रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और आत्मनिर्भरता पर फोकस—धामी ने बजट को बताया गेमचेंजर

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय बजट 2026-27 की सराहना की है। उन्‍होंने कहा, यह बजट देश और राज्यों के विकास को नई दिशा देने के साथ ही सभी वर्गों के लिए अवसरों को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में आर्थिक विकास तेज करने, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और सबका साथ सबका विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को विकासोन्मुखी और समावेशी बजट के लिए बधाई देते हुए कहा कि किसानों, महिलाओं, वंचितों, युवाओं, छोटे उद्यमियों और पिछड़े वर्ग पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, उद्योग और अवसंरचना के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। ये पूरे देश के साथ उत्तराखंड के लिए भी लाभकारी साबित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएंगे। बजट में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए पर्यावरण-अनुकूल माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने की योजना है। उत्तराखंड के परिपेक्ष में बजट ने पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया है, जो विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों, पशुपालन, उच्च मूल्य कृषि, पर्यटन और एमएसएमई के लिए किए गए बजट प्रावधान राज्य की ग्रामीण और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और बायोफार्मा क्षेत्र में किए गए निवेश से राज्य और देश दोनों का दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह बजट सबका साथ, सबका विकास और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बजट में घोषित योजनाओं और प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ पूरी तरह सहयोग करेगी। यह बजट न केवल देश की आर्थिक ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी समान रूप से विकास के अवसर देगा। recent visitors 29

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डेली कॉलेज इंदौर में कार्यक्रम को किया संबोधित

शासकीय चिकित्सालयों में बनाए जाएंगे गर्भ संस्कार कक्ष चिकित्सा विश्वविद्यालयों में की जाएगी गर्भ संस्कार के अध्ययन- अध्यापन की व्यवस्था पुस्तक "गर्भ संस्कार" का किया विमोचन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान कभी अलग-अलग नहीं रहे। सनातन व्यवस्था के संस्कार केवल धार्मिक व्यवस्था नहीं बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और मूल्यवान बनाने की वैज्ञानिक पद्धति है। गर्भ में पल रहे शिशु को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संस्कारित करना ही गर्भ संस्कार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में बनने वाले शासकीय चिकित्सालयों के भवनों में गर्भ संस्कार कक्ष बनाए जाएंगे। प्रदेश के चिकित्सा विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े महाविद्यालयों में गर्भ संस्कार के अध्ययन अध्यापन की व्यवस्था की जाएगी, शीघ्र ही इससे संबंधित गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के डेली कॉलेज में गर्भ संस्कार पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अंग वस्त्रम तथा श्रीफल भेंट कर उनका अभिवादन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुस्तक "गर्भ संस्कार" का विमोचन किया। पुस्तक के लेखक डॉ. अनिल गर्ग और डॉ. सीमा गर्ग हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जन समुदाय को गर्भ संस्कार का प्रचार- प्रसार करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने का संकल्प भी दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मातृत्व केवल जैविक प्रक्रिया नहीं है, गर्भ शरीर निर्माण के साथ संस्कार की पहली पाठशाला भी है। आधुनिक विज्ञान ने सिद्ध किया है कि 5-6 महीने से ही बच्चे पर माँ की भावनाओं और बाह्य वातावरण का प्रभाव पढ़ने लगता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाभारत में अभिमन्यु तथा अन्य पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मानसिक और भावनात्मक विकास की गहरी समझ रखते थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयुर्वेद की सामर्थ्य सर्वविदित है। कोविड काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कोविड से बचाव के लिए सभी चिकित्सा पद्धतियों ने आयुर्वेद की प्रक्रियाओं अपनाया। आयुर्वेद में गर्भ संस्कार के महत्व को स्वीकारा गया है। वर्तमान में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी गर्भ संस्कार के महत्व को स्वीकार कर रहा है। अखिल भारतीय कार्यकारणी सदस्य श्री भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत का चिंतन विश्व को संचालित करने का नहीं, बल्कि मार्गदर्शन करने का है। भारत “सुपर राष्ट्र” बनेगा, जो जीवन के विविध क्षेत्रों में दुनिया को सही दिशा दिखाएगा। उन्होंने कहा कि सृष्टि के चक्र में भारत ने उत्थान और पतन दोनों देखे हैं, लेकिन उसकी आत्मिक शक्ति और बीज रूप में सामर्थ्य इतनी मजबूत है कि वह फिर उठ खड़ा होने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ मनुष्य का निर्माण केवल शिक्षा या भौतिक संपदा से नहीं, बल्कि सुशिक्षा और सुसंस्कार से ही संभव है। मानव संपदा के बिना राष्ट्र का उत्थान संभव नहीं। श्री जोशी ने कहा कि पश्चिमी दृष्टि मनुष्य को मशीन मानती है, जबकि भारतीय चिंतन मनुष्य को पूर्ण विकसित मनुष्य बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि जब शस्त्र अयोग्य हाथों में चले जाते हैं तो दुष्परिणाम होते हैं, इसलिए शक्ति के साथ संस्कार अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर पुण्य सलिला देवी अहिल्याबाई की श्रेष्ठ परंपरा वाली नगरी है। इंदौर से इस आयोजन का होना प्रतीकात्मक है, क्योंकि विचारों का प्रस्फुटन प्रायः मध्य से होता है। श्री जोशी ने युवाओं और दंपत्तियों से आग्रह किया कि शास्त्रों में निहित मूल्यों को केवल प्रस्तुति तक सीमित न रखें, बल्कि आचरण में उतारें। इसके लिए जनजागरण और व्यापक आंदोलन आवश्यक है, ताकि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी व्यक्ति सही मार्ग पर चल सके और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बने। उन्होंने कार्यक्रम के शोधकर्ताओं, प्रयोगकर्ताओं और आयोजकों से कहा कि इस पहल की सार्थकता तभी है जब समाज इसे गंभीरता से अपनाए और अनुभवों को साझा कर आगे बढ़े। कार्यक्रम को डॉ. अनिल कुमार गर्ग और डॉ. हितेश भाई जानी ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्री महेन्द्र हार्डिया और श्री गोलू शुक्ला, जनप्रतिनिधि, आरोग्य भारती के श्री अशोक वार्ष्णेय, श्री योगेंद्र महंत, श्री गुणवंत कोठारी, श्री विनोद अग्रवाल, श्री विक्रम सिंह पवार, डॉ. हितेश भाई जानी, श्री राधेश्याम शर्मा गुरु जी और डॉ. अनिल कुमार गर्ग सहित आध्यात्मिक-धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।   recent visitors 23

UGC के नए नियमों पर सवर्ण समाज का विरोध, न्यायधानी में बंद का नहीं दिखा असर

बिलासपुर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज देशभर में सवर्ण समाज ने बंद का आह्वान किया है. हालांकि, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में बंद बेअसर नजर आया और मुख्य बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे. लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है. सामान्य वर्ग के समाज प्रतिनिधियों, शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों ने UGC के नए नियमों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि ये शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के हितों के खिलाफ है. सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी की जा रही है. यूजीसी कानून विरोध आंदोलन के संयोजक डॉ प्रदीप शुक्ला ने कहा कि जब तक इन नियमों को रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. आज शहर में बड़ी रैली निकालने और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी है. फिलहाल, पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे. जानिए क्यों हो रहा UGC के नियमों का विरोध बता दें, UGC ने यह नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी की कथित जातिगत भेदभाव के कारण हुए हत्या मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए थे, ताकि कैंपस में जातिगत और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म किया जा सके. लेकिन नियम लागू होते ही देशभर में सवर्ण समाज ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. विवाद की मुख्य वजहें और विरोधियों के तर्क सामान्य वर्ग (S-4 जैसे संगठन) और कई शिक्षक समूहों द्वारा विरोध के पीछे निम्नलिखित तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं:     OBC को शामिल करना: विरोधियों का तर्क है कि SC-ST के साथ अब OBC को भी इन कड़े सुरक्षा प्रावधानों में शामिल करना नियमों के दुरुपयोग की संभावना को बढ़ाता है.     झूठे आरोपों का डर: सवर्ण संगठनों का मानना है कि ‘इक्विटी स्क्वाड’ और ‘समता दूत’ जैसी व्यवस्थाओं से निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को आपसी रंजिश के चलते झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है.     असमान सुरक्षा: तर्क दिया जा रहा है कि नियम केवल आरक्षित वर्गों की सुरक्षा की बात करते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भेदभाव से सुरक्षा का कोई स्पष्ट ढांचा इसमें नहीं दिखता. सुप्रीम कोर्ट ने नए नियम पर लगाई रोक चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इन नियमों पर रोक लगाते हुए कहा कि ‘भेदभाव’ की परिभाषा वर्तमान रेगुलेशन में बहुत धुंधली है.नियमों को और अधिक समावेशी बनाने की जरूरत है ताकि यह देखा जा सके कि ये ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन तो नहीं कर रहे. कोर्ट ने कहा कि जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं आता, 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही प्रभावी रहेंगे. recent visitors 30

राज्यपाल पटेल ने नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का लोकार्पण किया

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भक्तिभाव और विधि-विधान के साथ नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का शुभ लोकार्पण किया। यह पावन समारोह रविवार को श्रद्धा, मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच संपन्न हुआ। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ हुए समारोह में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह भी मौजूद थे। राज्यपाल श्री  पटेल का मंदिर परिसर आगमन पर पारंपरिक सनातन रीति से स्वागत किया गया। उन्होंने कलश के साथ मंदिर में मंगल प्रवेश कर विधि-विधान से कलश एवं ध्वज का पूजन किया। उन्होंने भगवान के श्री चरणों में पूजा-अर्चना कर प्रदेश के विकास के लिए प्रार्थना की। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण के मध्य माँ सरस्वती की पावन प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा और भक्तिभाव से दीप प्रज्ज्वलित किया और प्रदेशवासियों के मंगल की कामना की। उन्होंने प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। राज्यपाल ने मंदिर में हुए नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों का अवलोकन किया। इसे आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। राज्यपाल श्री पटेल को बताया गया कि समग्र विकास कार्य मंदिर परिसर को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लक्ष्य के साथ किया गया है। नवीनीकरण की संपूर्ण परियोजना 84 लाख 13 हजार 100 रुपये की लागत से संपन्न हुई है। इस कार्य में करीब 76 लाख 96 हजार रुपये के सिविल निर्माण तथा लगभग 7 लाख 16 हजार रुपये के विद्युत संबंधी कार्य कराए गए है। मंदिर परिसर में लगभग 2,700 वर्गफुट क्षेत्रफल का विशाल हॉल, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु 1,120 वर्गफुट क्षेत्र में भोजनशाला एवं भंडारा कक्ष और 560 वर्गफुट क्षेत्र में सुसज्जित रसोईघर भी तैयार किया गया है। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव, मुख्य अभियंता लोक निर्माण श्री संजय मस्के, अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण श्री हरी शंकर जयसवाल, नियंत्रक हाऊसहोल्ड लोकभवन श्रीमती शिल्पी दिवाकर, लोक निर्माण विभाग की सिविल, इलेक्ट्रिकल शाखा और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि सहित लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।   recent visitors 28

प्रो रेसलिंग लीग 2026: विदेशी रेसलर्स से मुकाबला खेल की समझ करता है मजबूत, मनीषा भानवाला ने बताए फायदे

नोएडा महाराष्ट्र केसरी की मनीषा भानवाला को दिल्ली दंगल वॉरियर्स के खिलाफ प्रो रेसलिंग लीग 2026 सेमीफाइनल के दौरान 57 किग्रा महिला कैटेगरी में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए फाइटर ऑफ द मैच चुना गया। अपनी टीम की हार के बावजूद, 28 साल की मनीषा ने कहा कि लीग बहुत कीमती है। यह एक्सपोजर और सीखने के मौके देती है। इससे भारतीय पहलवानों को एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे बड़े वैश्विक टूर्नामेंट की तैयारी करने में मदद मिलेगी। मनीषा ने एशियन गेम्स और ओलंपिक्स जैसे ग्लोबल इवेंट्स की तैयारी में प्रो रेसलिंग लीग की अहमियत पर आईएएनएस से कहा, "जब भी इंडिया में कोई मुकाबला होता है, तो हम सबके खिलाफ खेलते हैं, और इससे बहुत अच्छा अनुभव मिलता है। हम विदेशी खिलाड़ियों से भी बहुत कुछ सीखते हैं क्योंकि जब हम विदेश जाते हैं, तो वे ही हमारे सामने विपक्षी होते हैं। उनके साथ अभ्यास करने से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि क्या करना है और कैसे करना है।" उन्होंने कहा, "इस लीग में खेलने से हमें अपनी गलतियां पहचानने में मदद मिलती है और हमें यह आइडिया मिलता है कि हमें किन चीजों पर काम करने की जरूरत है। यह लीग बहुत फायदेमंद है।" अनुभवी और शीर्ष विदेशी पहलवानों के साथ रहने और उनसे सीखने के सवाल पर भानवाला ने कहा, "ऐसी कई चीजें हैं जो हम नहीं जानते, और हम उनसे सीखते हैं। हम समझते हैं कि किसके लिए क्या सबसे अच्छा काम करता है, इसलिए उनके साथ रहना बहुत फायदेमंद है। सब लोग साथ रहते हैं और साथ में खाना भी खाते हैं, जो अच्छा लगता है।" मैच के परिणाम के बारे में उन्होंने कहा कि शायद हम अनलकी थे। दिल्ली दंगल वॉरियर्स नोएडा इंडोर स्टेडियम में एक करीबी मुकाबले वाले सेमीफाइनल में महाराष्ट्र केसरी को 5-4 से हराकर फाइनल में पहुंच गई। अंजलि ने 62 किग्रा महिलाओं के मुकाबले में 12-4 से जीत हासिल करके दिल्ली को शुरुआती बढ़त दिलाई, लेकिन महाराष्ट्र ने जल्दी ही वापसी की और मनीषा भानवाला ने 57 किग्रा कैटेगरी में 15-0 की टेक्निकल सुपीरियोरिटी से शानदार जीत हासिल करके शनिवार को मुकाबला बराबर कर दिया। recent visitors 26

क्रिकेट के रंग में रंगा रायपुर प्रेस क्लब, इंटर प्रेस प्रतियोगिता में संपादकों–पूर्व पदाधिकारियों का रोमांचक मैच, डिप्टी सीएम साव भी मैदान में

रायपुर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के नेताजी सुभाष स्टेडियम में रायपुर प्रेस क्लब द्वारा स्वर्गीय कुलदीप निगम की स्मृति में आयोजित खेल मड़ई के अंतर्गत इंटर प्रेस क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन किया। रायपुर प्रेस क्लब के इस आयोजन का उद्देश्य पत्रकार साथियों को व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर खेलों से जोड़ना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। प्रतियोगिता में पत्रकार जगत की विभिन्न टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले खेले जाएंगे। उद्घाटन अवसर पर पहला मैच संपादकों और प्रेस क्लब के पूर्व पदाधिकारियों की टीमों के बीच खेला गया, जिसमें दोनों ही टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया। उद्घाटन के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव स्वयं मैदान में उतरे और बल्ला थामकर क्रिकेट खेलते नजर आए। डिप्टी सीएम का यह अंदाज देखकर आयोजन का उत्साह और भी बढ़ गया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब द्वारा खेल मड़ई का आयोजन एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल है। खेलों का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है और अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से खेलना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पत्रकार साथियों की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद खेलों के प्रति उनका उत्साह काबिले-तारीफ है। उपमुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब के सभी पदाधिकारियों, आयोजकों और प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी टीमों को शुभकामनाएं दीं। recent visitors 35

कल से शुरू हो रहा है साल का अंतिम महीना: सुख-समृद्धि चाहते हैं तो इन भूलों से बचें

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 2 फरवरी 2026 से साल के अंतिम महीने यानी फाल्गुन माह की शुरुआत हो रही है. यह महीना न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वसंत के आगमन के लिए जाना जाता है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है. फाल्गुन का समापन 3 मार्च 2026 को होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में भगवान विष्णु, शिव जी और श्री कृष्ण की उपासना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. फाल्गुन के महीने में भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत ही कल्याणकारी होता है, क्योंकि इसी माह में शिव-शक्ति के मिलन का उत्सव महाशिवरात्रि मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस माह का महत्व, पूजा विधि और वे गलतियां जिनसे आपको बचना चाहिए. फाल्गुन माह का विशेष महत्व फाल्गुन माह को आनंद और उल्लास का महीना कहा जाता है. इसी महीने में महाशिवरात्रि और होली जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं. चंद्रमा का जन्म भी इसी माह में माना जाता है, इसलिए मानसिक शांति के लिए इस महीने में चंद्र देव की पूजा फलदायी होती है. भूलकर भी न करें ये गलतियां! फाल्गुन के महीने में कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है, ताकि घर की सुख-शांति बनी रहे. देर तक न सोएं: इस महीने से मौसम बदलने लगता है. सुबह देर तक सोना स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों के लिए हानिकारक माना जाता है. नशीले पदार्थों से परहेज: फाल्गुन में तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) और नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. यह भक्ति का महीना है. साफ-सफाई का अभाव: इस महीने में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. गंदे कपड़े पहनना या घर में गंदगी रखना दरिद्रता को आमंत्रण देता है. क्रोध और वाद-विवाद: यह प्रेम का महीना है. किसी का अपमान न करें और न ही घर में झगड़ा होने दें, वरना लक्ष्मी जी रुष्ट हो सकती हैं. शीतल जल का त्याग न करें: स्वास्थ्य की दृष्टि से इस महीने से ठंडे पानी से स्नान करना और अधिक पानी पीना शुरू कर देना चाहिए. फाल्गुन माह की पूजा विधि इस पवित्र माह में अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आप इस विधि से पूजा कर सकते हैं. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. यदि संभव हो तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें. सूर्य को अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, रोली और फूल डालकर सूर्य देव को जल अर्पित करें. श्री कृष्ण की उपासना: फाल्गुन में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप या राधा-कृष्ण की पूजा करें. उन्हें अबीर-गुलाल और पीले फूल अर्पित करें. दान पुण्य: इस महीने में अपनी क्षमता के अनुसार अनाज, कपड़े या शुद्ध घी का दान जरूरतमंदों को करें. फाल्गुन में क्या करें?     रंगों का प्रयोग: भगवान को प्रतिदिन गुलाल चढ़ाएं और स्वयं भी तिलक लगाएं.     मंत्र जाप: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का नियमित जाप करें.   recent visitors 34