मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल में अयोग्य अधिकारियों को सौंपे मलाईदार पद

Lucrative posts in the Madhya Pradesh Electricity Board handed over to incompetent officials. भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कार्यपालन यंत्री (डीजीएम) के पदों पर अपात्रों को करंट चार्ज सौंपे जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में मण्डल (बोर्ड) संवर्ग के अधिकारियों के लिए सुरक्षित रखे गए कार्यपालन यंत्री के पदों पर कंपनी संवर्ग के ऐसे सहायक अभियंताओं (AE) को करंट चार्ज दिया गया है, जो हाल ही में संपन्न पदोन्नति प्रक्रिया में कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के लिए पात्र नहीं पाए गए। मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने इस व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में जिस अधिकारी को विभाग ने कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के योग्य नहीं माना, उसी अधिकारी को करंट चार्ज के माध्यम से उसी पद का दायित्व सौंप दिया गया है। इससे पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। ले रहे वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई अधिकारी निर्धारित सेवा नियमों एवं पात्रता की कसौटी पर कार्यपालन यंत्री बनने के योग्य नहीं है, तो उसे उसी पद का करंट चार्ज किस नियम, किस प्रशासनिक आवश्यकता और किस सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से दिया गया। ऐसे अधिकारी उसी पद के प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय निर्णय ले रहे हैं, जबकि नियमित पदोन्नति के लिए उन्हें पात्र नहीं माना गया। समकक्ष अधिकारियों में पनप रही कुंठा संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से मण्डल संवर्ग के वरिष्ठ एवं पात्र अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अनेक अधिकारी 35 से 38 वर्षों की सेवा पूर्ण करने के बाद भी अपनी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि उनके लिए सुरक्षित पदों पर अन्य संवर्ग के अधिकारियों से करंट चार्ज के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है। इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था से समकक्ष अधिकारियों में कुंठा का भाव पनप रहा है। कार्यपालन यंत्री के करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा की मांग मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ भोपाल के प्रभारी अध्यक्ष केके आर्य ने राज्य शासन एवं विद्युत कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि बोर्ड संवर्ग के लिए सुरक्षित कार्यपालन यंत्री पदों पर दिए गए सभी करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। संबंधित आदेशों को सार्वजनिक किया जाए। पात्र अधिकारियों को ही उक्त पदों का दायित्व सौंपा जाए। recent visitors 9

MP News: एनालॉग पनीर पर सख्ती, कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT नहीं बनेगी बाधा

MP News: Crackdown on analogue paneer; CPCT will not be a hurdle in employee promotions. भोपाल। मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा को बाधा नहीं बनने देने के संबंध में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। एनालॉग पनीर पर सरकार सख्त मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को ऐसे उत्पादों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार का कहना है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। मिलावट के खिलाफ होगी निगरानी एनालॉग पनीर से जुड़े मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाजार में ऐसे उत्पादों की पहचान, जांच और नियमानुसार कार्रवाई को लेकर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार के इस कदम से मिलावटी या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले खाद्य उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। कर्मचारियों को पदोन्नति में बड़ी राहत के संकेत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकारी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को लेकर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि CPCT परीक्षा के कारण किसी पात्र कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित न किया जाए और न ही किसी कर्मचारी को रिवर्ट किया जाए।इस संबंध में नियमों और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद CPCT की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, अंतिम राहत सरकार द्वारा लिए जाने वाले औपचारिक निर्णय और लागू किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगी। CM के दो बड़े निर्देश, दो अलग-अलग वर्गों को राहत की उम्मीद मुख्यमंत्री के निर्देशों का असर एक ओर खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।एक तरफ मिलावट पर शिकंजा, दूसरी तरफ कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता आसान करने की तैयारी।अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन निर्देशों को लागू करने के लिए संबंधित विभाग कितनी जल्दी ठोस आदेश जारी करते हैं। मुख्य सवाल एनालॉग पनीर पर रोक के लिए सरकार की कार्रवाई कितनी सख्त होगी? और CPCT को लेकर कर्मचारियों को वास्तविक राहत कब मिलेगी? recent visitors 15

जीएडी के नियमों को ठेंगा बता पीएचई विभाग, पदोन्नति देने ठोकी अपनी शर्तें, अधिकारों से वंचित कर्मचारी

Flouting GAD rules, the PHE Department has imposed its own conditions for granting promotions, leaving employees deprived of their rights. भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों एवं कर्मचारी हितैषी मंशा अनुरूप जीएडी के नियमों के मुताबिक सभी विभागों में पदोन्नति का बड़ा काम चल रहा है। लेकिन कुछ विभाग उदासीनता भी दिखा रहे हैं। ऐसा ही कुछ पीएचई विभाग में चल रहा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मनमानी से सैकड़ों कर्मचारी पदोन्नति से बाहर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।वैसे तो जीएडी ने सभी विभागों को विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। मध्यप्रदेश शासन के अनेक विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी पदों पर पदोन्नत कर दिया गया है। कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता पूर्ण करने के लिए 5 वर्ष का समय भी दिया गया है। जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD), स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, उद्योग विभाग, जनसंपर्क विभाग तथा संभागीय उपायुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग सहित कई विभागों में जीएडी नियमों के तहत कर्मचारियों की पदोन्नति का कार्य बड़ी तेजी से चल रहा है। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति अब तक लंबित है। पीएचई विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जब समान शासन, समान सेवा नियम और समान परिस्थितियों में अन्य विभागों के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल चुका है, तब पीएचई विभाग के कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और भेदभाव की भावना उत्पन्न हो रही है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी शासन की मंशा के अनुरूप तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं, ताकि पात्र कर्मचारियों को शीघ्र पदोन्नति प्रदान की जा सके तथा कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी की पूर्ति के लिए अन्य विभागों की तरह पाँच वर्ष का अवसर उपलब्ध कराया जाए। कर्मचारियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी समान न्याय मिलेगा और पूरे प्रदेश में एक समान पदोन्नति नीति लागू होगी। recent visitors 24

डेयरी की आड़ में चल रहा था अवैध बूचड़खाना, पुलिस ने किया खुलासा; बेटे-दामाद व मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Illegal slaughterhouse operating under the guise of a dairy exposed by police; son, son-in-law, and main accused arrested. भोपाल । निशातपुरा थाना क्षेत्र के कमला नगर में मिला संदिग्ध मांस गोवंश का ही निकला है। हालांकि अभी तक एफएसएल की रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन पुलिस ने एक गाय का धड़ बरामद करने के बाद यह मानकर चल रही है कि यह मामला गोकशी का ही है। पुलिस ने डेयरी की आड़ में अवैध बूचडख़ाना संचालित करने वाले मुख्य आरोपी अजीज और बेअे आसिफ तथा दामाद जुबैर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से सड़कों पर घूमने वाली आवारा गायों और गौवंश चुराकर लाते और लोगों को बताते की वह डेयरी का संचालन कर रहे हैं। हालांकि जहां कथित तौर पर डेयरी का संचालन आरोपी बता रहे हैं, वह जमीन भी शासकीय बताई जा रही है। जिला प्रशासन जमीन की भी जांच शुरू कर दिया है। अवैध अतिक्रमण कर कथित डेयरी के नाम पर बूचडख़ाना संचालित किए जाने का खुलासा होने के बाद मामला सुर्खियों में है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी देर रात बजरंगदल के डेढ़ दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने एक ऑटो से ले जाए जा रहे मांस को पकड़कर हंगामा कर गोकशी का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को रिगफ्तार कर लिया है। गौपाल रखे हुए थे नजरपुलिस सूत्रों के अनुसार गोकशी के बाद गायों की हड्डियों और सिर को पास की बंजर जमीन और खेतों में गड्ढे कर मिट्टी के अंदर गाड़ देते थे, ताकि पड़ोसियों को गोकशी का पता नहीं चले। कमला नगर क्षेत्र में रहने वाले सत्येंद्र ने दावा किया कि पिछले तीन महीने में उनकी चार गायों चोरी हो चुकी हैं। मेरे साथ इस कॉलोनी और अन्य कॉलोनियों की कई गायों और गोवंश चोरी हो चुके हैं। इसके बाद हम लोग बजरंगदल के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर गायों की निगरानी करते थे। जानें कैसे हुआ खुलासा?तभी पता चला कि अजीज और उससे जुड़े लड़के सड़कों पर घूमने वाली गायों को चुराते हैं। इसके बाद निगरानी की गई तो पता चला कि गायों तो चुराकर लाते हैं, लेकिन इनके यहां ज्यादा दिन तक गायें रहती रहीं। ऐसे में खुलासा हुआ कि जब यह व्यक्ति गायों को बेचता नहीं तो क्या करता है? इसके बाद गोकशी का खुलासा हुआ। कई दिनों से कॉलोनी के लड़के निगरानी कर रहे थे, तब पता चला कि यह गायों को काटकर मांस बेचने का कार्य कर रहा है। इसके बाद मांस को पकड़ा गया है। पुलिस अब यह भी पता कर रही है कि गोवंश की मांस की सप्लाई कहां की जा रही थी। संदिग्ध मांस की एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद अगर गाय का मांस की रिपोर्ट आती है तौर कुछ और लोगों की गिरफ्तारी संभव है। recent visitors 30

200 करोड़ की शंकराचार्य प्रतिमा के निर्माण में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, मुख्य पिलर में आया झुकाव, लोकायुक्त ने शुरू की जांच

Safety standards ignored in the construction of the ₹200-crore Shankaracharya statue; main pillar develops a tilt; Lokayukta initiates an investigation. भोपाल। ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की नव-निर्मित 108 फीट ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ वननेस) के एक पिलर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस सॉफ्टवेयर (ईटीएबीएस) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल प्रतिमा के मुख्य आंतरिक स्टील पिलर पर तय सीमा से करीब 24 प्रतिशत अधिक दबाव पड़ रहा है। मानकों के मुताबिक सुरक्षा का स्ट्रेस रेशियो 0.85 होना चाहिए, जो बढ़कर 1.244 तक पहुंच गया है। इस दबाव के कारण मुख्य पिलर में हल्का झुकाव भी देखा गया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई2,300 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में सुरक्षा और तकनीकी खामियों की शिकायत अब सीबीआई, लोकायुक्त और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव तक पहुंच चुकी है। यह शिकायत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी) के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी ने दर्ज कराई है। बनर्जी का आरोप है कि वे पिछले 6 महीनों से मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और निर्माण कंपनी एलएंडटी को लिखित में इस खतरे की चेतावनी दे रहे थे, लेकिन कोई सुधार नहीं किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर गड़बड़ी को उजागर करने के बाद फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी को उनके पदों से हटा दिया गया है। बता दें कि 200 करोड़ की इस प्रतिमा को 140 से 170 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं को झेलने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन जांच के अनुसार यह 120 किमी/घंटा की हवा भी नहीं झेल सकती। फिलहाल इंदौर लोकायुक्त कार्यालय ने इस मामले की जांच शुरू करते हुए शिकायतकर्ता से सभी जरूरी दस्तावेज मांगे हैं। अधिकारियों का पक्षइस मामले पर आदि शंकराचार्य न्यास के सीईओ डॉक्टर मनीष पांडेय का कहना है कि एकात्म धाम प्रोजेक्ट का संचालन पर्यटन विभाग द्वारा हो रहा है, इसलिए इस विषय पर पर्यटन निगम ही बात कर सकता है। वहीं, मप्र पर्यटन विकास निगम के एमडी दिलीप यादव ने निर्माण में किसी भी तरह की कमी से साफ इनकार किया है। उनका दावा है कि विशेषज्ञों की देखरेख में काम हुआ है और गुणवत्ता में किसी लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। recent visitors 42

भड़काऊ पोस्ट करने वाले कर्मचारियों पर कसा शकंजा मप्र सरकार ने जारी किया फरमान

Employees who post inflammatory posts are being prosecuted. The Madhya Pradesh government has issued a decree. भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम जारी किए हैं। अब भड़काऊ पोस्ट, राजनीतिक कमेंट या विवादित चीजें शेयर करने पर कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई होगी। मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर अब सरकार की सीधी नजर रहेगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में विस्तृत आदेश जारी किया है। आदेश में साफ कहा गया है कि कोई भी शासकीय सेवक ऐसी सामग्री साझा नहीं करेगा, जिससे सामाजिक वैमनस्य फैलने का खतरा हो। सरकार ने इसे शासकीय सेवा आचरण का जरुरी हिस्सा बताया है। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और यूट्यूब सभी प्लेटफॉर्म आदेश के दायरे में आते हैं। किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने वाली सामग्री पोस्ट करना सख्त मना है। खास बात यह है कि सिर्फ पोस्ट करना ही नहीं, विवादित सामग्री को लाइक, शेयर या फॉरवर्ड करना भी नियम उल्लंघन माना जाएगा। यानी कर्मचारियों को अब सोशल मीडिया पर हर एक्टिविटी में सतर्क रहना होगा। आदेश के मुताबिक कोई भी सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में प्रचार नहीं करेगा। किसी राजनीतिक अभियान पर सार्वजनिक टिप्पणी करना भी नियम विरुद्ध होगा। सरकार ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों का सीधा उल्लंघन बताया है। इसका मकसद प्रशासनिक तटस्थता बनाए रखना है। इसके अलावा विभाग ने कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर होने वाली बहस और क्रॉस-कमेंट से भी दूर रहने को कहा है। तर्क है कि किसी भी सार्वजनिक टिप्पणी को सीधे सरकार की छवि से जोड़ा जाता है। इसलिए कर्मचारियों से संयम और जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अपेक्षा की गई है। यह सलाह हर स्तर के कर्मचारी पर लागू होगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने चेतावनी दी है कि उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसमें मप्र सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 और भारतीय न्याय संहिता दोनों लागू हो सकते हैं। यानी सिर्फ विभागीय कार्रवाई ही नहीं, कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। सभी विभागाध्यक्षों को आदेश का तुरंत पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने चेतावनी दी है कि उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसमें मप्र सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 और भारतीय न्याय संहिता दोनों लागू हो सकते हैं। यानी सिर्फ विभागीय कार्रवाई ही नहीं, कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। सभी विभागाध्यक्षों को आदेश का तुरंत पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को अपनी सोशल मीडिया गतिविधियों पर पुनर्विचार करना होगा। recent visitors 29

सीहोर शरबती गेहूं एवं रीवा सुन्दरजा आम के बाद इन चार फसलों को मिला जीआई टैग

After Sehore Sharbati wheat and Rewa Sundarja mango, these four crops got GI tag. भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किसानों की समृद्धि एवं कृषि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन के मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के सहयोग तथा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के तकनीकी एवं वैज्ञानिक प्रयासों से प्रदेश की चार विशिष्ट कृषि उपजों में (सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर एवं छत्रिय धान) को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) टैग प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की समृद्ध कृषि विरासत एवं विशिष्ट कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जीआई टैग प्राप्त होने से इन कृषि उपजों को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा, उनकी ब्रांड वैल्यू एवं बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी तथा किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ कृषि निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा।यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि जीआई टैग प्राप्त करने वाली चारों कृषि उपजें प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों से संबंधित हैं। इससे विशेष रूप से महाकौशल क्षेत्र के किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा। इन उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी, क्षेत्र की पारंपरिक कृषि पद्धतियों एवं जैव-विविधता का संरक्षण होगा तथा कृषि आधारित प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात को नई गति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सीहोर शरबती गेहूं एवं रीवा सुन्दरजा आम को भी जीआई टैग दिलाने में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश शासन भविष्य में भी अन्य विशिष्ट कृषि उपजों को जीआई टैग दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ मध्यप्रदेश की विशिष्ट कृषि पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सहायक संचालक योगेश नागले ने बताया कि “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश की चार विशिष्ट कृषि उपजों को जीआई टैग प्राप्त होना मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि प्रदेश की कृषि विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।“किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री ऐन्दल सिंह कंसाना ने बताया कि “जीआई टैग प्रदेश की विशिष्ट कृषि उपजों को वैश्विक पहचान प्रदान करने के साथ किसानों की आय में वृद्धि, स्थानीय कृषि विरासत के संरक्षण तथा मूल्य संवर्धन का प्रभावी माध्यम है। राज्य शासन भविष्य में भी प्रदेश की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों के जीआई पंजीयन के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।“ किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने बताया कि “मंडी बोर्ड प्रदेश की विशिष्ट कृषि उपजों की ब्रांडिंग एवं वैश्विक पहचान स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जीआई टैग प्राप्त होने से विशेष रूप से महाकौशल क्षेत्र के किसानों को नए बाजार, बेहतर मूल्य एवं निर्यात के अवसर प्राप्त होंगे।मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि मंडी बोर्ड भविष्य में भी प्रदेश की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों के जीआई पंजीयन एवं विपणन संवर्धन के लिए सक्रिय सहयोग प्रदान करता रहेगा। recent visitors 40