्जा मिलेगा? भारत सरकार की नीति के अनुसार, अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को आधिकारिक रूप से 'शहीद' का दर्जा नहीं दिया जाता, क्योंकि यह शब्द सरकारी दस्तावेजों में परिभाषित नहीं है. हालांकि, ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर अग्निवीरों को नियमित सैनिकों के समान सम्मान और मुआवजा मिलता है. उदाहरण के लिए, 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे हालिया संघर्षों में अग्निवीरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और उनकी वीरता को सेना द्वारा सराहा गया. ड्यूटी पर वीरगति को प्राप्त होने वाले अग्निवीर जवान मुरली नाइक के मामले में, उनके परिवार को वित्तीय सहायता और सम्मान मिलेगा, भले ही 'शहीद' शब्द का औपचारिक उपयोग न हो. ड्यूटी पर मृत्यु होने पर मुरली नाइक के परिवार को क्या मिलेगा? ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले अग्निवीर के परिवार को निम्नलिखित सहायता मिलेगी: बीमा राशि: 48 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर. अनुग्रह राशि: 44 लाख रुपये की एकमुश्त अनुग्रह राशि. सेवा निधि और कॉर्पस फंड: मृत्यु के समय तक जमा कॉर्पस फंड और सेवा निधि, जिसमें ब्याज शामिल है (लगभग 10-12 लाख रुपये). शेष वेतन: चार साल की सेवा के बचे हुए कार्यकाल का पूरा वेतन (लगभग 13 लाख रुपये). अतिरिक्त सहायता: सशस्त्र बल युद्ध हताहत कोष से 8 लाख रुपये और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन से 30,000 रुपये. कुल मिलाकर, परिवार को 1.65 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता मिल सकती है. अग्निवीर को कितनी सैलरी और भत्ते मिलते हैं? वेतन और भत्ते: पहले साल में मासिक वेतन 30,000 रुपये (21,000 रुपये इन-हैंड, 9,000 रुपये कॉर्पस फंड में) होता है, जो चौथे साल में बढ़कर 40,000 रुपये (28,000 रुपये इन-हैंड, 12,000 रुपये कॉर्पस फंड) हो जाता है. इसके अतिरिक्त, जोखिम, कठिनाई, राशन, और यात्रा भत्ते भी मिलते हैं. सेवा निधि पैकेज: चार साल की सेवा के बाद, 11.71 लाख रुपये का टैक्स-मुक्त सेवा निधि पैकेज मिलेगा, जिसमें सरकार और अग्निवीर का कॉर्पस फंड योगदान शामिल है. जीवन बीमा: 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर हर अग्निवीर को प्रदान किया जाता है. स्किल सर्टिफिकेट: सेवा के दौरान मिले प्रशिक्षण को शिक्षा मंत्रालय स्नातक स्तर के क्रेडिट के रूप में मान्यता देता है, और इग्नू के विशेष डिग्री प्रोग्राम के तहत 50% क्रेडिट मिलता है.   recent visitors 33

हापुड़ में एक भावुक करने वाला नजारा देखने को मिला, सेना के जवानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया

हापुड़ उत्तर प्रदेश के हापुड़ से देशप्रेम से ओतप्रोत एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया है. यहां सेना के जवानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका सम्मान किया. यहां एक ढाबे पर भोजन करने पहुंचे सैनिक जैसे ही रवाना हुए, वहां मौजूद लोगों ने 'भारत माता की जय' के नारों के बीच फूल बरसाए. जवानों ने कहा कि वे बॉर्डर पर जा रहे हैं. इस पूरे दृश्य का वीडियो सामने आया है. लोग इन वीर सपूतों को सलाम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के हापुड़ में एक भावुक करने वाला नजारा देखने को मिला. यहां भारतीय सेना के जवानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया. ये जवान यहां एक ढाबे पर भोजन करके निकले थे, उसी दौरान लोगों ने उन पर फूल बरसाए. जवानों ने बताया कि वे बॉर्डर पर जा रहे हैं. इस दौरान लोगों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए. इस दौरान का वीडियो सोशल भी सामने आया है. देशभक्ति से ओतप्रोत यह वीडियो हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र के एक ढाबे का है. यहां कुछ लोग भोजन कर रहे थे, तभी भारतीय सेना के जवानों का एक दल ढाबे पर पहुंचा और सभी ने मिलकर भोजन किया. जवान जैसे ही भोजन कर ढाबे से निकलने लगे, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें देख 'भारत माता की जय' के नारे लगाने शुरू कर दिए और पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया.   इस भावुक क्षण में न केवल जवानों का मनोबल ऊंचा हुआ, बल्कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में गर्व और सम्मान की चमक दिखाई दी. जवानों ने लोगों को बताया कि वे ड्यूटी पर जा रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि आम लोग अपने सैनिकों का सम्मान कर रहे हैं. भारतीय सेना के त्याग और समर्पण को दिल से नमन कर रहे हैं. यह वीडियो वायरल हो रहा है, और लोग इन भावुक कर देने वाले पलों को देख गर्व प्रकट कर रहे हैं.   recent visitors 30

यदि भारत के साथ बातचीत होती है, तो कश्मीर, सिंधु जल संधि चर्चा का हिस्सा हो सकते: पाक के रक्षा मंत्री

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन चले खतरनाक सैन्य तनाव के बाद शनिवार को जब सीजफायर की घोषणा हुई, तब दोनों देशों ने राहत की सांस ली. इस बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रविवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि भविष्य में भारत के साथ बातचीत होती है, तो कश्मीर, सिंधु जल संधि (IWT) और आतंकवाद जैसे बड़े मुद्दे उस चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं. एक टेलीविज़न चैनल को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा, “ये तीन अहम मुद्दे हैं जिन पर चर्चा हो सकती है. हम सीजफायर पर कायम रहेंगे. ” उनका इशारा भारत के साथ लंबे समय से चली आ रही विवादित विषयों की ओर था, जिन पर पहले भी कई बार बातचीत हुई लेकिन कोई निर्णायक नतीजा नहीं निकला. दोनों देशों के बीच हुआ है सीजफायर यह बयान उस वक्त आया है जब भारत और पाकिस्तान ने जमीन, हवा और समुद्र में सभी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से रोकने का "समझौता" किया है. हालांकि पाकिस्तान ने इसे सीजफायर समझौता बताया, वहीं भारत ने इसे केवल "आपसी समझ" करार दिया है.   पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर यह सीजफायर स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम साबित होता है, तो इसे सकारात्मक संकेत माना जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी कुछ भी कह पाना जल्दबाज़ी होगी. गौरतलब है कि पिछले सप्ताह दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी लॉन्चपैड्स पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे. इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया. सहयोगी देशों की तारीफ आसिफ ने उम्मीद जताई कि समय के साथ शांति की संभावनाएं बन सकती हैं. उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत और खासकर उसकी नेतृत्वकारी राजनीति एक दिन पूरे दक्षिण एशिया के भविष्य को अपने दलगत हितों से ऊपर रखेगी.” पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने उन देशों की भी तारीफ की, जिन्होंने मौजूदा संकट में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद की. इनमें चीन, तुर्किये, अज़रबैजान और खाड़ी देशों का विशेष उल्लेख किया गया. भारत की ओर से अभी तक ख्वाजा आसिफ के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान की रणनीतिक सोच में एक नरमी और शांति के लिए तैयार दिखाने की कोशिश हो सकती है, खासकर तब जब देश आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबाव से जूझ रहा है. recent visitors 33

लॉन्च के बाद अलग हुए नोज और बूस्टर, इससे संकेत मिलता है कि ब्रह्मोस सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को निशाना बनाया

बीकाने विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राह्मोस मिसाइल के ये हिस्से-बूस्टर और नोज़ कैप लॉन्च के तुरंत बाद अलग हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं. इस बार ये टुकड़े भारत के ही क्षेत्र में आकर गिरे, जो यह संकेत देता है कि मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर सफलतापूर्वक रवाना हुई. राजस्थान के बीकानेर के नजदीक एक खेत में ब्रह्मोस मिसाइल का बूस्टर और नोज कैप मिलने से सनसनी फैल गई.ग्रामीणों ने बताया कि रात में आसमान में तेज रोशनी के साथ जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद यह मलबा खेत में गिरा.  भारत ने ब्राह्मोस मिसाइल को पाकिस्तान के बहावलपुर में अपने लक्ष्य पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया था. जैसे ही मिसाइल को लॉन्च किया गया तो तुरंत ही इसके बूस्टर और नोज कैप बाहर निकल गए. इससे यह संकेत मिलता है कि ब्रह्मोस बहावलपुर में सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को निशाना बनाया. इससे पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम की भी पोल खुल गई जो इतनी तैयारी और समय होने के बावजूद ब्रह्मोस को रोकने में फिर से विफल रहा.   लॉन्च के बाद अलग हो जाते हैं नोज और बूस्टर गांव के लोगों ने रात को एक तेज़ चमक और ज़ोरदार धमाके की आवाज़ देखी-सुनी थी, जिसके बाद अगली सुबह खेत में यह भारी भरकम धातु का सिलेंडरनुमा ढांचा पाया गया. इसके बाद अगले दिन यहां लोगों की भीड़ जुट गई. विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राह्मोस मिसाइल के ये हिस्से-बूस्टर और नोज़ कैप लॉन्च के तुरंत बाद अलग हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं. इस बार ये टुकड़े भारत के ही क्षेत्र में आकर गिरे, जो यह संकेत देता है कि मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर सफलतापूर्वक रवाना हुई. इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान ब्राह्मोस जैसे हाई-स्पीड, सटीक हथियारों को इंटरसेप्ट करने में पूरी तरह विफल रहा है, चाहे उसके पास तैयारी का समय हो या न हो. recent visitors 32

ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत आपने ऑपरेशन सिंदूर में देखी होगी, अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान वालों से पूछ लो : CM योगी

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस इंड्यूटियल कॉरिडोर में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का वर्जुअली उद्घाटन किया. इस दौरान कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ शामिल थे. इस यूनिट को हर साल 80 से 100 मिसाइलों के प्रोडक्शन के लिए डिजाइन किया गया है. इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि आतंकवाद कुत्ते की पूंछ है, जो कभी सीधी नहीं होगी. उसको उसी भाषा में जवाब देना होगा. हमने ब्रह्मोस मिसाइल के लिए दो सौ एकड़ जमीन दी. अब यहां ब्रह्मोस बनना शुरू होगा. ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत आपने ऑपरेशन सिंदूर में देखी होगी, अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान वालों से पूछ लो कि ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत क्या है? उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि कोई भी आतंक घटना अब युद्ध मानी जाएगी और याद रखना आतंकवाद को जब तक हम पूरी तरह कुचलेंगे नहीं, तब तक समस्या का समाधान नहीं होगा. अब समय आ गया है इसको कुचलने के लिए हम सभी को एक स्वर से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे भारत को पूरे उत्तर प्रदेश को मिलकर अभियान के साथ जुड़ना होगा.   उन्होंने कहा कि आतंकवाद कुत्ते की पूंछ है, जो कभी सीधी नहीं होने वाली. जो प्यार की भाषा मानने वाले नहीं हैं, उनको उनकी भाषा में जवाब देने के लिए तैयार होना होगा. इस दिशा में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया को एक संदेश दे दिया है. लखनऊ में शुरू की गई एयरोस्पेस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी से हर साल 80 से 100 ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन किया जाएगा. इसके अलावा हर साल 100 से 150 Next Generation की ब्रह्मोस मिसाइलों का भी निर्माण किया जाएगा. ये मिसाइलें एक साल के अंदर तैयार कर दी जाएंगी. अभी तक सुखोई जैसे लड़ाकू विमान सिर्फ एक ब्रह्मोस मिसाइल ही ले जा सकते हैं, लेकिन अब वे Next Generation की तीन ब्रह्मोस मिसाइलें ले जा सकेंगे. Next Generation की ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 300 किलोमीटर से अधिक होगी और इसका वजन 1,290 किलोग्राम होगा, जबकि वर्तमान ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 2,900 किलोग्राम है. लखनऊ में 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह प्रोडक्शन यूनिट ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण करेगी, जिसकी मारक क्षमता 290 से 400 किलोमीटर है और इसकी अधिकतम गति मैक 2.8 है. भारत और रूस के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस मिसाइल को जमीन, समुद्र या हवा से लॉन्च किया जा सकता है. यह 'फायर एंड फॉरगेट' गाइडेंस सिस्टम को फॉलो करती है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2018 के वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर पहल के हिस्से के रूप में प्रोडक्शन यूनिट की घोषणा की गई थी. इसके बाद साल 2021 में इसकी आधारशिला रखी गई थी. ब्रह्मोस मिसाइलें भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई हैं और इन्हें भारत के डिफेंस सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी कार्यक्रम में टाइटेनियम और सुपर अलॉयज मैटीरियल प्लांट (स्ट्रैटेजिक मैटीरियल टेक्नोलॉजी कॉम्प्लेक्स) का भी शुभारंभ किया गया. इसमें एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का प्रोडक्शन जाएगा. इसके अलावा रक्षा परीक्षण अवसंरचना सिस्टम (डीटीआईएस) की आधारशिला रखी गई. डीटीआईएस का उपयोग रक्षा उत्पादों के परीक्षण और प्रमाणन के लिए किया जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई 80 हेक्टेयर भूमि पर निर्मित ब्रह्मोस प्रोडक्शन यूनिट साढ़े तीन वर्षों में पूरी हुई. यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में छह नोड हैं, जिनमें लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, आगरा, झांसी और चित्रकूट शामिल है. इसका उद्देश्य प्रमुख रक्षा निवेशों को आकर्षित करना है. तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश ऐसा कॉरिडोर स्थापित करने वाला दूसरा राज्य है.   recent visitors 47

प्रेमपुरा घाट की है जहां पर युवक दोस्तों के साथ नहाने गया था, तालाब में डूबने से मेडिकल छात्र की मौत

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में दर्दनाक हादसा हो गया। तालाब में डूबने से मेडिकल के एक छात्र की मौत हो गई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले को जांच में लिया है। दरअसल घटना प्रेमपुरा घाट की है जहां पर युवक दोस्तों के साथ नहाने गया था। युवक विवेक शर्मा खुशीलाल मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। छात्र हॉस्टल के अपने दोस्तों के साथ घूमने गया था। दोस्तों के मना करने के बावजूद छात्र विवेक घाट से आगे बढ़ा और फिर डूब गया। 12 घंटे की सर्चिंग के बाद गोताखोरों ने शव को बाहर निकाल लिया है। मृतक विवेक शर्मा भिंड जिले का रहने वाला था।विवेक शर्मा को तैरना आता था लेकिन तालाब में अत्यधिक काई जम जाने की वजह से वह तैर नहीं सका और गहरे पानी में डूब गया। उनकी मौत से जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हला है वहीं हॉस्टल में भी शोक का माहौल है। recent visitors 22