दिग्विजय सिंह बोले- हमें दुख है कि युद्ध विराम की घोषणा होने के बाद पाकिस्तान द्वारा भारत पर मिसाइल दागे गए, जो उचित नहीं

गुना मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि युद्ध विराम की घोषणा के बाद पाकिस्तान का मिसाइल दागना गलत है। इस पर सख्ती से रोक लगना चाहिए। राज्यसभा सदस्य सिंह रविवार सुबह शहर के हड्डी मिल क्षेत्र में भू-माफिया से पीड़ित आदिवासी परिवार से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान वे मीडिया से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। दिग्विजय ने कहा कि हर समस्या का निदान बातचीत है, जबकि युद्ध तो आखिरी विकल्प होता है। सिंह ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों का गढ़ बन चुका है। वहां की सरकार आतंकवादियों को पैसे का लालच देकर ट्रेनिंग देती है, जिसके बाद उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करती है।   युद्ध विराम की घोषणा के बाद भी मिसाइल दागी यह सब बातें अब साफ होकर उजागर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश देश भी स्वीकार कर चुके हैं कि पाकिस्तान पूरी तरह आतंकियों का गढ़ बन चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें दुख है कि युद्ध विराम की घोषणा होने के बाद पाकिस्तान द्वारा भारत पर मिसाइल दागे गए, जो उचित नहीं है। इस पर सख्ती से रोक लगाई जाना चाहिए। युद्ध के समय विपक्ष के भारत सरकार के साथ खड़े होने के सवाल पर सिंह ने कहा कि जब देश संकट में हो, तो सभी को राजनीति से परे होना चाहिए। हम भारत सरकार और सेना के साथ खड़े हैं और जरूरत में पूरा समर्थन करेंगे। recent visitors 30

भारतीय वायुसेना ने दिया बड़ा अपडेट, लक्ष्य हासिल लेकिन अब भी जारी है ऑपरेशन सिंदूर

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन की युद्ध जैसी स्थिति के बाद शनिवार को सीजफायर का ऐलान कर दिया गया। वहीं भारतीय वायुसेना ने एक बयान जारी कर कहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अब भी जारी है। वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किए हैं। राष्ट्र के हित में यह ऑपरेशन बहुत ही आक्रामक ढंग से चलाया गया। हालांकि यह ऑपरेशन अब भी जारी है। आगे इसकी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। वायुसेना अफवाहों और अप्राणित जानकारी पर विश्वास करने से बचने की सलाह देती है। गौरतलब है कि इस ऑपरेशन के दौरान वायु सेना के प्लेटफार्म और उसके पायलटो के संबंध में अलग अलग तरह की विवादास्पद जानकारियां साझा की जा रही है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा शीर्ष अधिकारियों के साथ रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक सैन्य कार्रवाई रोकने पर भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति बनने के एक दिन बाद हुई। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान और सेना के तीनों अंगों के प्रमुख शामिल हुए। भारत ने पाकिस्तान पर सहमति की शर्तों का उल्लंघन करने का शनिवार रात आरोप लगाया था और उससे इस तरह के उल्लंघन से बचने के लिए उचित कदम उठाने तथा स्थिति से ‘‘गंभीरता और जिम्मेदारी’’ के साथ निपटने का आह्वान किया था। स्थिति अब शांत हो गई है लेकिन कई सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग कई दिनों तक जारी रही गोलाबारी और ड्रोन संबंधी घटनाओं के कारण अब भी आशंकित हैं। बता दें कि पहलगाम में 22 अप्रैल को मासूम पर्यटकों पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। इस हमले में कम से कम 26 लोग मारे गए थे। इसके बाद पूरे देश में रोष था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेनाओं को पूरी छूट दे दी। इसके बाद सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर आतंकियों के 9 ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया।   recent visitors 35

राजधानी दिल्ली में 15 दिन बंद रहेगी यह सड़क, ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर लोगों से वैकल्पिक रास्तों से निकलने को कहा

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में काठिया बाबा मार्ग पर स्वरूप नगर एसडीएम ऑफिस से लेकर बुराड़ी के विजय चौक तक 15 दिन गाड़ियों की आवाजाही बंद रहेगी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस संबंध में एक ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर लोगों से वैकल्पिक रास्तों से निकलने को कहा है। इसके साथ ही यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार, काठिया बाबा मार्ग (स्वरूप नगर-बुरारी रोड) पर पीडब्ल्यूडी की टीम द्वारा मरम्मत और री-कार्पेटिंग के काम के चलते 10 मई 2025 से 15 दिन के लिए स्वरूप नगर एसडीएम ऑफिस (एनएच-44 पर नाला के पास) और विजय चौक (बुराड़ी साइड) के बीच वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। इससे ट्रैफिक जाम हो सकता है और इस रास्ते से गुजरने वाले यात्रियों को असुविधा हो सकती है। इन वैकल्पिक मार्ग के इस्तेमाल की सलाह • एसडीएम ऑफिस स्वरूप नगर नाला रोड से यात्री सीसी रोड के माध्यम से भलस्वा लैंडफिल (कूड़ा-खट्टा) की ओर जा सकते हैं, फिर झंडा चौक से बुराड़ी चौक तक जा सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, बुराड़ी पहुंचने के लिए झंडा चौक से विजय चौक तक का मार्ग चुनें। • विजय चौक से यात्री गुरुद्वारा रोड से होते हुए गुर्जर चौक के रास्ते झंडा चौक से भलस्वा लैंडफिल (कूड़ा-खट्टा) और फिर नाला तक का रास्ता अपना सकते हैं। यात्रियों के लिए सामान्य निर्देश • प्रभावित मार्ग से जाने से बचें और सुझाए गए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। • इस अवधि के दौरान धैर्य और सहयोग बनाए रखें। • ट्रैफिक नियमों का पालन करें और मुख्य मोड़ बिंदुओं पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मियों और मार्शलों/गार्डों के निर्देशों का पालन करें। • सड़क पर भीड़भाड़ कम करने के लिए कृपया सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। • अपने वाहनों को केवल तय पार्किंग क्षेत्रों में ही पार्क करें। • सुचारू यातायात प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए सड़क किनारे पार्किंग से बचें। • वाहन चालकों से अनुरोध है कि वे धैर्य रखें। ट्रैफिक नियमों का पालन करें और ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के साथ सहयोग करें। प्रमुख चौराहों पर तैनात पुलिस के निर्देशों का पालन करें। • दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के माध्यम से अपडेट रहें।   recent visitors 42

मोदी सरकारी की युद्ध नीति की सराहना की है, कांग्रेस के वरिष्ठ पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम भी कर रहे

नई दिल्ली 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस घटना के बाद देशभर में बदले और बड़ी सैन्य कार्रवाई की मांग उठने लगी। भारतीय सैनिकों ने पहले आतंकी ठिकानों को बर्बाद किया। उसके बाद पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्ण युद्ध की जगह संतुलित और रणनीतिक तरीके से जवाब दिया है। इसकी तारीफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम भी कर रहे हैं। उन्होंने एक लेख के जरिए मोदी सरकारी की युद्ध नीति की सराहना की है। पी चिदंबरम लिखते हैं- प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी 16 सितंबर 2022 को रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, “यह युद्ध का युग नहीं है।” यह वक्तव्य वैश्विक स्तर पर सराहा गया और भारत की छवि को एक शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में मजबूत किया। इसी सोच के तहत भारत ने इस बार भी संयम बरता। 7 मई 2025 को भारतीय सेना ने सीमित सैन्य कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कुल 9 ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। इन हमलों में आतंकवादी संगठनों द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के बुनियादी ढांचे को नष्ट किया गया। भारत की इस कार्रवाई में किसी नागरिक या पाकिस्तान की सैन्य संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत युद्ध नहीं, परन्तु न्याय चाहता है। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा (LoC) पर गोलीबारी के जरिए जवाब मिला। 8 मई को पाकिस्तान ने मिसाइल, ड्रोन और वायुसेना का इस्तेमाल करते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसका भारत ने फिर से मापी गई और प्रभावी प्रतिक्रिया दी। भारत की कार्रवाई के बावजूद यह मानना भूल होगी कि आतंकी संगठन पूरी तरह खत्म हो गए हैं। इन संगठनों का नेतृत्व अभी भी सक्रिय है और पाकिस्तान में उन्हें लगातार समर्थन मिलता रहा है। जब तक पाकिस्तान की सेना और ISI आतंकवाद को बढ़ावा देते रहेंगे, भारत के लिए खतरा बना रहेगा। इस संघर्ष में कुछ भारतीय नागरिकों की जान गई है और कुछ सैन्य नुकसान भी हुआ है। पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमान गिराने के दावे को उसके ही रक्षा मंत्री बीबीसी इंटरव्यू में प्रमाणित नहीं कर सके, जिससे पाकिस्तान की स्थिति हास्यास्पद हो गई। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब तक कश्मीर में तीन बड़े आतंकी हमले हुए हैं। उरी, पुलवामा और अब पहलगाम। हर बार सरकार ने सीमित परंतु निर्णायक जवाब दिया है। इस बार सरकार ने नक्शे और वीडियो जारी कर पारदर्शिता का परिचय भी दिया। दो युवा महिला सैन्य अधिकारियों को मीडिया ब्रीफिंग में शामिल करना इस दिशा में एक सराहनीय कदम था। हालांकि, प्रधानमंत्री की ओर से 24 अप्रैल और 7 मई को हुई सर्वदलीय बैठकों में अनुपस्थित रहना और अभी तक पहलगाम या पीड़ित परिवारों का दौरा न करना आलोचना का कारण बन रहा है। इसकी तुलना मणिपुर संकट के दौरान उनकी अनुपस्थिति से की जा रही है। पाकिस्तान की दुविधा अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है। यदि पाकिस्तान तनाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ा तो उसे वैश्विक निंदा झेलनी पड़ सकती है, विशेषकर OIC जैसे मंचों पर। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अगर युद्ध चाहिए, तो भारत तैयार है। समझदारी इसी में है कि पाकिस्तान अब इस मामले को यहीं समाप्त करे, आतंकियों पर लगाम लगाए और तनावपूर्ण शांति की ओर बढ़े। लेकिन सवाल यही है कि पाकिस्तान में सत्ता वास्तव में किसके हाथ में है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की कमजोर सिविल सरकार या सेना और ISI के हाथों की कठपुतली?   recent visitors 26

भारतीय होने के नाते मैं चाहता था कि हमारे सैनिकों को 2 से तीन दिन और मिलने चाहिए थे क्योंकि पाकिस्तान घुटनों पर था

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सैनिकों ने पराक्रम दिखाया और पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को तबाह कर दिया। 100 से ज्यादा आतंकियों को मार डाला। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप और ठिकानों को बर्बाद कर दिया। पाकिस्तान के कई एयरबेसों को नुकसान पहुंचाया, चार दिनों तक चले संघर्ष में अचानक अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ट्वीट करते हैं और बयान देते हैं कि हमारी मध्यस्थता से भारत और पाक सीजफायर पर सहमत हो गए हैं। कुछ देर बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि कर दी। इस पूरे घटनाक्रम पर जम्मू कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा- भारतीय होने के नाते मैं चाहता था कि हमारे सैनिकों को 2 से तीन दिन और मिलने चाहिए थे क्योंकि पाकिस्तान घुटनों पर था। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर कई सुर उठ रहे हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ हमारा जीरो टॉलरेंस जारी है। पाकिस्तान की अगली किसी भी हरकत का कड़े से कड़ा जवाब दिया जाएगा। सीजफायर को लेकर भारत में सवाल भी उठ रहे हैं, कि कोई तीसरा देश कैसे सीजफायर का ऐलान कर सकता है? इस बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने कहा है कि भारत को सैन्य अभियान के लिए कुछ और समय मिलना चाहिए था। वैद ने कहा, "एक भारतीय होने के नाते, मैं मानता हूं कि हमारी सशस्त्र सेनाओं को पाकिस्तान को पूरी तरह सबक सिखाने के लिए 2-3 दिन और चाहिए थे। पाकिस्तान पहले ही घुटनों पर था।" भारतीय कदम की सराहना हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत की राजनीतिक नेतृत्व के पास कुछ ऐसे तथ्य और कूटनीतिक कारण रहे होंगे जो आम जनता को नहीं बताए गए। उन्होंने कहा, "ऐसे कई तथ्य होते हैं जो नेतृत्व जानता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कुछ विशेष परिस्थितियां होती हैं। सरकार को देशहित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने पड़ते हैं। देश केवल अहंकार से नहीं चलता, बल्कि दूरदृष्टि से चलता है।" कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं" ट्रंप ने सीजफायर के बाद फिर ट्वीट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे का भी जल्द समाधान निकलेगा। इस पर वेद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जहां तक कश्मीर मुद्दे का सवाल है, भारत की राजकीय नीति स्पष्ट है — हम किसी तीसरे पक्ष की दखल को स्वीकार नहीं करते। यह शिमला समझौते के अनुसार दो देशों के बीच का मसला है, जिसे आपसी बातचीत से ही सुलझाया जाना है।" गौरतलब है कि एसपी वैद का यह बयान ऐसे समय आया है जब कई विश्लेषक और पूर्व सैन्य अधिकारी यह सवाल उठा रहे हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ अभियान को अचानक क्यों रोका गया? वैद ने संतुलन साधते हुए कहा कि भले ही उन्हें लगता है कि कुछ और कार्रवाई की जा सकती थी, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी वृहद राष्ट्रीय हित को देखते हुए निर्णय लेना है। सिब्बल ने उठाई मांग- विशेष सत्र या सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए कपिल सिब्बल ने एएनआई से बातचीत में कहा, "ट्रंप के इस ट्वीट को लेकर कई सवाल खड़े होंगे… भारत-पाकिस्तान के बीच जो समझ बनी, वो कैसे बनी, क्यों बनी, इसकी कोई जानकारी हमें नहीं दी गई है। इसलिए आज हम कोई आलोचना नहीं करेंगे, लेकिन सरकार से एक सीधी मांग जरूर कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर विशेष संसद सत्र और सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। सिब्बल ने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे तब तक सर्वदलीय बैठक में शामिल न हों, जब तक यह स्पष्ट न हो जाए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उस बैठक में मौजूद रहेंगे।   recent visitors 25

मध्य प्रदेश में अभी तक 15 लाख ऐसे हितग्राही चिह्नित, 83 लाख का ई-केवायसी बाकी

भोपाल खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत प्रतिमाह दिए जाने वाले निश्शुल्क खाद्यान्न का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों को ही मिले, इसके लिए ई-केवायसी करवाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में अभी तक 15 लाख ऐसे हितग्राही चिह्नित किए गए हैं, जिनका या तो निधन हो गया है या फिर वे चार माह से खाद्यान्न लेने नहीं आए। इन सभी के नाम पात्रता सूची से हटाए गए हैं। अभी भी 83 लाख हितग्राहियों का ई-केवायसी होना बाकी है। इनमें भी तीन से चार लाख ऐसे हितग्राही हो सकते हैं, जिनका नाम दो जगह दर्ज है, उनका निधन हो चुका है या फिर खाद्यान्न लेने ही नहीं आ रहे हैं। ऐसे हितग्राहियों का नाम सूची से काटकर नए नाम जोड़े जाएंगे।   खाद्य सुरक्षा कानून के प्रविधान के अंतर्गत मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 5.46 करोड़ हितग्राही हो सकते हैं। यह संख्या साढ़े पांच करोड़ को पार कर गई थी। जांच कर कुछ नाम छांटे गए फिर भी अपात्रों को राशन मिलने की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए सरकार ने ई-केवायसी की प्रक्रिया प्रारंभ की। इसमें एक-एक हितग्राही की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन कराया जा रहा है। साढ़ें चार लाख हितग्राही राशन लेने ही नहीं आ रहे इसमें साढ़े चार लाख हितग्राही तो ऐसे पाए गए जो चार माह से राशन लेने के लिए नहीं आ रहे हैं। जबकि, योजना में निश्शुल्क खाद्यान्न देने का प्रविधान है। इसी तरह जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 10 लाख हितग्राही ऐसे हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर कहीं चले गए हैं। ऐसे सभी लोगों के नाम काटे जाने चाहिए थे लेकिन सूची में दर्ज थे। इनके नाम पर खाद्यान्न भी आवंटित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनवरी से अप्रैल, 2025 के बीच 15 लाख नाम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के हितग्राहियों की सूची से हटाए जा चुके हैं। यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है इसलिए संख्या बढ़ भी सकती है।   समग्र के डाटा से हटते हैं नाम विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब भी किसी हितग्राही परिवार के किसी सदस्य का निधन होता है या फिर विवाह कर लड़की ससुराल चली जाती है तो उसका नाम हटाना होता है। इसकी जानकारी स्थानीय निकायों द्वारा संग्रहित कर समग्र पोर्टल पर दर्ज कराई जाती है। वहां से खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग को प्रतिमाह डाटा मिलता है, जिसके आधार पर नाम हटाए जाते हैं। इंदौर में सर्वाधिक और भिंड में सबसे कम ई-केवायसी प्रदेश में अभी तक 84 प्रतिशत ई-केवायसी का काम हो चुका है। सर्वाधिक 92 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवायसी इंदौर में हुआ है, जबकि सबसे कम 75 प्रतिशत भिंड जिले का रहा है। बालाघाट में 90, भोपाल 85, उज्जैन 83 जबलपुर 81 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवायसी किए जा चुका है। टीकमगढ़, शिवपुरी, आलीराजपुर, अशोक नगर जिले में 80 प्रतिशत से कम काम हुआ है। 2.90 लाख टन प्रतिमाह लगता है गेहूं-चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रतिमाह 2.90 लाख टन निश्शुल्क खाद्यान्न दिया जाता है। इसमें 1.74 लाख टन चावल और 1.16 लाख टन गेहूं है। प्रदेश सरकार ने चावल का कोटा कम करके गेहूं का बढ़ाने की मांग की है। गेहूं उपार्जन का काम पूरा हो चुका है इसलिए अब कोटा में परिवर्तन संभव है। recent visitors 27

झूठ के बखान में सामने पाकिस्तानी सेना के बड़े अफसर ने कैमरे के सामने कबूल किया कि पुलवामा आतंकी हमला उसने किया था

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर सहमति तो बन गई है, लेकिन भारत की शर्तों पर। पाकिस्तान अपनी हार छिपाने के लिए बड़ी-बड़ी डींगे हांक रहा है। पाकिस्तानी सेना ने प्रेस कॉफ्रेंस में जमकर झूठ बोला। हालांकि इस झूठ के बखान में उसके पोल भी खुल गई। पाकिस्तानी सेना के बड़े अफसर ने कैमरे के सामने कबूल किया कि पुलवामा आतंकी हमला उसने किया था। बता दें कि पाकिस्तान हमेशा पुलवामा आतंकी हमले में अपनी भूमिका से इनकार करता आया है। पाकिस्तानी सेना का यह बयान अब सोशल मीडिया पर उनकी ही सरकार की किरकिरी कर रहा है। 2019 के पुलवामा आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान ने पहली बार सार्वजनिक मंच से अपनी भूमिका स्वीकार की है। पाकिस्तान एयरफोर्स के प्रवक्ता एयर वाइस मार्शल औरंगजेब अहमद ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हमने पुलवामा में अपनी टैक्टिकल ब्रिलिएंस से उन्हें समझाने की कोशिश की थी…" यह बयान पाकिस्तान की वर्षों से चली आ रही उस रणनीति को पूरी तरह झुठला देता है, जिसमें वह पुलवामा हमले में अपनी संलिप्तता से इनकार करता रहा है। औरंगजेब अहमद का यह दिखावटी बहादुरी अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के सामने आया, जिसमें उनके साथ DG ISPR लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी और नौसेना प्रवक्ता भी मौजूद थे। पाकिस्तान के झूठ की पोल खुली 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में एक आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े आतंकवादी ने सीआरपीएफ के 40 जवानों को शहीद कर दिया था। भारत ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन पाकिस्तान ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया। अब एयर वाइस मार्शल औरंगजेब के इस बयान ने न केवल पुलवामा हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता को उजागर कर दिया है। पाकिस्तान का दोहरा चेहरा औरंगजेब ने कहा, "अगर पाकिस्तान की सीमा, जमीन, जल या लोग खतरे में हों, तो कोई समझौता नहीं होगा। पुलवामा में हमने टैक्टिकल ब्रिलिएंस से संदेश देने की कोशिश की थी, अब हमने रणनीतिक स्तर पर भी क्षमता दिखा दी है।" इस बयान ने पाकिस्तान की कूटनीतिक पाखंड और दोहरे रवैये को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। बालाकोट एयर स्ट्राइक पुलवामा हमले के बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर को नष्ट कर दिया था। इस ऑपरेशन में 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने जैश के सबसे बड़े ठिकाने को तबाह किया था।   recent visitors 26