Monday, July 6, 2026 11:09 pm

मंत्री विजयवर्गीय ने कहा- आधुनिक युग में नौजवान पीढ़ी के लिये डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा बहुत उपयोगी रहेगी

भोपाल नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि किसी शहर के संग्रहालय और शिक्षण संस्थान धरोहर के समान हैं इनका समृद्ध होना समाज के गौरव को बढ़ाता है। उन्होंने माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय के गौरवशाली इतिहास की प्रशंसा की। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि आधुनिक युग में नौजवान पीढ़ी के लिये डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा बहुत उपयोगी रहेगी। मंत्री श्री विजयवर्गीय रविवार को भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के मौके पर डिजिटल लाइब्रेरी के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में संग्रहालय की स्थापना से लेकर अब तक के सफर में सहयोग करने वाली संस्थाओं और हस्तियों का सम्मान किया गया। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। उनके इस संकल्प को शैक्षणिक संस्थानों को समृद्ध करके पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सप्रे संग्रहालय की शुरूआत एक छोटे स्वरूप में हुई थी। लगभग पिछले 4 दशकों में इस संस्थान ने अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर ली है। पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री सुरेश पचौरी ने अपने उदबोधन में कहा कि श्री विजयदत्त श्रीधर ने अपनी लगन से भोपाल शहर को एक अमूल्य धरोहर दी है, जिसका लाभ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों को निरंतर मिलता रहेगा। पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री पचौरी ने भारतीय स्टेट बैंक के सीएसआर फंड से दी जाने वाली मदद को सराहनीय बताया। संस्थान के संस्थापक सदस्य श्री विजयदत्त श्रीधर ने बताया कि माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान पुस्तकालय सेवा के 3 प्रारूप में कार्यरत है। पत्रकार एवं पाठक वर्ष 1984 से इसका लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक की सामाजिक सेवा बैंकिंग के अंतर्गत सीएसआर मद से उपलब्ध धन राशि से सप्रे संग्रहालय के 20 लाख दुर्लभ दस्तावेजों और पुराने जर्जर पृष्ठों का डिजिटलीकरण हुआ है। संग्रहालय की संदर्भ सामग्री का फायदा लेकर 1240 शोधार्थियों ने विभिन्न विश्वविद्यालयों से पीएचडी एवं डी.लिट्. की उपाधियां अर्जित की हैं। संग्रहालय में बिजली की बचत के लिये 10 किलोवाट क्षमता क सौर ऊर्जा पैनल भी लगाये गये है। समारोह में सहयोग देने वाली संस्थाओं के साथ श्री शिवकुमार अवस्थी, स्व. सुरेश शर्मा, स्व. शौकत रमूजी के उल्लेखनीय योगदान के लिये उनके परिजनों को सम्मानित किया गया।   recent visitors 36

गाजा के लोग अब भुखमरी के खतरे का सामना कर रहे हैं, तुरंत रोके ‘गाजा’ पर हमले, फिलिस्तीन और मिस्र की इजरायल से अपील

बगदाद फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने गाजा पट्टी में तत्काल और स्थायी युद्धविराम का आग्रह किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इराक की राजधानी बगदाद में आयोजित 34वें अरब लीग शिखर सम्मेलन में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इजरायली सैन्य अभियानों को रोकने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए अरब योजना को अपनाने का आह्वान किया। अब्बास ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायली कब्जे को समाप्त करके और फिलिस्तीनी लोगों के पूर्ण अधिकारों को सुनिश्चित करके ही स्थायी शांति प्राप्त की जा सकती है। मार्च में युद्धविराम का समझौता टूटने के बाद से इजरायल ने गुरुवार से अब तक सबसे घातक बमबारी में सैकड़ों फिलिस्तीनियों को मार डाला। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को मध्य पूर्व का दौरा समाप्त किया। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने पिछले 19 महीने से गाजा में फिलिस्तीनियों पर किए गए 'अत्याचार और हिंसा' की कड़ी निंदा करते हुए हिंसक अभियान का उद्देश्य गाजा की आबादी को समाप्त करना बताया। अल-सीसी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से अमेरिका से गाजा में मानवीय संकट को समाप्त करने के लिए कड़े कदम उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने शत्रुता समाप्त होने के बाद गाजा की शीघ्र पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की मिस्र की प्रतिबद्धता भी दोहराई। शिखर सम्मेलन की समाप्ति के बाद, गाजा में हमास संचालित मीडिया कार्यालय ने उपस्थित लोगों से गाजा पर अन्यायपूर्ण नाकाबंदी को तोड़ने और प्रतिदिन होने वाली हत्याओं को रोकने का आह्वान किया। गाजा के लोग अब भुखमरी के खतरे का सामना कर रहे हैं। इसके लिए क्रॉसिंग को तत्काल और बिना शर्त खोलने, गाजा के लोगों को भोजन, मानवीय सहायता और चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए इजरायल पर दबाव बढ़ाने का आग्रह किया गया। लेबनान के प्रधान मंत्री नवाफ सलाम ने अपने संबोधन में, इजरायल की शत्रुता की निंदा की और उस पर नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इजरायल की तरफ से हो रहे लगातार हमले पिछले साल नवंबर के अंत में दोनों पक्षों के बीच हुई सहमति का उल्लंघन है। सलाम ने आगे कहा, "प्यारे भाइयों, हम आपसे, अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव डालने का आह्वान करते हैं ताकि इजरायल को अपने आक्रमणों को समाप्त करने और सभी लेबनानी क्षेत्रों से पूरी तरह से हटने के लिए मजबूर किया जा सके।" संयुक्त राष्ट्र सहायता प्रमुख टॉम फ्लेचर ने इस सप्ताह सुरक्षा परिषद से पूछा कि क्या वह "नरसंहार को रोकने" के लिए कार्रवाई करेगी। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने युद्ध के बाद अरब देशों के पुनर्निर्माण में मदद के लिए एक कोष बनाने की घोषणा की, जिसमें गाजा और लेबनान के लिए 20-20 मिलियन डॉलर की शुरुआती राशि देने का वादा किया गया, जहां पिछले साल हिजबुल्लाह समूह के खिलाफ इजरायली अभियान में दक्षिणी हिस्से का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया था। शिखर सम्मेलन में 22 अरब लीग सदस्य देशों के नेताओं और शीर्ष राजनयिकों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 2003 के अमेरिकी आक्रमण के बाद इराक की तरफ से आयोजित यह दूसरा आयोजन है। पहला आयोजन 2012 में हुआ था। इजरायल ने छह सप्ताह के युद्ध विराम के बाद गाजा पर फिर से सैन्य अभियान की शुरुआत कर दी है। इजरायल का आरोप है कि हमास, आतंकवादियों के बीच काम करता है। हालांकि शिखर सम्मेलन में मौजूद नेताओं ने इसका विरोध किया। इजरायल का घोषित लक्ष्य हमास की सैन्य और सरकारी क्षमताओं को खत्म करना है। हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला किया था, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया था। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इजरायल सैन्य अभियान ने क्षेत्र के भीड़भाड़ वाले इलाके को तबाह कर दिया है। 2.3 मिलियन निवासी अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं और 53,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। इजरायल पर युद्ध विराम वार्ता फिर से शुरू करने और गाजा में खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति की अनुमति देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। recent visitors 49

अयातुल्लाह अली खामेनेई ने तेहरान में शिक्षकों के साथ एक बड़ी बैठक की, ट्रंप ने शांति स्थापित कराने का झूठा दावा किया

तेहरान ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाल में किए उस दावे को 'झूठा' करार दिया है। ट्रंप ने कहा था कि वह शांति सुनिश्चित करने के लिए अपने 'पावर' का इस्तेमाल करना चाहते हैं। खामेनेई ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि गाजा पट्टी में हो रही हत्याओं को ट्रंप प्रशासन का समर्थन प्राप्त है। अयातुल्लाह अली खामेनेई ने तेहरान में शिक्षकों के साथ एक बड़ी बैठक की। इस बैठक में उन्होंने पश्चिम एशिया के अपने दौरे के दौरान क्षेत्र में शांति की स्थापना के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया दी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ईरना के अनुसार, शनिवार को तेहरान में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, "क्षेत्र की अपनी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया टिप्पणियां वक्ता और अमेरिकी राष्ट्र दोनों का अपमान हैं।" ईरानी नेता ने कहा, "ट्रंप ने कहा कि वह शांति के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करना चाहते हैं और यह उन्होंने झूठ बोला। उन्होंने, अन्य अमेरिकी अधिकारियों और अमेरिकी प्रशासन ने गाजा में हत्याओं को पूरा समर्थन दिया, उन्होंने किसी भी स्थान पर युद्ध भड़काने और अपने भाड़े के सैनिकों का समर्थन करने के लिए सत्ता का इस्तेमाल किया है।" अली खामेनेई ने इजरायल पर दिए अपने पूर्व के बयानों को दोहराया और उसे क्षेत्र का घातक और खतरनाक कैंसर बताते हुए उखाड़ फेंके जाने की आवश्यकता बताई। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने विश्वास जताया कि क्षेत्रीय देशों के दृढ़ संकल्प और प्रयासों के साथ, अमेरिका को इस क्षेत्र को अवश्य छोड़ना चाहिए। इस सप्ताह की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में स्थित तीन खाड़ी अरब देशों – सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया था। मंगलवार को सऊदी की राजधानी रियाद में दिए एक बयान में ट्रंप ने ईरान को मध्य पूर्व में 'सबसे विनाशकारी शक्ति' बताया था और उस पर क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। हालांकि, ट्रंप ईरान के साथ एक ऐसे सौदे से बचना चाहते हैं जो संयुक्त व्यापक कार्य योजना की तरह हो, जिस पर बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान सहमति बनी थी। इसमें यूरोपीय संघ और चीन भी शामिल थे। ट्रंप ने 2018 में संयुक्त व्यापक कार्य योजना से खुद को अलग कर लिया था और तेहरान पर फिर से प्रतिबंध लगाए थे। ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने शनिवार को कहा कि देश शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अपने अधिकार को नहीं छोड़ेगा। recent visitors 54

सीजफायर को किसी निर्धारित समयसीमा में नहीं बांधा गया, गोली चली तो PAK के लिए बहुत मुश्किल होगी: भारतीय सेना

नई दिल्ली ऑपेरशन सिंदूर के बाद सैन्य टकराव को टालने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को सीजफायर पर बनी सहमति अभी कायम रहेगी। भारतीय सेना ने कहा कि दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच रविवार को कोई बातचीत प्रस्तावित नहीं थी मगर इस सीजफायर को किसी निर्धारित समयसीमा में नहीं बांधा गया है। सीजफायर जारी रहने की घोषणा से साफ है कि भारत सैन्य टकराव को स्थाई विराम देने की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर विश्वास बहाली के विकल्पों पर ठोक-बजाकर कदम उठाना चाहता है। एक भी गोली नहीं चलाए जाने की बात कही गई थी एलओसी और अंतर्राष्ट्रीय सीमा एक भी गोली नहीं चलाने यानि शून्य फायरिंग को सीजफायर कायम रहने की अनिवार्य शर्त बनाया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच 12 मई को हुई दूसरी बातचीत में सीमा के अग्रिम मोर्चों से सैनिकों की संख्या घटाने के साथ-साथ सीजफायर कायम रखने के लिए दोनों तरफ से एक भी गोली नहीं चलाए जाने की बात कही गई थी। भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को बेलाग बता दिया था कि उस पार से एक भी गोली चली तो सीजफायर को कायम रखना मुश्किल होगा। इस सख्त चेतावनी का ही असर है कि 10 मई के बाद एलओसी तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर दोनों ओर से कोई भी गोलीबारी की खबर अब तक नहीं आयी है। सीजफायर बनाए रखने पर की जाएगी समीक्षा सेना के सूत्रों की ओर से भी पुष्टि की गई है कि सीजफायर प्रभावी होने के बाद से सीमा पर किसी तरह की फायरिंग नहीं हुई है। सीजफायर को बनाए रखने पर दूसरी बैठक में बनी सहमति के बाद ही संकेत दिए गए थे कि 18 मई को भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच संभवत: बातचीत में इसकी समीक्षा की जाएगी। इस वार्ता को लेकर मीडिया में बढ़ी सुर्खियों को देखते हुए रविवार को सेना की ओर से कहा गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के आज समाप्त होने की बात सही नहीं है। दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच आज कोई वार्ता निर्धारित नहीं हैं। जहां तक 12 मई को डीजीएमओ की बातचीत में तय किए गए युद्ध विराम के जारी रहने का सवाल है, इसकी कोई समाप्ति तिथि नहीं है। वैसे भारत तथा पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच प्रत्येक मंगलवार को हाटलाइन पर बातचीत की स्थापित व्यवस्था है और ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इसके अनुरूप ही 20 मई को सीजफायर के स्वरूप को आगे बढ़ाने के लिए अगले दौर की बातचीत होगी। recent visitors 54

न्यूयॉर्क में मैक्सिकन जहाज पुल से टकराया, 277 लोग सवार थे। हादसे में 2 लोगों की मौत, कई घायल

न्यूयॉर्क न्यूयॉर्क में उत्सव मनाने जा रहा मैक्सिकन नौसेना का एक विशाल जहाज ब्रुकलिन ब्रिज से टकरा गया। हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए। समाचार के अनुसार, कथित तौर पर यह जहाज मैक्सिकन सेना का कुआउथेमोक था। इसमें 277 लोग सवार थे। हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई जबकि 19 घायल हैं, 4 की हालत गंभीर है। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो से पता चलता है कि जहाज का 147 फुट लंबा ऊपरी हिस्सा पुल के नीचे से सुरक्षित रूप से नहीं गुजर सकता था। ट्रैफिक ज्यादा था, इस वजह से हादसा हुआ। टक्कर जोरदार नहीं थी, नहीं तो कई और लोगों की जान जा सकती थी। हालांकि घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल था। मौके पर मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने प्रेस कांफ्रेंस करके इस घटना की पुष्टि की। अधिकारियों ने मरने वाले दो चालक दल के सदस्यों के नाम जारी नहीं किए हैं। अग्निशमन अधिकारियों ने मोटर चालकों को चेतावनी दी कि वे ब्रुकलिन में न्यू डॉक स्ट्रीट और वॉटर स्ट्रीट के नजदीक ट्रैफिक जाम से जूझ सकते हैं। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट डालते हुए लोगों को इस घटना के संबंध में जानकारी देते हुए चेताया भी है। पोस्ट में बताया गया है, "भारी यातायात और महत्वपूर्ण आपातकालीन दल की मौजूदगी के कारण ब्रुकलिन ब्रिज के आसपास के क्षेत्रों का रुख करने से बचना चाहिए।" अमेरिकी मीडिया के मुताबिक इस सूचना के बाद ब्रुकलिन ब्रिज की सभी लेन दोनों दिशाओं में बंद कर दी गई थीं, बाद में इसे जनता के लिए फिर से खोल दिया गया। जिस पुल से मैक्सिकन जहाज टकराया है उसका नाम 'सस्पेंशन ब्रिज' है। इसे अमेरिका के मशहूर पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। ब्रुकलिन और मैनहट्टन नदी पर यह पुल 1883 में बना था। रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज को अमेरिका के 250वें जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए जुलाई 2026 में न्यूयॉर्क लौटना था। recent visitors 45

तेंदू पत्ता तोड़ाई और सँग्रह का कार्य चल रहा युद्ध स्तर पर : बनमण्डलाधिकारी सिंगरौली

सिंगरौली इस वन मंडल / जिला यूनियन सिंगरौली अंतर्गत तेन्दूपत्ता संग्रहण वर्ष 2025 में 173620.000 मानक बोरा का लक्ष्य संघ मुख्यालय भोपाल द्वारा निर्धारित किया गया है जिसकी प्राप्ति हेतु युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है एवं उक्त लक्ष्य की प्राप्ति हेतु इस कार्यालय द्वारा पर्यवेक्षण अधिकारी / नोडल अधिकारियों की 75 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में नियुक्ति की गयी है एवं 874 संग्रहण केन्द्र संचालित है जिसमें फड़मुंशियों को नियक्ति की जा चुकी हैं। वर्ष 2025 में तेन्दूपत्ता की दर 400 रूपय प्रति सैकड़ा शासन द्वारा निर्धारित है। अच्छी गुणवत्ता के संग्रहण हेतु समिति स्तर पर फ्लैक्स एवं बैनर तथा व्यापाक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया है कि 50 पत्ते की गड्डी होनी चाहिए एवं माता दाग व कटे-फटे पत्ते नही होने चाहिए और अच्छी गुणवत्ता के पत्ते बीड़ी बनाने योग्य होना चाहिए। सभी संग्राहकों से अपेक्षा की जाती है की अच्छी गुणवत्ता एवं मानक आकार के पत्तों का संग्रहण करेंगे । recent visitors 45

आईएमएफ के बाद अब पाकिस्तान चीन से भी भीख चाहता है, वांग यी से मुलाकात करने जाएंगे इशाक डार

इस्लामाबाद आईएमएफ से भीख मिलने के बाद अब पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार सोमवार को चीन की यात्रा पर जाएंगे। यहां उनकी चीनी विदेश मंत्री वांग यी से द्विपक्षीय वार्ता होगी। माना जा रहा है कि आईएमएफ के बाद अब पाकिस्तान चीन से भी भीख चाहता है। पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भी चीन पहुंचेंगे। वह 20 मई को चीन पहुंचने वाले हैं। जियो न्यूज के मुताबिक, यहां उनकी पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता होगी। सीजफायर के बाद पहली विदेश यात्रा इन तीनों देशों के बीच क्षेत्रीय ट्रेड को विस्तार देने, सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने और हालिया भारत-पाक संघर्ष पर चर्चा होने की उम्मीद है। बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को सीदफायर होने के बाद इशाक डार की यह पहली विदेश यात्रा है। चीन ने सीजफायर का स्वागत करते हुए कहा था कि यह दोनों देशों के लिए हितकारी है और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए अनुकूल है। बता दें कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक कर उन्हें तबाह कर दिया था। recent visitors 48