मप्र जल निगम का बदलेगा नाम, अब कहलाएगा एमपी वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन, मीटिंग में प्रस्ताव पास

MP Jal Nigam to be renamed ‘MP Water and Sanitation Corporation’; proposal passed in meeting. भोपाल: सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में एमपी जल निगम के संचालक मंडल की 26वीं बैठक हुई है। बैठक सीएम हाउस में हुई है। इस बैठक में एमपी जल निगम मर्यादित को पुनर्गठित कर अब मध्यप्रदेश वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन बनाने का अहम प्रस्ताव पारित हुआ है। कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजादरअसल, बैठक में वर्तमान मप्र जल निगम मर्यादित (एमपीजेएनएम) को पुर्नगठित कर अब मध्यप्रदेश वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन (एमपी-वास्को) बनाने का अहम प्रस्ताव पारित किया गया। संचालक मंडल ने यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव अंतिम अनुमोदन के लिए मंत्रि-परिषद् को भेजने की मंजूरी दे दी। जल विकास और स्वच्छता प्रबंधन में नए लक्ष्यों पर काम करेगाबैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल निगम अब अपने नए नाम (एमपी-वास्को) और नई जिम्मेदारियों के साथ प्रदेश में जल विकास एवं स्वच्छता प्रबंधन में नए लक्ष्यों और अतिरिक्त संसाधनों के साथ काम करेगा। सीएम ने मप्र जल निगम द्वारा विचार और अनुमोदन के लिए रखे गए विभिन्न एजेंडा प्रस्तावों को मंजूरी दी। मोहन यादव ने जल निगम के वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए तैयार संचालक मण्डल के प्रतिवेदन और वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनअंकेक्षित वार्षिक लेखाओं का अनुमोदन किया। बजट अनुमान 57 करोड़ रुपए करने का अनुमोदनमोहन यादव ने कैप्टिव मोड के तहत 60 मेगावॉट ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा परियोजना विकसित करने के लिए गठित परियोजना कंपनी में मप्र जल निगम के प्रतिनिधित्व के लिए प्रबंध संचालक को अधिकृत कर दिया। साथ ही इसी परियोजना के विकास के लिए गठित प्रोजेक्ट कंपनी में डीमैटीरियलाइज्ड रूप में 26 प्रतिशत इक्विटी शेयर रखने का अनुमोदन किया। उन्होंने मप्र जल निगम के इक्विटी शेयरों के नए पदाधिकारियों को हस्तांतरण और जल निगम द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए गए बजट अनुमान 57 करोड़ रुपए का अनुमोदन किया टेंडर मंजूरी की तय सीमा बढ़ीसीएम यादव ने मप्र जल निगम के संचालक मण्डल में स्वतंत्र निदेशक के पद पर सुमित बोस की पुनः नियुक्ति का भी अनुमोदन किया। उन्होंने प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन और एक्जी़क्यूशन मेथोडोलॉजी के अनुसार मप्र जल निगम के एमडी की टेंडर मंजूरी की तय सीमा 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया। recent visitors 24

एमपी में फिर चलीं देर रात तबादला एक्सप्रेस, 10 IPS समेत 137 पुलिस अफसरों को नई जिम्मेदारी

Late night transfer express trains resume in MP, 137 police officers, including 10 IPS officers, get new responsibilities भोपाल । मध्यप्रदेश में रविवार रात पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल किए गए हैं. गृह विभाग ने 10 IPS अधिकारियों और 127 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों समेत कुल 137 पुलिस अफसरों के ट्रांसफर किए हैं. सभी अधिकारियों को आगामी आदेश तक नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं. 2023-24 बैच के 10 आईपीएस यहां से वहां मध्यप्रदेश में 10 IPS समेत 137 पुलिस अफसरों के तबादला सूची जारी हो गई है. तबादला सूची में 2023 बैच के 4 और 2024 बैच के 6 IPS अधिकारी शामिल हैं. कई अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय से मैदानी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि कुछ अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले में नई जिम्मेदारी दी गई है. IPS अधिकारियों की नई पदस्थापना आईपीएस मनीष भारद्वाज को पुलिस मुख्यालय की साइबर शाखा से हटाकर ACP कोतवाली, नगरीय इंदौर की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं मनोज कुमार को ACP एमपी नगर, नगरीय भोपाल पदस्थ किया गया है. इसके अलावा आलोक कुमार वर्मा को देवास से CSP रीवा की जिम्मेदारी दी गई है. वैभव प्रिया को रतलाम से SDOP नेपानगर, शुभम सिंह ठाकुर को जबलपुर से SDOP गाडरवारा और अमित कुमार को खंडवा से SDOP सिंगरौली पदस्थ किया गया है. 127 DSP स्तर के अधिकारियों का भी फेरबदल IPS अधिकारियों के साथ ही राज्य पुलिस सेवा के 127 अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया गया है. इनमें उप पुलिस अधीक्षक (DSP), SDOP, नगर पुलिस अधीक्षक (CSP), सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) और सहायक सेनानी स्तर के अधिकारी शामिल हैं. तबादला सूची में कई ऐसे अधिकारी भी हैं, जिन्हें पुलिस मुख्यालय से मैदानी जिम्मेदारियां दी गई हैं. वहीं अलग-अलग जिलों में तैनात SDOP और नगर पुलिस अधीक्षकों को भी दूसरी जगह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. recent visitors 39

MP सरकार का बड़ा वित्तीय फैसला: केंद्रीय योजनाओं में अग्रिम खर्च पर रोक, अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी

MP Budget Rules: No advance funds from the state treasury for central schemes; here are the details of the MP government’s new decision. भोपाल। केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य के बजट पर अनावश्यक वित्तीय दबाव रोकने के लिए वित्त विभाग ने केंद्रीय क्षेत्रीय और केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में केंद्रांश की राशि प्राप्त होने से पहले राज्य बजट से अग्रिम व्यय पर रोक लगा दी है। केवल प्रतिपूर्ति श्रेणी की योजनाओं में अपरिहार्य व्यय की अनुमति रहेगी, लेकिन खर्च के तत्काल बाद केंद्र सरकार से प्रतिपूर्ति की राशि प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा।केंद्र से राशि मिलने में देरीकेंद्रीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई मामलों में केंद्रांश की प्रत्याशा में राज्य बजट से पहले ही राशि खर्च कर दी गई। दूसरी ओर प्रतिपूर्ति के आधार पर संचालित योजनाओं में भारत सरकार से प्रतिपूर्ति राशि प्राप्त करने में देरी हो रही है। इससे राज्य के संसाधनों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ रहा है। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि केंद्रीय क्षेत्रीय एवं केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में अब केंद्रांश की राशि प्राप्त होने के बाद ही राज्य बजट में संबंधित योजना के राज्यांश का उपयोग किया जाए।केंद्र सरकार को भेजेंगे प्रस्तावकेंद्रांश मिलने की उम्मीद में राज्य के बजट से अग्रिम खर्च नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं विभागों की जिम्मेदारी रहेगी कि वे प्रतिपूर्ति श्रेणी की योजनाओं में जैसे ही आवश्यक व्यय हो, भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाए।केंद्रीय योजनाओं की राशि से संबंधित उपयोगिता प्रमाण-पत्र भी समय पर भेजे जाएं। यदि से लंबित हैं तो उन्हें तत्काल भेजें ताकि राशि जारी हो सके। ये ऑनलाइन भेजने होंगे। बजट नियंत्रण अधिकारी बनाएंगे सूचीसभी विभागों के बजट नियंत्रण अधिकारियों से कहा गया है कि वे ऐसी सभी योजनाओं की सूची तैयार करें जिनमें केंद्रांश की राशि अपेक्षित या लंबित है। इसके बाद संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और नोडल अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर लंबित राशि राज्य के पक्ष में जल्द प्राप्त करनी होगी।केंद्रीय राशि की प्राप्ति में अनावश्यक विलंब होने और इसके कारण राज्य के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की स्थिति में संबंधित विभाग तथा बजट नियंत्रण अधिकारी जिम्मेदार होंगे। recent visitors 24

मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल में अयोग्य अधिकारियों को सौंपे मलाईदार पद

Lucrative posts in the Madhya Pradesh Electricity Board handed over to incompetent officials. भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कार्यपालन यंत्री (डीजीएम) के पदों पर अपात्रों को करंट चार्ज सौंपे जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में मण्डल (बोर्ड) संवर्ग के अधिकारियों के लिए सुरक्षित रखे गए कार्यपालन यंत्री के पदों पर कंपनी संवर्ग के ऐसे सहायक अभियंताओं (AE) को करंट चार्ज दिया गया है, जो हाल ही में संपन्न पदोन्नति प्रक्रिया में कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के लिए पात्र नहीं पाए गए। मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने इस व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में जिस अधिकारी को विभाग ने कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के योग्य नहीं माना, उसी अधिकारी को करंट चार्ज के माध्यम से उसी पद का दायित्व सौंप दिया गया है। इससे पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। ले रहे वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई अधिकारी निर्धारित सेवा नियमों एवं पात्रता की कसौटी पर कार्यपालन यंत्री बनने के योग्य नहीं है, तो उसे उसी पद का करंट चार्ज किस नियम, किस प्रशासनिक आवश्यकता और किस सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से दिया गया। ऐसे अधिकारी उसी पद के प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय निर्णय ले रहे हैं, जबकि नियमित पदोन्नति के लिए उन्हें पात्र नहीं माना गया। समकक्ष अधिकारियों में पनप रही कुंठा संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से मण्डल संवर्ग के वरिष्ठ एवं पात्र अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अनेक अधिकारी 35 से 38 वर्षों की सेवा पूर्ण करने के बाद भी अपनी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि उनके लिए सुरक्षित पदों पर अन्य संवर्ग के अधिकारियों से करंट चार्ज के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है। इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था से समकक्ष अधिकारियों में कुंठा का भाव पनप रहा है। कार्यपालन यंत्री के करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा की मांग मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ भोपाल के प्रभारी अध्यक्ष केके आर्य ने राज्य शासन एवं विद्युत कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि बोर्ड संवर्ग के लिए सुरक्षित कार्यपालन यंत्री पदों पर दिए गए सभी करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। संबंधित आदेशों को सार्वजनिक किया जाए। पात्र अधिकारियों को ही उक्त पदों का दायित्व सौंपा जाए। recent visitors 33

MP News: एनालॉग पनीर पर सख्ती, कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT नहीं बनेगी बाधा

MP News: Crackdown on analogue paneer; CPCT will not be a hurdle in employee promotions. भोपाल। मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा को बाधा नहीं बनने देने के संबंध में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। एनालॉग पनीर पर सरकार सख्त मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में एनालॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी रोक के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को ऐसे उत्पादों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार का कहना है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। मिलावट के खिलाफ होगी निगरानी एनालॉग पनीर से जुड़े मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाजार में ऐसे उत्पादों की पहचान, जांच और नियमानुसार कार्रवाई को लेकर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार के इस कदम से मिलावटी या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले खाद्य उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। कर्मचारियों को पदोन्नति में बड़ी राहत के संकेत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकारी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को लेकर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि CPCT परीक्षा के कारण किसी पात्र कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित न किया जाए और न ही किसी कर्मचारी को रिवर्ट किया जाए।इस संबंध में नियमों और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद CPCT की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, अंतिम राहत सरकार द्वारा लिए जाने वाले औपचारिक निर्णय और लागू किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगी। CM के दो बड़े निर्देश, दो अलग-अलग वर्गों को राहत की उम्मीद मुख्यमंत्री के निर्देशों का असर एक ओर खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।एक तरफ मिलावट पर शिकंजा, दूसरी तरफ कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता आसान करने की तैयारी।अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन निर्देशों को लागू करने के लिए संबंधित विभाग कितनी जल्दी ठोस आदेश जारी करते हैं। मुख्य सवाल एनालॉग पनीर पर रोक के लिए सरकार की कार्रवाई कितनी सख्त होगी? और CPCT को लेकर कर्मचारियों को वास्तविक राहत कब मिलेगी? recent visitors 33

जीएडी के नियमों को ठेंगा बता पीएचई विभाग, पदोन्नति देने ठोकी अपनी शर्तें, अधिकारों से वंचित कर्मचारी

Flouting GAD rules, the PHE Department has imposed its own conditions for granting promotions, leaving employees deprived of their rights. भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों एवं कर्मचारी हितैषी मंशा अनुरूप जीएडी के नियमों के मुताबिक सभी विभागों में पदोन्नति का बड़ा काम चल रहा है। लेकिन कुछ विभाग उदासीनता भी दिखा रहे हैं। ऐसा ही कुछ पीएचई विभाग में चल रहा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मनमानी से सैकड़ों कर्मचारी पदोन्नति से बाहर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।वैसे तो जीएडी ने सभी विभागों को विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। मध्यप्रदेश शासन के अनेक विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी पदों पर पदोन्नत कर दिया गया है। कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता पूर्ण करने के लिए 5 वर्ष का समय भी दिया गया है। जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD), स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, उद्योग विभाग, जनसंपर्क विभाग तथा संभागीय उपायुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग सहित कई विभागों में जीएडी नियमों के तहत कर्मचारियों की पदोन्नति का कार्य बड़ी तेजी से चल रहा है। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति अब तक लंबित है। पीएचई विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जब समान शासन, समान सेवा नियम और समान परिस्थितियों में अन्य विभागों के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल चुका है, तब पीएचई विभाग के कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और भेदभाव की भावना उत्पन्न हो रही है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी शासन की मंशा के अनुरूप तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं, ताकि पात्र कर्मचारियों को शीघ्र पदोन्नति प्रदान की जा सके तथा कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी की पूर्ति के लिए अन्य विभागों की तरह पाँच वर्ष का अवसर उपलब्ध कराया जाए। कर्मचारियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी समान न्याय मिलेगा और पूरे प्रदेश में एक समान पदोन्नति नीति लागू होगी। recent visitors 30

डेयरी की आड़ में चल रहा था अवैध बूचड़खाना, पुलिस ने किया खुलासा; बेटे-दामाद व मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Illegal slaughterhouse operating under the guise of a dairy exposed by police; son, son-in-law, and main accused arrested. भोपाल । निशातपुरा थाना क्षेत्र के कमला नगर में मिला संदिग्ध मांस गोवंश का ही निकला है। हालांकि अभी तक एफएसएल की रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन पुलिस ने एक गाय का धड़ बरामद करने के बाद यह मानकर चल रही है कि यह मामला गोकशी का ही है। पुलिस ने डेयरी की आड़ में अवैध बूचडख़ाना संचालित करने वाले मुख्य आरोपी अजीज और बेअे आसिफ तथा दामाद जुबैर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से सड़कों पर घूमने वाली आवारा गायों और गौवंश चुराकर लाते और लोगों को बताते की वह डेयरी का संचालन कर रहे हैं। हालांकि जहां कथित तौर पर डेयरी का संचालन आरोपी बता रहे हैं, वह जमीन भी शासकीय बताई जा रही है। जिला प्रशासन जमीन की भी जांच शुरू कर दिया है। अवैध अतिक्रमण कर कथित डेयरी के नाम पर बूचडख़ाना संचालित किए जाने का खुलासा होने के बाद मामला सुर्खियों में है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी देर रात बजरंगदल के डेढ़ दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने एक ऑटो से ले जाए जा रहे मांस को पकड़कर हंगामा कर गोकशी का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को रिगफ्तार कर लिया है। गौपाल रखे हुए थे नजरपुलिस सूत्रों के अनुसार गोकशी के बाद गायों की हड्डियों और सिर को पास की बंजर जमीन और खेतों में गड्ढे कर मिट्टी के अंदर गाड़ देते थे, ताकि पड़ोसियों को गोकशी का पता नहीं चले। कमला नगर क्षेत्र में रहने वाले सत्येंद्र ने दावा किया कि पिछले तीन महीने में उनकी चार गायों चोरी हो चुकी हैं। मेरे साथ इस कॉलोनी और अन्य कॉलोनियों की कई गायों और गोवंश चोरी हो चुके हैं। इसके बाद हम लोग बजरंगदल के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर गायों की निगरानी करते थे। जानें कैसे हुआ खुलासा?तभी पता चला कि अजीज और उससे जुड़े लड़के सड़कों पर घूमने वाली गायों को चुराते हैं। इसके बाद निगरानी की गई तो पता चला कि गायों तो चुराकर लाते हैं, लेकिन इनके यहां ज्यादा दिन तक गायें रहती रहीं। ऐसे में खुलासा हुआ कि जब यह व्यक्ति गायों को बेचता नहीं तो क्या करता है? इसके बाद गोकशी का खुलासा हुआ। कई दिनों से कॉलोनी के लड़के निगरानी कर रहे थे, तब पता चला कि यह गायों को काटकर मांस बेचने का कार्य कर रहा है। इसके बाद मांस को पकड़ा गया है। पुलिस अब यह भी पता कर रही है कि गोवंश की मांस की सप्लाई कहां की जा रही थी। संदिग्ध मांस की एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद अगर गाय का मांस की रिपोर्ट आती है तौर कुछ और लोगों की गिरफ्तारी संभव है। recent visitors 40