व्यापमं घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने 11 लोगों को पाया दोषी, आरोपियों को सुनाई 3-3 साल की सजा, 16 हजार जुर्माना भी लगाया

भोपाल  मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में शुक्रवार को भोपाल सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। एमपी पीएमटी-2009 परीक्षा में फर्जी तरीके से सिलेक्ट होने वाले 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत ने सभी को तीन-तीन साल जेल और 16-16 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने इन सभी दोषियों पर कुल 16,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) की अदालत ने सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस मामले की जांच पहले एसटीएफ के पास थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था।    फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है। फैसला सुनाते वक्त अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी।  फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई अधिकारी और नेताओं पर इसकी आंच आई थी। कोर्ट का फैसला मामले का खुलासा होने पर राजधानी के कोहेफिजा थाने में वर्ष 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसपर अब सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ये टिप्पणी की कि, शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है। इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी। याद हो कि, व्यापमं घोटाला सामने आने के बाद कई अधिकारियों के साथ-साथ नेताओं तक पर इसकी जांच की आंच आई थी।   recent visitors 23

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर दी हार्दिक बधाई

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा पूज्य संत, पद्मविभूषित जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर, रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान हेतु प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीय बधाई दी है। उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, विद्वता और करुणा का अनुपम संगम है। उन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद ज्ञान, संस्कृति और संस्कृत साहित्य के संवर्धन हेतु जो कार्य किया है, वह समूचे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका यह सम्मान वास्तव में उस सनातन चेतना का सम्मान है, जो भारत की आत्मा में प्रवाहित होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत भाषा और दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जगद्गुरु जी ने जो अनथक साधना की है, वह एक युगद्रष्टा संत की पहचान है। ज्ञानपीठ जैसा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान उनके तप और कर्म की स्वीकृति है। यह केवल एक संत का नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति और परंपरा का गौरव है। उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, दर्शन और संस्कृत साहित्य में अप्रतिम विद्वान हैं। वे अनेक भाषाओं में निपुण हैं और उन्होंने दर्जनों ग्रंथों की रचना की है। वे तुलसीपीठ, चित्रकूट के अधिष्ठाता हैं और शिक्षा, दिव्यांगजन सेवा व धर्म के क्षेत्र में अनेक संस्थाओं के माध्यम से कार्य कर रहे हैं।   recent visitors 25

बच्चा होने के 7 महीने बाद विधवा महिला ने लिखाई दुष्कर्म की रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने किया खारिज

जबलपुर  बच्चा पैदा होने के सात महीने बाद विधवा महिला द्वारा युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया. इस मामले को हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने खारिज कर दिया. मामले में जो तथ्य सामने आए उन्हें ध्यान में रखते हुए एफआईआर को निरस्त करने के आदेश दिए गए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि भौतिक परिस्थितियों पर विचार करते हुए ऐसा नहीं माना जा सकता है कि दोनों के बीच विवाह के झूठे वादे के आधार पर संबंध बने थे. दोनों पति-पत्नी की रहते थे और एक बच्चे को जन्म दिया है. भरण-पोषण व अन्य राहत का दावा करने के लिए महिला उचित कार्यवाही कर सकती है. पति की मौत के बाद बने संबंध दरअसल, जबलपुर निवासी आवेदक की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि महिला की शिकायत पर अधारताल थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता महिला की आयु 32 साल है और उसके पति की मृत्यु साल 2021 में हो गई थी. पति का दोस्त होने के कारण आवेदक का महिला के घर में आना जाना था और मोबाइल पर बातचीत होने लगी. पति की मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद मई 2021 में दोनों ने शादी करने का फैसला किया और इस तरह दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए और दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे. शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि इस संबंध से वह गर्भवती हो गई और उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन आवेदक ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया. शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झूठा आश्वासन देकर आवेदक पिछले तीन वर्षों से उसका शारीरिक शोषण कर रहा है. लंबे समय तक सहमति से बने संबंध, ये दुष्कर्म नहीं महिला की शिकायत पर आवेदक युवक की ओर से तर्क दिया गया कि उसने कभी शादी का कोई झूठा वादा नहीं किया. उसने बताया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से वर्षों तक संबंध स्थापित रहे. कोर्ट में तर्क दिया गया कि परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट है कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक या दो बार शारीरिक संबंध विकसित हुए हों. दोनों के बीच संबंध कई वर्षों तक जारी रहे. इतने लंबे समय के बाद अगर ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है. हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीमकोर्ट का हवाला एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि मौजूदा तथ्यात्मक परिस्थितियों के आधार पर संबंध को विवाह के झूठे वादे पर विकसित होना नहीं माना जा सकता है. ऐसे आरोपों को कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है. ऐसे आरोप पक्षों के बीच संबंधों में कड़वाहट के कारण हो सकते हैं. इस तरह बिना किसी ठोस सबूत के आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता है. एकलपीठ ने एफआईआर को निरस्त करते हुए महिला को आगे स्वतंत्रता प्रदान की है, कि वह जीवन यापन भत्ते आदि के लिए अपना पक्ष रख सकती है. क्या है मामला जबलपुर निवासी वीरेंद्र वर्मा ने उसके ऊपर दर्ज हुए केस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। उसने बताया कि अधारताल थाने में उसके खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज की गई है। याचिका में कहा गया था कि एफआईआर के अनुसार शिकायत करने वाली महिला की आयु 32 साल है। उसके पति की साल 2021 में मृत्यु हो गयी थी। पति का दोस्त होने के कारण आवेदन का महिला के घर आना जाना था और मोबाइल पर बातचीत प्रारंभ हो गयी। सहमति से साथ रहने का लिया फैसला पति की मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद आवेदन के उसके समक्ष शादी का प्रस्ताव भी रखा। दोनों ने सहमति से मई 2021 में शादी करने का निर्णय लिया था। इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए। दोनों पति-पत्नी की तरह लंबे समय तक साथ रहे और इस दौरान एक बच्चे का जन्म हुआ, जो लगभग सात माह का है। लेकिन आवेदक ने शादी करने से इनकार कर दिया। महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झूठा आश्वासन देकर कई सालों से उसका शारीरिक शोषण करता रहा। महिला ने दर्ज कराई एफआईआर शिकायतकर्ता महिला ने शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ जनवरी 2025 में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। आवेदक की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने शादी का कोई झूठा वादा नहीं किया। उसने बताया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से वर्षों तक संबंध स्थापित रहे। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट है कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक या दो बार शारीरिक संबंध विकसित हुए हों। दोनों के बीच संबंध कई वर्षों तक जारी रहे। इतने लंबे समय के बाद अगर ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट ने इस तर्क से खारिज की याचिका एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा तथ्यात्मक परिस्थितियों के आधार पर संबंध को विवाह के झूठे वादे पर विकसित होना नहीं माना जा सकता है। ऐसे आरोपों को कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है। पक्षों के बीच संबंधों में कड़वाहट के कारण ऐसा हो सकते हैं। इस तरह बिना किसी ठोस सबूत के आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता है। एकलपीठ ने एफआईआर को निरस्त करते हुए महिला को उक्त स्वतंत्रता प्रदान की है। recent visitors 43

मर चुकी मां के गर्भ में पल रहा भ्रूण, उसका भ्रूण 21 सप्ताह का है, 3 महीने बाद लेगा जन्म!

वाशिंगटन एक 30 वर्षीय महिला, जिसे फरवरी में मस्तिष्क मृत (ब्रेन-डेड) घोषित कर दिया गया था, को  अमेरिकी राज्य जॉर्जिया के कड़े गर्भपात विरोधी कानूनों के चलते अब भी जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है। उसका भ्रूण 21 सप्ताह का है, और डॉक्टर चाहते हैं कि वह गर्भावस्था की पूरी अवधि (कम से कम 3 महीने और) पूरी करे, ताकि शिशु का जन्म संभव हो सके। एड्रियाना स्मिथ नाम की इस महिला के परिवार का कहना है कि अस्पताल ने उन्हें बताया कि जब तक भ्रूण के दिल की धड़कन चालू है, तब तक जॉर्जिया कानून के तहत गर्भपात या जीवन रक्षक प्रणाली को बंद करना गैरकानूनी है। स्मिथ की मां एप्रिल न्यूकिर्क ने बताया कि उनकी बेटी को फरवरी में सिरदर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया था, जहां जांच में मस्तिष्क में खून के थक्के पाए गए। बाद में डॉक्टरों ने उसे 'ब्रेन-डेड' घोषित कर दिया।  एप्रिल न्यूकिर्क ने मीडिया से कहा, "मेरी बेटी अब कानूनी रूप से जीवित नहीं है, लेकिन मशीनें उसे जीवित दिखा रही हैं ताकि भ्रूण विकसित हो सके।" उन्होंने चिंता जताई कि डॉक्टरों के अनुसार भ्रूण के मस्तिष्क में तरल पदार्थ है और वह जन्म के बाद जीवित नहीं भी रह सकता। फिलाडेल्फिया के थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी में मातृ-भ्रूण चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. विन्सेन्ज़ो बर्घेला ने कहा, “यह मामला नैतिक और चिकित्सकीय रूप से बेहद जटिल है।” यह उन चुनौतियों को उजागर करता है जो कड़े गर्भपात कानूनों और परिवार की इच्छा के बीच टकराव में उत्पन्न होती हैं।   एमोरी यूनिवर्सिटी अस्पताल ने इस पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी देने से इनकार करते हुए कहा कि वह हमेशा राज्य कानूनों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर कार्य करता है। “हमारी प्राथमिकता मरीजों की सुरक्षा और भलाई है,” अस्पताल ने एक बयान में कहा।परिवार को इस बात की चिंता है कि बच्चा जन्म के बाद जीवित रह पाएगा या नहीं। न्यूकिर्क ने कहा, "वह अंधा हो सकता है, विकलांग हो सकता है या जन्म के बाद मर सकता है।" हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या परिवार एड्रियाना को जीवन रक्षक प्रणाली से हटाना चाहता है। recent visitors 37

खरगोन जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की तर्ज पर मदर मिल्क बैंक शुरू होगा

खरगोन खरगोन जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की तर्ज पर मदर मिल्क बैंक शुरू होगा। यानी यहां अब माताएं दूध का दान करेगी और उन्हें नवजात बच्चों को दिया जाएगा। इस सुविधा से उन नवजात बच्चों को भी सुविधा मिलेगी जिन्हें खुद की माताएं जन्म के बाद दूध नहीं पीला पाती। अभी ऐसे बच्चों को परिजन बाजार से दूध खरीदकर फिर पिलाते हैं।  इससे बच्चे को वह पोषक तत्व नहीं मिल पाते जो मां के दूध से मिलते हैं। जिला अस्पताल में एसएनसीयू के पास लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (स्तनपान प्रबंधन इकाई) तैयार की गई है। कक्ष बनकर तैयार है। भोपाल से उपकरण आने के बाद इसे इसी माह से शुरू किया जाएगा। 6 महीने तक स्टोर किया जा सकता है दूध सिविल सर्जन डॉ. अमरसिंह चौहान ने बताया इस यूनिट की आवश्यकता लंबे समय से है। इसे एनएचएम के जरिए तैयार कराया है। इस यूनिट पर करीब 21 लाख रुपए खर्च हुए हैं। अभी अस्पताल में औसत 20 से 25 डिलेवरी होती है। प्रत्येक नवजात को माता का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में जिन माताओं को दूध अधिक आता है, उस दूध को इस यूनिट में स्थापित रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाएगा। अस्पताल में भर्ती किसी बच्चे को दूध की आवश्यकता पड़ेगी तो डॉक्टर्स के परामर्श पर उसे मां का दूध यहां से उपलब्ध कराएंगे। इस यूनिट में करीब छह माह तक मां के दूध को सुरक्षित रखा जा सकता है। क्या कहते है एक्सपर्ट्स? जन्म के तुरंत बाद नवजात को मां का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। कई बार माताओं को दूध नहीं आता। ऊपर का दूध बच्चे नहीं पचा पाते, उल्टियां होती है, पेट फूलने की समस्या होती है। ऐसी स्थिति में मदर मिल्क बैंक से उन्हें मां का दूध मिलेगा। इससे शिशु मृत्युदर में भी गिरावट आएगी। यह अच्छी पहल है। डॉ. भानुप्रिया खरते, शिशु रोग विशेषज्ञ, खरगोन शिशु मृत्युदर में आएगी गिरावट एसएनसीयू के डॉ. पवन पाटीदार बताते हैं कि यहां वार्ड में करीब 15 बच्चे औसत भर्ती रहते हैं। अधिकांश बच्चे को ऊपर का दूध दिया जाता है। परिजन यह दूध बाजार से या घर से लेकर आते हैं। यह समस्या मां को दूध नहीं आने की स्थिति में आती हैं। recent visitors 38

हिमंत सरमा कांग्रेस की लिस्ट में गौरव गोगोई का नाम देख भड़के, बोले- इनका पाकिस्तान से कनेक्शन

नई दिल्ली कांग्रेस ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए विदेश भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने के लिए अपने चार सांसदों के नाम सरकार को भेज दिए हैं। इनमें असम से आने वाले गौरव गोगोई का भी नाम शामिल है। उनका नाम कांग्रेस की लिस्ट में देखकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सराम ने पलटवार किया है। सरमा ने ट्वीट कर कहा, "लिस्ट में शामिल सांसदों में से एक ने पाकिस्तान में अपने लंबे समय तक रहने से इनकार नहीं किया है। कथित तौर पर वह दो सप्ताह तक पाकिस्तान में रहे हैं। विश्वसनीय दस्तावेजों से पता चलता है कि उनकी पत्नी भारत में काम करते हुए पाकिस्तान स्थित एक NGO से वेतन ले रही थी।'' सरमा ने आगे कहा, ''राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में और दलगत राजनीति से परे, मैं लोकसभा के नेता राहुल गांधी से आग्रह करता हूं कि इस व्यक्ति को ऐसे संवेदनशील और रणनीतिक काम में शामिल न करें।" इससे पहले कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने यह जानकारी देते हुए बताया की पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा से दो-दो सदस्यों के नाम इस प्रतिनिधिमंडल मैं शामिल होने के लिए भेजें हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जिन सांसदों के नाम प्रतिनिधिमंडल के लिए भेजे हैं उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, राज्यसभा सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन तथा राजा बरार शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कल सुबह संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात कर कांग्रेस से पाकिस्तान से आतंकवाद पर भारत के रुख को स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों के लिए पार्टी के चार सांसदों के नाम देने का आग्रह किया था। पार्टी ने कल दोपहर तक कांग्रेस की ओर से सरकार को नाम भेज दिए थे। सरकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों समेत प्रमुख साझेदार देशों में इस महीने के अंत में सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगी जो पहलगाम आतंकवादी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मद्देनजर आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के भारत के संदेश को उन तक पहुंचाएंगे। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल हर तरह के आतंकवाद का मुकाबला करने की भारत की राष्ट्रीय सहमति और दृढ़ दृष्टिकोण को सामने रखेंगे। वे आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के देश के मजबूत संदेश को दुनिया के सामने लेकर जाएंगे।" सरकार ने प्रतिनिधिमंडल के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के ऐसे नेताओं का सोच समझ कर चयन किया है, जिन्हें मुखर माना जाता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, कांग्रेस सांसद शशि थरूर, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सांसद संजय झा, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे सात अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करेंगे। इनमें से चार नेता सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से हैं, जबकि तीन विपक्षी ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) गठबंधन से हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल के करीब पांच देशों का दौरा करने की संभावना है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल में प्रतिष्ठित राजनयिक शामिल होंगे। बयान में कहा गया है, "ऑपरेशन सिंदूर और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की निरंतर लड़ाई के संदर्भ में, सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इस महीने के अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों समेत प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करेंगे।" recent visitors 44

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूज्य श्री देव प्रभाकर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आध्यात्मिक गुरु, परम पूज्य श्री देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय दद्दा जी का संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की सेवा में समर्पित रहा। उनकी दिव्य शिक्षा और साधनामय जीवन मानव कल्याण के संकल्प की सिद्धि के लिए एक प्रेरणा पुंज के समान है।   recent visitors 32